Posted in हास्यमेव जयते

चाय


एक मास्टरजी के घर मे 7-8 मास्टर मेहमान बनकर आ
गए ।

मास्टरजी की पत्नी बोली, “घर मे चीनी नहीं है, चाय कैसे बनाऊँ?”

मास्टर ने कहा, “चिंता मत करो। तुम सिर्फ चाय बनाकर ले आओ, बाकी सब मैं सम्भाल लूंगा । “

निर्देशानुसार पत्नी चाय बनाकर ले आई।

उसके बाद सभी मेहमानों से मास्टरजी बोले, ” देखो भई , जिसके हिस्से में फीकी चाय आएगी, कल हम सब उनके घर मेहमान बनकर खाने के लिए आएंगे ।

सभी मास्टरों ने खुशी-खुशी चाय पी ली।

बल्कि एक ने तो यहां तक कह डाला, ” मेरी चाय में तो इतनी चीनी है कि डर है कहीं मुझे डायबिटीज ना हो जाए. “….!!

Posted in हास्यमेव जयते

🙋🏻‍♀ पति पत्नी का 🙋🏻‍♂★ एक खूबसूरत संवाद ★


🙋🏻‍♀ पति पत्नी का 🙋🏻‍♂
★ एक खूबसूरत संवाद ★

           (((((((())))))))

मैंने एक दिन अपनी पत्नी से पूछा ~
क्या तुम्हें बुरा नहीं लगता,
मैं बार-बार तुमको बोल देता हूँ,
डाँट देता हूँ , फिर भी तुम
◆ पति भक्ति में लगी रहती हो, ◆
❗ जबकि मैं कभी ❗
पत्नी भक्त बनने का प्रयास नहीं करता ?

मैं वेद का विद्यार्थी और मेरी पत्नी
     विज्ञान की, परन्तु उसकी 

आध्यात्मिक शक्तियाँ मुझसे कई गुना
ज्यादा हैं , क्योकि मैं केवल पढता हूँ,
❗और वो ❗
जीवन में उसका पालन करती है.

  मेरे प्रश्न पर, जरा वो हँसी, और 
   गिलास में पानी देते हुए बोली ~
      ये बताइए, एक पुत्र यदि 
 माता की भक्ति करता है, तो उसे 
  मातृ भक्त कहा जाता है, परन्तु 
        माता यदि पुत्र की 
         कितनी भी सेवा करे,
           उसे पुत्र भक्त तो 
       नहीं कहा जा सकता न.

          मैं सोच रहा था,
आज पुनः ये मुझे निरुत्तर करेगी.
  मैंने प्रश्न किया ~ ये बताओ ....
   जब जीवन का प्रारम्भ हुआ, तो 
     पुरुष और स्त्री समान थे,

फिर पुरुष बड़ा कैसे हो गया, जबकि
स्त्री तो शक्ति का स्वरूप होती है ?

मुस्काते हुए उसने कहा ~आपको
थोड़ी विज्ञान भी पढ़नी चाहिए थी.
मैं झेंप गया.

   उसने कहना प्रारम्भ किया ~
दुनिया मात्र दो वस्तु से निर्मित है ...
     ◆  ऊर्जा और पदार्थ, ◆

पुरुष -->  ऊर्जा का प्रतीक है, और
 स्त्री  -->  पदार्थ की.

पदार्थ को यदि विकसित होना हो, तो
वह ऊर्जा का आधान करता है,
ना की ऊर्जा पदार्थ का.

 ठीक इसी प्रकार ... जब एक स्त्री 
एक पुरुष का आधान करती है, तो 
   शक्ति स्वरूप हो जाती है, और 
     आने वाली पीढ़ियों अर्थात् 
         अपनी संतानों के लिए 
         प्रथम पूज्या हो जाती है, 
                  क्योंकि 
         वह पदार्थ और ऊर्जा
     दोनों की स्वामिनी होती है,
            जबकि पुरुष 
मात्र ऊर्जा का ही अंश रह जाता है.

     मैंने पुनः कहा ~
      तब तो तुम मेरी भी
        पूज्य हो गई न, क्योंकि 
          तुम तो ऊर्जा और पदार्थ 
            दोनों की स्वामिनी हो ?

अब उसने झेंपते हुए कहा ~ आप भी
पढ़े लिखे मूर्खो जैसे बात करते हैं.
आपकी ऊर्जा का अंश
मैंने ग्रहण किया और
शक्तिशाली हो गई, तो क्या
उस शक्ति का प्रयोग
आप पर ही करूँ ?
ये तो कृतघ्नता हो जाएगी.

      मैंने कहा ~ मैं तो तुम पर
        शक्ति का प्रयोग करता हूँ ,
            फिर तुम क्यों नहीं ?

          उसका उत्तर सुन ...
     मेरी आँखों में आँसू आ गए.
उसने कहा ~ जिसके संसर्ग मात्र से 
   मुझमें जीवन उत्पन्न करने की 
          क्षमता आ गई, और 
      ईश्वर से भी ऊँचा जो पद 
      आपने मुझे प्रदान किया,
  ★  जिसे माता कहते हैं  ★

उसके साथ मैं विद्रोह नहीं कर सकती.

फिर मुझे चिढ़ाते हुए उसने कहा ~
  यदि शक्ति प्रयोग करना भी होगा, 
     तो मुझे क्या आवश्यकता ?

👉 मैं तो माता सीता की भाँति
लव कुश तैयार कर दूँगी,
जो आपसे मेरा
हिसाब किताब कर लेंगे. 👈

🙏 नमन है … सभी मातृ शक्तियों को
जिन्होंने अपने प्रेम और मर्यादा में
समस्त सृष्टि को बाँध रखा है.

Posted in હાસ્ય કવિતા

तारक मेहता का उल्टा चश्मा


“तारक मेहता का उल्टा चश्मा” के “जेठालाल” के माध्यम से आज के ओछी मानसिकता वाले पुरुषों पर तीक्ष्ण प्रहार करता व्यंग्यात्मक गीत-

“जेठालाल”

छोड़ ‘दया’ की फिक्र ‘बबीता’,
की क्यों करते ‘जेठालाल’?

रोज़-रोज़ समझाता हारा,
बापू अपना ‘चंपकलाल’।
गुस्से में है ‘अय्यर’ देखो,
पीछे पड़ा खींचने खाल।

क्या तुम उनके प्रतिघातों से,
कभी न डरते ‘जेठालाल’।

देखो तो ‘पोपट’ ने अब तक,
नहीं रचाया अपना ब्याह।
फिर भी देख गैर नारी को,
कभी न भरता वह तो आह।

और तुम्हारी पत्नी होकर,
आहे भरते ‘जेठालाल’।।

देखो-देखो ‘हाथीभाई’
‘सोडी’ ‘तारक’ ‘आत्माराम’।
करते नहीं तुम्हारे जैसे,
वे कोई भी ओछे काम।

छोड़ो ऐसी हरकत तुम, ये-
इज्जत हरते ‘जेठालाल’।

Posted in हास्यमेव जयते

महान वैज्ञानिक सर आइजैक न्यूटन ने जब अपने आँखों के सामने पेड़ से एक सेव को गिरते देखा तो उन्होंने गुरुत्वाकर्षण के नियम की खोज़ कर डाली…..लेकिन अगर न्यूटन के साथ यही घटना आज के दौर में अपने देश में हुई होती तो हमारे विभिन्न न्यूज़ चैनलों की हैडलाइन संभवतः कुछ इस प्रकार होती…….

…..
आजतक

आज खुलेगा राज अब होगा पर्दाफाश
जानेंगे सेव गिरने का कारण क्या था ख़ास…

….
रिपब्लिक टीवी

क्या न्यूटन के सिर पर मंडरा रहा था काल
या फ़िर सेव गिरने के पीछे पाक की थी कोई चाल…

…..
इंडिया टीवी

एक बार फ़िर पाक हुआ बेनक़ाब
सेव गिराकर बुन रहा है कोई खौफ़नाक ख़्वाब…

…..
एबीपी न्यूज़

कितना बड़ा था सेव , कितना विशाल था पेड़
जानेंगे उस शक़्स से जो वहीं चरा रहा था भेड़…

…..
ज़ी न्यूज़

खौफ़ खाए पाक ने बम के बदले गिराए सेव
हिन्द का सीना हुआ चौड़ा ,जयते सत्यमेव…

……
न्यूज़ 24

चीन की दादागिरी या है ये अमेरिका की मनमानी
जानेंगे न्यूटन के सिर पर सेव गिरने की पूरी कहानी…

……
टीवी 9

आसमान से था वो टपका या फ़िर पेड़ से था गिरा
बताएंगे सेव की पूरी दास्तान, क्या न्यूटन था सिरफिरा…

……
इंडिया न्यूज

आम के पेड़ के नीचे क्यों नहीं सोया न्यूटन
सेव गिरने के बाद कैसे कौतूहल से भरा था उसका मन
कहीं जाइएगा मत छोटे से ब्रेक के बाद जानेंगे टनाटन…

…..
न्यूज़ नेशन

यूं ही गिरा था सेव या पेड़ पर थी कोई आत्मा
स्टूडियो में बैठकर खुलासा करेंगें एक महात्मा…

…..
सहारा समय

क्या था कोई भूत प्रेत डायन चुड़ैल का साया
या सेव ख़ुद ही हताश होकर नीचे चला आया…

……
NDTV

बेबस ग़रीब के सिर पर गिरा सेव आख़िर है किसका ये दोष
फ़िलहाल वो ख़तरे से बाहर लेकिन सरकार के ख़िलाफ़ रोष..

…..
दूरदर्शन

पेड़ के नीचे बैठे एक व्यक्ति के आगे गिरा सेव
ब्रेक के बाद देखेंगे गोबर से खाद बनाने का कलेव…

Posted in હાસ્ય કવિતા

वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो
चाय का मजा रहे, पकौड़ी से सजा रहे
मुंह कभी रुके नहीं, रजाई कभी उठे नहीं
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो

मां की लताड़ हो बाप की दहाड़ हो
तुम निडर डटो वहीं, रजाई से उठो नहीं
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो ||

मुंह गरजते रहे, डंडे भी बरसते रहे
दीदी भी भड़क उठे, चप्पल भी खड़क उठे
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो।

प्रात हो कि रात हो, संग कोई न साथ हो
रजाई में घुसे रहो, तुम वही डटे रहो
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो।

एक रजाई लिए हुए, एक प्रण किए हुए
अपने आराम के लिए, सिर्फ आराम के लिए
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो।

कमरा ठंड से भरा, कान गालीयों से भरे
यत्न कर निकाल लो, ये समय निकाल लो
ठंड है ये ठंड है, यह बड़ी प्रचंड है
हवा भी चला रही, धूप को डरा रही
वीर तुम अड़े रहो, रजाई में पड़े रहो।।
👉रजाई धारी सिंह ‘दिनभर’

Posted in પતિ પત્ની ના ૧૦૦૦ જોક્સ

ચંદ્રકાન્ત બક્ષી

૫૦ થી ૬૦ વર્ષ પછીની જીંદગી ની વાસ્તવિકતા…
પત્નિની પતિને સુધારવાની જીદ ચરમસીમાએ હોય છે.
તેમાંય જો બાળકો મોટા થઈ ગયા હોય, પતિ પત્નિ એકલાં રહેતા હોય તો ભોગ મર્યા…
આ કોઈ એકલાનો પ્રશ્ન નથી…
સમગ્ર સમાજને લાગુ પડે છે…
સવાર પડે ને…

ઉઠો મારે ચાદર ખંખેરવી છે, વહેલા ઉઠવાનું રાખો.

બ્રશ કરતી વખતે સિંન્કનો નળ ધીમો રાખો, નીચે ટાઈલ્સ પર છાંટા ઉડે છે.

ટોયલેટમાંથી નીકળીને પગ લુછણીંયા પર પગ લુંછો. તમે આખા ઘરમાં રામદેવ પીરના ઘોડા જેવા પગલાં પાડો ને સાફ મારે કરવા પડે.

પોતું કરેલું છે, ગેલેરીમાં ના જતા વરસાદના છાંટા પડેલા છે, પાછા પગ ભીના લઈને રૂમમાં આવસો.

દાઢી કરીને બ્રસ ધોઈને ડબ્બામાં મુકો.

નાહવા જાવ એટલે ચડ્ડીબંડ્ડી ડોલમાં નાખજો.

નીકળીને રુમાલ બહાર તાર પર સુકવો.

માથામાં નાંખવાના તેલની બોટલ બંધ કરીને મુકતાં કીડીઓ ચટકે છે.

હજાર વાર કહ્યું આ ભુરો મોટો કાંસકો નહી લેવાનો એ ગુંચ કાઢવા માટે છે.

ધરે હો ત્યારે આ જાડી ટીશર્ટ ના પહેરતા હોય તો.

આ ચાની મલાઈ રકાબીની ધારે ન ચોંટાડતા હોય તો.

ફોન પર વાત કરતાં કરતાં ગેલેરીમાં શું કામ જતા રહો છો, ગામને સંભળાવવાનું છે.

મોબાઈલ જ મંતરવાનો હોય તો ટીવી શું કામ ચાલુ કરો છો.

છેલ્લી વાર કહું છું, ચલો જમવા,
પંખો બંન્ધ કરીને આવજો.

તોડેલી રોટલી પતે પછી જ બીજી તોડતા હોવતો.

જો ફરી પાછું, કેટલી વાર કહ્યું, લેંઘાએ હાથના લુંછો.

કાગળીયું ડસ્ટબીનમાં નાંખો, હાચું કહીયે તો મિસ્ટર બીન જેવું મો કેમ થઈ જાય છે.

જમ્યા પછી તરત આડા ના પડો.

સીંગ ચણાના ફોતરા તરત કચરાપેટી માં નાખો, આખા ઘરમાં ઉડે છે.

દીવાલે ટેકો દઈ ન બેસો તેલના અને ડાઈના ડાઘ પડે છે.

સવારે તો પેપર દોઢ કલાક વાંચેલું, હવે એ ઓનલાઈન થોડું છે તે બદલાઈ જાય.

પેપર વાળીને ટીપોઈ પર મુકતા હોતો.

હજી તો અડધો જ દિવસ પત્યો છે, અને આટલાં બધાં સુચનો !

આ સતત રણકતો રેડીયો એટલે જીવન સંગીત !!!
પણ મિત્રો આ રેડીઓ ની મીઠાસ એટલી મધુર છે કે જો એ ચૂપ થઈ જાય ને તો જીવન થઁભી જ જાય…
નાની ઉંમરે આ બધા છણકા ભણકા પતિ પત્ની માં થી કોઈ ને ના ગમે અને ઝગડો જ કરાવે પણ રિટાયર્ડ થયાં પછી જો આવા છણકા ભણકા ના હોય અને શાંત જીવન જીવતા હોય તો રોબોટ જેવિ જિંદગી લાગે અને જીવન નો સાચો આનંદ વિસરાય જ જાય !!!

🙏તમામ સીનીયર સીટીઝન દંપતી ને સમર્પિત🙏
ચંદ્રકાન્ત બક્ષી

Posted in हास्यमेव जयते

पति-पत्नी दोनों सरकारी अधिकारी थे, पत्नी एक रैंक छोटी अधिकारी थी ।

एक बार उनमें ऐसी खटपट हो गई की बोलचाल भी बन्द…😇

घर में तीसरा कोई नहीं था तो बड़ी तकलीफ हो गई।

खैर, चूँकि दोनों सरकारी सेवक थे सो इस चुप्पी का भी हल निकाल लिया ।

नोट शीट के माध्यम से लिखा-पढ़ी करके बातचीत होने लगी ।

एक शाम जब पति महोदय घर आये तो पत्नी ने नोट शीट पेश कर दी- “थके हुए लगते हैं, क्या चाय लेना चाहेंगे?”

पति ने लिखा- “यथा प्रस्तावित”
😀

पत्नी ने आगे भी लिखा- “आदेश हो तो साथ में बिस्किट भी संलग्न किये जावे..”

पति ने लिखा- “अनुमोदित, किन्तु मात्र 2 ही स्वीकृत”

इसी प्रकार नोट शीट पर लिख-लिख कर चाय-पानी, खाना पीना वगैरह चलने लगा..
किन्तु बातचीत बन्द ही थी😥

अचानक एक दिन पत्नी ने नोट शीट प्रस्तुत की- “मेरी माताजी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, चार दिनों के लिए मायके जाना चाहती हूँ, कृपया अवकाश स्वीकृत कर रिलीव करें।”😦

पति ने लिखा- “स्वीकृत, किन्तु “वैकल्पिक व्यवस्था” सुनिश्चित करने के पश्चात् ही अवकाश पर जावें….”

इसके बाद पानीपत का चौथा युद्ध प्रारंभ हुआ

👊🏻👊🏻👊🏻👊🏻👊🏻
अब पति मेडिकल लीव पर है……😝

Posted in हास्यमेव जयते

हँसते हुए पेट दुखे तो भई मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं
😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘

एक बार कक्षा छठवीं में चार बालकों को परीक्षा मे समान अंक मिले,

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अब प्रश्न खडा हुआ कि किसे प्रथम रैंक दिया जाये ।

स्कूल प्रबन्धन ने तय किया कि प्राचार्य चारों से एक सवाल पूछेंगे,

जो बच्चा उसका सबसे सटीक जवाब देगा उसे प्रथम घोषित किया जायेगा ।

चारों बच्चे हाजिर हुए, प्राचार्य ने सवाल पूछा –

दुनिया में सबसे तेज क्या होता है ?

पहले बच्चे ने कहा,

मुझे लगता है -“विचार”सबसे तेज होता है,

क्योंकि दिमाग में कोई भी विचार तेजी से आता है, इससे तेज कोई नहीं ।

प्राचार्य ने कहा – ठीक है, बिलकुल सही जवाब है ।

दूसरे बच्चे ने कहा, मुझे लगता है –

“पलक झपकना” सबसे तेज होता है, हमें पता भी नहीं चलता और पलकें झपक जाती हैं और अक्सर कहा जाता है,”पलक झपकते”कार्य हो गया ।

प्राचार्य बोले – बहुत खूब, बच्चे दिमाग लगा रहे हैं ।

तीसरे बच्चे ने कहा –

“बिजली”, क्योंकि मेरे यहाँ गैरेज, जो कि सौ फ़ुट दूर है, में जब बत्ती जलानी होती है, हम घर में एक बटन दबाते हैं, और तत्काल वहाँ रोशनी हो जाती है,तो मुझे लगता है बिजली सबसे तेज होती है..

अब बारी आई चौथे बच्चे की ।

सभी लोग ध्यान से सुन रहे थे,

क्योंकि लगभग सभी तेज बातों का उल्लेख तीनो बच्चे पहले ही कर चुके थे ।

चौथे बच्चे ने कहा –

सबसे तेज होते हैं “दस्त”…

सभी चौंके

प्राचार्य ने कहा – साबित करो कैसे ?

बच्चा बोला,

कल मुझे दस्त हो गए थे, रात के दो बजे की बात है,

जब तक कि मैं कुछ ” विचार ” कर पाता,

या “पलक झपकाता”

या कि “बिजली” का स्विच दबाता

दस्त अपना “काम” कर चुका था ।😂

टीचर ने अपनी पीएचडी की डिग्री फाड़ दी है ।

इस असाधारण सोच वाले बालक को ही प्रथम घोषित किया गया।

Posted in हास्यमेव जयते

एक स्कूल में शिक्षा विभाग से निरीक्षण के लिए अधिकारी आया। वह एक हिंदी की कक्षा में गया और हिंदी अध्यापिका से पूछने लगा अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना इस मुहावरे का वाक्य प्रयोग करके बताएं।
कुछ सोचकर अध्यापिका बड़े आत्मविश्वास से बोली-
“मैंने अपनी बेटी को दसवीं कक्षा में मोबाइल दिला कर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।“
निरीक्षक बोला “यह तो जानबूझ कर कुएं में कूदने जैसी बात हुई, पैरों पर कुल्हाड़ी मारने वाली नहीं। कोई और वाक्य प्रयोग बताओ।”
अध्यापिका कुछ क्षण सोचते हुए, “रमेश ने अपनी पत्नी को अपना क्रेडिट कार्ड देकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।”
निरीक्षक फिर बोला- इसे तो ‘ मजबूरी का नाम महात्मा गांधी ’ कहेंगे । बीवी को क्रेडिट कार्ड देना पति की न टाली जा सकने वाली मजबूरी होती है, कोई सटीक वाक्य प्रयोग बताओ।

बहुत सोच विचार कर अध्यापिका को अपने पति की कही एक बात याद आई वह बोली- कल ही मेरे पति कह रहे थे कि तुम्हारी सुंदरता पर रीझकर मैं तुमसे शादी कर बैठा और अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मार ली।

निरीक्षक जोर जोर से हंसने लगा और बोला, “यह तो आंख का अंधा नाम नैनसुख का उदाहरण है।”

अब तो अध्यापिका का भी पारा चढ़ गया और वह गुस्से से बोली – “इस स्कूल में टीचर बनकर मैंने अपने पैरों पर कुल्हाडी मार ली।”

निरीक्षक फिर बोला “यह तो नाच न जाने आंगन टेढ़ा वाली बात हुई, इसमें कुल्हाडी कहाँ है?”

अब तो अध्यापिका का भी सिर घूम गया और वह गुस्से से फट पडी- “मेरे साथ ज्यादा तीन-पाँच मत करो वरना तुम्हारी राई का ऐसा पहाड़ बनाऊंगी कि दिन में तारे नज़र आ जाएंगे। चुपचाप यहां से नौ दो ग्यारह हो जाओ वरना आज…, अभी…, इसी जगह, सांप भी मरेगा और लाठी भी टूटेगी…।”

उसका रौद्ररूप देख निरीक्षक घबरा गया, “ओह, लगता है आज मैंने गलती से अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मार ली और वह वहां से भाग गया।
😂😂😂😂😂

Posted in હાસ્ય કવિતા

पति-पत्नी की नोक झोंक में प्रयुक्त सम्पूर्ण हिंदी वर्णमाला संकलित कविता…

मुन्ने के नंबर कम आए,
पति श्रीमती पर झल्लाए,
दिनभर मोबाइल लेकर तुम,
टें टें टें बतियाती हो…
खा़क नहीं आता तुमको,
क्या मुन्ने को सिखलाती हो?

यह सुनकर पत्नी जी ने,
सारा घर सर पर उठा लिया l
पति देव को लगा कि ज्यों,
सोती सिंहनी को जगा दिया l

अपने कामों का लेखा जोखा,
तुमको मैं अब बतलाती हूं l
आओ तुमको अच्छे से मैं,
क ,ख, ग,घ सिखलाती हूँ l

सबसे पहले “क” से अपने,
कान खोलकर सुन लो जी..
“ख”से खाना बनता घर में,
मेरे इन दो हाथों से ही!

“ग”से गाय सरीखी मैं हूं,
तुम्हें नहीं कुछ कहती हूँ l
“घ” से घर के कामों में मैं,
दिनभर पिसती रहती हूँ l

पतिदेव गरजकर यूं बोले..
“च” से तुम चुपचाप रहो
“छ” से ज्यादा छमको मत,
मैं कहता हूं खामोश रहो!

“ज” से जब भी चाय बनाने,
को कहता हूं लड़ती हो..
गाय के जैसे सींग दिखाकर,
“झ” से रोज झगड़ती हो!

पत्नी चुप रहती कैसे,
बोली “ट” से टर्राओ मत
“ठ” से ठीक तुम्हें कर दूँगी..
“ड” से मुझे डराओ मत!

बोले पतिदेव सदा आफिस में,
“ढ” से ढेरों काम करूं..
जब भी मैं घर आऊं,
“त” से तुम कर देतीं जंग शुरू!

“थ” से थक कर चूर हुआ हूं..
आज तो सच कह डालूँ मैं!
“द” से दिल ये कहता है…
“ध” से तुमको धकियाऊं मैं!

बोली “न” से नाम न लेना,
मैं अपने घर जाती हूँ!
“प” से पकड़ो घर की चाबी
मैं रिश्ता ठुकराती हूँ!

“फ” से फूल रहे हैं छोले,
“ब” से उन्हें बना लेना l
” भ” से भिंडी सूख रही हैं,
वो भी तल के खा लेना…!!

“म” से मैं तो चली मायके,
पत्नी ने बांधा सामान l
यह सुनते ही पति महाशय,
के तो जैसे सूखे प्राण

बोले “य” से ये क्या करती
मेरी सब नादानी थी…
“”र” से रूठा नहीं करो…..
तुम सदा से मेरी रानी थी!

“ल” से लड़कर कहते हैं कि..
प्रेम सदा ही बढता है!
“व” से हो विश्वास अगर तो,
रिश्ता कभी न मरता है l

“श” से शादी की है तो हम,
“स” से साथ निभाएंगे…
“ष” से इस चक्कर में हम….
षटकोण भले बन जाएंगे!

पत्नी गर्वित होकर बोली,
“ह” से हार मानते हो!
फिर न नौबत आए ऐसी
वरना मुझे जानते हो!

“क्ष” से क्षत्राणी होती है नारी
” त्र” से त्रियोग भी सब जानती है
“ज्ञ” से हे ज्ञानी पुरुष चाय पियो
और खत्म करो यह राम कहानी!

🤪😜🤣😄