Posted in आरक्षण

अगर मैं भारत का प्रधानमंत्री होता तो अम्बेडकर को कभी भी ड्राफ्टिंग कमिटी का अध्यक्ष न बनाता—-सरदार वल्लभ भाई पटेल


#एक_इतिहास_का_सच

अगर मैं भारत का प्रधानमंत्री होता तो अम्बेडकर को कभी भी ड्राफ्टिंग कमिटी का अध्यक्ष न बनाता—-सरदार वल्लभ भाई पटेल

सरदार पटेल और अम्बेडकर संवाद

संविधान निर्माण चल रहा था।। इसमें सरदार पटेल भी संविधान निर्माताओ की लिस्ट में शामिल थे। अम्बेडकर ने आरक्षण की भीख का तुर्रा छोड़ दिया।

सरदार पटेल–आरक्षण गलत है,इसको हटाओ

अम्बेडकर–नहीं,ये मेरी कौम के लोगो के लिए है

सरदार—कौन सी तुम्हारी कौम?? हम सब भारतीय है,आज़ादी के बाद आज देश का हर वर्ग भूँखा नंगा है…इसलिए किसी वर्ग विशेष को ये सुविधा देना गलत है…

अम्बेडकर(चीखते हुए)–मैं आरक्षण देना चाहता हु,अगर मुझे रोका गया तो मैं कानून मंत्री के पद से स्तीफा दे दूंगा

सरदार पटेल— देखो भीमराव,तुम वो नहीं देख पा रहे जो मैं देख पा रहा हु,स्वार्थ की राजनीति ने तुम्हारी आँखों में पट्टी बाँध दी है। अगर आज किसी जाति विशेष को आरक्षण दिया गया तो भविष्य के भारत में रोज एक नई जाति आरक्षण मांगेगी और देश की अखंडता पर खतरा उत्पन्न होगा….जो दलित और गरीब है उनके लिए हम दूसरे हर तरह के उपाय करने को तैयार है..जैसे मुफ़्त शिक्षा,मुफ़्त स्कूल,उनके लिए सस्ते घर,रोजगार इत्यादि….हम उन्हें इतना काबिल बनाये ताकि वो खुद के दम पर आगे बढ़ सके … न की आरक्षण की बैशाखी से या मुफ्तखोरी से….तुम किसी अयोग्य को सत्ता पर बैठाकर देश को बर्बाद क्यों करना चाहते हो???

अम्बेडकर(चीखते हुए)— आरक्षण होकर रहेगा…..

ये सुनकर लौह पुरुष सरदार पटेल,जो कभी किसी के आगे नहीं झुकते थे मजबूरी में उन्हें अम्बेडकर के कमरे से बाहर आना पड़ा और नेहरू से उन्होंने कहा था कि “”ये आपने किस बीमार मानसिकता वाले व्यक्ति को ड्राफ्टिंग कमिटी का अध्यक्ष बना दिया,ये तो मानसिक उन्मादी प्रतीत होता है,इसमें दूरदर्शिता की भारी कमी और अंग्रेज़ियत मानसिकता की गन्दगी भरी है,अगर मैं भारत का प्रधानमंत्री होता तो इसे कब का इसके पद से हटा चूका होता,ये व्यक्ति भारत का दुर्भाग्य साबित होगा,तन से ज्यादा इसका मन काला है,हम हर गरीब दलित के हक़ की बात करने को तैयार है लेकिन इसका अर्थ ये तो नहीं की भूंखे मर रहे सवर्णों की क़ुरबानी दे दी जाये???”

ये सुनकर नेहरू मौन थे…उनके पास कोई जवाब न था…

अखंड भारत के जनक सरदार की मृत्यु हो गयी। जानकार कहते है की अगर सरदार ज़िंदा होते तो भारत का वो संविधान जो अम्बेडकर ने पेश किया था,वो लागू न हो पाता क्योंकि वो सबिधान देश को बर्बाद करने वाला एक कीटाणु था।

आरक्षण एक दीमक है देश में लगा हुआ !

Posted in आरक्षण

आरक्षण


सेवा में ,
माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी,
प्रधानमंत्री ,
भारत सरकार ,
नई दिल्ली

विषय- भारत में आरक्षण को समाप्त किये जाने एवं पदोन्नति में आरक्षण हेतु 117वें संबिधान संशोधन बिल को निरस्त किये जाने विषयक |

माननीय महोदय ,
सौभाग्य की बात है कि बहुत समय बाद भारत में आपके कुशल नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की केन्द्रीय सरकार विद्यमान है।
आपके मेक इन इंडिया , स्वच्छता अभियान व नोट बंदी जैसी कई योजनाओं का हम ह्रदय से पूर्ण समर्थन करते हैं ।
माननीय महोदय ,
जैसा कि आप जानते हैं कि समाज के पिछडे वर्गों के लिये संविधान में मात्र दस वर्षों के लिये आरक्षण की व्यवस्था की गयी थी, किन्तु जातिवादी व निहित कारणों से जाति आधारित आरक्षण की अवधि व क्रीमीलेयर की सीमा को बारंबार बिना समीचीन समीक्षा के बढाया जाता रहा है ,
जिसे कि 10– 10 वर्ष करते करते आज 67 वर्ष पूरे हो गए हैं ।
आज तक ऐसे आरक्षण प्राप्त डॉक्टर, इंजीनियर , प्रोफेसर , शिक्षक, कर्मचारी किसी ने नहीं कहा कि अब वह दलित या पिछड़ा नहीं रहा व अब उसे जातिगत आरक्षण की जरुरत नहीं है।
इससे सिद्ध होता है कि आरक्षण का आधार पिछड़ा वर्ग या समूह के बजाय जाति किये जाने से इन 67 सालों में कोई लाभ नहीं हुआ है।
महोदय ,
इस जाति आरक्षण का लाभ जहां कुछ खास लोग परिवार समेत पीढी दर पीढी लेते जा रहें हैं वहीं वे इसे निम्नतम स्तर वाले अपने ही जरूरतमंदों लोगों तक भी नहीं पहुंचने दे रहे हैं। अन्यथा इन 67 वर्षों में हर आरक्षित वर्ग के व्यक्ति तक इसका लाभ पहुँच चुका होता।
ऐसे तबके को वे केवल अपने बार बार लाभ हेतु संख्या या गिनती तक ही सीमित कर दे रहे हैं।
महोदय,
गरीबी जाती देखकर नहीं आती
आरक्षण का आधार जाति किये जाने से जहाँ सामान्य वर्ग के तमाम निर्धन व जरूरतमंद युवा बेरोजगार व हतोत्साहित हैं , कर्मचारी कुंठित व उत्साहहीन हो रहे हैं,
वहीं समाज में जातिवाद का जहर बड़ी तेज़ी से बढ़ता जा रहा है।
अत: आपसे निवेदन है कि राष्ट्र के समुत्थान व विकास के लिये संविधान में संशोधन करते हुये आरक्षण को समाप्त करने का कष्ट करेंगे ।
किसी भी जाति – धर्म के असल जरूरतमंद निर्धन व्यक्ति को आरक्षण नहीं बल्कि संरक्षण देना सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए ।

आरक्षण को पूर्ण रूप से समाप्त करने से पहले अगर वंचित वर्ग तक इसका ईमानदारी से वास्तव में सरकार लाभ पहुँचाना चाहती है तो इस आरक्षण को एक परिवार से एक ही व्यक्ति , केवल बिना विशेष योग्यता / कार्यकुशलता वाली समूह ग व घ की नौकरियों में मूल नियुक्ति के समय ही दिया जा सकता है।

आयकर की सीमा में आने वाले व्यक्ति के परिवार को आरक्षण से वंचित किया जाना चाहिये ताकि राष्ट्र के बहुमूल्य संसाधनों का सदुपयोग सुनिश्चित हो सके।

पदोन्नति में आरक्षण तो पूर्णत: बंद कराया ही जाना चाहिये जिससे कि योग्यता, कार्यकुशलता व वरिष्ठता का निरादर न हो।

आशा है कि महोदय राष्ट्र व आमजन के हित में इन सुझावों पर ध्यान देते हुये समुचित कार्यवाही करने व इस हेतु जन जागरण अभियान प्रारंभ कर मुहिम को अंजाम तक पहुंचाने का कष्ट करेंगे |
वन्दे मातरम् ।

Posted in आरक्षण

आरक्षण


अगर मैं भारत का प्रधानमंत्री होता तो अम्बेडकर को कभी भी ड्राफ्टिंग कमिटी का अध्यक्ष न बनाता—-सरदार वल्लभ भाई पटेल

सरदार पटेल और अम्बेडकर संवाद

संविधान निर्माण चल रहा था।। इसमें सरदार पटेल भी संविधान निर्माताओ की लिस्ट में शामिल थे। अम्बेडकर ने आरक्षण की भीख का तुर्रा छोड़ दिया।

सरदार पटेल–आरक्षण गलत है,इसको हटाओ

अम्बेडकर–नहीं,ये मेरी कौम के लोगो के लिए है

सरदार—कौन सी तुम्हारी कौम?? हम सब भारतीय है,आज़ादी के बाद आज देश का हर वर्ग भूँखा नंगा है…इसलिए किसी वर्ग विशेष को ये सुविधा देना गलत है…

अम्बेडकर(कुत्ते की तरह चीखते हुए)–मैं आरक्षण देना चाहता हु,अगर मुझे रोका गया तो मैं कानून मंत्री के पद से स्तीफा दे दूंगा

सरदार पटेल— देखो भीमराव,तुम वो नहीं देख पा रहे जो मैं देख पा रहा हु,स्वार्थ की राजनीति ने तुम्हारी आँखों में पट्टी बाँध दी है। अगर आज किसी जाति विशेष को आरक्षण दिया गया तो भविष्य के भारत में रोज एक नई जाति आरक्षण मांगेगी और देश की अखंडता पर खतरा उत्पन्न होगा….जो दलित और गरीब है उनके लिए हम दूसरे हर तरह के उपाय करने को तैयार है..जैसे मुफ़्त शिक्षा,मुफ़्त स्कूल,उनके लिए सस्ते घर,रोजगार इत्यादि….हम उन्हें इतना काबिल बनाये ताकि वो खुद के दम पर आगे बढ़ सके … न की आरक्षण की बैशाखी से या मुफ्तखोरी से….तुम किसी अयोग्य को सत्ता पर बैठाकर देश को बर्बाद क्यों करना चाहते हो???

अम्बेडकर(चीखते हुए)— आरक्षण होकर रहेगा…..

ये सुनकर लौह पुरुष सरदार पटेल,जो कभी किसी के आगे नहीं झुकते थे मजबूरी में उन्हें अम्बेडकर के कमरे से बाहर आना पड़ा और नेहरू से उन्होंने कहा था कि “”ये आपने किस बीमार मानसिकता वाले व्यक्ति को ड्राफ्टिंग कमिटी का अध्यक्ष बना दिया,ये तो मानसिक उन्मादी प्रतीत होता है,इसमें दूरदर्शिता की भारी कमी और अंग्रेज़ियत मानसिकता की गन्दगी भरी है,अगर मैं भारत का प्रधानमंत्री होता तो इसे कब का इसके पद से हटा चूका होता,ये व्यक्ति भारत का दुर्भाग्य साबित होगा,तन से ज्यादा इसका मन काला है,हम हर गरीब दलित के हक़ की बात करने को तैयार है लेकिन इसका अर्थ ये तो नहीं की भूंखे मर रहे सवर्णों की क़ुरबानी दे दी जाये???”

ये सुनकर नेहरू मौन थे…उनके पास कोई जवाब न था…

1950 को सरदार पटेल ने अंतिम साँस ली और अखंड भारत के जनक सरदार की मृत्यु हो गयी। जानकार कहते है की अगर सरदार ज़िंदा होते तो भारत का वो संविधान जो अम्बेडकर ने पेश किया था,वो लागू न हो पाता क्योंकि वो सबिधान देश को बर्बाद करने वाला एक कीटाणु था।

आरक्षण एक दीमक है देश में लगा हुआ ..

Posted in आरक्षण

एक सामान्य वर्ग के गरीब छात्र


 

एक सामान्य वर्ग के गरीब छात्र
का मोदी जी के नाम खुला ख़त …

आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र
मोदी जी…..
मै एक सामान्य वर्ग का छात्र हूँ , मेरे पिता का देहांत हो जाने
की वजह से मेरी माँ को घर चलाने में बहुत दिक्कते
आयीं। मैंने अपने गाँव के सरकारी स्कूल फिर कॉलेज
में पढाई की। सरकारी स्कूल
की फीस तक जुटाने में हमे हमेशा दिक्कत
होती थी जबकि मैंने देखा की कुछ वर्ग
विशेष के बच्चो को, आर्थिक रूप से संपन्न होने बावजूद भी,
फीस माफ़ थी और
वजीफा भी मिला करता था। मै पढ़ाई में अच्छा था।
इंटरमीडिएट पास करने के बाद मैंने मेडिकल फील्ड
चुना। एंट्रेंस एग्जाम के लिए फॉर्म खरीदा 650 रुपये
का जबकि सौरभ भारतीय नाम के मेरे दोस्त
को वही फॉर्म 250 का मिला। उसके पिता डॉक्टर हैं। एंट्रेंस
एग्जाम का रिजल्ट आया। सौरभ भारतीय का नंबर मेरे नंबर से
काफी कम था, पर उसे सिलेक्शन मिल गया, मुझे
नहीं। अगले साल मै भी सेलेक्ट हुआ। मैंने
देखा की बहुत से पिछड़े जाति के लोग, अनुसूचित जाति के
जनजाति के लोग जो हर मामले में मुझसे कहीं ज्यादा सुविधासंपन्न
हैं, उनको मुझसे बहुत कम फीस देनी पड़
रही है। उनके स्कॉलरशिप्स भी मुझे मिल
रही स्कालरशिप से बहुत ज्यादा है और उनका हॉस्टल
फीस भी माफ़ है। इंटर्नशिप बीतने के
बाद मुझे लगा की अब हम सब एक लेवल पर आ गए, अब
कम्पटीशन बराबर का होगा। पर मै गलत था। पोस्टग्रेजुएशन के
लिए प्रवेश परीक्षा में मेरा सहपाठी प्रकाश पासवान
मुझसे काफी कम नंबर पाते हुए मुझसे बहुत
अच्छी ब्रांच उठाता है।
प्रधानमंत्री जी ऐसा नौकरी के वक़्त
भी होगा।
प्रधानमंत्री जी मैंने आजतक कोई भेदभाव
नहीं किया। किसी को मंदिर में जाने से
नहीं रोका, किसी को कुएं से
पानी पीने से नहीं रोका,
किसी से छुआछूत नहीं की, अरे हम
सब लोग तो साथ साथ एक थाली में खाना खाते थे , इतिहास में
किसने किया, क्या किया उस बात के लिए मै दोषी क्यों? मुझसे क्यूँ
बदला लिया जा रहा है? मै तो खुद जीवन भर से
जातीय भेदभाव का शिकार होता रहा हूँ। क्या ऐसे में मैं जातिवाद से
दूर हो पाऊंगा? ऐसा मै इसलिए पूंछ रहा हूँ की जातिवाद ख़तम
करने की बात हो रही है तो जाति के आधार पर दिए
जा रहे आरक्षण के होते हुए जातिवाद ख़तम हो पायेगा? मुझे कतई
बुरा नहीं लगेगा अगर किसी गरीब
को इसका फायदा हो, लेकिन मैंने स्वयं देखा है की इसका 95
प्रतिशत लाभ उन्ही को मिलता है जिन्हें
इसकी जरुरत नहीं है। शिक्षित वर्ग से
उम्मीद की जाती है
की वो समाज को बटने से रोके। जातिगत आरक्षण खुद शिक्षित
समाज को दो टुकड़े में बाँट रहा है।
प्रधानमंत्री जी कम से कम इस बात
की विवेचना तो होनी चाहिए की आरक्षण
का कितना फायदा हुआ और किसको हुआ? अगर इसका लाभ गलत
लोगों को मिला तो सही लोगों तक पहुचाया जाना चाहिए। और अगर
लाभ नहीं हुआ तो इसका क्या फायदा, और अगर फायदा हुआ
तो फिर 67 सालों बाद भी इसकी जरुरत
क्यों बनी हुयी है?
प्रधानमंत्री जी ‘जाति के आधार पर
दिया जा आरक्षण’ साफ़ साफ़ योग्यता का हनन है, इससे हर वर्ग
की गुणवत्ता प्रभावित हुयी है। अगर जातिगत
आरक्षण इतना ही जरुरी है तो फ़ौज में, खेलों में,
राजनीतिक पार्टियों के अध्यक्ष के पद में,
मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के पदों के लिए
आरक्षण का प्रावधान क्यों नहीं किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री जी हमने आपको बहुत
ही साहसिक फैसले लेते हुए देखा है। शुद्ध
राजनीति से प्रभावित इस मुद्दे पर भी साहसिक फैसले
की जरुरत है। उम्मीद सिर्फ आपसे है।
आशा है की ये पत्र कभी आप तक पहुचे तो आप
‘साहसी’ बने रहेंगे।
आपके देश का एक गरीब सामान्य वर्ग का छात्र….!

Posted in आरक्षण

जातिवाद, छुआछूत नहीं है हिन्दू धर्म का हिस्सा


जातिवाद, छुआछूत नहीं है हिन्दू धर्म का हिस्सा

धर्म की गलत व्याखाओं का दौर प्राचीन समय से ही जारी है। ऋषि वेद व्यास ब्राह्मण नहीं थे, जिन्होंने पुराणों की रचना की। तब से ही वेद हाशिये पर धकेले जाने लगे और समाज में जातियों की शुरुआत होने लगी। क्या हम शिव को ब्राह्मण कहें? विष्णु कौन से समाज से थे और ब्रह्मा की कौन सी जाति थी? क्या हम कालीका माता को दलित समाज का मानकर पूजना छोड़ दें?
आज के शब्दों का इस्तेमाल करें तो ये लोग दलित थे- ऋषि कवास इलूसू, ऋषि वत्स, ऋषि काकसिवत, महर्षि वेद व्यास, महर्षि महिदास अत्रैय, महर्षि वाल्मीकि आदि ऐसे महान वेदज्ञ हुए हैं जिन्हें आज की जातिवादी व्यवस्था दलित वर्ग का मान सकती है। ऐसे हजारों नाम गिनाएं जा सकते हैं जो सभी आज के दृष्टिकोण से दलित थे। वेद को रचने वाले, मनु स्मृति को लिखने वाले और पुराणों को गढ़ने वाले ब्राह्मण नहीं थे।

अक्सर जातिवाद, छुआछूत और सवर्ण, दलित वर्ग के मुद्दे को लेकर धर्मशास्त्रों को भी दोषी ठहराया जाता है, लेकिन यह बिल्कुल ही असत्य है। इस मुद्दे पर धर्म शस्त्रों में क्या लिखा है यह जानना बहुत जरूरी है, क्योंकि इस मुद्दे को लेकर हिन्दू सनातन धर्म को बहुत बदनाम किया गया है और किया जा रहा है।

पहली बात यह कि जातिवाद प्रत्येक धर्म, समाज और देश में है। हर धर्म का व्यक्ति अपने ही धर्म के लोगों को ऊंचा या नीचा मानता है। क्यों? यही जानना जरूरी है। लोगों की टिप्पणियां, बहस या गुस्सा उनकी अधूरी जानकारी पर आधारित होता है। कुछ लोग जातिवाद की राजनीति करना चाहते हैं इसलिए वह जातिवाद और छुआछूत को और बढ़ावा देकर समाज में दीवार खड़ी करते हैं और ऐसा भारत में ही नहीं दूसरे देशों में भी होता रहा है।

दलितों को ‘दलित’ नाम हिन्दू धर्म ने नहीं दिया, इससे पहले ‘हरिजन’ नाम भी हिन्दू धर्म के किसी शास्त्र ने नहीं दिया। इसी तरह इससे पूर्व के जो भी नाम थे वह हिन्दू धर्म ने नहीं दिए। आज जो नाम दिए गए हैं वह पिछले 60 वर्ष की राजनीति की उपज है और इससे पहले जो नाम दिए गए थे वह पिछले 900 साल की गुलामी की उपज है।

बहुत से ऐसे ब्राह्मण हैं जो आज दलित हैं, मुसलमान है, ईसाई हैं या अब वह बौद्ध हैं। बहुत से ऐसे दलित हैं जो आज ब्राह्मण समाज का हिस्सा हैं। यहां ऊंची जाति के लोगों को सवर्ण कहा जाने लगा हैं। यह सवर्ण नाम भी हिन्दू धर्म ने नहीं दिया।

भारत ने 900 साल मुगल और अंग्रेजों की गुलामी में बहुत कुछ खोया है खासकर उसने अपना मूल धर्म और संस्कृति खो दी है। खो दिए हैं देश के कई हिस्से। यह जो भ्रांतियां फैली है और यह जो समाज में कुरीरियों का जन्म हो चला है इसमें गुलाम जिंदगी का योगदान है। जिन लोगों के अधिन भारतीय थे उन लोगों ने भारतीयों में फूट डालने के हर संभव प्रयास किए और इसमें वह सफल भी हुए।

अब यह भी जानना जरूरी है कि हिन्दू धर्म के शास्त्र कौन से हैं। क्योंकि कुछ लोग उन शास्त्रों का हवाला देते हैं जो असल में हिन्दू शास्त्र नहीं है। हिन्दुओं का धर्मग्रंथ मात्र वेद है, वेदों का सार उपनिषद है जिसे वेदांत कहते हैं और उपनिषदों का सार गीता है। इसके अलावा जिस भी ग्रंथ का नाम लिया जाता है वह हिन्दू धर्मग्रंथ नहीं है।

मनुस्मृति, पुराण, रामायण और महाभारत यह हिन्दुओं के धर्म ग्रंथ नहीं है। इन ग्रंथों में हिन्दुओं का इतिहास दर्ज है, लेकिन कुछ लोग इन ग्रंथों में से संस्कृत के कुछ श्लोक निकालकर यह बताने का प्रयास करते हैं कि ऊंच-नीच की बातें तो इन धर्मग्रंथों में ही लिखी है। असल में यह काल और परिस्थिति के अनुसार बदलते समाज का चित्रण है। दूसरी बात कि इस बात की क्या ग्यारंटी की उक्त ग्रंथों में जानबूझकर संशोधन नहीं किया गया होगा। हमारे अंग्रेज भाई और बाद के कम्यूनिष्ट भाइयों के हाथ में ही तो था भारत के सभी तरह के साहित्य को समाज के सामने प्रस्तुत करना तब स्वाभाविक रूप से तोड़ मरोड़कर बर्बाद कर दिया।

कर्म का विभाजन- वेद या स्मृति में श्रमिकों को चार वर्गो- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व शूद्र-में विभक्त किया गया है, जो मनुष्यों की स्वाभाविक प्रकृति पर आधारित है। यह विभक्तिकरण कतई जन्म पर आधारित नहीं है। आज बहुत से ब्राह्मण व्यापार कर रहे हैं उन्हें ब्राह्मण कहना गलत हैं। ऐसे कई क्षत्रिय और दलित हैं जो आज धर्म-कर्म का कार्य करते हैं तब उन्हें कैसे क्षत्रिय या दलित मान लें? लेकिन पूर्व में हमारे देश में परंपरागत कार्य करने वालों का एक समाज विकसित होता गया, जिसने स्वयं को श्रेष्ठ और दूसरों को निकृष्ट मानने की भूल की है तो उसमें हिन्दू धर्म का कोई दोष नहीं है। यदि आप धर्म की गलत व्याख्या कर लोगों को बेवकूफ बनाते हैं तो उसमें धर्म का दोष नहीं है।

प्राचीन काल में ब्राह्मणत्व या क्षत्रियत्व को वैसे ही अपने प्रयास से प्राप्त किया जाता था, जैसे कि आज वर्तमान में एमए, एमबीबीएस आदि की डिग्री प्राप्त करते हैं। जन्म के आधार पर एक पत्रकार के पुत्र को पत्रकार, इंजीनियर के पुत्र को इंजीनियर, डॉक्टर के पुत्र को डॉक्टर या एक आईएएस, आईपीएस अधिकारी के पुत्र को आईएएस अधिकारी नहीं कहा जा सकता है, जब तक की वह आईएएस की परीक्षा नहीं दे देता। ऐसा ही उस काल में गुरुकुल से जो जैसी भी शिक्षा लेकर निकलता था उसे उस तरह की पदवी दी जाती थी।

इस तरह मिला जाति को बढ़ावा- दो तरह के लोग होते हैं- अगड़े और पिछड़े। यह मामला उसी तरह है जिस तरह की दो तरह के क्षेत्र होते हैं विकसित और अविकसित। पिछड़े क्षेत्रों में ब्राह्मण भी उतना ही पिछड़ा था जितना की दलित या अन्य वर्ग, धर्म या समाज का व्यक्ति। पीछड़ों को बराबरी पर लाने के लिए संविधान में प्रारंभ में 10 वर्ष के लिए आरक्षण देने का कानून बनाया गया, लेकिन 10 वर्ष में भारत की राजनीति बदल गई। सेवा पर आधारित राजनीति पूर्णत: वोट पर आधारित राजनीति बन गई।

(हिन्दू जागरण से साभार)

Posted in आरक्षण

​आरक्षण एक संवैधानिक बाध्यता है। सवर्ण समाज को आरक्षण विरोध के लिए नहीं बल्कि स्वयं के अधिकारों के लिए,आरक्षण की मांग करना होगा:—-(ध्यान से पढ़ें)

******************************

श्रीमान प्रधानमंत्री महोदय,

आप एक ईमानदार व्यक्ति हैं, ऐसा मेरा विश्वास है।

क्या इस देश के सामान्य वर्ग (सवर्ण समाज )को, सामूहिक आत्महत्या के लिए विवश नहीं किया जा रहा है ??

*****************************

विषय:– सवर्ण आयोग का गठन

         ***********************

(सन्दर्भ, समाचार, 10 फ़रवरी, दैनिक अमर उजाला )

महोदय,

     राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) ने निजी क्षेत्र की नौकरियों में, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों को 27% आरक्षण देने की सिफारिश की है।

   सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन गठित, संवैधानिक निकाय (NCBC) ने कहा है कि केंद्र सरकार ऐसा कानून बनाये जिससे उद्योग, कारोबार,अस्पताल, स्कूलों, ट्रस्टों समेत निजी संगठनों में भी, अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 27% आरक्षण की व्यवस्था अनिवार्य रूप से करनी पड़े।

    राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के एक सदस्य ने कहा कि सरकारी सेक्टर में अब बहुत कम मौके रह गए हैं, इसलिए अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को नौकरी देने के लिए अब निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की जरुरत है।

प्रधानमंत्री महोदय,

इस सम्बन्ध में कृपया निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार की आवश्यकता है:—–

*********

(1)भारत के संविधान में इस देश के सभी नागरिकों में, धर्म, वर्ग, सम्प्रदाय, जाति, लिंग आदि के आधार पर किसी प्रकार के भेद भाव का निषेध किया गया है। देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए गए हैं।संविधान की मूल भावना की रक्षा करना आप का कर्तव्य और उत्तरदायित्व हैं।

(2) किसी भी प्रकार के भेद भाव को दूर करने के लिए, समय समय पर केंद्र और राज्य सरकारें आयोग का गठन करती रही हैं, और उनकी सिफारिशों को लागू करती रही हैं।उन आयोगों में जैसे:–

(3)अल्पसंख्यक आयोग:–

मुस्लिम,ईसाई, बौद्ध, सिख, जैन, पारसी आदि समुदायों के लिए बना है, जिसके अध्यक्ष आम तौर पर मुस्लिम ही बनाये जाते हैं, जो केवल मुस्लिम हितों की ही बात करते हैं।

(4)अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग के अध्यक्ष भी उसी जाति के होते हैं।

(5)अन्य पिछड़ा आयोग (OBC) का अध्यक्ष भी कोई पिछड़ा ही होता है।

(6) महिला आयोग का अध्यक्ष भी कोई महिला ही होगी, पुरुष नहीं हो सकता।

   ये सभी आयोग अपने अपने धर्म, जाति, वर्ग, समुदाय  की उन्नति के लिए ही कार्य करते हैं।

******************** 

हम सामान्य वर्ग के लोगों के लिए ऐसा कोई संवैधानिक आयोग नहीं है जो हमारी गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी आदि का वास्तविक मूल्याङ्कन कर केंद्र सरकार को उचित जानकारी दे सके।

********

जबकि उपरोक्त आयोग, सरकारी सुविधाओं और अन्य संसाधनों का अधिक से अधिक लाभ अपने समुदाय को देने के लिए, राजनैतिक दलों और सरकार पर दबाव डालते रहते हैं और उसमें सफल भी रहते हैं।

ये कुछ ऐसा ही है कि ” अँधा बाँटे रेवड़ी फिर फिर अपनों को देय।”

(अभी अभी अन्य पिछड़ा आयोग ने क्रीमी लेयर की सीमा 15 लाख रूपये प्रतिवर्ष करने की सिफारिश की है–इसका मतलब है 1,25000₹ मासिक आय वालों को भी आरक्षण दिया जाये)

**जैसे दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने विधायकों की सैलरी 400% बढ़ा दिया, और उधर तेलंगाना सरकार ने भी उसी का अनुकरण किया।

********

ये तो कुछ ऐसा ही हो रहा है जैसे न्यायालय में न्यायाधीश की कुर्सी पर किसी दुर्दांत अपराधी को बैठाकर, उसे अपने ही गैंग के अपराधियों की लूट, डकैती, बलात्कार, हत्या आदि जघन्य अपराधों पर न्याय करने का अधिकार दे दिया जाये।

 आप अनुमान लगा सकते हैं कि फिर न्याय कैसा होगा ??

*********

सामान्य वर्ग (सवर्णों ) के लिए ऐसा कोई आयोग (सवर्ण आयोग ) नहीं है जो उनके आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, पिछड़ेपन का मूल्यांकन कर सके तथा केंद्र व राज्य सरकारों को उनकी उन्नति के लिए उचित सुझाव दे सके।

*******

   इन सब से सनातनी हिन्दू (सवर्ण सामान्य वर्ग ) इस देश में दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया गया है, और उन्हें सरकारी नौकरियों, सरकारी सुविधाओं जैसे– शिक्षा, क्षात्रवृत्ति, इंदिरा आवास, बीपीएल आदि से वंचित कर दिया गया है।

अब अन्य पिछड़ा आयोग(NCBC) ने सरकारी क्षेत्र में पूर्णतया कब्ज़ा जमाने के बाद अब प्राइवेट सेक्टर में भी, सभी क्षेत्र में 27% आरक्षण का कानून बनाने की सिफारिश सरकार से कर दी है।

*******

वर्तमान स्थिति में हम सनातनी हिन्दू (सवर्ण,सामान्य वर्ग) आधिकारिक रूप से, अपने ही देश में,पाकिस्तान, बांग्लादेश के पददलित हिंदुओं की ही तरह उपेक्षित और सरकारी संसाधनों, सुविधाओं, नौकरियों आदि से क़ानूनी रूप से, वंचित और अपमानित, और प्रताड़ित किये जा रहे हैं। जैसे कि उत्तर प्रदेश में दयाशंकर सिंह की बेटी और पत्नी स्वाति सिंह के सार्वजनिक अपमान के रूप में हुआ।

    अतः श्रीमान से विनम्र निवेदन है कि भारत में, सनातनी हिंदुओं (सवर्ण,सामान्य वर्ग) की गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, सामाजिक स्थिति आदि का वास्तविक मूल्यांकन करने के लिए, हमारे नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए, अविलंब एक सवर्ण आयोग का गठन सुनिश्चित करें।

   और जब तक यह सवर्ण आयोग का सर्वेक्षण,वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट केंद्र सरकार को न दे, तब तक अन्य सभी जाति, वर्ग,धर्म, लिंग के आधार पर बने आयोगों की सभी सिफारिशों को स्थगित रखा जाये। आप से हम उचित न्याय की उम्मीद रखते हैं।

आप हमारी एक मात्र आशा की किरण हैं।

निवेदक:– हम हैं इस देश के राष्ट्रवादी किन्तु भारत सरकार द्वारा उपेक्षित नागरिक।

#PMOINDIA

************************

वंदे मातरम्

मित्रों ! यदि सहमत हैं तो शेयर करें और इस आवेदन को PMO को फैक्स निम्न पते पर करें:–

Shri Narendra modi,

The honourable Prime Minister of India.

152, south block,

Raisina Hill 

New Delhi-110011

Phone +91–11–23012312, 23018939

FAX +91–11–23016857

*************

आवाज उठाओ, चुप्पी तोड़ो !

Posted in आरक्षण

“आओ मिलकर आग लगाएँ”


“आओ मिलकर आग लगाएँ”

आओ मिलकर आग लगाएँ,
नित-नित नूतन स्वांग करें!
पौरुष की नीलामी कर दें,
आरक्षण की माँग करें!!

पहले से हम बँटे हुए हैं,
और अधिक बँट जाएँ हम!
100 करोड़ हिन्दू हैं मिलकर,
इक दूजे को खाएँ हम!!

देश मरे भूखा चाहे पर,
अपना पेट भराओ जी!
शर्माओ मत…भारत माँ के,
बाल नोचने आओ जी!!

तेरा हिस्सा मेरा हिस्सा,
किस्सा बहुत पुराना है!
हिस्से की रस्साकसियों में
भूल नहीं ये जाना है!!

याद करो भूखण्डों पर हम,
आपस में टकराते थे!
गज़नी कासिम बाबर मौका,
पाते ही घुस आते थे!!

अब हम लड़ने आए हैं,
आरक्षण की रोटी पर,
जैसे कुत्ते झगड़ रहे हों,
कटी गाय की बोटी पर!!

हमने कलम किताब लगन को,
दूर बहुत ही फेंका है!
नाकारों को खीर खिलाना,
संविधान का ठेका है!!

मैं भी पिछड़ा…मैं भी पिछड़ा,
कहकर बनो भिखारी जी!
ठाकुर पंडित बनिया सब के
सब कर लो तैयारी जी!!

जब पटेल के कुनबों की,
थाली खाली हो सकती है!
कई राजपूतों के घर भी,
कंगाली हो सकती है!!

बनिए का बेटा रिक्शे की,
मज़दूरी कर सकता है!
और किसी वामन का बेटा,
भूखा भी मर सकता है!!

आओ इन्हीं बहानों को,
लेकर सड़कों पर टूट पड़ो!
अपनी अपनी बिरादरी का,
झंडा लेकर छूट पड़ो!!

शर्म करो, हिन्दू बनते हो,
नस्लें तुम पर थूकेंगी!
बँटे हुए हो जाति पंथ में,
ये ज्वालाएँ फूकेंगी!

मैं पटेल हूँ मैं गुर्जर हूँ,
लड़ते रहिए शानों से!
फिर से तुम जूते खाओगे,
गजनी की संतानो से!!

ऐसे ही हिन्दू समाज के
कतरे-कतरे कर डालो!
संविधान को छलनी कर के,
गोबर इसमें भर डालो!!

“राम-राम” करते इक दिन तुम,
“अस्सलाम” हो जाओगे!
बँटने पर ही अड़े रहे तो,
फिर गुलाम हो जाओगे…।।

Posted in आरक्षण

संविधान


Mukesh Sharma

डा• भीमराव अम्बेडकर संविधान निर्माता नहीं कारण पूर्ण स्पष्टीकरण के साथ संलग्न कर रहा • भीमराव अम्बेडकर संविधान निर्माता नहीं ( 2012 में आदरणीय अग्रज श्री कुणाल शुक्ला द्वारा आरटीआई के जबाब में हुआ खुलासा)

2-: संविधान को लिखने का कार्य उस समय दिल्ली के निवासी श्री प्रेम बिहारी नारायण रायजादा( सक्सेना) ने किया
जिसमें 254 पेन होल्डर और 303 निब खर्च हुईं।
Cabinet Mission Plan of 1946 के अन्तर्गत देश में संविधान सभा की स्थापना हुई। कुल सदस्यों की संख्या 389 members representing provinces (292), states (93), the Chief Commissioner Provinces (3) and Baluchistan (1).

सभा की पहली बैठक दिसम्बर 9, 1946 को हुई , जिसमें Dr. Sachhidanand Sinha, the oldest member of the Assembly को Provisional President बनाया गया।
दिसम्बर 11, 1946, को डा• राजेन्द्र प्रसाद को स्थाई चेयर मैन सभा ने चुना। विभाजन के बाद सदस्य संख्या घट कर 299 रह गयी।
3-: संविधान बनाने के लिये बहुत सारी समितियों का निर्माण हुआ जिसमें 8 मुख्य समितियाँ एवं 15 अन्य समितियाँ थी।
Major Committees
1. Union Powers Committee – Jawaharlal Nehru
2. Union Constitution Committee – Jawaharlal Nehru
3. Provincial Constitution Committee – Sardar Patel
4. Drafting Committee – Dr. B.R. Ambedkar
5. Advisory Committee on Fundamental Rights and Minorities
Sardar Patel. This committee had two sub-committes:
(a) Fundamental Rights Sub-Committee – J.B. Kripalani
(b) Minorities Sub-Committee – H.C. Mukherjee
6. Rules of Procedure Committee – Dr. Rajendra Prasad
7. States Committee (Committee for Negotiating with States) – Jawaharlal Nehru
8. Steering Committee – Dr. Rajendra Prasad

Minor Committees
1. Committee on the Functions of the Constituent Assembly – G.V. Mavalankar
2. Order of Business Committee – Dr. K.M. Munshi
3. House Committee – B. Pattabhi Sitaramayya
4. Ad-hoc Committee on the National Flag – Dr. Rajendra Prasad
5. Special Committee to Examine the Draft Constitution – Alladi Krishnaswamy Ayyar
6. Credentials Committee – Alladi Krishnaswamy Ayyar
7. Finance and Staff Committee Sinha
8. Hindi Translation Committee
9. Urdu Translation Committee
10. Press Gallery Committee
11. Committee to Examine the Effect of Indian Independence Act of 1947
12. Committee on Chief Commissioners’ Provinces
13. Commission on Linguistic Provinces
14. Expert Committee on Financial Provisions
15. Ad-hoc Committee on the Supreme Court

—————————————————————

जिस समिति को अभी तक हमें सबसे अधिक महत्व पूर्ण बताया गया ड्राफ्टिंग कमेटी ये थी वो कमेटी 1. Dr B R Ambedkar (Chairman)
2. N Gopalaswamy Ayyangar
3. Alladi KrishnaswamyAyyer
4. Dr K M Munshi
5. Syed Mohammad Saadullah
6. N Madhava Rau (He replaced B L Miner who resigned due to ill-health)
7. T T Krishnamachari (He replaced D P Khaitan who died in 1948)
—————————————————————-

यहाँ पर अब मैं आपका ध्यान खींचना चाहूँगा कि संविधान को ड्राफ्ट करने में उसके credentials और ड्राफ्ट को परफेक्ट करने में सबसे बड़ा योगदान रहा
श्री अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर का (Alladi Krishnaswamy Ayyar)
ना कि भीम राव अम्बेडकर का।
—————————————————————–

उसके बाद अब उसी विरोध पर आता हूँ from article 330 से 340 तक special provisions relating to certain classes. इस वैकल्पिक व्यवस्था को 70 साल तक बनाये रखने के पीछे कब किसने क्या समीक्षा की उसका आज तक कुछ पता नहीं चला। संविधान में schedule castes/schedule tribes की और backward classes की बात की गयी पर सामान्य की कहीं कोई सुनवाई नहीं आखिर क्यों? फिर संविधान की सपथ में क्यों लिखा गया
“Equality of status and opportunity.”
—————————————————————–
इसके अतिरिक्त उल्लेख मिलता है कि संविधान कोई original document नहीं है। बस cut- paste है।
—————————————————————–
जब तक देश के संविधान में 21 वीं सदी के भारत के निर्माण हेतु पर्याप्त संशोधन नहीं हो जाते to kya yae savarno ka hath pe hath rakh ke baithne ka samay he kya?

UTHO ek ho zao aur apni awaz buland karo aur poocho kio 70 saal tak ye vote bank ka natak chal raha hae iske peechae kis kis dal ka selfish interest chuupa hua he?

उठो सवर्णो एक हो जाओ इन खुद गरज नेताओं से पूछो क्यों ये 70 सालो से नाटक Conspiracy चल रही हे गरीब सवर्णो के खिलाफ? बाकि जात के गरीब बच्चे क्या इस देश के नागरिक नहीं हे क्या, बार बार हाई और सुप्रीम कोर्ट्स के कहने पर भी क्यों कान पे जु नहीं रेग रही

Posted in आरक्षण

सबसे बड़ा संगठन होते हुये भी आर एस एस आरक्षण पर मौन है,प्रतिभाओं की हत्यायें और आत्म हत्यायें विचलित नहीं करती आर एस एस को।
मोहन भागवत जी ने डरते डरते समीक्षा की बात बोली बाद में बैक फ़ुट पर आ गये।
अब संघ को भी वोटवैंक की चिंता है भाजपा के लिए।
सवर्ण जाएँ भाड़ में।

आरक्षण संघर्ष समन्वय समिति's photo.
Posted in आरक्षण

नोट:- पता नहीं इस पोस्ट को किसने लिखा है लेकिन सभी मित्रों से निवेदन है कि इसे पढ़ें अवश्य और संभव हो सके तो फॉरवर्ड भी करें

एक सज्जन से एक सवाल पूछा गया कि भारत में जनरल कैटेगरी वाला होने पर आपका क्या अनुभव है तो उन्होंने जो जबाब दिया, उसे पढ़िए……..(हिंदी में अनुवाद)
………………..

प्रवेश परीक्षा:
मेरा स्कोर :192
उसका स्कोर :92
जी हाँ हम एक ही कॉलेज में पढ़े…..
_____________

College Fees,
मेरी हर सेमिस्टर की फी 30200. (मेरे परिवार की आय 5 lacs से कम है..)
उसकी हर सेमिस्टर की फी 6600. (उसके माता और पिता दोनों अच्छा कमा रहे हैं……)
जी हाँ हम दोनों एक ही होस्टल में रहते थे…
_______________

Mess Fees,
मैंन 15000/- हर सेमिस्टर के देता था….
वो भी 15000 हर सेमिस्टर के देता था लेकिन सेमिस्टर के अंत में वो उसे रिफंड होते थे…..
जी हाँ हम एक ही मेस में खाते थे….
_________________

Pocket Money,
मेरा खर्चा 5000 था जो कि मैं ट्यूशन और थोड़ा बहुत अपने पिता से लेता था…
वो10000 खर्चा करता था जो कि उसे स्कॉलरशिप के मिलते थे…
जी हाँ हम एक साथ पार्टी करते थे….
___________

CAT 2015,
मेरा स्कोर : 99 percentile. (किसी IIM से एक मिसकॉल का इंतज़ार रहा.)
उसका स्कोर : 63 percentile. ( IIM Ahemedabad के लिए सलेक्ट हुआ)
जी हाँ ऐप्टीट्यूड और रीजनिंग उसे मैंने पढ़ाया था….
_______________

OIL Campus recruitement,
मैं : Rejected. (My OGPA 8.1)
वो : selected. (His OGPA 6.9)
जी हाँ हमने एक ही कोर्स पढ़ा था…
______________

GATE Score,
मेरा स्कोर : 39.66 (डिसक्वालीफाईड सो INR 1,68,000 की स्कॉलरशिप भी हाथ से गई )
उसका स्कोर : 26 (क्वालीफाईड और INR 1,68,000 के साथ-साथ अतिरिक्त स्कॉलरशिप भी)
जी हाँ हमने एक जैसे नोट्स शेयर किये थे…
______________

कौन हूँ मैं ????
मैं भारत में एक जनरल कैटेगरी का छात्र हूँ…
______________

दिमाग में बस कुछ सवाल हैं…..

क्या उसके पास चलने के लिए दो पैर नहीं हैं ??
क्या उसके पास लिखने या काम करने के लिए दो हाथ नहीं हैं ??
क्या उसके पास बोलने के लिए मुंह नहीं है ??
क्या उसके पास सोचने के लिए दिमाग नहीं है ??
अगर हैं तो फिर हम दोनों को एक जैसा ट्रीटमेंट क्यों नहीं मिलता ???

ये बात राजनितिक पार्टीयो के बजाय देश के सम्माननीय. न्यायालय के सभी  महानुभावों तक पहुंचे
तब तक forward करे

ताकि देश आरक्षण की दीमक से बरबाद होने से बच जाये