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पति-पत्नी की नोक झोंक में प्रयुक्त सम्पूर्ण हिंदी वर्णमाला संकलित कविता…

मुन्ने के नंबर कम आए,
पति श्रीमती पर झल्लाए,
दिनभर मोबाइल लेकर तुम,
टें टें टें बतियाती हो…
खा़क नहीं आता तुमको,
क्या मुन्ने को सिखलाती हो?

यह सुनकर पत्नी जी ने,
सारा घर सर पर उठा लिया l
पति देव को लगा कि ज्यों,
सोती सिंहनी को जगा दिया l

अपने कामों का लेखा जोखा,
तुमको मैं अब बतलाती हूं l
आओ तुमको अच्छे से मैं,
क ,ख, ग,घ सिखलाती हूँ l

सबसे पहले “क” से अपने,
कान खोलकर सुन लो जी..
“ख”से खाना बनता घर में,
मेरे इन दो हाथों से ही!

“ग”से गाय सरीखी मैं हूं,
तुम्हें नहीं कुछ कहती हूँ l
“घ” से घर के कामों में मैं,
दिनभर पिसती रहती हूँ l

पतिदेव गरजकर यूं बोले..
“च” से तुम चुपचाप रहो
“छ” से ज्यादा छमको मत,
मैं कहता हूं खामोश रहो!

“ज” से जब भी चाय बनाने,
को कहता हूं लड़ती हो..
गाय के जैसे सींग दिखाकर,
“झ” से रोज झगड़ती हो!

पत्नी चुप रहती कैसे,
बोली “ट” से टर्राओ मत
“ठ” से ठीक तुम्हें कर दूँगी..
“ड” से मुझे डराओ मत!

बोले पतिदेव सदा आफिस में,
“ढ” से ढेरों काम करूं..
जब भी मैं घर आऊं,
“त” से तुम कर देतीं जंग शुरू!

“थ” से थक कर चूर हुआ हूं..
आज तो सच कह डालूँ मैं!
“द” से दिल ये कहता है…
“ध” से तुमको धकियाऊं मैं!

बोली “न” से नाम न लेना,
मैं अपने घर जाती हूँ!
“प” से पकड़ो घर की चाबी
मैं रिश्ता ठुकराती हूँ!

“फ” से फूल रहे हैं छोले,
“ब” से उन्हें बना लेना l
” भ” से भिंडी सूख रही हैं,
वो भी तल के खा लेना…!!

“म” से मैं तो चली मायके,
पत्नी ने बांधा सामान l
यह सुनते ही पति महाशय,
के तो जैसे सूखे प्राण

बोले “य” से ये क्या करती
मेरी सब नादानी थी…
“”र” से रूठा नहीं करो…..
तुम सदा से मेरी रानी थी!

“ल” से लड़कर कहते हैं कि..
प्रेम सदा ही बढता है!
“व” से हो विश्वास अगर तो,
रिश्ता कभी न मरता है l

“श” से शादी की है तो हम,
“स” से साथ निभाएंगे…
“ष” से इस चक्कर में हम….
षटकोण भले बन जाएंगे!

पत्नी गर्वित होकर बोली,
“ह” से हार मानते हो!
फिर न नौबत आए ऐसी
वरना मुझे जानते हो!

“क्ष” से क्षत्राणी होती है नारी
” त्र” से त्रियोग भी सब जानती है
“ज्ञ” से हे ज्ञानी पुरुष चाय पियो
और खत्म करो यह राम कहानी!

🤪😜🤣😄

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कभी हम भी.. बहुत अमीर हुआ करते थे हमारे भी जहाज.. चला करते थे।


कभी हम भी.. बहुत अमीर हुआ करते थे हमारे भी जहाज.. चला करते थे।

हवा में.. भी।
पानी में.. भी।

दो दुर्घटनाएं हुई।
सब कुछ.. ख़त्म हो गया।

            पहली दुर्घटना 

जब क्लास में.. हवाई जहाज उड़ाया।
टीचर के सिर से.. टकराया।
स्कूल से.. निकलने की नौबत आ गई।
बहुत फजीहत हुई।
कसम दिलाई गई।
औऱ जहाज बनाना और.. उडाना सब छूट गया।

             दूसरी दुर्घटना

बारिश के मौसम में, मां ने.. अठन्नी दी।
चाय के लिए.. दूध लाना था।कोई मेहमान आया था।
हमने अठन्नी.. गली की नाली में तैरते.. अपने जहाज में.. बिठा दी।
तैरते जहाज के साथ.. हम शान से.. चल रहे थे।
ठसक के साथ।
खुशी खुशी।
अचानक..
तेज बहाव् आया।
और..
जहाज.. डूब गया।

साथ में.. अठन्नी भी डूब गई।
ढूंढे से ना मिली।

मेहमान बिना चाय पीये चले गये।
फिर..
जमकर.. ठुकाई हुई।
घंटे भर.. मुर्गा बनाया गया।
औऱ हमारा.. पानी में जहाज तैराना भी.. बंद हो गया।

आज जब.. प्लेन औऱ क्रूज के सफर की बातें चलती हैं , तो.. उन दिनों की याद दिलाती हैं।

वो भी क्या जमाना था !

और..
आज के जमाने में..
मेरे बेटे ने…
पंद्रह हजार का मोबाइल गुमाया तो..

मां बोली ~ कोई बात नहीं ! पापा..
दूसरा दिला देंगे।

हमें अठन्नी पर.. मिली सजा याद आ गई।

फिर भी आलम यह है कि.. आज भी.. हमारे सर.. मां-बाप के सामने.. अदब से झुकते हैं।

औऱ हमारे बच्चे.. ‘यार पापा ! यार मम्मी !
कहकर.. बात करते हैं।
हम प्रगतिशील से.. प्रगतिवान.. हो गये हैं।

कोई लौटा दे.. मेरे बीते हुए दिन।।

माँ बाप की लाइफ गुजर जाती है बेटे की लाइफ बनाने में……
और बेटा status_ रखता है—
” My wife is my Life”
ईस पोस्ट को भेजने की कृपा करे जिससे सबके बचपन की याद की झलकिया आ जाये

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पत्नी की फटकार सुनी जब,


देवी सिंग तोमर

पत्नी की फटकार का महत्व*😇

पत्नी की फटकार सुनी जब,
तुलसी भागे छोड़ मकान l
राम चरित मानस रच डाला,
जग में बन गए भक्त महान ll
पत्नी छोड़ भगे थे जो जो,
वही बने विद्वान महान l
गौतम बुद्ध महावीर तीर्थंकर,
पत्नी छोड़ बने भगवान ll
पत्नी छोड़ जो भागे मोदी
हुए आज हैं पंत प्रधान l
अडवाणी ना छोड़ सके तो,
देख अभी तक हैं परेशान ll
नहीं कि है शादी पप्पू ने,
नहीं सुनी पत्नी की तान l
इसीलिए फिरते है भटकते,
बन न सके राजनेता महान ll
हम भी पत्नी छोड़ न पाए,
इसीलिए तो हैं परेशान l
पत्नी छोड़ बनो सन्यासी,
पाओ मोक्ष और निर्वाण ll

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ભગવાને એક ગધેડાનું સર્જન કર્યું અને એને કહ્યું


ભગવાને એક ગધેડાનું સર્જન કર્યું અને એને કહ્યું, “તું ગધેડા તરીકે ઓળખાશે, તું સૂર્યોદય થી લઈને સુર્યાસ્ત સુધી થાક્યા વગર તારી પીઠ પર બોજો ઉઠાવવાનું કામ કરશે, તું ઘાસ ખાશે, તને બુદ્ધિ નહિ હોય અને તું ૫૦ વર્ષ સુધી જીવશે.”

ગધેડો બોલ્યો, “હું ગધેડો થયો એ બરાબર છે પણ ૫૦ વર્ષ નું આયુષ્ય ઘણું બધું કહેવાય, મને ૨૦ વર્ષ નું આયુષ્ય આપો.” ઈશ્વરે એની અરજ મંજુર કરી.

ભગવાને કુતરાનું સર્જન કર્યું, એને કહ્યું “તું કુતરો કહેવાશે, તું મનુષ્યોના ઘરોની ચોકીદારી કરશે, તું મનુષ્ય નો પરમ મિત્ર હશે, તું એને નાખેલા રોટલાના ટુકડા ખાશે, અને તું ૩૦ વર્ષ જીવીશ.
કુતરાએ કહ્યું, “હે પ્રભુ ૩૦ વર્ષ નું આયુષ્ય તો ઘણું કહેવાય ૧૫ વરસ રાખો,” ભગવાને મંજુર કર્યું.

ભગવાને વાંદરો બનાવ્યો અને કહ્યું, “તું વાંદરો કહેવાશે, તું એક ડાળી થી બીજી ડાળી પર જુદા જુદા કરતબ કરતો કુદાકુદ કરશે અને મનોરંજન પૂરું પાડશે, તું ૨૦ વર્ષ જીવીશ.” વાંદરો બોલ્યો “૨૦ વર્ષ તો ઘણા કહેવાય ૧૦ વર્ષ રાખો”. ભગવાને મંજુર કર્યું.

છેલ્લે ભગવાને મનુષ્ય બનાવ્યો અને એને કહ્યું : “તું મનુષ્ય છે, પૃથ્વી પર તું એક માત્ર બુદ્ધિજીવી પ્રાણી હશે઼ તું તારી અક્કલ નાં ઉપયોગ વડે સર્વે પ્રાણીઓનો સ્વામી બનશે. તું વિશ્વને તારા તાબામાં રાખીશ અને ૨૦ વર્ષ જીવીશ.”

માણસ બોલ્યો : ” પ્રભુ, હું મનુષ્ય ખરો પણ ૨૦ વર્ષનું આયુષ્ય ઘણું ઓછું કહેવાય, મને ગધેડાએ નકારેલ ૩૦ વર્ષ, કુતરાએ નકારેલ ૧૫ વર્ષ અને વાંદરાએ નકારેલ ૧૦ વર્ષ પણ આપી દો.” ભગવાને મનુષ્ય ની ઈચ્છા સ્વીકારી લીધી.

અને ત્યારથી, માણસ પોતે માણસ તરીકે ૨૦ વર્ષ જીવે છે, લગ્ન કરીને ૩૦ વર્ષ ગધેડો બનીને જીવે છે, પોતાની પીઠ પર બધો બોજો ઉપાડી સતત કામ કરતો રહે છે, બાળકો મોટા થાય એટલે ૧૫ વર્ષ કુતરા તરીકે ઘરની કાળજી રાખી જે મળે તે ખાઈ લે છે, અંતે જ્યારે વૃદ્ધ થાય ત્યારે નિવૃત્ત થઈને વાંદરા તરીકે ૧૦ વર્ષ સુધી એક પુત્રના ઘરથી બીજા પુત્રના ઘરે અથવા એક પુત્રીના ઘરેથી બીજી પુત્રીના ઘરે જઈને જુદા જુદા ખેલ કરીને પૌત્રો અને ભાણીયાંઓને મનોરંજન પૂરું પાડે છે…………🙏

        ક  ડ  વું      સત્ય    છે .  
      સાચી    વાસ્તવિકતા    છે
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👂 कान की आत्मकथा👂


👂 कान की आत्मकथा👂

एक बार आवश्य पढ़े… मन में गुदगुदी होने लगेगी…😊

मैं कान हूँ……..👂
हम दो हैं…👂👂
दोनों जुड़वां भाई…

लेकिन………..
हमारी किस्मत ही ऐसी है….

कि आज तक हमने एक दूसरे को देखा तक नहीं 😪

पता नहीं..
कौन से श्राप के कारण हमें विपरित दिशा में चिपका कर भेजा गया है 😠…

दु:ख सिर्फ इतना ही नहीं है…

हमें जिम्मेदारी सिर्फ सुनने की मिली है……

गालियाँ हों या तालियाँ..,
अच्छा हो या बुरा..,
सब
हम ही सुनते हैं…

धीरे धीरे हमें खूंटी समझा जाने लगा…

चश्मे का बोझ डाला गया,

फ्रेम की डण्डी को हम पर फँसाया गया…

ये दर्द सहा हमने…

क्यों भाई..???

चश्मे का मामला आंखो का है
तो हमें बीच में घसीटने का
मतलब क्या है…???

हम बोलते नहीं

तो क्या हुआ,

सुनते तो हैं ना…

हर जगह बोलने वाले ही क्यों आगे रहते है….???

बचपन में पढ़ाई में
किसी का दिमाग
काम न करे तो
मास्टर जी हमें ही मरोड़ते हैं 😡…

जवान हुए तो
आदमी,औरतें सबने सुन्दर सुन्दर लौंग,बालियाँ, झुमके आदि बनवाकर हम पर ही लटकाये…!!!

छेदन हमारा हुआ,
और तारीफ चेहरे की …!

और तो और…
श्रृंगार देखो…
आँखों के लिए काजल…
मुँह के लिए क्रीमें…
होठों के लिए लिपस्टिक…
हमने आज तक कुछ माँगा हो तो बताओ…

कभी किसी कवि ने,
शायर ने
कान की कोई तारीफ की हो तो बताओ…

इनकी नजर में आँखे, होंठ, गाल,ये ही सब कुछ है…

हम तो जैसे किसी मृत्युभोज की
बची खुची दो पूड़ियाँ हैं..,

जिसे उठाकर चेहरे के साइड में चिपका दिया बस…

और तो और,

कई बार बालों के चक्कर में हम पर भी कट लगते हैं

हमें डिटाॅल लगाकर पुचकार दिया जाता है…

बातें बहुत सी हैं,
किससे कहें…???

कहते है दर्द बाँटने से मन हल्का
हो जाता है…

आँख से कहूँ तो वे आँसू टपकाती हैं..
नाक से कहूँ तो वो बहता है…

मुँह से कहूँ तो वो हाय हाय करके रोता है…

और बताऊँ…

पण्डित जी का जनेऊ,
टेलर मास्टर की पेंसिल,
मिस्त्री की बची हुई गुटखे की पुड़िया
मोवाइल का एयरफोन सब हम ही सम्भालते हैं…

और

आजकल ये नया नया मास्क का झंझट भी हम ही झेल रहे हैं…

कान नहीं जैसे पक्की खूँटियाँ हैं हम…और भी कुछ टाँगना, लटकाना हो तो ले आओ भाई…

तैयार हैं हम दोनों भाई…!¡!

थोड़ा थोड़ा हँसते रहिये
हमेशा स्वस्थ रहिए ।।

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एक पति की सलाह।


एक पति की सलाह।।।।
😃😃😃😃😀😀😀😀😀😀

यदि आप पति हो और कभी एकदम सुबह 4.00 बजे जाग जाओ, और चाय पीने की इच्छा हो जाए, जो कि……स्वाभाविक है,‌ तो आप सोचेंगे कि…..चाय खुद ही बनाऊं या प्रिय अर्धांगिनी को जगाने का दुःसाहस करूँ…..?

दोनों ही स्थितियों में आपको निम्नलिखित भयंकर परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है…
और आप कुछ भी करो, आपको…”चार बातें”…तो सुननी ही हैं, जो ‌कि वास्तव में 40-50 से कम नहीं होती हैं…||


● पहली परिस्थिति:—

आपने खुद ही चाय बनाई…!!

आपने यदि खुद चाय बना ली, तो सुबह-सुबह ब्रह्म- मुहूर्त में आठ बजे जब भार्या जागेगी तब, आपको सुनना ही है:—-
क्या ज़रूरत थी खुद बनाने की, मुझे जगा देते, पूरी पतीली “जला कर”, रख दी, और वह “दूध की पतीली” थी, “चाय वाली” नीचे रखी है “दाल भरकर”….!!


विश्लेषण:—- ‌चाय खुद बनाने से पत्नी दुखी हुई / शर्मिंदा हुई / अपने अधिकार क्षेत्र में घुसपैठ से भयाक्रांत हुई / या कुछ और, आप कभी भी समझ नहीं पाएंगे, दूसरा ये कि……

“दूध की पतीली” में “चाय” बनाना तो गुनाह है, लेकिन “चाय की पतीली” में “दाल” भरकर रखी जा सकती है….??


● दूसरी परिस्थिति:—

आपने पत्नी को चाय बनाने के लिए जगा दिया…!!

यदि आपने गलती से भी पत्नी को जगा दिया तो, आप सुनने के लिए तैयार रहिए:—-

“मेरी तो किस्मत ही ख़राब है, एक काम नहीं आता इस आदमी को, पिताजी ने जाने क्या देखा था,
आधी रात को चाय चाहिए इन्हें….
अभी अभी तो, पीठ सीधी की थी, बस आँख लगी ही थी और इनकी फरमाइशें हैं कि, ख़त्म ही नहीं हो रही हैं, न दिन देखते हैं, न रात….
चाय बनकर, पी कर ख़त्म भी हो जाएगी पर ‘श्लोक-सरिता’ का प्रवाह अनवरत, अविरल चलता ही रहेगा…!!


● तीसरी परिस्थिति:—

एक अन्य विचित्र परिस्थिति….!!

यदि आप चाय खुद बना रहे हैं…….
और शक्कर के डिब्बे में शक्कर आधा चम्मच बची है, तो आपके दिमाग में विचार आएगा ही कि बड़े डिब्बे से निकालकर इसमें टॉप-अप कर देता हूँ, यदि आपने ऐसा किया तो पता है क्या सुनोगे….??
शायद आप सोच रहे होंगे कि, आपने बहुत शाबाशी वाला काम किया, नहीं..

बल्कि आपको….शर्तिया ये सुनना पड़ेगा —
“किसने कहा था शक्कर निकालने को ? मुझे वह डिब्बा, आज मँजवाना था”


निष्कर्ष:—- संसार में पत्नी की नजरों में पति नाम का जो जीव होता है, उसमे अकल का बिल्कुल ही अभाव होता है…!!

“सर्व-गुण-संपन्न”……
तो उसके “पापा” होते हैं, और या जीजाजी”…???

इसलिए सभी पतियों को, मेरी सलाह है कि, कभी सुबह-सुबह नींद खुल जाए, तो वापस मुँह ढक कर सो जाएं, उसी में भलाई है…!!
😂🤣😎😂

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એક ભાઈએ તોપના લાયસંસ માટે કલેકટર કચેરીમાં અરજી કરી…


એક ભાઈએ તોપના લાયસંસ માટે કલેકટર કચેરીમાં અરજી કરી…

કલેકટરના હાથમાં અરજી આવતાં તે ચોંકી ગયા. કારણ કે આજ દિવસ સુધીમાં તોપના લાયસંસની માંગણી કરતી અરજી તેની પાસે આવી નહોતી. તેમણે અરજીમાં શેરો માર્યો, અને એ ભાઈને રૂબરુ બોલાવ્યો.

કલેકટર : તમે આ તોપના લાયસંસની અરજી કરી છે?

ભાઈએ કહ્યું : હા સાહેબ…

કલેકટર : તમારે તોપને શું કરવી છે?

ભાઈએ કહ્યું : સાહેબ સાવ સાચી વાત કરૂં ?

આ પહેલાં મેં બેંકમાં એક લાખની લોન લેવા માટે માંગણી મુકેલી તો દસહજાર જ મંજુર થયા,

બે વર્ષ પહેલા અતિવૃષ્ટિ થવાને કારણે મારો ઉભો મોલ બધો જ ધોવાઈ ગયો, બે લાખના નુકશાનની સામે સરકારે વળતર પેટે માત્ર ૨૦ હજાર મંજુર કર્યા,

ગયા વર્ષે દુષ્કાળ જેવી સ્થિતિ હતી તો કુવો ખોદવા દોઢ લાખની માંગણી મુકી તો ત્રીસ હજાર મંજુર કર્યા.

સાહેબ, આ ઉપરથી હું સમજી ગયો કે જરૂર કરતાં ચાર ગણું વધુ માંગવું. સાહેબ, મારે તો વાંદરા ભગાડવા માટે એક પિસ્તોલની જરૂર હતી. એટલે મને થયું કે જો હું પિસ્તોલની માંગણી મુકીશ તો મને ગીલોલનું લાયસંસ આપીને કાઢી મુકશે. એટલે મેં આ વખતે તોપનું લાયસન્સ માંગ્યું જેથી કાપી કાપીને પિસ્તોલનું તો આપે.

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लाचार प्रिये


” लाचार प्रिये “
करूँ मेहनत पर लाचार प्रिये,
पुरा लुटता तुझपे पगार प्रिये,
एक छोटा रखता कार प्रिये,
क्यूँ कहती मुझे बेकार प्रिये,

दिखे शक्ति की अवतार प्रिये,
तेरे दर्शन को लाचार प्रिये,
क्यूँ मारे नजर से वार प्रिये,
कभी ‘प्यारे’ कह एकबार प्रिये,

तेरे नैन नशीलेदार प्रिये,
दुश्मन भी जाए हार प्राये,
कहूँ मृगनयनी हुँकार प्रिये,
भले रोके मुझे सरकार प्रिये,

अब मिलके चले घर – बार प्रिये,
घर बन जाए गुलजार प्रिये,
मुझे धन की नहीं दरकार प्रिये,
बस ! मिल जाए तेरा प्यार प्रिये,

अब प्रिये क्या कहती है…..।

तुम ठग, फरेब, फनकार प्रिये,
मेरे क्रोध को न ललकार प्रिये,
तुम झुठों का सरदार प्रिये,
तभी लड़ती मैं हरबार प्रिये,

क्यूँ बच्चे खाते मार प्रिये,
मिलता हरपल फटकार प्रिये,
पड़े रहते लिए डकार प्रिये,
सिर्फ मेरा है परिवार प्रिये !

चलो माफ किया इसबार प्रिये,
करूँ प्रेम का अब इजहार प्रिये,

खड़ी रहती किये श्रृँगार प्रिये,
नाम तेरा जपूँ सौ बार प्रिये,
कहे चूड़ियों की खनकार प्रिये,
कब आओगे घर – द्वार प्रिये,

जुड़े मन से मन की तार प्रिये,
तेरे बिन सूना संसार प्रिये,
क्यूँ मारे जुबाँ से वार प्रिये,
जरा प्यार से देख एकबार प्रिये,

बस प्रेम में है संसार प्रिये,
बस प्रेम में है संसार प्रिये,…..

ब्रज बिहारी सिंह
हिनू, राँची, झारखण्ड

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हास्य लेखक यादी.


कुछ आप भी इसमें जोड़ ले….

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હાસ્યકાર વિનોદ ભટ્ટની હાસ્ય કૃતિઓ


તેમનો જન્મ ૧૪ જાન્યુઆરી, ૧૯૩૮ ગુજરાતનાં નાંદોલ ખાતે થયો હતો. તેમણે ૧૯૫૫માં એસ.એસ.સી. ઉત્તિર્ણ કર્યું અને ૧૯૬૧માં અમદાવાદની એચ.એલ. કોમર્સ કોલેજમાંથી સ્નાતક થયા હતા. પછીથી તેઓ એલ.એલ.બી.ની પદવી મેળવી હતી. તેઓ વ્યવસાયે વેરા સલાહકાર છે. ૧૯૯૬ થી ૧૯૯૭ દરમિયાન તેઓ ગુજરાતી સાહિત્ય પરિષદના પ્રમુખ રહ્યા હતા. તેમની કટાર મગનું નામ મરી ગુજરાત સમાચારમાં પ્રસિદ્ધ થતી હતી જે પાછળથી દિવ્ય ભાસ્કરમાં ઇદમ તૃતિયમ તરીકે પ્રસિદ્ધ થઇ હતી.[૧][૨]

૨૩ મે, ૨૦૧૮ના રોજ અમદાવાદ ખાતે લાંબી બીમારી પછી તેમનું અવસાન થયું હતું.[૩][૪]

હાસ્યકાર વિનોદ ભટ્ટની હાસ્ય કૃતિઓ.

૧ “પહેલું સુખ તે મૂંગી નાર (૧૯૮૨)

૨ “આજની લાત’ (૧૯૭૭)

૩ “અરહસ્ય કથાઓ (૧૯4૮)

૪ ‘વિનોદ ભટ્ટ (વિ)કૃત શાકુન્તલ’ (૧૯૭૦)

૫ ‘વિનોદ ભટ્ટના પ્રેમપત્રો’ (૧૯૭૨)

૬ “ઈદમ્‌ તૃતીયમ્‌’ (૧૯૭૩)

૭ ‘“ઈદમૂચતુર્થમ્‌’ (૧૯૭૫)

૮ “સુનો ભાઈ સાધો’ (૧૯૭૭)

૯ ડ’વિનોદની નજરે’ (૧૯૭૯)

૧૦ “અને હવે ઇતિ-હાસ’ (૧૯૮૧)

૧૧ “આંખ આડા કાન’ (૧૯૮૨)

૧૨ “ગ્રંથ ગરબડ’ (૧૯૮૩)

૧૩ “નરો વા કુંજરો વા’ (૧૯૮૪)

૧૪ “અમદાવાદ એટલે અમદાવાદ’ (૧૯૮૫)

૧૫ ‘વિનોદ વિમર્શ’ (૧૯૮૭)

૧%૬ “ભૂલ ચૂક લેવી દેવી’ (૧૯૯૦)

૧૭ “વગેરે વગેરે વગેરે’ (૧૯૯૨)

૧૮ “અથથી ઇતિ’ (૧૯૯૨)

૧૯ શપ્રસંગોપાત’ (૧૯૯૩)

૨૦ ‘“કારણકે’ (૧૯૯૪)

૨૧ ‘દિલ્હીથી દોલતાબાદ’ (૧૯૯૭)

૨ર૨ “પ્રભુને ગમ્યું તે ખરું’ (૧૯૯૭)

૨૩ “એવારે અમે એવા’ (૧૯૯૯)

૨૪ ‘“હાસ્યોપચાર’ (૨૦૦૦)

૨૫ “મગનું નામ મરી’ (૨૦૦૧)

૨%£ ‘વિનોદલક્ષી વ્યકિતચિત્રો’ (૨૦૦૨)

૨૭ “નમુ તે હાસ્યબ્રહ્મને’ (૨૦૦૩)

૨૮ “મંગળ-અમંગળ’ (૨૦૦૩)

૨૯ “વિનોદી જીવનચિત્રો’ (૨૦૦૩)

૩૦ ‘વિનોદ મેળો (૨૦૦૩)

૩૧ “પહેલું સુખ માંદા પડયા (૨૦૦૪)