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शिव सूत्र – बीज मंत्र


शिवसूत्र – बीज मंत्र ।

” नृत्यावसाने नटराज राजः ननाद ढक्वाम नवपंच वारम।
उद्धर्तु कामाद सनकादि सिद्धै एतत्विमर्शे शिव सूत्र जालम।”

अर्थात नृत्य की समाप्ति पर भगवान शिव ने अपने डमरू को विशेष दिशा-नाद में चौदह (नौ+पञ्च वारम) बार चौदह प्रकार की आवाज में बजाया। उससे जो चौदह सूत्र बजते हुए निकले उन्हें ही “शिव सूत्र” के नाम से जाना जाता है। सूत्र का मतलब है बीज । तंत्र मार्गमें सभी मंत्रोमे बीज मंत्र होते है । जैसे ऐं , गलौं, क्लीं , भं , ठं.... इस बीज का अर्थ तब ही समज आता है जब मंत्र साध्य होता है । जैसे कोई एक वृक्ष का बियां ( बीज ) दिखाए तो पता नही चलता ये कौनसा वृक्ष है । जब जमीनमे बोया जाता है और वृक्ष बाहर आता है तब वो दिखता है । ऐसे ही मंत्र जाप करते करते जब शरीरस्थ चक्रोमे मंत्र की ऊर्जा जाग्रत होने लगती है , तब उनका पूर्ण अर्थ समझ आता है । शिवजी के अनेक स्वरूपो की अलग अलग पोस्ट यहां दी है । सभी सोलह कला के सर्जक शिव है । संगीत , नृत्य , शास्त्र , शस्त्र , वनस्पति , खगोल , यज्ञ , पूजा , गृहस्थ , यंत्र , तंत्र , मंत्र ये सभी के सर्जक शिवजी के स्वरूपो की अलग अलग पोस्ट यहां प्रस्तुत की गई है । विश्व की कोई भी भाषा हो पर मुलाक्षर स्वर व्यंजन वो शिवजी के डमरू का नाद से प्रकट होकर विस्तृत हुवा है । डमरू के नाद को सूत्र कहते है

ये सूत्र निम्न प्रकार है-

(1)-अ ई उ ण (2)-ऋ ऌ क (3)-ए ओ ङ् (4)-ऐ औ च (5)-ह य व् र ट (6)- ल ण (7)- ञ् म ङ् ण न म (8)- झ भ य (9 )-घ ढ ध ष (10)- ज ब ग ड द स (11)- ख फ छ ठ थ च ट त व् (12)- क प य (13)- श ष स र (14)- ह ल

यदि इन्हें डमरू के बजने की कला में बजाया जाय तो बिलकुल स्पष्ट हो जाता है। यही से भाषा विज्ञान का मूर्त रूप प्रारम्भ होता है। पाणिनि के अष्टाध्यायी का अध्ययन करने या सिद्धांत कौमुदी का अध्ययन करने से सारे सूत्र स्पष्ट हो जायेगें। अस्तु यह एक अति दुरूह विषय है। तथा विशेष लगन, परिश्रम, मनन एवं रूचि से ही जाना जा सकता है। मैं सरल प्रसंग पर आता हूँ।

उपर्युक्त पाणिनीय सूत्रों की संख्या चौदह है। प्रत्येक सूत्र के अंत में जो वर्ण आया है। वह हलन्त है। अतः वह लुप्त हो गया है। वह केवल पढ़ने या छंद की पूर्ति के लिए लगाया गया है। वास्तव में वह लुप्त है। इन चौदहों सूत्रों के अंतिम चौदह अक्षर या वर्ण मिलकर पन्द्रहवां सूत्र स्वयं बन जाते है।

महा मृत्युंजय मंत्र इस सूत्र के साथ जाप करना हो तो मंत्र ;-

” ॐ ह्रौं जूँ सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यमबकम यजामहे सुगन्धिम्पुष्टि वर्द्धनम। उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात। ॐ स्वः भुवः भू: ॐ सः जूं ह्रौं ॐ।”

चौदह सूत्र ;-

शिव सूत्र रूप मंत्र इस प्रकार है- ‘अइउण्‌, त्रृलृक, एओड्, ऐऔच, हयवरट्, लण्‌, ञमड.णनम्‌, भ्रझभञ, घढधश्‌, जबगडदश्‌, खफछठथ, चटतव, कपय्‌, शषसर, हल्‌।

  1. कहा जाता है बिच्छू के काटने पर इन सूत्रों से झाड़ने पर विष उतर खत्म हो जाता है.
  2. कहते हैं सांप के काटने पर जिस व्यक्ति को सांप ने काटा है अगर उसके कान में उच्च स्वर से इन सूत्रों का पाठ करें तो वह सही हो जाता है.
  3. आप सभी को बता दें कि ऊपरी बाधा का आवेश जिस व्यक्ति पर आया हो उस पर इन सूत्रों से अभिमन्त्रित जल डालने से आवेश खत्म हो जाता है.
  4. इसी के साथ इन सूत्रों को भोज पत्र पर लिखकर गले मे या हाथ पर बांधने से प्रैत बाधा खत्म हो जाती है.
  5. कहते हैं ज्वर, सन्निपात, तिजारी, चौथिया आदि इन सूत्रों द्वारा झाड़ने फूंकने से खत्म हो जाता है और उन्माद या मृगी आदि रोग से पीड़ित होने पर इन सूत्रों को झाड़ने से आराम हो जाता है.

अघोर

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काले तिल के टोटके


काले तिल के टोटके
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कार्यों में आ रही परेशानियों और दुर्भाग्य को दूर करने के लिए ज्योतिष शास्त्र की किताबों में कई तरह के टोटके या उपाय बताए गए हैं उन्हीं में से एक है काले तिल के असरकार और चमत्कारिक उपाय। आप भी जानिए…

1👉 राहु-केतु और शनि से मुक्ति हेतु
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कुंडली में शनि के दोष हों या शनि की साढ़ेसाती या ढय्या चल रहा हो तो प्रत्येक शनिवार को बहते जल की नदी में काले तिल प्रवाहित करना चाहिए। इस उपाय से शनि के दोषों की शांति होती है।आप काले तिल भी दान कर सकते हैं। इससे राहु-केतु और शनि के बुरे प्रभाव समाप्त हो जाते हैं। इसके अलावा कालसर्प योग, साढ़ेसाती, ढय्या, पितृदोष आदि में भी यह उपाय कारगर है।

2.👉 धन की समस्या दूर करने हेतु
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हर शनिवार काले तिल, काली उड़द को काले कपड़े में बांधकर किसी गरीब व्यक्ति को दान करें। इस उपाय से पैसों से जुड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं।
धनहानि रोकने हेतु : मुठ्ठी भर काले तिल को परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर सात बार उसारकर घर के उत्तर दिशा में फेंक दें, धनहानि बंद होगी|

3.👉 बुरे समय से मुक्ति हेतु
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‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जप करते हुए प्रत्येक शनिवार को दूध में काले तिल मिलाकर पीपल पर चढ़ाएं। इससे कैसा भी बुरा वक्त चल रहा होगा तो वह दूर हो जाएगा।

4.👉 रोग कटे सुख मिले
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हर रोज एक लोटे में शुद्ध जल भरें और उसमें काले तिल डाल दें। अब इस जल को शिवलिंग पर ऊँ नम: शिवाय मंत्र जप करते हुए चढ़ाएं। जल पतली धार से चढ़ाएं और मंत्र का जप करते रहें। जल चढ़ाने के बाद फूल और बिल्व पत्र चढ़ाएं। इससे शनि के दोष तो शांत होंगे ही पुराने समय से चली आ रही बीमारियां भी दूर हो सकती हैं। दूसरा उपाय यह है कि शनिवार को यह उपय करें। जौ का 125 पाव (सवा पाव) आटा लें। उसमें साबुत काले तिल मिलाकर रोटी बनाएं। अच्छी तरह सेंके, जिससे वे कच्ची न रहें। फिर उस पर थोड़ा-सा तिल्ली का तेल और गुड़ डाल कर पेड़ा बनाएं और एक तरफ लगा दें। फिर उस रोटी को बीमार व्यक्ति के ऊपर से 7 बार वार कर किसी भैंसे को खिला दें। पीछे मुड़ कर न देखें और न कोई आवाज लगाए। भैंसा कहां मिलेगा, इसका पता पहले ही मालूम करके रखें। भैंस को रोटी नहीं खिलानी है।

5.👉 कार्य में सफलता हेतु
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अपने हाथ में एक मुट्ठी काले तिल लेकर घर से निकलें। मार्ग में जहां भी कुत्ता दिखाई दे उस कुत्ते के सामने वह तिल डाल दें और आगो बढ़ जाए। यदि वह काले तिल कुत्ता खाता हुआ दिखाई दे तो यह समझना चाहिए कि कैसा भी कठिन कार्य क्यों न हो, उसमें सफलता प्राप्त होगी।

6.👉 नजरदोष
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जब कभी किसी छोटे बच्चों को नजर लग जाती है तो, वह दूध उलटने लगता है और दूध पीना बन्द कर देता है, ऐसे में परिवार के लोग चिंतित और परेशान हो जाते है। ऐसी स्थिति में एक बेदाग नींबू लें और उसको बीच में आधा काट दें तथा कटे वाले भाग में थोड़े काले तिल के कुछ दाने दबा दें। और फिर उपर से काला धागा लपेट दें। अब उसी नींबू को बालक पर उल्टी तरफ से 7 बार उतारें। इसके पश्चात उसी नींबू को घर से दूर किसी निर्जन स्थान पर फेंक दें। इस उपाय से शीघ्र ही लाभ मिलेगा।

7.👉 आयु वृद्धि
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मंगल या शनिवार के दिन काले तिल, जौ का पीसा हुआ आटा और तेल मिश्रित करके एक रोटी पकावें, उसे अच्छी तरह से दोनों तरफ से सेकें, फिर उस पर तेल मिश्रित गुड़ चुपड़ कर व्यक्ति पर सात बार वारकर भैंसे को खिलावें।
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वास्तु में 7 घोड़ों के महत्व

वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर आप अपने घर या दफ्तर में दौड़ते हुए घोड़े की तस्वीर लगाते हैं, तो यह आपके कार्य में गति प्रदान करता है. दौड़ते हुए घोड़े सफलता, प्रगति और ताकत के प्रतीक होते हैं. खासकर 7 दौड़ते हुए घोड़े व्यवसाय की प्रगति का सूचक माने गए हैं, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार 7 अंक सार्वभौमिक है, प्राकृतिक है.

व्यापार में प्रगति के लिए अपने ऑफिस की केबिन में 7 दौड़ते हुए घोड़ों की तस्वीर लगाएं.

इन तस्वीरों को लगाते हुए इस बात का ध्यान रखें कि घोड़ों का मुंह ऑफिस के अंदर की ओर आते हुए होना चाहिए और दक्षिण दीवार पर तस्वीर लगानी चाहिए.

दोस्तों दौड़ते हुए घोड़े प्रगति के प्रतीक होते हैं.

ये कार्य में गति प्रदान करते हैं और जो व्यक्ति बार – बार इन घोड़ों को देखता है, इसका सीधा असर व्यक्ति की कार्यप्रणाली पर पड़ता है. अतः ये घोड़े आपके कार्य में गति प्रदान कर सफलता दिलाने में मददगार साबित होंगे.

7 घोड़ों की तस्वीर घर में लगाने से जीवन में धन संबंधी ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिलते. स्थाई रूप से घर में लक्ष्मी का निवास होता है. इसके लिए घर के मुख्य हॉल के दक्षिणी दीवार पर, घर के अंदर आते हुए मुख वाले घोड़े की तस्वीर लगाना चाहिए.

घोड़े की तस्वीर खरीदते समय इस बात का ध्यान जरूर रखें कि घोड़े का चेहरा प्रसन्नचित मुद्रा में हो, ना कि आक्रोशित हो.
दोस्तों ध्यान रखें की घोड़े शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक हैं और खासकर सफेद घोड़े सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक होते हैं. इसलिए घर और ऑफिस की नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा को लाने के लिए सफेद 7 घोड़े की तस्वीर लगानी चाहिए.

अगर आप कर्ज से परेशान हैं तो घर या दफ्तर के उत्तर – पश्चिमी दिशा में आर्टिफिशियल घोड़े का जोड़ा रखें. यह आपको किसी भी गिफ्ट शॉप पर आसानी से मिल जाएंगे. या नहीं तो ऑनलाइन आर्डर कर भी मंगा सकते हैं.

विशेष ध्यान रखने वाली बात यह है कि कभी भी टूटी फूटी तस्वीर घर में ना रखें. या धुंधली तस्वीर भी ना रखें.

जिस तस्वीर में अलग-अलग दिशा में घोड़े दौड़ते नजर आए वह तस्वीर ना लगाए
इससे घर में सुख – समृद्धि और लक्ष्मी का वास होता है

गिरधारी अग्रवाल

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पंचक विशेष


भारतीय ज्योतिष में पंचक को अशुभ माना गया है। इसके अंतर्गत धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते हैं। पंचक के दौरान कुछ विशेष काम वर्जित किये गए है।

पंचक के प्रकार

1👉 रोग पंचक

रविवार को शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है। इसके प्रभाव से ये पांच दिन शारीरिक और मानसिक परेशानियों वाले होते हैं। इस पंचक में किसी भी तरह के शुभ काम नहीं करने चाहिए। हर तरह के मांगलिक कार्यों में ये पंचक अशुभ माना गया है।

2👉 राज पंचक

सोमवार को शुरू होने वाला पंचक राज पंचक कहलाता है। ये पंचक शुभ माना जाता है। इसके प्रभाव से इन पांच दिनों में सरकारी कामों में सफलता मिलती है। राज पंचक में संपत्ति से जुड़े काम करना भी शुभ रहता है।*

3👉 अग्नि पंचक

मंगलवार को शुरू होने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है। इन पांच दिनों में कोर्ट कचहरी और विवाद आदि के फैसले, अपना हक प्राप्त करने वाले काम किए जा सकते हैं। इस पंचक में अग्नि का भय होता है। इस पंचक में किसी भी तरह का निर्माण कार्य, औजार और मशीनरी कामों की शुरुआत करना अशुभ माना गया है। इनसे नुकसान हो सकता है।*

4👉 मृत्यु पंचक

शनिवार को शुरू होने वाला पंचक मृत्यु पंचक कहलाता है। नाम से ही पता चलता है कि अशुभ दिन से शुरू होने वाला ये पंचक मृत्यु के बराबर परेशानी देने वाला होता है। इन पांच दिनों में किसी भी तरह के जोखिम भरे काम नहीं करना चाहिए। इसके प्रभाव से विवाद, चोट, दुर्घटना आदि होने का खतरा रहता है।

5👉 चोर पंचक

शुक्रवार को शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है। विद्वानों के अनुसार, इस पंचक में यात्रा करने की मनाही है। इस पंचक में लेन-देन, व्यापार और किसी भी तरह के सौदे भी नहीं करने चाहिए। मना किए गए कार्य करने से धन हानि हो सकती है।

6👉 इसके अलावा बुधवार और गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक में ऊपर दी गई बातों का पालन करना जरूरी नहीं माना गया है। इन दो दिनों में शुरू होने वाले दिनों में पंचक के पांच कामों के अलावा किसी भी तरह के शुभ काम किए जा सकते हैं।

पंचक में वर्जित कर्म


1👉 पंचक में चारपाई बनवाना भी अच्छा नहीं माना जाता। विद्वानों के अनुसार ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

2👉 पंचक के दौरान जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय घास, लकड़ी आदि जलने वाली वस्तुएं इकट्ठी नहीं करना चाहिए, इससे आग लगने का भय हैं।

3👉 पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है। इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा करना हानिकारक माना गया है।

4👉 पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए, ऐसा विद्वानों का कहना है। इससे धन हानि और घर में क्लेश होता है।

5👉 पंचक में शव का अंतिम संस्कार करने से पहले किसी योग्य पंडित की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि ऐसा न हो पाए तो शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश (एक प्रकार की घास) से बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए और इन पांचों का भी शव की तरह पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार करना चाहिए, तो पंचक दोष समाप्त हो जाता है। ऐसा गरुड़ पुराण में लिखा है।

पंचक में करने योग्य शुभ कार्य


पंचक में आने वाले नक्षत्रों में शुभ कार्य हो भी किये जा सकते हैं। पंचक में आने वाला उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है, वहीं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि शुभ कार्यों में श्रेष्ठ माने गए हैं।

मेरे अनुसार, पंचक को भले ही अशुभ माना जाता है, लेकिन इस दौरान सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं।

पंचक में आने वाले तीन नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद व रेवती रविवार को होने से आनंद आदि 28 योगों में से 3 शुभ योग बनाते हैं, ये शुभ योग इस प्रकार हैं- चर, स्थिर व प्रवर्ध। इन शुभ योगों से सफलता व धन लाभ का विचार किया जाता है।

मुहूर्त चिंतामणि ग्रंथ के अनुसार पंचक के नक्षत्रों का शुभ फल


1👉 घनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र चल संज्ञक माने जाते हैं। इनमें चलित काम करना शुभ माना गया है जैसे- यात्रा करना, वाहन खरीदना, मशीनरी संबंधित काम शुरू करना शुभ माना गया है।

2👉 उत्तराभाद्रपद नक्षत्र स्थिर संज्ञक नक्षत्र माना गया है। इसमें स्थिरता वाले काम करने चाहिए जैसे- बीज बोना, गृह प्रवेश, शांति पूजन और जमीन से जुड़े स्थिर कार्य करने में सफलता मिलती है।

3👉 रेवती नक्षत्र मैत्री संज्ञक होने से इस नक्षत्र में कपड़े, व्यापार से संबंधित सौदे करना, किसी विवाद का निपटारा करना, गहने खरीदना आदि काम शुभ माने गए हैं।

पंचक के नक्षत्रों का संभावित अशुभ प्रभाव


1👉 धनिष्ठा नक्षत्र में आग लगने का भय रहता है।

2👉 शतभिषा नक्षत्र में वाद-विवाद होने के योग बनते हैं।

3👉 पूर्वाभाद्रपद रोग कारक नक्षत्र है यानी इस नक्षत्र में बीमारी होने की संभावना सबसे अधिक होती है।

4👉 उत्तरा भाद्रपद में धन हानि के योग बनते हहै।

5👉 रेवती नक्षत्र में नुकसान व मानसिक तनाव होने की संभावना होती है।

जय श्री राधे-राधे आचार्य

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धन की कमी सताए तो गुरुवार को करें यह पांच काम …


आज का उपाय ग्रुप की प्रस्तुति
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हंस जैन रामनगर खंडवा
9827214427

धन की कमी सताए तो गुरुवार को करें यह पांच काम …

अगर आप आर्थिक रुप से परेशान रहते हैं, अनावश्यक व्यय के कारण हर महीने आपका बजट बिगड़ रहा है तो गुरुवार के दिन धन वृद्घ के उपाय आजमाने चाहिए।

ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि गुरु धन का कारक ग्रह है। जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है। इसके लिए कुछ उपाय लाल किताब में बताए गए हैं।

गुरुवार के दिन सुबह शाम करें यह काम ..
गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

शाम के समय केले के वृक्ष के नीचे दीपक जलाकर लड्डू या बेसन की मिठाई अर्पित करें और लोगों में बांट दें.

गुरुवार के दिन भगवान की पूजा के बाद केसर का तिलक लगाएं। अगर केसर उपलब्ध नहीं हो तब हल्दी का तिलक भी लगा सकते हैं।

गुरु का प्रभाव धन पर होता है। अगर कोई गुरुवार के दिन आपसे धन मांगने आता है तो लेन देने से बचें। गुरुवार को धन देने से आपका गुरु कमजोर हो जाता है, इससे आर्थिक परेशानी बढ़ती है।

गुरुवार के दिन माता पिता एवं गुरु का आशीर्वाद लें। इनका आशीर्वाद गुरु ग्रह का आशीर्वाद माना जाता है। इनकी प्रसन्नता के लिए पीले रंग के वस्त्र उपहार स्वरुप दें।

हंस जैन रामनगर खंडवा
9827214427

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ॐ दिशाशूल क्या होता है ?


🚩🙏 ॐ दिशाशूल क्या होता है ?
क्यों बड़े बुजुर्ग तिथि देख कर आने जाने की रोक टोक करते हैं ? आज की युवा पीढ़ी भले हि उन्हें आउटडेटेड कहे ..लेकिन बड़े सदा बड़े हि रहते हैं ..इसलिए आदर करे उनकी बातों का ;
दिशाशूल समझने से पहले हमें दस दिशाओं के विषय में ज्ञान होना आवश्यक है

| हम सबने पढ़ा है कि दिशाएं ४ होती हैं |
१) पूर्व
२) पश्चिम
३) उत्तर
४) दक्षिण

परन्तु जब हम उच्च शिक्षा ग्रहण करते हैं तो ज्ञात होता है कि वास्तव में
दिशाएँ दस होती हैं |

१) पूर्व
२) पश्चिम
३) उत्तर
४) दक्षिण
५) उत्तर – पूर्व
६) उत्तर – पश्चिम
७) दक्षिण – पूर्व
८) दक्षिण – पश्चिम
९) आकाश
१०) पाताल

हमारे सनातन धर्म के ग्रंथो में सदैव १० दिशाओं का ही वर्णन किया गया है,
जैसे हनुमान जी ने युद्ध में इतनी आवाजे की उनकी आवाज दसों दिशाओं में सुनाई
दी
हम यह भी जानते हैं कि प्रत्येक दिशा के देवता होते हैं |

दसों दिशाओं को समझने के पश्चात अब हम बात करते हैं वैदिक ज्योतिष की |
ज्योतिष शब्द “ज्योति” से बना है जिसका भावार्थ होता है “प्रकाश”
वैदिक ज्योतिष में अत्यंत विस्तृत रूप में मनुष्य के जीवन की हर
परिस्तिथियों से सम्बन्धित विश्लेषण किया गया है कि मनुष्य यदि इसको तनिक भी समझले तो वह अपने जीवन में उत्पन्न होने वाली बहुत सी समस्याओं से बच
सकता है और अपना जीवन सुखी बना सकता है |

दिशाशूल क्या होता है ? दिशाशूल वह दिशा है जिस तरफ यात्रा नहीं करना
चाहिए हर दिन किसी एक दिशा की ओर दिशाशूल होता है |

१) सोमवार और शुक्रवार को पूर्व
२) रविवार और शुक्रवार को पश्चिम
३) मंगलवार और बुधवार को उत्तर
४) गुरूवार को दक्षिण
५) सोमवार और गुरूवार को दक्षिण-पूर्व
६) रविवार और शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिम
७) मंगलवार को उत्तर-पश्चिम
८) बुधवार और शनिवार को उत्तर-पूर्व

परन्तु यदि एक ही दिन यात्रा करके उसी दिन वापिस आ जाना हो तो ऐसी दशा
में दिशाशूल का विचार नहीं किया जाता है

परन्तु यदि कोई आवश्यक कार्य
हो ओर उसी दिशा की तरफ यात्रा करनी पड़े, जिस दिन वहाँ दिशाशूल हो तो यह
उपाय करके यात्रा कर लेनी चाहिए –

रविवार – दलिया और घी खाकर
सोमवार – दर्पण देख कर
मंगलवार – गुड़ खा कर
बुधवार – तिल, धनिया खा कर
गुरूवार – दही खा कर
शुक्रवार – जौ खा कर
शनिवार – अदरक अथवा उड़द की दाल खा कर

साधारणतया दिशाशूल का इतना विचार नहीं किया जाता परन्तु यदि व्यक्ति के
जीवन का अति महत्वपूर्ण कार्य है तो दिशाशूल का ज्ञान होने से व्यक्ति
मार्ग में आने वाली बाधाओं से बच सकता है आशा करते हैं कि आपके जीवन
में भी यह गायन उपयोगी सिद्ध होगा तथा आप इसका लाभ उठाकर अपने दैनिक जीवन
में सफलता प्राप्त करे।

हँस जैन रामनगर खँडवा
98272 14427

Posted in कृषि, ज्योतिष - Astrology

प्राचीनकाल में ऋषि-मुनियों ने ऐसे पेड़-पौधों को लगाने की सलाह दी थी, जिनसे वास्तुदोष का निवारण हो साथ ही पर्यावरण संतुलन भी बना रहे।
तुलसी- तुलसी को जीवनदायिनी और लक्ष्मी स्वरूपा बताया गया है। इसे घर में लगाने से और इसकी पूजा अर्चना करने से महिलाओं के सारे दु:ख दूर होते हैं, साथ ही घर में सुख शांति बनी रहती है। इसे घर के अंदर लगाने से किसी भी प्रकार की अशुभ ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
अश्वगंधा- इसके बारे में कहा गया है कि यह वास्तु दोष समाप्त करने की क्षमता रखता है और शुभता को बढ़ाकर जीवन को अधिक सक्रिय बनाता है।
आंवला- आंवले का वृक्ष घर की चहारदीवारी में पूर्व व उत्तर में लगाया जाना चाहिए, जिससे यह शुभ रहता है। साथ ही इसकी नित्य पूजा-अर्चना करने से भी सभी तरह के पापों का शमन होता है।
केला- घर की चहारदीवारी में केले का वृक्ष लगाना शुभ होता है। इसे भवन के ईशान कोण में लगाना चाहिए, क्योंकि यह बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधि वृक्ष है। केले के समीप यदि तुलसी का पेड़ भी लगा लें तो अधिक शुभकारी रहेगा।
शतावर- शतावर को एक बेल बताया गया है। इसे घर में लगाना शुभ फलदायी होता है। बशर्ते इसे घर में कुछ इस तरह लगाएं कि यह ऊपर की ओर चढ़े।
अनार- इससे वंश वृद्धि होती है। आग्नेय में अनार का पेड़ अति शुभ परिणाम देने वाला होता है।
बेल- भगवान शिव को बेल का वृक्ष अत्यंत प्रिय है, इसको लगाने से धन संपदा की देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

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10 अशुभ लक्षण, आपको डाल देंगे संकट में…


शीतला दुबे

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10 अशुभ लक्षण, आपको डाल देंगे संकट में…
यह अंधविश्वास हमारे मन में गहराई से बैठे हुए हैं।
हम इन पर विश्वास करते हैं !
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भारत में परंपरा और हजारों सालों के ज्ञान और अनुभव के आधार पर कुछ ऐसी बातें समाज में प्रचलित हैं जो कि आपको हैरत में जरूर डाल देगी, लेकिन आप इन्हें नकार भी नहीं सकते हैं। हो सकता है कि यह अंधविश्वास हो या इनमें कोई रहस्य छुपा हो, लेकिन जान लेने में क्या हर्ज है।
आप इन्हें माना या न माने लेकिन अधिकतर लोग तो इस पर विश्वास करते हैं। यह हम नहीं जानते कि यह सही है या नहीं, लेकिन प्राचीनकाल से ही लोक परंपरा और स्थानीय लोगों की मान्यताओं पर आधारित इन बातों को आज भी लोग सही मानते हैं। उन हजारों बातों में से कुछ बातें ऐसी है जो आपकी जिंदगी और मौत से जुड़ी हुई है। उन्हीं बातों से से 10 खास बातें जानिए…
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नाक का न दिखाई देना : ऐसा माना जाता है कि यदि आपकी नाक आपको दिखाई देना बंद हो जाए तो समझिए कि मौत निकट ही है या आप किसी गंभीर बीमारी के शिकार हो गए हैं। यह मान्यता भी है कि सीधे खड़े होकर यदि आपको आपके घुटने दिखाई नहीं देते हैं तो आपका शरीर खतरनाक स्थिति में है।
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दरअसल, आप अनियमित जीवन शैली जी रहे हैं, लगातर तनाव में रहते हैं तो आपकी श्वास प्रक्रिया बदल जाती है। श्वास प्रक्रिया के बदलने से आपक कई तरह की गंभीर रोगों का शिकार हो सकते हैं। नाक का दिखाई देना बंद होने का मतलब है कि आपकी शक्ति का तेजी से क्षरण हो रहा है। आपकी तोंद निकल गई है जो आपको आपके घुटने दिखना बंद हो जाएंगे। तो निश्चित ही ऐसे में कृपया आप तुरंत ही खानपान पर रोक लगाकर योग करना शुरू कर दें।
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सीटी बजाने का मतलब संकट को बुलाना : ऐसा कहते हैं कि घर में या रात में सीटी नहीं बजाना चाहिए। इससे एक ओर जहां धन की हानि होती हैं वहीं आप किसी अंजान संकट को भी बुलावा देने हैं।
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यह भी माना जाता है कि रात में सीटी बजाने से बुरी आत्माएं सक्रिय हो जाती हैं। हालांकि यह धारणा जापान से भारत में प्रचलित हो गई है। भारत में रात में सीटी बजाना अशुभ एवं सांप को बुलाने वाला माना जाता है। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि सीटी बजाने से भैरव और शनिदेव रुष्ठ हो जाते हैं। अब इसमें कितनी सत्यता है यह तो हम नहीं जानते।

सुनसान स्थान पर पेशाब करना : ऐसा माना जाता है कि किसी सुनसान या जंगल की किसी विशेष भूमि कर पेशाब कर देने से भूत पीछे लग जाता है।
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ऐसे में कुछ लोग पहले थूकते हैं फिर पेशाब करते हैं और कुछ लोग कोई मंत्र वगैरह पढ़कर ऐसा करते हैं। साथ ही लोग नदी, पुल या जंगल की पगडंडी पर पेशाब नहीं करते। भोजन के बाद पेशाब करना और उसके बाद बाईं करवट सोना बड़ा हितकारक है।
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अन्य मान्यता :
नदी, पूल या जंगल की पगडंडी पर पेशाब नहीं करते।
मान्यता अनुसार एकांत में पवित्रता का ध्यान रखते हैं और पेशाब करने के बाद धेला अवश्य लेते हैं। उचित जगह देखकर ही पेशाब करते हैं।
भोजन के बाद पेशाब करना और उसके बाद बाईं करवट सोना बड़ा हितकारक है।
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जूते-चप्पल का उल्टा होना : जूते-चप्पल उल्टे हो जाए तो आप मानते हैं कि किसी से लड़ाई-झगड़ा हो सकता है?ऐसा माना जाता है कि घर के बारह रखे जूते या चप्पल यदि उल्टे हो जाएं तो उन्हें तुरंत सीधा कर देना चाहिए अन्यथा आपकी किसी से लड़ाई होने की संभावना बढ़ जाती है।
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ऐसा होने से बचने के लिए चप्पल उल्टी हुई है तो एक चप्पल से दूसरी चप्पल को मारकर सीधा रखने का अंधविश्वास है। इसी तरह जूते के साथ भी किया जाता है।
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जूते से जुड़े अन्य अंधविश्वास :
जूते या चप्पल को कई लोग नजर और अनहोनी से बचने का टोटका भी मानते हैं इसीलिए वे अपनी गाड़ी के पीछे निचले हिस्से में जूता लटका देते हैं।
कुछ लोग मानते हैं कि शनिवार को किसी मंदिर में चप्पल या जूते छोड़कर आ जाने से शनि का बुरा असर समाप्त हो जाता है।
जूता सुंघाने से मिरगी का दौरा शांत हो जाता है।
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हड्डी बजाना : इसे हड्डी तोड़ना, चटकाना या कटकाना भी कहते हैं। अक्सर लोग अपनी अंगुलियों की हड्डियों को चटकाते हैं जिसे खोड़ले लक्षण कहते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने वाले के हाथों से लक्ष्मी चली जाती है।
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अब लक्ष्मी जाती है या नहीं यह तो नहीं मालूम लेकिन कई लोगों को अपने शरीर के हर जगह की हड्डी चटकाने की आदत होती है जिसके चलते एक दिन सभी ज्वाइंट ढीले पड़ जाते हैं और बुढ़ापे में उसकी शक्ति कम हो जाती है। फिर हाथों की अंगुलियों से चाय का कप पकड़ने पर वह हिलेगा।
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इस तरह से हड्डियों को या अंगुलियों को चटकाना काफी नुकसानदेह होता है। जो कि गठिया को जन्म देती है। एक अध्यन के अनुसार हमारी हड्डियां लिगामेंट से एक दूसरे से जुड़ी होती हैं जिसे जोड़ कहते हैं। इन जोड़ों के बीच एक द्रव होता है जो उंगुलियों के चटकने के दौरान कम हो जाता है। ये द्रव जोड़ों में ग्रीस के समान होता है। जो हड्डियों को आपस मे रगड़ खाने से रोकता है। ऐसे में बार-बार अंगुलियों के चटकने से जोड़ों की पकड़ कमजोर हो जाती है। साथ ही हड्डियों के जोड़ पर मौजूद ऊतक भी नष्ट हो जाते हैं जिससे गठिया जैसे रोग हो जाते हैं।
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कुत्तों का लड़ना : आपस में लड़ते हुए कुत्ते दिख जाएं तो व्यक्ति का किसी से झगड़ा हो सकता है। शाम के समय एक से अधिक कुत्ते पूर्व की ओर अभिमुख होकर क्रंदन करें तो उस नगर या गांव में भयंकर संकट उपस्थित होता है।
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यदि आप घर से बाहर कहीं जा रहे हैं और आपके पीछे पीछे कुत्ता भी चल दे तो यह किसी अनहोनी का संकेत हैं। अच्छा है कि आप उधर की यात्रा टाल दें। यह भी माना जाता है कि यदि कुत्ता ऐसा करता है तो आप पर मौत का साया मंडरा रहा है। आप किसी गंभीर बिमारी की चपेट में आने वाले हैं या आपके साथ कोई दुर्घटना होने वाली है। हालांकि यह अंधविश्वास ही माना जाता है।

कुत्ते के रोने को अशुभ क्यों माना जाता है?

-कुत्ते का रोना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि घर के सामने घर की ओर मुंह करके कोई कुत्ता रोए तो उस घर पर किसी प्रकार की विपत्ति आने वाली है या घर के किसी सदस्य की मौत होगी।

कुत्ते से जुड़े अन्य अंधविश्वास :
मान्यता है कि घर के सामने सुबह के समय यदि कुत्ता रोए तो उस दिन कोई भी महत्वपूर्ण कार्य नहीं करना चाहिए। यदि किसी मकान की दीवार पर कुत्ता रोते हुए पंजा मारता दिखे तो समझा जाता है कि उक्त घर में चोरी हो सकती है या किसी अन्य तरह का संकट आ सकता है।
यदि कोई व्यक्ति किसी के अंतिम संस्कार से लौट रहा है और साथ में उसके कुत्ता भी आया है तो उस व्यक्ति की मृत्यु की आशंका रहती है अथवा उसे कोई बड़ी विपत्ति का सामना करना पड़ सकता है।
माना जाता है कि पालतू कुत्ते के आंसू आए और वह भोजन करना त्याग दे तो उस घर पर संकट आने की सूचना है।
आप किसी कार्य से बाहर जा रहे हैं और कुत्ता आपकी ओर देखकर भौंके तो आप किसी विपत्ति में फंसने वाले हैं। ऐसे में उक्त जगह नहीं जाना ही उचित माना जाता है।
घर से निकलते समय यदि कुत्ता अपने शरीर को कीचड़ में सना हुआ दिखे और कान फड़फड़ाए तो यह बहुत ही अपशकुन है। ऐसे समय में कार्य और यात्रा रोक देनी चाहिए।
कुत्ता यदि सामने से हड्डी अथवा मांस का टुकड़ा लाता हुआ नजर आए तो अशुभ।
संभोगरत कुत्ते को देखना भी अशुभ माना गया है, क्योंकि इससे आपके कार्य में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं और परिवार में झगड़ा हो सकता है।
यदि किसी के दरवाजे पर लगातार कुत्ता भौंकता है तो परिवार में धनहानि या बीमारी आ सकती है।
मान्यता है कि कुत्‍ता अगर आपके घुटने सूंघे तो आपको कोई लाभ होने वाला है।
यदि आप भोजन कर रहे हैं और उसी समय कुत्ते का रोना सुनाई दे, तो यह बेहद अशुभ होता है।
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बिल्लियों का लड़ना : बिल्लियों के बारे में बहुत से अशुभ लक्षण बताए गए हैं। काली बिल्ली रास्ता काट ले तो उसे रास्ते पर कई लोग अपना जाना स्थगित कर देते हैं।

इसी तरह कहते हैं कि जिस भवन में या उसके एकदम पास बिल्लियां प्राय: लड़ती रहती हैं वहां शीघ्र ही विघटन की संभावना रहती है विवाद वृद्धि होती है। मतभेद होता है।
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बिल्ली का रास्ता काटना, रोना और आपस में दो बिल्लियों का झगड़ना अशुभ है?

-बिल्ली का रास्ता काटना : माना जाता है कि बिल्ली की छठी इंद्री मनुष्यों की छठी इंद्री से कहीं ज्यादा सक्रिय है जिसके कारण उसे होनी-अनहोनी का पूर्वाभास होने लगता है।
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मान्यता अनुसार काली बिल्ली का रास्ता काटना तभी अशुभ माना जाता है जबकि बिल्ली बाईं ओर रास्ता काटते हुए दाईं ओर जाए। अन्य स्थ‌ित‌ियों में बिल्ली का रास्ता काटना अशुभ नहीं माना जाता है।
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जब बिल्ली रास्ता काटकर दूसरी ओर चली जाती है तो अपने पीछे वह उसकी नेगेटिव ऊर्जा छोड़ जाती है, जो काफी देर तक उस मार्ग पर बनी रहती है। खासकर काली बिल्ली के बारे में यह माना जाता है। हो सकता है कि प्राचीनकाल के जानकारों ने इसलिए यह अंधविश्वास फैलाया हो कि बिल्ली के रास्ता काटने पर अशुभ होता है।

बिल्ली का रोना : बिल्ली के रोने की आवाज बहुत ही डरावनी होती है। निश्‍चित ही इसको सुनने से हमारे मन में भय और आशंका का जन्म होता है। माना जाता है कि बिल्ली अगर घर में आकर रोने लगे तो घर के किसी सदस्य की मौत होने की सूचना है या कोई अनहोनी घटना हो सकती है।
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बिल्ली का आपस में झगड़ना : बिल्लियों का आपस में लड़ना धनहानि और गृहकलह का संकेत है। यदि किसी के घर में बिल्लियां आपस में लड़ रही हैं तो माना जाता है कि शीघ्र ही घर में कलह उत्पन्न होने वाली है। गृहकलह से ही धनहानि होती है।
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बिल्ली से जुड़े अन्य अंधविश्वास :
लोक मान्यता है कि दीपावली की रात घर में ब‌िल्ली का आना शुभ शगुन होता है।
बिल्ली घर में बच्चे को जन्‍म देती है तो इसे भी अच्छा माना जाता है।
किसी शुभ कार्य से कहीं जा रहे हों और बिल्ली मुंह में मांस का टुकड़ा लिए हुए दिखाई दे तो काम सफल होता है।
लाल किताब के अनुसार बिल्ली को राहु की सवारी कहा गया है। जिस जातक की कुण्डली में राहु शुभ नहीं है उसे राहु के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए ब‌िल्ली पालना चाहिए।
लाल क‌िताब के टोटके के अनुसार बिल्ली की जेर को लाल कपड़े में लपेटकर बाजू पर बांधने से कालसर्प दोष से बचाव होता। ऊपरी चक्कर, नजर दोष, प्रेत बाधा इन सभी में ब‌िल्ली की जेर बांधने से लाभ मिलता है।
यदि सोए हुए व्यक्ति के ‌स‌िर को बिल्ली चाटने लगे तो ऐसा व्यक्ति सरकारी मामले में फंस सकता है।
बिल्ली का पैर चाटना निकट भविष्य में बीमार होने का संकेत होता है।
ब‌िल्ली ऊपर से कूदकर चली जाए तो तकलीफ सहनी पड़ती है।
यदि आप कहीं जा रहे हैं और बिल्ली आपके सामने कोई खाने वाली वस्तु लेकर आए और म्याऊं बोले तो- अशुभ होता है। यही क्रिया आपके घर आते समय हो तो- शुभ होता है।
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चूहों का घर में होना अशुभ है : जिस घर में काले चूहों की संख्या अधिक हो जाती है वहां किसी व्याधि के अचानक होने का अंदेशा रहता है।

यह भी माना जाता है कि चूहे हमारे घर की शांति, समृद्धि को धीरे धीरे कुतर कर खा जाते हैं। अत: चूहों का घर में रहना अशुभ माना गया है।
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यह भी माना जाता है कि यदि घर में काले रंग के चूहे बहुत अधिक तादाद में दिन और रात भर घूमते रहते हो तो, समझ लीजिए कि किसी रोग या शत्रु का आक्रमण होने वाला है।

लाल चींटी : कहते हैं कि धरती पर जितना भार सारी चींटियों का है उतना ही सारे मनुष्यों का है और जितने मनुष्य हैं उतने ही मुर्गे भी हैं। चींटियां मूलत: दो रंगों की होती है लाल और काली। काली चींटी को शुभ माना जाता है, लेकिन लाल को नहीं।
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लाल चिंटियों के बारे में कहा जाता है कि घर में उसकी संख्‍या बढ़ने से कर्ज भी बढ़ता जाता है और यह किसी संकट की सूचना भी होती है।
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चींटियों को भोजन : दोनों ही तरह की चींटियों को आटा डालने से कर्ज से मु‍क्ति मिलती है। चींटियों को शकर मिला आटा
डालते रहने से व्यक्ति हर तरह के बंधन से मुक्त हो जाता है। हजारों चींटियों को प्रतिदिन भोजन देने से वे चींटियां उक्त व्यक्ति को पहचानकर उसके प्रति अच्छे भाव रखने लगती हैं और उसको वे दुआ देने लगती हैं। चींटियों की दुआ का असर आपको हर संकट से बचा सकता है।
लाल चींटियों की कतार मुंह में अंडे दबाए निकलते देखना शुभ है। सारा दिन शुभ और सुखद बना रहता है।
जो चींटी को आटा देते हैं और छोटी-छोटी चिड़ियों को चावल देते हैं, वे वैकुंठ जाते हैं।
कर्ज से परेशान लोग चींटियों को शकर और आटा डालें। ऐसा करने पर कर्ज की समाप्ति जल्दी हो जाती है।
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घर की छत : जिस भवन की छत पर कौए, टिटहरी अथवा उल्लू घोर शब्द करें तब वहां किसी समस्या का उदय अचानक होता है। यदि घर में कौवा, गिद्ध, चील या कबूतर नित्य बैठते है और छह मास तक लगातार निवास बनाए हुए है तो गृहस्वामी पर नाना प्रकार की विपत्ति आने का सूचक होता है।
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यदि सुबह के समय या शाम के समय कौवा मांस या हड्डी लाकर गिराता है तो, समझ लीजिए कि अमंगल होने वाला है और बिमारी, चोट आदि पर धन खर्च होगा। यदि कोई भी पक्षी घर में किसी भी समय कोई लोहे का टुकड़ा गिराता है तो, यह अशुभ संकेत होता है जिसके कारण अचानक छापा या कारावास होने की पूरी पूरी संभावना बनने लगती है। जिस घर की छत या मुंडेर पर कोयल या सोन चिरैया चहचहाए, वहां निश्चित ही श्री वृद्धि होती है।

जाते समय अगर कोई पीछे से टोक दे या छींक दे तो आप क्यों चिढ़ जाते हैं?

  • यदि आप किसी प्रयोजन से जा रहे हैं और कोई टोक दे अर्थात पूछे कि कहां जा रहो? या कहे कि चाय पीकर जाओ या कुछ और कह दे, तो जिस कार्य के लिए आप कहीं जा रहे हैं उस कार्य में असफलता ही मिलेगी।

    हालांकि किसी विशेष कार्य के लिए जाते समय गाय, बछड़ा, बैल, सुहागिन, मेहतर और चूड़ी पहनाने वाला दिखाई दे अथवा रास्ता काट जाए तो यह शुभ शकुन कार्य सिद्ध करने वाला होता है।
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    क्या सपनों से शुभ और अशुभ संकेत मिलते हैं?

    -ज्योतिष लोग सपनों के शुभ और अशुभ फल बताते हैं। इसमें कितनी सच्चाई है यह शोध का विषय हो सकता है, लेकिन यह अंधविश्वास लोगों के बीच बहुत प्रचलित है और लोग इसे मानते भी हैं।
    👿👿👿
    व्यक्ति को अच्छे और बुरे दोनों प्रकार के सपने आते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ये हमारे शरीर और मन की अवस्था के अनुसार आते हैं। यदि भारी और ठोस आहार खाया है तो बुरे सपने आने के चांस बढ़ जाते हैं। पेट खराब रहने की स्थिति में भी ऐसा होता है। यदि आपकी मानसिक स्थिति खराब है और नकारात्मक विचारों की अधिकता है तब भी बुरे सपने आते हैं।
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    अन्य अशुभ लक्षण :

यदि घर के मुख्य द्वार से सांप का प्रवेश होता है तो इसके मतलब है कि गृहस्वामी या गृहस्वामिनी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है।
यदि घर में कोई चोट खाया या घायल पक्षी या उसका कोई काटा हुआ अंग आंगन में गिरता है तो महासंकट आने वाला है।
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घर में यदि कुतिया प्रसव करती है तो यह घर के मुखिया के लिए यह अच्छा संकेत नहीं है। इसके कारण शत्रु की वृद्धि होती है तथा अपने ही परिवार में मतभेद होने लगते हैं।
यदि घर की छत, दीवार या घर के किसी भी कोने में लाल रंग की चींटिया घुमती या रेंगती हुई दिखाई दे तो समझ लीजिए कि संपत्ति का क्षय होने वाला है या यदि पंख वाली चींटियां हो तो घर में बिना किसी कारण के क्लेश की स्थिति उत्पन्न होने लगती है।
यदि घर में रसोईघर का प्लेटफार्म का चटक या टूट जाए या फिर चाकला टूट या तड़क जाए तो यह दरिद्रता की निशानी है।
यदि घर में दूध बार बार जमीन पर गिरता हो, किसी भी कारण से तो घर में क्लेश और विवाद की स्थिति बनती है।
यदि जिस दिन नए घर में प्रवेश करना हो तो, उसी दिन सूर्योदय के समय कोई भी पशु रोता है तो उस दिन गृह प्रवेश टाल दें यह संकेत शुभ नहीं होता है घर में प्रवेश करते ही दुःख आरम्भ हो जाएंगे।
शुभ कार्य के लिए विचार चल रहा हो तब यदि छिपकली की आवाज सुनाई दे तो कार्य की असफलता होती है।
यदि आकाश में तारे टूटते दिखाई दें तो यह स्वास्थ्‍य खराब होने की सूचना होती है। इसी के साथ नौकरी में खतरा एवं आर्थिक तंगी आने लगती है।
जिस घर में बिच्छू कतार बनाकर बाहर जाते हुए दिखाई दें तो समझ लेना चाहिए कि वहां से लक्ष्मी जाने की तैयारी कर रही हैं।
पीला बिच्छू माया का प्रतीक है। ऐसा बिच्छू घर में निकले तो घर में लक्ष्मी का आगमन होता है।
जिस घर में प्राय: बिल्लियां विष्ठा कर जाती हैं, वहां कुछ शुभत्व के लक्षण प्रकट होते हैं।
घर में चमगादड़ों का वास अशुभ है।
जिस भवन में छछूंदरें घूमती हैं वहां लक्ष्मी की वृद्धि होती है।
जिस घर के द्वार पर हाथी अपनी सूंड ऊंची करे वहां उन्नति, वृद्धि तथा मंगल होने की सूचना मिलती है।
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Posted in ज्योतिष - Astrology

कल्याणकारी सरल प्रयोग


सुनील त्रिवेदी

कल्याणकारी सरल प्रयोग :~

दिमाग से चिन्ता हटाने का टोटका:-

अधिकतर पारिवारिक कारणों से दिमाग बहुत ही उत्तेजना में आजाता है,परिवार की किसी समस्या से या लेन देन से,अथवा किसी रिस्तेनाते को लेकर
दिमाग एक दम उद्वेलित होने लगता है,ऐसा लगने लगता है कि दिमाग फ़ट पडेगा,इसका एक अनुभूत टोटका है कि जैसे ही टेंसन हो एक लोटे में या जग में
पानी लेकर उसके अन्दर चार लालमिर्च के बीज डालकर अपने ऊपर सात बार उबारा (उसारा) करने के बाद घर के बाहर सडक पर फ़ेंक दीजिये,फ़ौरन आराम
मिल जायेगा।

.यदि आपके बच्चे को बार-बार नजर लग जाती है तो

यदि कोई बच्चा नजर दोष से बीमार रहता है और उसका समस्त विकास रुक गया है तो फिटकरी एवं सरसों को बच्चे पर से सात बार वारकर चूल्हे पर झोंक देने से नजर उतर जाती है। यदि यह सुबह, दोपहर एवं सायं तीनों समय करें तो एक ही दिन में नजर दोष दूर हो जाता है।

मानसिक परेशानी दूर करने के लिए :—

रोज़ हनुमान जी का पूजन करे व हनुमान चालीसा का पाठ करें ! प्रत्येक शनिवार को शनि को तेल चढायें ! एक बार ही पहनी हुई एक जोडी चप्पल किसी
गरीब को एक बार दान करें !

घर से पराशक्तियों को हटाने का टोटका:-

एक कांच के गिलास में पानी में नमक मिलाकर घर के नैऋत्य के कोने में रख दीजिये,और उस बल्ब के पीछे लाल रंग का एक बल्व लगा दीजिये,जब भी पानी सूख जाये तो उस गिलास को फ़िर से साफ़ करने के बाद नमक
मिलाकर पानी भर दीजिये।

व्यक्तिगत बाधा निवारण के लिए:-

व्यक्तिगत बाधा के लिए एक मुट्ठी पिसा हुआ नमक लेकर शाम को अपने सिर के ऊपर से तीन बार उतार लें और उसे दरवाजे के बाहर फेंकें। ऐसा तीन दिन लगातार करें। यदि आराम न मिले तो नमक को सिर के ऊपर वार कर शौचालय में डालकर फ्लश चला दें। निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।
हमारी या हमारे परिवार के किसी भी सदस्य की

बनता काम बिगडता हो, लाभ न हो रहा हो या

कोई भी परेशानी हो तो :—

. हर मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में बदाना (मीठी बूंदी) चढा कर उसी प्रशाद को मंदिर के बाहर गरीबों में बांट दें !
ग्रह स्थिति थोड़ी सी भी अनुकूल होगी तो हमें निश्चय ही इन उपायों से भरपूर लाभ मिलेगा।