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संजय गुप्ता

आज बात करते है कूछ उपाय और टोटके की ज़रूर आजमाए ये सब कार्य सिद्धि मे सहायक है ये चमत्कारी टोटके
चुटकी भर हींग अपने सिर से घुमाकर (उतारा कर) दक्षिण दिशा में फ़ेंक कर जाए
एक हरी इलायची या एक लौंग शिवजी के चरणों में रखकर जाए
शनिवार के दिन एक रुपये का सिक्का या सरसों का तेल किसी कोढ़ी को दान करे.
पीली सरसों के कुछ दाने व्यापार स्थल के द्वार पर फ़ेंक कर जाए
रसायन रहित गुड या चमेली का तेल मंगलवार को हनुमान जी के आगे रखकर जाए.
महाकाली का पूजन शुद्ध घी के दीपक से करे.
काम में जाने से पहले पूजा घर में रखे जल कलश को प्रणाम करके जाए.
दर्पण में स्वयं का चेहरा देखकर जाए.
हर बुधवार एक कटोरी चावल दान कर गणेशजी पर एक सुपारी एक वर्ष तक चढ़ाये
हनुमान जी की मूर्ति से सिंदूर ले माँ सीता के चरणों में एक ही सांस में लगा दे और ये खास ज़रूर करे जिस सघन वृक्ष पर चमगादड़ों का स्थाई वास होता है, उसकी छोटी-
सी लकड़ी ग्रहण काल में तोड़ लाएं।
इसे अपने कर्म स्थल की कुर्सी अथवा गद्दी के निचे रखे इससे कभी धन का अभाव नही होगा जै शंकर.
धन संबंधित टोटके …
यदि धन कहीं फंस गया हो या कोई उधार न लौटा रहा हो तो रोजाना सुबह 11 बीज लाल मिर्च के जल में डालकर सूर्य भगवान को अर्ध्य देना चाहिये और
‘‘ऊँ आदित्याय नमः’’
मंत्र का जाप करते हुये सूर्य भगवान से धन वापसी की प्रार्थना करनी चाहिये, धन जरूर वापस आता है।
यदि धन की कमी हो या धन कहीं फंस गया हो तो शुक्ल पक्ष के किसी गुरूवार से शुरू कर अपने माथे पर रोजाना केसर व चंदन का तिलक लगाना शुरू कर देना चाहिये। इसके अतिरिक्त प्रत्येक गुरूवार को राम दरबार के सामने दंडवत प्रणाम कर अपनी इच्छा जाहिर करनी चाहिये, शीघ्र धन लाभ होता है।
यदि हमेशा ही धन की कमी परेशान करती हो तो शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार से शुरू कर 21 शुक्रवार तक आठ वर्ष तक की 5 कन्याओं को खीर व मिश्री खिलाना चाहिये और उनके चरण छूकर माता रानी से धन लाभ की प्रार्थना करनी चाहिये। मां की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
यदि धन संबंधित कष्ट अधिक हा रहे हों तो किसी भी मंदिर में किसी शुभ मुहूर्त में केले के दो नर व मादा पौधे लगाने चाहिये और उनकी देखभाल करनी चाहिये। जब वे पौधे फल देने लगेंगे तो धन संबंधित कष्ट स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।
घर या कार्यालयमें लक्ष्मी प्राप्ति के लिये उत्तर दिशा की दीवार के साथ एक सुंदर सा फव्वारा रखना चाहिये या एक एक्वेरियम रखना चाहिये जिसमें आठ सुनहरी व एक काली मछली हो।
यदि आय से अधिक व्यय हो या बचत न हो रही हो तो ध्यान दें कि घर पर कोई भी नल लीक न कर रहा हो व दूध या चाय उबलते समय गिरे नहीं वरना अनावश्यक खर्च होने लगता है।
यदि आर्थिक स्थिति ठीक न हो तो शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को हरे हकीक की 54 नगों की माला माँ लक्ष्मी जी को चढ़ानी चाहिये, आर्थिक स्थिति ठीक होने लगती है।
यदि धन टिकता न हो तो शुक्ल पक्ष के किसी शनिवार से शुरू कर प्रत्येक शनिवार को काले कुत्ते को तेल से चुपड़ी रोटी खिलानी चाहिये ।

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श्री दुर्गासप्तशती के अदबुध मंत्र

सब प्रकार के कल्याण के लिये..*
सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥”

धन के लिए मंत्र..*
“दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:
स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽ‌र्द्रचित्ता॥”

आकर्षण के लिए मंत्र..*
“ॐ क्लींग ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती ही सा,
बलादाकृष्य मोहय महामाया प्रयच्छति ”

विपत्ति नाश के लिए मंत्र..*
“शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥”

शक्ति प्राप्ति के लिए मंत्र..*
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्ति भूते सनातनि।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥

रक्षा पाने के लिए मंत्र*
शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च॥

आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए मंत्र..*
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

भय नाश के लिए मंत्र..*
“सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते।
भयेभ्याहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥

महामारी नाश के लिए मंत्र..*
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥

सुलक्षणा पत्‍‌नी की प्राप्ति के लिए मंत्र..*
पत्‍‌नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥

पाप नाश के लिए मंत्र..*
हिनस्ति दैत्यतेजांसि स्वनेनापूर्य या जगत्।
सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्योऽन: सुतानिव॥

भुक्ति-मुक्ति की प्राप्ति के लिए मंत्र..*
विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

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संजय गुप्ता

धन बढ़े, आरोग्य बढ़े, आयु बढ़ता जाय, देव-पितर खुश होत रहें, जो इस विधि भोजन खाय
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सभी जीवों के लिए भोजन जीवन का क्या महत्व है, इसे सब जानते हैं। यह भी प्रमाणित है कि जो जैसा भोजन करता है वैसा ही उसका स्वास्थ्य और विचार हो जाता है और इसमें की गयी लापरवाही बहुतही महँगा पड़ता है। दूसरी ओर, यदि रुचिकर, स्वास्थ्यवर्धक, पवित्र भोजन अच्छे गुणों का भंडार होता है।

इस तथ्य को ऋषि-मुनिओं ने बहुत नजदीक से जाँचा-परखा और लोकहित के लिए बिभिन्न शास्त्र-पुराणों के माध्यम से सामने रखा। सुख-समृद्धि चाहनेवाले को अवश्य ही इन पर ध्यान देना चाहिए।

  1. दोनों हाथ, दोनों पैर और मुँह — इन पाँचो अंगो को धोकर ही भोजन करना चाहिए। इससे आदमी की आयु बढ़ती है। (स्कंदपुराण,पद्मपुराण,सुश्रुतसंहिता,आदि) )
  2. अँन्धेरे में भोजन नहीं करना चाहिए, क्योंकि भोजन में कुछ खतरनाक जीव-जंतु गिर जाय तो वह दिखता नहीं और उसे खा लेने पर वह जानलेवा हो सकता है। (पद्मपुराण

  3. भोजन की वस्तु को गोद में रखकर खाना वर्जित है। इसीप्रकार बिछावन पर बैठकर, हाथमें लेकर और आसन पर रखकर भोजन करने से रोग और दरिद्रता आती है। (वशिष्ठस्मृति, बौद्धयनस्मृति, कूर्मपुराण, पद्मपुराण, आदि )

  4. फूटे हुए बर्तनमें भोजन करने से यह अपवित्र हो जाता है, जिसे खाने से खानेवाला भारी पाप का भागी होता है। ( व्याघ्रपादस्मृति, सुश्रुतसंहिता, मनुस्मृति,स्कंदपुराण, आदि )

  5. ढीक आधी रातमें, मध्यान्ह(दिंनके बारहबजे के आस-पास ) में, गीले वस्त्र धारणकर, सोते हुए और दूसरे के लिए रखे गए आसन पर खाना खाने से देव-पितृगण तो रस्ट होते ही हैं वातरोग भी हो जाता है। (कूर्मपुराण)

  6. अजीर्णता (जब भोजन नहीं पचा हो और कंठदाह, खट्टी डकार आदि आती हो) होने पर भोजन करना विष के समान मानाजाता है, जो प्राणलेवा भी हो जाता है। अत:ऐसी स्थितिमें भोजन करना पूर्णत:मना है। ( कूर्मपुराण )

  7. ग्रहणकाल (सूर्य अथवा चन्द्र ) में भोजन करना भयंकर दुखदायी है, अत:बुद्धिमान लोगों को इससे एकदमही बचना चाहिए। इससे आँख की बीमारी, दाँतों का नष्ट होना, पेटमें बिभिन्न प्रकार के रोगों की संभावना तो रहती ही है व्यक्ति भारी पाप का भागी भी होता है। (आपस्तम्बस्मृति, देवीभागवत, आदि )

  8. मल-मूत्र के वेग होनेपर भोजन नही करना चाहिए। (सुश्रुतसंहिता )

  9. जो कोई व्यक्ति भोजन करनेवाले में प्रेम न रखता हो उसका दिया हुआ भोजन नहीं ही करना चाहिए। यह किसी दुर्घटना का कारण हो सकता है।(चरकसंहिता )

  10. बहुत थका हुआ होनें पर आराम करने के बाद ही भोजन करना चाहिए, नहीं तो बुखार या वमन (वोमिटिंग) हो सकता है। (नीतिवक्यामृतम् )

  11. जोभी भोजन परोसा गया है उसकी निंदा नहीं करनी चाहिए। सामने जोभी आगया उसे प्रेमसे खाना चाहिये। इससे वह अच्छी तरह पच जाता है और बल में वृद्धि करता है।

निंदित भोजन स्वास्थ्यकर तो नहीं ही होता है, देवी अन्नपूर्णा को भी क्रुद्ध कर देता है, फलत:आदमी दरिद्रता की और बढ़ने लगता है। (चरकसंहिता, महाभारत, तैत्तरीयोपनिषद्, वृद्धगौतमस्मृति, आदि )
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संजय गुप्ता

पंच तत्वों का महत्व

प्राचीन समय से ही विद्वानों का मत रहा है कि इस सृष्टि की संरचना पांच तत्वों से मिलकर हुई है. सृष्टि में इन पंचतत्वों का संतुलन बना हुआ है।

यदि यह संतुलन बिगड़ गया तो यह प्रलयकारी हो सकता है. जैसे यदि प्राकृतिक रुप से जलतत्व की मात्रा अधिक हो जाती है तो पृथ्वी पर चारों ओर जल ही जल हो सकता है अथवा बाढ़ आदि का प्रकोप अत्यधिक हो सकता है. आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी को पंचतत्व का नाम दिया गया है।

माना जाता है कि मानव शरीर भी इन्हीं पंचतत्वों से मिलकर बना है।

वास्तविकता में यह पंचतत्व मानव की पांच इन्द्रियों से संबंधित है. जीभ, नाक, कान, त्वचा और आँखें हमारी पांच इन्द्रियों का काम करती है. इन पंचतत्वों को पंचमहाभूत भी कहा गया है. इन पांचो तत्वों के स्वामी ग्रह, कारकत्व, अधिकार क्षेत्र आदि भी निर्धारित किए गये हैं

(1) आकाश

आकाश तत्व का स्वामी ग्रह गुरु है. आकाश एक ऎसा क्षेत्र है जिसका कोई सीमा नहीं है. पृथ्वी के साथ्-साथ समूचा ब्रह्मांड इस तत्व का कारकत्व शब्द है. इसके अधिकार क्षेत्र में आशा तथा उत्साह आदि आते हैं. वात तथा कफ इसकी धातु हैं। वास्तु शास्त्र में आकाश शब्द का अर्थ रिक्त स्थान माना गया है. आकाश का विशेष गुण “शब्द” है और इस शब्द का संबंध हमारे कानों से है. कानों से हम सुनते हैं और आकाश का स्वामी ग्रह गुरु है इसलिए ज्योतिष शास्त्र में भी श्रवण शक्ति का कारक गुरु को ही माना गया है। शब्द जब हमारे कानों तक पहुंचते है तभी उनका कुछ अर्थ निकलता है. वेद तथा पुराणों में शब्द, अक्षर तथा नाद को ब्रह्म रुप माना गया है। वास्तव में आकाश में होने वाली गतिविधियों से गुरुत्वाकर्षण, प्रकाश, ऊष्मा, चुंबकीय़ क्षेत्र और प्रभाव तरंगों में परिवर्तन होता है. इस परिवर्तन का प्रभाव मानव जीवन पर भी पड़ता है. इसलिए आकाश कहें या अवकाश कहें या रिक्त स्थान कहें, हमें इसके महत्व को कभी नहीं भूलना चाहिए. आकाश का देवता भगवान शिवजी को माना गया है।

(2) वायु

वायु तत्व के स्वामी ग्रह शनि हैं. इस तत्व का कारकत्व स्पर्श है. इसके अधिकार क्षेत्र में श्वांस क्रिया आती है. वात इस तत्व की धातु है. यह धरती चारों ओर से वायु से घिरी हुई है. संभव है कि वायु अथवा वात का आवरण ही बाद में वातावरण कहलाया हो। वायु में मानव को जीवित रखने वाली आक्सीजन गैस मौजूद होती है. जीने और जलने के लिए आक्सीजन बहुत जरुरी है. इसके बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. यदि हमारे मस्तिष्क तक आक्सीजन पूरी तरह से नहीं पहुंच पाई तो हमारी बहुत सी कोशिकाएँ नष्ट हो सकती हैं. व्यक्ति अपंग अथवा बुद्धि से जड़ हो सकता है।
प्राचीन समय से ही विद्वानों ने वायु के दो गुण माने हैं. वह है – शब्द तथा स्पर्श. स्पर्श का संबंध त्वचा से माना गया है. संवेदनशील नाड़ी तंत्र और मनुष्य की चेतना श्वांस प्रक्रिया से जुड़ी है और इसका आधार वायु है. वायु के देवता भगवान विष्णु माने गये हैं।

(3) अग्नि

सूर्य तथा मंगल अग्नि प्रधान ग्रह होने से अग्नि तत्व के स्वामी ग्रह माने गए हैं. अग्नि का कारकत्व रुप है. इसका अधिकार क्षेत्र जीवन शक्ति है. इस तत्व की धातु पित्त है. हम्सभी जानते हैं कि सूर्य की अग्नि से ही धरती पर जीवन संभव है। यदि सूर्य नहीं होगा तो चारों ओर सिवाय अंधकार के कुछ नहीं होगा और मानव जीवन की तो कल्पना ही नहीं की जा सकती है. सूर्य पर जलने वाली अग्नि सभी ग्रहों को ऊर्जा तथा प्रकाश देती है। इसी अग्नि के प्रभाव से पृथ्वी पर रहने वाले जीवों के जीवन के अनुकूल परिस्थितियाँ बनती हैं. शब्द तथा स्पर्श के साथ रुप को भी अग्नि का गुण माना जाता है. रुप का संबंध नेत्रों से माना गया है. ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत अग्नि तत्व है। सभी प्रकार की ऊर्जा चाहे वह सौर ऊर्जा हो या आणविक ऊर्जा हो या ऊष्मा ऊर्जा हो सभी का आधार अग्नि ही है. अग्नि के देवता सूर्य अथवा अग्नि को ही माना गया है।

(4) जल

चंद्र तथा शुक्र दोनों को ही जलतत्व ग्रह माना गया है. इसलिए जल तत्व के स्वामी ग्रह चंद्र तथा शुक्र दोनो ही हैं. इस तत्व का कारकत्व रस को माना गया है. इन दोनों का अधिकार रुधिर अथवा रक्त पर माना गया है क्योंकि जल तरल होता है और रक्त भी तरल होता है. कफ धातु इस तत्व के अन्तर्गत आती है। विद्वानों ने जल के चार गुण शब्द, स्पर्श, रुप तथा रस माने हैं. यहाँ रस का अर्थ स्वाद से है. स्वाद या रस का संबंध हमारी जीभ से है. पृथ्वी पर मौजूद सभी प्रकार के जल स्त्रोत जल तत्व के अधीन आते हैं। जल के बिना जीवन संभ्हव नहीं है. जल तथा जल की तरंगों का उपयोग विद्युत ऊर्जा के उत्पादन में किया जाता है. हम यह भी भली-भाँति जानते हैं कि विश्व की सभी सभ्यताएँ नदियों के किनारे ही विकसित हुई हैं. जल के देवता वरुण तथा इन्द्र को माना गया है. मतान्तर से ब्रह्मा जी को भी जल का देवता माना गया है।

(5) पृथ्वी

पृथ्वी का स्वामी ग्रह बुध है. इस तत्व का कारकत्व गंध है. इस तत्व के अधिकार क्षेत्र में हड्डी तथा माँस आता है. इस तत्व के अन्तर्गत आने वाली धातु वात, पित्त तथा कफ तीनों ही आती हैं. विद्वानों के मतानुसार पृथ्वी एक विशालकाय चुंबक है. इस चुंबक का दक्षिणी सिरा भौगोलिक उत्तरी ध्रुव में स्थित है. संभव है इसी कारण दिशा सूचक चुंबक का उत्तरी ध्रुव सदा उत्तर दिशा का ही संकेत देता है। पृथ्वी के इसी चुंबकीय गुण का उपयोग वास्तु शास्त्र में अधिक होता है. इस चुंबक का उपयोग वास्तु में भूमि पर दबाव के लिए किया जाता है. वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा में भार बढ़ाने पर अधिक बल दिया जाता है. हो सकता है इसी कारण दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोना स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना गया है. यदि इस बात को धर्म से जोड़ा जाए तो कहा जाता है कि दक्षिण दिशा की ओर पैर करके ना सोएं क्योंकि दक्षिण में यमराज का वास होता है। पृथ्वी अथवा भूमि के पाँच गुण शब्द, स्पर्श, रुप, स्वाद तथा आकार माने गए हैं. आकार तथा भार के साथ गंध भी पृथ्वी का विशिष्ट गुण है क्योंकि इसका संबंध नासिका की घ्राण शक्ति से है। उपरोक्त विश्लेषण से यह निष्कर्ष निकलता है कि पंचतत्व मानव जीवन को अत्यधिक प्रभावित करते हैं. उनके बिना मानव तो क्या धरती पर रहने वाले किसी भी जीव के जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। इन पांच तत्वों का प्रभाव मानव के कर्म, प्रारब्ध, भाग्य तथा आचरण पर भी पूरा पड़ता है. जल यदि सुख प्रदान करता है तो संबंधों की ऊष्मा सुख को बढ़ाने का काम करती है और वायु शरीर में प्राण वायु बनकर घूमती है. आकाश महत्वाकांक्षा जगाता है तो पृथ्वी सहनशीलता व यथार्थ का पाठ सिखाती है. यदि देह में अग्नि तत्व बढ़ता है तो जल्की मात्रा बढ़ाने से उसे संतुलित किया जा सकता है. यदि वायु दोष है तो आकाश तत्व को बढ़ाने से यह संतुलित रहेगें।

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लाल किताब के सिद्ध 25 टोटके और उपाय (लाल किताब ke Totke aur Upay)
लाल किताब के सिद्ध टोटके और उपाय (लाल किताब ke Totke aur Upay)
1. आर्थिक समस्या के छुटकारे के लिए:
यदि आप हमेशा आर्थिक समस्या से परेशान हैं तो इसके लिए 21 शुक्रवार 9 वर्ष से कम आयु की 5 आप कन्यायों को खीर व मिश्री का प्रसाद बांटें!
2. घर और कार्यस्थल में धन वर्षा के लिए:
इसके लिए आप अपने घर, दुकान या शोरूम में एक अलंकारिक फव्वारा रखें! या एक मछलीघर जिसमें 8 सुनहरी व एक काली मछ्ली हो रखें! इसको उत्तर या उत्तरपूर्व की ओर रखें! यदि कोई मछ्ली मर जाय तो उसको निकाल कर नई मछ्ली लाकर उसमें डाल दें!
3. परेशानी मुक्ति के लिए से:
आज कल हर आदमी किसी न किसी कारण से परेशान है! कारण कोई भी हो आप एक तांबे के पात्र में जल भर कर उसमें थोडा सा लाल चंदन मिला दें! उस पात्र को सिरहाने रख कर रात को सो जांय! प्रातः उस जल को तुलसी के पौधे पर चढा दें! धीरे-धीरे परेशानी दूर होगी!
4. कुंवारी कन्या के विवाह हेतु:
1। यदि कन्या की शादी में कोई रूकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें! भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर “ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नामः” मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढा दें! विवाह की बाधायें अपने आप दूर होती जांयगी!
2। प्रत्येक सोमवार को कन्या सुबह नहा-धोकर शिवलिंग पर “ऊं सोमेश्वराय नमः” का जाप करते हुए दूध मिले जल को चढाये और वहीं मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला जप करे! विवाह की सम्भावना शीघ्र बनती नज़र आयेगी
5. व्यापार बढाने के लिए:
1। शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन अपनी फैक्ट्री या दुकान के दरवाजे के दोनों तरफ बाहर की ओर थोडा सा गेहूं का आटा रख दें! ध्यान रहे ऐसा करते हुए आपको कोई देखे नही!
2। पूजा घर में अभिमंत्रित श्र्री यंत्र रखें!
3। शुक्र्वार की रात को सवा किलो काले चने भिगो दें! दूसरे दिन शनिवार को उन्हें सरसों के तेल में बना लें! उसके तीन हिस्से कर लें! उसमें से एक हिस्सा घोडे या भैंसे को खिला दें! दूसरा हिस्सा कुष्ठ रोगी को दे दें और तीसरा हिस्सा अपने सिर से घडी की सूई से उल्टे तरफ तीन बार वार कर किसी चौराहे पर रख दें! यह प्रयोग 40 दिन तक करें! कारोबार में लाभ होगा!
6. लगातार बुखार आने पर:
1। यदि किसी को लगातार बुखार आ रहा हो और कोई भी दवा असर न कर रही हो तो आक की जड लेकर उसे किसी कपडे में कस कर बांध लें! फिर उस कपडे को रोगी के कान से बांध दें! बुखार उतर जायगा!
2। इतवार या गुरूवार को चीनी, दूध, चावल और पेठा (कद्दू-पेठा, सब्जी बनाने वाला) अपनी इच्छा अनुसार लें और उसको रोगी के सिर पर से वार कर किसी भी धार्मिक स्थान पर, जहां पर लंगर बनता हो, दान कर दें!
3। यदि किसी को टायफाईड हो गया हो तो उसे प्रतिदिन एक नारियल पानी पिलायें! कुछ ही दिनों में आराम हो जायगा!
7. नौकरी जाने का खतरा हो या ट्रांसफर रूकवाने के लिए :
पांच ग्राम डली वाला सुरमा लें! उसे किसी वीरान जगह पर गाड दें! ख्याल रहे कि जिस औजार से आपने जमीन खोदी है उस औजार को वापिस न लायें! उसे वहीं फेंक दें दूसरी बात जो ध्यान रखने वाली है वो यह है कि सुरमा डली वाला हो और एक ही डली लगभग 5 ग्राम की हो! एक से ज्यादा डलियां नहीं होनी चाहिए!
8. कारोबार में नुकसान हो रहा हो या कार्यक्षेत्र में झगडा हो रहा हो तो :
यदि उपरोक्त स्थिति का सामना हो तो आप अपने वज़न के बराबर कच्चा कोयला लेकर जल प्रवाह कर दें! अवश्य लाभ होगा!
9. मुकदमें में विजय पाने के लिए:
यदि आपका किसी के साथ मुकदमा चल रहा हो और आप उसमें विजय पाना चाहते हैं तो थोडे से चावल लेकर कोर्ट / कचहरी में जांय और उन चावलों को कचहरी में कहीं पर फेंक दें! जिस कमरे में आपका मुकदमा चल रहा हो उसके बाहर फेंकें तो ज्यादा अच्छा है! परंतु याद रहे आपको चावल ले जाते या कोर्ट में फेंकते समय कोई देखे नहीं वरना लाभ नहीं होगा! यह उपाय आपको बिना किसी को पता लगे करना होगा!
10 धन के ठहराव के लिए:
आप जो भी धन मेहनत से कमाते हैं उससे ज्यादा खर्च हो रहा हो अर्थात घर में धन का ठहराव न हो तो ध्यान रखें को आपके घर में कोई नल लीक न करता हो! अर्थात पानी टप-टप टपकता न हो! और आग पर रखा दूध या चाय उबलनी नहीं चाहिये! वरना आमदनी से ज्यादा खर्च होने की सम्भावना रह्ती है!
11. मानसिक परेशानी दूर करने के लिए:
रोज़ हनुमान जी का पूजन करे व हनुमान चालीसा का पाठ करें! प्रत्येक शनिवार को शनि को तेल चढायें! अपनी पहनी हुई एक जोडी चप्पल किसी गरीब को एक बार दान करें!
12. बच्चे के उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु के लिए:
1। एक काला रेशमी डोरा लें! “ऊं नमोः भगवते वासुदेवाय नमः” का जाप करते हुए उस डोरे में थोडी थोडी दूरी पर सात गांठें लगायें! उस डोरे को बच्चे के गले या कमर में बांध दें!
2। प्रत्येक मंगलवार को बच्चे के सिर पर से कच्चा दूध 11 बार वार कर किसी जंगली कुत्ते को शाम के समय पिला दें! बच्चा दीर्घायु होगा!
13. किसी रोग से ग्रसित होने पर:
सोते समय अपना सिरहाना पूर्व की ओर रखें! अपने सोने के कमरे में एक कटोरी में सेंधा नमक के कुछ टुकडे रखें! सेहत ठीक रहेगी!
14. प्रेम विवाह में सफल होने के लिए:
यदि आपको प्रेम विवाह में अडचने आ रही हैं तो:
शुक्ल पक्ष के गुरूवार से शुरू करके विष्णु और लक्ष्मी मां की मूर्ती या फोटो के आगे “ऊं लक्ष्मी नारायणाय नमः” मंत्र का रोज़ तीन माला जाप स्फटिक माला पर करें! इसे शुक्ल पक्ष के गुरूवार से ही शुरू करें! तीन महीने तक हर गुरूवार को मंदिर में प्रशाद चढांए और विवाह की सफलता के लिए प्रार्थना करें!
15. नौकर न टिके या परेशान करे तो:
हर मंगलवार को बदाना (मीठी बूंदी) का प्रशाद लेकर मंदिर में चढा कर लडकियों में बांट दें! ऐसा आप चार मंगलवार करें!
16. बनता बिगडता हो काम, लाभ न हो रहा हो या कोई भी परेशानी हो तो :
हर मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में बदाना (मीठी बूंदी) चढा कर उसी प्रशाद को मंदिर के बाहर गरीबों में बांट दें!
17. यदि आपको सही नौकरी मिलने में दिक्कत आ रही हो तो :
1। कुएं में दूध डालें! उस कुएं में पानी होना चहिए!
2। काला कम्बल किसी गरीब को दान दें!
3। 6 मुखी रूद्राक्ष की माला 108 मनकों वाली माला धारण करें जिसमें हर मनके के बाद चांदी के टुकडे पिरोये हों!
18. अगर आपका प्रमोशन नहीं हो रहा तो:
1। गुरूवार को किसी मंदिर में पीली वस्तुये जैसे खाद्य पदार्थ, फल, कपडे इत्यादि का दान करें!
2। हर सुबह नंगे पैर घास पर चलें!
19. पति को वश में करने के लिए:
यह प्रयोग शुक्ल पक्ष में करना चाहिए! एक पान का पत्ता लें! उस पर चंदन और केसर का पाऊडर मिला कर रखें! फिर दुर्गा माता जी की फोटो के सामने बैठ कर दुर्गा स्तुति में से चँडी स्त्रोत का पाठ 43 दिन तक करें! पाठ करने के बाद चंदन और केसर जो पान के पत्ते पर रखा था, का तिलक अपने माथे पर लगायें! और फिर तिलक लगा कर पति के सामने जांय! यदि पति वहां पर न हों तो उनकी फोटो के सामने जांय! पान का पता रोज़ नया लें जो कि साबुत हो कहीं से कटा फटा न हो! रोज़ प्रयोग किए गए पान के पत्ते को अलग किसी स्थान पर रखें! 43 दिन के बाद उन पान के पत्तों को जल प्रवाह कर दें! शीघ्र समस्या का समाधान होगा!
20. यदि आपको धन की परेशानी है, नौकरी मे दिक्कत आ रही है, प्रमोशन नहीं हो रहा है या आप अच्छे करियर की तलाश में है तो यह उपाय कीजिए :
किसी दुकान में जाकर किसी भी शुक्रवार को कोई भी एक स्टील का ताला खरीद लीजिए! लेकिन ताला खरीदते वक्त न तो उस ताले को आप खुद खोलें और न ही दुकानदार को खोलने दें ताले को जांचने के लिए भी न खोलें! उसी तरह से डिब्बी में बन्द का बन्द ताला दुकान से खरीद लें! इस ताले को आप शुक्रवार की रात अपने सोने के कमरे में रख दें! शनिवार सुबह उठकर नहा-धो कर ताले को बिना खोले किसी मन्दिर, गुरुद्वारे या किसी भी धार्मिक स्थान पर रख दें! जब भी कोई उस ताले को खोलेगा आपकी किस्मत का ताला खुल जायगा!
21. यदि आप अपना मकान, दुकान या कोई अन्य प्रापर्टी बेचना चाहते हैं और वो बिक न रही हो तो यह उपाय करें :
बाजार से 86 (छियासी) साबुत बादाम (छिलके सहित) ले आईए! सुबह नहा-धो कर, बिना कुछ खाये, दो बादाम लेकर मन्दिर जाईए! दोनो बादाम मन्दिर में शिव-लिंग या शिव जी के आगे रख दीजिए! हाथ जोड कर भगवान से प्रापर्टी को बेचने की प्रार्थना कीजिए और उन दो बादामों में से एक बादाम वापिस ले आईए! उस बादाम को लाकर घर में कहीं अलग रख दीजिए! ऐसा आपको 43 दिन तक लगातार करना है! रोज़ दो बादाम लेजाकर एक वापिस लाना है! 43 दिन के बाद जो बादाम आपने घर में इकट्ठा किए हैं उन्हें जल-प्रवाह (बहते जल, नदी आदि में) कर दें! आपका मनोरथ अवश्य पूरा होगा! यदि 43 दिन से पहले ही आपका सौदा हो जाय तो भी उपाय को अधूरा नही छोडना चाहिए! पूरा उपाय करके 43 बादाम जल-प्रवाह करने चाहिए! अन्यथा कार्य में रूकावट आ सकती है!
22. यदि आप ब्लड प्रेशर या डिप्रेशन से परेशान हैं तो :
इतवार की रात को सोते समय अपने सिरहाने की तरफ 325 ग्राम दूध रख कर सोंए! सोमवार को सुबह उठ कर सबसे पहले इस दूध को किसी कीकर या पीपल के पेड को अर्पित कर दें! यह उपाय 5 इतवार तक लगातार करें! होगा लाभ!
23. माईग्रेन या आधा सीसी का दर्द का उपाय:
सुबह सूरज उगने के समय एक गुड का डला लेकर किसी चौराहे पर जाकर दक्षिण की ओर मुंह करके खडे हो जांय! गुड को अपने दांतों से दो हिस्सों में काट दीजिए! गुड के दोनो हिस्सों को वहीं चौराहे पर फेंक दें और वापिस आ जांय! यह उपाय किसी भी मंगलवार से शुरू करें तथा 5 मंगलवार लगातार करें! लेकिन … .लेकिन ध्यान रहे यह उपाय करते समय आप किसी से भी बात न करें और न ही कोई आपको पुकारे न ही आप से कोई बात करे! अवश्य लाभ होगा!
24. फंसा हुआ धन वापिस लेने के लिए:
यदि आपकी रकम कहीं फंस गई है और पैसे वापिस नहीं मिल रहे तो आप रोज़ सुबह नहाने के पश्चात सूरज को जल अर्पण करें! उस जल में 11 बीज लाल मिर्च के डाल दें तथा सूर्य भगवान से पैसे वापिसी की प्रार्थना करें! इसके साथ ही “ओम आदित्याय नमः” का जाप करें!
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10 सिद्ध टोटके, जो दिलाए सभी संकटों से मुक्ति
10 Useful tone totke in Hindi :

कई बार ऐसा होता है कि बहुत प्रयास करने के बाद भी कोई काम नहीं बनता और यदि बन भी जाता है तो बनते-बनते बिगड़ जाता है। सफलता आते-आते आपके हाथों से फिसल जाती है। आखिर इसके पीछे कुछ तो कारण होगा?
माना जाता है कि पितृदोष, कालसर्प दोष और ग्रह-नक्षत्रों के बुरे प्रभाव के कारण कभी कोई सुख प्राप्त नहीं होता, तो कभी देवी-देवताओं के प्रति किए गए अपराध के चलते भी दुखों और समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह सब ठीक होने के बावजूद कभी-कभी वास्तुदोष के कारण भी व्यक्ति समस्याओं से घिरा रहता है। उपरोक्त कारणों के चलते व्यक्ति कर्ज में डूब जाता है, संतान सुख चला जाता है, गृहकलह बढ़ जाती है, धन-समृद्धि भी साथ छोड़ देती है, दरिद्रता पीछे लग जाती है, रोग और शोक भी परेशान करते रहते हैं। इस तरह की अन्य कई समस्याओं से व्यक्ति घिर जाता है।
आपके जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या हो और बिगड़े काम नहीं बन रहे हो तो ज्योतिषियों द्वारा बताए गए अद्भुत उपाय अपनाएं और बिगड़े काम बनाएं। विदेश यात्रा में अड़चन, उन्नति में रुकावट, धन प्राप्ति में कठिनाई, विवाह में विलंब आदि सभी तरह के कार्यों के समाधान के लिए यहां प्रस्तुत हैं ऐसे ही कुछ उपाय या टोटके जिसको करने से सभी तरह की सम्याओं से मुक्ति पाई जा सकती है।
हनुमान चालीसा :
o प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ें। मंगलवार या शनिवार के दिन हनुमानजी को चोला चढ़ाएं और उनको बनारसी पान का बीड़ा भी अर्पित करें। आपके बिगड़े काम फिर से बनने लगेंगे।
o हनुमान चालीसा पढ़ने से जहां पितृदोष, राहुदोष, मंगलदोष आदि दूर होते हैं वहीं भूत-प्रेतादि का बुरा साया भी हट जाता है। मंगल कामना और भावना से हनुमानजी से जुड़ने से वे सभी तरह के संकटों से मुक्ति दिला देते हैं।
गाय, कुत्ते, कौवे, पक्षी, चींटी को रोटी खिलाएं :
o प्रतिदिन गाय, कुत्ते, कौवे, पक्षी व चींटी को रोटी खिलाएं, आपके बिगड़े काम बनने लगेंगे। इससे सभी तरह की समस्याओं का समाधान होगा।
o गाय में सकारात्मक ऊर्जा का भंडार होता है। घर के आसपास गाय होने का मतलब है कि आप सभी तरह के संकटों से दूर रहकर सुख और समृद्धिपूर्वक जीवन जी रहे हैं। गाय को प्रतिदिन भोजन कराने से घर में धन-समृद्धि और शांति बढ़ती है। गाय को खिलाने से घर की पीड़ा दूर होगी।
o कुत्ता आपको राजा से रंक और रंक से राजा बना सकता है। कुत्ते को खिलाने से दुश्मन आपसे दूर रहेंगे। कुत्ते को प्रतिदिन भोजन देने से जहां दुश्मनों का भय मिट जाता है, वहीं व्यक्ति निडर हो जाता है। कुत्ता पालने से लक्ष्मी आती है और कुत्ता घर के रोगी सदस्य की बीमारी अपने ऊपर ले लेता है। पितृ पक्ष में कुत्तों को मीठी रोटी खिलानी चाहिए।
o कौवे को भोजन कराने से सभी तरह का पितृ और कालसर्प दोष दूर हो जाता है। कौवे को भोजन कराने से अनिष्ट व शत्रु का नाश होता है। शनि को प्रसन्न करना हो तो कौवों को भोजन कराना चाहिए।
o पक्षी को खिलाने से व्यापार-नौकरी में लाभ होता है, घर में खुशियां बढ़ती हैं और व्यक्ति समृद्धि के द्वार खोल देता है। इसके अलावा चींटी को शकर मिलाकर आटा खिलाने से कर्ज समाप्त होगा और मछली को खिलाने से समृद्धि बढ़ेगी। समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति के लिए कबूतरों को चावल डालें, बाजरा शुक्रवार को खरीदें व शनिवार से डालना शुरू करें।
गृहकलह से बचने के लिए :
o घर के पूजा स्थान पर घी का दीपक जलाएं। कपूर और अष्टगंध की सुगंध प्रतिदिन घर में फैलाएं। गुरुवार और रविवार को गुड़ और घी मिलाकर उसे कंडे पर जलाएं, इससे भी सुगंधित वातावरण होगा।
o रात्रि में सोने से पहले घी में तर किया हुआ कपूर जला दें। इसे तनावमुक्ति होगी और गहरी नींद आएगी। शरीर को हमेशा सुगंधित और साफ-सुथरा बनाए रखें।
o महीने में 2 बार किसी भी दिन घर में उपले जलाकर लोबान या गूगल की धूनी देने से घर में ऊपरी हवा का बचाव रहता है तथा बीमारी दूर होती है, साथ ही गृहकलह भी शांत हो जाता है।
o सुगंध हमारी भावनाओं से जुड़ा हुआ और बहुत हद तक यह हमारे मस्तिष्क को प्रभावित करता है। सुगंधित वातावरण बना रहने से मस्तिष्क प्रसन्नचित्त और शांत रहता है जिसके चलते घर में गृहकलह नहीं होती है। सुगंध से वास्तुदोष का निवारण भी होता है।
खुशियां बढ़ाने के लिए :
o घर की दीवारों पर लगे चित्रों को बदलें। ऐसा कोई-सा भी चित्र न लगाएं जिससे आपकी भावनाएं विकृत होती हों। दीवार पर लगा प्रकृति का चित्र या हंसमुख परिवार का चित्र आपके जीवन में खुशियां बढ़ा सकने में सक्षम है।
o बैठक रूम, बेडरूम, किचन, स्टडी रूम, बरामदे आदि जगहों पर किसी वास्तुशास्त्री से पूछकर ही कोई चित्र या पेंटिंग लगाएं। एक चित्र आपका जीवन बदल सकता है। घर में ढेर सारे देवी और देवताओं के चित्र या मूर्तियां न रखें।
संकटों से बचने के उपाय :
o यदि आप संकटों से जूझ रहे हैं, बार-बार एक के बाद एक कोई न कोई संकट से आप घिर जाते हैं तो किसी की शवयात्रा में श्मशान से लौटते वक्त कुछ सिक्के पीछे फेंकते हुए आ जाएं।
o स्नानादि से निवृत्त होने के बाद हनुमानजी के मंदिर जाकर उनसे जाने-अनजाने किए गए पापों की क्षमा मांग लें, तुरंत ही संकटों से मुक्ति मिलना शुरू हो जाएगी।
o कांसे की कटोरी में तेल भरकर उसमें अपनी परछाई देखें और यह तेल किसी मंदिर में दान कर दें। 5 तरह के फल ले जाकर किसी मंदिर में रख आएं।
संकटों से बचने के उपाय :
o यदि आप संकटों से जूझ रहे हैं, बार-बार एक के बाद एक कोई न कोई संकट से आप घिर जाते हैं तो किसी की शवयात्रा में श्मशान से लौटते वक्त कुछ सिक्के पीछे फेंकते हुए आ जाएं।
o स्नानादि से निवृत्त होने के बाद हनुमानजी के मंदिर जाकर उनसे जाने-अनजाने किए गए पापों की क्षमा मांग लें, तुरंत ही संकटों से मुक्ति मिलना शुरू हो जाएगी।
o कांसे की कटोरी में तेल भरकर उसमें अपनी परछाई देखें और यह तेल किसी मंदिर में दान कर दें। 5 तरह के फल ले जाकर किसी मंदिर में रख आएं।
o घर से किसी भी कार्य के लिए निकलते समय पहले ‘श्री गणेशाय नम:’ बोलें फिर विपरीत दिशा में 4 पग जाएं, इसके बाद कार्य पर चले जाएं, कार्य जरूर बनेगा।
o घर से निकलते वक्त गुड़ खाकर व थोड़ा-सा पानी पीकर निकलें, तो कार्य में सफलता मिलेगी। इसके अलावा घर की देहली के बाहर कुछ काली मिर्ची के दाने बिखेर दें और उस पर से पैर रखकर निकल जाएं फिर पीछे पलटकर न देंखे। उक्त उपाय से बिगड़े कार्य बन जाएंगे।
कपड़े पहनें रंगदार और साफ-सुथरे :
o कार्य में रुकावट या सफलता में आपके घर और कपड़े के रंग का भी बहुत योगदान रहता है। कभी भी हल्के, काले, कत्थई, भूरे और मटमैले रंग के कपड़े न पहनें। अधिकतर सफेद, नीले, लाल, हरे और गुलाबी रंग के कपड़े ही पहनें।
पीपल और बरगद की पूजा करें :
o कोई काम न बन रहा हो तो 19 शनिवार तक आप पीपल के पेड़ में धागा लपेटें और तिल के तेल का ही दीया जलाएं। इस दीये में 11 दाने काली उड़द के जरूर रखें। इसके अलावा प्रतिदिन संध्या को पीपल में घी का दीया जलाकर रखें। ध्यान रखें कि पीपल को शनिवार को ही छुएं।
o ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या तिथि के दिन वटवृक्ष की पूजा का विधान है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन वटवृक्ष की पूजा से सौभाग्य एवं स्थायी धन और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
o बरगद के पेड़ को वट का वृक्ष कहा जाता है। शास्त्रों में वटवृक्ष को पीपल के समान ही महत्व दिया गया है। पुराणों में यह स्पष्ट लिखा गया है कि वटवृक्ष की जड़ों में ब्रह्माजी, तने में विष्णुजी और डालियों एवं पत्तों में शिव का वास है। इसके नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा कहने और सुनने से मनोकामना पूरी होती है।
o हिन्दू धर्मानुसार 5 वटवृक्षों का महत्व अधिक है। अक्षयवट, पंचवट, वंशीवट, गयावट और सिद्धवट के बारे में कहा जाता है कि इनकी प्राचीनता के बारे में कोई नहीं जानता। संसार में उक्त 5 वटों को पवित्र वट की श्रेणी में रखा गया है। प्रयाग में अक्षयवट, नासिक में पंचवट, वृंदावन में वंशीवट, गया में गयावट और उज्जैन में पवित्र सिद्धवट है।
o ।।तहं पुनि संभु समुझिपन आसन। बैठे वटतर, करि कमलासन।।
भावार्थ- अर्थात कई सगुण साधकों, ऋषियों यहां तक कि देवताओं ने भी वटवृक्ष में भगवान विष्णु की उपस्थिति के दर्शन किए हैं। -रामचरित मानस
बंद किस्मत खोले ताला :
o सबसे पहले आप ताले की दुकान पर किसी भी शुक्रवार को जाएं और एक स्टील या लोहे का ताला खरीद लें। लेकिन ध्यान रखें ताला बंद होना चाहिए, खुला नहीं। ताला खरीदते समय उसे न दुकानदार को खोलने दें और न आप खुद खोलें। ताला सही है या नहीं, यह जांचने के लिए भी न खोलें। बस, बंद ताले को खरीदकर ले आएं।
o उस ताले को एक डिब्बे में रखें और शुक्रवार की रात को ही अपने सोने वाले कमरे में बिस्तर के पास रख लें। शनिवार सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर ताले को बिना खोले किसी मंदिर या देवस्थान पर रख दें। ताले को रखकर बिना कुछ बोले, बिना पलटे वापस अपने घर आ जाएं।
o विश्वास और श्रद्धा रखें। जैसे ही कोई उस ताले को खोलेगा आपकी किस्मत का ताला भी खुल जाएगा। यह लाल किताब का जाना-माना प्रयोग है। अपनी किस्मत चमकाने के लिए इसे अवश्य आजमाएं…।
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इस गणेश मंत्र से मिलेगी मनचाही नौकरी::-
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नौकरी अगर मनचाही मिल जाए तो फिर क्या कहने। यदि आप भी चाहते हैं कि मनचाही जगह पर आपकी नौकरी लग जाए तो आपकी यह इच्छा पूरी हो सकती है। आपको सिर्फ नीचे लिखे गणेश मंत्र का जप विधि-विधान से करना है।

मंत्र

ऊँ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।

जप विधि:-


  • बुधवार के दिन सुबह जल्दी उठकर सर्वप्रथम स्नान आदि नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ वस्त्र पहनें।

  • इसके बाद गणेशजी की पूजा करें और उन्हें दुर्वा चढ़ाएं साथ ही लड्डूओं का भोग भी लगाएं।

  • इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश के आसन पर बैठें।

  • तत्पश्चात हरे पन्ने की माला से ऊपर लिखे मंत्र का जप करें।

  • इस मंत्र का प्रभाव आपको कुछ ही समय में दिखने लगेगा।