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गुडहल का पौधा सूर्य और मंगल से संबंध रखता है


गुडहल का पौधा सूर्य और मंगल से संबंध रखता है, गुडहल का पौधा घर में कहीं भी लगा सकते हैं, परंतु ध्यान रखें कि उसको पर्याप्त धूप मिलना जरूरी है। गुडहल का फूल जल में डालकर सूर्य को अघ्र्य देना आंखों, हड्डियों की समस्या और नाम एवं यश प्राप्ति में लाभकारी होता है। मंगल ग्रह की समस्या, संपत्ति की बाधा या कानून संबंधी समस्या हो, तो हनुमान जी को नित्य प्रात: गुडहल का फूल अर्पित करना चाहिए। माँ दुर्गा को नित्य गुडहल अर्पण करने वाले के जीवन से सारे संकट दूर रहते है । गुड़हल फूल न सिर्फ देखने में खूबसूरत होता है बल्कि इइसमें छिपा है सेहत का खजाना। भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के अनुसार सफेद गुड़हल की जड़ों को पीस कर कई दवाएं बनाई जाती हैं। आयुर्वेद में इस फूल के कई प्रयोग बताएं गए हैं मुंह के छाले गुड़हल के पत्ते चबाने से लाभ होता है।

विक्रम प्रकाश राइसोनि

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जिन घरों में हर रोज पूजा की जाती है


जिन घरों में हर रोज पूजा की जाती है, वहां का वातावरण सकारात्मक (Positive) और पवित्र रहता है। दरिद्रता दूर रहती है। दीपक और अगरबत्ती के धुएं से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले सूक्ष्म कीटाणु भी मर जाते हैं। यहां जानिए कुछ. नियम जो कि घर के मंदिर में पूजा करते समय ध्यान रखना चाहिए… 1. सभी प्रकार की पूजा में चावल विशेष रूप से चढ़ाए जाते हैं। पूजन के लिए ऐसे चावल का उपयोग करना चाहिए जो अखंडित (पूरे चावल) हो यानी टूटे हुए ना हो। चावल चढ़ाने से पहले इन्हें हल्दी से पीला करना बहुत शुभ माना गया है। इसके लिए थोड़े से पानी में हल्दी घोल लें और उस घोल में चावल को डूबोकर पीला किया जा सकता है। 2. पूजन में पान का पत्ता भी रखना चाहिए। ध्यान रखें पान के पत्ते के साथ इलाइची, लौंग, गुलकंद आदि भी चढ़ाना चाहिए। पूरा बना हुआ पान चढ़ाएंगे तो श्रेष्ठ रहेगा। 3. पूजन कर्म में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पूजा के बीच में दीपक बुझना नहीं चाहिए। ऐसा होने पर पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है। 4. किसी भी भगवान के पूजन में उनका आवाहन (आमंत्रित करना) करना, ध्यान करना, आसन देना, स्नान करवाना, धूप-दीप जलाना, अक्षत (चावल), कुमकुम, चंदन, पुष्प (फूल), प्रसाद आदि अनिवार्य रूप से होना चाहिए। 5. देवी-देवताओं को हार-फूल, पत्तियां आदि अर्पित करने से पहले एक बार साफ पानी से अवश्य धो लेना चाहिए। 6. भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए पीले रंग का रेशमी कपड़ा चढ़ाना चाहिए। माता दुर्गा, सूर्यदेव व श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए लाल रंग का, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सफेद वस्त्र अर्पित करना चाहिए। 7. किसी भी प्रकार के पूजन में कुल देवता, कुल देवी, घर के वास्तु देवता, ग्राम देवता आदि का ध्यान करना भी आवश्यक है। इन सभी का पूजन भी करना चाहिए। 8. पूजन में हम जिस आसन पर बैठते हैं, उसे पैरों से इधर- उधर खिसकाना नहीं चाहिए। आसन को हाथों से ही खिसकाना चाहिए। 9. यदि आप प्रतिदिन घी का एक दीपक भी घर में जलाएंगे तो घर के कई वास्तु दोष भी दूर हो जाएंगे। 10. सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु, ये पंचदेव कहलाते हैं, इनकी पूजा सभी कार्यों में अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। प्रतिदिन पूजन करते समय इन पंचदेव का ध्यान करना चाहिए। इससे लक्ष्मी कृपा और समृद्धि प्राप्त होती है। 11. घी के दीपक के लिए सफेद रुई की बत्ती उपयोग किया जाना चाहिए। जबकि तेल के दीपक के लिए लाल धागे की बत्ती श्रेष्ठ बताई गई है। 12. पूजन में कभी भी खंडित दीपक नहीं जलाना चाहिए। धार्मिक कार्यों में खंडित सामग्री शुभ नहीं मानी जाती है। 13. शिवजी को बिल्व पत्र अवश्य चढ़ाएं और किसी भी पूजा में मनोकामना की सफलता के लिए अपनी इच्छा के अनुसार भगवान को दक्षिणा अवश्य चढ़ानी चाहिए, दान करना चाहिए। दक्षिणा अर्पित करते समय अपने दोषों को छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए। दोषों को जल्दी से जल्दी छोड़ने पर मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होंगी। 14. भगवान सूर्य की 7, श्रीगणेश की 3, विष्णुजी की 4 और शिवजी की 3 परिक्रमा करनी चाहिए। 15. भगवान शिव को हल्दी नहीं चढ़ाना चाहिए और न ही शंख से जल चढ़ाना चाहिए।पूजन स्थल पर पवित्रता का ध्यान रखें। चप्पल पहनकर कोई मंदिर तक नहीं जाना चाहिए। चमड़े का बेल्ट या पर्स अपने पास रखकर पूजा न करें। पूजन स्थल पर कचरा इत्यादि न जमा हो पाए।

विक्रम प्रकाश रासनोई

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सूर्य की कृपा पाने के लिए रविवार को करें |


सूर्य की कृपा पाने के लिए रविवार को करें | यदि आप भी सूर्य से शुभ फल पाना चाहते हैं तो यहां बताए जा रहे उपाय रविवार को कर सकते हैं… 1. सुबह स्नान के बाद भगवान सूर्य को जल अर्पित करें। इसके लिएl तांबे के लोटे में जल भरे, इसमें चावल, फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। 2. जल अर्पित करने के बाद सूर्य मंत्र स्तुति अोर गायत्री का पाठ करें। इस पाठ के साथ शक्ति, बुद्धि, स्वास्थ्य और सम्मान की कामना से करें। 3. इस प्रकार सूर्य की आराधना करने के बाद धूप, दीप से सूर्य देव का पूजन करें। 4. सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, पीले या लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, माणिक्य, लाल चंदन आदि का दान करें। अपनी श्रद्धानुसार इन चीजों में से किसी भी चीज का दान किया जा सकता है। 5. सूर्य के निमित्त व्रत करें। एक समय फलाहार करें और सूर्यदेव का पूजन करें। . .

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आज चर्चा . . .दान . . की ही


= आज चर्चा . . .दान . . की ही . . कौन से ” दान ” से . . क्या प्राप्ति . . ? . . . . = अगर आप ” जल ” का दान करते है – तो आपको ” तृप्ति ” मिलेंगी . . . . = अगर आप ” अन्न ” का दान करते है – तो आपको ” अक्षय सुख ” की प्राप्ति होगी . . . . = अगर आप ” तिल ” का दान करते है – तो आपको उत्तम ” संतान ” की प्राप्ति होगी . . . . = अगर आप ” दीप ” का दान करते है – तो आपको ” उत्तम नेत्र ” का सुख मिलेगा . . . = अगर आप ” भूमि ” का दान करते है – तो आपको समस्त ” अभिलाषित पदार्थ ” की प्राप्ति होगी . . . = अगर आप ” घर ” का दान करते है – तो आपको ” उत्तम घर ” की प्राप्ति होगी . . . = अगर आप ” चांदी ” का दान करते है – तो आपको ” उत्तम सौन्दर्य ” की प्राप्ति होगी . . . = अगर आप ” स्वर्ण ” का दान करते है – तो आपको ” दीर्घ आयु ” की प्राप्ति होगी . . . = अगर आप ” दवाई ” का दान करते है – तो आपको ” आरोग्यता ” की प्राप्ति होगी . . . . = अगर आप ” परलोक ” में अक्षय सुख प्राप्त करना चाहते है – तो आपको अपनी सबसे प्रिय वस्तु का दान करना पडेगा . . . . = तो . . फिर शुरू करिये . . ” दान ” . . करनानोट – अपना भुत-भविष्य जानने के लिए और सटीक उपायो के लिए सम्पर्क करे मगर ध्यान रहे ये सेवाएं सशुल्क और पेड़ कंसल्टिंग के तहत है , जानने के लिए अपनी फ़ोटो, वास्तु की फ़ोटो, दोनों हथेलियो की फ़ोटो और बर्थ डिटेल्स भेजे ज्योतिषाचार्य,लाल किताब, वास्तु तज्ञ,kp, वैदिक पराशरी जैमिनी एक्सपर्ट ,तन्त्र प्रवीण ज्योतिष भास्कर त्रिवीक्रम Whats app no 9021076371 अपॉइंटमेंट लेने के बाद ही कॉल करे

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घर के आगे पीछे जल स्थान नही होना चाहिये क्योंकि


01-
घर के आगे पीछे जल स्थान नही होना चाहिये क्योंकि ऐसा होने पर परिवार का मुखिया मुकद्दमों मे घिरा रहता है 🏡🏡🏡🏡

02-
घर के अन्दर अनार का पेड़ नही होना चाहिये क्योंकि इससे धन तो आता है परन्तु मृत्युतुल्य कष्ट साथ मे आतें है ।

03-
जिनके घर के बाहर कीचड़ रहती हो या सड़क टूटी हुई हो तब ऐसे घर मे धन रुकता नही और कपड़े व इलेक्ट्रिक जल्दी जल्दी खराब होती है ।🏡🏡🏡🏡🏨🏨🏨

04-
जिस घर के ऊपर कबूतर अधिक बैठते है उस घर मे धन की वर्षा होतीं है और स्वर्ण लाभ भी होता है परन्तु बच्चो की पढाई मे वाधा आती है ।

05-
सावन मे लाया हुआ किसी भी नदी का जल पूजा मे प्रयोग नही किया जाता केवल काँवर का जल ही शिवलिंग पर चढ़ता है उसे भी घर मे नही लाया जाता । 😇😇

06-
गोमूत्र इन्द्र की सभा के देवताओं की पूजा मे काम आता है जबकि शनिदेव इनके सभा से निकल गये थे इसीलिये उन्हे मन्दिर के अन्दर स्थान नही देते और इसीलिये उनकी पूजा मे गौ से सम्बन्धित कोई अर्ग प्रयोग नही करते है

07-
जिस किसी के घर मे किसी को केँसर या ट्यूमर की बीमारी हो वह अपने घर मे काले घोड़े की नाल U शेप मे मुख्य द्वार पर लगाये ।

08-
घर मे किसी भी पक्षी 🕊को पालने से पूर्ण रूप से वास्तु के अनुरूप बने मकान 🏡मे भी दोष उत्पन्न हो जाते हैं ।

09-
घर के दरवाजे से खोलते बंद करते समय आवाज़ नही आनी चाहिये अन्यथा घर का प्रत्येक सदस्य अपनी अपनी ही कहता हैं किसी और की नही सुनता ।

……….✍विकास खुराना ( ज्योतिष विशेषज्ञ )

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तंत्र शास्त्र के अनुसार किसी भी सिद्धि प्राप्ति या मनोकामना पूर्ति के लिए चार रात्रियां सर्वश्रेष्ठ हैं


तंत्र शास्त्र के अनुसार किसी भी सिद्धि प्राप्ति या मनोकामना पूर्ति के लिए चार रात्रियां सर्वश्रेष्ठ हैं पहली है कालरात्रि (नरक चतुर्दशी या दीपावली), दूसरी है अहोरात्रि (शिवरात्रि), तीसरी है दारुणरात्रि (होली) व चौथी है मोहरात्रि अर्थात जन्माष्टमी। अर्थात इन दिनों में किए गए तंत्र उपाय जरुर सफल होते हैं – काफी कोशिशों के बाद बाद भी यदि आमदनी नहीं बढ़ रही है या नौकरी में प्रमोशन नहीं हो रहा है जन्माष्टमी के दिन सात कन्याओं को घर बुलाकर खीर या सफेद मिठाई खिलाएं। इसके बाद लगातार पांच शुक्रवार तक सात कन्याओं को खीर बांटें। – जन्माष्टमी से शुरू कर यदि सत्ताइस दिन तक लगातार नारियल, बादाम मंदिर में चढ़ाते हैं तो यकीन मानिए सब सुख प्राप्त होंगे। सब कार्य बनते चले जाएंगे। – यदि आर्थिक परेशानियां लगातार चल रही हों तो जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद राधा-कृष्ण मंदिर जाकर दर्शन करें व पीले फूलों की माला अर्पण करें। – जीवन में समृद्धि प्राप्त करने के लिए जन्माष्टमी के दिन से पीले चंदन, केसर, गुलाबजल मिलाकर माथे पर टीका- बिंदी लगाएं। प्रत्येक गुरुवार को ऐसा ही करें। – निरंतर कर्ज में फंसते जा रहे हों तो श्मशान के कुएं का जल लाकर किसी पीपल वृक्ष पर चढ़ाएं। यह उपाय जन्माष्टमी से शुरू किया जाना चाहिए। फिर नियमित रूप से छह शनिवार यह उपाय करेंगे तो आश्चर्यजनक परिणाम देखेंगे। – काम सफल करने के लिए किसी मंदिर में केले के दो पौधे (नर-मादा) लगा दें। बाद में उसकी नियमित देखभाल करते रहें। जब पौधे फल देने लगे तो इनका दान करें, स्वयं सेवन न करें। – जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण को पान का पत्ता भेंट करें और उसके बाद इस पत्ते पर रोली से श्री मंत्र लिखकर तिजोरी में रख लें। आपकी तिजोरी की बरकत बढ़ती रहेगी। – चंदन की लकड़ी पर श्री खुदवाकर धन स्थान पर रखें तो धन वृद्धि व धन की हर तरह से सुरक्षा होती है।

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गौरी शंकर रूद्राक्ष


गौरी शंकर रूद्राक्ष

स्वाभाविक रूप से जुड़ने वाले रूद्राक्ष मोती को गौरी शंकर रूद्राक्ष के रूप में जाना जाता है। यह भगवान शिव और माता पार्वती के एकीकृत रूप के रूप में माना जाता है जो लोग इसे पहनते हैं वे आनंदित वैवाहिक जीवन की खुशी प्राप्त करते हैं।

प्राकृतिक गौरी शंकर रूद्राक्ष एक मजबूत बंधन में पति पत्नी से संबंध रखता है। यह एक जोड़े के जीवन में खुशी लाने के लिए सर्वश्रेष्ठ रुद्राक्ष मनका माना जाता है। इसलिए, नेपाली गौरी शंकर रूद्राक्ष को परिवार में शांति और शान्ति लाने के लिए सर्वश्रेष्ठ मनका माना जाता है।

गौरी शंकर रूद्राक्ष पुरुष और महिला दोनों ऊर्जा का एकीकृत रूप है, इसलिए इसे बहुत शक्तिशाली मनका माना जाता है। यह अपने अस्तित्व में बहुत दुर्लभ है गौरी शंकर रूद्राक्ष दैनिक ध्यान (ध्यान) और आध्यात्मिक शांति प्राप्त करने के लिए भी फायदेमंद है। भगवान महादेव (शिव) और मा शक्ति (देवी पार्वती) का संयुक्त आशीर्वाद गौरी शंकर रूद्राक्ष के उपयोगकर्ता पर दिखाया गया है

पहने का दिन: सोमवार या किसी अन्य दिन
मंत्र: “ओम गौरी शंकरये नमः” “ओम नमः शिवाय”

गौरी शंकर रूद्राक्ष के लाभ:

1. पारिवारिक एकता, सामंजस्य और शांति को बढ़ावा देता है
2. पहनने वालों के लिए प्रचुर मात्रा में धन लाता है
3. एकाग्रता और निर्णय लेने वाले कौशल को बेहतर बनाता है
4. आत्मविश्वास और ज्ञान प्राप्त करने में मदद करता है
5. एक आनंदित विवाहित जीवन के लिए सर्वश्रेष्ठ
6. पहनने वाले के ज्ञान को बेहतर बनाने में मदद करता है
7. उपयोगकर्ता और उसके पति या पत्नी, रिश्तेदारों और दोस्तों के बीच के रिश्तों को बेहतर बनाता है
8. पहनने वाले के दर्द, कष्ट और अन्य बाधाओं को कम करता है
9. पहनने वाले के जीवन के हर क्षेत्र को सकारात्मक दिशा के लिए प्रभावित करता है
10. महिलाओं के लिए सहायक जो कि किसी भी तरह की गर्भावस्था के मुद्दे का सामना कर रहे हैं
11. जो महिलाओं को उपयुक्त मैच नहीं मिल पाता है या विवाह में विलंब का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें यथाशीघ्र गौरी शंकर रूद्राक्ष पहनना चाहिए। जो विवाहित हैं, लेकिन अपने वर्तमान संबंध से नाखुश हैं या अपने वैवाहिक जीवन में कई परेशानियों का सामना कर रहे हैं, उन्हें भी इस पवित्र रूद्राक्ष को पहनना चाहिए क्योंकि यह सभी प्रकार की वैवाहिक समस्याओं में लाभदायक माना जाता है।

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