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आरएसएस की प्रार्थना व उसका हिन्दी भाषा में अर्थ।


आरएसएस की प्रार्थना व उसका हिन्दी भाषा में अर्थ।

नमस्ते सदा वत्सले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रार्थना है। सम्पूर्ण प्रार्थना संस्कृत में है केवल इसकी अन्तिम पंक्ति (भारत माता की जय!) हिन्दी में है।

इस प्रार्थना की रचना नरहरि नारायण भिड़े[1] ने फरवरी १९३९ में की थी। इसे सर्वप्रथम २३ अप्रैल १९४० को पुणे के संघ शिक्षा वर्ग में गाया गया था। यादव राव जोशी ने इसे सुर प्रदान किया था।

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोहम्।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते॥ १॥
प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्
त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयम्
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये।
अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिं
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं
स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत्॥ २॥
समुत्कर्षनिःश्रेयस्यैकमुग्रं
परं साधनं नाम वीरव्रतम्
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्रानिशम्।
विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्।
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्॥ ३॥
॥ भारत माता की जय ॥

प्रार्थना का हिन्दी में अर्थ:

हे वात्सल्यमयी मातृभूमि, तुम्हें सदा प्रणाम! इस
मातृभूमि ने हमें अपने बच्चों की तरह स्नेह और
ममता दी है। इस हिन्दू भूमि पर सुखपूर्वक मैं
बड़ा हुआ हूँ। यह भूमि महा मंगलमय और पुण्यभूमि है।
इस भूमि की रक्षा के लिए मैं यह नश्वर
शरीर मातृभूमि को अर्पण करते हुए इस भूमि को
बार-बार प्रणाम करता हूँ।
हे सर्व शक्तिमान परमेश्वर, इस हिन्दू राष्ट्र के घटक के
रूप में मैं तुमको सादर प्रणाम करता हूँ। आपके ही
कार्य के लिए हम कटिबद्ध हुवे है। हमें इस कार्य को पूरा
करने किये आशीर्वाद दे। हमें ऐसी
अजेय शक्ति दीजिये कि सारे विश्व मे हमे कोई न
जीत सकें और ऐसी नम्रता दें कि पूरा
विश्व हमारी विनयशीलता के सामने
नतमस्तक हो। यह रास्ता काटों से भरा है, इस कार्य को
हमने स्वयँ स्वीकार किया है और इसे सुगम कर
काँटों रहित करेंगे।
ऐसा उच्च आध्यात्मिक सुख और ऐसी महान
ऐहिक समृद्धि को प्राप्त करने का एकमात्र श्रेष्ट साधन उग्र
वीरव्रत की भावना हमारे अन्दर सदेव
जलती रहे। तीव्र और अखंड ध्येय
निष्ठा की भावना हमारे अंतःकरण में
जलती रहे। आपकी
असीम कृपा से हमारी यह
विजयशालिनी संघठित कार्यशक्ति हमारे धर्म का
सरंक्षण कर इस राष्ट्र को परम वैभव पर ले जाने में समर्थ
हो।
॥ भारत माता की जय॥

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हनुमान चालीसा में एक श्लोक है:-


हनुमान चालीसा में एक श्लोक है:-

जुग (युग) सहस्त्र जोजन (योजन) पर भानु |

लील्यो ताहि मधुर फल जानू ||

अर्थात हनुमानजी ने

एक युग सहस्त्र योजन दूरी पर

स्थित भानु अर्थात सूर्य को

मीठा फल समझ के खा लिया था |

 

1 युग = 12000 वर्ष

1 सहस्त्र = 1000

1 योजन = 8 मील

 

युग x सहस्त्र x योजन = पर भानु

12000 x 1000 x 8 मील = 96000000 मील

 

1 मील = 1.6 किमी

96000000 x 1.6 = 1536000000 किमी

 

अर्थात हनुमान चालीसा के अनुसार

सूर्य पृथ्वी से 1536000000 किमी  की दूरी पर है |

NASA के अनुसार भी सूर्य पृथ्वी से बिलकुल इतनी ही दूरी पर है|

 

इससे पता चलता है की हमारा पौराणिक साहित्य कितना सटीक एवं वैज्ञानिक है ,

इसके बावजूद इनको बहुत कम महत्व दिया जाता है |

.

भारत के प्राचीन साहित्य की सत्यता को प्रमाणित करने वाली ये जानकारी अवश्य शेयर करें |

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अगर हिंदू धर्म बुरा है :-


अगर हिंदू धर्म बुरा है :-

(1) तो क्यो

“नासा-के-वैज्ञानीको”

ने माना की

सूरज

से

“”

” ॐ ”

”  ”

की आवाज निकलती है?

(2) क्यो ‘अमेरिका’ ने

“भारतीय – देशी – गौमुत्र”  पर

4 Patent लिया ,

व,

कैंसर और दूसरी बिमारियो के

लिये दवाईया बना रहा है ?

जबकी हम

”  गौमुत्र  ”

का महत्व

हजारो साल पहले से जानते है,

 

(3) क्यो अमेरिका के

‘सेटन-हाल-यूनिवर्सिटी’ मे

“गीता”

पढाई जा रही है?

 

(4) क्यो इस्लामिक देश  ‘इंडोनेशिया’.       के Aeroplane का नाम

“भगवान नारायण के वाहन गरुड” के नाम पर  “Garuda Indonesia”  है, जिसमे  garuda  का symbol भी है?

 

(5) क्यो इंडोनेशिया के

रुपए पर

“भगवान गणेश”

की फोटो है?

 

(6) क्यो  ‘बराक-ओबामा’  हमेशा अपनी जेब मे

“हनुमान-जी”

की फोटो रखते है?

 

(7) क्यो आज

पूरी दुनिया

“योग-प्राणायाम”

की दिवानी है?

 

(8) क्यो  भारतीय-हिंदू-वैज्ञानीको”

ने

‘ हजारो साल पहले ही ‘

बता दिया  की

धरती गोल है ?

 

(9) क्यो जर्मनी के Aeroplane का

संस्कृत-नाम

“Luft-hansa”

है ?

 

(10) क्यो हिंदुओ के नाम पर  ‘अफगानिस्थान’  के पर्वत का नाम

“हिंदूकुश”  है?

(11) क्यो हिंदुओ के नाम पर

हिंदी भाषा,

हिन्दुस्तान,

हिंद महासागर

ये सभी नाम है?

 

(12) क्यो  ‘वियतनाम देश’  मे

“Visnu-भगवान”  की

4000-साल पुरानी मूर्ति पाई

गई?

 

(13) क्यो अमेरिकी-वैज्ञानीक

Haward ने,

शोध के बाद माना –

की

 

“गायत्री मंत्र मे  ” 110000 freq ”

 

के कंपन है?

 

(14) क्यो  ‘बागबत की बडी मस्जिद के इमाम’

ने

“सत्यार्थ-प्रकाश”

पढने के बाद हिंदू-धर्म अपनाकर,

“महेंद्रपाल आर्य”  बनकर,

हजारो मुस्लिमो को हिंदू बनाया,

और वो कई-बार

‘जाकिर-नाईक’ से

Debate के लिये कह चुके है,

मगर जाकिर की हिम्म्त नही हुइ,

 

(15) अगर हिंदू-धर्म मे

“यज्ञ”

करना

अंधविश्वास है,

तो ,

क्यो  ‘भोपाल-गैस-कांड’   मे,

जो    “कुशवाह-परिवार”  एकमात्र बचा,

जो उस समय   यज्ञ   कर रहा था,

 

(16) ‘गोबर-पर-घी जलाने से’

“१०-लाख-टन आक्सीजन गैस”

बनती है,

 

(17) क्यो “Julia Roberts”

(American actress and producer)

ने हिंदू-धर्म

अपनाया और

वो हर रोज

“मंदिर”

जाती है,

 

(18)

अगर

“रामायण”

झूठा है,

तो क्यो दुनियाभर मे केवल

“राम-सेतू”

के ही पत्थर आज भी तैरते है?

 

(19) अगर  “महाभारत”  झूठा है,

तो क्यो भीम के पुत्र ,

”घटोत्कच”

का विशालकाय कंकाल,

वर्ष 2007 में

‘नेशनल-जिओग्राफी’ की टीम ने,

‘भारतीय-सेना की सहायता से’

उत्तर-भारत के इलाके में खोजा?

 

(20) क्यो अमेरिका के सैनिकों को,

अफगानिस्तान (कंधार) की एक

गुफा में ,

5000 साल पहले का,

महाभारत-के-समय-का

“विमान”

मिला है?

 

ये जानकारिया आप खुद google मे search कर

सकते है . …..

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क्या आपने कभी इन पश्चिमी philosophers को पढ़ा है:


क्या आपने कभी इन पश्चिमी philosophers को पढ़ा है:
———————————————-

1. लियो टॉल्स्टॉय (1828 -1910):

“हिन्दू और हिन्दुत्व ही एक दिन दुनिया पर राज करेगी, क्योंकि इसी में ज्ञान और बुद्धि का संयोजन है”।

2. हर्बर्ट वेल्स (1846 – 1946):

” हिन्दुत्व का प्रभावीकरण फिर होने तक अनगिनत कितनी पीढ़ियां अत्याचार सहेंगी और जीवन कट जाएगा । तभी एक दिन पूरी दुनिया उसकी ओर आकर्षित हो जाएगी, उसी दिन ही दिलशाद होंगे और उसी दिन दुनिया आबाद होगी । सलाम हो उस दिन को “।

3. अल्बर्ट आइंस्टीन (1879 – 1955):

“मैं समझता हूँ कि हिन्दूओ ने अपनी बुद्धि और जागरूकता के माध्यम से वह किया जो यहूदी न कर सके । हिन्दुत्व मे ही वह शक्ति है जिससे शांति स्थापित हो सकती है”।

4. हस्टन स्मिथ (1919):

“जो विश्वास हम पर है और इस हम से बेहतर कुछ भी दुनिया में है तो वो हिन्दुत्व है । अगर हम अपना दिल और दिमाग इसके लिए खोलें तो उसमें हमारी ही भलाई होगी”।

5. माइकल नोस्टरैडैमस (1503 – 1566):

” हिन्दुत्व ही यूरोप में शासक धर्म बन जाएगा बल्कि यूरोप का प्रसिद्ध शहर हिन्दू राजधानी बन जाएगा”।

6. बर्टरेंड रसेल (1872 – 1970):

“मैंने हिन्दुत्व को पढ़ा और जान लिया कि यह सारी दुनिया और सारी मानवता का धर्म बनने के लिए है । हिन्दुत्व पूरे यूरोप में फैल जाएगा और यूरोप में हिन्दुत्व के बड़े विचारक सामने आएंगे । एक दिन ऐसा आएगा कि हिन्दू ही दुनिया की वास्तविक उत्तेजना होगा “।

7. गोस्टा लोबोन (1841 – 1931):

” हिन्दू ही सुलह और सुधार की बात करता है । सुधार ही के विश्वास की सराहना में ईसाइयों को आमंत्रित करता हूँ”।

8. बरनार्ड शा (1856 – 1950):

“सारी दुनिया एक दिन हिन्दू धर्म स्वीकार कर लेगी । अगर यह वास्तविक नाम स्वीकार नहीं भी कर सकी तो रूपक नाम से ही स्वीकार कर लेगी। पश्चिम एक दिन हिन्दुत्व स्वीकार कर लेगा और हिन्दू ही दुनिया में पढ़े लिखे लोगों का धर्म होगा “।

9. जोहान गीथ (1749 – 1832):

“हम सभी को अभी या बाद मे हिन्दू धर्म स्वीकार करना ही होगा । यही असली धर्म है ।मुझे कोई हिन्दू कहे तो मुझे बुरा नहीं लगेगा, मैं यह सही बात को स्वीकार करता हूँ ।”

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क्या आपने कभी इन पश्चिमी philosophers को पढ़ा है:


क्या आपने कभी इन पश्चिमी philosophers को पढ़ा है:
———————————————-
1. लियो टॉल्स्टॉय (1828 -1910):

“हिन्दू और हिन्दुत्व ही एक दिन दुनिया पर राज करेगी, क्योंकि इसी में ज्ञान और बुद्धि का संयोजन है”।

2. हर्बर्ट वेल्स (1846 – 1946):

” हिन्दुत्व का प्रभावीकरण फिर होने तक अनगिनत कितनी पीढ़ियां अत्याचार सहेंगी और जीवन कट जाएगा । तभी एक दिन पूरी दुनिया उसकी ओर आकर्षित हो जाएगी, उसी दिन ही दिलशाद होंगे और उसी दिन दुनिया आबाद होगी । सलाम हो उस दिन को “।

3. अल्बर्ट आइंस्टीन (1879 – 1955):

“मैं समझता हूँ कि हिन्दूओ ने अपनी बुद्धि और जागरूकता के माध्यम से वह किया जो यहूदी न कर सके । हिन्दुत्व मे ही वह शक्ति है जिससे शांति स्थापित हो सकती है”।

4. हस्टन स्मिथ (1919):

“जो विश्वास हम पर है और इस हम से बेहतर कुछ भी दुनिया में है तो वो हिन्दुत्व है । अगर हम अपना दिल और दिमाग इसके लिए खोलें तो उसमें हमारी ही भलाई होगी”।

5. माइकल नोस्टरैडैमस (1503 – 1566):

” हिन्दुत्व ही यूरोप में शासक धर्म बन जाएगा बल्कि यूरोप का प्रसिद्ध शहर हिन्दू राजधानी बन जाएगा”।

6. बर्टरेंड रसेल (1872 – 1970):

“मैंने हिन्दुत्व को पढ़ा और जान लिया कि यह सारी दुनिया और सारी मानवता का धर्म बनने के लिए है । हिन्दुत्व पूरे यूरोप में फैल जाएगा और यूरोप में हिन्दुत्व के बड़े विचारक सामने आएंगे । एक दिन ऐसा आएगा कि हिन्दू ही दुनिया की वास्तविक उत्तेजना होगा “।

7. गोस्टा लोबोन (1841 – 1931):

” हिन्दू ही सुलह और सुधार की बात करता है । सुधार ही के विश्वास की सराहना में ईसाइयों को आमंत्रित करता हूँ”।

8. बरनार्ड शा (1856 – 1950):

“सारी दुनिया एक दिन हिन्दू धर्म स्वीकार कर लेगी । अगर यह वास्तविक नाम स्वीकार नहीं भी कर सकी तो रूपक नाम से ही स्वीकार कर लेगी। पश्चिम एक दिन हिन्दुत्व स्वीकार कर लेगा और हिन्दू ही दुनिया में पढ़े लिखे लोगों का धर्म होगा “।

9. जोहान गीथ (1749 – 1832):

“हम सभी को अभी या बाद मे हिन्दू धर्म स्वीकार करना ही होगा । यही असली धर्म है ।मुझे कोई हिन्दू कहे तो मुझे बुरा नहीं लगेगा, मैं यह सही बात को स्वीकार करता हूँ ।”

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બંધારણ વિશે જાણવા જેવું


🇮🇳 બંધારણ વિશે જાણવા જેવું 🇮🇳

🇮🇳 26 જાન્યુઆરી 🇮🇳
🇮🇳 બંધારણ વિશેષ 🇮🇳

(1) 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
આપણા દેશનું બંધારણ પ્રિન્ટ કે ટાઇપ થયેલું નથી, પણ હાથેથી ઇંગ્લીશ અને હિન્દી બંન્ને ભાષામાં લખાયું છે. આ બંધારણની ઓરિજિનલ
કોપીઝ પાલૉમેનટની લાઇબ્રેરીમાં હીલિયમ ગેસથી ભરેલ સ્પેશિયલ બૉક્સમાં રાખવામાં આવી છે

(2)🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
જે દિવસે બંધારણ પર હસ્તાક્ષર કરવામાં આવ્યા, એ દિવસે બહાર પુષ્કળ વરસાદ પડતો હતો. લોકોએ આ દિવસને સારા ભવિષ્યનું પ્રતીક ગણયો.

(3)🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
ભારતનું બંધારણ વિશ્વનું સૌથી લાંબુ બંધારણ છે, જયારે અમેરિકાનું બંધારણ વિશ્વનું સૌથી નાનું બંધારણ છે.

(4)🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
આપણા દેશના નેતઓએ દેશના બંધારણમાં આખા વિશ્વના બંધારણની સારી બાબતો લીધી છે. જેમકે, આઝાદી અને સમાનતા ફ્રેન્ચ ના બંધારમાંથી લીધી છે. પંચવર્ષીય યોજનાઓ સોવિયેત સંધના બંધારણ અને સુપ્રીમ કોટૅની કાયૅપ્રણાલી જાપાનના બંધારણની છે. આપણા બંધારણની ધણી મહત્વની બાબતો ઇંગ્લેન્ડના બંધારણમાંથી લેવામાં આવિ છે.

(5)🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
2 વષૅ, 11મહિના અને 18 દિવસ થયા બંધારણ લખવામાં ડ્રાફિટંગ કમિટીએ સબમિટ કરયા પછી પણ લખવામાં આટલો લાંબો સમય થયો.

(6)🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
284 સભ્યોએ (બંધારણસભાના) આ
બંધારણ પર હસ્તાક્ષર કયૅા એમાં 15
લેડીઝ હતી.

(7)🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
આપણું બંધારણ આજે પણ વિશ્વનું સૌથી
સરસ બંધારણ ગણાય છે

(8)🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
29 ઑગસ્ટ, 1947ના રોજ ડો. ભીમરાવ આંબેડકર બંધારણ સમિતિના અધ્યાક્ષ
તરીકે પસંદગી પામ્યા.

(9)🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
24 જાન્યુઆરી, 1950, બંધારણ સભાના
સભ્યોએ એના ઉપર હસ્તાક્ષર કયાૅ.
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
મિત્રો આ હતું દેશ નું બંધારણ
પસંદ આવેતો લાઇક કરજો
અને આગળ મોકલજો જેથી બધા ને જાણવા મળે

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સાયકલ પર વિશ્વભ્રમણ કરનારા ત્રણ ગુજરાતી


 

 

https://plus.google.com/109998862299464069784/posts/Waq8geNXEtC

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8 Facts You Have To Know About The Indian Constitution

The Indian Constitution is one of the longest documents in the world, and is possibly the most important in India. And here’s what you didn’t know about it.

1. The Indian Constitution is the longest in the world. 

It has 448 articles, 12 schedules and 98 amendments. On the other hand, the American constitution is the shortest.

2. It took nearly 3 years to draft the Indian Constitution.

The Constituent Assembly had 284 members, out of which 15 were women. The Drafting Committee submitted the draft in November 1949, after which they took three more years to complete it.

3. The Constitution of India was handwritten and calligraphed both in English and Hindi.

It wasn’t typed or printed. The original copies are kept safely inside helium-filled cases in the library of the Parliament of India.

4. The Indian Constitution is called the bag of borrowings.

The Indian Constitution has taken various features from other constitutions. The concepts of liberty, equality and fraternity were taken from the French Constitution. The idea of 5 year plans was taken from the USSR and the concept of socio-economic rights was taken from Ireland. Most importantly, the law on which the Supreme Court works was taken from Japan. There are many other concepts that have been borrowed from other countries.

5. The Indian Constitution came into force on January 26, 1950.

284 members of the Constituent Assembly signed the handwritten documents on January 24, 1950. Two days after, on 26th January, India celebrated its first Republic Day.

6. Our Republic day is celebrated for 3 days.

Beating the retreat marks the end of the celebration on January 29.

7.  The national emblem of India was adopted on January 26, 1950.

The national emblem of India is an adapted version of the Sarnath Lion of Ashoka.

8. B.R. Ambedkar had a major role to play in the formulation of the Indian Constitution.

Ambedkar was the chief architect of our constitution. It is because of him that our constitution covers a wide range of civil liberties including the freedom of religion and the abolition of untouchability.

-It’s not my original research found on web

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Dr Stephen Hawking’s Opinion on the Science in Veda


Hinduism DeMystified's photo.
Hinduism DeMystified

Dr Stephen Hawking’s Opinion on the Science in Veda

Stephen Hawking, The scientist, theoretical physicist , cosmologist, general relativity and Quantum Theory expert in Cambridge University, U.K. has referred the Vedic science books authored by Dr. Sivarambabu (Organizing secretary, I-SERVE) and said that Vedas might have a theory superior to Einstein’s law E=MC2. His statement on this subject is reproduced below.

Vedas might have a theory superior to Einstein’s law E=MC2

Te Satapatha Brahmana 7-1-2-23 and Gayatri Mantra talk about Universe being threefold (triloka): Prithvi (Earth), Antariksha (the space in between) and Dayu (Heaven). Krishna Yajurveda 23.12 (7-4-45) 43 Pannam-18th Anuvakam-45th Panasa suggests the existence of a softer intermediate space called Pilipila. Modern science says the matter and energy are interchangeable but the Vedic science says there is Pilipila in between the two.(Ref: Modern Science in Vedas- 1 and 2 by Dr. Sakamuri sivaram Babu and Arjunadevi-Guntur-A.P.India published in 2007). Both Vedic and modern science agree upon a continuous dance of creation and annihilation of particle energy everywhere in the universe – Siva tandavam as per Hindu mythology, Rigveda discusses this cycle in detail.

Vedic View: The Universe rotates, shaped like an egg.
Modern View: The Universe is still and it resembles the surface of a sphere.

Dr. Sivarambabu presented an invited paper in the 2nd International Congress on Advanced Materials (AM 2013) at Jaingsu University, Jaingsu, China, in association with University of Jinan, East China University of Science and Technology. Hengyang Normal University, China during May 2013. The conference was attended by Noble Laureates apart from other scientific professionals in the modern sciences. Later the paper was published in the Avagadro Journal of chemistry 1(2)(2013), 7-12. www.academicjournals.com during September 2013

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​भारत के वैदिक नाम


​भारत के वैदिक नाम-

वेद और तन्त्र के अनुसार विन्दु या इन्दु से हिन्दू हुआ है। यह मूल वैदिक  धारणा लगती है। बाद में चिन्तन कर लगा कि यह आध्यात्मिक,  आधिदैविक, आधिभौतिक सभी स्तरों पर सत्य है।

आकाश में शून्य (असत्) से सृष्टि हुई जिसका प्रतीक विन्दु है। विन्दु का प्रसार सोम या इन्दु है। यह चन्द्र विन्दु है। इसका पुरुष-प्रकृति के भेद का द्वैत विसर्ग है जिससे सृष्टि होती है। 

पृथ्वी पर सभ्यता का केन्द्र भारत था। हिम युगके चक्र से हिमालय द्वारा सुरक्षित रहने के कारण यहाँ स्थायी सनातन सभ्यता रही। हिमालय तीन विष्टप (विटप के मूल की तरह हजारों स्रोतों से जल ग्रहण) में बंटा है, अतः त्रिविष्टप (तिब्बत) कहते हैं। जिस क्षेत्र का जल सिन्धु नदी से निकलता है वह विष्णु विटप है। इस अर्थ में कश्मीर पृथ्वी का स्वर्ग है। जिस क्षेत्र का जल गंगा द्वारा समुद्र तक पहुंचता है वह शिव विटप या शिव जटा है। पूर्व भाग का जल ब्रह्मपुत्र से निकलता है,  वह ब्रह्म विटप है। ब्रह्मपुत्र के परे ब्रह्म देश (बर्मा) अब महा-अमर = म्याम्मार है। इन तीनों क्षेत्रों का केंद्र विन्दु सरोवर है जिसे मान सरोवर भी कहते हैं। कुल मिलाकर दो समुद्रों में विसर्ग होता है। सिन्धु नदी का विसर्ग स्थल सिन्धु समुद्र तथा गंगा का विसर्ग स्थल गंगा सागर है। यही ब्रह्मा का कमण्डल भी है जिसमें गंगा विलीन होती है। कर-मण्डल का संक्षेप कमण्डल है। इसका बंगला उच्चारण कोरोमण्डल है जो भारत के पूर्व समुद्र तट का नाम है।

मस्तिष्क में भी विन्दु चक्र बाहरी प्रेरणा का स्रोत है जहां चोटी रखते हैं। इसका मस्तिष्क के दाहिने और बांये भागों में विसर्ग होता है जिनको मानस के दो हंस कहा गया है। इन हंसों के आलाप से 18 प्रकार की विद्या होती है।

समुन्मीलत् संवित् कमल मकरन्दैक रसिकं,

भजे हंस द्वन्द्वं किमपि महतां मानस चरम्।

यदालापाद् अष्टादश गुणित विद्या परिणतिः,

यदादत्ते दोषादू गुणमखिलमद्भ्यः पय इव।।

(सौन्दर्य लहरी 38)

हुएनसांग ने लिखा है कि भारत तीन अर्थों में इन्दु कहा जाता था-

उत्तर से देखने पर अर्ध चन्द्राकार हिमालय इसकी सीमा है।

हिमालय चन्द्र की तरह ठण्डा है।

जैसे चन्द्रमा पूरे विश्व को प्रकाश देता है उसी प्रकार भारत विश्व को ज्ञान का प्रकाश देता है।

हुएनसांग के अनुसार ग्रीक लोग इन्दु का उच्चारण इण्डे करते थे।

पुराणों में भी लिखा है (जैसे मत्स्य,  विष्णु) कि भारत तथा जम्बू द्वीप दोनों की उतरी सीमा धनुषाकार है।

दक्षिण से देखने पर यह अधोमुख त्रिकोण है जिसे शक्ति त्रिकोण कहते हैं। भारतभारतवर्ष के 9 खण्डों में यह मुख्य होने के कारण कुमारिका है जो शक्ति का मूल रूप है।

विश्व सभ्यता के केन्द्र रूप में यह अजनाभ वर्ष है। अज = विष्णु की नाभि का कमल मणिपुर है जिसके बाद ब्रह्म देश है। भौतिक रूप से यह विष्णु के नाभि कमल से ब्रह्मा की उत्पत्ति है।

Arun Upadhyay