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लाचार प्रिये


” लाचार प्रिये “
करूँ मेहनत पर लाचार प्रिये,
पुरा लुटता तुझपे पगार प्रिये,
एक छोटा रखता कार प्रिये,
क्यूँ कहती मुझे बेकार प्रिये,

दिखे शक्ति की अवतार प्रिये,
तेरे दर्शन को लाचार प्रिये,
क्यूँ मारे नजर से वार प्रिये,
कभी ‘प्यारे’ कह एकबार प्रिये,

तेरे नैन नशीलेदार प्रिये,
दुश्मन भी जाए हार प्राये,
कहूँ मृगनयनी हुँकार प्रिये,
भले रोके मुझे सरकार प्रिये,

अब मिलके चले घर – बार प्रिये,
घर बन जाए गुलजार प्रिये,
मुझे धन की नहीं दरकार प्रिये,
बस ! मिल जाए तेरा प्यार प्रिये,

अब प्रिये क्या कहती है…..।

तुम ठग, फरेब, फनकार प्रिये,
मेरे क्रोध को न ललकार प्रिये,
तुम झुठों का सरदार प्रिये,
तभी लड़ती मैं हरबार प्रिये,

क्यूँ बच्चे खाते मार प्रिये,
मिलता हरपल फटकार प्रिये,
पड़े रहते लिए डकार प्रिये,
सिर्फ मेरा है परिवार प्रिये !

चलो माफ किया इसबार प्रिये,
करूँ प्रेम का अब इजहार प्रिये,

खड़ी रहती किये श्रृँगार प्रिये,
नाम तेरा जपूँ सौ बार प्रिये,
कहे चूड़ियों की खनकार प्रिये,
कब आओगे घर – द्वार प्रिये,

जुड़े मन से मन की तार प्रिये,
तेरे बिन सूना संसार प्रिये,
क्यूँ मारे जुबाँ से वार प्रिये,
जरा प्यार से देख एकबार प्रिये,

बस प्रेम में है संसार प्रिये,
बस प्रेम में है संसार प्रिये,…..

ब्रज बिहारी सिंह
हिनू, राँची, झारखण्ड

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સોપારી કેરો કટકો મારો…


સોપારી કેરો કટકો મારો

સોપારી કેરો કટકો મારો,
હાથ થી છૂ ટી ગ્યો,
રાણો રૂંવે બંધ બારણીયે,
એનો માવો ખૂટી ગ્યો….
સોપારી કેરો કટકો..

ટકતો નહીં એનો ટાંટિયો ઘરમાં,
આજ ઈ થંભી ગ્યો,
જેની તેની પાસે માંગતો ભટકે,
કોક તો માવો દયો….
સોપારી કેરો

મૂછ મરડીને ખોંખારા ખાતો,
ઈ મીંદડી બની ગ્યો,
માવા વિના એનો મૂડ નો જામે,
ઈ ગોટો વળી ગ્યો….
સોપારી કેરો કટકો

ડાચું બગાડી ને ડેલીએ બેઠો,
એનો ફ્યુઝ તો ઉડી ગ્યો,
એકલો બેઠો એ બૈડો વલૂરે,
કોઈ ચપટી તમાકુ દયો…
સોપારી કેરો કટકો

કોઈએ પૂછ્યું: “કેમ છો”,
એનો મગજ છટકી ગ્યો,
બધા હાર્યે ઈ બાઝવા દોડે,
એને બેક દાણા કોક દયો…
સોપારી કેરો કટકો

માતા મનાવે પિતા હમજાવે,
એનો પીતો છટકી ગ્યો,
ભૂરો ભૂરાયો ભાગે ભટકે,
ગામ ગોકીરો થ્યો…
સોપારી કેરો કટકો

માંડ માવાનો મેળ પડ્યો ત્યાં,
પોલીસ પુગી ગ્યો,
એકસો પાંત્રી એકકોર રઈ ગ્યો,
વાંહો કાબરો થ્યો…
સોપારી કેરો કટકો

પત્ની હમજાવે પ્રેમથી એને,
વડકે આવી ગ્યો,
જોરથી ઝઇડકી મારી જોરુએ,
મિયાંની મીંદડી થ્યો….
સોપારી કેરો કટકો….😄😷
~ ફાકીદાસ તમાકુવીર ચુનાવાળા.

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ખોવાયેલા ભાયબંધ તું મને પાછો જડ,


ખોવાયેલા ભાયબંધ તું મને પાછો જડ,

પહેલા પડતો થો તેમ માથે પડ,

નાસ્તાના બીલ વખતે હું ખીચામાં જોતો,

ત્યારે તું જઈ વોશ બેસિનમાં હાથ ધોતો,

ખીચામાં હાથ તે ક્યારેય નાખ્યો નોતો,

ભીસ પડે ત્યારે પાસે આવીને રોતો,

૧૦૦ ગ્રામ ગાંઠીયા સાથે ફ્રીમાં મીઠો માવો પણ ખાતા,

યાદ છે રોજ રાતે ભાયાણીમાં જાતા.

દિવસે બોરડીના બોર વીણી ખાતા,

રાતે વાડીયુમાં સીંગ ચોરવા જાતા,

કુતરાના અવાજથી કરતા’થા શોર,

રાત્રે ફરતાથા ચારેકોર,       

એક-બીજાનો નોતો મુકતા સગડ,

એક-બીજાનો હાથ જાલી ચડતા’થા વડ,

લખોટીયુ માટે તું પાછો લડ,

મડતો’થો તેમ પાછો હાથ મારો મડ,

લેતાથા એક-બીજાના ગાળ્યું થી નામ,

આવ, આવીને પાછો હાથ મારો થામ,

સમય કાઠીને તું મળવા તો આવ,

આવીને તું મીઠી ગાળ્યું થી બોલાવ,

ખોવાયેલા ભાયબંધ તું મને પાછો મળ,

આવ પાછો ને તું ગળે મળ.

  • નીતિન ગજ્જર
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વાણિયો અને હનુમાન (પ્રેમશંકર ભટ્ટ)


સટ્ટાખોર   વાણિયો   મુંબઈમાં   રહેતો,

સાંજ સવાર હનુમાનને હાથ જોડી કહેતો;

“અંતરયામી બાપા તમે જાણો મારી પીડ,

પાંચસો  જો અપાવો તો ભાંગે મારી ભીડ,

અપાવો  તો  રોજ  આવી  પાઠ-પૂજા કરૂં,

શનિવારે  પાઈ પાઈનું  તેલ  આવી ધરૂં.”

એકદાડો  હનુમાનને  એવી  ચડી   ચીડ,

પથ્થરમાંથી પેદા થયા, બોલ્યા નાખી રીડ;

“પૂજારીનો ઓશિયાળો ખાવા દે તો ખાઉં,

કેમ  કરી  ભૂંડા હું તો તારી વહારે  ધાઉં?

પાંચસોને બદલે આપે પાઈ પાઈનું તેલ,

પૂછડું દેખી મૂરખ મને માની લીધો બેલ?

પાંચસો  જો હોય  તો તો  કરાવું ને  હોજ,

ભરાવું  ને તેલ, પછી  ધુબકા મારૂં  રોજ.’

–પ્રેમશંકર ભટ્ટ.

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वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो
चाय का मजा रहे, प्लेट पकौड़ी से सजा रहे
मुंह कभी रुके नहीं, रजाई कभी उठे नहीं
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो
मां की लताड़ हो या बाप की दहाड़ हो
तुम निडर डटो वहीं, रजाई से उठो नहीं
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो
मुंह भले गरजते रहे, डंडे भी बरसते रहे
दीदी भी भड़क उठे, चप्पल भी खड़क उठे
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो
प्रात हो कि रात हो, संग कोई न साथ हो
रजाई में घुसे रहो, तुम वही डटे रहो
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो
एक रजाई लिए हुए एक प्रण किए हुए
अपने आराम के लिए, सिर्फ आराम के लिए
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो
कमरा ठंड से भरा, कान गालीयों से भरे
यत्न कर निकाल लो,ये समय तुम निकाल लो
ठंड है यह ठंड है, यह बड़ी प्रचंड है
हवा भी चला रही, धूप को डरा रही
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो।।

रजाई धारी सिंह दिनभर😂😂😂😂

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॥पत्नी पचासा॥मेरी पुस्तक “दहेज मे साली”से

जैसे हनुमान चालीसा है, वैराग्य शतक है वैसे ही यह पत्नी पचासा है।इसका नित्य पाठ करने से अलौकिक सुख की प्राप्ति होती है और दाम्पत्य जीवन सुखी होता है।

     जय जय हे पति कल्यानी
     तेरी इस जग मे ना सानी।

     पति के लिये तो तू है कामिनी
     पति पर चमके जैसे दामिनी।

     एक हाथ में बेलन साजे
     एक हाथ से चिमटा भांजे।

     बड़े बड़े नाखून तुम्हारे
     दंत नुकीले नयन करारे।

     रौद्र रूप जब तू दिखलावे
     पति को छठी का दूध याद आवे।

     दोनो प्रहर जब करो श्रीन्गार 
     पड़ोसियों को होय बुखार।

     गले मे स्वर्ण सुशोभित माला
     मोटे होठ लिपस्टिक काला।

     नये नये नित फैसन करती
     सास ससुर से कभी न डरती।।

     पति का भाई साग बराबर।
     अपना भाई हो सर्वोपरि॥

     पति की सतत करे निगरानी ।
     पति को समझे वह अज्ञानी॥

     खुद को समझे पति से स्यानी
     करती वही जो मन मे ठानी।।

     पति ने गर कर दी नादानी
     समझो उसकी शामत आनी।।

     पति को पतला दाल खिलाती
     खुद खा जाती दाल मखानी।।

     अपना सिर ऊँचा करने को
      पति का धन दे बनती दानी।।    

     पति को दूध दही गर देवे
     उसके बदले सब कुछ लेवे।।

     पति से खाना भी बनवाना
     अच्छा खाना खुद खा जाना।।

     पति को बहुविधी कष्ट वो देवे
     खुद खा जाये मिठाई मेवे।।

     पति को पाकेट नित्य टटोले
     पति की क्या हिम्मत जो बोले ॥

     उसका रहता ऐसा जज्बा।
     तनखा पर झट कर ले कब्जा॥

     पति जो मागें पचास रुपैया।
     कहती हंस क्या करोगे भैया॥

     खाली हाथ मैके से आवे।
     पति का धन मैके पहुंचावे॥

     तलाक की दे हरदम धमकी।
     पति को करार करा दे सनकी॥

     पति को कहती दुष्ट निशाचर।
     पति कहता हे देवी दया कर॥

     पति रात को देर से आवे।
     तो उसकी शामत आ जावे॥

     रोष से तब छुटकारा पावे
     जब पत्नी का पैर दबावे॥

     पति की करती हुक्म उदूली
      गाजर मांगे तो देती मूली॥

     पत्नी से है को सुख पावा
     पत्नी है बस एक छलावा॥

     पत्नी यदि पहले मर जावे
     पति को स्वर्ग में जल्द बुलावे॥

     भुत पिशाच निकट नही आवे
     पत्नी को गर साथ सुलावे॥

      पति का राज उगलवा लेती
     अपना राज न हरगिज देती॥

     मैके की नित करे बड़ाई
     कहती ऊंचे कुल से आई॥

     बडी मान मर्यादा वाले
     उसके पापा उसके भाई॥

     जब वह अपने मैके जाती
     सहेलियों पर रोब जमाती॥

     कहती उसका पति धनवान
     उसकी है समाज में मान॥
     इतना दरिया दिल उसका पति
     साल में लाखो देता दान॥

     सिगरेट को ना हाथ लगाता
     ना खाता वो खैनी पान॥
     लाखों मे वह रोज खेलता
    फिर भी उसे नही अभिमान॥

     पति का करना हो जब दोहन
     उसे खिलाती हलवा सोहन॥

     पत्नी लडे गर कोई चुनाव
     उसका बढ जाता है भाव॥

     पत्नी गर चुनाव जीत ले
     करती रहती वो देशाटन॥
     कभी घुमती झुमरीतलैया
     कभी घुमती देवीपाटन॥

     करे फोन से वार्ता लम्बी
     अन्जाना हो या संबंधी॥

     वाकयुद्ध मे तुम अति माहिर
     कटु सत्य करता जगजाहिर॥

     अगर गलत नम्बर मिल जावे
     तो भी वो घंटों बतियावे ॥
     टेलीफोन का बिल जब आवे
     पति की आंखें चुधिंया जावे॥

     राज की बात करे जगजाहिर
     चुगली करने मे अति माहिर॥

     सास ससुर या ननद भौजाई
     भूले से गर उसे सताये॥
     तो दहेज की नालीश करके
     अपनी उन्हें औकात बतावे॥

     इसीलिए तुम इस कलियुग मे
     पत्नी से तकरार न करना।
     पत्नी भले यार भी कर ले
     तुम न किसी चक्कर मे पड़ना।
     दूजी पत्नी मिलनी मुश्किल
     सो पत्नी से रार न करना॥

     लक्ष्मी दुर्गा और सरस्वती जी
     देवी तो हैं बस मंदिर की
     लेकिन पत्नी होती है देवी
     केवल घर के अन्दर की॥

युग बदला अब पत्नी चलती आगे आगे
पति देव चले पत्नी के पीछे भागे भागे॥

     पत्नी आफिस से डयूटी करके
     देर रात घर आती है
     पति थके हुए सोये रहते
     सोये से उन्हें जगाती है॥

     खाना गरमा वे लाते हैं
     व दस्तरखान बिछाते हैं।
     पानी लाते पंखा झलते
     और फिल्मी गाना गाते हैं॥

     तू ही दुर्गा तू ही काली।
     तू ही माया तू ही भवानी।
     करती हो तुम वही सदा
     जो अपने मन मे तुमने ठानी॥

     पति ने गर कर दी नादानी।
     याद करा दे उसकी नानी।
     रिस्ते बहुत बनाये प्रभु ने
     पर ना इस रिश्ते की सानी॥

     त्रिया चरित्र समग्र रुप से
     पत्नी उपर ही है फबता।
     भाग्य पुरुष का सब जाने है
     पत्नी के बल से है चलता॥

     जो नित पढे यह पत्नी पचासा।
     होय न फिर पत्नी का दासा॥

लड़कों के बारें में दुनिया की सबसे बड़ी गलतफहमी
“शादी कर दो सुधर जाएगा”
😂😂😂😂😂

     जो शत बार पाठ करे सोई।
     अगले जन्म पतिदेव न होई॥
             ॥समाप्त॥-
         जगदीश खेतान
               मौलिक
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हर ईद पर पजामा सही होता है। 😀😀

एक आदमी ने डांटा जो दर्ज़ी की ज़ात को
कुरता👕 पजामा👖 आ ही गया चांद रात को🌙

देखा पहन के जब उसने कुरता👕 तो ठीक था
पजामा👖 लेकिन लगा उन्हें तीन इंच कुछ बड़ा

बेगम👵🏼 से बोले आज मेरा काम ये करो
तीन इंच काट✂️ कर इसे तुम ठीक से सियो

बेगम ये बोली देखिये फुरसत कहा मुझे
कल ईद है और आज बड़ा काम है सर पे

बेटी 🙍🏻‍♀️जो बड़ी सामने आई उसे कहा
मेहंदी💅 का मगर उस ने बहाना बना दिया

यू चार बेटियो👯‍♀️👭 से भी जब बात न बनी,
करते भी क्या, किसी से भी उम्मीद न रही

खुद ही पजामा काट✂️ के फिर सी दिया उसे,
और फिर जनाब रात को बे फिक्र सो गए

बेगम👵🏼 बेचारी काम से फ़ारिग हुई ज़रा,
पजामा👖 की सिलाई का तब ध्यान आगया

नाराज हो न जाये मिया कोई बात पर,
पजामा ठीक कर दिया नीचे से काट कर

धोया जो बड़ी बेटी ने मेहंदी भरे वो हाथ,
पजामा छोटा कर दिया फिर खुसदिली के साथ

जिस जिस को जब भी वक़्त मिला सब ने ये किया,
पजामा छोटा कर के वही सब ने रख दिया

यू रात भर सभी थे पाजामे पे मेहरबान,
कहता भी क्या किसी से वो मासूमो बेज़ुबान

पाजामे की थी सुबह को दुर्गत बनी हुई
कुर्ते पे एक सफेद थी चड्डी रखी हुई!

😜😜😜😜