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लोकतन्त्र पर काला धब्बा


25 जून/इतिहास-स्मृति

*लोकतन्त्र पर काला धब्बा*

संविधान के निर्माताओं की इच्छा थी कि भारत एक लोकतान्त्रिक देश रहे; पर 25 जून, 1975 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, उनके पुत्र संजय गांधी और उनकी धूर्त मंडली ने लोकतन्त्र के मुख पर कीचड़ पोत दी।

1971 में लोकसभा चुनाव और फिर पाकिस्तान से युद्ध में सफलता से इंदिरा गांधी का दिमाग सातवें आसमान पर चढ़ा था। वे उ.प्र. में रायबरेली से सांसद बनीं थी; पर उनके निर्वाचन क्षेत्र में हुई धांधली के विरुद्ध उनके प्रतिद्वन्द्वी राजनारायण ने प्रयाग उच्च न्यायालय में मुकदमा दायर कर दिया था। न्यायमूर्ति जगमोहन लाल सिन्हा ने साहसी निर्णय देते हुए इंदिरा गांधी के निर्वाचन को निरस्त कर उन पर छह साल तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबन्ध लगा दिया।

इंदिरा गांधी सर्वोच्च न्यायालय में चली गयीं। वहां से उन्हें इस शर्त पर स्थगन मिला कि वे संसद में तो जा सकती हैं; पर बहस और मतदान में भाग नहीं ले सकतीं। माता-पिता की अकेली संतान होने के कारण वे बचपन से ही जिद्दी थीं। उन्होंने त्यागपत्र देने की बजाय आंतरिक उपद्रव से निबटने के नाम पर आपातकाल लगा दिया। राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद तो उनके चमचे थे ही। उन्होंने 25 जून, 1975 की रात में कागजों पर हस्ताक्षर कर दिये।

वस्तुतः इसके लिए मंत्रिमंडल की सहमति आवश्यक थी; पर इंदिरा, संजय और उनके चमचों ने कुछ नहीं देखा। अगले दिन प्रातः मंत्रियों से हस्ताक्षर की औपचारिकता भी पूरी करा ली गयी। आपातकाल लगते ही नागरिकों के मूल अधिकार स्थगित हो गये। विपक्षी नेताओं को जेल में ठूंस दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। समाचार पत्रों पर सेंसरशिप लागू कर दी गयी। सारे देश में आतंक छा गया।

इसके बाद इंदिरा गांधी ने संविधान में ऐसे अनेक संशोधन कराये, जिससे प्रधानमंत्री पर कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता था। 39 वां संशोधन सात अगस्त, 1975 को संसद में केवल दो घंटे में ही पारित कर दिया गया। विपक्षी नेता जेल में थे और सत्ता पक्ष वाले आतंकित। ऐसे में विरोध कौन करता ? आठ अगस्त को यह राज्यसभा में भी पारित हो गया। नौ अगस्त, (शनिवार) को अवकाश के बावजूद सभी राज्यों की विधानसभाओं के विशेष सत्र बुलाकर वहां भी इसे पारित करा दिया गया। दस अगस्त ( रविवार) को राष्ट्रपति ने भी सहमति दे दी और इस प्रकार यह कानून बन गया।

इस तेजी का कारण यह था कि 11 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई होनी थी। नये कानून से इंदिरा गांधी न्यायालय से भी ऊंची हो गयीं और सुनवाई नहीं हो सकी। पूरा देश कांग्रेसी गुंडो की तानाशाही की गिरफ्त में आ गया; पर समय सदा एक सा नहीं रहता। धीरे-धीरे लोग आतंक से उबरने लगे। संघ द्वारा भूमिगत रूप से किये जा रहे प्रयास रंग लाने लगे। लोगों का आक्रोश फूटने लगा। आपातकाल और प्रतिबन्ध के विरुद्ध हुए सत्याग्रह में एक लाख से अधिक स्वयंसेवकों ने गिरफ्तारी दी। लोकतन्त्र की इस हत्या के विरुद्ध विदेशों में भी लोग इंदिरा गांधी से प्रश्न पूछने लगे।

इससे इंदिरा गांधी पर दबाव पड़ा। उसके गुप्तचरों ने सूचना दी कि देश में सर्वत्र शांति हैं और चुनाव में आपकी जीत सुनिश्चित है। इस भ्रम में इंदिरा गांधी ने चुनाव घोषित कर दिये; पर यह दांव उल्टा पड़ा। चुनाव में उसकी पराजय हुई और दिल्ली में जनता पार्टी की सरकार बन गयी। मां और पुत्र दोनों चुनाव हार गये। इस शासन ने वे सब असंवैधानिक संशोधन निरस्त कर दिये, जिन्होंने प्रधानमंत्री को न्यायालय से भी बड़ा बना दिया था। इस प्रकार इंदिरा गांधी की तानाशाही समाप्त होकर देश में लोकतन्त्र की पुनर्स्थापना हुई…✍🚩

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टीवी चैनेलो पर सबसे ज्यादा कांग्रेसी कहते है की 


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टीवी चैनेलो पर सबसे ज्यादा कांग्रेसी कहते है की

मोदी ने अपनी पत्नी को छोड़ दिया …
अब इन कांग्रेसियो की

भयावह सच्चाई जानिये …
नेहरु की पत्नी कमला नेहरु को टीबी हो गया था ..
उस जमाने में टीबी का दहशत ठीक ऐसा ही था

जैसा आज एड्स का है ..

क्योकि तब टीबी का इलाज नही था और

इन्सान तिल तिल तडप तडपकर पूरी तरह

गलकर हड्डी का ढांचा बनकर मरता था … और

कोई भी टीबी मरीज में पास भी नही जाता था

क्योकि टीबी सांस से फैलती थी … लोग पहाड़ी इलाके में बने टीबी सेनिटोरियम में

भर्ती कर देते थे …
नेहरु में अपनी पत्नी को युगोस्लाविया

[आज चेक रिपब्लिक] के प्राग शहर में दुसरे इन्सान के साथ सेनिटोरियम में भर्ती कर दिया ..
कमला नेहरु पुरे दस सालो तक अकेले

टीबी सेनिटोरियम में पल पल मौत का इंतजार करती रही .. लेकिन नेहरु दिल्ली में एडविना बेंटन के साथ इश्क करता था ..

मजे की बात ये की इस दौरान नेहरु कई बार ब्रिटेन गया लेकिन एक बार भी वो प्राग जाकर अपनी धर्मपत्नी का हालचाल नही लिया ..
नेताजी सुभाषचन्द्र बोस को जब पता चला

तब वो प्राग गये .. और डाक्टरों से और अच्छे इलाज के बारे में बातचीत की ..

प्राग के डाक्टरों ने बोला की स्विट्जरलैंड के

बुसान शहर में एक आधुनिक टीबी होस्पिटल है …..

जहाँ इनका अच्छा इलाज हो सकता है .. तुरंत ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने  उस जमाने में 70 हजार रूपये इकट्ठे किये और उन्हें विमान से स्विटजरलैंड के बुसान शहर में होस्पिटल में भर्ती किये …
लेकिन कमला नेहरु असल में मन से बेहद टूट चुकी थी ..
उन्हें इस बात का दुःख था की उनका पति उनके पास  पिछले दस सालो से हालचाल लेने तक नही आया और गैर लोग उनकी देखभाल कर रहे है …..
दो महीनों तक बुसान में भर्ती रहने के बाद

28 February 1936 को बुसान में ही कमला नेहरु की मौत हो गयी …

उनके मौत के दस दिन पहले ही नेताजी सुभाषचन्द्र ने नेहरु को तार भेजकर तुरंत बुसान आने को कहा था ..

लेकिन नेहरु नही आया … फिर नेहरु को उसकी पत्नी के मौत का तार भेजा गया ..

फिर भी नेहरु अपनी पत्नी के अंतिम संस्कार में भी नही आया .
अंत में स्विटजरलैंड के बुसान शहर में ही

नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने नेहरु की पत्नी

कमला नेहरु का अंतिम संस्कार करवाया …
कांग्रेसियों …

असल में वामपंथी इतिहासकारों ने

इस खानदान की गंदी सच्चाई ही

इतिहास की किताबो से गायब कर दी …….😡😡😡

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कॉग्रेसीयो के 70 साले के घोटालो से बनी कविता
*भारत का नया गीत*
*आओ बच्चों तुम्हे दिखायें,

 शैतानी कॉग्रेसी शैतान की… ।*

* कॉग्रेसी  नेताओं से बहुत दुखी है,

 जनता हिन्दुस्तान की…।।*
*बड़े-बड़े कॉग्रेसी नेता शामिल हैं, 

 घोटालों की थाली में ।*

*सूटकेश भर के चलते हैं,

 अपने यहाँ दलाली में ।।*
*देश-धर्म की नहीं है चिंता,

 चिन्ता निज सन्तान की ।*

* कॉग्रेसी नेताओं से बहुत दुखी है,

 जनता हिन्दुस्तान की…।।*
*चोर-लुटेरे भी अब देखो,

 सांसद और विधायक हैं।*

*सुरा-सुन्दरी के प्रेमी ये,

 सचमुच के खलनायक हैं ।।*
*भिखमंगों में गिनती कर दी,

 भारत देश महान की ।*

*नेताओं से बहुत दुखी है,

 जनता हिन्दुस्तान की…।।*
*जनता के आवंटित धन को,

 आधा मंत्री खाते हैं ।*

*बाकी में अफसर ठेकेदार,

 मिलकर मौज उड़ाते हैं ।।*
*लूट खसोट मचा रखी है,

 सरकारी अनुदान की ।*

* कॉग्रेसी  नेताओं से बहुत दुखी है,

 जनता हिन्दुस्तान की…।।*
* आरक्षण से थर्ड क्लास अफसर बन जाता, 

फर्स्ट क्लास चपरासी है,

*होशियार बच्चों के मन में,

 छायी आज उदासी है।।*
*गंवार सारे मंत्री बन गये,

 मेधावी आज खलासी है।*

*आओ बच्चों तुम्हें दिखायें,

 शैतानी कॉग्रेसी शैतान की…।।*
*कॉग्रेसी  नेताओं से बहुत दुखी है,

 जनता हिन्दुस्तान की…।*

✍——————-

मनु कुमार
🇮🇳🍂🍃🙏💞🙏🍃🍂 🇮🇳🇮🇳🇮 🇳 🇩 🇮 🇦

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मीरा कुमार अपना नाम Meera न लिखकर Meira मेइरा कुमार क्यों लिखती हैं ..

जानिए जरा ..!!
सोनिया के दरबार में जितने भी खान्ग्रेसी हैं ..

उनको दरबार में तभी एंट्री मिलती है जब वे ईसाई बन चुके होते हैं 
अनेक खान्ग्रेसी नेता …

सत्ता के लिए हिन्दू धर्म छोड़कर ईसाई बन चुके हैं 
ये अपना नाम थोड़ा सा ट्विस्ट करके लिखते हैं 

ताकि हिन्दू सा भी लगे और ईसाई जैसा भी 

हिन्दू मूर्ख बनते रहें 
इनके नाम की ट्विस्टिंग देखिये …
जैसे शीला दीक्षित Sheela न Sheila लिखती हैं 

शोभा ओझा जो शोभा थॉमस ओजा है 

Ojha को Oza लिखती है 

म_नीच तिवारी Tiwari को Tewary लिखता है 
ये सभी गौ माँस खाने वाले 

बीफ खाने वाले ईसाई हैं 
मेइरा Meira भी कन्वर्टेड ईसाई है 

न कि हिन्दू दलित
ऐसे लोग ईसाई बन चुके हैं 

फिर भी ये अनुसूचित जाति के बने रहकर 

हिन्दू दलितों का अधिकार मार रहे हैं 
ईसाईयों में कोई जाति व्यवस्था होती ही नहीं 

इसलिए अगर मेइरा कुमार ईसाई हैं तो इनको दलित कैसे कहा जा सकता है

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कांग्रेस का पूरा इतिहास ही सेक्स स्कैंडलों से भरा पड़ा है, जगजीवन राम भी इसी कारण नहीं बन पाए PM


कांग्रेस का पूरा इतिहास ही सेक्स स्कैंडलों से भरा पड़ा है, जगजीवन राम भी इसी कारण नहीं बन पाए PM

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रक्षासौदों में दलाली, ऐयाशी इस से कांग्रेस का इतिहास पूरा भरा पड़ा है

सिर्फ अभिषेक वर्मा का ही नहीं एक और मशहूर काण्ड कांग्रेस में हुआ है, और वो काण्ड जगजीवन राम से जुड़ा हुआ है, जो की भारत के तत्कालीन रक्षामंत्री थे
जगजीवन राम का बेटा ”सुरेश कुमार” एक बिगड़ी हुई अय्याश किस्म की औलाद था जिसने देश की रक्षा संबधी महत्वपूर्ण जानकारियों को चीन तथा पाकिस्तान को बेच दिया था !
तब 1970 से 1974 तक जगजीवन राम देश के रक्षामंत्री के रूप में काम किया करते थे, विदेशी गुप्तचर  एजेंसिया गुप्त सूचनाएं हासिल करने के लिए सुरेश कुमार को शराब तथा अय्याशी का पूरा इंतजाम किया करते थे !

इसी सिलसिले में उसने सुषमा नाम की विदेशी एजेंट से शारीरिक संबंध भी बनाए, ये सुषमा भी कांग्रेस से ही जुडी ही थी, और उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से इसका सम्बन्ध था

ये विदेशी एजेंटों के हाथों बिकी हुई थी, और नेताओं को फंसाने में विदेशी एजेंटों का साथ देती थी

विदेशी गुप्तचर एजेंसियों ने ब्लैकमेल करने के लिएसुरेश राम की अश्लील फोटो भी खिंच ली थी जिसके वजह से वह हर महत्वपूर्ण सूचना भारत विरोधी गुप्तचर संस्थाओं को दे देता था !

इन अश्लील चित्रों के लीक होने से जगजीवन राम को काफी अपमानित होना पडा था , तथा राजनैतिक कैरियर में नुकसान भी उठाना पडा था !

इंदिरा गाँधी चुनाव हार गयी थी, और कांग्रेस की तरफ से जगजीवन राम ही उभर कर सामने आ रहे थे, पर अपने बेटे सुरेश के स्कैंडल के कारण ही जगजीवन राम प्रधानमंत्री नहीं बन पाए, और उप प्रधानमंत्री ही रह गए
सुरेश भी कांग्रेस से ही जुड़ा हुआ था, और कांग्रेस का नेता था

कांग्रेस का इतिहास काफी दागी रहा है, और कांग्रेस के नेताओं ने ऐयाशी, पैसे के लिए कई कई बार देश से समझौता  किया है, जिसे भारत की बिकाऊ मीडिया देश से छुपाकर ही रखती है
नोट : नेहरू के ज़माने में इतने कैमरे इत्यादि नहीं थे, अन्यथा क्या होता इस बात का भी अंदाजा आप लगा सकते है I

उमेश कुमार निर्मलकर

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तो हुआ यूँ कि 4 जुलाई 1986 को राजीव गाँधी मारीशस की यात्रा पर निकल रहे थे, उसी दिन सुबह 6 बजे आकाशवाणी ने बाबू जगजीवन राम के निधन का दुखद समाचार प्रसारित किया। अब राजीव जी असमंजस में पड़ गए, दलितों की राजनीती करने वाली कांग्रेस का मुखिया एक कद्दावर दलित नेता की मृत्यु होने पर उनके घर न जाकर विदेश यात्रा पर निकल जाए और वहां तस्वीरें खिंचवाए ये तो अच्छा नहीं लगेगा, और राजीव एक खूबसूरत देश का दौरा निरस्त करने के मूड में एकदम नहीं थे 

खैर कांग्रेस रणनीतिकार कोई कच्ची गोली तो खेले नहीं थे, सो राजीव गाँधी से कहा गया कि आप अपनी यात्रा जारी रखिये, हम लोग बाबू  जगजीवन राम को आप के आने तक जीवित रखेंगे, आनन् फानन में जगजीवन राम के मृत शरीर को वेंटीलेटर पर लगाया गया और आकाशवाणी ने गलत समाचार प्रसारित करने के लिए खेद प्रकट कर लिया , देश में शोक की लहर ख़ुशी की बयार में परिवर्तित हो गयी , राजीव गाँधी मारीशस की यात्रा पर निकल गए वो दो दिन बाद वापस आये और तब बाबू जगजीवन राम को एक बार फिर से मृत घोषित किया गया 

यही वो कांग्रेस है जिसने बाबू जगजीवन राम की  बेटी मीरा कुमार को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किये है ।

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*तीन कांग्रेसियों की कहानी*

1. मुफ्ती मोहम्मद सैयद केंद्र में गृह मंत्री ||

December 8 1989 मुफ्ती की बेटी रूबिया सैयद का अफहरण|| *नतीजा 13 आतंकियों की रिहाई ||*

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2 . सेैफुदीन सौज .. पार्टी के वरिष्ट नेता ..

August 1991 को सौजी की बेटी नाहीदा सौज का अपरहण || 

*नतिजा जेल में बंद 7 आतंकियों की रिहाई ||*

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3 गुलाम नबी आजाद …तब कांग्रेस के सीएम उम्मीदवार .. अब राज्यसभा में विपक्ष के नेता ||

September 22,1991 आजाद के साले तासादुक्क का अपहरण ||

*नतीजा 21 आतंकियों की रिहाई ||*
आओ आज इन सबके महान कार्यों को याद करें ||

और हां पोस्ट शेयर करने में हिचकिचाहट हो तो धर्म परिवर्तन करने में ही भलाई है ||

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#कांग्रेस_मुक्त_भारत के सैकड़ों असंख्य कारणों में से कुछ : –


#कांग्रेस_मुक्त_भारत के सैकड़ों असंख्य कारणों में से कुछ : –
1- मैं रहन सहन से ईसाई संस्कृति से मुसलमान और गलती से हिंदू हूँ—: जवाहरलाल नेहरू

2-राम एक काल्पनिक पात्र हैं और राम भारत में कभी पैदा ही नहीं हुए: सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे में कांग्रेस

3-रामसेतु से किसी की आस्था वास्था नहीं जुड़ी है,अतः रामसेतु को तोड़ देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे में कांग्रेस

4-देश के संसाधनों पर अल्पसंख्यकों का पहला अधिकार है..पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

5-हिंदू आतंकवाद सैफरॉन टेररिज्म भगवा आतंकवाद शब्द के जनक पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे कांग्रेस के

6-कांग्रेस के हर कार्यालय में गाय काटी जाएगी और गौ मांस परोसा जाएगा। अखिलेश प्रताप सिंह (पूर्व कांग्रेसी विधायक और प्रवक्ता।)

7-हिंदुओं को गुलाम बनाने एवं अपने ही देश में दोयम दर्जे का नागरिक बनाने वाला कम्युनल वायलेंस बिल सोनिया गांधी की अध्यक्षता में बनाया गया था।

8-लोग मंदिर में लड़की छेड़ने जाते हैं। राहुल गांधी

9-26/11 के मुंबई हमले, RSS और हिंदुओं ने कराए थे दिग्विजय सिंह पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री

10-निर्दोष हिंदू साध्वी को जेल में डालकर निर्वस्त्र करके मुंह में गौ मांस खिलाने वाली जबरिया अश्लील फिल्में दिखाने वाली पार्टी कांग्रेस है ।

11- 7 नवम्बर 1966 में गोपाल अष्टमी के दिन गौ हत्या के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे संतो को पर गोली चलवाकर हजारो हिंदुओं की हत्या करवाने वाली पार्टी कांग्रेस। इस मामले को दबा दिया गया.

ऐसे सैकड़ो उदाहरण है, कुछ की बानगी सिर्फ इसलिए दी गई है क्योंकि ये कुछ कार्यकर्ताओं की गलती नहीं,यह वह कुत्सित हिंदू विरोधी मानसिकता है जो कांग्रेस के DNA में इसकी स्थापना के समय से ही भरी गई है,और कांग्रेस के पिंडदान तक ये कांग्रेसी हिन्दू मान्यताओं का मजाक बनाना,हिंदुओं की बेइज्जती करना जारी रखेंगे.. और इनका पिंडदान हम भारतीय ही करेंगे !

इतना सब कुछ होने के बाद भी यदि कोई हिन्दू कांग्रेस को वोट देता है तो मैं उसे यही सलाह दूंगा की वो अपना DNA टेस्ट करवाए !

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अचानक से.. रातोंरात..
महाकाल शासित मालवा की उर्वर भूमि से पैदा हुए किसान आंदोलन की जड़ें खोद कर सच जानना चाहते हैं.. ?

तो पढ़िए..
(कृपया वास्तविक अन्नदाता बंधु अन्यथा न लें.. यदि गहराई में जाएंगे, तो लेख को अपने समर्थन में पाएंगे)
पश्चिमी मप्र अर्थात मालवा और पूर्वी राजस्थान के दो जिलों से मिल कर अफीम उत्पादन का बड़ा क्षेत्र बनता है।

मप्र में मंदसौर, नीमच और रतलाम की जावरा तहसील तथा राजस्थान के प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में अफीम उत्पादन होता है।
जिन लोगों को जानकारी नहीं है उन्हें बता दूं कि अफीम उत्पादन के लिए सरकार से पट्टा लेना होता है। अर्थात एक निश्चित भूमि में निश्चित मात्रा में आप सरकार की अनुमति से अफीम उत्पादन कर सकते हैं।

इस क्षेत्र के किसान अपनी सीमा से अधिक उत्पादन कर लेते हैं। तय मात्रा सरकार को बेच दी जाती है और अतिरिक्त को तस्करों को बेचा जाता है। स्पष्ट है तस्करों से किसान को तगड़ी रकम मिलती है। कई बार तो सरकारी रेट से ५/७ गुना ज्यादा तक दो नंबर में प्राप्त होता है।
अफीम उत्पादन बहुत झंझट और जोखिम का काम है। मात्र सरकार को बेचने के लिए कोई पागल भी अफीम नहीं बोएगा। शीत ऋतु और ग्रीष्म ऋतु के बीच जब बसंत आता है तब जब सुबह सर्दी, दिन में हल्की गर्मी और देर रात से फिर सर्दी होती है तब अफीम के फल डोडे को चीरा लगाकर उसका दूध इकट्ठा किया जाता है। वही दूध अफीम है।अफीम निकलने के बाद डोडा सूख जाता है और उसमें से पोस्ता दाना या खसखस की प्राप्ति होती है। खसखस के बाद बचा हुआ डोडा चूरा नशेड़ी लोग उबाल कर चाय की तरह पीते हैं। अर्थात इस फसल में लीगल उत्पाद मात्र खसखस है।
दो नंबर की अफीम और डोडा चूरा की खुली बिक्री से इस क्षेत्र में गब्बर किसानों के एक खतरनाक वर्ग ने जन्म लिया जो क्षेत्र की सामाजिक संरचना को अपने शिकंजे में रखता है। इस वर्ग में सभी जातियों के किसान हैं। जो जाति कृषि क्षेत्र में अग्रणी है उसके तस्करों का प्रतिशत भी अधिक है। किंतु ये तस्कर प्रचलित तस्करों जैसे नहीं हैं। ये अपने खेत से बाहर निकल कर तस्करी नहीं करते।
यहाँ से इस खेल में मुसलमान एंट्री करता है और ब्राउन शुगर उत्पादन से लेकर हैरोइन बनाने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोहों तक मध्यस्थता करता है। डी कंपनी और पाकिस्तानी एजेंसियां इसमें गहराई तक घुसी हुई हैं।
आजतक इन गब्बर किसानों की श्वास नली अवरुद्ध करने का साहस किसी ने नहीं किया था। क्योंकि हवाला के हमाम में नंगी कॉन्ग्रेस और सेकुलर दलों की नसें ISI के हाथ में थी। हवाला रैकेट का केंद्र दुबई में है और बिना ISI की जानकारी के वहां से एक रुपया भी स्विस बैंक में नहीं जा सकता।
भाजपा के भ्रष्टाचार का धन अधिकतर भारत में ही खपा है इसलिए पूर्ण बहुमत हासिल होते ही हवाला की कमर तोड़ने पर मोदी सरकार तुल गई। इसके बाद डोडा चूरा प्रतिबंध लगाया और अफीम तस्करी पर इतनी तगड़ी घेराबंदी की कि अफीम उत्पादन से जुड़े गब्बरों की सांसें बंद होने लगी। पिछले कुछ महीनों से मंदसौर नीमच से बाहर एक किलो अफीम भी निकल नहीं पा रही थी। क्विंटलों डोडा चूरा सड़ रहा था। पुलिस ने बहुत सख्ती की हुई थी।
हार्दिक पटेल ने इस अवसर को भुनाने में देर नहीं की। हार्दिक पटेल जैसे लोग अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े खिलाड़ियों के देसी एजेंट हैं। इन खिलाड़ियों का प्रमुख उद्देश्य हर जगह अराजकता पैदा कर विध्वंसक स्थिति निर्मित करना और फिर वहां सरकार गिराकर अपने पिट्ठू बैठाना है। आज हार्दिक पटेल कॉन्ग्रेस में है जो कॉन्ग्रेस के लिए आत्महत्या का संकेत है।
किसान आंदोलन की आड़ में हिंसा और अराजकता पैदा करने का षड़यंत्र हार्दिक पटेल ने रचा जिसे अमली जामा पहनाने का काम किया अफीम तस्करों ने। मीडिया ने इसे पूरी तरह किसान से जोड़ दिया और प्रशिक्षित लोगों ने जनता में पाटीदार समाज को खलनायक घोषित किया।
इस षड़यंत्र को मालवा के परिपेक्ष्य में देखें। आंदोलन की आड़ में क्विंटलों अवैध अफीम और डोडा चूरा ठिकाने लग गया। गब्बरों के पास धन आ गया। पाकिस्तान को स्मैक और हैरोइन बनाने के लिए भारी मात्रा में कच्चा माल मिल गया। भविष्य में यही स्मैक और हैरोइन भारत की नसों में दौड़ाई जाएगी। आपके युवाओं को जिंदा लाश बना दिया जाएगा और इसका मूल दायित्व उन किसानों पर आएगा जो लोभ में अंधे हुए देशद्रोह जैसे घृणित अपराध को भी अपना मौलिक अधिकार मानते हैं। वो समाज भी इसका अपराधी है जो इन तस्करों को सम्मानित करता है।
शेष भारत के किसानों की भी समस्याएं हैं किंतु थाना जलाने के लिए पिपलिया मंडी में कौन गए ???

टी आइ को जान से मारने की घेराबंदी किसने की ???

वो लोग कौन थे जो भीड़ के पीछे मुंह पर कपड़ा लपेटे खड़े होकर अराजकता पैदा करते और आगजनी करके गायब हो जाते???

मृतकों में कुछ लोगों पर नारकोटिक्स विभाग के प्रकरण थे। वे फरार घोषित थे।

जरा किसी कॉन्स्टेबल से मित्रता कीजिए और पता कीजिए। असली कहानी इतनी सीधी नहीं है जितनी मीडिया ने बनाई है।

संजय द्विवेदी

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कांग्रेस और पाकिस्तान में समानताएँ –

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कांग्रेस कभी नहीं मानती कि उसने भ्रष्टाचार किया है और पाकिस्तान कभी नहीं मानता कि वो आतंकवाद का समर्थन करता है।
कांग्रेस हिंदुओं की शत्रु है और पाकिस्तान भी।
कांग्रेस इस देश को खोखला, कमज़ोर और बदनाम करने में लगी रही, पाकिस्तान भी यही करता है।
कांग्रेस का पाकिस्तान प्रेम और पाकिस्तान का कांग्रेस प्रेम किसी से छिपा नहीं है।
आतंकवादियों के मारे जाने पर सोनिया गांधी और कांग्रेसी रोते हैं पाकिस्तान भी रोता है।
कश्मीर में पत्थरबाजों और अलगाववादी नेताओं पर सख़्त कार्रवाई का विरोध कांग्रेस करती है और पाकिस्तान भी।
कश्मीर समस्या को उलझाकर रखने की कांग्रेस ने हमेशा कोशिश की और पाकिस्तान ने भी।
कांग्रेस को मोदी फूटी आँख नहीं सुहाते, पाकिस्तान को भी नहीं सुहाते।
कांग्रेस ने अपने सैनिकों को शहीद होने दिया या कहें कि उनकी हत्याएँ करवाईं लेकिन पाकिस्तान पर कभी कड़ी जवाबी कार्रवाई करने की छूट सेना को नहीं दी।
केंद्र और राज्य दोनों जगह कांग्रेस की सरकार थी और 26/11 जैसे भीषणतम आतंकी हमला भारत में हुआ और कांग्रेस ने बाक़ायदा किताब छापकर इसमें पाकिस्तान का हाथ होने की बजाय आरएसएस का नाम ले दिया।
जेएनयू में भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगाने वालों के समर्थन में राहुल गांधी जाकर खड़े हो जाते हैं, पाकिस्तान भी भारत के टुकड़े चाहता है।
कांग्रेस के नेता पाकिस्तान जाकर मोदी को हटाने के लिये मदद माँगते हैं।
अनेक देशद्रोही गतिविधियों में लिप्त NGOs को कांग्रेस राज में फंडिंग पाने और कामकाज करने की छूट थी, मोदी ने बंद करा दिए।
कांग्रेस ने अनेक राज्यों की सरकारें गिराई, जोड़तोड़ से सरकारें बनाई तब कभी लोकतंत्र की हत्या नहीं हुई लेकिन भाजपा ने किया तो उसे ये लोकतंत्र के लिए खतरा लगा। पाकिस्तान भी ऐसा ही करता है फिर जब सर्जिकल स्ट्राइक होती है तो इसे अपने ऊपर ख़तरा बताता है।
मोदी कूटनीति के तहत अचानक पाकिस्तान चले जाते हैं तो सारे कांग्रेसी और उसके हिमायती इस पर तंज कसते हैं लेकिन पाकिस्तान के 90 हज़ार सैनिकों को रिहा करने पर ये खामोश हो जाते हैं। ऐसी ही दोगलापंथी पाकिस्तान भी करता है।
गुजरात दंगों को लेकर कांग्रेस ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक बदनाम करने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ा, पाकिस्तान ने भी वही किया।