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वृक्षारोपण के विषय में महत्वपूर्ण जानकारियां
. *श्रुतम्-244*

*पुराणों व हिन्दू धर्मग्रंथों में उल्लेखित पर्यावरण ज्ञान*

👉 10 कुॅंओं के बराबर एक बावड़ी, 10 बावड़ियों के बराबर एक तालाब, 10 तालाब के बराबर 1 पुत्र एवं 10 पुत्रों के बराबर एक वृक्ष है। ( मत्स्य पुराण )
👉 जीवन में लगाए गए वृक्ष अगले जन्म में संतान के रूप में प्राप्त होते हैं। (विष्णु धर्मसूत्र 19/4)
👉 जो व्यक्ति पीपल अथवा नीम अथवा बरगद का एक, चिंचिड़ी (इमली) के 10, कपित्थ अथवा बिल्व अथवा ऑंवले के तीन और आम के पांच पेड़ लगाता है, वह *सब पापों से मुक्त हो जाता है। ( भविष्य पुराण)
👉 पौधारोपण करने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
👉 शास्त्रों के अनुसार पीपल का पेड़ लगाने से संतान लाभ होता है।
👉 अशोक वृक्ष लगाने से शोक नहीं होता है।
👉 पाकड़ का वृक्ष लगाने से उत्तम ज्ञान प्राप्त होता है।
👉 बिल्वपत्र का वृक्ष लगाने से व्यक्ति दीर्घायु होता है।
👉 वट वृक्ष लगाने से मोक्ष मिलता है।
👉 आम वृक्ष लगाने से कामना सिद्ध होती है।
👉 कदम्ब का वृक्षारोपण करने से विपुल लक्ष्मी की प्राप्त होती है।

प्राचीन भारतीय चिकित्सा- पद्धति के अनुसार पृथ्वी पर ऐसी कोई भी वनस्पति नहीं है, जो औषधि ना हो।

स्कंद पुराण में एक सुंदर श्लोक है-
अश्वत्थमेकम् पिचुमन्दमेकम्
न्यग्रोधमेकम् दश चिञ्चिणीकान्।
कपित्थबिल्वाऽऽमलकत्रयञ्च पञ्चाऽऽम्रमुप्त्वा नरकन्न पश्येत्।।

अश्वत्थः = पीपल (100% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
पिचुमन्दः = नीम (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
न्यग्रोधः = वटवृक्ष(80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
चिञ्चिणी = इमली (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
कपित्थः = कविट (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
बिल्वः = बेल (85% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
आमलकः = आँवला (74% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
आम्रः = आम (70% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
(उप्ति = पौधा लगाना)

अर्थात्- जो कोई इन वृक्षों के पौधों का रोपण करेगा, उनकी देखभाल करेगा उसे नरक के दर्शन नही करना पड़ेंगे।

इस सीख का अनुसरण न करने के कारण हमें आज इस परिस्थिति के स्वरूप में नरक के दर्शन हो रहे हैं।
अभी भी कुछ बिगड़ा नही है, हम अभी भी अपनी गलती सुधार सकते हैं।
औऱ
गुलमोहर, निलगिरी- जैसे वृक्ष अपने देश के पर्यावरण के लिए घातक हैं।

पश्चिमी देशों का अंधानुकरण कर हम ने अपना बड़ा नुकसान कर लिया है।

पीपल, बड और नीम जैसे वृक्ष रोपना बंद होने से सूखे की समस्या बढ़ रही है

ये सारे वृक्ष वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते है साथ ही धरती के तापमान को भी कम करते है।

हमने इन वृक्षों के पूजने की परंपरा को अन्धविश्वास मानकर फटाफट संस्कृति के चक्कर में इन वृक्षों से दूरी बनाकर यूकेलिप्टस (नीलगिरी) के वृक्ष सड़क के दोनों ओर लगाने की शुरूआत की। यूकेलिप्टस झट से बढ़ते है लेकिन ये वृक्ष दलदली जमीन को सुखाने के लिए लगाए जाते हैं। इन वृक्षों से धरती का जलस्तर घट जाता है। विगत ४० वर्षों में नीलगिरी के वृक्षों को बहुतायात में लगा कर पर्यावरण की हानि की गई है।

शास्त्रों में पीपल को वृक्षों का राजा कहा गया है।

मूले ब्रह्मा त्वचा विष्णु शाखा शंकरमेवच।
पत्रे पत्रे सर्वदेवायाम् वृक्ष राज्ञो नमोस्तुते।।

भावार्थ-जिस वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा जी तने पर श्री हरि विष्णु जी एवं शाखाओं पर देव आदि देव महादेव भगवान शंकर जी का निवास है और उस वृक्ष के पत्ते पत्ते पर सभी देवताओं का वास है ऐसे वृक्षों के राजा पीपल को नमस्कार है।।

आगामी वर्षों में प्रत्येक ५०० मीटर के अंतर पर यदि एक एक पीपल, बड़ , नीम आदि का वृक्षारोपण किया जाएगा, तभी अपना भारत देश प्रदूषणमुक्त होगा।

घरों में तुलसी के पौधे लगाना होंगे।

हम अपने संगठित प्रयासों से ही अपने “भारत” को नैसर्गिक आपदा से बचा सकते है।

भविष्य में भरपूर मात्रा में नैसर्गिक ऑक्सीजन मिले इसके लिए आज से ही अभियान आरंभ करने की आवश्यकता है।

आइए हम पीपल, बड़, बेल, नीम, आंवला एवं आम आदि वृक्षों को लगाकर आने वाली पीढ़ी को निरोगी एवं “सुजलां सुफलां पर्यावरण” देने का प्रयत्न करें।
🌳🌳🙏🙏

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वृक्ष


*स्कंदपुराण* में एक सुंदर *श्लोक* है👇👇
*अश्वत्थमेकम् पिचुमन्दमेकम्*
*न्यग्रोधमेकम् दश चिञ्चिणीकान्।*
*कपित्थबिल्वाऽऽमलकत्रयञ्च* *पञ्चाऽऽम्रमुप्त्वा नरकन्न पश्येत्।।*

*अश्वत्थः* = *पीपल* (100% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
*पिचुमन्दः* = *नीम* (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
*न्यग्रोधः* = *वटवृक्ष* (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
*चिञ्चिणी* = *इमली* (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
*कपित्थः* = *कविट* (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
*बिल्वः* = *बेल* (85% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
*आमलकः* = *आवला* (74% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
*आम्रः* = *आम* (70% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
(उप्ति = पौधा लगाना)

*अर्थात्* – जो कोई इन वृक्षों के पौधो का रोपण करेगा, उनकी देखभाल करेगा उसे नरक के दर्शन नही करना पड़ेंगे।

इस सीख का अनुसरण न करने के कारण हमें आज इस परिस्थिति के स्वरूप में नरक के दर्शन हो रहे हैं।
अभी भी कुछ बिगड़ा नही है, हम अभी भी अपनी गलती सुधार सकते हैं।
*औऱ*
*गुलमोहर* , *निलगिरी* – जैसे वृक्ष अपने देश के *पर्यावरण* *के* *लिए* *घातक* हैं।

पश्चिमी देशों का अंधानुकरण कर हम ने अपना बड़ा नुकसान कर लिया है।


पीपल, बड और नीम जैसे वृक्ष रोपना बंद होने से सूखे की समस्या बढ़ रही है।

ये सारे वृक्ष वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते है। साथ ही, धरती के तापनाम को भी कम करते है।

हमने इन वृक्षों के पूजने की परंपरा को अन्धविश्वास मानकर फटाफट संस्कृति के चक्कर में इन वृक्षो से दूरी बनाकर *यूकेलिप्टस* ( *नीलगिरी* ) के वृक्ष सड़क के दोनों ओर लगाने की शुरूआत की। यूकेलिप्टस झट से बढ़ते है लेकिन ये वृक्ष दलदली जमीन को सुखाने के लिए लगाए जाते हैं। इन वृक्षों से धरती का जलस्तर घट जाता है। विगत ४० वर्षों में नीलगिरी के वृक्षों को बहुतायात में लगा कर पर्यावरण की हानि की गई है।

*शास्त्रों* में *पीपल* को *वृक्षों* का *राजा* कहा गया है⤵️

*मूले ब्रह्मा त्वचा विष्णु शाखा शंकरमेवच।*
*पत्रे पत्रे सर्वदेवायाम् वृक्ष राज्ञो नमोस्तुते।।*
*भावार्थ* -जिस वृक्ष की *जड़* में *ब्रह्मा* *जी* *तने* पर *श्री* *हरि* *विष्णु* *जी* एवं *शाखाओं* पर देव आदि देव *महादेव* *भगवान* *शंकर* *जी* का निवास है और उस वृक्ष के *पत्ते* *पत्ते* पर *सभी* *देवताओं* का *वास* है ऐसे वृक्षों के राजा पीपल को *नमस्कार* है🙏

आगामी वर्षों में प्रत्येक ५०० मीटर के अंतर पर यदि एक एक पीपल, बड़ , नीम आदि का वृक्षारोपण किया जाएगा, तभी अपना भारत देश प्रदूषणमुक्त होगा।

*घरों* में *तुलसी* के पौधे लगाना होंगे।

हम अपने संगठित प्रयासों से ही अपने “भारत” को नैसर्गिक आपदा से बचा सकते हैं ।

भविष्य में भरपूर मात्रा में *नैसर्गिक* *ऑक्सीजन* मिले इसके लिए आज से ही अभियान आरंभ करने की आवश्यकता है।

आइए हम *पीपल* , *बड़* , *बेल* , *नीम* , *आंवला* एवं *आम* आदि *वृक्षों* को *लगाकर* आने वाली पीढ़ी को **निरोगी* *एवं* ” *सुजलां* *सुफलां* *पर्यावरण* ” देने का प्रयत्न करें।🙏🙏
🌳🌳🌳

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वृक्ष


हमारे
धर्मग्रंथों में
उल्लेखित पर्यावरण ज्ञान–

👉 10 कुॅंओं के बराबर एक बावड़ी, 10 बावड़ियों के बराबर एक तालाब, 10 तालाब के बराबर 1 पुत्र एवं 10 पुत्रों के बराबर एक वृक्ष हैं!
👉 जीवन में लगाए गए वृक्ष अगले जन्म में संतान के रूप में प्राप्त होते हैं! (विष्णु धर्मसूत्र 19/4)

👉 जो व्यक्ति पीपल अथवा नीम अथवा बरगद का एक, चिंचिड़ी (इमली) के 10, कपित्थ अथवा बिल्व अथवा ऑंवले के तीन और आम के पांच पेड़ लगाता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता हैं! ( भविष्य पुराण)

👉 पौधारोपण करने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं!

👉 शास्त्रों के अनुसार पीपल का पेड़ लगाने से संतान लाभ होता हैं!

👉 अशोक वृक्ष लगाने से शोक नहीं होता हैं!

👉 पाकड़ का वृक्ष लगाने से उत्तम ज्ञान प्राप्त होता हैं!

👉 बिल्वपत्र का वृक्ष लगाने से व्यक्ति दीर्घायु होता हैं!

👉 वट वृक्ष लगाने से मोक्ष मिलता हैं!

👉 आम वृक्ष लगाने से कामना सिद्ध होती हैं!

👉 कदम्ब का वृक्षारोपण करने से विपुल लक्ष्मी की प्राप्त होती हैं!

प्राचीन भारतीय चिकित्सा- पद्धति के अनुसार पृथ्वी पर ऐसी कोई भी वनस्पति नहीं है, जो औषधि ना हों!
स्कंद पुराण में एक सुंदर श्लोक हैं-
अश्वत्थमेकम् पिचुमन्दमेकम्
न्यग्रोधमेकम् दश चिञ्चिणीकान्।
कपित्थबिल्वाऽऽमलकत्रयञ्च पञ्चाऽऽम्रमुप्त्वा नरकन्न पश्येत्।।

अश्वत्थः = पीपल (100% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
पिचुमन्दः = नीम (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
न्यग्रोधः = वटवृक्ष(80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
चिञ्चिणी = इमली (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
कपित्थः = कविट (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
बिल्वः = बेल (85% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
आमलकः = आँवला (74% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
आम्रः = आम (70% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
(उप्ति = पौधा लगाना)
अर्थात्- जो कोई इन वृक्षों के पौधों का रोपण करेगा, उनकी देखभाल करेगा उसे नरक के दर्शन नही करने पड़ेंगे!
इस सीख का अनुसरण न करने के कारण ही हमें आज इस परिस्थिति के स्वरूप में नरक के दर्शन हो रहे हैं!
अभी भी कुछ बिगड़ा नही हैं, हम अभी भी अपनी गलती सुधार सकते हैं! गुलमोहर, निलगिरी जैसे वृक्ष अपने देश के पर्यावरण के लिए घातक हैं! पश्चिमी देशों का अंधानुकरण कर हम ने अपना बड़ा नुकसान कर लिया हैं!
पीपल, बड और नीम जैसे वृक्ष रोपना बंद होने से सूखे की समस्या बढ़ रही हैं! ये सारे वृक्ष वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा वृद्धि कर धरती के तापनाम को भी कम करते हैं!
हमने इन वृक्षों के पूजने की परंपरा को अन्धविश्वास मानकर फटाफट संस्कृति के चक्कर में इन वृक्षों से दूरी बनाकर यूकेलिप्टस (नीलगिरी) के वृक्ष सड़क के दोनों ओर लगाने की शुरूआत की! यूकेलिप्टस झट से बढ़ते हैं लेकिन ये वृक्ष दलदली जमीन को सुखाने के लिए लगाए जाते हैं! इन वृक्षों से धरती का जलस्तर घट जाता हैं! विगत ४० वर्षों में नीलगिरी के वृक्षों को बहुतायात में लगा कर पर्यावरण की हानि की गई हैं!

शास्त्रों में पीपल को वृक्षों का राजा कहा गया हैं!
मूले ब्रह्मा त्वचा विष्णु शाखा शंकरमेवच।
पत्रे पत्रे सर्वदेवायाम् वृक्ष राज्ञो नमोस्तुते।।
भावार्थ- जिस वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा जी तने पर श्री हरि विष्णु जी एवं शाखाओं पर देव आदि देव महादेव भगवान शंकर जी का निवास है और उस वृक्ष के पत्ते पत्ते पर सभी देवताओं का वास है ऐसे वृक्षों के राजा पीपल को नमस्कार हैं!
आगामी वर्षों में प्रत्येक ५०० मीटर के अंतर पर यदि एक एक पीपल, बड़ , नीम आदि का वृक्षारोपण किया जाएगा, तभी अपना भारत देश प्रदूषणमुक्त होगा!
घरों में तुलसी के पौधे लगाना होंगे!
हम अपने संगठित प्रयासों से ही अपने “भारत” को नैसर्गिक आपदा से बचा सकते हैं!
भविष्य में भरपूर मात्रा में नैसर्गिक ऑक्सीजन मिले इसके लिए आज से ही अभियान आरंभ करने की आवश्यकता हैं!
आइए हम पीपल, बड़, बेल, नीम, आंवला एवं आम आदि वृक्षों को लगाकर आने वाली पीढ़ी को निरोगी एवं “सुजलां सुफलां पर्यावरण” देने का प्रयत्न करें!

साभार–
DrSachidanand Shandilya

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प्राचीनकाल में ऋषि-मुनियों ने ऐसे पेड़-पौधों को लगाने की सलाह दी थी, जिनसे वास्तुदोष का निवारण हो साथ ही पर्यावरण संतुलन भी बना रहे।
तुलसी- तुलसी को जीवनदायिनी और लक्ष्मी स्वरूपा बताया गया है। इसे घर में लगाने से और इसकी पूजा अर्चना करने से महिलाओं के सारे दु:ख दूर होते हैं, साथ ही घर में सुख शांति बनी रहती है। इसे घर के अंदर लगाने से किसी भी प्रकार की अशुभ ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
अश्वगंधा- इसके बारे में कहा गया है कि यह वास्तु दोष समाप्त करने की क्षमता रखता है और शुभता को बढ़ाकर जीवन को अधिक सक्रिय बनाता है।
आंवला- आंवले का वृक्ष घर की चहारदीवारी में पूर्व व उत्तर में लगाया जाना चाहिए, जिससे यह शुभ रहता है। साथ ही इसकी नित्य पूजा-अर्चना करने से भी सभी तरह के पापों का शमन होता है।
केला- घर की चहारदीवारी में केले का वृक्ष लगाना शुभ होता है। इसे भवन के ईशान कोण में लगाना चाहिए, क्योंकि यह बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधि वृक्ष है। केले के समीप यदि तुलसी का पेड़ भी लगा लें तो अधिक शुभकारी रहेगा।
शतावर- शतावर को एक बेल बताया गया है। इसे घर में लगाना शुभ फलदायी होता है। बशर्ते इसे घर में कुछ इस तरह लगाएं कि यह ऊपर की ओर चढ़े।
अनार- इससे वंश वृद्धि होती है। आग्नेय में अनार का पेड़ अति शुभ परिणाम देने वाला होता है।
बेल- भगवान शिव को बेल का वृक्ष अत्यंत प्रिय है, इसको लगाने से धन संपदा की देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

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यदि 05 सेकंड के लिए धरती से ऑक्सीजन गायब हो जाए तो क्या होगा???

05 सेकंड के लिए धरती बहुत, बहुत ठंडी हो जाएगी.

जितने भी लोग समुद्र किनारे लेटे हैं…उन्हें तुरंत सनबर्न होने लगेगा.

दिन में भी अँधेरा छा जाएगा.

हर वह इंजन रूक जाएगा जिनमें आंतरिक दहन होता है.

रनवे पर टेक ऑफ कर चुका प्लेन वहीं क्रैश हो जाएगा.

धातुओ के टुकड़े बिना वैल्डिंग के ही आपस में जुड़ जाएगे.
.
ऑक्सीजन न होने का यह बहुत भयानक साइड इफेक्ट होगा……

पूरी दुनिया में सबके कानों के पर्दे फट जाएगे….क्योंकि 21% ऑक्सीज़न के अचानक लुप्त होने से हवा का दबाव घट जाएगा.

सभी का बहरा होना पक्का है.

कंक्रीट से बनी हर बिल्डिंग ढेर हो जाएगी.

हर जीवित कोशिका फूलकर फूट जाएगी.
.
पानी में 88.8% ऑक्सीज़न होती है.
ऑक्सीजन ना होने पर हाइड्रोजन गैसीय अवस्था में आ जाएगी और इसका वाॅल्यूम बढ़ जाएगा.
हमारी साँसे बाद में रूकेगी, हम फूलकर पहले ही फट जाएँगे.

समुद्रो का सारा पानी भाप बनकर उड़ जाएगा…..क्योंकि बिना ऑक्सीजन पानी हाइड्रोजन गैस में बदल जाएगा और यह सबसे हल्की गैस होती है तो इसका अंतरिक्ष में उड़ना लाज़िमी है.

ऑक्सीजन के अचानक गुम होने से हमारे पैरों तले की जमीन खिसककर 10-15 किलोमीटर नीचे चली जाएगी.

……..रूह कांप गई क्या???

ये न हो इस लिए अपने जीवनकाल में कुछ वृक्ष जरूर लगाएं.

और ज्यादा से ज्यादा लोगों को लगाने के लिये प्रेरित करें….।।।।

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ઔષધીય બાગ ના રોપાઓ લેવા જુનાગઢ 

                     ઔષધીય બાગ

વનવગડા ગૃપના સર્વે મિત્રોને મારા પ્રણામ હાલના વર્તમાન સમયમાં મોંઘવારી એ એવી માઝા મુકી છે કે ઘણા ખરા ઘરોના બજેટ બગડી જાય છે વ્યવહારીક ખર્ચ, સંતાનો ના શિક્ષણ નો ખર્ચ, ઘર ખર્ચ, મેડિકલ ખર્ચ… વગેરે…. વગેરે.. 

           ત્યારે મને એવો વિચાર આવ્યો કે મેડિકલ ખર્ચ પણ ઘણાખરા ઘરોનું બજેટ બગાડી નાખે છે. તો આ દિશામાં આપણે કંઈક વિચારવું જોઇએ ત્યારે મને એવો વિચાર આવ્યો કે આપણા ગામ દીઠ એક ઔષધીય બાગ હોવો જોઈએ જેમાં જુદા – જુદા ઔષધ નો ઉછેર કરવો જોઈએ જેવાકે.. અરડુસી, ગરમાળો,પુત્રકજીવક, કાંચનાર, મહુડો, અર્જુન, વાયાવરણો, હરડે, રગતરોહીડ, બહેડા, ગળો, નગોડ … વગેરે… વગેરે… જેના થકી પોતે પણ તંદુરસ્ત રહશે અને ગામ & શહેર પણ તંદુરસ્ત રહશે

        અને આવા કાર્ય માં સરકાર ની પણ રાહ ન જોવાય આપણે આપણા માટે, આપણા સંતાનો માટે સંગાવહાલાઓ તથા પર્યાવરણ ના જતન માટે આપણે કંઈક કરવું જોઈએ. “સંતાનો ને સંપત્તિ આપશુ પણ પર્યાવરણ નહીં આપી શકીશું તો”……? 

          આ માટે સૌપ્રથમ તમારે તમારા ગામના મિત્રો, સજ્જન માણસો, વડીલો સહુએ સાથે મળીને વિચારવું જોઈએ કે જગ્યાએ વૃક્ષો ઉછેરવા પંચાયતના ખરાબાની જમીન પડી હોય તો તેમાં શાળામાં, સ્મશાનોમાં ઘરની આજુબાજુ ની ખુલ્લી જગ્યામાં, કોમન પ્લોટમાં, પોતાના ઘરનું આંગણું મોટું હોય તો તેમા વૃક્ષો ની પસંદગી કેવી રીતે કરવી. ગામમાં હાલ કેવા પ્રકારના વૃક્ષો છે. અને કેવા પ્રકારના નથી અને આપણા પર્યાવરણ માં સરળતાથી ઉછરી જાય તેવા પ્રકારના વૃક્ષો ની પસંદગી કરવી વૃક્ષો એકજ પ્રકારના અને બિનઉપયોગી ન ઉછેરવા ( કૌરવો ૧૦૦ હતા અને પાંડવો ૫ હતા એ વાત સમજી ને ઉછેરવા ) જેથી વનસ્પતિ વૈવિધ્યતા જળવાઈ રહે અને લુપ્ત થતી પ્રજાતિ પણ બચી જાય. 
સુચન :- વનવગડા ના ગૃપ મિત્રો તો પર્યાવરણ પ્રેમી હોયજ અને આ ગૃપનો આંકડો તો હજારોને વટાવી ગયો છે તો તમારી આજુબાજુમાં પણ ઘણા માણસો અત્યારે વૃક્ષો ઉછેરતા હોય છે તો તેમને કાને વાત નાખો કે આપણે જુદા જુદા આયુર્વેદિક ઔષધો માં કામ લાગે તેવા વૃક્ષો  વાવો અને એમના તરફથી એમ ઉત્તર મળે કે અમો આવા વૃક્ષો વિશે જાણતા નથી તો તેમને જુદા જુદા વૃક્ષો થી માહિતગાર કરીને વૃક્ષો વવડાવો જેથી આપણી આવનારી પેઢી તંદુરસ્તમય જીવન જીવી શકે અને પર્યાવરણ જળવાઈ રહે…. અસ્તુ 

                        પટેલ ચંદ્રશેખર સી મોરબી 

                           આચાર્ય શ્રી નવા દેરાળા

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જો તમે ખેડૂતપુત્રના વારસદાર હોય તો એક વાર જરૂર વાચજો,

# એક ખેડૂતના મનની વાત #
માણસ સપના જુએ છે,  જે જરૂર પુરા થાય છે. પણ ખેડૂતના સપના ક્યારેય પુરા થતા નથી, ખુબ જ મોટા સપના અને મહેનતથી પાક તૈયાર કરે છે, પણ જયારે તૈયાર થયેલો પાક બજારમાં વેચવા જાય છે,  ત્યારે ખુબ જ ખુશ થતો થતો જાય છે. ઘરે છોકરાઓને કહેતો જાય છે કે, આજે તમારા માટે કપડાં અને મિઠાઇ લેતો આવીશ. પત્નિને કહે છે કે, તારી સાડી જુની થઈને ફાટવા લાગી છે, આજે એક નવી સાડી લેતો આવીશ. ત્યારે પત્નિ કહે છે કે ના ના આ તો હજુ ચાલે એમ છે, તમે તમારા માટે જૂતા લેતા આવજો તુટી ગયા છે. જયારે ખેડૂત માર્કેટયાર્ડમાં પહોંચે છે ત્યારે, તેની એક મજબુરી હોય છે કે, તે પોતાના માલની કિંમત પોતે નક્કી નથી કરી શકતો. વેપારી તેના માલની કિંમત પોતાના હિસાબથી નક્કી કરે છે.

એક સાબુના પેકેટ પર પણ એની કિંમત લખેલી હોય છે, એક બાકસના બોક્ષ પર પણ તેની કિંમત લખેલી હોય છે, પણ ખેડૂત પોતાના માલની કિંમત પોતે કરી શકતો નથી. 

તો પણ માલ તો વેચાઇ જાય છે, પણ ભાવ તેના ધાર્યા પ્રમાણે નથી મળતો, માલનું વજન થઇ ગયા પછી જ્યારે રૂપિયા મળે છે ત્યારે વિચાર કરે છે કે, એમાંથી દવાવાળાને આપવાના છે, ખાતરવાળાને આપવાના છે, અને મજુરને પણ આપવાના છે, અને હા વિજળીનું બિલ પણ તો ભરવાનું છે. બધો હિસાબ કર્યા પછી કશું જ બચતુ નથી. તે લાચાર બનીને ઘરે આવતો રહે છે. છોકરાઓ તેના ઘર આંગણે રાહ જોઇને ઉભા હોય છે. બાપુજી-બાપુજી કરતાં બાળકો તેને વળગી પડે છે, અને પૂછે છે કે અમારા નવા કપડાં લાવ્યા. ?…..ત્યારે ખેડૂત કહે છે કે, બેટા બજારમાં સારા કપડા જ ન હતા, દૂકાનવાળો કહે તો હતો કે આ વખતે દિવાળી પર સારા કપડાં આવશે, એટલે લઇ લેશું.

પણ ખેડુતની પત્નિ સમજી જાય છે કે માલનો સારો ભાવ મળ્યો નથી, તે છોકરાઓને કહે છે કે, જાઓ હવે તમે રમવા જતા રહો. ખેડૂત પત્નિને કહે છે કે, અરે હા તારી સાડી પણ નથી લાવી શકયો. પત્નિ પણ સમજદાર હોય છે તે કહે છે કે, કાંઈ વાધો નહિ ફરી ક્યારેક લઇ લેશું પણ તમે તમારા જૂતા લેતા આવ્યા હોય તો.?….. ખેડૂત કહે છે અરે એ તો હુ ભૂલી જ ગયો, પત્ની પણ પતિ સાથે વરસોથી રહે છે ખેડૂતનો નિરાશ ચહેરો જોઇને અને વાત કરવાના અંદાજ પરથી તેની પરેશાની સમજી જાય છે, તો પણ ખેડૂતને દિલાશો આપે છે. અને પોતાની ભિજાયેલી આખોને સાડીના છેડાથી લૂછતાં લૂછતાં રસોડામાં ચાલી જાય છે.

પછી બીજા દિવશે સવારે આખો પરિવાર નવા સપના નવી આશાઓ સાથે ફરીથી નવા પાકની કામગીરીમાં લાગી જાય છે. આ કહની બધા જ નાના મોટા ખેડૂતોને લાગુ પડે છે.
હું એમ  નથી કહે તો કે દર વખતે પાકનો સારો ભાવ નથી મળતો,

પણ જયારે પણ ભાવ વધે ત્યારે મિડીયા વાળા કેમેરા લઈને બજારમાં પહોંચી જાય છે, અને એકની એક જાહેરાત દશ વાર બતાવે છે. કેમેરાના સામે શહેરની બહેનો હાથમાં બાસ્કેટ લઇને પોતાનો મેક-અપ સરખો કરતી કરતી કહે છે કે, શાકભાજીના ભાવ બહુ વધી ગયા છે, અમારા રસોડાનું બજેટ બગાડી નાખ્યું છે. પણ હું એમ કહું છું કે ક્યારે ક પોતાનુ બાસ્કેટ ખુણામાં મુકીને કોઇ ખેતરમાં જઈને કોઇ ખેડૂતની હાલત તો જુઓ. તે કઇ રીતે પાકને પાણી આપે છે?…..
* 25 લીટરની દવા ભરેલી ટાંકી પોતાના ખભે ભરાવીને કેવી રીતે દવાનો છંટકાવ કરે છે?…..

* 20 કિલોનું ટોકર ઉંચકીને કેવી રીતે આખા ખેતરમાં ફરી ફરીને પાકને ખાતર આપે છે?…..

* પાવર કાપમાં પણ પાવર આવવાની રાહ જોતાં-જોતાં આખી રાતના ઉજાગરા કરે છે?…..

* આવા ધગધગતા ઉનાળામાં માંથાનો પરસેવો પગની પાની સુધી પહોચી જાય છે?…..

* ઝેરીલા જાનવરોનો ડર હોવા છતાં પણ ઉગાડા પગે ખેતરોમાં રખડવુ પડે છે?…..
જે દિવશે તમે આ વાસ્તવિકતા પોતાની આંખોથી જોઇ લેશો, તે દિવશથી રસોડામાં પડેલા શાકભાજી, ઘઉ, ચોખા, દાળ, ફળ, મસાલા, દૂધ બધુ જ સસ્તુ લાગવા માંડશે…

ત્યારે તો તમે કોઇ ખેડૂતનું દુઃખ સમજી શકશો.
# જયજવાન

જય કિશાન #

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*वृक्षारोपण ही उजड़ती प्रकृति के श्रृंगार का आधार*


*वृक्षारोपण ही उजड़ती प्रकृति के श्रृंगार का आधार*

*प्रकृति*– इस धरती पर उपस्थित जल, वायु, मिट्टी पत्थर ,जीव जंतु ,वनस्पतियां ,पेड़ पौधे , और वायुमंडल सब का संयुक्त रूप प्रकृति कहलाता है ।
इस प्रकृति में सबसे बुद्धिमान प्राणी ,विकासशील प्राणी है मानव ।जो संपूर्ण प्रकृति का दोहन /नाश करता आ रहा है ,प्रकृति ने सबको जीवन दिया है ,जीने के संसाधन दिए हैं ,सभी को अपनी अपनी आवश्यकता पूर्ति के लिये स्वयं को समर्पित कर दिया है ,लेकिन प्रकृति को सतत् चूस चूस कर अपना विकास करने वाला मानव भूल गया कि यदि हम प्रकृति से जितना ले रहे हैं उतना उसे वापस नहीं करेंगे तो यह प्रकृति नष्ट हो जाएगी ,और नष्ट होते होते संपूर्ण जीवन को पृथ्वी से समाप्त कर देगी ।
विकास और आधुनिकता के दौर में मानव सतत् जंगलों की कटाई करता रहा ,पेड़ नहीं लगाया ।धरती को खोदकर खनिज निकलता रहा ,पत्थर खुदाई करता रहा ,भू- क्षरण होता रहा ,वनों का विनाश होता रहा ,मानव तरक्की करता रहा ।
आज शनैः शनैः पूरी प्रकृति की संतुलन व्यवस्था चरमरा गई है ।वायुमंडल में विषैली गैसों की प्रचुरता हो गई है ,ग्लोबल वार्मिंग से हिमशैल/ग्लेशियर पिघलने लगे समुद्र नदियाँ सब अपना आक्रामक रूप दिखाने लगी ,जलवायु का संतुलन बिगड़ गया ,सूखा ,बाढ़ ,भूस्खलन ,ठंड ,गर्मी ,अतिवृष्टि ,गैस त्रासदी ,ज्वालामुखी का फटना आदि प्रकृति के होने वाले विनाश का संकेत हैं ।
जो पेड़ वायुमंडल की कार्बनडाइआक्साईड जैसी गैस को अपने भोजन के रूप में उपयोग करके जीवनदायिनी आक्सीजन गैस देते थे ,वो पेड़ निरंतर कटते जा रहे हैं ।मानव प्रकृति का उपहास करता चला आ रहा है ,ओजोन छिद्र विषैली कारेबनमोनोआक्साईड गैस के कारण बढ़ता जा रहा है ,जो हमारे वायुमंडल में ओजोन परत (जीवन रक्षक परत ) थी उसमें भी छेद हो गया है ,जो सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती थी ,अब छिद्र के कारण पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर आने लगी हैं ,त्वचा कैंसर जैसी बीमारी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है ,और वैज्ञानिकों का शोध इसकी पुष्टि करता है ।
हानिकारक प्लास्टिक से हमारी पृथ्वी बंजर हो रही है ,अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिये विभिन्न रसायनों का उपयोग हमारी जमीन को ,हमारे ,उत्पादन को हानि पहुंचा रहा है ,हम प्रकृति से उतना ही लें जितना प्रकृति स्वत: दे रही है ,यदि हम प्रकृति के साथ जबरदस्ती करेंगे तो प्रकृति हमें क्षमा नहीं करने वाली है ।
हमें प्रकृति के बिगड़े हुए रूप को सुधारने का प्रयत्न करना चाहिए ,हमें प्लास्टिक के प्रयोग से बचना चाहिए ,पॉलिथीन का उपयोग बंद करना चाहिए ,रसायनों का प्रयोग बंद करके प्राकृतिक खाद ,का गोबर खाद का उपयोग करना चाहिए ,और सबसे अहम भूमिका के रूप में *वृक्षारोपण* करना चाहिए ।वृक्षारोपण करने से हमारी प्रकृति हो सकता है हमे माफ कर दे ।
हमारे वृक्षारोपण से ही प्रकृति का संतुलन बनेगा ।प्रकृति में हो रही ये प्राकृतिक आपदाओं से हमें निजात मिलेगी ।हमने ही प्रकृति को बिगाड़ा है ,इसे हमें ही बनाना होगा ।
यदि हम प्रकृति को नहीं सजाएंगे तो वो दिन दूर नहीं जब प्रकृति हमें ही उजाड़ कर रख देगी ।इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति से आग्रह है कि प्रकृति को सजाने के लिए वृक्षारोपण का कार्य प्रारंभ करें
लेखन —– आशीष पाण्डेय जिद्दी
दिनांक —11-09-2016 09826278837

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*વરસાદ ના પ્રકારો*


*વરસાદ ના પ્રકારો*

  1. *ફર ફર* – માત્ર રૂંવાડાં ભીના કરે એવો વરસાદ…
  2. *છાંટા* – પાણીના છાંટા ટપક્વા માંડે એવો વરસાદ…
  3. *ફોરાં*- મોટા મોટા છાંટા તૂટી પડે એવો વરસાદ…
  4. *કરા* – જ્યારે છાંટા મોટુ સ્વરૂપ લઈ આપણને મોંઢા ઉપર તડાતડ વાગવા લાગે એવો વરસાદ…
  5. *પચેડિયો* – માથા ઉપર પચેડિ નુ રક્ષણ લઈને ભાગવું પડે એવો વરસાદ…
  6. *નેવાધાર* – ઘર ના નળીયા સંતૃપ્ત થયા પછી નેવાની નીચે બાલ્દી મૂકી શકો એવી ધાર થાય એવો વરસાદ…
  7. *મોલિયો* – ખેતરમા ઊભા પાક ને જીવનદાન આપે એવો વરસાદ…
  8. *અનરાધાર* – છાંટા, ફોરાં, કરા બધાય ભેળા મળી રીતસર પાણીની ધારો વરસતી હોય એવો વરસાદ…
  9. *મુશળધાર* – બધી ધારાઓ ભેગી મળી જાણે સૂપડે સૂપડે પાણી પડતું હોય એવો વરસાદ…
  10. *ઢેફા ભાંગ* – ખેતરોની માટીઓના ઢેફા પણ ભાંગી નાખે એવો વરસાદ…
  11. *સાંબેલાધાર* – ખેતરોના કયારાઓ ભરાય જાય અને કુવાની સપાટીઓ ઉપર આવી જાય એવો વરસાદ….
  12. *હેલી* – સાંબેલાધાર વરસાદ પણ જો સતત અઠવાડિયા સુધી વરસ્યા કરે તો હેલી આવી એમ કેહવાય…

*અને ઉપર જણાવેલ તમામ પ્રકારના વરસાદો જ્યારે એકી સાથે ટુટી પડે ત્યારે બારેય મેઘ ખાંગા થયા એમ કેહવાય….!!*

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ભારતમાં થતી કેરીઓ-આંબાની જુદી જુદી ૧૧૦ જાતો.


ભારતમાં થતી
કેરીઓ-આંબાની જુદી
જુદી ૧૧૦ જાતો.
આપને જે ભાવતી હોય તે… 😋😋😋
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🍋કેસર
🍋જમ્બો કેસર
🍋સુપર કેસર
🍋બોમ્બે હાફૂસ
🍋રૂમી હાફુસ
🍋કાળો હાફુસ
🍋રત્નાગીરી હાફૂસ
🍋હાફૂસ(વલસાડી)
🍋નિલેશાન
🍋દૂધ પેંડો
🍋જમરૂખ્યો
🍋જહાંગીર પસંદ
🍋અમીર પસંદ
🍋બાદશાહ પસંદ
🍋વજીર પસંદ
🍋કાવસજી પટેલ
🍋નિલ ફ્રાન્ઝો
🍋નારીયેલો
🍋કાળીયો
🍋પીળીયો
🍋બાજરીયો
🍋હઠીલો
🍋બાટલી
🍋કાચો મીઠો
🍋દેશી આંબડી
🍋ટાટાની આંબડી
🍋સાલમ આંબડી
🍋બદામડી
🍋રેશમડી
🍋સીંધડી
🍋કલ્યાણ બાગી
🍋રાજાપુરી
🍋અષાઢી
🍋લંગડો
🍋બનારસી લંગડો
🍋કુરેશી લંગડો
🍋રૂસ
🍋સફેદા
🍋માલ્દા
🍋ગોપાલભોગ
🍋સુવર્ણરેખા
🍋પીટર
🍋બેગાનો પલ્લે
🍋એન્ડ્રઝ
🍋રૂમાની
🍋યાકુત રૂમાની
🍋દિલપસંદ
🍋પોપટીયા
🍋ગધેમાર
🍋આમીની
🍋ચેમ્પીયન
🍋બદામી
🍋બેગમ પલ્લી
🍋બોરસીયો
🍋દાડમીયો
🍋દશેરી
🍋જમાદાર
🍋કરંજીયો
🍋મકકારામ
🍋મલગોબા
🍋નિલમ
🍋પાયરી
🍋રેશમ પાયરી
🍋સબ્ઝી
🍋સરદાર
🍋તોતાપુરી
🍋આમ્રપાલી
🍋મલ્લિકાર્જુન
🍋વનરાજ
🍋બારમાસી
🍋શ્રાવણીયો
🍋નિલેશ્વરી
🍋વસીબદામી
🍋ગુલાબડી
🍋અમૃતાંગ
🍋જમીયો
🍋રસરાજ
🍋લાડવ્યો
🍋એલચી
🍋જીથરીયો
🍋ધોળીયો
🍋રત્ના
🍋સિંધુ
🍋ખોડી
🍋નિલકૃત
🍋ફઝલી
🍋ફઝલી(રંગોલી)
🍋અમૃતિયો
🍋કાજુ
🍋ગાજરીયો
🍋લીલીયો
🍋ખાટીયો
🍋ચોરસા
🍋બમ્બઈ ગળો
🍋વેલીયો
🍋વલોટી
🍋હંસરાજ
🍋ગીરીરાજ
🍋અર્ધપુરી
🍋ચંદન
🍋સલગમ
🍋શ્રીમતી
🍋નિરંજન
🍋કંઠમાળો
🍋ગોવા
🍋સાલેમ
🍋કુરૂકાન
🍋ચંદ્રકરણ
🍋ઓલુર
🍋નીલેશ્વરડર્વા

“વંદે વસુંધરા”