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खुली चुनौती


खुली चुनौती

वो कहते है हमे जाति कि वजह से मंदिर नही जाने दिया जाता । मै कहेता भारत के कौन से मंदीर मे दर्शन के लिए जातिगत प्रमाण पत्र लगता है ?

वो कहते है हम से कई हजार साल तक मैला उठाया गया मैं कहता हूं आज 2017 मे गांव के अंदर जिन लोगों के पास शौचालय नहीं है ऐसे लोग सड़क किनारे । रेलवे पटरी पर । खेत में शौच करने जाते हैं तो मैला उठवाने वाली बात कहां से आ गई ?

वो कहते हैं मनु स्मृति के हिसाब से हम पर अत्याचार किया गया । इस पर में थोड़ा विस्तृत बात करना चाहूंगा । पहली बात 1947 में आजादी के बाद भी भारत में सैकड़ों रियासते थी ऐसे सैकड़ों राजा राजवाडा थे जो अपने क्षेत्र में अपना नियम चलाते थे । किसी तरह उन्हें एक किया गया । थोड़ा पीछे चलिए तो 200 वर्ष तक लगभग अंग्रेजो ने भारत को गुलाम बनाए रखा और उससे पहले 500 वर्ष के आसपास मुगल आक्रमणकारीयो ने भारत को गुलाम बना कर रखा । अंग्रेज और मुगलो के समय भारत मे मनु स्मृती लागु थी इसका कोई प्रमाण इतिहास में है ही नहीं । अब बात करते हैं मुगलों से पहले भारत की तो उस समय भी भारत हजारों रियासतों रजवाड़ों में बॅटै हुआ था उस समय भी इस बात के प्रमाण नहीं है कि पूरे भारत में मनुस्मृति लागू थी और यह संभव ही नहीं है आज भी भारत के 29 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में अलग अलग तरह की भाषाएं हैं तो यह कहना कदाचित उचित नहीं होगा कि एक हजार वर्ष पहले संस्कृत भाषा की मनुस्मृति को पूरे भारतवर्ष में सामाजिक स्तर पर कुछ खास लोगो पे लागु किया गया था । और एक बात मनुस्मृति की ओरिजिनल कॉपी है कहा ?किसके पास है । दूसरी बात आज जो मनुस्मृति यह लोग जलाते हैं वह मनु स्मृति छापते भी यही लोग है । अगर पूरे भारत में एक सर्वे किया जाए किस के घर में मनुस्मृति है तो मैं समझता हु किसी हिन्दु के घर से मनुस्मृति नहीं मिलेगी । मनु स्मृती मिलेगी तो सिर्फ और सिर्फ #चाइनीज #दलाल और #वामपंथियों के पास । कुल मिलाकर मनु स्मृति के नाम पर जो यह झूठ फैला रहे हैं उसमें चित और पट दोनो इनका ही है । मतलब मनुस्मृति छापते भी यही है और जलाते भी यही है । अन्य किसी को कोई मतलब नही है

वो कहते हैं हमारे साथ आज भी जाति के नाम पर भेदभाव होता है । मैं पूछता हूं आज #हॉस्पिटल #बस #रेल #होटल #स्कूल कोई एक जगह का नाम बता दो जहां पर लोगों को जाति के आधार पर व्यवस्था दी गई हो । बैठने की । उठने की । खाने की । सोने की । चलने कि । बोलने कि ?

कुल मिलाकर ये लोग गरीब हिन्दुओ को गुमराह करके अपनी रोजी-रोटी चलाते है । चाइनीज दलालों का मकसद देश मे गृह युध्द करवाना है । अगर किसी चाइनीस दलाल में हिम्मत है बहस करने का

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🙏✍
*हिन्दू धर्म में सवर्ण-दलित में भेदभाव एक षड्यंत्र है, अपनी संस्कृति को समझे और इस षड्यंत्र से बचे —–*
दोस्तों आप सभी जानते हैं की भारत की प्राचीन सामाजिक व्यवस्था कर्मो पर ही आधारित थी (वेद क्या कहते हैं शूद्रों के बारे में —-
शूद्रो ब्राह्मणतामेति ब्राह्मणश्चैति शूद्रताम्।

क्षत्रियाज्जातमेवं तु विद्या द्वैश्यात्तथैव च।—- 
*अर्थात श्रेष्ठ -अश्रेष्ठ कर्मो के अनुसार शूद्र ब्राह्मण और ब्राह्मण शूद्र हो जाता है। जो ब्राह्मण ,क्षत्रिय वैश्य और शूद्र के गुणों वाला हो वह उसी वर्ण का हो जाता है।)*
और सनातन धर्म को कमजोर करने के उदेश्य से ही मुगलों ने हिन्दू लोगो को आपस में तोडना सुरु कर दिया था याद रहे दलित एक योधा जाती थी जिसने मुगलों को भारत में परवेश करने के लिए बहुत टक्कर दी थ,
आज भी इसी प्रकार हिन्दू एकता को देख बहुत से राजनितिक दल डर चुके हैं और अब वह हिन्दू वोट को तोड़ने के लिए उन्हें आपस में जाती के नाम पर लडवाना सुरु कर दिए हैं 
भाइयो हमें इस षड्यंत्र को समझना होगा और जो भी लोग सवर्ण एवं दलित समुदाय में भेदभाव पैदा कर रहे हैं उनसे सावधान रहना होगा ।
आज कल सवर्ण एवं दलित समुदाय कुछ लोग रामचरितमानस की किसी चौपाई का गलत अर्थ,या किसी वेद,पुराण के श्लोक का गलत अर्थ निकाल कर हिंदुओं को आपस में लड़ा रहे हैं,
 ये सब ये दिखाने में लगें हैं की पूर्व के युगों में दलितों के साथ कैसा व्यवहार होता था जबकि उसी युग में एक मछुआरन की संतान वेदव्यास ने महाभारत लिखी थी, और त्रेता युग में दलित वाल्मीकि ने रामायण लिखी थी।
हिडम्बा 1 दलित थी आज उसी हिडम्बा के पोते खांटू श्याम को भगवान की तरह पूजा जाता है । श्री राम जी ने एक दलित के झूटे बैर खायें थे, प्रभु श्री राम जी ने एक दलित को गले लगाया था ।
ध्यान रहें…
*न्याय – अन्याय हर युग में होते हैं और होते रहेंगे, अहंकार भी टकराएंगे… कभी इनका तो कभी उनका ,यह घटनायें दुर्भाग्यपूर्ण होती हैं पर उससे भी दुर्भाग्यपूर्ण होता है इनको जातिगत रंग देकर उस पर विभाजन की राजनीति करके राष्ट्र को कमजोर करना।*
यदि किसी ने भीमराव अंबेड़कर का अपमान किया तो किसी सवर्ण ने ही उनको पढाया भी । किसी एक घटना को अपने स्वार्थ के लिए बार -बार उछालना और बाकी घटनाओ पर मिट्टी डालना कौन सा चिंतन है,
 यह दलित चिंतन नहीं बल्कि विश्व में अल्पसंख्यक हिन्दू समाज को खत्म करने के अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्र के तहत केवल विधर्म प्रेरित राष्ट्रद्रोहियों द्वारा थोपा हुआ दोगला चिंतन है। क्योंकि सदियों की गुलामी अत्याचार के बाद भी हिन्दू न मिट पाए न धर्मांतरित हो पाए।
अतः इससे बच कर दलित-सवर्ण (हिन्दुओं) में षड्यंत्रकारियों द्वारा उपजाए जा रहे भेदभाव को नष्ट करके हिन्दू धर्म की महानता की रक्षा करने का प्रण करें और एक बने रहें। इसलिए भईया सब हिंदु भाई सावधान हो जाओं वरना पक्षताने के सिवाय कुछ नहीं मिलेगा।
आप सभी से निवेदन है की राजनितिक पार्टियों व स्वार्थी व्यक्तियों के बहकावे में न आएं हिंदुत्व को एकजुट करें

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मीरा कुमार ने ब्राह्मण से शादी की वह अब भी “दलित” हैं, प्रो विवेक कुमार, भीमराव सकपाल जी सहित कईयों ने ब्राह्मण से विवाह किया, लेकिन “दलित” ही बने रहे, यह “दलित” बनना कौन से जमाने में लिखी मनुस्मृति के कानून से चल रहा है?  
क्योंकि मनुस्मृति में शूद्र का वर्णन है न कि मिशनरियों के “पंचम वर्ण”, “अछूत”, और फुले के “आदिशूद्र” व संविधान के “अनुसूचित जाति” का!!
एक व्यक्ति जो 1978 में भारत के सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकार्ड बन गया , दो बार राज्य सभा का सांसद रह लिया , पूरी उम्र एक काबिल वकील के जैसे जिया और वर्तमान में गवर्नर के पद पर मनोनीत हो कर देश सेवा  में रत है आज उसका नाम राष्ट्रपति पद के लिए मनोनीत हुआ है तो उसका परिचय एक दलित के जैसे करवाया जा रहा है | 
शेम ऑन अस | आम भारतीय कभी एक न हो पाएं इसके लिए संस्थान गढ़ लिए हैं, टर्मिनोलॉजी गढ़ ली है | एक दलित व्यक्ति कब सामान्य बनेगा इसके लिए कितना समय चाहिए या वो अपनी तमाम उपलब्धियों के बावजूद भी क्या दलित ही गिना जाएगा ?
ईसाई जान दयाल भी खुद को दलित बताता है जबकि अनुसूचित जाति का व्यक्ति हिंदु,  बौद्ध,  सिक्ख के अलावा कानूनी रूप से कोई अन्य नहीं हो सकता। 
मूल संविधान में केवल हिंदू अनुसूचित जाति की मान्यता है।  यह सब ढपोरशंख “दलित” बन कर जोशुआ प्रोजेक्ट के एजेंट हैं।
कांचा इलैया की जाति कुरूमा गोल्ला,  भेड़पालक, तेलंगाना में ओबीसी है, यह फर्जी रोहित वेमुला की तरह अनुसूचित जाति का आभास देता है छद्म-ईसाई एजेंडा के तहत।
दिलीप मंडल ने भी ब्राह्मण अनुराधा से विवाह किया लेकिन यह भी दलित-बहुजन राग ही टर्राता है, …. इन सब कठपुतलियों के पीछे है जोशुआ प्रोजेक्ट।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय के लिए जिसकी अंतिम ज्ञात व्यवस्था के अनुसार सामान्य वर्ग में आरक्षित पुरूष विवाह करेगा तो वह पुरूष व संतति आरक्षित माने जायेंगे व विवाह करने वाली सामान्य महिला ही रहेगी। तथा कोई आरक्षित महिला यदि अनारक्षित सामान्य वर्ग में विवाह करे तो महिला को आरक्षित दर्जा मिलता रहेगा परंतु विवाहित पुरूष व संतति अनारक्षित सामान्य वर्ग के माने जायेंगे।
अब दलित शब्द की सरकारी व्याख्या की जानी अत्यंत आवश्यक है नहीं तो समाज कभी एक नहीं हो पायेगा , आगे नहीं बढ़ पायेगा |
आदर

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आरक्षण


“करता हूं अनुरोध आज मैं , भारत की सरकार से ,”
“प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से………”
“वर्ना रेल पटरियों पर जो , फैला आज तमाशा है ,”
“जाट आन्दोलन से फैली , चारो ओर निराशा है………”
“अगला कदम पंजाबी बैठेंगे , महाविकट हडताल पर ,”
“महाराष्ट में प्रबल मराठा , चढ़ जाएंगे भाल पर………”
“राजपूत भी मचल उठेंगे , भुजबल के हथियार से ,”
“प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से………”
“निर्धन ब्राम्हण वंश एक , दिन परशुराम बन जाएगा ,”
“अपने ही घर के दीपक से , अपना घर जल जाएगा……..”
“भडक उठा गृह युध्द अगर , भूकम्प भयानक आएगा ,”
“आरक्षण वादी नेताओं का , सर्वस्व मिटाके जायेगा……..”
“अभी सम्भल जाओ मित्रों , इस स्वार्थ भरे व्यापार से ,”
“प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से……..”
“जातिवाद की नही , समस्या मात्र गरीबी वाद है ,”
“जो सवर्ण है पर गरीब है , उनका क्या अपराध है………”
“कुचले दबे लोग जिनके , घर मे न चूल्हा जलता है ,”
“भूखा बच्चा जिस कुटिया में , लोरी खाकर पलता है……..”
“समय आ गया है उनका , उत्थान कीजिये प्यार से ,”
“प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से………”
“जाति गरीबी की कोई भी , नही मित्रवर होती है ,”
“वह अधिकारी है जिसके घर , भूखी मुनिया सोती है……..”
“भूखे माता-पिता , दवाई बिना तडपते रहते है ,”
“जातिवाद के कारण , कितने लोग वेदना सहते है………”
“उन्हे न वंचित करो मित्र , संरक्षण के अधिकार से ,”
“प्रतिभाओं को मत काटो , आरक्षण की तलवार से………”
भारत माता की जय,

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आरक्षण और शोषण – Sanjay Dwivedy


आरक्षण और शोषण
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शिक्षा और सरकारी रोजगार के क्षेत्र में सवर्णों के लिए शून्य प्रतिशत सीटें हैं ,चौकिये नहीं , यह सच्चाई है। इस देश में किसी भी सरकारी महकमें में सवर्ण को तभी तक प्रवेश मिल रहा हैं जब तक वो सबसे ज्यादा नंबर ला रहे हैं । जब कभी भी कोई आरक्षित श्रेणी का व्यक्ति सवर्ण के बराबर या सवर्ण से ज्यादा नंबर प्राप्त करता हैं तो वह सवर्ण/सामान्य श्रेणी के कोटे से चुना जाता हैं न की आरक्षित श्रेणी से । मतलब ये की सामान्य वर्ग के लिए इस देश में कोई सीट नहीं है।

मान लीजिये किसी नौकरी के लिए 100 सीटें निकली । भारत के आरक्षण के हिसाब से 50 सीटें आरक्षित होगी और 50 सामान्य कोटे की होगी । अब परीक्षा के बाद मान लीजिये सामान्य वर्ग का कटऑफ 90 नंबर , OBC का कटऑफ 70 नंबर , SC का 40 नंबर और ST का 30 नंबर बनता हैं ।

असली शोषण का खेल अब शुरू होता है । 50 सीटों पर आरक्षित वर्ग के वे लोग चयनित होंगे जिनके नंबर 90 से कम होंगे । बाकी बचे 50 सीटों पर उन लोगो को लिया जायेगा जिनके नंबर 90 या ज्यादा होंगे लेकिन वरीयता पहले आरक्षित वर्ग के लोगो को मिलेगी । मतलब अगर आरक्षित श्रेणी के 50 लोग 90 या उससे ज्यादा नंबर लाते हैं तो सामान्य वर्ग से किसी का चयन नहीं होगा ।

सामान्य वर्ग को वही मिलता हैं जिसे आरक्षित वर्ग छोड़ देता हैं । कानून 50% बस कहने का हैं आज 80 से 90 % तक सीटें आरक्षित लोगो को मिल रही हैं ।

इस देश में सवर्णों को दोयम दर्जे की भी नागरिकता नहीं हैं । इस देश की कानून और सरकार सबसे ज्यादा जुल्म और शोषण सवर्ण का कर रही हैं । अगर विश्वास न हो तो किसी भी परीक्षा का परिणाम जातिगत आधार पर RTI डाल कर निकलवा ले ।

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अगर मैं भारत का प्रधानमंत्री होता तो अम्बेडकर को कभी भी ड्राफ्टिंग कमिटी का अध्यक्ष न बनाता—-सरदार वल्लभ भाई पटेल


#एक_इतिहास_का_सच

अगर मैं भारत का प्रधानमंत्री होता तो अम्बेडकर को कभी भी ड्राफ्टिंग कमिटी का अध्यक्ष न बनाता—-सरदार वल्लभ भाई पटेल

सरदार पटेल और अम्बेडकर संवाद

संविधान निर्माण चल रहा था।। इसमें सरदार पटेल भी संविधान निर्माताओ की लिस्ट में शामिल थे। अम्बेडकर ने आरक्षण की भीख का तुर्रा छोड़ दिया।

सरदार पटेल–आरक्षण गलत है,इसको हटाओ

अम्बेडकर–नहीं,ये मेरी कौम के लोगो के लिए है

सरदार—कौन सी तुम्हारी कौम?? हम सब भारतीय है,आज़ादी के बाद आज देश का हर वर्ग भूँखा नंगा है…इसलिए किसी वर्ग विशेष को ये सुविधा देना गलत है…

अम्बेडकर(चीखते हुए)–मैं आरक्षण देना चाहता हु,अगर मुझे रोका गया तो मैं कानून मंत्री के पद से स्तीफा दे दूंगा

सरदार पटेल— देखो भीमराव,तुम वो नहीं देख पा रहे जो मैं देख पा रहा हु,स्वार्थ की राजनीति ने तुम्हारी आँखों में पट्टी बाँध दी है। अगर आज किसी जाति विशेष को आरक्षण दिया गया तो भविष्य के भारत में रोज एक नई जाति आरक्षण मांगेगी और देश की अखंडता पर खतरा उत्पन्न होगा….जो दलित और गरीब है उनके लिए हम दूसरे हर तरह के उपाय करने को तैयार है..जैसे मुफ़्त शिक्षा,मुफ़्त स्कूल,उनके लिए सस्ते घर,रोजगार इत्यादि….हम उन्हें इतना काबिल बनाये ताकि वो खुद के दम पर आगे बढ़ सके … न की आरक्षण की बैशाखी से या मुफ्तखोरी से….तुम किसी अयोग्य को सत्ता पर बैठाकर देश को बर्बाद क्यों करना चाहते हो???

अम्बेडकर(चीखते हुए)— आरक्षण होकर रहेगा…..

ये सुनकर लौह पुरुष सरदार पटेल,जो कभी किसी के आगे नहीं झुकते थे मजबूरी में उन्हें अम्बेडकर के कमरे से बाहर आना पड़ा और नेहरू से उन्होंने कहा था कि “”ये आपने किस बीमार मानसिकता वाले व्यक्ति को ड्राफ्टिंग कमिटी का अध्यक्ष बना दिया,ये तो मानसिक उन्मादी प्रतीत होता है,इसमें दूरदर्शिता की भारी कमी और अंग्रेज़ियत मानसिकता की गन्दगी भरी है,अगर मैं भारत का प्रधानमंत्री होता तो इसे कब का इसके पद से हटा चूका होता,ये व्यक्ति भारत का दुर्भाग्य साबित होगा,तन से ज्यादा इसका मन काला है,हम हर गरीब दलित के हक़ की बात करने को तैयार है लेकिन इसका अर्थ ये तो नहीं की भूंखे मर रहे सवर्णों की क़ुरबानी दे दी जाये???”

ये सुनकर नेहरू मौन थे…उनके पास कोई जवाब न था…

अखंड भारत के जनक सरदार की मृत्यु हो गयी। जानकार कहते है की अगर सरदार ज़िंदा होते तो भारत का वो संविधान जो अम्बेडकर ने पेश किया था,वो लागू न हो पाता क्योंकि वो सबिधान देश को बर्बाद करने वाला एक कीटाणु था।

आरक्षण एक दीमक है देश में लगा हुआ !

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आरक्षण


सेवा में ,
माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी,
प्रधानमंत्री ,
भारत सरकार ,
नई दिल्ली

विषय- भारत में आरक्षण को समाप्त किये जाने एवं पदोन्नति में आरक्षण हेतु 117वें संबिधान संशोधन बिल को निरस्त किये जाने विषयक |

माननीय महोदय ,
सौभाग्य की बात है कि बहुत समय बाद भारत में आपके कुशल नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की केन्द्रीय सरकार विद्यमान है।
आपके मेक इन इंडिया , स्वच्छता अभियान व नोट बंदी जैसी कई योजनाओं का हम ह्रदय से पूर्ण समर्थन करते हैं ।
माननीय महोदय ,
जैसा कि आप जानते हैं कि समाज के पिछडे वर्गों के लिये संविधान में मात्र दस वर्षों के लिये आरक्षण की व्यवस्था की गयी थी, किन्तु जातिवादी व निहित कारणों से जाति आधारित आरक्षण की अवधि व क्रीमीलेयर की सीमा को बारंबार बिना समीचीन समीक्षा के बढाया जाता रहा है ,
जिसे कि 10– 10 वर्ष करते करते आज 67 वर्ष पूरे हो गए हैं ।
आज तक ऐसे आरक्षण प्राप्त डॉक्टर, इंजीनियर , प्रोफेसर , शिक्षक, कर्मचारी किसी ने नहीं कहा कि अब वह दलित या पिछड़ा नहीं रहा व अब उसे जातिगत आरक्षण की जरुरत नहीं है।
इससे सिद्ध होता है कि आरक्षण का आधार पिछड़ा वर्ग या समूह के बजाय जाति किये जाने से इन 67 सालों में कोई लाभ नहीं हुआ है।
महोदय ,
इस जाति आरक्षण का लाभ जहां कुछ खास लोग परिवार समेत पीढी दर पीढी लेते जा रहें हैं वहीं वे इसे निम्नतम स्तर वाले अपने ही जरूरतमंदों लोगों तक भी नहीं पहुंचने दे रहे हैं। अन्यथा इन 67 वर्षों में हर आरक्षित वर्ग के व्यक्ति तक इसका लाभ पहुँच चुका होता।
ऐसे तबके को वे केवल अपने बार बार लाभ हेतु संख्या या गिनती तक ही सीमित कर दे रहे हैं।
महोदय,
गरीबी जाती देखकर नहीं आती
आरक्षण का आधार जाति किये जाने से जहाँ सामान्य वर्ग के तमाम निर्धन व जरूरतमंद युवा बेरोजगार व हतोत्साहित हैं , कर्मचारी कुंठित व उत्साहहीन हो रहे हैं,
वहीं समाज में जातिवाद का जहर बड़ी तेज़ी से बढ़ता जा रहा है।
अत: आपसे निवेदन है कि राष्ट्र के समुत्थान व विकास के लिये संविधान में संशोधन करते हुये आरक्षण को समाप्त करने का कष्ट करेंगे ।
किसी भी जाति – धर्म के असल जरूरतमंद निर्धन व्यक्ति को आरक्षण नहीं बल्कि संरक्षण देना सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए ।

आरक्षण को पूर्ण रूप से समाप्त करने से पहले अगर वंचित वर्ग तक इसका ईमानदारी से वास्तव में सरकार लाभ पहुँचाना चाहती है तो इस आरक्षण को एक परिवार से एक ही व्यक्ति , केवल बिना विशेष योग्यता / कार्यकुशलता वाली समूह ग व घ की नौकरियों में मूल नियुक्ति के समय ही दिया जा सकता है।

आयकर की सीमा में आने वाले व्यक्ति के परिवार को आरक्षण से वंचित किया जाना चाहिये ताकि राष्ट्र के बहुमूल्य संसाधनों का सदुपयोग सुनिश्चित हो सके।

पदोन्नति में आरक्षण तो पूर्णत: बंद कराया ही जाना चाहिये जिससे कि योग्यता, कार्यकुशलता व वरिष्ठता का निरादर न हो।

आशा है कि महोदय राष्ट्र व आमजन के हित में इन सुझावों पर ध्यान देते हुये समुचित कार्यवाही करने व इस हेतु जन जागरण अभियान प्रारंभ कर मुहिम को अंजाम तक पहुंचाने का कष्ट करेंगे |
वन्दे मातरम् ।