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॥पत्नी पचासा॥मेरी पुस्तक “दहेज मे साली”से

जैसे हनुमान चालीसा है, वैराग्य शतक है वैसे ही यह पत्नी पचासा है।इसका नित्य पाठ करने से अलौकिक सुख की प्राप्ति होती है और दाम्पत्य जीवन सुखी होता है।

     जय जय हे पति कल्यानी
     तेरी इस जग मे ना सानी।

     पति के लिये तो तू है कामिनी
     पति पर चमके जैसे दामिनी।

     एक हाथ में बेलन साजे
     एक हाथ से चिमटा भांजे।

     बड़े बड़े नाखून तुम्हारे
     दंत नुकीले नयन करारे।

     रौद्र रूप जब तू दिखलावे
     पति को छठी का दूध याद आवे।

     दोनो प्रहर जब करो श्रीन्गार 
     पड़ोसियों को होय बुखार।

     गले मे स्वर्ण सुशोभित माला
     मोटे होठ लिपस्टिक काला।

     नये नये नित फैसन करती
     सास ससुर से कभी न डरती।।

     पति का भाई साग बराबर।
     अपना भाई हो सर्वोपरि॥

     पति की सतत करे निगरानी ।
     पति को समझे वह अज्ञानी॥

     खुद को समझे पति से स्यानी
     करती वही जो मन मे ठानी।।

     पति ने गर कर दी नादानी
     समझो उसकी शामत आनी।।

     पति को पतला दाल खिलाती
     खुद खा जाती दाल मखानी।।

     अपना सिर ऊँचा करने को
      पति का धन दे बनती दानी।।    

     पति को दूध दही गर देवे
     उसके बदले सब कुछ लेवे।।

     पति से खाना भी बनवाना
     अच्छा खाना खुद खा जाना।।

     पति को बहुविधी कष्ट वो देवे
     खुद खा जाये मिठाई मेवे।।

     पति को पाकेट नित्य टटोले
     पति की क्या हिम्मत जो बोले ॥

     उसका रहता ऐसा जज्बा।
     तनखा पर झट कर ले कब्जा॥

     पति जो मागें पचास रुपैया।
     कहती हंस क्या करोगे भैया॥

     खाली हाथ मैके से आवे।
     पति का धन मैके पहुंचावे॥

     तलाक की दे हरदम धमकी।
     पति को करार करा दे सनकी॥

     पति को कहती दुष्ट निशाचर।
     पति कहता हे देवी दया कर॥

     पति रात को देर से आवे।
     तो उसकी शामत आ जावे॥

     रोष से तब छुटकारा पावे
     जब पत्नी का पैर दबावे॥

     पति की करती हुक्म उदूली
      गाजर मांगे तो देती मूली॥

     पत्नी से है को सुख पावा
     पत्नी है बस एक छलावा॥

     पत्नी यदि पहले मर जावे
     पति को स्वर्ग में जल्द बुलावे॥

     भुत पिशाच निकट नही आवे
     पत्नी को गर साथ सुलावे॥

      पति का राज उगलवा लेती
     अपना राज न हरगिज देती॥

     मैके की नित करे बड़ाई
     कहती ऊंचे कुल से आई॥

     बडी मान मर्यादा वाले
     उसके पापा उसके भाई॥

     जब वह अपने मैके जाती
     सहेलियों पर रोब जमाती॥

     कहती उसका पति धनवान
     उसकी है समाज में मान॥
     इतना दरिया दिल उसका पति
     साल में लाखो देता दान॥

     सिगरेट को ना हाथ लगाता
     ना खाता वो खैनी पान॥
     लाखों मे वह रोज खेलता
    फिर भी उसे नही अभिमान॥

     पति का करना हो जब दोहन
     उसे खिलाती हलवा सोहन॥

     पत्नी लडे गर कोई चुनाव
     उसका बढ जाता है भाव॥

     पत्नी गर चुनाव जीत ले
     करती रहती वो देशाटन॥
     कभी घुमती झुमरीतलैया
     कभी घुमती देवीपाटन॥

     करे फोन से वार्ता लम्बी
     अन्जाना हो या संबंधी॥

     वाकयुद्ध मे तुम अति माहिर
     कटु सत्य करता जगजाहिर॥

     अगर गलत नम्बर मिल जावे
     तो भी वो घंटों बतियावे ॥
     टेलीफोन का बिल जब आवे
     पति की आंखें चुधिंया जावे॥

     राज की बात करे जगजाहिर
     चुगली करने मे अति माहिर॥

     सास ससुर या ननद भौजाई
     भूले से गर उसे सताये॥
     तो दहेज की नालीश करके
     अपनी उन्हें औकात बतावे॥

     इसीलिए तुम इस कलियुग मे
     पत्नी से तकरार न करना।
     पत्नी भले यार भी कर ले
     तुम न किसी चक्कर मे पड़ना।
     दूजी पत्नी मिलनी मुश्किल
     सो पत्नी से रार न करना॥

     लक्ष्मी दुर्गा और सरस्वती जी
     देवी तो हैं बस मंदिर की
     लेकिन पत्नी होती है देवी
     केवल घर के अन्दर की॥

युग बदला अब पत्नी चलती आगे आगे
पति देव चले पत्नी के पीछे भागे भागे॥

     पत्नी आफिस से डयूटी करके
     देर रात घर आती है
     पति थके हुए सोये रहते
     सोये से उन्हें जगाती है॥

     खाना गरमा वे लाते हैं
     व दस्तरखान बिछाते हैं।
     पानी लाते पंखा झलते
     और फिल्मी गाना गाते हैं॥

     तू ही दुर्गा तू ही काली।
     तू ही माया तू ही भवानी।
     करती हो तुम वही सदा
     जो अपने मन मे तुमने ठानी॥

     पति ने गर कर दी नादानी।
     याद करा दे उसकी नानी।
     रिस्ते बहुत बनाये प्रभु ने
     पर ना इस रिश्ते की सानी॥

     त्रिया चरित्र समग्र रुप से
     पत्नी उपर ही है फबता।
     भाग्य पुरुष का सब जाने है
     पत्नी के बल से है चलता॥

     जो नित पढे यह पत्नी पचासा।
     होय न फिर पत्नी का दासा॥

लड़कों के बारें में दुनिया की सबसे बड़ी गलतफहमी
“शादी कर दो सुधर जाएगा”
😂😂😂😂😂

     जो शत बार पाठ करे सोई।
     अगले जन्म पतिदेव न होई॥
             ॥समाप्त॥-
         जगदीश खेतान
               मौलिक
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हर ईद पर पजामा सही होता है। 😀😀

एक आदमी ने डांटा जो दर्ज़ी की ज़ात को
कुरता👕 पजामा👖 आ ही गया चांद रात को🌙

देखा पहन के जब उसने कुरता👕 तो ठीक था
पजामा👖 लेकिन लगा उन्हें तीन इंच कुछ बड़ा

बेगम👵🏼 से बोले आज मेरा काम ये करो
तीन इंच काट✂️ कर इसे तुम ठीक से सियो

बेगम ये बोली देखिये फुरसत कहा मुझे
कल ईद है और आज बड़ा काम है सर पे

बेटी 🙍🏻‍♀️जो बड़ी सामने आई उसे कहा
मेहंदी💅 का मगर उस ने बहाना बना दिया

यू चार बेटियो👯‍♀️👭 से भी जब बात न बनी,
करते भी क्या, किसी से भी उम्मीद न रही

खुद ही पजामा काट✂️ के फिर सी दिया उसे,
और फिर जनाब रात को बे फिक्र सो गए

बेगम👵🏼 बेचारी काम से फ़ारिग हुई ज़रा,
पजामा👖 की सिलाई का तब ध्यान आगया

नाराज हो न जाये मिया कोई बात पर,
पजामा ठीक कर दिया नीचे से काट कर

धोया जो बड़ी बेटी ने मेहंदी भरे वो हाथ,
पजामा छोटा कर दिया फिर खुसदिली के साथ

जिस जिस को जब भी वक़्त मिला सब ने ये किया,
पजामा छोटा कर के वही सब ने रख दिया

यू रात भर सभी थे पाजामे पे मेहरबान,
कहता भी क्या किसी से वो मासूमो बेज़ुबान

पाजामे की थी सुबह को दुर्गत बनी हुई
कुर्ते पे एक सफेद थी चड्डी रखी हुई!

😜😜😜😜

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સ્વીટ હાર્ટ ! ઈંગ્લીશમાં તું બડબડ ન કર,
હાય ને હાય હાય મહીં ગરબડ ન કર.

બિલ્લીની માફક મને નડનડ ન કર,
શ્વાન સમજીને મને હડહડ ન કર.

હાસ્ય તારું ભયજનક લાગે મને,
મેઘલી રાતે કદી ખડખડ ન કર.

પ્રેમની ટપલીને ટપલી રાખ તું,
વ્યાપ વિસ્તારીને તું થપ્પડ ન કર.

કાલે મારો પગ છૂંદ્યો તેં હીલ વડે,
એ જગા પર તું હવે અડઅડ ન કર.

ધૂળ જેવી જિંદગી છે આપણી,
એમાં રેડી આંસુડાં કીચડ ન કર.

-રઈશ મનીઆર

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⭕પતિ ને ભૂલશો નહીં⭕

ભૂલો ભલે શોપિંગ બધું,
પતિ પમેશ્વર ને ભૂલશો નહિ
ચૂકવ્યા અગણિત બીલ તેણે,
એ કદી વિસરશો નહિ !
👞👡👡👠👟
ચંપલ ધસ્યા બાટા તણા,
ત્યારે પામ્યા તમ થોબડું
એ ભોળા ભાયડાનાં કાળજાં,
કઠણ બની છુંદશો નહિ !
👜👜👝
કાઢી પાકીટથી રૂપિયા,
હાથમાં દઈ ઉજળા કર્યા
પાર્લરનાં પૈસા દેનાર સામે,
ઝેર જરા ઉગળશો નહિ !
🙅🙅💑💑💑💑
ખોટા લડાવ્યાં લાડ તમને,
કોડ સાળીઓના પુરા કર્યા
એ લાડ લડાવનાર લાડજીના,
ઉપકારને ભૂલશો નહિ !
👴👵👴👵👴👵
લાખો રૂપાળા હો ભલે,
સાસરીયા તમારાથી ના ઠર્યા
એ સંસ્કાર બધા તમારા રાખ છે,
એ માનવું ભૂલશો નહિ !
👦👦👦👦👦👦
પતિ પરમેશ્વરથી સેવા ચાહો,
પત્ની બની સેવા કરો,
એ ગીવ એન્ડ ટેઈક ની,
ભાવના ભૂલશો નહિ !
🛏🛏🛏🛌🛌🛌
ભોંય પર કરી પથારીને,
પલંગે સુવડાવ્યા આપને,
એ બાયડી ધેલા ધેલાજીને,
ભૂલીને ભીંજવશો નહિ !
🌺🌻🌹🌼🌸🌾
પુષ્પો બિછાવ્યાં પ્રેમથી,
જેણે તમારા રાહ પર
એ રાહબરના રાહ પર,
કંટક કદી બનશો નહિ !
💰💰💰💰💰💰💰
ધન ખરચતાં મળશે બધું,
પતિનો પ્રેમ મળશે નહિ
કાળજા ભીના એ કંથની,
ચાહના ચરણની ભૂલશો નહિ !

🙏દરેક ની પત્નીઓ ને સમર્પિત🙏

Posted in પતિ પત્ની ના ૧૦૦૦ જોક્સ, હાસ્ય કવિતા

પતિનું પત્ની વિશેનું નિવેદન :

દેહ કાબૂમાં કરી લો,સ્થૂળ લાગો છો સનમ,
સર્વબાજુ થી હવે વર્તુળ લાગો છો સનમ .

લગ્નટાણે વાંસ જેવી પાતળી કાયા હતી;
ને હવે જાણે ખલીનું કુળ લાગો છો સનમ .

ચાર દસકે વાયરો ગોઠણ કને ફૂંકાય છે;
ચાલવામાં એટલે વ્યાકુળ લાગો છો સનમ.

દેહનું પ્રકાંડ વધતું જાય છે ચારે તરફ;
ઝાડનાં ઊંડાં ગયેલાં મૂળ લાગો છો સનમ

ચાલવા કે મોડવાના થૈ ગયા કાયર તમે;
ને વળી આજે સ્વભાવે શૂળ લાગો છો સનમ.

હવે, પત્ની જો પતિ વિશે લખે તો આમ લખે:👩🏻‍⚖

દેહનાં પરિમાણ સૌ અપસેટ રાખો છો સનમ
માટલું શરમાય એવું પેટ રાખો છો સનમ

જો પથારીમાં પડો, કુંભકર્ણને હો કોમ્પલેક્સ
ને વળી કસરતથી આભડછેટ રાખો છો સનમ.

વાળ માથેથી ગયા એ કાન પર વાવ્યા તમે
નાકમાં યે એનો જથ્થો ગ્રેટ રાખો છો સનમ

રામ જો મનમાં વસે, તો રૂમ કંઈ સરખો કરો
બોસની ફાઈલો બધી તો સેટ રાખો છો સનમ.

ફાંદ પાછી બે બટન વચ્ચેથી પણ ડોકાય છે
ને ઉપરથી બમ ઉપર વોલેટ રાખો છો સનમ.
🌹

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पता नहीं किसकी रचना है लेकिन बड़े ही तीखे व्यंग कसे हैं । ज़बरदस्त !!!

एकदम फ्रेश एवं समसामयिक….😊😊👍👍

तुम मायावती सी स्वप्नसुंदरी,
मै राहुल सा समझदार प्रिये।
कर्नाटक के गठबंधन सा,
हैं तेरा मेरा प्यार प्रिये।।👏👏👏👏

मैं आरएसएस का उग्रवाद,
तुम आईएसएस का शान्तरूप।
मैं मंदिर का कर्णकटु शंखनाद,
तुम अजान सी मधुर झंकार प्रिये।।😜😜😜😜😜

तुम व्हाटसैप मैं टेलीग्राम,
तुम नेट बैंकिंग मैं मनिऑर्डर।
तुम बुलेट ट्रेन सी द्रुतगामी,
मैं खच्चर ऊंट सवार प्रिये।।
😍😍😍😍😍😍😍
सोनिया सी त्यागमूर्ति हो तुम,
मैं हूं अटल सा पद लोलुप।
मैं नाम का पीएम मनमोहन,
तुम ही असली सरकार प्रिये।।
👏👏👏👏👏👏👏👏
तुम रेणुका की सी स्मित मंद,
और मैं स्मृति का अटृहास।
तुम मर्यादित भाषा निरुपम की,
मैं अडवाणी वाचाल प्रिये।😜😜😜😜😜😜😜😜😜

तुम गगनचुम्बी पेट्रोल भाव,
मैं इंटरनेट सा सस्ता हूं।
लेकिन हम दोनों से ही है,
इस दुनियां की रफ्तार प्रिये।।
👏👏👏👏👏👏
तुम लालू जैसी पशुप्रेमी,
निर्दोष टूजी, सीजी बोफोर्स
तुम चिदम्बरम सी ईमानदार,
मुझसे लज्जित भ्रष्टाचार प्रिये।।😍😍😍😍😍😍😍

तुम सेकुलर कांग्रेस जैसी,
मैं साम्प्रदायिक बीजेपी सा।
तेरी काली करतूतों का,
मैं ढोता सर पर भार प्रिये।।
👏👏👏👏👏👏👏👏👏
तुम दिग्विजय सिंघवी चरित्रवान,
मैं योगी मोदी सा पतित।
तुम औवेसी जैसी देशभक्त,
मैं द्रोही गुनाहगार प्रिये।।😜😜😜😜😜😜😜

तुम मासूम हो पत्थरबाजों सी,
मैं तुझसे पिटता क्रूर सैनिक।
तू वोट बैंक का स्ट्रांग रूम,
मैं तेरे आगे लाचार प्रिये।।👏👏👏👏👏👏👏👏

तुम वेटिकन का लव लेटर,
तुम देवबंद का फतवा हो।
मैं खामोशी संत महंतों की,
और मिथ्या गीता सार प्रिये।।
😜😜😜😜😜😜😜😜😜
मैं कश्मीरी पंडित अतिक्रमी,
तुम पीड़ित निरीह रोहिंग्या हो।
मैं रिफ्यूजी कैंप के हूं काबिल,
तुम भारत की हकदार प्रिये।।

😍😍😍😍😍😍😍😍😍तुम भारत गौरव जिन्ना हो,
मैं भगतसिंह आतंकवादी।
भारत की आज़ादी के श्रेय पर,
है तेरा ही अधिकार प्रिये।।👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏
🌹🙏🌹🌹🙏🌹🙏

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जय श्री कृष्णा

अक्ल बाटने लगे विधाता, लंबी लगी कतारी ।
सभी आदमी खड़े हुए थे, कहीं नहीं थी नारी ।

सभी नारियाँ कहाँ रह गई, था ये अचरज भारी ।
पता चला ब्यूटी पार्लर में, पहुँच गई थी सारी।

मेकअप की थी गहन प्रक्रिया, एक एक पर भारी ।
बैठी थीं कुछ इंतजार में, कब आएगी बारी ।

उधर विधाता ने पुरूषों में, अक्ल बाँट दी सारी ।
ब्यूटी पार्लर से फुर्सत पाकर, जब पहुँची सब नारी ।

बोर्ड लगा था स्टॉक ख़त्म है, नहीं अक्ल अब बाकी ।
रोने लगी सभी महिलाएं , नींद खुली ब्रह्मा की ।

पूछा कैसा शोर हो रहा है, ब्रह्मलोक के द्वारे ?
पता चला कि स्टॉक अक्ल का पुरुष ले गए सारे ।

ब्रह्मा जी ने कहा देवियों , बहुत देर कर दी है ।
जितनी भी थी अक्ल वो मैंने, पुरुषों में भर दी है ।

लगी चीखने महिलाये , ये कैसा न्याय तुम्हारा?
कुछ भी करो हमें तो चाहिए, आधा भाग हमारा ।

पुरुषो में शारीरिक बल है, हम ठहरी अबलाएं ।
अक्ल हमारे लिए जरुरी , निज रक्षा कर पाएं ।

सोचकर दाढ़ी सहलाकर , तब बोले ब्रह्मा जी ।
एक वरदान तुम्हे देता हूँ , अब हो जाओ राजी ।

थोड़ी सी भी हँसी तुम्हारी , रहे पुरुष पर भारी ।
कितना भी वह अक्लमंद हो, अक्ल जायेगी मारी ।

एक औरत ने तर्क दिया, मुश्किल बहुत होती है।
हंसने से ज्यादा महिलाये, जीवन भर रोती है ।

ब्रह्मा बोले यही कार्य तब, रोना भी कर देगा ।
औरत का रोना भी नर की, अक्ल हर लेगा ।

एक अधेड़ बोली बाबा, हंसना रोना नहीं आता ।
झगड़े में है सिद्धहस्त हम, खूब झगड़ना भाता ।

ब्रह्मा बोले चलो मान ली, यह भी बात तुम्हारी ।
झगड़े के आगे भी नर की, अक्ल जायेगी मारी ।

ब्रह्मा बोले सुनो ध्यान से, अंतिम वचन हमारा ।
तीन शस्त्र अब तुम्हे दिए, पूरा न्याय हमारा ।

इन अचूक शस्त्रों में भी, जो मानव नहीं फंसेगा ।
निश्चित ब्रह्मवाक्य समझो, उसका घर नहीं बसेगा ।

कान खोलकर ध्यान से, सुन लो बात हमारी
बिना अक्ल के भी होती है, नर पर नारी भारी।..

संजय गुप्ता