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मातृ दिवस – Ajay awasthi Ajju

मातृ दिवस

एक माँ को सम्मान और आदर देने के लिये हर वर्ष एक वार्षिक कार्यक्रम के रुप में मातृदिवस को मनाया जाता है। ये आधुनिक समय का उत्सव है जिसकी उत्पत्ति उत्तरी अमेरिका में माताओं को सम्मान देने के लिये हुई थी। बच्चों से माँ के रिश्तों में प्रगाढ़ता बढ़ाने के साथ ही मातृत्व को सलाम करने के लिये इसे मनाया जाता है। समाज में माँ का प्रभाव बढ़ाने के लिये इसे मनाया जाता है। पूरे विश्व के विभिन्न देशों में अलग-अलग तारीखों पर हर वर्ष मातृ दिवस को मनाया जाता है। भारत में, इसे हर साल मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है।

मातृ दिवस 2017

मातृ दिवस 2017 भारत में 14 मई, रविवार को मनाया जायेगा। ये हर वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को पड़ता है।

मातृ दिवस क्यों मनाया जाता है (भारत में मातृ दिवस का इतिहास)

प्राचीन काल में ग्रीक और रोमन के द्वारा पहली बार इसे मनाने की शुरुआत हुयी। हालाँकि, ‘ममता रविवार’ के रुप में यूके में भी इस उत्सव को देखा गया था। मातृदिवस का उत्सव सभी जगह आधुनिक हो चुका है। इसे बेहद आधुनिक तरीके से मनाया जाता है ना कि पुराने वर्षों के पुराने तरीकों की तरह। अलग-अलग तारीखों पर दुनिया के लगभग 46 देशों में इसे मनाया जाता है। ये सभी के लिये एक बड़ा उत्सव है जब लोगों को अपनी माँ का सम्मान करने का मौका मिलता है। हमें इतिहास को धन्यवाद देना चाहिये जो मातृ दिवस की उत्पत्ति का कारण था।

पूर्व में, ग्रीक के प्राचीन लोग वार्षिक वसंत ऋतु त्योहारों के खास अवसरों पर अपनी देवी माता के लिये अत्यधिक समर्पित थे। ग्रीक पौराणिक कथाओं के अनुसार, रिहिह (अर्थात् बहुत सारी देवियों की माताओं के साथ ही क्रोनस की पत्नी) के सम्मान के लिये इस अवसर को वो मनाते थे।

प्राचीन रोमन लोग हिलैरिया के नाम से एक वसंत ऋतु त्योंहार को भी मनाते थे जो सीबेल (अर्थात् एक देवी माता) के लिये समर्पित था। उसी समय, मंदिर में सीबेल देवी माँ के सामने भक्त चढ़ावा चढ़ाते थे। पूरा उत्सव तीन दिन के लिये आयोजित होता था जिसमें ढ़ेर सारी गतिविधियाँ जैसे कई प्रकार के खेल, परेड और चेहरा लगाकर स्वाँग रचना होता था।

कुँवारी मैरी (ईशु की माँ) को सम्मान देने के लिये चौथे रविवार को ईसाईयों के द्वारा भी मातृ दिवस को मनाया जाता है। 1600 इंसवी के लगभग इंग्लैण्ड में मातृ दिवस मनाने उत्सव का एक अलग इतिहास है। ईसाई कुँवारी मैरी की पूजा करते हैं, उन्हें कुछ फूल और उपहार चढ़ाते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं।

वर्ष 1972 में जूलिया वार्ड हौवे (एक कवि, कार्यकर्ता और लेखक) के विचारों के द्वारा आधिकारिक कार्यक्रम के रुप में यूएस में मातृ दिवस को मनाने का फैसला किया गया था। जून के दूसरे रविवार को मातृ शांति दिवस और 2 जून को मनाने के लिये एक शांति कार्यक्रम के रुप में उन्होंने मातृ दिवस की सलाह दी थी।

अन्ना जारविस, यूएस में मातृ दिवस (मातृ दिवस की माँ के रुप में प्रसिद्ध) के संस्थापक के रुप में जाने जाते हैं यद्यपि वो अविवाहित महिला थी और उनको बच्चे नहीं थे। अपनी माँ के प्यार और परवरिश से वो अत्यधिक प्रेरित थी और उनकी मृत्यु के बाद दुनिया की सभी माँ को सम्मान और उनके सच्चे प्यार के प्रतीक स्वरुप एक दिन माँ को समर्पित करने के लिये कहा।

आज के दिनों में, ये कई देशों में मनाया जाता है जैसे यूके, चाईना, भारत, यूएस, मेक्सिको, डेनमार्क, इटली, फिनलैण्ड, तुर्की, ऑस्ट्रेलिया, कैनेडा, जापान और बेल्जियम आदि। अपनी माँ को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिये कई सारे क्रिया-कलापों को आयोजित करने के द्वारा बहुत ही उत्साह और खुशी के साथ लोग इस दिन को मनाते हैं।

मातृ दिवस कैसे मनाया जाता है

सभी के लिये मातृ दिवस वर्ष का एक बहुत ही खास दिन होता है। जो लोग अपनी माँ को बहुत प्यार करते हैं और ख्याल रखते हैं वो इस खास दिन को कई तरह से मनाते हैं। ये साल एकमात्र दिन है जिसे दुनिया की सभी माँ को समर्पित किया जाता है। विभिन्न देशों में रहने वाले लोग इस उत्सव को अलग अलग तारीखों पर मनाते हैं साथ ही अपने देश के नियमों और कैलेंडर का अनुसरण इस प्यारे त्योंहार को मनाने के लिये करते हैं।

भारत में इसे हर साल मई के दूसरे रविवार को देश के लगभग हर क्षेत्र में मनाया जाता है। पूरे भारत में आज के आधुनिक समय में इस उत्सव को मनाने का तरीका बहुत बदल चुका है। ये अब समाज के लिये बहुत बड़ा जागरुकता कार्यक्रम बन चुका है। सभी अपने तरीके से इस उत्सव में भाग लेते हैं और इसे मनाते हैं। विविधता से भरे इस देश में ये विदेशी उत्सव की मौजूदगी का इशारा है। ये एक वैश्विक त्योहार है जो कई देशों में मनाया जाता है।

समाज में एक विशाल क्रांति कम्प्यूटर और इंटरनेट जैसी उच्च तकनीक ले आयी है जो आमतौर पर हर जगह दिखाई देता है। आज के दिनों में, लोग अपने रिश्तों के बारे में बहुत जागरुक रहते हैं और इसे मनाने के द्वारा सम्मान और आदर देना चाहते हैं। भारत एक महान संस्कृति और परंपराओं का देश है जहाँ लोग अपनी माँ को पहली प्राथमिकता देते हैं। इसलिये, हमारे लिये यहाँ मातृ दिवस का उत्सव बहुत मायने रखता है। ये वो दिन है जब हम अपनी माँ के प्यार, देखभाल, कड़ी मेहनत और प्रेरणादायक विचारों को महसूस करते हैं। हमारे जीवन में वो एक महान इंसान है जिसके बिना हम एक सरल जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। वो एक ऐसी व्यक्ति हैं जो हमारे जीवन को अपने प्यार के साथ बहुत आसान बना देती है।

इसलिये, मातृ दिवस के उत्सव के द्वारा, हमें पूरे साल में केवल एक दिन मिलता है अपनी माँ के प्रति आभार जताने के लिये। उनके महत्व को समझने के द्वारा ये खुशी मनाने का दिन है और उन्हें सम्मान देने का है। एक माँ एक देवी की तरह होती है जो अपने बच्चों से कुछ भी वापस नहीं पाना चाहती है। वो अपने बच्चों को केवल जिम्मेदार और अच्छा इंसान बनाना चाहती हैं। हमारी माँ हमारे लिये प्रेरणादायक और पथप्रदर्शक शक्ति के रुप में है जो हमें हमेशा आगे बढ़ने में और किसी भी समस्या से उभरने में मदद देती है।

माँ के महत्व और इस उत्सव के बारे में उन्हें जागरुक बनाने के लिये बच्चों के सामने इसे मनाने के लिये शिक्षकों के द्वारा स्कूल में मातृ दिवस पर एक बड़ा उत्सव आयोजित किया जाता है। इस उत्सव का हिस्सा बनने के लिये खासतौर से छोटे बच्चों की माताओं को आमंत्रित किया जाता है। इस दिन, हर बच्चा अपनी माँ के बारे में कविता, निबंध लेखन, भाषण करना, नृत्य, संगीत, बात-चीत आदि के द्वारा कुछ कहता है। कक्षा में अपने बच्चों के लिये कुछ कर दिखाने के लिये स्कूल के शिक्षकों के द्वारा माताओं को भी अपने बच्चों के लिये कुछ करने या कहने को कहा जाता है। आमतौर पर माँ अपने बच्चों के लिये नृत्य और संगीत की प्रस्तुति देती हैं। उत्सव के अंत में कक्षा के सभी विद्यार्थियों के लिये माताएँ भी कुछ प्यारे पकवान बना कर लाती हैं और सभी को एक-बराबर बाँट देती हैं। बच्चे भी अपनी माँ के लिये हाथ से बने ग्रीटींग कार्ड और उपहार के रुप में दूसरी चीजें भेंट करते हैं। इस दिन को अलग तरीके से मनाने के लिये बच्चे रेस्टोरेंट, मॉल, पार्क आदि जगहों पर अपने माता-पिता के साथ मस्ती करने के लिये जाते हैं।

ईसाई धर्म से जुड़े लोग इसे अपने तरीके से मनाते हैं। अपनी माँ के सम्मान के लिये चर्च में भगवान की इस दिन खास पूजा करते हैं। उन्हें ग्रीटिंग कार्ड और बिस्तर पर नाश्ता देने के द्वारा बच्चे अपनी माँ को आश्चर्यजनक उपहार देते हैं। इस दिन, बच्चे अपनी माँ को सुबह देर तक सोने देते हैं और उन्हें तंग नहीं करते साथ ही उनके लिये लजीज व्यंजन बनाकर खुश करते हैं। अपनी माँ को खुश करने के लिये कुछ बच्चे रेडीमेड उपहार, कपड़े, पर्स, सहायक सामग्री, जेवर आदि खरीदते हैं। रात में, सभी अपने परिवार के साथ घर या रेस्टोरेंट में अच्छे पकवानों का आनन्द उठाते हैं।

परिवार के साथ खुशी मनाने और ढ़ेर सारी मस्ती करने के लिये बच्चों को इस दिन अच्छे से मनाने का पूरा मौका देने के लिये कुछ देशों में मातृ दिवस एक अवकाश होता है। ये सभी माँओं के लिये एक बहुत ही सुंदर दिन है, इस दिन उन्हें घर के सभी कामों और जिम्मेदारियों से मुक्त रखा जाता है।

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*माँ की इच्छा*

_*🔴शरीर में रौंगटे खड़े कर देने वाली कविता*_
    _*🔴🎷🌺 *माँ की इच्छा* 🌺🎷🔵*_
   _महीने बीत जाते हैं ,_

   _साल गुजर जाता है ,_

   _वृद्धाश्रम की सीढ़ियों पर ,_

   _मैं तेरी राह देखती हूँ।_
                   _आँचल भीग जाता है ,_

                   _मन खाली खाली रहता है ,_

                   _तू कभी नहीं आता ,_

                   _तेरा मनि आर्डर आता है।_
                             _इस बार पैसे न भेज ,_

                             _तू खुद आ जा ,_

                             _बेटा मुझे अपने साथ ,_

                         _अपने 🏡घर लेकर जा।_
 _तेरे पापा थे जब तक ,_

 _समय ठीक रहा कटते ,_

 _खुली आँखों से चले गए ,_

 _तुझे याद करते करते।_
               _अंत तक तुझको हर दिन ,_

               _बढ़िया बेटा कहते थे ,_

               _तेरे साहबपन का ,_

               _गुमान बहुत वो करते थे।_
                        _मेरे ह्रदय में अपनी फोटो ,_

                        _आकर तू देख जा ,_

                        _बेटा मुझे अपने साथ ,_

                        _अपने 🏡घर लेकर जा।_
_अकाल के समय ,_

 _जन्म तेरा हुआ था ,_

 _तेरे दूध के लिए ,_

 _हमने चाय पीना छोड़ा था।_
               _वर्षों तक एक कपडे को ,_

               _धो धो कर पहना हमने ,_

               _पापा ने चिथड़े पहने ,_

               _पर तुझे स्कूल भेजा हमने।_
                         _चाहे तो ये सारी बातें ,_

                         _आसानी से तू भूल जा ,_

                         _बेटा मुझे अपने साथ ,_

                         _अपने 🏡घर लेकर जा।_
 _घर के बर्तन मैं माँजूंगी ,_

 _झाडू पोछा मैं करूंगी ,_

  _खाना दोनों वक्त का ,_

  _सबके लिए बना दूँगी।_
            _नाती नातिन की देखभाल ,_

            _अच्छी तरह करूंगी मैं ,_

            _घबरा मत, उनकी दादी हूँ ,_

            _ऐंसा नहीं कहूँगी मैं।_
                        _तेरे 🏡घर की नौकरानी ,_

                        _ही समझ मुझे ले जा ,_

                        _बेटा मुझे अपने साथ ,_

                        _अपने 🏡घर लेकर जा।_
 _आँखें मेरी थक गईं ,_

 _प्राण अधर में अटका है ,_

 _तेरे बिना जीवन जीना ,_

 _अब मुश्किल लगता है।_
                 _कैसे मैं तुझे भुला दूँ ,_

                 _तुझसे तो मैं माँ हुई ,_

                 _बता ऐ मेरे कुलभूषण ,_

                 _अनाथ मैं कैसे हुई ?_
_अब आ जा तू.._

_एक बार तो माँ कह जा ,_

_हो सके तो जाते जाते_

 _वृद्धाश्रम गिराता जा।_

              _बेटा मुझे अपने साथ_

              _अपने 🏡घर लेकर जा_
_**_

👌 (_*शायद आपकी कोशिश से कोई ” माँ ” अपने 🏡 घर चली जाये …*_)

 ☝याद रखना….☝🏽

माँ बाप उमर से नहीं..

” फिकर से बूड़े होते है..

कड़वा है मगर सच है ” …🙏🙏🏽🙏🏽🙏🏽

👌जब बच्चा रोता है , तो पूरी बिल्डिंग  को पता चलता है , 👌🏽

मगर साहब ,

जब  माँ बाप रोते है तो बाजु वाले को भी पता नही चलता है,

ये जिंदगी की सच्चाई है..☝🏽👍👆 👌🏻

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गोविन्द का लालन पोषण बड़े प्यार से किया था उसके बाबूजी ने

गोविन्द का लालन पोषण बड़े प्यार से
किया था उसके बाबूजी ने
कभी किसी चीज की कमी महसूस न
होने दी,वक्त बीतता गया गोविन्द अब
अच्छी नौकरी पर लग गया और बड़ी
धूमधाम से शादी भी हो गई
लेकिन समस्या आनी जब शुरू हुई
तब मॉडर्न बहु को बाबूजी का साथ
रहना अखरने लगा,
आखिरकार एक दिन गोविन्द बाबूजी
को एक आश्रम में छोड़ने चला गया
आश्रम संचालक के कमरे में पहुँचते
ही आश्रम संचालक ने गोविन्द के साथ
आये बाबूजी को देखा और खड़े होकर
एकदम गले लगा लिया और हालचाल
आदि पूछने लगा
गोविन्द-आप कैसे जानते है मेरे
बाबूजी को?
आश्रम संचालक-आपके बाबूजी इस आश्रम को चलाने में हमेशा मदद देते
रहे हैं और एक बार कोई माँ अपने बच्चे
को आश्रम में छोड़ गयी थी तब उस
बच्चे को इन्होंने ही गोद लिया था
गोविन्द की आंखो में आंसू आ गए और
गोविन्द कुर्सी छोड़ कर खड़ा होता हुआ
सिर्फ इतना ही कह पाया…
“घर चलें बाबूजी ?

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एक लडका एक लडकी से बहुत प्यार करता था..

एक लडका एक लडकी से बहुत
प्यार करता था..
!!
एक दिन लडके ने लडकी को शादी
के लिए प्रपोज किया ..
!!
लडकी तैयार हो गई
लडकी ने पूछा- तुम मुझसे कितना
प्यार करते हो ?
!!
लडका- हद से ज्यादा…
लडकी- जो कहूँगी करोगे?
!!
लडका- कह कर तो देखो
लडकी- शादी तब करुंगी जब तुम अपने माँ बाप को छोड दोगे…
!!
लडका – पगली, तु चाहती है मैं अपने देवताओं का त्याग एक नए मंदिर के लिए कर दूं?
जा तु खुश रह…
!!
और लडका बढ जाता है उदास
अपने घर की ओर अपने
“देवताओं” के पास..!!

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माँ

जब कभी भी मैं बाहर जाता था
और घर वापिस आता तो माँ उदास
होती और कहती थी…
बेटा..घर जल्दी आ जाया करो
जब तक तु घर वापिस नहीं आ
जाते मुझे चिंता रहती है …
और मैं हंस कर बोलता कि मेरी
चिंता ना किया करो माँ ..
मैं अब बच्चा नहीं हूँ बड़ा हो गया हूँ
..
..
आज माँ नहीं है इस दुनिया में…
..
..
अब याद आती है उनकी बातें
माँ.. अब से मैं जल्दी आ जाया करूँगा
जो तुम कहोगी वो ही करूँगा
बस तुम वापिस आ जाओ
तुम वापिस आ जाओ माँ ..!!

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માં

જુદી જુદી ભાષામાં માને લગતી કહેવતો (‘થેંક યૂ મમ્મી’ પુસ્તકમાંથી સાભાર, પુસ્તકપ્રાપ્તિની વિગતો લેખને અંતે મૂકી છે.)

[૧] સ્ત્રી અબળા હોઈ શકે માતા નહીં – કોરિયન કહેવત

[૨] જે કર ઝુલાવે પારણું તે જગ પર શાસન કરે. – ગુજરાતી કહેવત

[૩] માને ખભે સુરક્ષિત બાળકને ખબર નથી હોતી કે સફર લાંબી છે. – મોઝેમ્બિલ કહેવત

[૪] વાછરડાને એની માતાનાં શિંગડાંની વળી બીક શાની ? – આફ્રિકન કહેવત

[૫] આ પૃથ્વી પર એક જ સુંદર બાળક છે અને દરેક માતા પાસે એ હોય છે. – ચાઈનીસ કહેવત

[૬] ઘર એટલે… પિતાનું સામ્રાજ્ય, બાળકોનું સ્વર્ગ અને માતાની દુનિયા. – અમેરિકન કહેવત

[૭] વસંતમાં હળવેકથી ચાલો, પૃથ્વી માતા સગર્ભા છે. – નેટિવ અમેરિકન કહેવત

[૮] પુરુષનું કામ સૂર્યોદયથી સૂર્યાસ્ત, જ્યારે માતાનું કામ અનંત… – કુરદીશ કહેવત

[૯] દરેક કાગડો પોતાની માની નજરે હંસ હોય છે. – યુરોપિયન કહેવત

[૧૦] ઝાકળબિંદુ ધરતીને ચૂમે એટલી જ નજાકતથી માતા બાળકને પ્રેમ કરે. – સુદાની કહેવત

[૧૧] માતાનો એક અંશ બરાબર અસંખ્ય ધર્મગુરુઓ. –સ્પેનીશ કહેવત

[૧૨] પિતા વગર અડધા અનાથ, માતા વગર પૂરા અનાથ. – સાઈબિરિયન કહેવત

[૧૩] એક માતા જેટલી સહેલાઈથી સાત બાળકોને ખવડાવી શકે છે, એટલી સહેલાઈથી સાત બાળકો એક માતાને ખવડાવી શકે ? – ફ્રેંચ કહેવત

[૧૪] પિતાનો પ્રેમ પર્વતથી ઊંચો. માતાનો પ્રેમ દરિયાથી ઊંડો. – જાપાનીસ કહેવત

[૧૫] બચકું ભરતાં બાળકને તો ફક્ત એની મા જ ઊંચકે. – નાઈજીરિયન કહેવત

[૧૬] ઘર ખરીદતી વખતે પાયો ચકાસો અને પત્ની પસંદ કરતી વખતે એની માતાને જુઓ. – ચાઈનીસ કહેવત

પુસ્તક પ્રાપ્તિની વિગતો..

[કુલ પાન.૨૪૦. કિંમત રૂ. ૩૦૦/- પબ્લિશર : આવિષ્કાર પબ્લિશર્સ ૮-બી, પ્રફુલ્લ સોસાયટી, અકોટા ડી-માર્ટ સામે, અકોટા, વડોદરા-૩૯૦૦૦૭, વિતરક : આર.આર.શેઠની કંપની ‘દ્વારકેશ’ રોયલ એપાર્ટમેન્ટ પાસે, ખાનપુર, અમદાવાદ-૩૮૦૦૦૧ ટેલિ.: (૦૭૯) ૨૫૫૦૬૫૭૩]

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” મા “

” મા “
જ્યારે નાનો હતો ત્યારે માં ની પથારી ભીની કરતો હતો
હવે મોટો થયો તો માંની આંખો ભીની કરું છું.
માં પહેલાં જ્યારે આંસુ આવતાં હતા… ત્યારે તું યાદ આવતી હતી,
આજે તુ યાદ આવે છે, તો આંખોમાં આંસુ છલકાય છે.
જે દીકરાઓના જન્મ પ્રસંગે માતા-પિતા એ ખુશી થી મીઠાઇ વહેંચેલી
એજ દીકરા જુવાન થઇ ને આજે માતા-પિતા ની વહેંચણી કરે …
દીકરી ઘરે થી વિદાય થાય અને હવે દીકરો મોં ફેરવે..
માતા-પિતા ની કરૂણ આંખોમાં વિખરાયેલા સપનાં ની માળા તૂટે
ચાર વર્ષનો તારો લાડલો રાખે તારા પ્રેમની આશા
સાઠ વરસ નાં તારા માતા-પિતા કેમ ન રાખે પ્રેમ ની તૃષા ?
જે મુન્ના ને માતા-પિતા બોલતાં શિખવાડે …
એજ મુન્નો મોટો થઇ માતા-પિતાને ચૂપ કરાવે.
પત્ની પસંદગી ની મળી શકે છે.. માં પુણ્ય થી જ મળે છે
પસંદગી થી મળનારી માટે, પુણ્ય ની મળનારી ને ના ઠુકરાવતો …..
પોતાના પાંચ દીકરા જેને નહી લાગ્યા ભારી … એજ માતા
દીકરાઓની પાંચ થાળીઓ માં કેમ પોતાને માટે શોધે દાણા.
માતા-પિતાની આંખો માં આવેલાં આંસુ સાક્ષી છે,
એક દિવસ તારે પણ આ બધું સહેવાનું છે.
ઘરની દેવી ને છોડી, મુરખ
પથ્થર પર ચુંદડી ઓઢાડવા શાને જવું છે.
જીવનની સંધ્યા માં તૂ આજ એની સાથે રહી લે
જવા નીકળેલી છાંય ની તૂ આજે આશિષ લઇ લે
એના અંધકારભર્યા રાહ માં સૂરજ થઇ ને રોશની કર
ચાર દિવસ વધુ જીવવાની ઇચ્છા એનામાં નિર્માણ કર…
તે માતાનું દૂધ પીધું છે….
એની ફરજ અદા કર ….
એનું કરજ અદા કર ….