Posted in सुभाषित - Subhasit

बुद्धयो भयं प्रणुदति तपसा विन्दते महत्।
गुरुशुश्रूषया ज्ञानं शान्तिं योगेन विन्दति॥

अर्थात् :- ज्ञान द्वारा मनुष्य का डर दूर होता है, तप द्वारा उसे ऊँचा पद मिलता है। गुरु की सेवा द्वारा विद्या प्राप्त होती है तथा योग द्वारा शांति प्राप्त होती है।।

Advertisements
Posted in सुभाषित - Subhasit

पुत्रो तिष्ठति जन्मगोत्रभवने कन्या सदा द्विकुले,
सर्वेषां कुलवर्धिनी खलु सदा एकैव कन्या शुभा।
धर्मज्ञानकरी सदासुखकरी धात्रीस्वरूपास्थिता,
तर्हि सन्तति चेद्भवेन्निजकुले कन्या सदा सा भवेत्॥

अर्थात – पुत्र तो एक ही गोत्र में रहता है, परन्तु कन्या दोनों कुलों में निवास करती है। सभी के कुल को बढ़ानेवाली एक सुलक्षणा कन्या ही है। धर्म का ज्ञान करानेवाली, सदा सुख प्रदान करनेवाली, पोषण करनेवाली के समान स्थित रहती है। इसीलिए घर में संतति हो तो सर्वदा एक कन्या अवश्य ही हो।

(श्रीराघवेंद्रचरितम्, पूर्वकाण्ड, सुद्युम्न प्रकरण)

Posted in सुभाषित - Subhasit

सुप्रभातम्

निन्दन्तु नीतिनिपुणा
यदि वा स्तुवन्तु
लक्ष्मीः स्थिरा भवतु
गच्छतु वा यथेष्टम्।
अद्यैव वा मरणमस्तु
युगान्तरे वा
न्याय्यात्पथः प्रविचलन्ति
पदं न धीराः॥

नीति में निपुण मनुष्य चाहे निंदा करें या प्रशंसा, लक्ष्मी आयें या इच्छानुसार चली जायें, आज ही मृत्यु हो जाए या युगों के बाद हो परन्तु धैर्यवान मनुष्य कभी भी न्याय के मार्ग से अपने कदम नहीं हटाते हैं॥

जय श्री कृष्ण

Posted in सुभाषित - Subhasit

विधूय क्लेशान्मे कुरु चरणयुग्मं धृतरसं
भवत्क्षेत्रप्राप्तौ करमपि च ते पूजनविधौ ।
भवन्मूर्त्यालोके नयनमथ ते पादतुलसी-
परिघ्राणे घ्राणं श्रवणमपि ते चारुचरिते ॥

हे ईश! मेरे समस्त क्लेषों को समाप्त कर के, ऐसी कृपा कीजिये कि मेरे दो पग आपके तीर्थ क्षेत्रों में पहुंचने के रस में आसक्त हों। मेरे हाथ आपकी पूजा करने की विधि में, नेत्र आपकी प्रतिमा के दर्शन में, नासिका आपके चरणों मे अर्पित तुलसिका को सूंघने में, और कान भी आपके सुन्दर चरित को सुनने का रसास्वादन करें।

Posted in सुभाषित - Subhasit

धरती फाटै मेघ मिलै,
कपडा फाटै डौर,
तन फाटै को औषधि,
मन फाटै नहिं ठौर।

जब धरती फटने लगे अर्थात दरारे पड़ जाये तो मेघों द्वारा जल बरसाने पर दरारें बन्द हो जाती हैं और वस्त्र फट जाये तो सिलाई करने पर जुड़ जाता है। चोट लगने पर तन में दवा का लेप किया जाता है, जिससे शरीर का घाव ठीक हो जाता है किन्तु मन के फटने पर कोई औषधि या उपाय कारगर सिद्ध नहीं होता। अतः प्रयास रहे कि आपकी वाणी से किसी को ठेस न लगे।

🌺 *।।सुप्रभातम।।*🌺
Posted in सुभाषित - Subhasit

।।🍀जय माँ लक्ष्मी🍀।।

तुलसी वृक्ष न जानिए,
गाय ना जानिए ढोर।।
माता-पिता मनुष्य ना जानिए,
ये तीनों नन्द किशोर।।

अर्थात : तुलसी को कभी वृक्ष नहीं समझना चाहिए, और गाय को कभी पशु ना समझे, तथा माता-पिता को कभी मनुष्य ना समझें, क्योंकि ये तीनो तो साक्षात भगवान का रूप हैं।

Posted in सुभाषित - Subhasit

सुप्रभात,जय श्री कृष्ण

सज्जनस्य हृदयं नवनीतं
यद्वदन्ति कवयस्तदलीकं।
अन्यदेहविलसत्परितापात्
सज्जनो द्रवति नो नवनीतम्॥

कविगण सज्जनों के हृदय को जो नवनीत (मक्खन) के समान बताते हैं, वह भी असत्य ही है। दूसरे के शरीर में उत्पन्न ताप (दुःख) से सज्जन तो पिघल जाते हैं पर मक्खन नहीं पिघलता॥