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इंदिरा का कमीनापन:
1981 में यूपी के पडरौना में इंदिरा गांधी की रैली थी
हेलीपेड से रैली स्थल तक ambassador कार में इंदिरा गांधी रवाना हुई लेकिन एंबेस्डर कार से उतरते समय उसके स्टील के मजबूत हैंडल में उनका शॉल फंस गया और उनका शॉल फट गया।
उनके पीए आर के धवन ने तुरंत ही दूसरा शॉल मैडम को दिया लेकिन इंदिरा गांधी ने आर के धवन से शॉल लेने से इंकार कर दिया और कहा कि मैं इस फटी हुई शॉल में ही रैली को संबोधित करूंगी ।
फिर वो मंच पर पहुंची भाषण दिया और जान-बूझकर अपना फटा हुआ शॉल पब्लिक के सामने की ओर रखा फिर भाषण के बीच में उन्होंने बोला यह जेपी, राजनारायण , चौधरी चरण सिंह, मुरारजी देसाई जैसे लोग कलफ लगा हुआ कुर्ता पहनते हैं और मुझे देखिए यह फटी हुई शॉल ही है मेरे पास और आपका प्यार और स्नेह ।
पब्लिक जैसे पागल हो गई तालियों की तड़तड़ाहट से पूरा मैदान गूंज उठा .. फिर इंदिरा गांधी अंबेस्डर कार में बैठकर हेलीपैड पर गई फिर हेलीकॉप्टर से गोरखपुर गई फिर गोरखपुर से प्लेन से दिल्ली रवाना हो गई।
कसम से यह पूरा खानदान नौटंकीबाजो का है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी इनकी नौटंकी चलती रहती है न जाने कब हम भारतीय इस नीच खानदान की सच्चाई समझेंगे और इन्हें भारत से मार भगाएंगे।
🇮🇳🇮🇳🇮🇳सुभाष चंद्र गोहल

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कोई पत्रकार राहुल गांधी से यह नहीं पूछ रहा कि राहुल जी जब तक नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री नहीं बने थे तब तक आप की नानी आपकी दोनों मौसी दोनों मौसी के पति बच्चे यानी आप का इटली का पूरा खानदान दिल्ली में रहता था उनको 3 सरकारी बंगले किस हैसियत से इलाट किए गए थे और वह किस हैसियत से तमाम सरकारी कार्यक्रम में शामिल होते थे ??

और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के 15 दिन के बाद यह पूरा माइनों खानदान किसी चोर की तरह इटली क्यों चला गया ??

आज राहुल गांधी नानी से मिलने के बहाने बार-बार इटली आते हैं लेकिन कभी 10 साल कांग्रेस के सत्ता के दौरान और उसके पहले जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे तब यह धूर्त इटली नहीं जाते थे क्योंकि सोनिया गांधी के मायके का पूरा खानदान दिल्ली में रहता था और लुटियंस जोन में पांच बंगले उन्हें रहने को दिए गए थे

यहां तक कि सोनिया गांधी के बचपन का दोस्त क्वात्रोची भी सोनिया गांधी के साथ रहता था सोनिया गांधी की मां पाउलो माइनो सरकारी कार्यक्रम में भाग लेती थी राष्ट्रपति भवन में कई सरकारी कार्यक्रम में शामिल होती थी पूरी सरकारी मशीनरी उनके आगे पीछे घूमती थी
सोनिया गांधी की तीन बहने हैं जिसमें से दो बहने तो भारत में ही रहती थी और एक बहन का रोम और मिलान में बहुत बड़ा एंटीक स्टोर है

और कई पुरातत्वविद ने इस बात का खुलासा किया था कि भारत से कई म्यूजियम में दुर्लभ चीजों को प्रदर्शनी के बहाने विदेश ले जाया जाता था और फिर वहां बड़े नाटकीय ढंग से उन्हें चोरी हुआ दिखा दिया जाता था और बाद में पता चलता था कि वह सोनिया गांधी के बहन के स्टोर में बिकने के लिए गया है

इस तरह से भारत की तमाम बेशकीमती दुर्लभ मूर्तियां तमाम आर्टीफैक्ट्स विदेशों में प्रदर्शनी के बहाने ले जाए गए और वहां चोरी की नौटंकी बता कर सोनिया गांधी के बहन के स्टोर में पहुंचा दिया गया था,

काशी गुप्ता

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कोई पत्रकार राहुल गांधी से यह नहीं पूछ रहा कि राहुल जी जब तक नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री नहीं बने थे तब तक आप की नानी आपकी दोनों मौसी दोनों मौसी के पति बच्चे यानी आप का इटली का पूरा खानदान दिल्ली में रहता था उनको 3 सरकारी बंगले किस हैसियत से इलाट किए गए थे और वह किस हैसियत से तमाम सरकारी कार्यक्रम में शामिल होते थे ??

और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के 15 दिन के बाद यह पूरा माइनों खानदान किसी चोर की तरह इटली क्यों चला गया ??

आज राहुल गांधी नानी से मिलने के बहाने बार-बार इटली आते हैं लेकिन कभी 10 साल कांग्रेस के सत्ता के दौरान और उसके पहले जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे तब यह धूर्त इटली नहीं जाते थे क्योंकि सोनिया गांधी के मायके का पूरा खानदान दिल्ली में रहता था और लुटियंस जोन में पांच बंगले उन्हें रहने को दिए गए थे

यहां तक कि सोनिया गांधी के बचपन का दोस्त क्वात्रोची भी सोनिया गांधी के साथ रहता था

सोनिया गांधी की मां पाउलो माइनो सरकारी कार्यक्रम में भाग लेती थी राष्ट्रपति भवन में कई सरकारी कार्यक्रम में शामिल होती थी पूरी सरकारी मशीनरी उनके आगे पीछे घूमती थी

सोनिया गांधी की तीन बहने हैं जिसमें से दो बहने तो भारत में ही रहती थी और एक बहन का रोम और मिलान में बहुत बड़ा एंटीक स्टोर है

और कई पुरातत्वविद ने इस बात का खुलासा किया था कि भारत से कई म्यूजियम में दुर्लभ चीजों को प्रदर्शनी के बहाने विदेश ले जाया जाता था और फिर वहां बड़े नाटकीय ढंग से उन्हें चोरी हुआ दिखा दिया जाता था और बाद में पता चलता था कि वह सोनिया गांधी के बहन के स्टोर में बिकने के लिए गया है

इस तरह से भारत की तमाम बेशकीमती दुर्लभ मूर्तियां तमाम आर्टीफैक्ट्स विदेशों में प्रदर्शनी के बहाने ले जाए गए और वहां चोरी की नौटंकी बता कर सोनिया गांधी के बहन के स्टोर में पहुंचा दिया गया था।

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11 भविष्यवाणियां सत्य होती दिख रहीं हैं..!

1. एक दिन आएगा जब वोट के लिए कांग्रेसी नेता कोट पर जनेऊ पहनेंगे ~ सावरकर जी १९५९

2. एक दिन पूरे देश पर भाजपा का राज होगा
~ अटल जी १९९९ संसद में

3. मैं कांग्रेस मुक्त भारत करके रहूंगा ~ मोदी जी २०१०

4. मै आज कांग्रेस छोड रहा हूं , पर मै शपथ लेता हूं कि मै इसी कांग्रेसी विचारधारा के विरुद्ध ऐसा संगठन खडा करूंगा जो इसका नामोनिशान मिटाकर रख देगा , चाहे इसके लिये 100 साल क्यों न लगे , 800 साल की गुलामी मे 100 साल और सही पर यही संगठन भारत को फिर अखंड भारत बनाकर रहेगा …

— प. पू. केशव बलिराम हेडगेवार , संस्थापक एवं प्रथम सरसंघचालक
१९२२
नागपुर

5. अगर मैं प्रधानमंत्री बना तो सबसे पहले काले धन और आतंकवाद को समाप्त करने के लिये 500 और 1000 के नोट अचानक बंद कर दूंगा
— नरेंद्र मोदी , २००७ , गुजरात में

6. भारत सरकार 500 और 1000 के नोट अचानक बंद करें , देश की आधी समस्या कुछ ही साल मे खत्म हो जायेंगी

— बाबा रामदेव २००६ से २०१३ तक कई बार कहा

7. जिस दिन मरा हुवा हिंदुत्व गर्व से कहेगा मैं हिंदु हूं उस दिन अमेरिका भी भारत की परंपराओं के सामने नतमस्तक होगा और कहेगा कि फलां देश को समझाओ
— स्वामी विवेकानन्द , १८९३ , शिकागो , अमेरिका में
( सनद रहे दो दिन पहले UN ने भारत से कहा है कि उत्तर कोरिया का इलाज सिर्फ भारत कर सकता है , अमेरिका नहीं)

8. आज गौहत्याबंदी आंदोलन मे संसद के सामने इंदिरा गांधी ने एक घंटे में 400 साधुओं को गोली चलाकर मार डाला
मैं कांग्रेस पार्टी को श्राप देता हूं कि एक दिन हिमालय मे तपश्चर्या कर रहा एक साधू आधुनिक वेशभूषा मे इसी संसद को कब्जा करेगा और कांग्रेसी विचारधारा को नष्ट कर देगा …यह एक ब्राह्मण का श्राप है और ब्राह्मण का श्राप कभी खाली नहीं जाता ..

— करपात्री महाराज , संसद के सामने रोते और साधुवों की लाशें उठाते हुवे , १९६६

9. कांग्रेस पार्टी वोटबैंक के लिये इतनी नीचे गिर जायेगी कि वो JNU जैसे नेहरू के वामपंथी सेक्स केंद्र के नारों का समर्थन करेगी और गौहत्या का समर्थन खुलेआम करेगी
स्वयं को नक्सली साबित करेगी

— डॉ सुब्रमण्यम स्वामी , आप की अदालत में ,२००९

10. कांग्रेस को मै खत्म करूंगा , एक ऐसा आदमी (मोदी) संघ से निकालूंगा जो कांग्रेस का अंतिम संस्कार करेगा
– डॉ सुब्रमण्यम स्वामी , १९८४ , संसद में जब उनका Citizen Charted प्रस्ताव नकारा गया

11. नरेंद्र मोदी ही भारत का भविष्य है , 2002 , गुजरात दंगों का दोष उसपर मत दो , वो निष्पाप है , अटलजी और RSS को कहता हूं वे उन्हें continue करें वरना भारत से हिंदुत्व खत्म हो जायेगा

— बालासाहब ठाकरे , 6 जून 2002 , उसके बाद 9 जून को अटलजी ने गोवा में नरेंद्र मोदी जी को continue किया , वरना आज हमें ऐसा PM नहीं मिलता

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हिस्ट्री कैसे बदली गयी है
1971 में इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बने रहने के लिए वामपंथी लोगों से मदद चाहिए थी। समझौता यह हुआ कि आप प्रधानमंत्री बनी रहो और हमारे लोगों को देश का शिक्षा बोर्ड दे दो।
कट्टर वामपंथी विचारधारा वाले डा. नूरूल हसन को केन्द्रीय शिक्षा राज्यमंत्री का पद सौंपा गया था, जिसने प्राचीन हिन्दू इतिहास तथा पाठ्य पुस्तकों के विकृतिकरण का बीड़ा उठा लिया।
1972 में इन सैकुलरवादियों ने “भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद” का गठन कर इतिहास पुनर्लेखन की घोषणा की और सुविख्यात इतिहासकार यदुनाथ सरकार, रमेश चंद्र मजूमदार तथा श्री जी.एस. सरदेसाई जैसे सुप्रतिष्ठित इतिहासकारों के लिखे ग्रंथों को नकार कर नये सिरे से इतिहास लेखन का कार्य शुरू कराया गया।
घोषणा की गई कि इतिहास और पाठ्यपुस्तकों से वे अंश हटा दिये जाएँगे जो राष्ट्रीय एकता में बाधा डालने वाले और मुसलमानों की भावना को ठेस पहुँचाने वाले लगते हैं।
डा. नूरूल हसन ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भाषण करते हुए कहा- महमूद गजनवी औरंगजेब आदि मुस्लिम शासकों द्वारा हिन्दुओं के नरसंहार एवं मंदिरों को तोड़ने के प्रसंग राष्ट्रीय एकता में बाधक है अत: उन्हें नहीं पढ़ाया जाना चाहिए।
वामपंथियों ने भारतीय स्वाधीनता संग्राम के महान स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर पर अंग्रेजों से क्षमा माँगकर, अण्डमान के काला पानी जेल से रिहा होने जैसे निराधार आरोप लगाये और उन्हें वीर की जगह ‘कायर’ बताने की बात लिखीं 📷📷
देश का इससे बड़ा दुर्भाग्य कुछ हो नहीं सकता है कि बच्चे यह नहीं पढ़ पा रहे हैं कि औरंगजेब ने किस तरह से देश में हिन्दुओं का कत्लेआम करवाया था। इन लेखकों ने यह तो लिख दिया कि गांधी की हत्या नाथूराम ने की थी किन्तु यह नहीं बताया कि गुरू गोविन्द जी कैसे शहीद हुए थे।
सबसे बड़ा मजाक यह है कि स्कूल की किताबों में कौन सा लेखक क्या लिख रहा है इसकी जाँच करने के लिए कोई भी बोर्ड नहीं है. कोई लिखता है कि “राम नहीं थे तो कोई महाभारत को एक कहानी लिखता है”!! किन्तु एक खास धर्म से पंगा नहीं लेता है।
आज भी कांग्रेस की दया के चलते ही कई वामपंथी लोग शिक्षा बोर्ड पर कब्जा किये बैठे हैं।
इसी योजना के तहत JNU जैसे अनेक तथाकथित ‘स्वायत्त’ विश्वविद्यालयों की स्थापना करके भी उन्हें वामपंथियों को सौंप दिया गया जो आज देशविरोधी जहर उगलने वाले ‘बच्चों’ का पोषण कर रहे हैं। इस विषय में केंद्र सरकार को एक आयोग बनाकर “इनके गठन के उद्देश्यों की पूर्ति” की जाँच करवाकर कार्यवाही करनी चाहिए !
जहाँ मदरसों में मुगल काल की स्वर्णिम गाथाएं गाकर, मुस्लिम बच्चों में श्रेष्ठता की भावना भरी जाती है वहीं हिंदुओं को या तो दीन-हीन बना रहे है या सेक्युलर …..

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WITH LOVE TO RAHUL GANDHI:

इनका पुरखा था बड़ा महान, सुन्दर कन्याएं थी जिसकी जान ?
अंग्रेज़ की पत्नी का संग पाया, आज़ाद देश को गुलाम बनाया ?
यही था वो इंसान जिसकी वजह से कश्मीर में बैठे हैं चीन-पाकिस्तान ?
दूजे नंबर पर थी उसकी बेटी प्यारी, लाल मिर्च की थी तरकारी ?
जब भी सत्ता पर खतरा पाती, झट से वो आपातकाल लगाती ?
करती थी वो बड़ी लडाई, मूक बधिर राष्ट्रपति की प्रथा चलायी ?
जब उसने किया धर्म पर वार, वीरों ने किया उसका संहार ?
तीजे नंबर पर था उसका बेटा प्यारा, विमान वाहक था अति न्यारा ?
अल्हड़पन में होश गवाया, इतालवी चोर की छोरी ब्याह लाया ?
हमदर्दी में बना पंत-प्रधान, पर तोप और खातो ने घटाई शान ?
एक दिन मिल गयी मिट्टी में काया, शहीद होकर सम्मान बचाया ?
चौथे नंबर पर है उसकी नारी, चापलूस गुलामों की दुलारी ?
इसको अल्पसंख्यक लगते बड़े प्यारे बंगलादेश से बुला लिए सारे ?
दिन रात करती है नोट छपाई, दामाद करता है उसकी सप्लाई ?
देर रात संत पिटवाये , हिन्दू विरोधी कानून बनाये ?
करती है ऐसे घोटाले न्यारे , पिछले रिकार्ड तोड़ दिए हैं सारे ?
त्यागी होने का स्वांग रचाया, नपुंसक को प्रधान बनाया ?
अब भी कर रही है अपना काम और जनता कर रही है आराम ?
पांचवा है उसका बेटा प्यारा, गुलामों का युवराज दुलारा ?
बबलू भोंदू मंदबुद्धि जैसे इसने नाम कमाए ?
फिर भी मूर्ख कृत्य किये जाए, 42 में भी है जवान, ?
थामना चाहता है देश की कमान, ?
जहाँ यह जाता पार्टी के लिए पनौती बन जाता ?
ड्रामा कंपनी के कहे पर चलता है, घडी घडी अपना धर्म बदलता है ?
आदमी है आदमी से प्रेम करता है यही है इसके कुंवारेपन का राज़, ?
इनके राज उद्द्योगपति हो गए सांड, मीडिया बन गया भांड ?
मेरे मित्रों इनकी बातों में ना आना, इन्हें चुनकर ना गद्दार कहलाना ?

Posted in खान्ग्रेस, छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक, नहेरु परिवार - Nehru Family, भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

गुजरात के एक जैन व्यापारी वालचंद हीराचंद ने 1940 में मैसूर के राजा के साथ पार्टनरशिप करके बेंगलुरु में एरोप्लेन बनाने की एक फैक्ट्री डाली जिसका नाम उन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स रखा। कंपनी काफी फायदे में जा रही थी।
1940 में पूरी दुनिया में सिर्फ अमेरिका और ब्रिटेन में ही प्लेन बनते थे और उस समय भारत जैसे देश में विमान का बनना दुनिया के लिए एक बेहद चौंकाने वाली बात थी।
कंपनी के बनाए जहाज दुनिया की कई एयरलाइन ने खरीदें कंपनी काफी मुनाफे में जा रही थी और एक दिन नेहरू की नजर इस कंपनी पर पड़ी और उन्होंने इस कंपनी को नियमों के खिलाफ जाकर सरकारीकरण कर दिया। फिर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स का नाम बदलकर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड कर दिया गया और सरकारी दस्तावेज में यह दिखा दिया गया किस कंपनी की स्थापना नेहरू ने की।
कभी दिल पर हाथ रख कर सोचिए गा यदि कोई व्यक्ति अपनी दूर दृष्टि से अपनी सूझबूझ से कोई कंपनी खड़ी करें और फिर किसी की गिद्ध दृष्टि भले ही वह सरकार क्यों ना हो उसकी आपकी कंपनी पर पड़े तो क्या यह उचित है और हां कांग्रेसी कहते हैं हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड तो हमारे नेहरू ने बनाया🤣

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गाँधी को किसने मारा ? __________________ नाथुराम गोडसे ने
नाथुराम गोडसे कौन थे ? _________________ हिंदू महासभा के कार्यकर्ता
उस समय हिंदू महासभा का अध्यक्ष कौन था ? ___ निर्मल चंद्र चटर्जी
निर्मल चंद्र चटर्जी कौन थे ?________________ सोमनाथ चटर्जी के पिता जी
सोमनाथ चटर्जी कौन ? ___________________ सीपीएम नेता, सीपीएम साँसद

लेकिन गाँधी हत्या के बाद नेहरू ने किस संगठन पर बैन लगाया ? आर एस एस पर
आरएसएस पर से बैन हटाना क्यों पड़ा ? ___ कोर्ट में कोई सबूत प्रस्तुत नहीं कर पाए

क्या निर्मल चन्द्र चटर्जी को भी सताया गया ?
नहीं .. उन्हें पहले जज, फिर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष बनाया गया. इनकी लिखी पुस्तकें केंद्र सरकार की के विश्विद्यालय के पाठ्यक्रमों में लेकर उन्हें एक ‘लेखक’ होने का सम्मान दिया. देश के पहले लोकसभा चुनाव में सोमनाथ के पिता अखिल भारतीय हिंदू महासभा के टिकट पर निर्वाचित भी हुए।

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*इन्दिरा गाधी को आयरन लेडी समझने वाले ध्यान से पढ़ें:*
विंग कमांडर अभिनंदन का नाम तो आप निश्चय ही नहीं भूले होंगे. शायद उनकी _’हैंडल बार’_ मूछें भी याद ही होंगी.

लेकिन इसी भारतीय वायु सेना के कुछ अन्य जांबाज़ पायलट के नाम नीचे मैंने लिखे हैं. इनकी तस्वीरें देखना तो दूर, हममें से कोई एकाध ही होगा जिसने ये नाम सुन रखे होंगे.
लेकिन इनका रिश्ता अभिनंदन से बड़ा ही गहरा है. पढ़िए ये नाम.

विंग कमांडर हरसरण सिंह डंडोस
स्क्वाड्रन लीडर मोहिंदर कुमार जैन
स्क्वाड्रन लीडर जे एम मिस्त्री
स्क्वाड्रन लीडर जे डी कुमार
स्क्वाड्रन लीडर देव प्रशाद चटर्जी
फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुधीर गोस्वामी
फ्लाइट लेफ्टिनेंट वी वी तांबे
फ्लाइट लेफ्टिनेंट नागास्वामी शंकर
फ्लाइट लेफ्टिनेंट राम एम आडवाणी
फ्लाइट लेफ्टिनेंट मनोहर पुरोहित
फ्लाइट लेफ्टिनेंट तन्मय सिंह डंडोस
फ्लाइट लेफ्टिनेंट बाबुल गुहा
फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुरेश चंद्र संदल
फ्लाइट लेफ्टिनेंट हरविंदर सिंह
फ्लाइट लेफ्टिनेंट एल एम सासून
फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पी एस नंदा
फ्लाइट लेफ्टिनेंट अशोक धवले
फ्लाइट लेफ्टिनेंट श्रीकांत महाजन
फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुरदेव सिंह राय
फ्लाइट लेफ्टिनेंट रमेश कदम
फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रदीप वी आप्टे
फ्लाइंग ऑफिसर कृष्ण मलकानी
फ्लाइंग ऑफिसर के पी मुरलीधरन
फ्लाइंग ऑफिसर सुधीर त्यागी
फ्लाइंग ऑफिसर तेजिंदर सेठी

ये सभी नाम अनजाने लगे होंगे.
*ये भी भारतीय वायुसेना के योद्धा थे जो 1971 की जंग में पाकिस्तान में युद्ध बंदी बना लिए गए, और फिर कभी वापस नहीं आए .* इनकी चिट्ठियां घर वालों तक आई , पर तत्कालीन भारत सरकार ने कभी इनकी खोज खबर नहीं ली.

1972 में शिमला में ’आयरन लेडी’ के रूप में स्वयं प्रसिद्ध तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधान मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के साथ हुए शिमला समझौते में 90 हज़ार पाकिस्तानी युद्धबंदियों को छोड़ने का समझौता तो कर आई, *पर इन्हें वापस मांगना याद नही रहा, ये वह खानदान है जो अपने फायदे के लिए देश को भी बेचने में संकोच नहीं करता है लेकिन दूसरे के दर्द को समझना इनकी आदत नही है*

ये अभिनंदन जितने खुशकिस्मत नही थे , क्योकि इनके लिए उस समय की सरकार ने मिसाइलें नहीं तानी, न देश के लोगों ने इनकी खबर ली, न अखबारों ने फोटो छापे.
*👎🏾🥲 इन्हें मरने को, पाकिस्तानी जेलों में सड़ने को छोड़ दिया गया. इनके वजूद को नकार दिया गया.*

*यह पहली बार नहीं हुआ था. रेज़ांगला के वीर अहीरों को भी नकारे नेहरू ने भगोड़ा करार दे दिया था. परमवीर मेजर शैतान सिंह भाटी को कायर मान लिया गया था. अगर चीन ने इनकी जांबाज़ी को न स्वीकारा होता, भला हो उस लद्दाखी गडरिये का जिसको इनकी लाशें न मिली होती, ये वीर अहीर न कहलाते, शैतान सिंह भाटी मरणोपरांत परम वीर चक्र का सम्मान न पाते*

*यही नकारात्मक रवैया रहा है इन धूर्त सत्ता लोलुप अकर्मण्यता के पर्यायवाची नेहरू ,इंदिरा गांधी और उसके कुनबे के लोगों का देश के वीर सपूतों के प्रति.*

*यही फ़र्क़ है देश भक्ति के सच्चे सपूत मोदी में और दूसरों में*।

*आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि अगर मोदी की जगह सोनिया की कठपुतली वाला गूंगा होता तो शायद अभिनंदन का नाम भी इसी लिस्ट में लिखा होता.*

यह पोस्ट नेहरू के चाटुकारों के लिए पीड़ादायक होगा लेकिन देश के आम नागरिक की आँखे जरूर खुल जाएगी और इस परिवार की असलियत से परिचित हो जाएंगे।

Jai Hind

(इस पोस्ट को राज़नीति से जोड़ने का प्रयास न करें।यह विशुद्ध सैनिकों से संबंधित पोस्ट है)

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रेनकोट पहनकर नहाने वाले मौनमोहन की कहानी
मनमोहन सिंह उर्फ मौनी बाबा को मोदी जी ने क्यों कहा था कि मनमोहन सिंह तो बाथरूम में भी रेनकोट पहन कर नहाने की कला जानते हैं।
इस घटनक्रम को जानेगे तो आपको भी यकीन हो जाएगा तथाकथित ईमानदार मनमोहन सिंह कितना बड़ा खिलाड़ी था।
आखिर अमर्त्यसेन अमेरिका में बैठे बैठे भारत सरकार की आर्थिक नीतियों की इतनी आलोचना या दूसरे शब्दों में कहें तो मोदी पर विष-वमन क्यों करते रहते हैं ?
अगर आप भी अपनी जिज्ञासा शांत करना चाहते हैं तो ध्यानपूर्वक पढ़िए और जानिये क्यों ….
वर्ष 2007 में जब नेहरू-गांधी परिवार के सबसे वफादार “डॉ मनमोहन सिंह” प्रधानमंत्री पद से अपनी शोभा बढ़ा रहे थे तब उन्होंने एक समय बिहार के विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित करने की “महायोजना” पर काम शुरू किया (महायोजना क्यों कह रहा हूँ आगे स्पष्ट होगा)-
डॉ मनमोहन सिंह ने नोबल पुरस्कार विजेता “डॉ अमर्त्यसेन” को असीमित अधिकारों के साथ नालंदा विश्वविद्यालय का प्रथम चांसलर नियुक्त किया। उन्हें इतनी स्वायत्तता दी गयी कि उन्हें विश्विद्यालय के नाम पर बिना किसी स्वीकृति और जवाबदेही के कितनी भी धनराशि अपने इच्छानुसार खर्च करने एवं नियुक्तियों आदि का अधिकार था । उनके द्वारा लिए गये निर्णयों एवं व्यय किये गये धन का कोई भी हिसाब-किताब सरकार को नहीं देना था ।
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि छुपे रुस्तम मनमोहन सिंह और अमर्त्यसेन ने मिलकर किस तरह से जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसों से भयंकर लूट मचाई ?
अमर्त्यसेन अमेरिका में बैठे बैठे ही 5 लाख रुपये का मासिक वेतन ले रहे थे जितनी कि संवैधानिक रूप से भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्य चुनाव आयुक्त, रक्षा सेनाओं के अध्यक्षों, कैबिनेट सचिव या किसी भी नौकरशाह को भी दिए जाने का कोई प्रावधान ही नहीं है ।
इतना ही नहीं अमर्त्यसेन को अनेक भत्तों के साथ साथ असीमित विदेश यात्राओं और उस पर असीमित खर्च करने का भी अधिकार था ।
कहानी का अंत यहीं पर नहीं हुआ बल्कि उन्होंने मनमोहनी कृपा से 2007 से 2014 की सात वर्षों की अवधि में कुल 2730 करोड बतौर चांसलर नालंदा विश्वविद्यालय खर्च किये….
मनमोहन सिंह ईमानदारी के चोंगे में कितने बड़े छुपे रुस्तम थे ?
चूंकि यूपीए सरकार द्वारा संसद में पारित कानून के तहत अमर्त्यसेन के द्वारा किये गये खर्चों की न तो कोई जवाबदेही थी और न ही कोई ऑडिट होना था और न ही कोई हिसाब उन्हें देना था इसलिए देश को कभी शायद पता ही न चले कि दो हज़ार सात सौ तीस करोड़ रुपये आखिर गये कहाँ ?
अभी कहानी खत्म नहीं हुई, पिक्चर अभी बाकी है – अमर्त्यसेन सेन ने जो नियुक्तियां कीं उसपर भी कानूनन कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता । उन्होंने किन किन की नियुक्तियां कीं … आइये ये भी जान लेते हैं –
प्रथम चार नियुक्तियां जो उन्होंने कीं वो थे –
1. डॉ उपिंदर सिंह
2. अंजना शर्मा
3. नवजोत लाहिरी
4. गोपा सब्बरवाल
.. कौन थे ये लोग?
जानेंगे तो मनमोहन सिंह के चेहरे से नकाब उतर जायेगा ।
डॉ उपिंदर सिंह मनमोहन सिंह की सबसे बड़ी पुत्री हैं और बाकी तीन उनकी करीबी दोस्त और सहयोगी ।
इन चार नियुक्तियों के तुरंत बाद अमर्त्यसेन ने जो अगली *दो नियुक्तियां कीं वो गेस्ट फैकल्टी अर्थात अतिथि प्राध्यापक की थी और वो थे –
1. दामन सिंह
2. अमृत सिंह
…..गोया ये कौन थे ?
पहला नाम डॉ मनमोहन सिंह की मझली पुत्री और दूसरा नाम उनकी सबसे छोटी पुत्री का है ।
और सबसे अद्वितीय बात जो दामन सिंह और अमृत सिंह के बारे है वो ये कि ये दोनों “मेहमान प्राध्यापक” अपने सात वर्षों के कार्यकाल में कभी भी नालंदा विश्वविद्यालय नहीं आयी … पर बतौर प्राध्यापक ये अमेरिका में बैठे बैठे ही लगातार सात सालों तक भारी-भरकम वेतन लेती रहीं ।
उस दौर में नालंदा विश्वविद्यालय की संक्षिप्त विशेषता ये थी कि ।
विश्विद्यालय का एक ही भवन था, इसके कुल 7 फैकल्टी मेम्बर और कुछ गेस्ट फैकल्टी मेम्बर (जो कभी नालंदा आये ही नहीं ) ही नियुक्त किये गये जो अमर्त्यसेन और मनमोहन सिंह के करीबी और रिश्तेदार थे । विश्विद्यालय में बमुश्किल 100 छात्र भी नहीं थे और न ही कोई वहां कोई बड़ा वैज्ञानिक शोध कार्य ही होता था जिसमे भारी भरकम उपकरण या केमिकल आदि का प्रयोग होता हो ।
फिर वो 2730 करोड़ रुपये गये कहाँ आखिर ?
मोदी जब सत्ता में आये और उन्हें जब इस कानूनी लूट की जानकारी हुई तो अमर्त्यसेन के साथ साथ मनमोहनी पुत्रियों को भी तत्काल बाहर का रास्ता दिखा दिया ।
इसी बाबा मौनमोहन के समय अनेकों ओर भी घोटाले हुए ओर मौनी बाबा चिद्दि से मिलने राजमाता के साथ तिहाड़ भी गए थे।