Posted in लक्ष्मी प्राप्ति - Laxmi prapti

लक्ष्मी प्राप्ति की इच्छा हर किसी को होती है। लक्ष्मी कृपा के लिए भगवान विष्णु की कृपा पाना अत्यन्त अवश्यक है क्योंकि लक्ष्मी उन्हीं के चरणों में रहती हैं। शास्त्रों में या भगवान विष्णु के किसी भी तस्वीर को देखें, आप पाएंगे कि मां लक्ष्मी सदैव उनके चरणों में बैठी उनके चरण दबाती ही दिखती हैं।

इस बारे में एक #पौराणिक कहानी है कि देवर्षि नारद ने एक बार धन की देवी लक्ष्मी से पूछा कि आप हमेशा श्री हरि #विष्णु के चरण क्यों दबाती रहती हैं? इस पर लक्ष्मी जी ने कहा कि ग्रहों के प्रभाव से कोई अछूता नहीं रहता, वह चाहे मनुष्य हो या फिर देवी-देवता।

महिला के हाथ में देवगुरु बृहस्पति वास करते हैं और पुरुष के पैरों में दैत्यगुरु शुक्राचार्य। जब महिला पुरुष के चरण दबाती है, तो देव और दानव के मिलन से धनलाभ का योग बनता है। इसलिए मैं हमेशा अपने स्वामी के चरण दबाती हूं।

भगवान विष्णु ने उन्हें अपने पुरुषार्थ के बल पर ही वश में कर रखा है। लक्ष्मी उन्हीं के वश में रहती है जो हमेशा सभी के कल्याण का भाव रखता हैं। विष्णु के पास जो लक्ष्मी हैं वह धन और सम्पत्ति है। भगवान श्री हरि उसका उचित उपयोग जानते हैं। इसी वजह से महालक्ष्मी श्री विष्णु के पैरों में उनकी दासी बन कर रहती हैं।

वहीं एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, अलक्ष्मी अपनी बहन #लक्ष्मी से बेहद ईर्ष्या रखती हैं। वह बिल्कुल भी आकर्षक नहीं हैं, उनकी आंखें भड़कीली, बाल फैले हुए और बड़े-बड़े दांत हैं। यहां तक कि जब भी देवी लक्ष्मी अपने पति के साथ होती हैं, अलक्ष्मी वहां भी उन दोनों के साथ पहुंच जाती थीं।

अपनी बहन का ये बर्ताव देवी लक्ष्मी को बिल्कुल पसंद नहीं आया और उन्होंने अलक्ष्मी से कहा कि तुम मुझे और मेरे पति को अकेला क्यों नहीं छोड़ देती। इस पर अलक्ष्मी ने कहा कि कोई मेरी आराधना नहीं करता, मेरा पति भी नहीं है, इसलिए तुम जहां जाओगी, मैं तुम्हारे साथ रहूंगी।
इस पर देवी लक्ष्मी क्रोधित हो गईं और आवेग में उन्होंने अलक्ष्मी को #श्राप दिया कि मृत्यु के देवता तुम्हारे पति हैं और जहां भी गंदगी, ईर्ष्या, लालच, आलस, रोष होगा, तुम वहीं रहोगी।

इस प्रकार भगवान विष्णु और अपने पति के चरणों में बैठकर माता लक्ष्मी उनके चरणों की गंदगी को दूर करती हैं, ताकि अलक्ष्मी उनके निकट न आ सकें। इस तरह वे पति को पराई स्त्री से दूर रखने की हर संभव कोशिश कर रही हैं।
माना जाता है सौभाग्य और दुर्भाग्य एक साथ चलते हैं। जब आपके ऊपर सौभाग्य की वर्षा होती है, तब दुर्भाग्य वहीं पास में खड़ा अपने लिए मौका तलाशता है। अलक्ष्मी भी कुछ इसी तरह घर के बाहर बैठकर लक्ष्मी के जाने का इंतजार करती हैं।
जहां भी गंदगी मौजूद होती है, वहां लालच, ईर्ष्या, पति-पत्नी के झगड़े, अश्लीलता, क्लेश और कलह का वातावरण बन जाता है। यह निशानी है कि घर में अलक्ष्मी का प्रवेश हो चुका है। अलक्ष्मी को दूर रखने और लक्ष्मी को आमंत्रित करने के लिए हिन्दू धर्म से जुड़े प्रत्येक घर में सफाई के साथ-साथ नित्य पूजा-पाठ किया जाता है ताकि घर के लोगों को नकारात्मक ऊर्जा से बचाया जा सके। *!! जय श्री हरि !!* *!! जय माँ लक्ष्मी !!* *!! जय श्री विष्णुप्रिया !!* 🙏 जय श्री लक्ष्मीनारायण

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लक्ष्मी प्राप्ति के लिए जलायें संध्या काल में दीपक!!!!!!!!!

शास्त्रों में दिन के अवसान (अन्त) और रात के आगमन अर्थात् दिन और रात के संधि काल को, जब आकाश में न सूर्य हो और न तारे, संध्या काल या सायं काल माना गया है । साधारण भाषा में सूर्यास्त के समय को संध्या काल कहते हैं । हिन्दू धर्म में संध्या काल में भगवान के सामने व तुलसी चौबारे में दीपक जलाने का विधान है, इसी को ‘सांध्य दीप’ कहते हैं ।

संध्या काल में दीप जलाने का महत्व!!!!!!

शास्त्रों में लक्ष्मी प्राप्ति, पापों के नाश, आरोग्य की प्राप्ति व अविद्या रूपी अंधकार (शत्रुओं) के नाश के लिए सांध्य दीप जलाने का बहुत महत्व बताया गया है ।

दीपक जलाते समय रखें इस बात का ध्यान
दीपक को दीवट या थोड़े से चावलों पर ही रखकर जलाना चाहिए । सीधे जमीन पर दीपक जलाकर नहीं रखना चाहिए । इसका कारण यह बताया गया है कि यदि कभी भूल वश दीपक बढ़ (बुझ) जाए तो चावलों या दीवट में रखे होने पर उसका दोष नहीं माना जाता है।

दीपक जलाने के बाद उसे प्रकाश रूप परमात्मा मान कर इस मन्त्र से नमस्कार करना चाहिए—नमस्कार का मन्त्र!!!!!

दीपो ज्योति: परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन: ।
दीपो हरतु मे पापं सांध्यदीप ! नमोस्तु ते ।।
शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुख सम्पदम् ।
शत्रुबुद्धि विनाशं च दीपज्योति नमोऽस्तु ते ।।

अर्थात्—हे सांध्य दीप ! आपकी ज्योति (प्रकाश) परब्रह्म परमात्मा है, आपका प्रकाश भगवान जनार्दन का रूप है । यह प्रकाश मेरे पापों का नाश कर दे, मैं आपको नमस्कार करता हूँ । हे सांध्य दीप ! आपका प्रकाश मंगलकारी, कल्याण करने वाला, आरोग्य व सुख-सम्पत्ति देने वाला और शत्रु की बुद्धि भ्रष्ट करने वाला है, मैं आपको नमस्कार करता हूँ ।

पूज्य संत श्रीरामचन्द्र डोंगरेजी महाराज द्वारा सांध्य दीप जलाने की सुन्दर व्याख्या!!!!!

पूज्य सन्त श्रीरामचन्द्र डोंगरेजी महाराज ने संध्या समय दीपक जलाने की बहुत सुन्दर व्याख्या की है । भगवान सूर्य बुद्धि के देवता हैं। सूर्य अस्त होने पर मनुष्य की बुद्धि-विवेक कमजोर हो जाते हैं और वासनाएं प्रबल हो जाती हैं । संध्या काल प्रदोष काल है । इस समय शंकरजी की पूजा होती है । इसीलिए संध्या काल में भक्ति करने (जप, कीर्तन, भजन, आरती) का बहुत महत्व है ।

संध्या समय भगवान के नाम का दीपक जलाना चाहिए । भगवान को दीपक की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि परमात्मा स्वयं प्रकाशमय है । भगवान का श्रीअंग करोड़ों सूर्यों के प्रकाश के समान है—‘कोटिसूर्य समप्रभ’ । इसलिए भगवान जहां विराजते हैं वहां अंधेरा आता ही नहीं है । दीपक के प्रकाश की आवश्यकता मानव को है । मानव के मन में अज्ञान का, वासना का अंधकार रहता है । इसलिए भगवान के समक्ष दीपक जलाकर प्रार्थना करनी चाहिए मेरे अंदर आपका प्रकाश (सद्बुद्धि) सदैव बनी रहे ।

प्राय: हम कहते हैं दीपक जोड़ दो अर्थात् जला दो । इसका सीधा अर्थ है कि अपने मन-बुद्धि को प्रकाश रूपी परमात्मा से जोड़ देना । जब बुद्धि परमात्मा से जुड़ जाती है, तब वह सद्बुद्धि हो जाती है । जहां सद्बुद्धि है वहां धर्म है, जहां धर्म है वहीं लक्ष्मी निवास करती है।

विशेष बात : संध्या काल में क्या न करें ?

संध्या काल प्रकाश रूप परमात्मा से जुड़ने का समय है इसलिए इस समय न तो खाना खाना चाहिए क्योंकि इससे अस्वस्थता आती है, न पढ़ना चाहिए क्योंकि पढ़ा हुआ याद नहीं रहता और न ही काम भावना रखनी चाहिए क्योंकि ऐसे समय के बच्चे आसुरी गुणों के होते हैं । यह समय केवल भगवान से जुड़ने और उनको स्मरण करने का है ।

संध्या आरती!!!!!!!

संतों ने भगवान की आरती की तरह संध्या काल की आरती का भी बहुत महत्व बताया है, इसे ‘संध्या आरती’ कहते हैं । एक बहुत ही सुन्दर व भावपूर्ण संध्या आरती पाठकों की सुविधा के लिए दी गयी है । इसको यदि कंठस्थ करके सांध्य दीप जलाते समय गा लिया जाए तो मन में बहुत शान्ति मिलती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है ।

व्रज में संध्या काल को संजा कहते हैं, चूंकि यह व्रज में गाया जाने वाला भजन है इसलिए इसमें संध्या के लिए ‘संजा’ शब्द का प्रयोग हुआ है । इस संध्या आरती में साधक अपने मन को सांध्य दीप जलाकर ईश्वर को स्मरण करने के लिए कह रहा है ।

संध्या आरती (भजन)!!!!!!

मन रे तू संजा सुमिरन कर ले,
अरे मन संजा सुमिरन कर ले ।
भोले मन संजा सुमिरन कर ले ।।
काहे को दिवला काहे की बाती,
काहे को घृत जले दिन-राती ।
अरे मन संजा तू …….।।
सोने का दिवला कपूर की बाती,
सुरही (गाय) का घृत जले दिन-राती ।
दीपक जोड़ धरौ मन्दिर में, जगमग होय उजालो,
अरे मन संजा तू …….।।
मेरे ही अंगना तुलसी को बिरवा, जाय ही सींचों करो रे,
संजा, सवेरे और दुपहरी तीनों वक्त हरि कू भजो रे ।
चोरी, बुराई पर-घर निंदा इन तीनन से बचो रे ।।
अरे मन संजा तू …….।।
जा काहू को लेनो और देनो, याही जनम चुकता कर ले,
पाप-पुण्य की बांधि गठरिया, अपने ही सिर पर रखो रे ।
मात-पिता और गुरु अपने की, इनकी सेवा कर ले ।।
अरे मन संजा तू …….।।
काहे की नाव, काहे को खेवा, कौन लगावै बेड़ा पार रे,
सत्य की नाव, धर्म को खेवा, कृष्ण लगावें बेड़ा पार रे ।।
अरे मन संजा तू …….।।
काहे के चंदा, काहे के सूरज, कौन बसै संसार रे ।
सत्य के चंदा,धर्म के सूरज,पाप बसै संसार रे।।
अरे मन संजा तू …….।।

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आर्थिक तंगी दूर करने के लिए करें हनुमानजी की आराधना एवं पीपल के पत्तों का उपाय –


☘️💐आर्थिक तंगी दूर करने के लिए करें हनुमानजी की आराधना एवं पीपल के पत्तों का उपाय -☘️💐
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शास्त्रों के अनुसार हनुमानजी शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवी-देवताओं में से एक हैं। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस के अनुसार माता सीता द्वारा पवनपुत्र हनुमानजी को अमरता का वरदान दिया गया है। इसी वरदान के प्रभाव से इन्हें भी अष्टचिरंजीवी में शामिल किया जाता है। कलयुग में हनुमानजी भक्तों की सभी मनोकामनाएं तुरंत ही पूर्ण करते हैं।

बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के उपाय बताए गए हैं। इन्हीं उपायों में से एक उपाय यहां बताया जा रहा है। इस उपाय को विधिवत किया जाए तो बहुत जल्दी सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं। यह उपाय पीपल के पत्तों से किया जाता है।

श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमानजी की कृपा प्राप्त होते ही भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं। पैसों से जुड़ी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। कोई रोग हो तो वह भी नष्ट हो जाता है। इसके साथ ही यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह दोष हो तो पवनपुत्र की पूजा से वह भी दूर हो जाता है। हनुमानजी की पूजा में पवित्र का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति पैसों की तंगी का सामना करना रहा है तो उसे प्रति मंगलवार और शनिवार को पीपल के 11 पत्तों का यह उपाय अपनाना चाहिए।

उपाय इस प्रकार है👉 प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त में उठें। इसके बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर किसी पीपल के पेड़ से 11 पत्ते तोड़ लें। ध्यान रखें पत्ते पूरे होने चाहिए, कहीं से टूटे या खंडित नहीं होने चाहिए। इन 11 पत्तों पर स्वच्छ जल में कुमकुम या अष्टगंध या चंदन मिलाकर इससे पूरे पत्ते पर आगे पीछे सभी तरफ अधिक से अधिक संख्या में श्रीराम का नाम लिखें। नाम लिखते समय हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करते रहें।

जब सभी पत्तों पर श्रीराम नाम लिख लें, उसके बाद राम नाम लिखे हुए इन पत्तों की एक माला बनाएं। इस माला को किसी भी हनुमानजी के मंदिर जाकर वहां बजरंगबली को अर्पित करें। इस प्रकार यह उपाय करते रहें। कुछ समय में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।

ध्यान रखें उपाय करने वाला भक्त किसी भी प्रकार के अधार्मिक कार्य न करें। अन्यथा इस उपाय का प्रभाव निष्फल हो जाएगा। उचित लाभ प्राप्त नहीं हो सकेगा। साथ ही अपने कार्य और कर्तव्य के प्रति ईमानदार रहें।

🌺🌺हनुमान जी को प्रसन्न करने के अन्य उपाय!
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👉 किसी भी हनुमान मंदिर जाएं और अपने साथ नारियल लेकर जाएं। मंदिर में नारियल को अपने सिर पर सात बार वार लें। इसके बाद यह नारियल हनुमानजी के सामने फोड़ दें। इस उपाय से आपकी सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी।

👉 शनिवार को हनुमानजी के मंदिर में 1 नारियल पर स्वस्तिक बनाएं और हनुमानजी को अर्पित करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें।

👉 हनुमानजी को सिंदूर और तेल अर्पित करें। जिस प्रकार विवाहित स्त्रियां अपने पति या स्वामी की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं, ठीक उसी प्रकार हनुमानजी भी अपने स्वामी श्रीराम के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगाते हैं। जो भी व्यक्ति शनिवार को हनुमानजी को सिंदूर अर्पित करता है उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।

👉 अपनी श्रद्धा के अनुसार किसी हनुमान मंदिर में बजरंग बली की प्रतिमा पर चोला चढ़वाएं। ऐसा करने पर आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएंगी।

👉 हनुमानजी के सामने शनिवार की रात को चौमुखा दीपक लगाएं। यह एक बहुत ही छोटा लेकिन चमत्कारी उपाय है। ऐसा नियमित रूप से करने पर आपके घर-परिवार की सभी परेशानियां समाप्त हो जाती हैं।

👉 किसी पीपल पेड़ को जल चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें। इसके बाद पीपल के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें।

🌺विशेष-
उपाय करते समय धैर्य का परिचय दें कोई भी उपाय तुरंत लाभ नही दे सकता पहले प्रारब्ध कमजोर करेगा उसके बाद ही लाभ होगा।

ओली अमित

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लक्ष्मी प्राप्ति की इच्छा रखते हैं…???
एकादशी-शुक्रवार-6 मार्च को आँवले से स्नान करें एवं लक्ष्मी नारायण को आँवला अर्पित करें ।
शुभमस्तु

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💥दारिद्रय दहन स्त्रोत💥
आर्थिक परेशानी और कर्ज से मुक्ति दिलाता है शिवजी का दारिद्रय दहन स्तोत्र. कारगर मंत्र है आजमाकर देखे

जो व्यक्ति घोर आर्थिक संकट से जूझ रहे हों, कर्ज में डूबे हों, व्यापार व्यवसाय की पूंजी बार-बार फंस जाती हो उन्हें दारिद्रय दहन स्तोत्र से शिवजी की आराधना करनी चाहिए.

महर्षि वशिष्ठ द्वारा रचित यह स्तोत्र बहुत असरदायक है. यदि संकट बहुत ज्यादा है तो शिवमंदिर में या शिव की प्रतिमा के सामने प्रतिदिन तीन बार इसका पाठ करें तो विशेष लाभ होगा.

जो व्यक्ति कष्ट में हैं अगर वह स्वयं पाठ करें तो सर्वोत्तम फलदायी होता है लेकिन परिजन जैसे पत्नी या माता-पिता भी उसके बदले पाठ करें तो लाभ होता है.

शिवजी का ध्यान कर मन में संकल्प करें. जो मनोकामना हो उसका ध्यान करें फिर पाठ आरंभ करें.

श्लोकों को गाकर पढ़े तो बहुत अच्छा, अन्यथा मन में भी पाठ कर सकते हैं. आर्थिक संकटों के साथ-साथ परिवार में सुख शांति के लिए भी इस मंत्र का जप बताया गया है.

।।दारिद्रय दहन स्तोत्रम्।।
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विश्वेशराय नरकार्ण अवतारणाय
कर्णामृताय शशिशेखर धारणाय।

कर्पूर कान्ति धवलाय, जटाधराय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।१

गौरी प्रियाय रजनीश कलाधराय,
कलांतकाय भुजगाधिप कंकणाय।

गंगाधराय गजराज विमर्दनाय
द्रारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।२

भक्तिप्रियाय भवरोग भयापहाय
उग्राय दुर्ग भवसागर तारणाय।

ज्योतिर्मयाय गुणनाम सुनृत्यकाय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।३

चर्माम्बराय शवभस्म विलेपनाय,
भालेक्षणाय मणिकुंडल-मण्डिताय।

मँजीर पादयुगलाय जटाधराय
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।४

पंचाननाय फणिराज विभूषणाय
हेमांशुकाय भुवनत्रय मंडिताय।

आनंद भूमि वरदाय तमोमयाय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।५

भानुप्रियाय भवसागर तारणाय,
कालान्तकाय कमलासन पूजिताय।

नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।६

रामप्रियाय रधुनाथ वरप्रदाय
नाग प्रियाय नरकार्ण अवताराणाय।

पुण्येषु पुण्य भरिताय सुरार्चिताय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।७

मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय
गीतप्रियाय वृषभेश्वर वाहनाय।

मातंग चर्म वसनाय महेश्वराय,
दारिद्रय दुख दहनाय नमः शिवाय।।८

वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्व रोग निवारणम्
सर्व संपत् करं शीघ्रं पुत्र पौत्रादि वर्धनम्।।

शुभदं कामदं ह्दयं धनधान्य प्रवर्धनम्
त्रिसंध्यं यः पठेन् नित्यम् स हि स्वर्गम् वाप्युन्यात्।।९

।।इति श्रीवशिष्ठरचितं दारिद्रयुदुखदहन शिवस्तोत्रम संपूर्णम।।

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💐 जय श्री काल भैरवाय नम:💐
रामनगर जसवाडी रोड खंडवा

हंस जैन 98272 14427 आज का वास्तु ज्ञान

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सुबह मुख्य दरवाजे के बाहर से सफाई करके एक गिलास पानी छिड़क दें। इससे घर में धन की बरकत होती है।

अशोक का पेड़ लगाने और उसको सींचने से धन में वृद्धि होती है।
अशोक के पेड़ की जड़ का एक टुकड़ा पूजा घर में रखने और रोजाना उसकी पूजा करने से घर में धन की कमी नहीं रहती।

सूर्योदय के समय यदि घर की छत पर काले तिल बिखेर दें तो घर में सुख समृद्धि बनी रहती है।

पानी की बाल्टी में 2 चम्मच नमक डाल दें फिर पोंछा लगाएं। इससे नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।

यदि पति-पत्नी में झगड़ा होता रहता है, तो पूजा घर में मंगल यंत्र रखें। साथ ही रोज रसोई बनाने के पश्चात् चूल्हे को दूध से ठंडा करें। इससे संबंधों में मधुरता आती है।

सदा पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोएं। पूर्व की तरफ सिर करके सोने से विद्या की प्राप्ति होती है। दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोने से धन और आयु में वृद्धि होती है।

तुलसी के गमले में दूसरा कोई पौधा ना लगाएं। तुलसी हमेशा घर के पूर्व या उत्तर दिशा में लगाएं।

मकान के उत्तरी एवं पूर्वी भाग में खाली जगह अधिक हो। इससे व्यापार वृद्धि के साथ आर्थिक उन्नति में भी वृद्धि होती है।

तिजोरी के लॉकर में हमेशा दो बॉक्स रखें। एक में कुछ रूपए रख कर बंद कर दें और उसमें से रूपए ना निकालें। दूसरे बॉक्स में से काम के लिए रूपए निकालें।
घर में पड़ा टूटा-फूटा फर्नीचर, बर्तन, कांच, फटे हुए कपड़े और कतरनें पड़ी हों तो तुरंत घर से निकाल दें।

हंस जैन 98272 14427 🌺🌺⛔⛔🌺🌺

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आदि लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु परब्रह्म स्वरूपिणि।
यशो देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
सन्तान लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पुत्र-पौत्र प्रदायिनि।
पुत्रां देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
विद्या लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु ब्रह्म विद्या स्वरूपिणि।
विद्यां देहि कलां देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
धन लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व दारिद्र्य नाशिनि।
धनं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
धान्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वाभरण भूषिते।
धान्यं देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
मेधा लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु कलि कल्मष नाशिनि।
प्रज्ञां देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।

गज लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वदेव स्वरूपिणि।
अश्वांश गोकुलं देहि सर्व कामांश्च देहि मे।।
शुभ प्रभात दोस्तों 🙏

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दिवाली की रात में कहां-कहां दीपक लगाने चाहिए।

1- पीपल के पेड़ के नीचे दीपावली की रात एक दीपक लगाकर घर लौट आएं। दीपक लगाने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। ऐसा करने पर आपकी धन से जुड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं।
2- यदि संभव हो सके तो दिवाली की रात के समय किसी श्मशान में दीपक लगाएं। यदि यह संभव ना हो तो किसी सुनसान इलाके में स्थित मंदिर में दीपक लगा सकते हैं।
3- धन प्राप्ति की कामना करने वाले व्यक्ति को दीपावली की रात मुख्य दरवाजे की चौखट के दोनों ओर दीपक अवश्य लगाना चाहिए।
4- हमारे घर के आसपास वाले चौराहे पर रात के समय दीपक लगाना चाहिए। ऐसा करने पर पैसों से जुड़ी समस्याएं समाप्त हो सकती हैं।
5- घर के पूजन स्थल में दीपक लगाएं, जो पूरी रात बुझना नहीं चाहिए। ऐसा करने पर महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
6- किसी बिल्व पत्र के पेड़ के नीचे दीपावली की शाम दीपक लगाएं। बिल्व पत्र भगवान शिव का प्रिय वृक्ष है। अत: यहां दीपक लगाने पर उनकी कृपा प्राप्त होती है।
7- घर के आसपास जो भी मंदिर हो वहां रात के समय दीपक अवश्य लगाएं। इससे सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
8- घर के आंगन में भी दीपक लगाना चाहिए। ध्यान रखें यह दीपक भी रातभर बुझना नहीं चाहिए।
9- घर के पास कोई नदी या तालब हो तो बहा पर रात के समय दीपक अवश्य लगाएं। इस से दोषो से मुक्ति मिलती है !
10- तुलसी जी और के पेड़ और सालिगराम के पास रात के समय दीपक अवश्य लगाएं। ऐसा करने पर महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
11- पित्रो का दीपक गया तीर्थ के नाम से घर के दक्षिण में लगाये ! इस से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है

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स्कंदपुराण के अनुसार :

लक्ष्मी प्राप्ति की इच्छा रखने वाले मनुष्य को सदा आँवले(आँवले का रस-जल) से स्नान करना चाहिए ।

अर्थात नहाने के पानी में आँवले का रस डालकर या शरीर पर आँवले का रस लगाकर स्नान कर सकते हैं ।

कुछ धर्म ग्रंथो में आंवले के चूर्ण(पावडर) के उपयोग करने का भी लिखा गया है, इसलिए आप आंवले के चूर्ण को भी नहाने के पानी में डालकर या शरीरपर रगड़ कर स्नान कर सकते हैं ।
लेकिन कोशिश कीजिये की यथासंभव आँवले के रस का ही उपयोग करें ।

विशेषतः एकादशी तिथि को आँवले से स्नान करने पर भगवान् विष्णु संतुष्ट होते हैं ।

जिनके सिर के बाल आँवला मिश्रित जल से रंगे जाते हैं वे मनुष्य कलियुग के दोषों का नाश करके भगवान् विष्णु को प्राप्त होते हैं ।

जिसके घर में सदा आँवला रखा रहता है वहाँ भूत, प्रेत, कुष्मांड और राक्षस नहीं आते।

आज कल बहुत सारी कंपनियों के आँवला रस बाज़ार में उपलब्ध हैं आप वो उपयोग कर सकते हैं या बाज़ार से आँवले लाकर घर पर ही उनका रस निकालकर उपयोग कर सकते हैं ।

Nasibwala के पाठकों को आँवले के रस से स्नान के लिए हमने अगस्त महीने का तैयार चार्ट इस पोस्ट के साथ दिया है ताकि आप सभी लाभ ले सकें ।

हाँ-उस दिन आँवले से स्नान करना है
नहीं-उस दिन आँवले से स्नान नहीं करना है

नोट:पोस्ट शेयर जरूर करें, ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें !

ज्ञान अमृत निरंतर प्रवाहित होते रहे इसलिए Nasibwala के पेज को लाइक करें एवं पोस्ट शेयर करते रहें ।

अपने मित्रों, रिश्तेदारों,सहकर्मियों को Nasibwala का पेज लाइक करने के लिए आमंत्रित करें ताकि अधिक से अधिक लोग इन उपायों
का फायदा ले सकें ।

आँवले से स्नान कीजिये, लक्ष्मीवान बनिए
नसीबवाला से जुड़िये, नसीबवाला बनिए

शुभमस्तु

जय श्री नारायण
हर हर महादेव

नसीबवाला
Nasibwala