Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक, वर्णाश्रमव्यवस्था:

पति पत्नी गाड़ी के ऐसे पहिये होते है जो ऊँचे नीचे टेड़े मेढे रास्ते से होकर भी अपनी ज़िन्दगी की गाड़ी कितने आराम से खीचते है और उसमे नोक झोंक हँसी मज़ाक गुस्सा सब होता है । जो जरुरी भी है । वरना ज़िन्दगी नीरस लगने लगेगी । पति पत्नी की नोक झोंक का एक छोटा सा किस्सा

बीवी के जन्मदिन का तोहफ़ा हर साल का सबसे बड़ा सवाल होता है...
पति ने
तोहफे में घड़ी दी
बीवी: समय देखने से क्या मिलेगा… मेरा समय तो तभी से खराब हो गया जब मैंने तुमसे शादी करी।
पति : shocked
तोहफे में गह़ना दिया
बीवी: फालतू पैसों की बर्बादी करी… पुरानी डिजाइन के है। वैसे भी मैं कौन सा कुछ पहन पाती हूँ… आखिरी बार तो तुम्हारी बुआ के बेटी की शादी में 2 महिने पहले पहने थे।
पति : confused
तोहफे में मोबाइल दिया
बीवी: मेरे पास तो पहले से हैं, और वैसे भी तुम्हारा वाला ज्यादा अच्छा है।
पति: ठीक हैं, तो मैं बदल कर मेरे जैसा ला देता हूँ ।
बीवी: रहने दो, महंगा होगा। चोचले हैं… और ये मुझे देकर साबित क्या करना चाहते हो?
पति का सिर चकराया
तोहफे में रेशमी साड़ी दी
बीवी: ये कौन पहनता है आजकल? कभी कभार किसी त्योहार या शादी ब्याह में पहनेंगे फिर रखी रहेगी।
पति के दिमाग का दही
तोहफे में सूट दिया
बीवी: फिर पैसों की बर्बादी… इतने सारे सूट पड़े पड़े सड़ रहे हैं। इसको भी रखने का सिर दर्द ले आए…
पति के सिर मे दर्द
तोहफे में गुलदस्ता दिया
बीवी: ये फूल पत्ती में क्यों पैसे बहा आए? इससे अच्छे फूल तो बाहर गमले में लगे है।
पति बाहर गमले से फूल ले आया
बीवी: ये क्यों तोड़ दिया? दिखने में कितने अच्छे
लगते थे और वैसे भी मैंने इसे कल सुबह की पूजा के लिए छोड़ा था।
पति की हालत खराब
तोहफे में कुछ नहीं दिया
बीवी: आज क्या दिन है?
पति : रविवार
बीवी: हम्म…. तारीख?
पति : 22 जनवरी
बीवी: तो??!
पति : तो, हैप्पी बर्थडे!!!
बीवी: बस!!! मेरा तोहफ़ा कहाँ है?
पति ?????😂😂😂😂😂
यही प्यार है इसलिये हसबैंड वाइफ इतना सब होते हुए भी एक दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ते । Agree….

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ठगने का नया तरीका


सावधान : ठगने का नया तरीका :-‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬
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एक दिन जब मै ड्राइविंग करते हुए जल्दी-जल्दी ऑफिस जा रहा था,
एक फोन आया जिसमें मुझे 3 घंटे के लिए फोन स्विच ऑफ करने के लिए कहा गया और बताया कि 4G अपलोड करने के लिए यह जरूरी है.

थोड़ी देर बाद जब किसी जरूरी फोन करने के लिए मैंने फोन स्विच ऑन किया तो देखा कि कई मिस कॉल आए हुए हैं और उस में सबसे ज्यादा मेरे घर से कॉल आए थे.

मैंने तुरंत घर फोन किया तो देखा कि घर के सारे लोग घबराए हुए हैं.

मुझे मालूम पड़ा कि उनके पास एक कॉल आया था जिसमें मुझे किडनैप किये जाने की सूचना थी और एक अच्छी रकम फिरौती के रूप में मांगी गई थी.

प्रमाण के लिए उन्हें मेरी आवाज भी सुनाई गई थी.

घरवालों ने कई बार मुझे फोन किया पर वह हमेशा स्विच ऑफ मिला.

मेरे पापा घबराकर अपहरणकर्ताओं के बताये खाते में पैसा ट्रांसफर करने के लिए बैंक गये हुये थे.

जब मैं पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचा तो मालुम हुआ कि सुबह से इस तरह के कई केस आ चुके हैं और कई लोगो ने जो पैसा ट्रांसफर कर दिया है, वह किसी विदेशी खाते में गया है और किसी कीमत पर वापस नहीं आ सकता।

(नोट : यह लेख एक पीड़ीत द्वारा भेजी गयी शिकायत पर आधारित है।)

निष्कर्ष :
यह है माफिया का बिना किडनैप किये पैसा बनाने का नया, रिस्क फ्री तरीका।

अत: आप से आग्रह है कि जनहित में इस मैसेज को अवश्य प्रेषित करें।

अपना ज्यादा से ज्यादा ध्यान रखें।

ऐसा किसी के साथ हो,
उससे पहले ही सबको सतर्क करें।

निवेदक :-
सुरेश शुक्ला
डायरेक्टर जनरल
राष्ट्रीय अपराध जांच ब्यूरो
नागरिक अधिकार सुरक्षा परिषद

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Byश्री संजय सिन्हा*
कल दिल्ली से गोवा की उड़ान में एक सरदारजी मिले।
साथ में उनकी
पत्नि भी थीं।

सरदारजी की उम्र करीब 80 साल रही होगी। मैंने पूछा नहीं लेकिन सरदारनी भी 75 पार ही रही होंगी।

उम्र के सहज प्रभाव को छोड़ दें, तो दोनों करीब करीब फिट थे।

सरदारनी खिड़की की ओर बैठी थीं, सरदारजी बीच में और
मै सबसे किनारे वाली
सीट पर था।

उड़ान भरने के साथ ही सरदारनी ने कुछ खाने का सामान निकाला और सरदारजी की ओर किया। सरदार जी कांपते हाथों से धीरे-धीरे खाने लगे।

फिर फ्लाइट में जब भोजन सर्व होना शुरू हुआ तो उन लोगों ने राजमा-चावल का ऑर्डर किया।

दोनों बहुत आराम से राजमा-चावल खाते रहे। मैंने पता नहीं क्यों पास्ता ऑर्डर कर दिया था। खैर, मेरे साथ अक्सर ऐसा होता है कि मैं जो ऑर्डर करता हूं, मुझे लगता है कि सामने वाले ने मुझसे बेहतर ऑर्डर किया है।
अब बारी थी
कोल्ड ड्रिंक की।

पीने में मैंने कोक का ऑर्डर दिया था।

अपने कैन के ढक्कन को मैंने खोला और धीरे-धीरे पीने लगा।

सरदार जी ने कोई जूस लिया था।

खाना खाने के बाद जब उन्होंने जूस की बोतल के ढक्कन को खोलना शुरू किया तो ढक्कन खुले ही नहीं।

सरदारजी कांपते हाथों से उसे खोलने की कोशिश कर रहे थे।
मैं लगातार उनकी ओर देख रहा था। मुझे लगा कि ढक्कन खोलने में उन्हें मुश्किल आ रही है तो मैंने शिष्टाचार हेतु
कहा कि लाइए…
” मैं खोल देता हूं।”

सरदारजी ने मेरी ओर देखा, फिर मुस्कुराते हुए कहने लगे कि…

“बेटा ढक्कन तो मुझे ही खोलना होगा।

मैंने कुछ पूछा नहीं,
लेकिन
सवाल भरी निगाहों से उनकी ओर देखा।

यह देख,
सरदारजी ने आगे कहा

बेटाजी, आज तो आप खोल देंगे।

लेकिन अगली बार..?
कौन खोलेगा.?

इसलिए मुझे खुद खोलना आना चाहिए।

सरदारनी भी सरदारजी की ओर देख रही थीं।

जूस की बोतल का ढक्कन उनसे अभी भी नहीं खुला था।

पर सरदारजी लगे रहे और बहुत बार कोशिश कर के उन्होंने ढक्कन खोल ही दिया।

दोनों आराम से
जूस पी रहे थे।

मुझे दिल्ली से गोवा की इस उड़ान में
ज़िंदगी का एक सबक मिला।

सरदारजी ने मुझे बताया कि उन्होंने..
ये नियम बना रखा है,

कि अपना हर काम वो खुद करेंगे।
घर में बच्चे हैं,
भरा पूरा परिवार है।

सब साथ ही रहते हैं। पर अपनी रोज़ की ज़रूरत के लिये
वे सिर्फ सरदारनी की मदद ही लेते हैं, बाकी किसी की नहीं।

वो दोनों एक दूसरे की ज़रूरतों को समझते हैं

सरदारजी ने मुझसे कहा कि जितना संभव हो, अपना काम खुद करना चाहिए।

एक बार अगर काम करना छोड़ दूंगा, दूसरों पर निर्भर हुआ तो समझो बेटा कि बिस्तर पर ही पड़ जाऊंगा।

फिर मन हमेशा यही कहेगा कि ये काम इससे करा लूं,

वो काम उससे।

फिर तो चलने के लिए भी दूसरों का सहारा लेना पड़ेगा।

अभी चलने में पांव कांपते हैं, खाने में भी हाथ कांपते हैं, पर जब तक आत्मनिर्भर रह सको, रहना चाहिए।

हम गोवा जा रहे हैं,
दो दिन वहीं रहेंगे।

हम महीने में
एक दो बार ऐसे ही घूमने निकल जाते हैं।

बेटे-बहू कहते हैं कि अकेले मुश्किल होगी,

पर उन्हें कौन समझाए
कि
मुश्किल तो तब होगी
जब हम घूमना-फिरना बंद करके खुद को घर में कैद कर लेंगे।
पूरी ज़िंदगी खूब काम किया। अब सब बेटों को दे कर अपने लिए महीने के पैसे तय कर रखे हैं।

और हम दोनों उसी में आराम से घूमते हैं।

जहां जाना होता है एजेंट टिकट बुक करा देते हैं। घर पर टैक्सी आ जाती है। वापिसी में एयरपोर्ट पर भी टैक्सी ही आ जाती है।

होटल में कोई तकलीफ होनी नहीं है।

स्वास्थ्य, उम्रनुसार, एकदम ठीक है।

कभी-कभी जूस की बोतल ही नहीं खुलती।

पर थोड़ा दम लगाओ,

तो वो भी खुल ही जाती है।

मेरी तो आखेँ ही
खुल की खुली रह गई।

मैंने तय किया था
कि इस बार की
उड़ान में लैपटॉप पर एक पूरी फिल्म देख लूंगा।
पर यहां तो मैंने जीवन की फिल्म ही देख ली।

एक वो फिल्म जिसमें जीवन जीने का संदेश छिपा था।

“जब तक हो सके,
आत्मनिर्भर रहो।”
अपना काम,
जहाँ तक संभव हो,
स्वयम् ही करो।
———और😅
पसंद आए तो,
FORWARD करो।👍

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गर्मी की छुट्टी में कही कोई *समर कैंप* नहीं होते थे,‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬


गर्मी की छुट्टी में कही कोई समर कैंप नहीं होते थे,‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬
पुरानी चादर से छत के कोने पर ही टेंट बना लेते थे ,
क्या ज़माना था जब ऊंगली से लकीर खींच बंटवारा हो जाता था,
लोटा पानी खेल कर ही घर परिवार की परिभाषा सीख लेते थे।
मामा , मासी , बुआ, चाचा के बच्चे सब सगे भाई लगते थे, कज़िन क्या बला होती है कुछ पता नही था।
घर छोटा ही सही पर प्यार से गुजारा हो जाता था.

कंचे, गोटियों, इमली के चियो से खजाने भरे जाते थे,
कान की गर्मी से वज़ीर , चोर पकड़ लाते थे,
सांप सीढ़ी गिरना और संभलना सिखलाता था,
कैरम घर की रानी की अहमियत बतलाता था,
घर छोटा ही सही पर प्यार से गुजारा हो जाता था.

पुरानी पोलिश की डिब्बी तराजू बन जाती थी ,
नीम की निंबोली आम बनकर बिकती थी ,
बिना किसी ज़द्दोज़हद के नाप तोल सीख लेते थे ,
साथ साथ छोटों को भी हिसाब -किताब सिखा देते थे ,
माचिस की डिब्बी से सोफा सेट बनाया जाता था ,
पुराने बल्ब में मनीप्लान्ट भी सजाया जाता था ,
घर छोटा ही सही पर प्यार से गुजारा हो जाता था.

कापी के खाली पन्नों से रफ बुक बनाई जाती थी,
बची हुई कतरन से गुडिया सजाई जाती थी ,
रात में दादी-नानी से भूत की कहानी सुनते थे , फिर
डर भगाने के लिये हनुमान चालीसा पढते थे,
स्लो मोशन सीन करने की कोशिश करते थे ,
सरकस के जोकर की भी नकल उतारते थे ,
सीक्रेट कोड ताली और सीटी से बनाया जाता था ,
घर छोटा ही सही पर प्यार से गुजारा हो जाता था.

कोयल की आवाज निकाल कर उसे चिढ़ाते थे,
घोंसले में अंडे देखने पेड पर चढ जाते थे ,
गरमी की छुट्टी में हम बड़ा मजा करते थे ,
बिना होलिडे होमवर्क के भी काफी कुछ सीख लेते थे ,
शाम को साथ बैठ कर हमलोग देखा जाता था ,
घर छोटा ही सही पर प्यार से गुजारा हो जाता था……

जैसा भी था मेरा – तेरा बचपन बहुत हसीन था।

यादे कल की , बीते पल की.🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक, Hindu conspiracy

कैसे गांधी जी ने एक श्लोक और एक भजन को बदला देखें‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬‬

भारत में महाभारत का एक श्लोक अधूरा पढाया जाता है क्यों ??
शायद गांधी जी की वजह से।
“अहिंसा परमो धर्मः”
जबकि पूर्ण श्लोक इस तरह से है:-

“अहिंसा परमो धर्मः,धर्महिंसा तदैव च l

अर्थात – अहिंसा मनुष्य का परम धर्म है
और धर्म की रक्षा के लिए हिंसा करना उस से भी श्रेष्ठ है..🕉

#गांधी #जी ने सिर्फ इस ☝☝#श्लोक को ही नही बल्कि उसके अलावा भी उन्होंने एक प्रशिद्ध भजन को बदल दिया

-‘रघुपति राघव राजा राम’ इस प्रसिद्ध-भजन का नाम है.
.”राम-धुन” .
जो कि बेहद लोकप्रिय भजन था.. गाँधी ने बड़ी चालाकी से इसमें परिवर्तन करते हुए
अल्लाह
शब्द जोड़ दिया..
आप भी नीचे देख लीजिए..
असली भजन और गाँधी द्वारा बेहद चालाकी से किया गया परिवर्तन..
गाँधी का भजन
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम
सीताराम सीताराम,
भज प्यारे तू सीताराम
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सब को सन्मति दे भगवान…

** असली राम धुन भजन **
रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम
सुंदर विग्रह मेघश्याम
गंगा तुलसी शालग्राम
भद्रगिरीश्वर सीताराम
भगत-जनप्रिय सीताराम
जानकीरमणा सीताराम
जयजय राघव सीताराम
और बड़े-बड़े पंडित तथा वक्ता भी सब जगह गाते हैं यहां तक कि मंदिरो में भी उन्हें रोके कौन?
-अब सवाल ये उठता है कि गाँधी जी को ये अधिकार किसने दिया की,.. हमारे ‘श्रीराम को सुमिरन’ करने के भजन में ही अल्लाह को घुसा दे..
(अल्लाह का हमसे क्या संबंध?)
-इस भजन को जिन्होंने बनाया था उनका नाम था लक्ष्मणाचार्य
ये भजन
“श्री नमः रामनायनम”
नामक हिन्दू-ग्रन्थ से लिया गयाहै
परन्तु
मोहनदास-गाँधी ने इसमें किसकी आज्ञा से मिलावट की,
क्या उसने ‘लक्ष्मणाचार्यजी’ से अनुमति ली!
कोई भी हमारे धर्मग्रंथोंऔर पूजा पद्धिति भजनों में मिलावट करने का अधिकार रखता है?

हम आप लोगों से निवेदन करेंगे कि, गाँधी के इस मिलावट वाले भजन को तुरंत हटाएं और असली-भजन को गाएँ

आप इस मूव रामधुन भजन का अपमान बिलकुल भी न करें,
पोस्ट शेयर जरूर करें ताकि लोग जागरूक हो सकें। धन्यवाद

Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक आदमी की कार पार्किंग से चोरी हो गयी। दो दिन बाद देखा तो कार वापस उसी जगह पार्किंग में ही खड़ी थी।

अंदर एक लिफाफा था उसमे एक माफीनामा था…

“माँ की तबियत अचानक बिगड़ जाने से रातों रात बड़े अस्पताल लेकर जाना आवश्यक था।

लेकिन इतनी रात में और छुट्टियों के सीजन में गाडी मिली नहीं इसी वजह से आपकी गाड़ी को उपयोग में लेना पड़ा।

आपको तकलीफ देने के लिये खेद है….गाडी में जितना पेट्रोल था उतना ही है। उसका लाक भी ठीक करा दिया है |

आपको गाड़ी की मदद के एवज में कल रात “बाहुबली 2” सिनेमा की 5 टिकेट्स आपके परिवार के लिए कार में रखें हैं।

मुझे बड़े दिल के साथ माफ़ करिये ये विनती है आपसे..!!

चिट्ठी में स्टोरी ओरिजिनल लगने से और गाड़ी जैसी की तैसी वापस सही सलामत मिलने से परिवार शांत हो गया और दूसरे दिन “बाहुबली 2” देखने चला गया 4परिजन और एक मित्र; आखिर 6 लाख की गाड़ी वापस जो मिल गयी थी |

फिल्म देखकर रात को वापस लौटा तो घर का दरवाजा टूटा हुआ था। अंदर जाकर देखा तो सब कीमती सामान गायब था।
करीब 25-30 लाख की चोरी हो गयी थी |

बाहर टेबल पर एक लिफाफा था, जिसमे लिखा था,

“अब पता चला कि कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा..??”

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Santosh Singh

नयी पड़ोसन और नीला दुपट्टा !!

मोहल्ले में नयी बहुत ही खूबसूरत और जवान पड़ोसन आकर आबाद हुई, उसके दो छोटे बच्चे थे, उसका शौहर शक्ल से ही खुर्रांट और बदमिज़ाज लगता था, पड़ोसन की ख़ूबसूरती देखकर ही मोहल्ले के तमाम मर्दों की हमदर्दियां उसके साथ हो गयीं !

पड़ोसन ने धीरे धीरे मोहल्ले के घरों में आना जाना शुरू किया, मिर्ज़ा साहब और शेख साहब को अपनी अपनी बेगमों से पता चला कि उस खूबसूरत पड़ोसन का शौहर बहुत ही शक्की और खब्ती था ! वो पड़ोसन अपने शौहर से बहुत खौफ खाती थी, ये सुन कर दोनों मर्द हज़रात की निगाहें आसमान की ओर उठ गयीं, दिल ही दिल में शिकवा कर डाला कि या अल्लाह कैसे कैसे हीरे नाक़द्रों को दे दिए हैं !

एक दिन वो खूबसूरत पड़ोसन सब्ज़ी वाले की दुकान पर शेख साहब को मिली, उसने खुद आगे बढ़कर शेख साहब को सलाम किया, शेख साहब को अपनी क़िस्मत पर नाज़ हुआ, पड़ोसन बोली शेख साहब बुरा न माने तो आपसे कुछ मश्वरा करना था ? शेख साहब ख़ुशी से बावले हो गए, वजह ये भी थी कि उस पड़ोसन ने आम अनजान औरतों की तरह भाई नहीं कहा था, बल्कि शेख साहब कहा था !

शेख साहब ने बड़ी मुश्किल से अपनी ख़ुशी छुपाते हुए मोतबर अंदाज़ में जवाब दिया ” जी फरमाइए !” पड़ोसन ने कहा कि मेरे शौहर अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं, मैं इतनी पढ़ी लिखी नहीं हूँ, बच्चों के एडमिशन के लिए आपकी रहनुमाई की ज़रुरत थी !

वो आगे बोली कि यूं सड़क पर खड़े होकर बातें करना ठीक नहीं है, आपके पास वक़्त हो तो मेरे घर चल कर कुछ मिनट मुझे समझा दें, ताकि मैं कल ही बच्चों का एडमिशन करा दूँ ! ख़ुशी से बावले हुए शेख साहब चंद मिनट तो क्या सदियां बिताने को तैयार थे, उन्होंने फ़ौरन कहा कि जी ज़रूर चलिए !

शेख साहब पड़ोसन के साथ घर में दाखिल हुए, अभी सोफे पर बैठे ही थे कि बाहर स्कूटर के रुकने की आवाज़ सी आयी, पड़ोसन ने घबराकर कहा कि या अल्लाह लगता है मेरे शौहर आ गए, उन्होंने यहाँ आपको देख लिया तो वो मेरा और आपका दोनों का क़त्ल ही कर डालेंगे, कुछ भी नहीं सुनेंगे, आप एक काम कीजिये वो सामने कपड़ों का ढेर है, आप ये नीला दुपट्टा सर पर डाल लें और उन कपड़ों पर इस्त्री करना शुरू कर दें, मैं उनसे कह दूँगी कि इस्त्री वाली मौसी काम कर रही है !

शेख साहब ने जल्दी से नीला दुपट्टा ओढ़कर शानदार घूंघट निकाला और उस कपडे के ढेर से कपडे लेकर इस्त्री करने लगे, तीन घंटे तक शेख साहब ने ढेर लगे सभी कपड़ों पर इस्त्री कर डाली थी, आखरी कपडे पर इस्त्री पूरी हुई तब तक पड़ोसन का खुर्रांट शौहर भी वापस चला गया !

पसीने से लथपथ और थकान से निढाल शेख साहब दुपट्टा फेंक कर घर से निकले, जैसे ही वो निकल कर चार क़दम चले सामने से उनके पडोसी मिर्ज़ा साहब आते दिखाई दिए, शेख साहब की हालत देख कर मिर्ज़ा साहब ने पूछा “कितनी देर से अंदर थे ?” शेख साहब ने कहा “तीन घंटों से, क्योंकि उसका शौहर आ गया था, इसलिए तीन घंटों से कपड़ों पर इस्त्री कर रहा था !”

मिर्ज़ा साहब ने आह भर कर कहा “जिन कपड़ों पर तुमने तीन घंटे घूंघट निकाल कर इस्त्री की है उस कपड़ों के ढेर को कल मैंने चार घंटे बैठ कर धोया है, क्या तुमने भी नीला दुपट्टा ओढ़ा था ?”