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ॐ दिशाशूल क्या होता है ?


🚩🙏 ॐ दिशाशूल क्या होता है ?
क्यों बड़े बुजुर्ग तिथि देख कर आने जाने की रोक टोक करते हैं ? आज की युवा पीढ़ी भले हि उन्हें आउटडेटेड कहे ..लेकिन बड़े सदा बड़े हि रहते हैं ..इसलिए आदर करे उनकी बातों का ;
दिशाशूल समझने से पहले हमें दस दिशाओं के विषय में ज्ञान होना आवश्यक है

| हम सबने पढ़ा है कि दिशाएं ४ होती हैं |
१) पूर्व
२) पश्चिम
३) उत्तर
४) दक्षिण

परन्तु जब हम उच्च शिक्षा ग्रहण करते हैं तो ज्ञात होता है कि वास्तव में
दिशाएँ दस होती हैं |

१) पूर्व
२) पश्चिम
३) उत्तर
४) दक्षिण
५) उत्तर – पूर्व
६) उत्तर – पश्चिम
७) दक्षिण – पूर्व
८) दक्षिण – पश्चिम
९) आकाश
१०) पाताल

हमारे सनातन धर्म के ग्रंथो में सदैव १० दिशाओं का ही वर्णन किया गया है,
जैसे हनुमान जी ने युद्ध में इतनी आवाजे की उनकी आवाज दसों दिशाओं में सुनाई
दी
हम यह भी जानते हैं कि प्रत्येक दिशा के देवता होते हैं |

दसों दिशाओं को समझने के पश्चात अब हम बात करते हैं वैदिक ज्योतिष की |
ज्योतिष शब्द “ज्योति” से बना है जिसका भावार्थ होता है “प्रकाश”
वैदिक ज्योतिष में अत्यंत विस्तृत रूप में मनुष्य के जीवन की हर
परिस्तिथियों से सम्बन्धित विश्लेषण किया गया है कि मनुष्य यदि इसको तनिक भी समझले तो वह अपने जीवन में उत्पन्न होने वाली बहुत सी समस्याओं से बच
सकता है और अपना जीवन सुखी बना सकता है |

दिशाशूल क्या होता है ? दिशाशूल वह दिशा है जिस तरफ यात्रा नहीं करना
चाहिए हर दिन किसी एक दिशा की ओर दिशाशूल होता है |

१) सोमवार और शुक्रवार को पूर्व
२) रविवार और शुक्रवार को पश्चिम
३) मंगलवार और बुधवार को उत्तर
४) गुरूवार को दक्षिण
५) सोमवार और गुरूवार को दक्षिण-पूर्व
६) रविवार और शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिम
७) मंगलवार को उत्तर-पश्चिम
८) बुधवार और शनिवार को उत्तर-पूर्व

परन्तु यदि एक ही दिन यात्रा करके उसी दिन वापिस आ जाना हो तो ऐसी दशा
में दिशाशूल का विचार नहीं किया जाता है

परन्तु यदि कोई आवश्यक कार्य
हो ओर उसी दिशा की तरफ यात्रा करनी पड़े, जिस दिन वहाँ दिशाशूल हो तो यह
उपाय करके यात्रा कर लेनी चाहिए –

रविवार – दलिया और घी खाकर
सोमवार – दर्पण देख कर
मंगलवार – गुड़ खा कर
बुधवार – तिल, धनिया खा कर
गुरूवार – दही खा कर
शुक्रवार – जौ खा कर
शनिवार – अदरक अथवा उड़द की दाल खा कर

साधारणतया दिशाशूल का इतना विचार नहीं किया जाता परन्तु यदि व्यक्ति के
जीवन का अति महत्वपूर्ण कार्य है तो दिशाशूल का ज्ञान होने से व्यक्ति
मार्ग में आने वाली बाधाओं से बच सकता है आशा करते हैं कि आपके जीवन
में भी यह गायन उपयोगी सिद्ध होगा तथा आप इसका लाभ उठाकर अपने दैनिक जीवन
में सफलता प्राप्त करे।

हँस जैन रामनगर खँडवा
98272 14427

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प्राचीनकाल में ऋषि-मुनियों ने ऐसे पेड़-पौधों को लगाने की सलाह दी थी, जिनसे वास्तुदोष का निवारण हो साथ ही पर्यावरण संतुलन भी बना रहे।
तुलसी- तुलसी को जीवनदायिनी और लक्ष्मी स्वरूपा बताया गया है। इसे घर में लगाने से और इसकी पूजा अर्चना करने से महिलाओं के सारे दु:ख दूर होते हैं, साथ ही घर में सुख शांति बनी रहती है। इसे घर के अंदर लगाने से किसी भी प्रकार की अशुभ ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
अश्वगंधा- इसके बारे में कहा गया है कि यह वास्तु दोष समाप्त करने की क्षमता रखता है और शुभता को बढ़ाकर जीवन को अधिक सक्रिय बनाता है।
आंवला- आंवले का वृक्ष घर की चहारदीवारी में पूर्व व उत्तर में लगाया जाना चाहिए, जिससे यह शुभ रहता है। साथ ही इसकी नित्य पूजा-अर्चना करने से भी सभी तरह के पापों का शमन होता है।
केला- घर की चहारदीवारी में केले का वृक्ष लगाना शुभ होता है। इसे भवन के ईशान कोण में लगाना चाहिए, क्योंकि यह बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधि वृक्ष है। केले के समीप यदि तुलसी का पेड़ भी लगा लें तो अधिक शुभकारी रहेगा।
शतावर- शतावर को एक बेल बताया गया है। इसे घर में लगाना शुभ फलदायी होता है। बशर्ते इसे घर में कुछ इस तरह लगाएं कि यह ऊपर की ओर चढ़े।
अनार- इससे वंश वृद्धि होती है। आग्नेय में अनार का पेड़ अति शुभ परिणाम देने वाला होता है।
बेल- भगवान शिव को बेल का वृक्ष अत्यंत प्रिय है, इसको लगाने से धन संपदा की देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

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10 अशुभ लक्षण, आपको डाल देंगे संकट में…


शीतला दुबे

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10 अशुभ लक्षण, आपको डाल देंगे संकट में…
यह अंधविश्वास हमारे मन में गहराई से बैठे हुए हैं।
हम इन पर विश्वास करते हैं !
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भारत में परंपरा और हजारों सालों के ज्ञान और अनुभव के आधार पर कुछ ऐसी बातें समाज में प्रचलित हैं जो कि आपको हैरत में जरूर डाल देगी, लेकिन आप इन्हें नकार भी नहीं सकते हैं। हो सकता है कि यह अंधविश्वास हो या इनमें कोई रहस्य छुपा हो, लेकिन जान लेने में क्या हर्ज है।
आप इन्हें माना या न माने लेकिन अधिकतर लोग तो इस पर विश्वास करते हैं। यह हम नहीं जानते कि यह सही है या नहीं, लेकिन प्राचीनकाल से ही लोक परंपरा और स्थानीय लोगों की मान्यताओं पर आधारित इन बातों को आज भी लोग सही मानते हैं। उन हजारों बातों में से कुछ बातें ऐसी है जो आपकी जिंदगी और मौत से जुड़ी हुई है। उन्हीं बातों से से 10 खास बातें जानिए…
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नाक का न दिखाई देना : ऐसा माना जाता है कि यदि आपकी नाक आपको दिखाई देना बंद हो जाए तो समझिए कि मौत निकट ही है या आप किसी गंभीर बीमारी के शिकार हो गए हैं। यह मान्यता भी है कि सीधे खड़े होकर यदि आपको आपके घुटने दिखाई नहीं देते हैं तो आपका शरीर खतरनाक स्थिति में है।
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दरअसल, आप अनियमित जीवन शैली जी रहे हैं, लगातर तनाव में रहते हैं तो आपकी श्वास प्रक्रिया बदल जाती है। श्वास प्रक्रिया के बदलने से आपक कई तरह की गंभीर रोगों का शिकार हो सकते हैं। नाक का दिखाई देना बंद होने का मतलब है कि आपकी शक्ति का तेजी से क्षरण हो रहा है। आपकी तोंद निकल गई है जो आपको आपके घुटने दिखना बंद हो जाएंगे। तो निश्चित ही ऐसे में कृपया आप तुरंत ही खानपान पर रोक लगाकर योग करना शुरू कर दें।
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सीटी बजाने का मतलब संकट को बुलाना : ऐसा कहते हैं कि घर में या रात में सीटी नहीं बजाना चाहिए। इससे एक ओर जहां धन की हानि होती हैं वहीं आप किसी अंजान संकट को भी बुलावा देने हैं।
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यह भी माना जाता है कि रात में सीटी बजाने से बुरी आत्माएं सक्रिय हो जाती हैं। हालांकि यह धारणा जापान से भारत में प्रचलित हो गई है। भारत में रात में सीटी बजाना अशुभ एवं सांप को बुलाने वाला माना जाता है। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि सीटी बजाने से भैरव और शनिदेव रुष्ठ हो जाते हैं। अब इसमें कितनी सत्यता है यह तो हम नहीं जानते।

सुनसान स्थान पर पेशाब करना : ऐसा माना जाता है कि किसी सुनसान या जंगल की किसी विशेष भूमि कर पेशाब कर देने से भूत पीछे लग जाता है।
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ऐसे में कुछ लोग पहले थूकते हैं फिर पेशाब करते हैं और कुछ लोग कोई मंत्र वगैरह पढ़कर ऐसा करते हैं। साथ ही लोग नदी, पुल या जंगल की पगडंडी पर पेशाब नहीं करते। भोजन के बाद पेशाब करना और उसके बाद बाईं करवट सोना बड़ा हितकारक है।
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अन्य मान्यता :
नदी, पूल या जंगल की पगडंडी पर पेशाब नहीं करते।
मान्यता अनुसार एकांत में पवित्रता का ध्यान रखते हैं और पेशाब करने के बाद धेला अवश्य लेते हैं। उचित जगह देखकर ही पेशाब करते हैं।
भोजन के बाद पेशाब करना और उसके बाद बाईं करवट सोना बड़ा हितकारक है।
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जूते-चप्पल का उल्टा होना : जूते-चप्पल उल्टे हो जाए तो आप मानते हैं कि किसी से लड़ाई-झगड़ा हो सकता है?ऐसा माना जाता है कि घर के बारह रखे जूते या चप्पल यदि उल्टे हो जाएं तो उन्हें तुरंत सीधा कर देना चाहिए अन्यथा आपकी किसी से लड़ाई होने की संभावना बढ़ जाती है।
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ऐसा होने से बचने के लिए चप्पल उल्टी हुई है तो एक चप्पल से दूसरी चप्पल को मारकर सीधा रखने का अंधविश्वास है। इसी तरह जूते के साथ भी किया जाता है।
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जूते से जुड़े अन्य अंधविश्वास :
जूते या चप्पल को कई लोग नजर और अनहोनी से बचने का टोटका भी मानते हैं इसीलिए वे अपनी गाड़ी के पीछे निचले हिस्से में जूता लटका देते हैं।
कुछ लोग मानते हैं कि शनिवार को किसी मंदिर में चप्पल या जूते छोड़कर आ जाने से शनि का बुरा असर समाप्त हो जाता है।
जूता सुंघाने से मिरगी का दौरा शांत हो जाता है।
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हड्डी बजाना : इसे हड्डी तोड़ना, चटकाना या कटकाना भी कहते हैं। अक्सर लोग अपनी अंगुलियों की हड्डियों को चटकाते हैं जिसे खोड़ले लक्षण कहते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने वाले के हाथों से लक्ष्मी चली जाती है।
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अब लक्ष्मी जाती है या नहीं यह तो नहीं मालूम लेकिन कई लोगों को अपने शरीर के हर जगह की हड्डी चटकाने की आदत होती है जिसके चलते एक दिन सभी ज्वाइंट ढीले पड़ जाते हैं और बुढ़ापे में उसकी शक्ति कम हो जाती है। फिर हाथों की अंगुलियों से चाय का कप पकड़ने पर वह हिलेगा।
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इस तरह से हड्डियों को या अंगुलियों को चटकाना काफी नुकसानदेह होता है। जो कि गठिया को जन्म देती है। एक अध्यन के अनुसार हमारी हड्डियां लिगामेंट से एक दूसरे से जुड़ी होती हैं जिसे जोड़ कहते हैं। इन जोड़ों के बीच एक द्रव होता है जो उंगुलियों के चटकने के दौरान कम हो जाता है। ये द्रव जोड़ों में ग्रीस के समान होता है। जो हड्डियों को आपस मे रगड़ खाने से रोकता है। ऐसे में बार-बार अंगुलियों के चटकने से जोड़ों की पकड़ कमजोर हो जाती है। साथ ही हड्डियों के जोड़ पर मौजूद ऊतक भी नष्ट हो जाते हैं जिससे गठिया जैसे रोग हो जाते हैं।
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कुत्तों का लड़ना : आपस में लड़ते हुए कुत्ते दिख जाएं तो व्यक्ति का किसी से झगड़ा हो सकता है। शाम के समय एक से अधिक कुत्ते पूर्व की ओर अभिमुख होकर क्रंदन करें तो उस नगर या गांव में भयंकर संकट उपस्थित होता है।
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यदि आप घर से बाहर कहीं जा रहे हैं और आपके पीछे पीछे कुत्ता भी चल दे तो यह किसी अनहोनी का संकेत हैं। अच्छा है कि आप उधर की यात्रा टाल दें। यह भी माना जाता है कि यदि कुत्ता ऐसा करता है तो आप पर मौत का साया मंडरा रहा है। आप किसी गंभीर बिमारी की चपेट में आने वाले हैं या आपके साथ कोई दुर्घटना होने वाली है। हालांकि यह अंधविश्वास ही माना जाता है।

कुत्ते के रोने को अशुभ क्यों माना जाता है?

-कुत्ते का रोना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि घर के सामने घर की ओर मुंह करके कोई कुत्ता रोए तो उस घर पर किसी प्रकार की विपत्ति आने वाली है या घर के किसी सदस्य की मौत होगी।

कुत्ते से जुड़े अन्य अंधविश्वास :
मान्यता है कि घर के सामने सुबह के समय यदि कुत्ता रोए तो उस दिन कोई भी महत्वपूर्ण कार्य नहीं करना चाहिए। यदि किसी मकान की दीवार पर कुत्ता रोते हुए पंजा मारता दिखे तो समझा जाता है कि उक्त घर में चोरी हो सकती है या किसी अन्य तरह का संकट आ सकता है।
यदि कोई व्यक्ति किसी के अंतिम संस्कार से लौट रहा है और साथ में उसके कुत्ता भी आया है तो उस व्यक्ति की मृत्यु की आशंका रहती है अथवा उसे कोई बड़ी विपत्ति का सामना करना पड़ सकता है।
माना जाता है कि पालतू कुत्ते के आंसू आए और वह भोजन करना त्याग दे तो उस घर पर संकट आने की सूचना है।
आप किसी कार्य से बाहर जा रहे हैं और कुत्ता आपकी ओर देखकर भौंके तो आप किसी विपत्ति में फंसने वाले हैं। ऐसे में उक्त जगह नहीं जाना ही उचित माना जाता है।
घर से निकलते समय यदि कुत्ता अपने शरीर को कीचड़ में सना हुआ दिखे और कान फड़फड़ाए तो यह बहुत ही अपशकुन है। ऐसे समय में कार्य और यात्रा रोक देनी चाहिए।
कुत्ता यदि सामने से हड्डी अथवा मांस का टुकड़ा लाता हुआ नजर आए तो अशुभ।
संभोगरत कुत्ते को देखना भी अशुभ माना गया है, क्योंकि इससे आपके कार्य में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं और परिवार में झगड़ा हो सकता है।
यदि किसी के दरवाजे पर लगातार कुत्ता भौंकता है तो परिवार में धनहानि या बीमारी आ सकती है।
मान्यता है कि कुत्‍ता अगर आपके घुटने सूंघे तो आपको कोई लाभ होने वाला है।
यदि आप भोजन कर रहे हैं और उसी समय कुत्ते का रोना सुनाई दे, तो यह बेहद अशुभ होता है।
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बिल्लियों का लड़ना : बिल्लियों के बारे में बहुत से अशुभ लक्षण बताए गए हैं। काली बिल्ली रास्ता काट ले तो उसे रास्ते पर कई लोग अपना जाना स्थगित कर देते हैं।

इसी तरह कहते हैं कि जिस भवन में या उसके एकदम पास बिल्लियां प्राय: लड़ती रहती हैं वहां शीघ्र ही विघटन की संभावना रहती है विवाद वृद्धि होती है। मतभेद होता है।
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बिल्ली का रास्ता काटना, रोना और आपस में दो बिल्लियों का झगड़ना अशुभ है?

-बिल्ली का रास्ता काटना : माना जाता है कि बिल्ली की छठी इंद्री मनुष्यों की छठी इंद्री से कहीं ज्यादा सक्रिय है जिसके कारण उसे होनी-अनहोनी का पूर्वाभास होने लगता है।
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मान्यता अनुसार काली बिल्ली का रास्ता काटना तभी अशुभ माना जाता है जबकि बिल्ली बाईं ओर रास्ता काटते हुए दाईं ओर जाए। अन्य स्थ‌ित‌ियों में बिल्ली का रास्ता काटना अशुभ नहीं माना जाता है।
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जब बिल्ली रास्ता काटकर दूसरी ओर चली जाती है तो अपने पीछे वह उसकी नेगेटिव ऊर्जा छोड़ जाती है, जो काफी देर तक उस मार्ग पर बनी रहती है। खासकर काली बिल्ली के बारे में यह माना जाता है। हो सकता है कि प्राचीनकाल के जानकारों ने इसलिए यह अंधविश्वास फैलाया हो कि बिल्ली के रास्ता काटने पर अशुभ होता है।

बिल्ली का रोना : बिल्ली के रोने की आवाज बहुत ही डरावनी होती है। निश्‍चित ही इसको सुनने से हमारे मन में भय और आशंका का जन्म होता है। माना जाता है कि बिल्ली अगर घर में आकर रोने लगे तो घर के किसी सदस्य की मौत होने की सूचना है या कोई अनहोनी घटना हो सकती है।
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बिल्ली का आपस में झगड़ना : बिल्लियों का आपस में लड़ना धनहानि और गृहकलह का संकेत है। यदि किसी के घर में बिल्लियां आपस में लड़ रही हैं तो माना जाता है कि शीघ्र ही घर में कलह उत्पन्न होने वाली है। गृहकलह से ही धनहानि होती है।
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बिल्ली से जुड़े अन्य अंधविश्वास :
लोक मान्यता है कि दीपावली की रात घर में ब‌िल्ली का आना शुभ शगुन होता है।
बिल्ली घर में बच्चे को जन्‍म देती है तो इसे भी अच्छा माना जाता है।
किसी शुभ कार्य से कहीं जा रहे हों और बिल्ली मुंह में मांस का टुकड़ा लिए हुए दिखाई दे तो काम सफल होता है।
लाल किताब के अनुसार बिल्ली को राहु की सवारी कहा गया है। जिस जातक की कुण्डली में राहु शुभ नहीं है उसे राहु के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए ब‌िल्ली पालना चाहिए।
लाल क‌िताब के टोटके के अनुसार बिल्ली की जेर को लाल कपड़े में लपेटकर बाजू पर बांधने से कालसर्प दोष से बचाव होता। ऊपरी चक्कर, नजर दोष, प्रेत बाधा इन सभी में ब‌िल्ली की जेर बांधने से लाभ मिलता है।
यदि सोए हुए व्यक्ति के ‌स‌िर को बिल्ली चाटने लगे तो ऐसा व्यक्ति सरकारी मामले में फंस सकता है।
बिल्ली का पैर चाटना निकट भविष्य में बीमार होने का संकेत होता है।
ब‌िल्ली ऊपर से कूदकर चली जाए तो तकलीफ सहनी पड़ती है।
यदि आप कहीं जा रहे हैं और बिल्ली आपके सामने कोई खाने वाली वस्तु लेकर आए और म्याऊं बोले तो- अशुभ होता है। यही क्रिया आपके घर आते समय हो तो- शुभ होता है।
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चूहों का घर में होना अशुभ है : जिस घर में काले चूहों की संख्या अधिक हो जाती है वहां किसी व्याधि के अचानक होने का अंदेशा रहता है।

यह भी माना जाता है कि चूहे हमारे घर की शांति, समृद्धि को धीरे धीरे कुतर कर खा जाते हैं। अत: चूहों का घर में रहना अशुभ माना गया है।
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यह भी माना जाता है कि यदि घर में काले रंग के चूहे बहुत अधिक तादाद में दिन और रात भर घूमते रहते हो तो, समझ लीजिए कि किसी रोग या शत्रु का आक्रमण होने वाला है।

लाल चींटी : कहते हैं कि धरती पर जितना भार सारी चींटियों का है उतना ही सारे मनुष्यों का है और जितने मनुष्य हैं उतने ही मुर्गे भी हैं। चींटियां मूलत: दो रंगों की होती है लाल और काली। काली चींटी को शुभ माना जाता है, लेकिन लाल को नहीं।
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लाल चिंटियों के बारे में कहा जाता है कि घर में उसकी संख्‍या बढ़ने से कर्ज भी बढ़ता जाता है और यह किसी संकट की सूचना भी होती है।
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चींटियों को भोजन : दोनों ही तरह की चींटियों को आटा डालने से कर्ज से मु‍क्ति मिलती है। चींटियों को शकर मिला आटा
डालते रहने से व्यक्ति हर तरह के बंधन से मुक्त हो जाता है। हजारों चींटियों को प्रतिदिन भोजन देने से वे चींटियां उक्त व्यक्ति को पहचानकर उसके प्रति अच्छे भाव रखने लगती हैं और उसको वे दुआ देने लगती हैं। चींटियों की दुआ का असर आपको हर संकट से बचा सकता है।
लाल चींटियों की कतार मुंह में अंडे दबाए निकलते देखना शुभ है। सारा दिन शुभ और सुखद बना रहता है।
जो चींटी को आटा देते हैं और छोटी-छोटी चिड़ियों को चावल देते हैं, वे वैकुंठ जाते हैं।
कर्ज से परेशान लोग चींटियों को शकर और आटा डालें। ऐसा करने पर कर्ज की समाप्ति जल्दी हो जाती है।
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घर की छत : जिस भवन की छत पर कौए, टिटहरी अथवा उल्लू घोर शब्द करें तब वहां किसी समस्या का उदय अचानक होता है। यदि घर में कौवा, गिद्ध, चील या कबूतर नित्य बैठते है और छह मास तक लगातार निवास बनाए हुए है तो गृहस्वामी पर नाना प्रकार की विपत्ति आने का सूचक होता है।
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यदि सुबह के समय या शाम के समय कौवा मांस या हड्डी लाकर गिराता है तो, समझ लीजिए कि अमंगल होने वाला है और बिमारी, चोट आदि पर धन खर्च होगा। यदि कोई भी पक्षी घर में किसी भी समय कोई लोहे का टुकड़ा गिराता है तो, यह अशुभ संकेत होता है जिसके कारण अचानक छापा या कारावास होने की पूरी पूरी संभावना बनने लगती है। जिस घर की छत या मुंडेर पर कोयल या सोन चिरैया चहचहाए, वहां निश्चित ही श्री वृद्धि होती है।

जाते समय अगर कोई पीछे से टोक दे या छींक दे तो आप क्यों चिढ़ जाते हैं?

  • यदि आप किसी प्रयोजन से जा रहे हैं और कोई टोक दे अर्थात पूछे कि कहां जा रहो? या कहे कि चाय पीकर जाओ या कुछ और कह दे, तो जिस कार्य के लिए आप कहीं जा रहे हैं उस कार्य में असफलता ही मिलेगी।

    हालांकि किसी विशेष कार्य के लिए जाते समय गाय, बछड़ा, बैल, सुहागिन, मेहतर और चूड़ी पहनाने वाला दिखाई दे अथवा रास्ता काट जाए तो यह शुभ शकुन कार्य सिद्ध करने वाला होता है।
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    क्या सपनों से शुभ और अशुभ संकेत मिलते हैं?

    -ज्योतिष लोग सपनों के शुभ और अशुभ फल बताते हैं। इसमें कितनी सच्चाई है यह शोध का विषय हो सकता है, लेकिन यह अंधविश्वास लोगों के बीच बहुत प्रचलित है और लोग इसे मानते भी हैं।
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    व्यक्ति को अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के सपने आते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ये हमारे शरीर और मन की अवस्था के अनुसार आते हैं। यदि भारी और ठोस आहार खाया है तो बुरे सपने आने के चांस बढ़ जाते हैं। पेट खराब रहने की स्थिति में भी ऐसा होता है। यदि आपकी मानसिक स्थिति खराब है और नकारात्मक विचारों की अधिकता है तब भी बुरे सपने आते हैं।
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    अन्य अशुभ लक्षण :

यदि घर के मुख्य द्वार से सांप का प्रवेश होता है तो इसके मतलब है कि गृहस्वामी या गृहस्वामिनी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है।
यदि घर में कोई चोट खाया या घायल पक्षी या उसका कोई काटा हुआ अंग आंगन में गिरता है तो महासंकट आने वाला है।
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घर में यदि कुतिया प्रसव करती है तो यह घर के मुखिया के लिए यह अच्छा संकेत नहीं है। इसके कारण शत्रु की वृद्धि होती है तथा अपने ही परिवार में मतभेद होने लगते हैं।
यदि घर की छत, दीवार या घर के किसी भी कोने में लाल रंग की चींटिया घुमती या रेंगती हुई दिखाई दे तो समझ लीजिए कि संपत्ति का क्षय होने वाला है या यदि पंख वाली चींटियां हो तो घर में बिना किसी कारण के क्लेश की स्थिति उत्पन्न होने लगती है।
यदि घर में रसोईघर का प्लेटफार्म का चटक या टूट जाए या फिर चाकला टूट या तड़क जाए तो यह दरिद्रता की निशानी है।
यदि घर में दूध बार बार जमीन पर गिरता हो, किसी भी कारण से तो घर में क्लेश और विवाद की स्थिति बनती है।
यदि जिस दिन नए घर में प्रवेश करना हो तो, उसी दिन सूर्योदय के समय कोई भी पशु रोता है तो उस दिन गृह प्रवेश टाल दें यह संकेत शुभ नहीं होता है घर में प्रवेश करते ही दुःख आरम्भ हो जाएंगे।
शुभ कार्य के लिए विचार चल रहा हो तब यदि छिपकली की आवाज सुनाई दे तो कार्य की असफलता होती है।
यदि आकाश में तारे टूटते दिखाई दें तो यह स्वास्थ्‍य खराब होने की सूचना होती है। इसी के साथ नौकरी में खतरा एवं आर्थिक तंगी आने लगती है।
जिस घर में बिच्छू कतार बनाकर बाहर जाते हुए दिखाई दें तो समझ लेना चाहिए कि वहां से लक्ष्मी जाने की तैयारी कर रही हैं।
पीला बिच्छू माया का प्रतीक है। ऐसा बिच्छू घर में निकले तो घर में लक्ष्मी का आगमन होता है।
जिस घर में प्राय: बिल्लियां विष्ठा कर जाती हैं, वहां कुछ शुभत्व के लक्षण प्रकट होते हैं।
घर में चमगादड़ों का वास अशुभ है।
जिस भवन में छछूंदरें घूमती हैं वहां लक्ष्मी की वृद्धि होती है।
जिस घर के द्वार पर हाथी अपनी सूंड ऊंची करे वहां उन्नति, वृद्धि तथा मंगल होने की सूचना मिलती है।
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कल्याणकारी सरल प्रयोग


सुनील त्रिवेदी

कल्याणकारी सरल प्रयोग :~

दिमाग से चिन्ता हटाने का टोटका:-

अधिकतर पारिवारिक कारणों से दिमाग बहुत ही उत्तेजना में आजाता है,परिवार की किसी समस्या से या लेन देन से,अथवा किसी रिस्तेनाते को लेकर
दिमाग एक दम उद्वेलित होने लगता है,ऐसा लगने लगता है कि दिमाग फ़ट पडेगा,इसका एक अनुभूत टोटका है कि जैसे ही टेंसन हो एक लोटे में या जग में
पानी लेकर उसके अन्दर चार लालमिर्च के बीज डालकर अपने ऊपर सात बार उबारा (उसारा) करने के बाद घर के बाहर सडक पर फ़ेंक दीजिये,फ़ौरन आराम
मिल जायेगा।

.यदि आपके बच्चे को बार-बार नजर लग जाती है तो

यदि कोई बच्चा नजर दोष से बीमार रहता है और उसका समस्त विकास रुक गया है तो फिटकरी एवं सरसों को बच्चे पर से सात बार वारकर चूल्हे पर झोंक देने से नजर उतर जाती है। यदि यह सुबह, दोपहर एवं सायं तीनों समय करें तो एक ही दिन में नजर दोष दूर हो जाता है।

मानसिक परेशानी दूर करने के लिए :—

रोज़ हनुमान जी का पूजन करे व हनुमान चालीसा का पाठ करें ! प्रत्येक शनिवार को शनि को तेल चढायें ! एक बार ही पहनी हुई एक जोडी चप्पल किसी
गरीब को एक बार दान करें !

घर से पराशक्तियों को हटाने का टोटका:-

एक कांच के गिलास में पानी में नमक मिलाकर घर के नैऋत्य के कोने में रख दीजिये,और उस बल्ब के पीछे लाल रंग का एक बल्व लगा दीजिये,जब भी पानी सूख जाये तो उस गिलास को फ़िर से साफ़ करने के बाद नमक
मिलाकर पानी भर दीजिये।

व्यक्तिगत बाधा निवारण के लिए:-

व्यक्तिगत बाधा के लिए एक मुट्ठी पिसा हुआ नमक लेकर शाम को अपने सिर के ऊपर से तीन बार उतार लें और उसे दरवाजे के बाहर फेंकें। ऐसा तीन दिन लगातार करें। यदि आराम न मिले तो नमक को सिर के ऊपर वार कर शौचालय में डालकर फ्लश चला दें। निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।
हमारी या हमारे परिवार के किसी भी सदस्य की

बनता काम बिगडता हो, लाभ न हो रहा हो या

कोई भी परेशानी हो तो :—

. हर मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में बदाना (मीठी बूंदी) चढा कर उसी प्रशाद को मंदिर के बाहर गरीबों में बांट दें !
ग्रह स्थिति थोड़ी सी भी अनुकूल होगी तो हमें निश्चय ही इन उपायों से भरपूर लाभ मिलेगा।

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‘ उल्लू का पट्ठा ‘

एक बार कुछ विद्यार्थियों ने अमर बलिदानी पण्डित लेखराम जी आर्यमुसाफिर जी से पूछा कि हे श्रद्धेय आप हमको ‘मन’ का लक्षण बताइये।
पण्डित जी ने उत्तर दिया कि ‘मन’ तो उल्लू का पट्ठा है। यदि इसे काबू में न रखो तो यह बड़े से बड़ा अनर्थ कर सकता है। सभी विद्यार्थी हँस पड़े।
पण्डित जी ने कहा कि मन को मन से लगाओ, मन को सुमन बनाओ। यह कुछ न कुछ संकल्प विकल्प करता ही रहता है, यह इधर उधर दौड़ता ही रहता है। यह संध्या, हवन, भजन , जप आदि में कम लगता है। इसकी चंचलता को कम करने के लिए शिवसंकल्प करना ही होता है। इसलिए वेदों में ईश्वर कृपा की प्रार्थना करते हुए कहा जाता है कि हे प्रभो! मेरा मन शिवसंकल्प वाला बनाओ।

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Hanuman jaynti vishesh:-
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मंगलवार को हनुमान जी को प्रसन्‍न करने के लिए ये उपाय करें पर ऐसा बिल्‍कुल ना करें!!!!!!!!!

ये प्रमुख उपाय आपकी हर मनोकामना पूरी कर सकते हैं और सभी कष्टों का निवारण कर सकते हैं। पर कुछ ऐसी बातें है जो कहते है मंगलवार के दिन नहीं करना चाहिए।…

हनुमानजी मंगलवार के देव माने जाते हैं। हनुमानजी की पूजा सबसे जल्दी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली मानी गई है। इस दिन हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए विशेष उपाय करे तो कुछ ही समय में आपकी किस्मत बदल सकती है। ये खास उपाय आपकी हर मनोकामना पूरी कर सकते हैं और सभी कष्टों का निवारण कर सकते हैं। पर कुछ ऐसी बातें है जो कहते है मंगलवार के दिन नहीं करना चाहिए।

मंगलवार के दिन राम मंदिर में जाएं। हनुमान जी के मस्तक का सिंदूर दाहिने हाथ के अंगूठे से लेकर सीता माता के श्री रूप के श्री चरणों में लगा दें। अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए प्रार्थना करें।

मंगलवार की सुबह स्नान करने के बाद बड़ के पेड़ का एक पत्ता तोड़ें और इसे साफ पानी से धो लें। अब इस पत्ते को कुछ देर हनुमानजी के सामने रखें। इसके बाद इस पर केसर से श्रीराम लिखें। अब इस पत्ते को अपने पर्स में रख लें। ऐसा माना जाता है कि इससे पर्स में पैसे बने रहते हैं।

हनुमान जी की कृपा पाने के लिए मंगलवार के दिन व्रत करके शाम के समय बूंदी का प्रसाद बांटने से भी पैसों की तंंगी दूर हो जाती है।

शनिवार के दिन हनुमान जी के मन्दिर में जाएं। उनके कंधों पर से सिन्दूर लाकर नजर लगे व्यक्ति को लगाएं। नजर का प्रभाव समाप्त हो जाता है।

मंगलवार को शाम के समय हनुमान जी को केवड़े का इत्र व गुलाब की माला चढ़ाएं। हनुमान जी को खुश करने का यह सबसे सरल उपाय है।

जीवन की समस्त समस्याओं के निवारण के लिए हनुमान जी के मंदिर में जाएं और राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करें।

मंगलवार की शाम को हनुमान मंदिर में जाएं। एक सरसों के तेल का और एक शुद्ध घी का दीपक जलाएंं। वहीं बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान जी की कृपा पाने का ये एक अचूक उपाय है।

मंगलवार के दिन हनुमानजी के पैरों में फिटकरी रखें। जिन्हें बुरे सपने आते हों वे अपने सिरहाने फिटकरी रखें। बुरे सपने नहीं आएंगे।

यदि कोई व्यक्ति पैसों की तंगी का सामना करना रहा है तो उसे प्रति मंगलवार और शनिवार को पीपल के 11 पत्तों का यह उपाय अपनाना चाहिए।

मंगलवार और शनिवार को पीपल के 11 पत्तों का यह उपाय अपनाना चाहिए। मंगलवार और शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त में उठें। इसके बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर किसी पीपल के पेड़ से 11 पत्ते तोड़ लें। ध्यान रखें पत्ते पूरे होने चाहिए, कहीं से टूटे या खंडित नहीं होने चाहिए।

इन 11 पत्तों पर स्वच्छ जल में कुमकुम या अष्टगंध या चंदन मिलाकर इससे श्रीराम का नाम लिखें। नाम लिखते समय हनुमान चालीसा का पाठ करें। जब सभी पत्तों पर श्रीराम नाम लिख लें, उसके बाद राम नाम लिखे हुए इन पत्तों की एक माला बनाएं। इस माला को किसी भी हनुमानजी के मंदिर जाकर वहां बजरंगबली को अर्पित करें। इस प्रकार यह उपाय करते रहें। कुछ समय में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे।

राम नाम का जाप,,,,जैसा की हम सभी जानते हैं की हनुमान जी भगवान् श्री राम के सबसे बड़े भक्त थे| इस बात का प्रमाण उन्होंने अपनी छाती फाड़ कर दिया था जब उन्होंने अपनी छाती फाड़ी तो अन्दर उनके ह्रदय में श्री राम और माता सीता की छवि मौजूद थी| अगर कोई प्रतिदिन राम नाम का जाप सच्चे ह्रदय से करता है तो उसे हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है|

केसरिया सिन्दूर और घी,,,हनुमान जी को केसरिया सिन्दूर तथा घी अति प्रिये है और अगर कोई भक्त मंगलवार को हनुमान जी पर केसरिया सिन्दूर और घी का चढ़ावा चढ़ाता है तो उसे निरोगी काया यानि की रोग बीमारी से मुक्ति मिल जाती है|

हनुमान चालीसा और सुन्दरकाण्ड का पाठ,,,,हनुमान जी की पूजा किसी भी तरह से की जा सकती है परन्तु हनुमान चालीसा का पाठ और सुन्दरकाण्ड का पाठ करने पर भक्त के ऊपर जल्द ही कृपा बरसनी शुरू हो जाती है| आप को भी जब कोई डर सताता होगा तो अपने आप ही हनुमान चालीसा याद आ जाती होगी क्योंकि बचपन से ही हनुमान चालीसा हमें हर डर से लड़ने के ताकत देता आया है| उसी प्रकार सुन्दर कांड का पाठ करने से बड़ी से बड़ी बाधा दूर हो जाती है|

राम चोला का चढ़ावा,,,हनुमान जी को राम इतने प्रिय है की उनके नाम का चोला जिस पर राम का नाम लिखा हो भी चढ़ाया जाए तो उन्हें बड़ी प्रसन्नता होती है| अगर कोई भक्त केसरिया सिन्दूर और घी की तरह ही हनुमान जी पर राम चोला चढ़ाता है तो हनुमान जी सदा ही उसकी रक्षा उसी प्रकार करते हैं जैसे कोई चोला अपने ओढने वाले को धुप और ठंढ से बचाता है|

दान देना और भोजन कराना,,,,ऐसे तो जरुरतमंदों को दान देना और गरीब तथा भूखे व्यक्ति अथवा जानवर को भोजन कराना हमेशा ही पुण्य का काम माना गया है परन्तु अगर ऐसे मनुष्य को जो वाकई में जरूरतमंद है को मंगलवार को दान दिया जाए अथवा किसी भूखे मनुष्य या फिर जानवर और पक्षी को मंगलवार के दिन भोजन कराया जाए तो हनुमान जी उस पर बड़े प्रसन्न होते हैं और उस दानी का भण्डार हमेशा ही भरा रहता है उसका भण्डार कभी खाली नहीं होता है|

परन्तु कुछ ऐसी बातें हैं जिसके लिए कहा जाता है हि मंगलवार के दिन ऐसा नहीं करना चाहिए।

मंगल ग्रह क्रूर ग्रह भी होता है। यदि आपके हाथ से मंगलवार के दिन कुछ चूक होती है तो उसका भरी प्रभाव आपके घर परिवार पर पड़ता है । इसलिए कुछ बातों का ध्यान मंगलवार को रखें जिससे शुभ प्रभाव हो।

लोगों में ऐसी मानता है कि मंगलवार को अपने बाल व नाख़ून ना काटे । मंगलवार के धार वाली चीजे ना ख़रीदे मतलब चाकू, कैची आदि। मंगलवार के दिन दक्षिण दिशा में कोई भी धार वाली चीज ना रखे, कैंची अथवा चाकू।. मंगलवार के दिन रसोई घर खाना बनाते समय रोटी या सब्जी को जलने ना दे। सबसे महत्वपूर्ण बात मंगलवार के दिन किसी भी प्रकार का मांसाहार घर में न पकाये। मंगलवार के दिन हनुमान जी को गुड़ का भोग लगाये और लाल गाय को खिलाएं। मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंदिर जाए और मूर्ति पर चमेली के तेल का दीपक करें।

मंगलवार के दिन अगर हो तो लाल रंग का रूमाल अपनी जेब में रखें। मंगलवार के दिन किसी गरीब मजदूर को चाय पिलाएं और खाना खिलाये । इस दिन कोशिश करें गरीब लोगो और बालको में मिठाई बांटें।

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आज मन्त्र शक्ति जानीये
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हंस जैन 98272 14427

💮मन्त्रों से करें रोग निवारण💮
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🔺कैंसर रोग
“ॐ नम: शिवाय शंभवे कर्केशाय नमो नम:।”
यह मंत्र किसी भी तरह के कैंसर रोग में लाभदायक होता है।

🔺मस्तिष्क रोग
“ॐ उमा देवीभ्यां नम:।”
यह मंत्र मस्तिष्क संबंधी विभिन्न रोगों जैसे सिरदर्द, हिस्टीरिया, याददाश्त जाने आदि में लाभदायी माना जाता है।

🔺आंखों के रोग :
“ॐ शंखिनीभ्यां नम:।”
इस मंत्र से जातक को मोतियाबिंद सहित रतौंधी, नेत्र ज्योति कम होने आदि की परेशानी में लाभ मिलता है।

🔺हृदय रोग
“ॐ नम: शिवाय संभवे व्योमेशाय नम:।”
हृदय संबंधी रोगों से अधिकांश लोग पीड़ित होते हैं। इसलिए अगर वे इस मंत्र का जप करें, तो उन्हें लाभ मिलता है।

🔺स्नायु रोग
“ॐ धं धर्नुधारिभ्यां नम:। “

🔺कान संबंधी रोग
“ॐ व्हां द्वार वासिनीभ्यां नम:।”
कर्ण विकारों को दूर करने में यह मंत्र आश्चर्यजनक भूमिका निभाता है।

🔺कफ संबंधी रोग
“ॐ पद्मावतीभ्यां नम:। “

🔺श्वास रोग
“ॐ नम: शिवाय संभवे श्वासेशाय नमो नम:।”

🔺पक्षाघात रोग
“ॐ नम: शिवाय शंभवे खगेशाय नमो नम:।” 〰〰〰〰〰〰〰〰
इन मंत्रों की शक्ति से रोग भागते हैं । मंत्रों में गजब की शक्ति होती है। इनका नियमित जप न केवल जातक को मानसिक शांति देता है, बल्कि उन्हें होने वाली गंभीर बीमारियों को भी दूर भगा सकता हैं ।अब आप कितना करते है यह तो आप पर निर्भर करता हैं। इसमे कोई अतिशोक्ति नही यदि कुछ रोग जड से सामाप्त हो जाये।
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ॐ नमः शिवाय

हंस जैन 98272 14427 🚫⭕🚫⭕🚫⭕🚫

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सिताला दुबे

केसर के तिलक का महत्व व लाभ
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हिंदू संस्कृति में तिलक का बहुत महत्व माना जाता है। कोई धार्मिक कार्य या पूजा-पाठ में सबसे पहले सबको तिलक लगाया जाता है। यही नही जब हम कभी किसी धार्मिक स्थल पर जाते हैं तब भी सर्वप्रथम हमें तिलक लगाया जाता है। दरअसर हिंदू संस्कृति व शास्त्रों में तिलक को मंगल व शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए जब भी कोई व्यक्ति शुभ काम के लिए जाता है तो उसके मस्तक पर तिलक लगाकर उसे विदा किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं तिलक आपकी कई मनोरामनाएं भी पूरी करता है।
शास्त्रों में तिलक के संबंध में विस्तार से बताया गया है। अलग-अलग पदार्थों के तिलक करने से अलग-अलग कामनाओं की पूर्ति होती है। चंदन, अष्टगंध, कुमकुम, केसर आदि अनेक पदार्थ हैं जिनके तिलक करने से कार्य सिद्ध किए जा सकते हैं। यहां तक कि ग्रहों के दुष्प्रभाव भी विशेष प्रकार के तिलक से दूर किए जा सकते हैं।

तिलक का मुख्य स्थान मस्तक पर दोनों भौ के बीच में होता है, क्योंकि इस स्थान पर सात चक्रों में से एक आज्ञा चक्र होता है। शास्त्रों के अनुसार प्रतिदिन तिलक लगाने से यह चक्र जाग्रत हो जाता है और व्यक्ति को ज्ञान, समय से परे देखने की शक्ति, आकर्षण प्रभाव और उर्जा प्रदान करता है। इस स्थान पर अलग-अलग पदार्थों के तिलक लगाने का अलग-अलग महत्व है। इनमें सबसे अधिक चमत्कारी और तेज प्रभाव दिखाने वाला पदार्थ केसर है। केसर का तिलक करने से कई कामनाओं की पूर्ति की जा सकती है।

दांपत्य में कलह खत्म करने के लिए
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जिन लोगों का दांपत्य जीवन कलहपूर्ण हो उन्हें केसर मिश्रित दूध से शिव का अभिषेक करना चाहिए। साथ ही अपने मस्तक, गले और नाभि पर केसर कर तिलक करें। यदि लगातार तीन महीने तक यह प्रयोग किया जाए तो दांपत्य जीवन प्रेम से भर जाता है।

मांगलिक दोष दूर करने के लिए
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जिस किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में मांगलीक दोष होता है ऐसे व्यक्ति को दोष दूर करने के लिए हनुमानजी को लाल चंदन और केसर मिश्रित तिलक लगाना चाहिए। इससे काफी फायदा मिलता है।

सफलता और आरोग्य प्राप्त करने के लिए
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जो व्यक्ति अपने जीवन में सफलता, आकर्षक व्यक्तित्व, सौंदर्य, धन, संपदा, आयु, आरोग्य प्राप्त करना चाहता है उसे प्रतिदिन अपने माथे पर केसर का तिलक करना चाहिए। केसर का तिलक शिव, विष्णु, गणेश और लक्ष्मी को प्रसन्न करता है। शिव से साहस, शांति, लंबी आयु और आरोग्यता मिलती है। गणेश से ज्ञान, लक्ष्मी से धन, वैभव, आकर्षण और विष्णु से
भौतिक पदार्थों की प्राप्ति होती है।

आकर्षक प्रभाव पाने के लिए
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केसर में जबर्दस्त आकर्षण प्रभाव होता है। प्रतिदिन केसर का तिलक लगाने से व्यक्ति में आकर्षण प्रभाव पैदा होता है और प्रत्येक व्यक्ति को सम्मोहित करने की शक्ति प्राप्त कर लेता है।

केसर के तिलक होने वाले अन्य लाभ
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1👉 जिन स्त्रियों को शुक्र से संबंधित समस्या है, जैसे पति से अनबन, परिवार में लड़ाई झगड़े, मान-सम्मान की कमी हो वे किसी महिला या कन्या को मेकअप किट के साथ केसर दान करें।

2👉 घर में आर्थिक तंगी बनी रहती है। पैसे की बचत नहीं होती है तो नवरात्रि या किसी भी शुभ दिन सात सफेद कौडि़यों को केसर से रंगकर उन्हें लाल कपड़े में बांधें और श्रीसूक्त के सात बार पाठ करें। अब इस पोटली को अपनी तिजोरी में रखें। जल्द ही धनागम होने लगेगा।

3👉 अपने व्यापार या कामकाज से जुड़े दस्तावेज जैसे बही-खातों, तिजोरी आदि जगह केसर की स्याही का छिड़काव करने से व्यापार खूब फलता है।

4👉 मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए एक सफेद कपड़े को केसर की स्याही से रंगें। अब इस कपड़े को अपनी तिजोरी या दुकान आदि के गल्ले में बिछाएं और पैसा इसी कपड़े पर रखें। यह स्थान पवित्र बना रहे इसका खास ध्यान रखें। ऐसा करने से लक्ष्मी प्रसन्न होती है और पैसे की आवक अच्छी होती है।

5👉 चतुर्दशी और अमावस्या के दिन घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा यानी नैऋत्य कोण में केसर की धूप देने के पितृ प्रसन्न होते हैं। इससे पितृदोष शांत होता है और व्यक्ति के जीवन में तरक्की होने लगती है।
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पितृ दोष बाधा नाश हेतु हनुमान मन्त्र

इस मन्त्र के नियमित 21 बार श्री हनुमान जी के विग्रह के सामने मदार की वर्तिका से चमेली की तेल का दीपक जलाकर 21 बार पाठ करने से सभी समस्याओ का निवारण होता हैं, पितृ दोष, ग्रह दोष दूर होते हैं तथा रुके काम बनने लगते हैं।

पाठ करने का उपयुक्त समय प्रातः 7-9 बजे अथवा रात्रि 10 बजे ।

ॐ नमो हनुमते रूद्रावताराय वायु सुताय अञ्जनी गर्भ सम्भुताय अखण्ड ब्रह्मचर्य व्रत पालन तत्पराय धवली कृत जगत् त्रितयाया ज्वलदग्नि सूर्यकोटी समप्रभाय प्रकट पराक्रमाय आक्रान्त दिग् मण्डलाय यशोवितानाय यशोऽलंकृताय शोभिताननाय महा सामर्थ्याय महा तेज पुञ्ज:विराजमानाय श्रीराम भक्ति तत्पराय श्रिराम लक्ष्मणानन्द कारकाय कपिसैन्य प्राकाराय सुग्रीव सौख्य कारणाय सुग्रीव साहाय्य कारणाय ब्रह्मास्त्र ब्रह्म शक्ति ग्रसनाय लक्ष्मण शक्ति भेद निबारणाय शल्य लिशल्यौषधि समानयनाय बालोदित भानु मण्डल ग्रसनाय अक्षयकुमार छेदनाय वन रक्षाकर समूह विभञ्जनाय द्रोण पर्वतोत्पाटनाय स्वामि वचन सम्पादितार्जुन संयुग संग्रामाय गम्भिर शव्दोदयाय दक्षिणाशा मार्तण्डाय मेरूपर्वत पीठिकार्चनाय दावानल कालाग्नी रूद्राय समुद्र लङ्घनाय सीताऽऽश्वासनाय सीता रक्षकाय राक्षसी सङ्घ विदारणाय अशोकबन विदारणाय लङ्कापुरी दहनाय दश ग्रीव शिर:कृन्त्तकाय कुम्भकर्णादि वधकारणाय बालि निबर्हण कारणाय मेघनादहोम विध्वंसनाय इन्द्रजीत वध कारणाय सर्व शास्त्र पारङ्गताय सर्व ग्रह विनाशकाय सर्व ज्वर हराय सर्व भय निवारणाय सर्व कष्ट निवारणाय सर्वापत्ती निवारणाय सर्व दुष्टादि निबर्हणाय सर्व शत्रुच्छेदनाय भूत प्रेत पिशाच डाकिनी शाकिनी ध्वंसकाय सर्वकार्य साधकाय प्राणीमात्र रक्षकाय रामदुताय स्वाहा॥

चेतावनी –

सिद्ध गुरु कि देखरेख मे साधना समपन्न करेँ , सिद्ध गुरु से दिक्षा , आज्ञा , सिद्ध यंत्र , सिद्ध माला , सिद्ध सामग्री लेकर हि गुरू के मार्ग दरशन मेँ साधना समपन्न करेँ ।

बिना गुरू साधना करना अपने विनाश को न्यौता देना है बिना गुरु आज्ञा साधना करने पर साधक पागल हो जाता है या म्रत्यु को प्राप्त करता है इसलिये कोई भी साधना बिना गुरु आज्ञा ना करेँ ।

विशेष –

किसी विशिष्ट समस्या ,तंत्र -मंत्र -किये -कराये -काले जादू -अभिचार ,नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव आदि पर परामर्श /समाधान हेतु संपर्क करें

महायोगी राजगुरु जी 《 अघोरी रामजी 》

तंत्र मंत्र यंत्र ज्योतिष विज्ञान अनुसंधान संस्थान

महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ )फॉउन्डेशन ट्रस्ट

(रजि.)

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किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए इस नंबर पर फ़ोन करें :

मोबाइल नं. : – 06306762688

व्हाट्सप्प न०;- 06306762688

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“पीपल वृक्ष नहीं अपितु साक्षात देवता है..!!”
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भारतीय संस्कृति में पीपल देववृक्ष है, इसके सात्विक प्रभाव के स्पर्श से अन्त: चेतना पुलकित और प्रफुल्लित होती है। पीपल वृक्ष प्राचीन काल से ही भारतीय जनमानस में विशेष रूप से पूजनीय रहा है। ग्रंथों में पीपल को प्रत्यक्ष देवता की संज्ञा दी गई है। स्कन्दपुराणमें वर्णित है कि अश्वत्थ(पीपल) के मूल में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में श्रीहरि और फलों में सभी देवताओं के साथ अच्युत सदैव निवास करते हैं। पीपल भगवान विष्णु का जीवन्त और पूर्णत: मूर्तिमान स्वरूप है। यह सभी अभीष्टोंका साधक है। इसका आश्रय मानव के सभी पाप ताप का शमन करता है।

भगवान कृष्ण कहते हैं-अश्वत्थ: सर्ववृक्षाणांअर्थात् समस्त वृक्षों में मैं पीपल का वृक्ष हूं। स्वयं भगवान ने उससे अपनी उपमा देकर पीपल के देवत्व और दिव्यत्वको व्यक्त किया है…

“पीपल महत्त्व.!!”
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जो व्यक्ति पीपल का पौधा लगाता है और उसकी पूरी उम्र उसकी सेवा करता है, उस जातक की कुंडली के सभी दोष नष्ट हो जाते हैं, उसके परिवार में सुख-समृद्धि आती है और शांति का वास रहता है।
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शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति पीपल के वृक्ष के नीचे शिवलिंग की स्थापना करके उसकी सेवा करता है तो वह व्यक्ति जीवन के कष्टों से मुक्त रहता है और बुरा समय भी टल जाता है।

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दिन ढलने के बाद पीपल के वृक्ष के पास दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।
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पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा पढ़ने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और जीवन की परेशानियों को हर लेते हैं। जीवन की हर बाधा समाप्त होती है।
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पीपल वृक्ष की नित्य तीन बार परिक्रमा करने और जल चढाने पर दरिद्रता, दु:ख और दुर्भाग्य का विनाश होता है।
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पीपल के दर्शन-पूजन से दीर्घायु तथा समृद्धि प्राप्त होती है। अश्वत्थ व्रत अनुष्ठान से कन्या अखण्ड सौभाग्य पाती है।
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शनिवार की अमावस्या को पीपल वृक्ष के पूजन और सात परिक्रमा करने से तथा काले तिल से युक्त सरसो के तेल के दीपक को जलाकर छायादानसे शनि की पीडा का शमन होता है।
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अथर्ववेदके उपवेद आयुर्वेद में पीपल के औषधीय गुणों का अनेक असाध्य रोगों में उपयोग वर्णित है।
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अनुराधा नक्षत्र से युक्त शनिवार की अमावस्या में पीपल वृक्ष के पूजन से शनि से मुक्ति प्राप्त होती है।श्रावण मास में अमावस्या की समाप्ति पर पीपल वृक्ष के नीचे शनिवार के दिन हनुमान की पूजा करने से बडे से बड़े संकट से मुक्ति मिल जाती है। पीपल का वृक्ष इसीलिए ब्रह्मस्थानहै। इससे सात्विकताबढती है।
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पीपल के वृक्ष के नीचे मंत्र,जप और ध्यान उपादेय रहता है। श्रीमद्भागवत् में वर्णित है कि द्वापरयुगमें परमधाम जाने से पूर्व योगेश्वर श्रीकृष्ण इस दिव्य पीपल वृक्ष के नीचे बैठकर ध्यान में लीन हुए। इसका प्रभाव तन-मन तक ही नहीं भाव जगत तक रहता है।
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सांयकाल के समय पीपल के नीचे मिट्टी के दीपक को सरसों के तेल से प्रज्ज्वलित करने से दुःख व मानसिक कष्ट दूर होते है।
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पीपल की परिक्रमा सुबह सूर्योदय से पूर्व करने से अस्थमा रोग में राहत मिलती है।
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पीपल के नीचे बैठ कर ध्यान करने से ज्ञान की वृद्धि हो कर मन सात्विकता की ओर बड़ता है।
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यदि ग्यारह पीपल के वृक्ष नदी के किनारे लगाए जाय तो समस्त पापों का नाश होता है।
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यदि ग्यारह नवनिर्मित मंदिरों में शुभ मुहूर्त में पीपल वृक्ष लगा कर चालीस दिनों तक इनकी सेवा या देखभाल* (कहीं सूख ना जाये) करने पर उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती और जब तक वह जीवित रहता है तब तक उसके अपने परिवार में भी अकाल मृत्यु नही होती है।
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पीपल वृक्ष 24 घंटे सिर्फ ऑक्सीजन ही छोड़ता है, अत: पीपल का वृक्ष आक्सीजन का भण्डार है यही आक्सीजन हमारे जीवन में भी आ कर हमे निरोग व सुख का मार्ग प्रशस्त करती रहती है।
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मार्ग में जहां भी पीपल वृक्ष मिले उसे देव की तरह प्रणाम करने से भी लाभ होते है….!!
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आर्यवर्त