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संजय गुप्ता

धन बढ़े, आरोग्य बढ़े, आयु बढ़ता जाय, देव-पितर खुश होत रहें, जो इस विधि भोजन खाय
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सभी जीवों के लिए भोजन जीवन का क्या महत्व है, इसे सब जानते हैं। यह भी प्रमाणित है कि जो जैसा भोजन करता है वैसा ही उसका स्वास्थ्य और विचार हो जाता है और इसमें की गयी लापरवाही बहुतही महँगा पड़ता है। दूसरी ओर, यदि रुचिकर, स्वास्थ्यवर्धक, पवित्र भोजन अच्छे गुणों का भंडार होता है।

इस तथ्य को ऋषि-मुनिओं ने बहुत नजदीक से जाँचा-परखा और लोकहित के लिए बिभिन्न शास्त्र-पुराणों के माध्यम से सामने रखा। सुख-समृद्धि चाहनेवाले को अवश्य ही इन पर ध्यान देना चाहिए।

  1. दोनों हाथ, दोनों पैर और मुँह — इन पाँचो अंगो को धोकर ही भोजन करना चाहिए। इससे आदमी की आयु बढ़ती है। (स्कंदपुराण,पद्मपुराण,सुश्रुतसंहिता,आदि) )
  2. अँन्धेरे में भोजन नहीं करना चाहिए, क्योंकि भोजन में कुछ खतरनाक जीव-जंतु गिर जाय तो वह दिखता नहीं और उसे खा लेने पर वह जानलेवा हो सकता है। (पद्मपुराण

  3. भोजन की वस्तु को गोद में रखकर खाना वर्जित है। इसीप्रकार बिछावन पर बैठकर, हाथमें लेकर और आसन पर रखकर भोजन करने से रोग और दरिद्रता आती है। (वशिष्ठस्मृति, बौद्धयनस्मृति, कूर्मपुराण, पद्मपुराण, आदि )

  4. फूटे हुए बर्तनमें भोजन करने से यह अपवित्र हो जाता है, जिसे खाने से खानेवाला भारी पाप का भागी होता है। ( व्याघ्रपादस्मृति, सुश्रुतसंहिता, मनुस्मृति,स्कंदपुराण, आदि )

  5. ढीक आधी रातमें, मध्यान्ह(दिंनके बारहबजे के आस-पास ) में, गीले वस्त्र धारणकर, सोते हुए और दूसरे के लिए रखे गए आसन पर खाना खाने से देव-पितृगण तो रस्ट होते ही हैं वातरोग भी हो जाता है। (कूर्मपुराण)

  6. अजीर्णता (जब भोजन नहीं पचा हो और कंठदाह, खट्टी डकार आदि आती हो) होने पर भोजन करना विष के समान मानाजाता है, जो प्राणलेवा भी हो जाता है। अत:ऐसी स्थितिमें भोजन करना पूर्णत:मना है। ( कूर्मपुराण )

  7. ग्रहणकाल (सूर्य अथवा चन्द्र ) में भोजन करना भयंकर दुखदायी है, अत:बुद्धिमान लोगों को इससे एकदमही बचना चाहिए। इससे आँख की बीमारी, दाँतों का नष्ट होना, पेटमें बिभिन्न प्रकार के रोगों की संभावना तो रहती ही है व्यक्ति भारी पाप का भागी भी होता है। (आपस्तम्बस्मृति, देवीभागवत, आदि )

  8. मल-मूत्र के वेग होनेपर भोजन नही करना चाहिए। (सुश्रुतसंहिता )

  9. जो कोई व्यक्ति भोजन करनेवाले में प्रेम न रखता हो उसका दिया हुआ भोजन नहीं ही करना चाहिए। यह किसी दुर्घटना का कारण हो सकता है।(चरकसंहिता )

  10. बहुत थका हुआ होनें पर आराम करने के बाद ही भोजन करना चाहिए, नहीं तो बुखार या वमन (वोमिटिंग) हो सकता है। (नीतिवक्यामृतम् )

  11. जोभी भोजन परोसा गया है उसकी निंदा नहीं करनी चाहिए। सामने जोभी आगया उसे प्रेमसे खाना चाहिये। इससे वह अच्छी तरह पच जाता है और बल में वृद्धि करता है।

निंदित भोजन स्वास्थ्यकर तो नहीं ही होता है, देवी अन्नपूर्णा को भी क्रुद्ध कर देता है, फलत:आदमी दरिद्रता की और बढ़ने लगता है। (चरकसंहिता, महाभारत, तैत्तरीयोपनिषद्, वृद्धगौतमस्मृति, आदि )
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संजय गुप्ता

पंच तत्वों का महत्व

प्राचीन समय से ही विद्वानों का मत रहा है कि इस सृष्टि की संरचना पांच तत्वों से मिलकर हुई है. सृष्टि में इन पंचतत्वों का संतुलन बना हुआ है।

यदि यह संतुलन बिगड़ गया तो यह प्रलयकारी हो सकता है. जैसे यदि प्राकृतिक रुप से जलतत्व की मात्रा अधिक हो जाती है तो पृथ्वी पर चारों ओर जल ही जल हो सकता है अथवा बाढ़ आदि का प्रकोप अत्यधिक हो सकता है. आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी को पंचतत्व का नाम दिया गया है।

माना जाता है कि मानव शरीर भी इन्हीं पंचतत्वों से मिलकर बना है।

वास्तविकता में यह पंचतत्व मानव की पांच इन्द्रियों से संबंधित है. जीभ, नाक, कान, त्वचा और आँखें हमारी पांच इन्द्रियों का काम करती है. इन पंचतत्वों को पंचमहाभूत भी कहा गया है. इन पांचो तत्वों के स्वामी ग्रह, कारकत्व, अधिकार क्षेत्र आदि भी निर्धारित किए गये हैं

(1) आकाश

आकाश तत्व का स्वामी ग्रह गुरु है. आकाश एक ऎसा क्षेत्र है जिसका कोई सीमा नहीं है. पृथ्वी के साथ्-साथ समूचा ब्रह्मांड इस तत्व का कारकत्व शब्द है. इसके अधिकार क्षेत्र में आशा तथा उत्साह आदि आते हैं. वात तथा कफ इसकी धातु हैं। वास्तु शास्त्र में आकाश शब्द का अर्थ रिक्त स्थान माना गया है. आकाश का विशेष गुण “शब्द” है और इस शब्द का संबंध हमारे कानों से है. कानों से हम सुनते हैं और आकाश का स्वामी ग्रह गुरु है इसलिए ज्योतिष शास्त्र में भी श्रवण शक्ति का कारक गुरु को ही माना गया है। शब्द जब हमारे कानों तक पहुंचते है तभी उनका कुछ अर्थ निकलता है. वेद तथा पुराणों में शब्द, अक्षर तथा नाद को ब्रह्म रुप माना गया है। वास्तव में आकाश में होने वाली गतिविधियों से गुरुत्वाकर्षण, प्रकाश, ऊष्मा, चुंबकीय़ क्षेत्र और प्रभाव तरंगों में परिवर्तन होता है. इस परिवर्तन का प्रभाव मानव जीवन पर भी पड़ता है. इसलिए आकाश कहें या अवकाश कहें या रिक्त स्थान कहें, हमें इसके महत्व को कभी नहीं भूलना चाहिए. आकाश का देवता भगवान शिवजी को माना गया है।

(2) वायु

वायु तत्व के स्वामी ग्रह शनि हैं. इस तत्व का कारकत्व स्पर्श है. इसके अधिकार क्षेत्र में श्वांस क्रिया आती है. वात इस तत्व की धातु है. यह धरती चारों ओर से वायु से घिरी हुई है. संभव है कि वायु अथवा वात का आवरण ही बाद में वातावरण कहलाया हो। वायु में मानव को जीवित रखने वाली आक्सीजन गैस मौजूद होती है. जीने और जलने के लिए आक्सीजन बहुत जरुरी है. इसके बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. यदि हमारे मस्तिष्क तक आक्सीजन पूरी तरह से नहीं पहुंच पाई तो हमारी बहुत सी कोशिकाएँ नष्ट हो सकती हैं. व्यक्ति अपंग अथवा बुद्धि से जड़ हो सकता है।
प्राचीन समय से ही विद्वानों ने वायु के दो गुण माने हैं. वह है – शब्द तथा स्पर्श. स्पर्श का संबंध त्वचा से माना गया है. संवेदनशील नाड़ी तंत्र और मनुष्य की चेतना श्वांस प्रक्रिया से जुड़ी है और इसका आधार वायु है. वायु के देवता भगवान विष्णु माने गये हैं।

(3) अग्नि

सूर्य तथा मंगल अग्नि प्रधान ग्रह होने से अग्नि तत्व के स्वामी ग्रह माने गए हैं. अग्नि का कारकत्व रुप है. इसका अधिकार क्षेत्र जीवन शक्ति है. इस तत्व की धातु पित्त है. हम्सभी जानते हैं कि सूर्य की अग्नि से ही धरती पर जीवन संभव है। यदि सूर्य नहीं होगा तो चारों ओर सिवाय अंधकार के कुछ नहीं होगा और मानव जीवन की तो कल्पना ही नहीं की जा सकती है. सूर्य पर जलने वाली अग्नि सभी ग्रहों को ऊर्जा तथा प्रकाश देती है। इसी अग्नि के प्रभाव से पृथ्वी पर रहने वाले जीवों के जीवन के अनुकूल परिस्थितियाँ बनती हैं. शब्द तथा स्पर्श के साथ रुप को भी अग्नि का गुण माना जाता है. रुप का संबंध नेत्रों से माना गया है. ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत अग्नि तत्व है। सभी प्रकार की ऊर्जा चाहे वह सौर ऊर्जा हो या आणविक ऊर्जा हो या ऊष्मा ऊर्जा हो सभी का आधार अग्नि ही है. अग्नि के देवता सूर्य अथवा अग्नि को ही माना गया है।

(4) जल

चंद्र तथा शुक्र दोनों को ही जलतत्व ग्रह माना गया है. इसलिए जल तत्व के स्वामी ग्रह चंद्र तथा शुक्र दोनो ही हैं. इस तत्व का कारकत्व रस को माना गया है. इन दोनों का अधिकार रुधिर अथवा रक्त पर माना गया है क्योंकि जल तरल होता है और रक्त भी तरल होता है. कफ धातु इस तत्व के अन्तर्गत आती है। विद्वानों ने जल के चार गुण शब्द, स्पर्श, रुप तथा रस माने हैं. यहाँ रस का अर्थ स्वाद से है. स्वाद या रस का संबंध हमारी जीभ से है. पृथ्वी पर मौजूद सभी प्रकार के जल स्त्रोत जल तत्व के अधीन आते हैं। जल के बिना जीवन संभ्हव नहीं है. जल तथा जल की तरंगों का उपयोग विद्युत ऊर्जा के उत्पादन में किया जाता है. हम यह भी भली-भाँति जानते हैं कि विश्व की सभी सभ्यताएँ नदियों के किनारे ही विकसित हुई हैं. जल के देवता वरुण तथा इन्द्र को माना गया है. मतान्तर से ब्रह्मा जी को भी जल का देवता माना गया है।

(5) पृथ्वी

पृथ्वी का स्वामी ग्रह बुध है. इस तत्व का कारकत्व गंध है. इस तत्व के अधिकार क्षेत्र में हड्डी तथा माँस आता है. इस तत्व के अन्तर्गत आने वाली धातु वात, पित्त तथा कफ तीनों ही आती हैं. विद्वानों के मतानुसार पृथ्वी एक विशालकाय चुंबक है. इस चुंबक का दक्षिणी सिरा भौगोलिक उत्तरी ध्रुव में स्थित है. संभव है इसी कारण दिशा सूचक चुंबक का उत्तरी ध्रुव सदा उत्तर दिशा का ही संकेत देता है। पृथ्वी के इसी चुंबकीय गुण का उपयोग वास्तु शास्त्र में अधिक होता है. इस चुंबक का उपयोग वास्तु में भूमि पर दबाव के लिए किया जाता है. वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा में भार बढ़ाने पर अधिक बल दिया जाता है. हो सकता है इसी कारण दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोना स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना गया है. यदि इस बात को धर्म से जोड़ा जाए तो कहा जाता है कि दक्षिण दिशा की ओर पैर करके ना सोएं क्योंकि दक्षिण में यमराज का वास होता है। पृथ्वी अथवा भूमि के पाँच गुण शब्द, स्पर्श, रुप, स्वाद तथा आकार माने गए हैं. आकार तथा भार के साथ गंध भी पृथ्वी का विशिष्ट गुण है क्योंकि इसका संबंध नासिका की घ्राण शक्ति से है। उपरोक्त विश्लेषण से यह निष्कर्ष निकलता है कि पंचतत्व मानव जीवन को अत्यधिक प्रभावित करते हैं. उनके बिना मानव तो क्या धरती पर रहने वाले किसी भी जीव के जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। इन पांच तत्वों का प्रभाव मानव के कर्म, प्रारब्ध, भाग्य तथा आचरण पर भी पूरा पड़ता है. जल यदि सुख प्रदान करता है तो संबंधों की ऊष्मा सुख को बढ़ाने का काम करती है और वायु शरीर में प्राण वायु बनकर घूमती है. आकाश महत्वाकांक्षा जगाता है तो पृथ्वी सहनशीलता व यथार्थ का पाठ सिखाती है. यदि देह में अग्नि तत्व बढ़ता है तो जल्की मात्रा बढ़ाने से उसे संतुलित किया जा सकता है. यदि वायु दोष है तो आकाश तत्व को बढ़ाने से यह संतुलित रहेगें।

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लाल किताब के सिद्ध 25 टोटके और उपाय (लाल किताब ke Totke aur Upay)
लाल किताब के सिद्ध टोटके और उपाय (लाल किताब ke Totke aur Upay)
1. आर्थिक समस्या के छुटकारे के लिए:
यदि आप हमेशा आर्थिक समस्या से परेशान हैं तो इसके लिए 21 शुक्रवार 9 वर्ष से कम आयु की 5 आप कन्यायों को खीर व मिश्री का प्रसाद बांटें!
2. घर और कार्यस्थल में धन वर्षा के लिए:
इसके लिए आप अपने घर, दुकान या शोरूम में एक अलंकारिक फव्वारा रखें! या एक मछलीघर जिसमें 8 सुनहरी व एक काली मछ्ली हो रखें! इसको उत्तर या उत्तरपूर्व की ओर रखें! यदि कोई मछ्ली मर जाय तो उसको निकाल कर नई मछ्ली लाकर उसमें डाल दें!
3. परेशानी मुक्ति के लिए से:
आज कल हर आदमी किसी न किसी कारण से परेशान है! कारण कोई भी हो आप एक तांबे के पात्र में जल भर कर उसमें थोडा सा लाल चंदन मिला दें! उस पात्र को सिरहाने रख कर रात को सो जांय! प्रातः उस जल को तुलसी के पौधे पर चढा दें! धीरे-धीरे परेशानी दूर होगी!
4. कुंवारी कन्या के विवाह हेतु:
1। यदि कन्या की शादी में कोई रूकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें! भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर “ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नामः” मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढा दें! विवाह की बाधायें अपने आप दूर होती जांयगी!
2। प्रत्येक सोमवार को कन्या सुबह नहा-धोकर शिवलिंग पर “ऊं सोमेश्वराय नमः” का जाप करते हुए दूध मिले जल को चढाये और वहीं मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला जप करे! विवाह की सम्भावना शीघ्र बनती नज़र आयेगी
5. व्यापार बढाने के लिए:
1। शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन अपनी फैक्ट्री या दुकान के दरवाजे के दोनों तरफ बाहर की ओर थोडा सा गेहूं का आटा रख दें! ध्यान रहे ऐसा करते हुए आपको कोई देखे नही!
2। पूजा घर में अभिमंत्रित श्र्री यंत्र रखें!
3। शुक्र्वार की रात को सवा किलो काले चने भिगो दें! दूसरे दिन शनिवार को उन्हें सरसों के तेल में बना लें! उसके तीन हिस्से कर लें! उसमें से एक हिस्सा घोडे या भैंसे को खिला दें! दूसरा हिस्सा कुष्ठ रोगी को दे दें और तीसरा हिस्सा अपने सिर से घडी की सूई से उल्टे तरफ तीन बार वार कर किसी चौराहे पर रख दें! यह प्रयोग 40 दिन तक करें! कारोबार में लाभ होगा!
6. लगातार बुखार आने पर:
1। यदि किसी को लगातार बुखार आ रहा हो और कोई भी दवा असर न कर रही हो तो आक की जड लेकर उसे किसी कपडे में कस कर बांध लें! फिर उस कपडे को रोगी के कान से बांध दें! बुखार उतर जायगा!
2। इतवार या गुरूवार को चीनी, दूध, चावल और पेठा (कद्दू-पेठा, सब्जी बनाने वाला) अपनी इच्छा अनुसार लें और उसको रोगी के सिर पर से वार कर किसी भी धार्मिक स्थान पर, जहां पर लंगर बनता हो, दान कर दें!
3। यदि किसी को टायफाईड हो गया हो तो उसे प्रतिदिन एक नारियल पानी पिलायें! कुछ ही दिनों में आराम हो जायगा!
7. नौकरी जाने का खतरा हो या ट्रांसफर रूकवाने के लिए :
पांच ग्राम डली वाला सुरमा लें! उसे किसी वीरान जगह पर गाड दें! ख्याल रहे कि जिस औजार से आपने जमीन खोदी है उस औजार को वापिस न लायें! उसे वहीं फेंक दें दूसरी बात जो ध्यान रखने वाली है वो यह है कि सुरमा डली वाला हो और एक ही डली लगभग 5 ग्राम की हो! एक से ज्यादा डलियां नहीं होनी चाहिए!
8. कारोबार में नुकसान हो रहा हो या कार्यक्षेत्र में झगडा हो रहा हो तो :
यदि उपरोक्त स्थिति का सामना हो तो आप अपने वज़न के बराबर कच्चा कोयला लेकर जल प्रवाह कर दें! अवश्य लाभ होगा!
9. मुकदमें में विजय पाने के लिए:
यदि आपका किसी के साथ मुकदमा चल रहा हो और आप उसमें विजय पाना चाहते हैं तो थोडे से चावल लेकर कोर्ट / कचहरी में जांय और उन चावलों को कचहरी में कहीं पर फेंक दें! जिस कमरे में आपका मुकदमा चल रहा हो उसके बाहर फेंकें तो ज्यादा अच्छा है! परंतु याद रहे आपको चावल ले जाते या कोर्ट में फेंकते समय कोई देखे नहीं वरना लाभ नहीं होगा! यह उपाय आपको बिना किसी को पता लगे करना होगा!
10 धन के ठहराव के लिए:
आप जो भी धन मेहनत से कमाते हैं उससे ज्यादा खर्च हो रहा हो अर्थात घर में धन का ठहराव न हो तो ध्यान रखें को आपके घर में कोई नल लीक न करता हो! अर्थात पानी टप-टप टपकता न हो! और आग पर रखा दूध या चाय उबलनी नहीं चाहिये! वरना आमदनी से ज्यादा खर्च होने की सम्भावना रह्ती है!
11. मानसिक परेशानी दूर करने के लिए:
रोज़ हनुमान जी का पूजन करे व हनुमान चालीसा का पाठ करें! प्रत्येक शनिवार को शनि को तेल चढायें! अपनी पहनी हुई एक जोडी चप्पल किसी गरीब को एक बार दान करें!
12. बच्चे के उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु के लिए:
1। एक काला रेशमी डोरा लें! “ऊं नमोः भगवते वासुदेवाय नमः” का जाप करते हुए उस डोरे में थोडी थोडी दूरी पर सात गांठें लगायें! उस डोरे को बच्चे के गले या कमर में बांध दें!
2। प्रत्येक मंगलवार को बच्चे के सिर पर से कच्चा दूध 11 बार वार कर किसी जंगली कुत्ते को शाम के समय पिला दें! बच्चा दीर्घायु होगा!
13. किसी रोग से ग्रसित होने पर:
सोते समय अपना सिरहाना पूर्व की ओर रखें! अपने सोने के कमरे में एक कटोरी में सेंधा नमक के कुछ टुकडे रखें! सेहत ठीक रहेगी!
14. प्रेम विवाह में सफल होने के लिए:
यदि आपको प्रेम विवाह में अडचने आ रही हैं तो:
शुक्ल पक्ष के गुरूवार से शुरू करके विष्णु और लक्ष्मी मां की मूर्ती या फोटो के आगे “ऊं लक्ष्मी नारायणाय नमः” मंत्र का रोज़ तीन माला जाप स्फटिक माला पर करें! इसे शुक्ल पक्ष के गुरूवार से ही शुरू करें! तीन महीने तक हर गुरूवार को मंदिर में प्रशाद चढांए और विवाह की सफलता के लिए प्रार्थना करें!
15. नौकर न टिके या परेशान करे तो:
हर मंगलवार को बदाना (मीठी बूंदी) का प्रशाद लेकर मंदिर में चढा कर लडकियों में बांट दें! ऐसा आप चार मंगलवार करें!
16. बनता बिगडता हो काम, लाभ न हो रहा हो या कोई भी परेशानी हो तो :
हर मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में बदाना (मीठी बूंदी) चढा कर उसी प्रशाद को मंदिर के बाहर गरीबों में बांट दें!
17. यदि आपको सही नौकरी मिलने में दिक्कत आ रही हो तो :
1। कुएं में दूध डालें! उस कुएं में पानी होना चहिए!
2। काला कम्बल किसी गरीब को दान दें!
3। 6 मुखी रूद्राक्ष की माला 108 मनकों वाली माला धारण करें जिसमें हर मनके के बाद चांदी के टुकडे पिरोये हों!
18. अगर आपका प्रमोशन नहीं हो रहा तो:
1। गुरूवार को किसी मंदिर में पीली वस्तुये जैसे खाद्य पदार्थ, फल, कपडे इत्यादि का दान करें!
2। हर सुबह नंगे पैर घास पर चलें!
19. पति को वश में करने के लिए:
यह प्रयोग शुक्ल पक्ष में करना चाहिए! एक पान का पत्ता लें! उस पर चंदन और केसर का पाऊडर मिला कर रखें! फिर दुर्गा माता जी की फोटो के सामने बैठ कर दुर्गा स्तुति में से चँडी स्त्रोत का पाठ 43 दिन तक करें! पाठ करने के बाद चंदन और केसर जो पान के पत्ते पर रखा था, का तिलक अपने माथे पर लगायें! और फिर तिलक लगा कर पति के सामने जांय! यदि पति वहां पर न हों तो उनकी फोटो के सामने जांय! पान का पता रोज़ नया लें जो कि साबुत हो कहीं से कटा फटा न हो! रोज़ प्रयोग किए गए पान के पत्ते को अलग किसी स्थान पर रखें! 43 दिन के बाद उन पान के पत्तों को जल प्रवाह कर दें! शीघ्र समस्या का समाधान होगा!
20. यदि आपको धन की परेशानी है, नौकरी मे दिक्कत आ रही है, प्रमोशन नहीं हो रहा है या आप अच्छे करियर की तलाश में है तो यह उपाय कीजिए :
किसी दुकान में जाकर किसी भी शुक्रवार को कोई भी एक स्टील का ताला खरीद लीजिए! लेकिन ताला खरीदते वक्त न तो उस ताले को आप खुद खोलें और न ही दुकानदार को खोलने दें ताले को जांचने के लिए भी न खोलें! उसी तरह से डिब्बी में बन्द का बन्द ताला दुकान से खरीद लें! इस ताले को आप शुक्रवार की रात अपने सोने के कमरे में रख दें! शनिवार सुबह उठकर नहा-धो कर ताले को बिना खोले किसी मन्दिर, गुरुद्वारे या किसी भी धार्मिक स्थान पर रख दें! जब भी कोई उस ताले को खोलेगा आपकी किस्मत का ताला खुल जायगा!
21. यदि आप अपना मकान, दुकान या कोई अन्य प्रापर्टी बेचना चाहते हैं और वो बिक न रही हो तो यह उपाय करें :
बाजार से 86 (छियासी) साबुत बादाम (छिलके सहित) ले आईए! सुबह नहा-धो कर, बिना कुछ खाये, दो बादाम लेकर मन्दिर जाईए! दोनो बादाम मन्दिर में शिव-लिंग या शिव जी के आगे रख दीजिए! हाथ जोड कर भगवान से प्रापर्टी को बेचने की प्रार्थना कीजिए और उन दो बादामों में से एक बादाम वापिस ले आईए! उस बादाम को लाकर घर में कहीं अलग रख दीजिए! ऐसा आपको 43 दिन तक लगातार करना है! रोज़ दो बादाम लेजाकर एक वापिस लाना है! 43 दिन के बाद जो बादाम आपने घर में इकट्ठा किए हैं उन्हें जल-प्रवाह (बहते जल, नदी आदि में) कर दें! आपका मनोरथ अवश्य पूरा होगा! यदि 43 दिन से पहले ही आपका सौदा हो जाय तो भी उपाय को अधूरा नही छोडना चाहिए! पूरा उपाय करके 43 बादाम जल-प्रवाह करने चाहिए! अन्यथा कार्य में रूकावट आ सकती है!
22. यदि आप ब्लड प्रेशर या डिप्रेशन से परेशान हैं तो :
इतवार की रात को सोते समय अपने सिरहाने की तरफ 325 ग्राम दूध रख कर सोंए! सोमवार को सुबह उठ कर सबसे पहले इस दूध को किसी कीकर या पीपल के पेड को अर्पित कर दें! यह उपाय 5 इतवार तक लगातार करें! होगा लाभ!
23. माईग्रेन या आधा सीसी का दर्द का उपाय:
सुबह सूरज उगने के समय एक गुड का डला लेकर किसी चौराहे पर जाकर दक्षिण की ओर मुंह करके खडे हो जांय! गुड को अपने दांतों से दो हिस्सों में काट दीजिए! गुड के दोनो हिस्सों को वहीं चौराहे पर फेंक दें और वापिस आ जांय! यह उपाय किसी भी मंगलवार से शुरू करें तथा 5 मंगलवार लगातार करें! लेकिन … .लेकिन ध्यान रहे यह उपाय करते समय आप किसी से भी बात न करें और न ही कोई आपको पुकारे न ही आप से कोई बात करे! अवश्य लाभ होगा!
24. फंसा हुआ धन वापिस लेने के लिए:
यदि आपकी रकम कहीं फंस गई है और पैसे वापिस नहीं मिल रहे तो आप रोज़ सुबह नहाने के पश्चात सूरज को जल अर्पण करें! उस जल में 11 बीज लाल मिर्च के डाल दें तथा सूर्य भगवान से पैसे वापिसी की प्रार्थना करें! इसके साथ ही “ओम आदित्याय नमः” का जाप करें!
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10 सिद्ध टोटके, जो दिलाए सभी संकटों से मुक्ति
10 Useful tone totke in Hindi :

कई बार ऐसा होता है कि बहुत प्रयास करने के बाद भी कोई काम नहीं बनता और यदि बन भी जाता है तो बनते-बनते बिगड़ जाता है। सफलता आते-आते आपके हाथों से फिसल जाती है। आखिर इसके पीछे कुछ तो कारण होगा?
माना जाता है कि पितृदोष, कालसर्प दोष और ग्रह-नक्षत्रों के बुरे प्रभाव के कारण कभी कोई सुख प्राप्त नहीं होता, तो कभी देवी-देवताओं के प्रति किए गए अपराध के चलते भी दुखों और समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह सब ठीक होने के बावजूद कभी-कभी वास्तुदोष के कारण भी व्यक्ति समस्याओं से घिरा रहता है। उपरोक्त कारणों के चलते व्यक्ति कर्ज में डूब जाता है, संतान सुख चला जाता है, गृहकलह बढ़ जाती है, धन-समृद्धि भी साथ छोड़ देती है, दरिद्रता पीछे लग जाती है, रोग और शोक भी परेशान करते रहते हैं। इस तरह की अन्य कई समस्याओं से व्यक्ति घिर जाता है।
आपके जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या हो और बिगड़े काम नहीं बन रहे हो तो ज्योतिषियों द्वारा बताए गए अद्भुत उपाय अपनाएं और बिगड़े काम बनाएं। विदेश यात्रा में अड़चन, उन्नति में रुकावट, धन प्राप्ति में कठिनाई, विवाह में विलंब आदि सभी तरह के कार्यों के समाधान के लिए यहां प्रस्तुत हैं ऐसे ही कुछ उपाय या टोटके जिसको करने से सभी तरह की सम्याओं से मुक्ति पाई जा सकती है।
हनुमान चालीसा :
o प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ें। मंगलवार या शनिवार के दिन हनुमानजी को चोला चढ़ाएं और उनको बनारसी पान का बीड़ा भी अर्पित करें। आपके बिगड़े काम फिर से बनने लगेंगे।
o हनुमान चालीसा पढ़ने से जहां पितृदोष, राहुदोष, मंगलदोष आदि दूर होते हैं वहीं भूत-प्रेतादि का बुरा साया भी हट जाता है। मंगल कामना और भावना से हनुमानजी से जुड़ने से वे सभी तरह के संकटों से मुक्ति दिला देते हैं।
गाय, कुत्ते, कौवे, पक्षी, चींटी को रोटी खिलाएं :
o प्रतिदिन गाय, कुत्ते, कौवे, पक्षी व चींटी को रोटी खिलाएं, आपके बिगड़े काम बनने लगेंगे। इससे सभी तरह की समस्याओं का समाधान होगा।
o गाय में सकारात्मक ऊर्जा का भंडार होता है। घर के आसपास गाय होने का मतलब है कि आप सभी तरह के संकटों से दूर रहकर सुख और समृद्धिपूर्वक जीवन जी रहे हैं। गाय को प्रतिदिन भोजन कराने से घर में धन-समृद्धि और शांति बढ़ती है। गाय को खिलाने से घर की पीड़ा दूर होगी।
o कुत्ता आपको राजा से रंक और रंक से राजा बना सकता है। कुत्ते को खिलाने से दुश्मन आपसे दूर रहेंगे। कुत्ते को प्रतिदिन भोजन देने से जहां दुश्मनों का भय मिट जाता है, वहीं व्यक्ति निडर हो जाता है। कुत्ता पालने से लक्ष्मी आती है और कुत्ता घर के रोगी सदस्य की बीमारी अपने ऊपर ले लेता है। पितृ पक्ष में कुत्तों को मीठी रोटी खिलानी चाहिए।
o कौवे को भोजन कराने से सभी तरह का पितृ और कालसर्प दोष दूर हो जाता है। कौवे को भोजन कराने से अनिष्ट व शत्रु का नाश होता है। शनि को प्रसन्न करना हो तो कौवों को भोजन कराना चाहिए।
o पक्षी को खिलाने से व्यापार-नौकरी में लाभ होता है, घर में खुशियां बढ़ती हैं और व्यक्ति समृद्धि के द्वार खोल देता है। इसके अलावा चींटी को शकर मिलाकर आटा खिलाने से कर्ज समाप्त होगा और मछली को खिलाने से समृद्धि बढ़ेगी। समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति के लिए कबूतरों को चावल डालें, बाजरा शुक्रवार को खरीदें व शनिवार से डालना शुरू करें।
गृहकलह से बचने के लिए :
o घर के पूजा स्थान पर घी का दीपक जलाएं। कपूर और अष्टगंध की सुगंध प्रतिदिन घर में फैलाएं। गुरुवार और रविवार को गुड़ और घी मिलाकर उसे कंडे पर जलाएं, इससे भी सुगंधित वातावरण होगा।
o रात्रि में सोने से पहले घी में तर किया हुआ कपूर जला दें। इसे तनावमुक्ति होगी और गहरी नींद आएगी। शरीर को हमेशा सुगंधित और साफ-सुथरा बनाए रखें।
o महीने में 2 बार किसी भी दिन घर में उपले जलाकर लोबान या गूगल की धूनी देने से घर में ऊपरी हवा का बचाव रहता है तथा बीमारी दूर होती है, साथ ही गृहकलह भी शांत हो जाता है।
o सुगंध हमारी भावनाओं से जुड़ा हुआ और बहुत हद तक यह हमारे मस्तिष्क को प्रभावित करता है। सुगंधित वातावरण बना रहने से मस्तिष्क प्रसन्नचित्त और शांत रहता है जिसके चलते घर में गृहकलह नहीं होती है। सुगंध से वास्तुदोष का निवारण भी होता है।
खुशियां बढ़ाने के लिए :
o घर की दीवारों पर लगे चित्रों को बदलें। ऐसा कोई-सा भी चित्र न लगाएं जिससे आपकी भावनाएं विकृत होती हों। दीवार पर लगा प्रकृति का चित्र या हंसमुख परिवार का चित्र आपके जीवन में खुशियां बढ़ा सकने में सक्षम है।
o बैठक रूम, बेडरूम, किचन, स्टडी रूम, बरामदे आदि जगहों पर किसी वास्तुशास्त्री से पूछकर ही कोई चित्र या पेंटिंग लगाएं। एक चित्र आपका जीवन बदल सकता है। घर में ढेर सारे देवी और देवताओं के चित्र या मूर्तियां न रखें।
संकटों से बचने के उपाय :
o यदि आप संकटों से जूझ रहे हैं, बार-बार एक के बाद एक कोई न कोई संकट से आप घिर जाते हैं तो किसी की शवयात्रा में श्मशान से लौटते वक्त कुछ सिक्के पीछे फेंकते हुए आ जाएं।
o स्नानादि से निवृत्त होने के बाद हनुमानजी के मंदिर जाकर उनसे जाने-अनजाने किए गए पापों की क्षमा मांग लें, तुरंत ही संकटों से मुक्ति मिलना शुरू हो जाएगी।
o कांसे की कटोरी में तेल भरकर उसमें अपनी परछाई देखें और यह तेल किसी मंदिर में दान कर दें। 5 तरह के फल ले जाकर किसी मंदिर में रख आएं।
संकटों से बचने के उपाय :
o यदि आप संकटों से जूझ रहे हैं, बार-बार एक के बाद एक कोई न कोई संकट से आप घिर जाते हैं तो किसी की शवयात्रा में श्मशान से लौटते वक्त कुछ सिक्के पीछे फेंकते हुए आ जाएं।
o स्नानादि से निवृत्त होने के बाद हनुमानजी के मंदिर जाकर उनसे जाने-अनजाने किए गए पापों की क्षमा मांग लें, तुरंत ही संकटों से मुक्ति मिलना शुरू हो जाएगी।
o कांसे की कटोरी में तेल भरकर उसमें अपनी परछाई देखें और यह तेल किसी मंदिर में दान कर दें। 5 तरह के फल ले जाकर किसी मंदिर में रख आएं।
o घर से किसी भी कार्य के लिए निकलते समय पहले ‘श्री गणेशाय नम:’ बोलें फिर विपरीत दिशा में 4 पग जाएं, इसके बाद कार्य पर चले जाएं, कार्य जरूर बनेगा।
o घर से निकलते वक्त गुड़ खाकर व थोड़ा-सा पानी पीकर निकलें, तो कार्य में सफलता मिलेगी। इसके अलावा घर की देहली के बाहर कुछ काली मिर्ची के दाने बिखेर दें और उस पर से पैर रखकर निकल जाएं फिर पीछे पलटकर न देंखे। उक्त उपाय से बिगड़े कार्य बन जाएंगे।
कपड़े पहनें रंगदार और साफ-सुथरे :
o कार्य में रुकावट या सफलता में आपके घर और कपड़े के रंग का भी बहुत योगदान रहता है। कभी भी हल्के, काले, कत्थई, भूरे और मटमैले रंग के कपड़े न पहनें। अधिकतर सफेद, नीले, लाल, हरे और गुलाबी रंग के कपड़े ही पहनें।
पीपल और बरगद की पूजा करें :
o कोई काम न बन रहा हो तो 19 शनिवार तक आप पीपल के पेड़ में धागा लपेटें और तिल के तेल का ही दीया जलाएं। इस दीये में 11 दाने काली उड़द के जरूर रखें। इसके अलावा प्रतिदिन संध्या को पीपल में घी का दीया जलाकर रखें। ध्यान रखें कि पीपल को शनिवार को ही छुएं।
o ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या तिथि के दिन वटवृक्ष की पूजा का विधान है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन वटवृक्ष की पूजा से सौभाग्य एवं स्थायी धन और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
o बरगद के पेड़ को वट का वृक्ष कहा जाता है। शास्त्रों में वटवृक्ष को पीपल के समान ही महत्व दिया गया है। पुराणों में यह स्पष्ट लिखा गया है कि वटवृक्ष की जड़ों में ब्रह्माजी, तने में विष्णुजी और डालियों एवं पत्तों में शिव का वास है। इसके नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा कहने और सुनने से मनोकामना पूरी होती है।
o हिन्दू धर्मानुसार 5 वटवृक्षों का महत्व अधिक है। अक्षयवट, पंचवट, वंशीवट, गयावट और सिद्धवट के बारे में कहा जाता है कि इनकी प्राचीनता के बारे में कोई नहीं जानता। संसार में उक्त 5 वटों को पवित्र वट की श्रेणी में रखा गया है। प्रयाग में अक्षयवट, नासिक में पंचवट, वृंदावन में वंशीवट, गया में गयावट और उज्जैन में पवित्र सिद्धवट है।
o ।।तहं पुनि संभु समुझिपन आसन। बैठे वटतर, करि कमलासन।।
भावार्थ- अर्थात कई सगुण साधकों, ऋषियों यहां तक कि देवताओं ने भी वटवृक्ष में भगवान विष्णु की उपस्थिति के दर्शन किए हैं। -रामचरित मानस
बंद किस्मत खोले ताला :
o सबसे पहले आप ताले की दुकान पर किसी भी शुक्रवार को जाएं और एक स्टील या लोहे का ताला खरीद लें। लेकिन ध्यान रखें ताला बंद होना चाहिए, खुला नहीं। ताला खरीदते समय उसे न दुकानदार को खोलने दें और न आप खुद खोलें। ताला सही है या नहीं, यह जांचने के लिए भी न खोलें। बस, बंद ताले को खरीदकर ले आएं।
o उस ताले को एक डिब्बे में रखें और शुक्रवार की रात को ही अपने सोने वाले कमरे में बिस्तर के पास रख लें। शनिवार सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर ताले को बिना खोले किसी मंदिर या देवस्थान पर रख दें। ताले को रखकर बिना कुछ बोले, बिना पलटे वापस अपने घर आ जाएं।
o विश्वास और श्रद्धा रखें। जैसे ही कोई उस ताले को खोलेगा आपकी किस्मत का ताला भी खुल जाएगा। यह लाल किताब का जाना-माना प्रयोग है। अपनी किस्मत चमकाने के लिए इसे अवश्य आजमाएं…।
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इस गणेश मंत्र से मिलेगी मनचाही नौकरी::-
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नौकरी अगर मनचाही मिल जाए तो फिर क्या कहने। यदि आप भी चाहते हैं कि मनचाही जगह पर आपकी नौकरी लग जाए तो आपकी यह इच्छा पूरी हो सकती है। आपको सिर्फ नीचे लिखे गणेश मंत्र का जप विधि-विधान से करना है।

मंत्र

ऊँ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।

जप विधि:-


  • बुधवार के दिन सुबह जल्दी उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें।

  • इसके बाद गणेशजी की पूजा करें और उन्हें दुर्वा चढ़ाएं साथ ही लड्डूओं का भोग भी लगाएं।

  • इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश के आसन पर बैठें।

  • तत्पश्चात हरे पन्ने की माला से ऊपर लिखे मंत्र का जप करें।

  • इस मंत्र का प्रभाव आपको कुछ ही समय में दिखने लगेगा।

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वास्तु अनुसार गणपति स्थापन

देव शर्मा
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कहां किस तरह के गणेश स्थापित करना चाहिए और गणेश जी कैसे आपके घर का वास्तु सुधार सकते हैं जानिए।

👉 सुख, शांति, समृद्धि की चाह रखने वालों को सफेद रंग के विनायक की मूर्ति लाना चाहिए।साथ ही, घर में इनका एक स्थाई चित्र भी लगाना चाहिए।

👉 सर्व मंगल की कामना करने वालों के लिए सिंदूरी रंग के गणपति की आराधना अनुकूल रहती है। – घर में पूजा के लिए गणेश जी की शयन या बैठी मुद्रा में हो तो अधिक शुभ होती है। यदि कला या अन्य शिक्षा के प्रयोजन से पूजन करना हो तो नृत्य गणेश की प्रतिमा या तस्वीर का पूजन लाभकारी है।

👉 घर में बैठे हुए और बाएं हाथ के गणेश जी विराजित करना चाहिए। दाएं हाथ की ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी हठी होते हैं और उनकी साधना-आराधना कठीन होती है। वे देर से भक्तों पर प्रसन्न होते हैं।

👉 कार्यस्थल पर गणेश जी की मूर्ति विराजित कर रहे हों तो खड़े हुए गणेश जी की मूर्ति लगाएं। इससे कार्यस्थल पर स्फूर्ति और काम करने की उमंग हमेशा बनी रहती है।

👉 कार्य क्षेत्र पर किसी भी भाग में वक्रतुण्ड की प्रतिमा या चित्र लगाए जा सकते हैं, लेकिन यह ध्यान जरूर रखना चाहिए कि किसी भी स्थिति में इनका मुंह दक्षिण दिशा या नैऋय कोण में नहीं होना चाहिए।

👉 मंगल मूर्ति को मोदक और उनका वाहन मूषक अतिप्रिय है। इसलिए मूर्ति स्थापित करने से पहले ध्यान रखें कि मूर्ति या चित्र में मोदक या लड्डू और चूहा जरूर होना चाहिए।

👉 गणेश जी की मूर्ति स्थापना भवन या वर्किंग प्लेस के ब्रह्म स्थान यानी केंद्र में करें। ईशान कोण और पूर्व दिशा में सुखकर्ता की मूर्ति या चित्र लगाना शुभ रहता है।

👉 यदि घर के मुख्य द्वार पर एकदंत की प्रतिमा या चित्र लगाया गया हो तो उसके दूसरी तरफ ठीक उसी जगह पर दोनों गणेशजी की पीठ मिली रहे इस प्रकार से दूसरी प्रतिमा या चित्र लगाने से वास्तु दोषों का शमन होता है।

👉 यदि भवन में द्वारवेध हो यानी दरवाजे से जुड़ा किसी भी तरह का वास्तुदोष हो(भवन के द्वार के सामने वृक्ष, मंदिर, स्तंभ आदि के होने पर द्वारवेध माना जाता है)। ऐसे में घर के मुख्य द्वार पर गणेश जी की बैठी हुई प्रतिमा लगानी चाहिए लेकिन उसका आकार 11 अंगुल से अधिक नहीं होना चाहिए।

👉 भवन के जिस भाग में वास्तु दोष हो उस स्थान पर घी मिश्रित सिन्दूर से स्वस्तिक दीवार पर बनाने से वास्तु दोष का प्रभाव कम होता है।

👉 स्वस्तिक को गणेश जी का रूप माना जाता है। वास्तु शास्त्र भी दोष निवारण के लिए स्वास्तिक को उपयोगी मानता है। स्वास्तिक वास्तु दोष दूर करने का महामंत्र है। यह ग्रह शान्ति में लाभदायक है। इसलिए घर में किसी भी तरह का वास्तुदोष होने पर अष्टधातु से बना पिरामिड यंत्र पूर्व की तरफ वाली दीवार पर लगाना चाहिए।

👉 रविवार को पुष्य नक्षत्र पड़े, तब श्वेतार्क या सफेद मंदार की जड़ के गणेश की स्थापना करनी चाहिए। इसे सर्वार्थ सिद्धिकारक कहा गया है। इससे पूर्व ही गणेश को अपने यहां रिद्धि-सिद्धि सहित पदार्पण के लिए निमंत्रण दे आना चाहिए और दूसरे दिन, रवि-पुष्य योग में लाकर घर के ईशान कोण में स्थापना करनी चाहिए।

👉 श्वेतार्क गणेश की प्रतिमा का मुख नैऋत्य में हो तो इष्टलाभ देती है। वायव्य मुखी होने पर संपदा का क्षरण, ईशान मुखी हो तो ध्यान भंग और आग्नेय मुखी होने पर आहार का संकट खड़ा कर सकती है।

👉 पूजा के लिए गणेश जी की एक ही प्रतिमा हो। गणेश प्रतिमा के पास अन्य कोई गणेश प्रतिमा नहीं रखें। एक साथ दो गणेश जी रखने पर रिद्धि और सिद्धि नाराज हो जाती हैं।

👉 गणेश को रोजाना दूर्वा दल अर्पित करने से इष्टलाभ की प्राप्ति होती है। दूर्वा चढ़ाकर समृद्धि की कामना से ऊं गं गणपतये नम: का पाठ लाभकारी माना जाता है। वैसे भी गणपति विघ्ननाशक तो माने ही गए हैं।
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संजय गुप्ता

मोर के पंख के ये 6 अचूक टोटके आज ही बदल देंगे आपकी लाइफ :
ज्योतिष शास्त्र में मोर के पंख को पुरे नौ ग्रहों का प्रतिनिधि माना है, और मुख्य तौर पर मोरपंख के कुछ ऐसे रामबाण उपाय बताए गए हैं जिन्हें किसी भी शुभ मुहूर्त में करने मात्र से सभी समस्याओं का तुरंत हल मिल जाता है। आइए हम बताते है हैं ऐसे ही कुछ अचूक टोटके

अपार धन संपत्ति पाने तथा आर्थिक सम्पन्नता के साथ अटके हुए काम पूरे करने के लिए : –

अगर आपके कोई भी काम रुके हुए हैं या आपके मन में बहुत अधिक धन-वैभव की इच्छा है तो आपको श्रीराधाकृष्ण के मंदिर में मोर के पंख की स्थापना करवानी होगी । नित्य दिन उस प्रतिमा की पूजा करें और 40वें दिन उस मोर के पंख को अपने साथ लाकर तिजोरी या लॉकर में रख दें। उस समय से ही धन-संपत्ति में वृद्धि होना आरंभ हो जाएगी और लंबे समय से रुके पड़े काम भी स्वयं पूरे होने लगेंगे।

शत्रु / दुश्मन से मुक्ति पाने के लिए :-
कोई भी व्यक्ति (या दुश्मन ) आपको बहुत ज्यादा परेशान या झगड़ा कर रहा हो तो किसी भी मंगलवार या शनिवार के दिन को मोर पंख पर हनुमानजी की मूर्ति के मस्तक के सिंदूर से केवल एक मोरपंख पर अपने दुश्मन का नाम लिखें तथा अपने घर के मंदिर में उसे रात भर रखें। अब आपको सुबह उठते ही बिना नहाए-धोए तथा बिना किसी से बोले प्रवाहित नदी के पानी में उस मोर के पंख को बहा दें। ऐसा करने मात्र से ही बड़े से बड़ा दुश्मन भी मित्र बन जाता है और वह आपको साथ देने लगता है।

राहू के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए
मोर कालसर्प का शत्रु है, इसलिए जिन लोगों की जन्म कुंडली में राहू बुरा प्रभाव दे रहा हो अर्थात कालसर्पदोष हो, उन्हें सदैव अपने साथ मोर के पंख को रखना चाहिए।

बच्चे का जिद्दीपन दूर करने के लिए
अगर आपका बच्चा बहुत ज्यादा जिद्दी है और आपकी कभी भी कोई बात नहीं मानता है तो आप उसे रोजाना मोर के पंखे से बने पंखे से रोजाना हवा करें अथवा ऐसा नहीं होतो तो सीलिंग फैन पर ही मोर के पंख चिपका दें। आपके बच्चे का जिद्दी स्वभाव बहुत ही जल्द में अपने आप दूर हो जाएगा।

कालसर्प दोष मुक्ति के लिए
जिन भी लोगों की जन्म कुण्डली में कालसर्प दोष का योग हो उन्हें तो अपने तकिये की खोल में 7 मोर के पंख सोमवार की रत डालकर उस तकिए का रोजाना उपयोग करना चाहिए। और इसके साथ ही साथ बेडरूम की पश्चिम दिशा की दीवार पर आपको मोर पंखों का पंखा लगाना होगा जिसमें कम से कम 11 मोर के पंख लगे हों । इतना करने से कुंडली में राहू-केतू का दुष्प्रभाव कम हो जाएगा।

बच्चे को लगी बुरी नजर से बचाने के लिए
नवजात शिशु या बच्चे के सिरहाने पर चांदी के ताबीज में या उसके हाथ पर एक मोर पंख भरकर/ बांधकर रखने से बच्चे को कभी नजर नहीं लगेगी और उसे सपने में डर भी नहीं लगेगा।

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हनुमान जी को खुश करने के लिए करिए ये दस उपाय?

देव शर्मा
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हनुमान जी अपने भक्‍तों का हर कष्ट दूर करते हैं। हनुमान जी कृपा के लिए कुछ उपाय है जिहें करने से उनकी कृपा बनी रहेगी। जानिए ये उपाय जो आप पर हनुमान जी की कृपा बरसाएंगे।

-धन और समृद्धि प्राप्ति के लिए प्रतिदिन रात्रि में सोने से पूर्व हनुमान जी के सम्मुख सरसों के तेल का मिट्टी का दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें।

-धन आगमन मार्ग को बाधारहित करने के लिए रामायण या श्रीरामचरित मानस का पाठ करें या रोजाना इनके दोहे पढ़ें। साथ ही रोजाना हनुमान जी को धूप-अगरबत्ती और फूल अर्पित करें।

-हनुमानजी का फोटो घर में पवित्र स्थान पर इस प्रकार से लगाएं कि हनुमान जी दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए दिखाई दें। यह उपाय आपके विरोधियों को शान्त कर, धन देगा।

-मनोवांछित कामना पूर्ण करने के लिए अपनी सामर्थ्य अनुसार किसी विशेष पर्व या तिथि पर हनुमान जी का विशेष श्रृंगार करें।

-मंगलवार या शनिवार को 11 पीपल के पत्ते लेकर साफ जल से धो लें। इन पत्तों पर चंदन से या कुमकुम से श्रीराम का नाम लिखें। इसके बाद हनुमानजी के मन्दिर जाएं और उन्हें ये पत्ते अर्पित कर दें। ऐसा करने से जीवन के सारे दुख दूर होंगे।

-प्रत्येक मंगलवार या शनिवार को सिंदूर एवं चमेली का तेल हनुमानजी को अर्पित करें। इस उपाय से भक्त की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।

-हर मंगलवार और शनिवार को किसी भी हनुमान मंदिर में ११ काले उड़द के दाने, सिंदूर, चमेली का तेल, फूल, प्रसाद अर्पित करें। साथ ही सुन्दरकांड का पाठ या हनुमान चालीसा का पाठ करें।

-मंगलवार-शनिवार को हनुमानजी का विधिवत पूजन करने से सभी प्रकार के कष्ट और क्लेश नष्ट हो जाते हैं।

-कच्ची घानी के तेल के दीपक में लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें, संकट दूर होगा और धन प्राप्त होगा।

-धन लाभ प्राप्ति के लिए मंगलवार या हनुमान जयंती के दिन चंदन के नौ पैकेट लेकर केले के वृक्ष पर टांग दें। स्मरण रहे यह चंदन पीले धागे से ही बांधना है।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।
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नजर उतारने के लिए करे ये उपाय (Evil eye)


नजर (Evil eye) उतारने के लिए करे ये उपाय

  1. यदि बच्चे ने दूध पीना या खाना छोड़ दिया हो तो आप रोटी या दूध को बच्चे पर से ‘आठ’ बार उतार के कुत्ते या गाय को खिला दें.
  2. किसी भी व्यक्ति जिसको नजर (Evil eye) लगी है आप नमक, कुछ राई के दाने, पीली सरसों, लाल मिर्च, पुरानी झाडू का एक टुकड़ा लेकर नजर लगे व्यक्ति पर से ‘आठ’ बार उतार कर अग्नि में जला दें. यदि ‘नजर’ लगी होगी तो मिर्चों के जलने धांस नहीँ आयेगी. वर्ना आप भी जानते है कि खांसते-खांसते बुरा हाल हो जाता है.
  3. अगर आपको ये शंका हो कि इस व्यक्ति ने ही नजर (Evil eye) लगाई है तो उस व्यक्ति को आप बुलाकर ‘नजर’ लगे व्यक्ति पर उससे हाथ फिरवाने से लाभ होता है.
  4. पश्चिमी देशों में नजर (Evil eye) लगने की आशंका के चलते ‘टच वुड’ कहकर लकड़ी के फर्नीचर को छू लेता है और ऐसी मान्यता है कि उसे नजर नहीं लगेगी.
  5. ईसाई धर्म में गिरजाघर से पवित्र जल लाकर नजर (Evil eye) लगे व्यक्ति को पिलाने का भी चलन है.
  6. इस्लाम धर्म के अनुसार ‘नजर’ वाले पर से ‘अण्डा’ या ‘जानवर की कलेजी’ उतार के ‘बीच चौराहे’ पर रख दें. दरगाह या कब्र से फूल और अगरबत्ती की राख लाकर ‘नजर’ वाले के सिरहाने रख दें या खिला दें.
  7. एक लोटे में पानी लेकर उसमें नमक, खड़ी लाल मिर्च डालकर आठ बार उतारे. फिर थाली में दो आकृतियाँ. एक काजल से, दूसरी कुमकुम से बनाए और लोटे का पानी थाली में डाल दें. फिर एक लम्बी काली या लाल रङ्ग की बिन्दी (रुई की मोटीबाती) लेकर उसे तेल में भिगोकर ‘नजर’ वाले पर उतार कर उसका एक कोना चिमटे या सँडसी से पकड़ कर नीचे से जला दें और उसे थाली के बीच ऊपर रखें तब गरम काला तेल पानी वाली थाली में गिरेगा और यदि नजर लगी होगी तो फिर छनछन आवाज आएगी अन्यथा नहीं.
  8. एक नींबू लेकर आठ बार उतार कर काट कर फेंक दें.
  9. चाकू से जमीन पे एक आकृति बनाए और फिर चाकू से ‘नजर’ वाले व्यक्ति पर से एक एक कर आठ बार उतारता जाए और आठों बार जमीन पर बनी आकृति को काटता जाए इससे भी लगी नजर (Evil eye) उतर जाती है.
  10. गोमूत्र पानी में मिलाकर थोड़ा थोड़ा पिलाए और उसके आस-पास पानी में मिलाकर छिड़क दें. यदि स्नान करना हो तो थोड़ा स्नान के पानी में भी डाल दें.
  11. थोड़ी सी राई, नमक, आटा या चोकर और 3, 5 या 7 लाल सूखी मिर्च लेकर. जिसे ‘नजर’ लगी हो. उसके सिर पर सात बार घुमाकर आग में डाल दें. ‘नजर-दोष’ होने पर मिर्च जलने की गन्ध नहीं आती है ये उत्तम उपाय है.
  12. पुराने कपड़े की सात चिन्दियाँ लेकर,सिर पर सात बार घुमाकर आग में जलाने से ‘नजर’ उतर जाती है.
  13. झाडू को चूल्हे या गैस की आग में जला कर फिर चूल्हे या गैस की तरफ पीठ कर के,बच्चे की माता इस जलती झाडू को 7 बार इस तरह स्पर्श कराए कि आग की तपन बच्चे को न लगे और तत्पश्चात् झाडू को अपनी टागों के बीच से निकाल कर बगैर देखे ही,चूल्हे की तरफ फेंक दें. कुछ समय तक झाडू को वहीं पड़ी रहने दें-बच्चे को लगी नजर दूर हो जायेगी.
  14. नमक की डली,काला कोयला,डंडी वाली 7 लाल मिर्च,राई के दाने तथा फिटकरी की डली को बच्चे या बड़े पर से 7 बार उबार कर फिर आग में डालने से सबकी नजर दूर हो जाती है.
  15. फिटकरी की डली को, 7 बार बच्चे या बड़े या पशु पर से 7 बार उबार कर आग में डालने से नजर तो दूर होती ही है. नजर लगाने वाले की धुंधली सी शक्ल भी फिटकरी की डली पर आ जाती है और फिटकरी के फूलने पे उसकी आकृति दिखती है.
  16. तेल की बत्ती जला कर,बच्चे या बड़े या पशु पर से 7 बार उबार कर दोहाई बोलते हुए दीवार पर चिपका दें और यदि नजर लगी होगी तो तेल की बत्ती भभक भभक कर जलेगी और नजर न लगी होने पर शांत हो कर जलेगी.
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।। गंगा जल का महत्व और इस से जुड़े कुछ रोचक तथ्य ।।

संजय गुप्ता

भारत में गंगाजल को बहुत ही पवित्र माना जाता है और पूजा समेत कई धार्मिक कार्यों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। किसी वस्तु या इंसान की शुद्दि करने के लिए भी इस जल को काम में लिया जाता है। माँ गंगा भगवान् शिव की जटाओं में से निकली थी इसलिए इन्हें देवी के रूप में भी पूजा जाता है। मान्यता है की गंगा के पानी में स्नान करने से कई पापों से मुक्ति मिल जाती है। यहाँ तक की वैज्ञानिकों ने भी माना है की गंगा के पानी में कई प्रकार के औषधिय गुण पाए जाते हैं जिसमें नहाने से कई प्रकार के रोग खत्म हो जाते हैं। गंगा के जल को वास्तु से भी जोड़ा गया है। जानिए गंगा का जल कितनी परेशानियों से मुक्ति दिला सकता है –
डरावने सपनो का दोष दूर करने के लिए – अगर किसी इंसान को रात को सोते समय डरावने सपने आते हो तो ऐसे में सोने से पहले बिस्तर पर गंगाजल का छिड़काव कर सोने से डरावने सपने तंग नही करते है।

घर का वास्तु दोष दूर करने के लिए – यदि घर में किसी भी प्रकार का कोई वास्तु दोष हो तो नियमित रूप से घर में गंगा जल का छिड़काव करना चाहिए। ऐसा करने से सभी तरह के वास्तु दोष समाप्त होते है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
घर में सुख सम्पदा के लिए – गंगाजल को सदैव घर में रखने से सुख और संपदा बनी रहती है। इसीलिए घर में एक बर्तन में हमेशा गंगाजल भरकर अवश्य रखें। यह पात्र रसोई या पूजाघर जैसी पवित्र जगह रखा जा सकता है।

भगवान सदा शिव को गंगाजल चढ़ाने से वे अति प्रसन्न होते हैं । इससे इंसान को मोक्ष और शुभ लाभ दोनों ही मिलते हैं।

धन प्राप्ति- ज्योतिष के अनुसार भगवान शिव को बिल्वपत्र कमल और गंगा का जल चढ़ाने से धन प्राप्ति के योग बनने लगते है।

कर्ज से मुक्ति के लिए – कर्ज अधिक हो गया है या घर में बहुत परेशानियां है तो गंगाजल को पीतल की बोतल में भर उसे अपने कमरे के उत्तर पूर्व दिशा में रखने से आपकी समस्या ख़त्म हो सकती है।