Posted in यत्र ना्यरस्तुपूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:

लोग पता नहीं अपनी बीवियों से इतना डरते क्यों हैं…???


लोग पता नहीं अपनी बीवियों से इतना डरते क्यों हैं…???
.

.

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अपन तो इस मामले में भैया…
राजा हैं अपने घर के……
.
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ठन्डे पानी से बर्तन धोने का मूड हो तो ठन्डे से धोयेंगे…

गरम का मूड हो तो गरम से……
ज्यादा तो किसी की सुनी ही नहीं आजतक…😀
पोछा फिनायल का लगेगा या लाइजोल का ये अपन खुद डिसाइड करते हैं……
बीवी की इतनी हिम्मत नहीं कि चूं कर जाए…….
.

सुबह चाय बनाकर जब बीवी को जगाते हैं तो ये हम निर्णय लेते हैं कि वो चाय बेड में बैठे-बैठे पीयेगी या ड्राइंग रूम में या फिर बालकनी में….
मजाल है जो अपने निर्णय की खिलाफत हो….

..

.

कपडे सर्फ़ एक्सेल से धुले जाने हैं या टाइड से…?
वहाँ भी अपनी ही सल्तनत चलती है……
उस बारे में बीवी को इतना पिछड़ा बना रखा है कि उसे वाशिंग मशीन तक चलानी नहीं आती….
झाडू तीलियों वाले झाडू से मारना है या फूल वाले से….
ये फर्श का मुआयना करने के बाद बादशाह हज़रत खुद डिसाइड करते हैं…
खाने में हमें कब क्या बनाना है इस बारे में बीवी कौन होती है कुछ कहने वाली…
हमारी जो मर्जी होगी उससे पूछ के हम बनायेंगे….
कांच पानी के गीले कपडे से साफ़ होने हैं या कोलीन से इस बारे में बहस की तो कोई गुंजाइश ही नहीं है अपने घर में….
सन्डे को टॉयलेट सुबह साफ़ होगा या शाम को ये भी हम ही फिक्स करते हैं……
और सबसे बड़ी बात….
रात में सोने से पहले बीवी का पहले सर दबाना है या पाँव..
ये फैसला हम ऑन द स्पॉट लेते हैं….
भई घर के सभी अहम् और बड़े फैसले लेना ही तो मर्दों की शान है….
अब जलने वालों का क्या है जी…
उनका तो काम ही है जलना…
लेकिन भाई अपनी जैसी किस्मत और हौसला इंसान लेकर पैदा होता है …
आप लोग निराश मत होना मेरा मकसद ना तो आपको जलाना था और ना ही आपका मनोबल तोड़ने का…
एक सफल पति 😁😅😆

Posted in यत्र ना्यरस्तुपूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:

खाना बनाने के लिए बाई रखने का मन हुआ ,


खाना बनाने के लिए बाई रखने का मन हुआ ,

कल एक बाई से पूछा – खाली रोटी बनाने का क्या लेती हो ?

पहले तो एक पूरी प्रश्नावली आई ।
कितने लोग हैं ? एक समय या दोनों समय ?
कितनी बनवाएंगी ?
सारी गणना के बाद जवाब आया — एक समय और बारह रोटी का 12सौ रूपया ।

सुनकर चौंक गई । मन ही मन हिसाब लगाया तो पता चला इस दर से पिछले 40साल में मैं तो 8-10 लाख रूपयों की तो सिर्फ रोटी बेल चुकी हूं ।

#### जब कभी औरतों के श्रम का इतिहास लिखा जायेगा, एक बहुत बड़ा घोटाला उजागर होगा।

Posted in यत्र ना्यरस्तुपूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:

#क्या नारी सिर्फ भोग की वस्तु है ?

कृपया पूरा पढ़े :-

☞ जब वोडाफोन के एक विज्ञापन में दो पैसो मे

लड़की पटाने की बात की जाती है तब कौन

ताली बजाता है?

☞ हर विज्ञापन ने अधनंगी नारी दिखा कर ये

विज्ञापन एजेंसिया / कम्पनियाँ क्या सन्देश

देना चाहती है ?

☞ इस पर कितने चैनल बहस करेंगे ?

☞ पेन्टी हो या पेन्ट हो, कॉलगेट या पेप्सोडेंट हो,

साबुन या डिटरजेण्ट हो ,कोई भी विज्ञापन हो, सब

में ये छरहरे बदन वाली छोरियो के अधनंगे बदन

को परोसना क्या नारीत्व के साथ बलात्कार

नहीं है?

☞ फिल्म को चलाने के लिए आईटम सॉन्ग के नाम पर

लड़कियो को जिस तरह

मटकवाया जाता है !

☞ या यू कहे लगभग आधा नंगा करके उसके अंग प्रत्यंग

को फोकस के साथ दिखाया जाता है !

☞ क्या वो स्त्रीयत्व के साथ बलात्कार

करना नहीं है?

☞ पत्रिकाए हो या अखबार

सबमे आधी नंगी लड़कियो के फोटो किसके लिए?

और

☞ क्या सिखाने के लिए भरपूर

मात्र मे छापे जाते है?

☞ ये स्त्रीयत्व का बलात्कार

नहीं है क्या?

☞ दिन रात ,टीवी हो या पेपर , फिल्मे

हो या सीरियल, लगातार

स्त्रीयत्व का बलात्कार होते

देखने वाले, और उस पर खुश होने वाले, उसका समर्थन

करने वाले

क्या बलात्कारी नहीं है ?

☞ संस्कृति के साथ ,

☞ मर्यादाओ के साथ,

☞ संस्कारो के साथ,

☞ लज्जा के साथ

☞ जो ये सब किया जा रहा है वो बलात्कार नहीं है

क्या?

☞ निरंतर हो रहे नारीत्व के बलात्कार के

समर्थको को नारी के

बलात्कार पर शर्म आना उसी तरह है !

☞ जैसे मांस खाने वाला , लहसुन

प्याज पर नाक सिकोडे

☞ जिस देश में “आजा तेरी _ मारू , तेरे सर से _ _ का भूत

उतारू” जैसे गाने ?

☞ और इसी तरह का नंगा नाच फैलाने वाले भांड

युवाओ के

“आइडल” बन रहे हो वहा बलात्कार और छेडछाड़

की घटनाए नहीं बढेंगी तो और क्या बढ़ेगा?

☞ कुल मिलाकर कहने का तात्पर्य ये है कि जब तक हम

नारी जाति को नारित्व का दर्जा नहीं देंगे तब तक

महिला विकास या महिला सशक्तिकरण की बाते

बेमानी लगती हैं�

Posted in यत्र ना्यरस्तुपूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:

श्रीरामचरित मानस के अनुसार रावण ने मंदोदरी को स्त्रियों के संबंध में कुछ बातें बताई थीं, जानिए वह बातें कौन-कौन थीं…


श्रीरामचरित मानस के अनुसार रावण ने मंदोदरी को स्त्रियों के संबंध में कुछ बातें बताई थीं, जानिए वह बातें कौन-कौन थीं…

क्या है प्रसंगश्रीरामचरित मानस के अनुसार जब श्रीराम वानर सेना सहित लंका पर आक्रमण के लिए समुद्र पार कर लंका पहुंच गए थे, तब रानी मंदोदरी को कई अपशकुन होते दिखाई दिए। इन अपशकुनों से मंदोदरी डर गई और वह रावण को समझाने लगी कि युद्ध ना करें और श्रीराम से क्षमा याचना करते हुए सीता को उन्हें सौंप दें। इस बात पर रावण ने मंदोदरी का मजाक बनाते हुए कहा कि-

नारि सुभाऊ सत्य सब कहहीं। अवगुन आठ सदा उर रहहीं।साहस अनृत चपलता माया। भय अबिबेक असौच अदाया।

इस दोहे में रावण ने मंदोदरी से कहा है कि नारी के स्वभाव के विषय सभी सत्य ही कहते हैं कि अधिकांश स्त्रियों में आठ बुराइयां हमेशा रहती हैं।

रावण ने मंदोदरी को स्त्रियों की जो आठ बुराइयां बताई उसमें पहली है

साहस…
रावण के अनुसार स्त्रियों में अधिक साहस होता है, जो कि कभी-कभी आवश्यकता से अधिक भी हो जाता है। इसी कारण स्त्रियां कई बार ऐसे काम कर देती हैं, जिससे बाद में उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को पछताना पड़ता है। रावणमंदोदरी से कहता है कि स्त्रियां यह समझ नहीं पाती हैं कि साहस का कब और कैसे सही उपयोग किया जाना चाहिए। जब साहस हद से अधिक होता है तो वह दु:साहस बन जाता है और यह हमेशा ही नुकसानदायक है।

दूसरी बुराई है माया यानी छल करना

रावण के अनुसार स्त्रियां अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए कई प्रकार की माया रचती हैं। किसी अन्य व्यक्ति से अपने काम निकलवाने के लिए तरह-तरह केप्रलोभन देती हैं, रूठती हैं, मनाती हैं। यह सब माया है। यदि कोई पुरुष इस माया में फंस जाता है तो वह स्त्री के वश में हो जाता है। रावण मंदोदरी सेकहता है कि तूने माया रचकर मेरे शत्रु राम का भय सुनाया है, ताकि मैं तेरी बातों में आ जाऊं।

तीसरी बुराई है चंचलता-

स्त्रियों का मन पुरुषों की तुलना में अधिक चंचल होता है। इसी वजह से वे किसी एक बात पर लंबे समय तक अडिग नहीं रह पाती हैं। पल-पल में स्त्रियों के विचार बदलते हैं और इसी वजह से वे अधिकांश परिस्थितियों में सही निर्णयनहीं ले पाती हैं।

चौथी बुराई है झूठ बोलना-

रावण के अनुसार स्त्रियां बात-बात पर झूठ बोलती हैं। इस आदत के कारण अक्सरइन्हें परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। कभी भी झूठ अधिक समय तक छिपनहीं सकता है, सच एक दिन सामने आ ही जाता है।

श्रीरामचरित मानस के अनुसार रावण ने मंदोदरी को स्त्रियों के संबंध में कुछ बातें बताई थीं, जानिए वह बातें कौन-कौन थीं…

क्या है प्रसंगश्रीरामचरित मानस के अनुसार जब श्रीराम वानर सेना सहित लंका पर आक्रमण के लिए समुद्र पार कर लंका पहुंच गए थे, तब रानी मंदोदरी को कई अपशकुन होते दिखाई दिए। इन अपशकुनों से मंदोदरी डर गई और वह रावण को समझाने लगी कि युद्ध ना करें और श्रीराम से क्षमा याचना करते हुए सीता को उन्हें सौंप दें। इस बात पर रावण ने मंदोदरी का मजाक बनाते हुए कहा कि-

नारि सुभाऊ सत्य सब कहहीं। अवगुन आठ सदा उर रहहीं।साहस अनृत चपलता माया। भय अबिबेक असौच अदाया।

इस दोहे में रावण ने मंदोदरी से कहा है कि नारी के स्वभाव के विषय सभी सत्य ही कहते हैं कि अधिकांश स्त्रियों में आठ बुराइयां हमेशा रहती हैं।

रावण ने मंदोदरी को स्त्रियों की जो आठ बुराइयां बताई उसमें पहली है

साहस…
रावण के अनुसार स्त्रियों में अधिक साहस होता है, जो कि कभी-कभी आवश्यकता से अधिक भी हो जाता है। इसी कारण स्त्रियां कई बार ऐसे काम कर देती हैं, जिससे बाद में उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को पछताना पड़ता है। रावणमंदोदरी से कहता है कि स्त्रियां यह समझ नहीं पाती हैं कि साहस का कब और कैसे सही उपयोग किया जाना चाहिए। जब साहस हद से अधिक होता है तो वह दु:साहस बन जाता है और यह हमेशा ही नुकसानदायक है।

दूसरी बुराई है माया यानी छल करना

रावण के अनुसार स्त्रियां अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए कई प्रकार की माया रचती हैं। किसी अन्य व्यक्ति से अपने काम निकलवाने के लिए तरह-तरह केप्रलोभन देती हैं, रूठती हैं, मनाती हैं। यह सब माया है। यदि कोई पुरुष इस माया में फंस जाता है तो वह स्त्री के वश में हो जाता है। रावण मंदोदरी सेकहता है कि तूने माया रचकर मेरे शत्रु राम का भय सुनाया है, ताकि मैं तेरी बातों में आ जाऊं।

तीसरी बुराई है चंचलता-

स्त्रियों का मन पुरुषों की तुलना में अधिक चंचल होता है। इसी वजह से वे किसी एक बात पर लंबे समय तक अडिग नहीं रह पाती हैं। पल-पल में स्त्रियों के विचार बदलते हैं और इसी वजह से वे अधिकांश परिस्थितियों में सही निर्णयनहीं ले पाती हैं।

चौथी बुराई है झूठ बोलना-

रावण के अनुसार स्त्रियां बात-बात पर झूठ बोलती हैं। इस आदत के कारण अक्सरइन्हें परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। कभी भी झूठ अधिक समय तक छिपनहीं सकता है, सच एक दिन सामने आ ही जाता है।

Posted in यत्र ना्यरस्तुपूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:

SAVE GIRL CHILD


ડૉક્ટર ની સામે એક કપલ બેઠું હતુ……., 
*”ડોક્ટર અમને છોકરી નથી જોઈતી !”*

જન્મ થનારા બાળકના પિતાએ કહ્યુ…
“તમને કેવી રીતે ખબર પડી કે છોકરી જ છે.???

ડોક્ટરે પૂછયુ….
” તમે ટેસ્ટ કરવાની ના પાડી એટલે અમે બાજુના રાજયમા જઈને સોનોગ્રાફી સેન્ટર મા ટેસ્ટ કરીને આવ્યા…

જન્મ થનારા બાળકના પિતા બોલ્યાં…
“તો પછી તમે ત્યાંજ કેમ એબોર્શન ના કરાવ્યુ …????

ડોક્ટર બોલ્યાં….
*”ત્યા એવી સગવડ નોહતી….ત્યાંથી તેમણે એક એડ્રેસ આપ્યુ હતુ*

*તે એક ડૉક્ટરનું જ હતુ..પણ તેમની ફિસ ખુબજ વધારે હતી…*
*ત્યારે વિચાર્યું કે તમે અમારા એક ઓળખીતા ડોક્ટર છો…લાખો કરતા હજારો માં કામ થઈ જાશે… માટે તમારી પાસે આવ્યા..* 

 જન્મ દેનારા પિતા બોલ્યાં…
*”હુ કાઈ તમને કસાઈ લાગુ છુ….???? પછી…*

*ડોક્ટરે સંયમ રાખીને આગળ બોલ્યાં…* 
*”અરે ભાઈ, તમને પહેલી પણ દીકરી જ છે ને…”*
આટલી વાર થી ચૂપ બેસેલી બાળકને જન્મ દેનારી માં બોલી……

*એટલે જ અમને બીજી છોકરી નથી જોઈતી…*

*બીજો છોકરો જ જોઇયે છે….બબ્બે છોકરી તો નહીં જ*

 
ડોક્ટરે માના ખોળામાં બેસેલી છોકરી સામે જોયુ….નિષ્પાપ, બોલકી આંખો, હસમુખો ખુબસુરત ચહેરો…,જાણે જોઈલો મનગમતી ક્યૂટ ઢીંગલી..,

ડોક્ટરની નજર પડતાજ….ઢીંગલી ડોક્ટર પાસે આવી ગઈ..ડોક્ટરે તરતજ તેને હર્ષભેર વહાલ કર્યું….,
ડોક્ટર કાય બોલતા ન હતા….એ જોઈને* છોકરીમા પિતા બોલ્યા.

*જે પણ ફિસ થશે તે સાહેબ અમે વ્યવસ્થિત આપીશુ..એ શિવાય આ વાત અમે ક્યાંય લીક નહી કરીશુ એની અમે ખાત્રી આપીયે છીયે.*
ડોક્ટરનો ચહેરો હવે લાલ ઘુમ થવા લાગ્યો.

જન્મ થનારા બાળક ના માતા-પિતાને કહ્યુ..

તમારો વિચાર પાક્કો છે…????

તમોને સાચ્ચેજ બે છોકરી નથી જોઈતી.??

ફરીથી વિચાર કરો.. 
બાળકીના પિતાએ કહ્યુ પાક્કો જ વિચાર છે…

બે છોકરી નથી જ જોઈતી….
*”ઠીક છે…તો માના પેટમાં રહેલી છોકરીને આપણે રહેવા દઈયે..* 
*અને આ પહેલી છોકરીને હુ મારી નાખુ* *એટલે તમને એક છોકરી જ રહેશે..*

*એમ કહીને ડોક્ટરે ટેબલ ઉપર પડેલી છરી ઉપાડીને પેલી છોકરીના ગળા ઉપર મૂકી દીધી…*
અને ત્યાં બેઠેલી છોકરીની માં અચાનક જોરથી ચીસ પાડીને બોલી….

*ડોક્ટર સાહેબ થોભો…*

*આ તમે શું કરી રહ્યા છો..??*

*તમે ડોક્ટર છો કે કસાઈ..????*
ડોક્ટર શાંતી થી મંદ-મંદ હસતા..તે બંને માં-બાપ જોતા હતા…અને નિષ્પાપ ઢીંગલી રમતી હતી….
*બે-જ પળ……ફક્ત* 
*બે-જ પળ શાંતી થી પસાર થયો…અને બંને માં-બાપને ભાન થયુ કે અમે શુ કરવા નીકળ્યા હતાં….આખો મામલો એમના ધ્યાનમા આવી ગયો…એમની ભૂલ એમને સમજાય ગઈ…અને એજ સમયે તેમણે ડોક્ટર પાસે માફી માંગી…..
*સાહેબ અમને માફ કરીદો…અમારી ભૂલ અમને સમજાય ગઈ*
*ખરે-ખર તો અમે કસાઈ બનવા નીકળ્યાં હતાં* 

આટલું કહીને તે કપલ ઉભા થઈને તેડેલી અને ગર્ભમાં રહેલી બંને રાજકન્યા સાથે ડોકરની કેબીન માથી બહાર નીકળતા જ હતા…
ત્યાં….ડોક્ટર સાહેબે બેસવાનો ઈશારો કર્યો

અને બોલ્યા…
*મારે તમને હજુ એક કાંઈ કહેવાનું રહી ગયુ છે.*

અને ઇ પણ તમનેજ કહેવાનુ ખાસ કારણ એ છે કે, મને તમારો આખરી નિર્ણય બદલ્યો તેની મને મનો-મન ખાત્રી થઈ એટલે જ કહેવુ છે.
*”અમારા વ્યવસાયમાં પણ એવા રાક્ષસી પ્રવૃતી ના પણ લોકો છે એ તો અમે અને ઘણા ખરા લોકો જાણે જ છે પણ તે આટલી નીચા સ્તરે આવી ગયા છે કે*
*સોનોગ્રાફી માં* 

*સ્પષ્ટ છોકરાનો ગર્ભ*

*દેખાતા હોવા છતાં..*
*ચંદ-રૂપિયા માટે આ ગર્ભ છોકરીનો છે એવું તમને કહેવામા આવ્યું છે*
*આટલુ સાંભળીને તે મા- બાપના પગમાંથી* 

*જમીન સરકી ગઇ…*

 

👸👸👸👸👸👸👸
*આ વાંચીને જો સારૂ લાગ્યું હોય તો આવા કપલને અને આગળ ગ્રુપમાં તમે જરૂર મોકલશો….*✍
*SAVE GIRL CHILD*

Posted in यत्र ना्यरस्तुपूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:

लिज्जत पापड़-जसवंती बेन


80 रूपये उधार लेकर सात महिलाओं ने शुरू किया था ‘लिज्जत पापड़’ का कारोबार

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“बहुत सी महिलाओं को अपनी खुद की ताकत बनते देख मुझे ऐसा लगता है की मेरा जीवन सफल हो गया। मैं यह महसूस करती हूँ कि मेरी सारी कोशिशों का प्रतिफल मुझे मिल गया।”-जसवंती बेन

15 मार्च 1959 की गर्मियों की दोपहर में जब साफ आसमान में सूरज अपनी चमक बिखेर रहा था। तब दक्षिणी मुंबई के एक भीड़-भाड़ वाले इलाके गिरगोम के एक पुराने घर की छत पर जसवंती बेन अन्य छह महिलाओं के साथ मिलकर महिला सशक्तिकरण की एक नयी इबारत लिखने को तैयार थी। यह सात महिलाएं उस दोपहर छत पर जो काम कर रही थीं, उसका अंजाम चार पैकेट पापड़ के रूप में सामने आया और सामने आया एक संकल्प की ये काम वो करती रहेंगी।

90 का दशक वह दौर था जब पापड़ का समानअर्थी शब्द लिज्जत पापड़ माना जाता था। आइए आज जानते हैं कि आखिर कैसे जसवंती बेन के साथ मिलकर अन्य छह ग्रामीण महिलाओं ने नारी सशक्तिकरण की एक बेमिसाल गाथा लिख डाली।

शुरुआत से जसवंती बेन ने प्रण किया था कि वो अपने इस व्यवसाय के लिए किसी से चंदा नही मांगेगी, चाहे उनका वो व्यवसाय घाटे में ही क्यों ना चला जाये।

सात महिलाओं द्वारा 80 रुपये कर्ज लेकर शुरू किया गया लिज्जत पापड़ का सफर आज 301 करोड़ रुपये तक के सालाना कारोबार की एक बेमिसाल कहानी कहती है। इस व्यवसाय के माध्यम से आज 40000 से ज्यादा महिलाओं को अपनी पहचान प्राप्त हुई है।  इन महिलाओं का आभा भारतभर में 81 शाखाओं और 27 डिविजनों से छनकर दूर विदेश तक नारी सशक्तिकरण को रोशनी प्रदान कर रही है।

जसवंती बेन

जसवंती बेन के उद्योग का नाम श्री महिला गृह उद्योग है। इसमें काम करने वाली अधिकतर महिलाएं गरीब, अशिक्षित हैं और अपने परिवारों की आमदनी बढ़ाती हैं। पापड के अलावा इस उद्योग से अप्पालम, मसाला, गेंहू आटा, चपाती, कपड़ा धोने का पाउडर और साबुन, और लिक्विड  डिटरजेंट आदि उत्पाद भी तैयार किया जाता है।

सात बहनों से शुरू हुआ ये सफर आज देश भर में 43 हजार बहनों तक फैल गया है।

संस्थान अपनी बहनों की कठिन मेहनत से लगातार आगे बढ़ रहा है जो कठिन से कठिन समय में महिलाओं की शक्ति पर विश्वास करते हुए उन्हे मजबूती प्रदान कर रहा है।

जसवंती बेन की उपलब्धी इसलिए भी खास मानी जाती है क्योंकि वो न केवल गरीब परिवार से ताल्लुकात रखती हैं, बल्कि उनकी शिक्षा भी कुछ खास नहीं थी।

संस्थान के सफर में पहला महत्वपूर्ण पड़ाव 1966 में तब आया, जब संस्था को बांबे पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1950 के तहत और सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत पंजीकरण प्राप्त हुआ और खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग ने कुटीर उद्योग के तौर पर संस्थान को मान्यता दी।

इस संगठन की खूबी यह है कि हर कोई सबसे नीचे वाले स्तर से काम शुरु करता है और सहकारिता के आधार पर काम करते हुए तरक्की पाता है।

संस्था का मकसद महिलाओं को रोजगार देना और अच्छी आय के जरिए सम्मानित आजीविका उपलब्ध कराना है। कोई भी महिला किसी भी जाति, वंश या रंग की हो, जो संस्थान के मूल्यों और मकसद के साथ खुद को खड़ा करती है, उस दिन से ही इस संस्थान की सदस्य हो जाती है, जिस दिन वो यहां काम की शुरूआत करती है। सुबह साढ़े चार बजे पापड़ उत्पादन का काम शुरू होता है।

लिज्जत अपनी सदस्य बहनों की बच्चों को दसवीं और बारहवीं परीक्षा पास करने के बाद स्कॉलरशिप भी प्रदान करती है।

संगठन की कार्यशैली और उनके उत्पाद की गुणवत्ता को खादी एवं कुटीर उद्योग आयोग ने साल 1998-99 और साल 2000-01 में सर्वोत्तम कुटीर उद्योग के अवार्ड से भी सम्मानित किया है। यही नहीं कॉर्पोरेट एक्सीलेंस के लिए साल 2002 का इकानॉमोकि टाइम्स का बिजनेसवुमन ऑफ द इयर अवार्ड भी मिला। साल 2003 में देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सर्वोत्तम कुटीर उद्योग के सम्मान से संस्था को सम्मानित किया। 2005 में देश के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने दिल्ली के विज्ञान भवन में संस्थान को ब्रांड इक्विटी अवार्ड से भी सम्मानित किया। भारत के उपभोक्ताओं ने 2010-11 में लिज्जत पापड को पॉवर ब्रांड के रूप में चयनित किया, जिसका सम्मान संस्थान को नई दिल्ली में प्रदान किया गया।

टॉपयाप्स जसवंती बेन और उनकी इस संस्था को सलाम करती है, जो सालों से अपने बेहतरीन कार्यों के जरिए देश की महिलाओं को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने की दिशा में रोशनी दिखाती है। निसंदेह लिज्जत ने देश की तमाम महिलाओं को समाज में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने और सम्मान से जीने का अवसर प्रदान किया है।

Posted in यत्र ना्यरस्तुपूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:

औरत का सफर


*🙏😔औरत का सफर☺🙏*

       

😔बाबुल का घर छोड़ कर पिया के घर आती है..
☺एक लड़की जब शादी कर औरत बन जाती है..
😔अपनों से नाता तोड़कर किसी गैर को अपनाती है..
☺अपनी ख्वाहिशों को जलाकर किसी और के सपने सजाती है..
☺सुबह सवेरे जागकर सबके लिए चाय बनाती है..
😊नहा धोकर फिर सबके लिए नाश्ता बनाती है..
☺पति को विदा कर बच्चों का टिफिन सजाती है..
😔झाडू पोछा निपटा कर कपड़ों पर जुट जाती है..
😔पता ही नही चलता कब सुबह से दोपहर हो जाती है..
☺फिर से सबका खाना बनाने किचन में जुट जाती है.. 
☺सास ससुर को खाना परोस स्कूल से बच्चों को लाती है..
😊बच्चों संग हंसते हंसते खाना खाती और खिलाती है..
☺फिर बच्चों को टयूशन छोड़,थैला थाम बाजार जाती है..
☺घर के अनगिनत काम कुछ देर में निपटाकर आती है..
😔पता ही नही चलता कब दोपहर से शाम हो जाती है..
😔सास ससुर की चाय बनाकर फिर से चौके में जुट जाती है..
☺खाना पीना निपटाकर फिर बर्तनों पर जुट जाती है..
😔सबको सुलाकर सुबह उठने को फिर से वो सो जाती है..
😏हैरान हूं दोस्तों ये देखकर सौलह घंटे ड्यूटी बजाती है..
😳फिर भी एक पैसे की पगार नही पाती है..
😳ना जाने क्यूं दुनिया उस औरत का मजाक उडाती है..
😳ना जाने क्यूं दुनिया उस औरत पर चुटकुले बनाती है..
😏जो पत्नी मां बहन बेटी ना जाने कितने रिश्ते निभाती है..
😔सबके आंसू पोंछती है लेकिन खुद के आंसू छुपाती है..
*🙏नमन है मेरा घर की उस लक्ष्मी को जो घर को स्वर्ग बनाती है..☺*
*☺ड़ोली में बैठकर आती है और अर्थी पर लेटकर जाती है. ……

🙏🙏🙏निवेदन 🙏🙏🙏🙏

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