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सुप्रभात्

वरं वनं वरं भैक्ष्यं वरं भारोपजीवनं |
पुंसां विवेकहीनानां सेवया न धनाSर्जनम् |l

संपत्ति अर्जित करने के उद्देश्य से वन में निवास करना, भिखारी बन जाना या बोझ उठाने वाला कुली बन जाना श्रेयस्कर है परन्तु सद्बुद्धि और निर्णय लेने की क्षमता से हीन व्यक्तियों का सेवक कभी भी नहीं बनना चाहिये |

जय श्री कृष्ण

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ज्योति अग्रवाल

🌷मानस में भगवान शिव कहते हैं कि —

“उमा कहूं मैं अनुभव अपना ,सत हरि भजन जगत सब सपना”
अर्थात् भगवान शिव कहते हैं की हरि का भजन ही सत्य है– यानि वास्तविक ज्ञान भी यही है की हरि का भजन किया जाए-ओर जो लोग भजन नही करते उन्हें पुराणों में पशु समान कहा गया है-

“ज्ञानशून्या नरा ये तु पशव: परिकीर्तिता:”

अर्थात् जो मनुष्य वास्तविक ज्ञान यानि जो मनुष्य भजन नही करता वो पशु समान है।

क्योंकि पशु भी भजन नही करते

खाना-पीना,सोना-जागना,घर बनाना,बच्चे पैदा करना यह सब कार्य एक जानवर भी करता हैं।

अगर मनुष्य देह पाकर भी मनुष्य सारा जीवन यही काम करता रहेगा तो मनुष्य और पशु मे कोई अंतर नही रहा–

कहा भी गया हैं कि –

“आहार निद्रा भय मैथुनं च
सामान्यमेतत् पशुभिर्नराणाम्–
धर्मो हि तेषामधिको विशेष:
धर्मेण हीनाः पशुभिः समानाः”

अर्थात् धर्म से हीन मनुष्य पशु समान हैं

इस मानव देह की बहुत महिमा है– देवताओं ने यह नही कहा की प्रभु हमें पशु बना दो ।

देवता केवल यही प्रार्थना करते हैं की प्रभु हमे मनुष्य देह दे दीजिये।

नारद पुराण मे कहा गया —

“दुर्लभ मानुषं जन्म ,प्राथ्यते त्रिदशैरपि”

अर्थात् इस दुर्लभ मानव देह को देवता लोग भी चाहते हैं क्योंकि इस देह से हम वास्तविक आनंद प्राप्त कर सकते हैं।

इस मानव देह से ही हम भगवान के सन्मुख हो सकते हैं क्योंकि

“विमुख राम सुख पाव न कोई”

भगवान से विमुख होकर जीव को कभी सुख नही मिल सकता

इसलिए इस मानव देह में ही मनुष्य भगवान के सन्मुख होने का ज्ञान/ विवेक प्राप्त कर सकता है और अनंतकाल के लिए आनंद प्राप्त कर सकता है– पशु इस विवेक को प्राप्त नही कर सकते– केवल मानव देह से ही ये वास्तविक विवेक प्राप्त होता है।🌷

हरे कृष्ण 🙏
*श्री कृष्ण सदैव आपकी स्मृति में रहें!!

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पापान्निवारयति योजयते हिताय
गुह्यं निगूहति गुणान् प्रकटीकरोति ।
आपद्गतं च न जहाति ददाति काले
सन्मित्र -लक्षणमिदं प्रवदन्ति सन्त: ॥
(भर्तृहरिकृतनीतिशतकम् )

अर्थात्:- अच्छा मित्र अपने मित्र को पाप करने से रोकता है ,उसको कल्याण कार्यो मे लगाता है., उसकी गोपनीय बातो को दूसरों से छिपाता है., उसके गुणों को दूसरों के सम्मुख प्रकट करता है,! आपत्ति आने पर साथ नही छोड़ता तथा आवश्यकता पड़ने पर धनादि के द्वारा मदद करता है संतो ने अच्छे मित्र का लक्षण बताया है.

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अज्ञ: सुखमाराध्‍य: सुखतरमाराध्‍यते विशेषज्ञ:।
ज्ञानलवदुर्विदग्‍धं ब्रह्मापि तं नरं न रञ्जयति ।।

मूर्ख व्यक्ति को सरलता पूर्वक समझाया जा सकता है और विद्वान् को तो उससे भी अधिक सरलता से समझाया जा सकता है किन्‍तु जिस अल्‍पज्ञानी को अपने ज्ञान का मिथ्‍या अभिमान हो उसे तो ब्रह्मा भी समझा नहीं सकते।

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पापान्निवारयति योजयते हिताय
गुह्यं च गूहति गुणान् प्रकटीकरोति ।
आपद्गतं च न जहाति ददाति काले
सन्मित्रलक्षणमिदं प्रवदन्ति सन्तः ॥
जो पाप से रोकता है, हित में जोडता है, गुप्त बात गुप्त रखता है, गुणों को प्रकट करता है, आपत्ति आने पर छोडता नहीं, समय आने पर (जो आवश्यक हो) देता है – संत पुरुष इन्हीं को सन्मित्र के लक्षण कहते हैं ।

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खलील जिब्रान के अनमोल विचार 


खलील जिब्रान के अनमोल विचार 

  1. उत्कंठा ज्ञान की शुरुआत है।
  2. आत्मा जो चाहती है, वो पा लेती है।
  3. आत्मज्ञान सभी ज्ञानो की जननी है।
  4. आपका दोस्त आपकी ज़रूरतों का जवाब है।
  5. मंदिर के द्वार पर हम सभी भिखारी ही हैं।
  6. इच्छा आधा जीवन है और उदासीनता आधी मौत।
  7. जीवन और मृत्यु एक हैं, जैसे नदी और समुद्र एक हैं।
  8. किसी भी नींव का सबसे मजबूत पत्थर सबसे निचला ही होता है।
  9. दोस्ती एक ख़ूबसूरत जिम्मेदारी है।  ये कोई अवसर या मौका नहीं है।
  10. अपने सुख-दुःख अनुभव करने से बहुत पहले हम स्वयं उन्हें चुनते हैं।
  11. तसल्ली के साथ ज़िन्दगी को मुड़कर देखना ही उसे फिर से जीने जैसा है।
  12. बीता हुआ कल आज की स्मृति है , और आने वाला कल आज का स्वप्न है।
  13. प्रेम के बिना जीवन उस वृक्ष के सामान है जिस पर कभी ना तो बहार आये और ना कभी फल आये |
  14. प्रेम स्वयं अपनी गहराई नहीं जानता है जब तक कि बिछड़ने का वक़्त ना आये ?
  15. यथार्थ में अच्छा वही है जो उन सब लोगों से मिलकर रहता है जो बुरे समझे जाते हैं।
  16. प्यार और शक के बीच दोस्ती कभी मुमकिन नहीं है।  जहाँ प्यार है वहाँ शक नहीं होता।
  17. जो है उसे बेहतर बनाना उन्नति नहीं, लेकिन उसे नई मंज़िल तक लेकर जाना उन्नति है।
  18. आपके जीवन में आज़ादी नहीं है तो आप उस शरीर की तरह है जिसमें से आत्मा गायब है।
  19. यदि तुम्हारे हाथ रुपए से भरे हुए हैं तो फिर वे परमात्मा की वंदना के लिए कैसे उठ सकते हैं।
  20. कष्ट सह कर ही सबसे मजबूत  लोग निर्मित होते हैं, सबसे महान चरित्रों  पर घाव के निशान होते हैं।
  21. थोडा ज्ञान जो प्रयोग में लाया जाए, वो उस बहुत सारे ज्ञान से ,जो बेकार पड़ा है, कहीं अधिक मूल्यवान है।
  22. जो सही है वो लोगों के दिल के करीब होता है , लेकिन जो दयालु है वो भगवान् के दिल के करीब होता है।
  23. आप बिना प्यार के और आधे-अधूरे मन से काम कर रहे हैं तो बेहतर है कि आप उस काम को करना छोड़ दें।
  24. जो पुरुष स्त्रियों की छोटी छोटी गलतियों को माफ़ नहीं करते, वे उनके महान गुणों का सुख नहीं भोग सकते।
  25. यथार्थ महापुरुष वह आदमी है जो न दूसरे को अपने अधीन रखता है और न स्वयं दूसरों के अधीन होता है।
  26. दानशीलता यह है कि अपनी सामर्थ्य से अधिक दो और स्वाभिमान यह है कि अपनी आवश्यकता से कम लो।
  27. जब हम एक-दूसरे की मदद करने या उन्हें समझाने के लिए मुड़ते हैं तो हम अपने दुश्मनों की संख्या कम कर देते है।
  28. यदि तुम जाति, देश और व्यक्तिगत पक्षपातों से जरा ऊँचे उठ जाओ तो निःसंदेह तुम देवता के समान बन जाओगे।
  29. विश्वास और भरोसे की दिल में अलग जगह होती है।  हर वक़्त सोचते रहने से विश्वास हासिल नहीं किया जा सकता है।
  30. जो बीत चुका है वो आज के लिए सुन्दर याद है, लेकिन आने वाला कल आज के लिए किसी हसीन सपने से कम नहीं है।
  31. यदि तुम्हारे हृदय में ईर्ष्या, घृणा का ज्वालामुखी धधक रहा है, तो तुम अपने हाथों में फूलों के खिलने की आशा कैसे कर सकते हो?
  32. ज्ञान ज्ञान नहीं रह जाता जब वह इतना अभिमानी हो जाए कि रो भी ना सके, इतना गंभीर हो जाए कि हँस भी ना सके और  इतना स्वार्थी हो जाये कि अपने सिवा किसी और का अनुसरण ना कर सके।
  33. यदि तुम अपने अंदर कुछ लिखने की प्रेरणा का अनुभव करो तो तुम्हारे भीतर ये बातें होनी चाहिए- 1.ज्ञान कला का जादू, 2. शब्दों के संगीत का ज्ञान और 3. श्रोताओं को मोह लेने का जादू।
  34. दोस्ती की मिठास में हास्य और खुशियों का बांटना होना चाहिए। क्योंकि छोटी -छोटी चीजों की ओस में दिल अपनी सुबह खोज लेता है और तरोताज़ा हो जाता है।
  35. किसी व्यक्ति के दिल और दिमाग को समझने के लिए यह न देखिए कि वह क्या हासिल कर चूका है। इस बात की तरफ ध्यान दीजिए कि वह क्या हासिल करने की ख्वाहिश रख रहा है।
  36. यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो उसे जाने दें , क्योंकि यदि वो लौट कर आता हैं तो वो हमेशा से आपका था। और यदि नहीं लौटता हैं तो वो कभी आपका था ही नहीं।
  37. जो शिक्षक वास्तव में बुद्धिमान है वो आपको अपनी बुद्धिमता में प्रवेश करने का आदेश नहीं देता बल्कि वो आपको आपकी बुद्धि की पराकाष्ठा तक ले जाता है।
  38. आगे बढ़ो, कभी रुको मत , क्योंकि आगे बढ़ना पूर्णता है | आगे बढ़ो और रास्ते में आने वाले काँटों से डरो मत , क्योंकि वे सिर्फ गन्दा खून निकालते हैं|
  39. मैं तुमसे प्रेम करता हूँ जब तुम अपने मस्जिद में झुकते हो, अपने मंदिर में घुटने टेकते हो, अपने गिरजाघर में प्रार्थना करते हो। क्योंकि तुम और मैं एक ही धर्म की संतान हैं , और यही भावना है।
  40. मुझे उस ज्ञान से दूर रखो जो रोता न हो , उस दर्शन से दूर रखो जो हँसता न हो और उस महानता से दूर रखो जो बच्चों के सामने सर न झुकाता हो।
  41. अगर आपने अपना कोई रहस्य किसी एक व्यक्ति को बताया है, तो आप उसे अपने इस रहस्य को दूसरे लोगो को बताने से रोक नहीं सकते है।
  42. एक दूसरे से प्रेम करें, लेकिन प्रेम का कोई बंधन ना बाधें , बल्कि इसे अपनी आत्माओं के किनारों के बीच एक बहते हुए सागर के सामान रहने दें।
  43. कोई आपको ज़ख्म देता है तो बेशक आप उसे एक बार भूल जाए, लेकिन अगर आप किसी को दर्द पहुंचाते हो तो उसे जीवन भर नहीं भूल पाते हो।
  44. दानशीलता यह नहीं है कि तुम मुझे वह वस्तु दे दो, जिसकी मुझे आवश्यकता तुमसे अधिक है, बल्कि यह है कि तुम मुझे वह वस्तु दो, जिसकी आवश्यकता तुम्हें मुझसे अधिक है।
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दुर्जन: सज्जनो भूयात सज्जन: शांतिमाप्नुयात्।
शान्तो मुच्येत बंधेम्यो मुक्त: चान्यान् विमोच्येत्॥

दुर्जन सज्जन बनें, सज्जन शांति बनें। शांतजन बंधनों से मुक्त हों और मुक्त अन्य जनों को मुक्त करें।