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*आप का और आप के परिवार का जीवन बचाना चाहते हैं तो यह पोस्ट जरूर पढे!*
सबसे ज्यादा मौतें देने वाला भारत में कोई है तो वह है… *रिफाईनड तेल*
 केरल आयुर्वेदिक युनिवर्सिटी आंफ रिसर्च केन्द्र के अनुसार, हर वर्ष 20 लाख लोगों की मौतों का कारण बन गया है… *रिफाईनड तेल*
आखिर भाई राजीव दीक्षित जी के कहें हुए कथन सत्य हो ही गये! 
रिफाईनड तेल से *DNA डैमेज, RNA नष्ट, , हार्ट अटैक, हार्ट ब्लॉकेज, ब्रेन डैमेज, लकवा शुगर(डाईबिटीज), bp नपुंसकता *कैंसर* *हड्डियों का कमजोर हो जाना, जोड़ों में दर्द,कमर दर्द, किडनी डैमेज, लिवर खराब, कोलेस्ट्रोल, आंखों रोशनी कम होना, प्रदर रोग, बांझपन, पाईलस, स्केन त्वचा रोग आदि!. एक हजार रोगों का प्रमुख कारण है।* 
*रिफाईनड तेल बनता कैसे हैं।*
बीजों का छिलके सहित तेल निकाला जाता है, इस विधि में जो भी Impurities तेल में आती है, उन्हें साफ करने वह तेल को स्वाद गंध व कलर रहित करने के लिए रिफाइंड किया जाता है

*वाशिंग*– वाशिंग करने के लिए पानी, नमक, कास्टिक सोडा, गंधक, पोटेशियम, तेजाब व अन्य खतरनाक एसिड इस्तेमाल किए जाते हैं, ताकि Impurities इस बाहर हो जाएं |इस प्रक्रिया मैं तारकोल की तरह गाडा वेस्टेज (Wastage} निकलता है जो कि टायर बनाने में काम आता है। यह तेल ऐसिड के कारण जहर बन गया है। 
*Neutralisation*–तेल के साथ कास्टिक या साबुन को मिक्स करके 180°F पर गर्म किया जाता है। जिससे इस तेल के सभी पोस्टीक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
*Bleaching*–इस विधी में P. O. P{प्लास्टर ऑफ पेरिस} /पी. ओ. पी. यह मकान बनाने मे काम ली जाती है/ का उपयोग करके तेल का कलर और मिलाये गये कैमिकल को 130 °F पर गर्म करके साफ किया जाता है! 
*Hydrogenation*– एक टैंक में तेल के साथ निकोल और हाइड्रोजन को मिक्स करके हिलाया जाता है। इन सारी प्रक्रियाओं में तेल को 7-8 बार गर्म व ठंडा किया जाता है, जिससे तेल में पांलीमर्स बन जाते हैं, उससे पाचन प्रणाली को खतरा होता है और भोजन न पचने से सारी बिमारियां होती हैं। 

*निकेल*एक प्रकार का Catalyst metal (लोहा) होता है जो हमारे शरीर के Respiratory system,  Liver,  skin,  Metabolism,  DNA,  RNA को भंयकर नुकसान पहुंचाता है। 
रिफाईनड तेल के सभी तत्व नष्ट हो जाते हैं और ऐसिड (कैमिकल) मिल जाने से यह भीतरी अंगों को नुकसान पहुंचाता है। 
जयपुर के प्रोफेसर श्री राजेश जी गोयल ने बताया कि, गंदी नाली का पानी पी लें, उससे कुछ भी नहीं होगा क्योंकि हमारे शरीर में प्रति रोधक क्षमता उन बैक्टीरिया को लडकर नष्ट कर देता है, लेकिन रिफाईनड तेल खाने वाला व्यक्ति की अकाल मृत्यु होना निश्चित है! 
*दिलथाम के अब पढे*
*हमारा शरीर करोड़ों Cells (कोशिकाओं) से मिलकर बना है, शरीर को जीवित रखने के लिए पुराने Cells नऐ Cells से Replace होते रहते हैं नये Cells (कोशिकाओं) बनाने के लिए शरीर खुन का उपयोग करता है, यदि हम रिफाईनड तेल का उपयोग करते हैं तो खुन मे Toxins की मात्रा बढ़ जाती है व शरीर को नए सेल बनाने में अवरोध आता है, तो कई प्रकार की बीमारियां जैसे* -— कैंसर *Cancer*,  *Diabetes* मधुमेह, *Heart Attack* हार्ट अटैक, *Kidney Problems* किडनी खराब, 

*Allergies,  Stomach Ulcer,  Premature Aging,  Impotence,  Arthritis,  Depression,  Blood pressure आदि हजारों बिमारियां होगी।*
 रिफाईनड तेल बनाने की प्रक्रिया से तेल बहुत ही मंहगा हो जाता है, तो इसमे पांम आंयल मिक्स किया जाता है! (पांम आंयल सवमं एक धीमी मौत है) 
*सरकार का आदेश*–हमारे देश की पॉलिसी अमरिकी सरकार के इशारे पर चलती है। अमरीका का पांम खपाने के लिए,मनमोहन सरकार ने एक अध्यादेश लागू किया कि, 

प्रत्येक तेल कंपनियों को 40 %

खाद्य तेलों में पांम आंयल मिलाना अनिवार्य है, अन्यथा लाईसेंस रद्द कर दिया जाएगा! 

इससे अमेरिका को बहुत फायदा हुआ, पांम के कारण लोग अधिक बिमार पडने लगे, हार्ट अटैक की संभावना 99 %बढ गई, तो दवाईयां भी अमेरिका की आने लगी, हार्ट मे लगने वाली  स्प्रिंग(पेन की स्प्रिंग से भी छोटा सा छल्ला) , दो लाख रुपये की बिकती हैं, 

यानी कि अमेरिका के दोनो हाथों में लड्डू, पांम भी उनका और दवाईयां भी उनकी! 
*अब तो कई नामी कंपनियों ने पांम से भी सस्ता,, गाड़ी में से निकाला काला आंयल* *(जिसे आप गाडी सर्विस करने वाले के छोड आते हैं)* 

*वह भी रिफाईनड कर के खाद्य तेल में मिलाया जाता है, अनेक बार अखबारों में पकड़े जाने की खबरे आती है।*
सोयाबीन एक दलहन हैं, तिलहन नही… 

दलहन में… मुंग, मोठ, चना, सोयाबीन, व सभी प्रकार की दालें आदि होती है। 

तिलहन में… तिल, सरसों, मुमफली, नारियल, बादाम आदि आती है। 

अतः सोयाबीन तेल ,  पेवर पांम आंयल ही होता है। पांम आंयल को रिफाईनड बनाने के लिए सोयाबीन का उपयोग किया जाता है। 

सोयाबीन की एक खासियत होती है कि यह, 

प्रत्येक तरल पदार्थों को सोख लेता है, 

पांम आंयल एक दम काला और गाढ़ा होता है, 

उसमे साबुत सोयाबीन डाल दिया जाता है जिससे सोयाबीन बीज उस पांम आंयल की चिकनाई को सोख लेता है और फिर सोयाबीन की पिसाई होती है, जिससे चिकना पदार्थ तेल तथा आटा अलग अलग हो जाता है, आटा से सोया मंगोडी बनाई जाती है! 

आप चाहें तो किसी भी तेल निकालने वाले के सोयाबीन ले जा कर, उससे तेल निकालने के लिए कहे!महनताना वह एक लाख रुपये  भी देने पर तेल नही निकालेगा, क्योंकि. सोयाबीन का आटा बनता है, तेल नही! 
सूरजमुखी, चावल की भूसी (चारा) आदि के तेल रिफाईनड के बिना नहीं निकाला जा सकता है, अतः ये जहरीले ही है! 
फॉर्च्यून.. अर्थात.. आप के और आप के परिवार के फ्यूचर का अंत करने वाला. 
सफोला… अर्थात.. सांप के बच्चे को सफोला कहते हैं! 

5 वर्ष खाने के बाद शरीर जहरीला 

10 वर्ष के बाद.. सफोला (सांप का बच्चा अब सांप बन गया है. 

15 साल बाद.. मृत्यु… यानी कि सफोला अब अजगर बन गया है और वह अब आप को निगल जायगा.! 
पहले के व्यक्ति 90.. 100 वर्ष की उम्र में मरते थे तो उनको मोक्ष की प्राप्ति होती थी, क्योंकि.उनकी सभी इच्छाए पूर्ण हो जाती थी।
और आज… अचानक हार्ट अटैक आया और कुछ ही देर में मर गया….? 

उसने तो कल के लिए बहुत से सपने देखें है, और अचानक मृत्यु..? 

अधुरी इच्छाओं से मरने के कारण.. प्रेत योनी मे भटकता है। 
*राम नही किसी को मारता…. न ही यह राम का काम!*

*अपने आप ही मर जाते हैं…. कर कर खोटे काम!!*

गलत खान पान के कारण, अकाल मृत्यु हो जाती है! 
*सकल पदार्थ है जग माही..!*

*कर्म हीन नर पावत नाही..!!* 

अच्छी वस्तुओं का भोग,.. कर्म हीन, व आलसी व्यक्ति संसार की श्रेष्ठ वस्तुओं का सेवन नहीं कर सकता! 
तन मन धन और आत्मा की तृप्ति के लिए सिर्फ कच्ची घाणी का तेल, तिल सरसों, मुमफली, नारियल, बादाम आदि का तेल ही इस्तेमाल करना चाहिए! पोस्टीक वर्धक और शरीर को निरोग रखने वाला सिर्फ कच्ची घाणी का निकाला हुआ तेल ही इस्तेमाल करना चाहिए! 

आज कल सभी कम्पनी.. अपने प्रोडक्ट पर कच्ची घाणी का तेल ही लिखती हैं! 

वह बिल्कुल झूठ है.. सरासर धोखा है! 

कच्ची घाणी का मतलब है कि,, लकड़ी की बनी हुई, औखली और लकडी का ही मुसल होना चाहिए! लोहे का घर्षण नहीं होना चाहिए. इसे कहते हैं.. कच्ची घाणी. 

जिसको बैल के द्वारा चलाया जाता हो! 

आजकल बैल की जगह मोटर लगा दी गई है! 

लेकिन मोटर भी बैल की गती जितनी ही चले! 

लोहे की बड़ी बड़ी सपेलर (मशिने) उनका बेलन लाखों की गती से चलता है जिससे तेल के सभी पोस्टीक तत्व नष्ट हो जाते हैं और वे लिखते हैं.. कच्ची घाणी… 

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धन्यवाद

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હાર્ટ બ્લોકેજની દવા અમૃત પુષ્પ — Gandabhai Vallabh

હાર્ટ બ્લોકેજની દવા અમૃત પુષ્પ બ્લોગ પર તા. 12-6-2017 પીયુષભાઈ ઠાકરના સૌજન્યથી ઉપચારો તમારા આરોગ્ય સલાહકાર સાથે મસલત કરીને અનુકુળ હોય તો જ કરવા. અહીં આ આપવાનો આશય માત્ર શૈક્ષણીક છે. દ્વારકાના સીનીઅર ધારાશાસ્ત્રી શ્રી. દિનેશ આર. વિઠલાણીએ વર્ષોવર્ષની મહેનત અને સંશોધનથી તેમ જ રામાયણના ગ્રંથ અને આયુર્વેદનાં પુસ્તકોમાંથી “રાજા ઈન્દ્રવાળું અમૃત”નો વીસ્તૃત અભ્યાસ કરી […]

via હાર્ટ બ્લોકેજની દવા અમૃત પુષ્પ — Gandabhai Vallabh

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अंधेरे में उल्लू की तरह बिल्कुल साफ साफ देखने की अचूक दवा

चमत्कारिक औषधि। अंधेरे में उल्लू की तरह बिल्कुल साफ साफ देखने की अचूक दवा

पुराने अंकोल के पेड़ की जड़ को पूर्व दिशा से हस्त नक्षत्र के समय खोद  कर लाएं।

जड़ को साफ करके कूट पीसकर चूर्ण बना कर 2 माह पानी के साथ सेवन करें।

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विषैला

चमत्कारी औषधि।

ज्येष्ठ के महीने में सिरस के पुराने पेड़ की छाल को  साठी के चावल के धोवन में पीस कर, मिला कर पीने से शरीर मे विष का प्रभाव एक वर्ष के लिए खत्म हो जाता है।

विषैला जीव आपको काटते ही मर जायेगा।

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हृदय की बीमारी*

*हृदय की बीमारी*
आयुर्वेदिक इलाज !!

हमारे देश भारत मे 3000 साल एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे उनका नाम था महाऋषि वागवट जी !! उन्होने एक पुस्तक लिखी थी जिसका नाम है अष्टांग हृदयम!!(Astang  hrudayam)

 और इस पुस्तक मे उन्होने ने बीमारियो को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखे थे ! ये उनमे से ही एक सूत्र है !! वागवट जी लिखते है कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है ! मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है ! तो इसका मतलब है कि रकत (blood) मे acidity(अम्लता ) बढ़ी हुई है ! अम्लता आप समझते है ! जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity !! अम्लता दो तरह की होती है ! एक होती है पेट कि अम्लता ! और एक होती है रक्त (blood) की अम्लता !! आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है ! तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है !! खट्टी खट्टी डकार आ रही है ! मुंह से पानी निकाल रहा है ! और अगर ये अम्लता (acidity)और बढ़ जाये ! तो hyperacidity होगी ! और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अम्लता(blood acidity) होती !! और जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रकत (blood) दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता ! और नलिया मे blockage कर देता है ! तभी heart attack होता है !! इसके बिना heart attack नहीं होता !! और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं ! क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है !! इलाज क्या है ?? वागबट जी लिखते है कि जब रक्त (blood) मे अम्लता (acidity) बढ़ गई है ! तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय है ! आप जानते है दो तरह की चीजे होती है ! अम्लीय और क्षारीय !! (acid and alkaline ) अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है ! ????? ((acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है )????? neutral होता है सब जानते है !!

 तो वागबट जी लिखते है ! कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय(alkaline) चीजे खाओ ! तो रकत की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी !!! और रक्त मे अम्लता neutral हो गई ! तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !! ये है सारी कहानी !! अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो क्षारीय है और हम खाये ????? आपके रसोई घर मे सुबह से शाम तक ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय है ! जिनहे आप खाये तो कभी heart attack न आए ! और अगर आ गया है ! तो दुबारा न आए !!
सबसे ज्यादा आपके घर मे क्षारीय चीज है वह है लौकी !! जिसे दुदी भी कहते है !! english मे इसे कहते है bottle gourd !!! जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है ! इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है ! तो आप रोज लौकी का रस निकाल-निकाल कर पियो !! या कच्ची लौकी खायो !! रामदेव को आपने कई बार कहते सुना होगा लौकी का जूस पीयो, लौकी का जूस पीयों ! 3 लाख से ज्यादा लोगो को उन्होने ठीक कर दिया लौकी का जूस पिला पिला कर !! और उसमे हजारो डाक्टर है ! जिनको खुद heart attack होने वाला था !! वो वहाँ जाते है लौकी का रस पी पी कर आते है !! 3 महीने 4 महीने लौकी का रस पीकर वापिस आते है आकर फिर clinic पर बैठ जाते है ! वो बताते नहीं हम कहाँ गए थे ! वो कहते है हम न्युयार्क गए थे हम जर्मनी गए थे आपरेशन करवाने ! वो राम देव के यहाँ गए थे ! और 3 महीने लौकी का रस पीकर आए है ! आकर फिर clinic मे आपरेशन करने लग गए है ! और वो आपको नहीं बताते कि आप भी लौकी का रस पियो !! तो मित्रो जो ये रामदेव बताते है वे भी वागवट जी के आधार पर ही बताते है !! वागवतट जी कहते है रकत की अम्लता कम करने की सबे ज्यादा ताकत लौकी मे ही है ! तो आप लौकी के रस का सेवन करे !! कितना करे ????????? रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो !! कब पिये ?? सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते है !! या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है !!
 इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते है ! इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो तुलसी बहुत क्षारीय है !! इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है ! पुदीना बहुत क्षारीय है ! इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले ! ये भी बहुत क्षारीय है !! लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले ! वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले !! ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है !!!! तो मित्रों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करे !! 2 से 3 महीने आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा !! 21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा !!!
कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी !! घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा !! और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे !! और पैसे बच जाये ! तो किसी गौशाला मे दान कर दे ! डाक्टर को देने से अच्छा है !किसी गौशाला दान दे !! हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा !!
 *ॐ नमो भगवते वासुदेवाय*

  – डाक्टर वैद्य पंडित विनय कुमार उपाध्याय

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Leukoderma (सफेद दाग) एक त्वचा रोग है

Leukoderma (सफेद दाग) एक त्वचा रोग है इस रोग के रोगी के बदन पर अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग आकार के सफेद दाग आ जाते हैं पूरे विश्व में एक से दो प्रतिशत लोग इस रोग से प्रभावित हैं लेकिन इसके विपरीत भारत में इस रोग के शिकार लोगों का प्रतिशत चार से पांच है तथा राजस्थान और गुजरात के कुछ भागों में पांच से आठ प्रतिशत लोग इस रोग से ग्रस्त हैं शरीर पर सफेद दाग आ जाने को लोग एक Stigma(कलंक) के रूप में देखने लगते हैं और कुछ लोग भ्रम-वश इसे कुष्ठ रोग मान बैठते हैं।[Image: safed-dag-ka-ayurvedic-ilaj]

 

इस रोग से पीड़ित लोग ज्यादातर Frustration(हताशा) में रहते है उनको लगता है कि समाज ने उनको बहिष्कृत किया हुआ है इस रोग के एलोपैथी और अन्य चिकित्सा-पद्धतियों में इलाज हैं- शल्यचिकित्सा से भी इसका इलाज किया जाता है लेकिन ये सभी इलाज इस रोग को पूरी तरह ठीक करने के लिए संतोषजनक नहीं हैं इसके अलावा इन चिकित्सा-पद्धतियों से इलाज बहुत महंगा है और उतना कारगर भी नहीं है- रोगियों को इलाज के दौरान फफोले और जलन पैदा होती है-इस कारण बहुत से रोगी इलाज बीच में ही छोड़ देते हैं।आइये जाने ऐसा प्रयोग जिसका कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं  होता

सिर्फ 7 दीन में सफ़ेद दाग (श्वेत कुष्ठ) खत्म होगी : दिवान हकीम परमानन्द जी के द्वारा अनभूत प्रयोग आवश्यक सामग्री

  1. 25 ग्राम देशी कीकर (बबूल) के सूखे पते
  2. 25 ग्राम पान की सुपारी (बड़े आकार की)
  3. 25 ग्राम काबली हरड का छिलका

बनाने की विधि

उपरोक्त तीन वस्तुएँ लेकर दवा बनाये।  कही से देशी कीकर (काटे वाला पेड़ जिसमे पीले फुल लगते है ) के ताजे पत्ते (डंठल रहित ) लाकर छाया में सुखाले कुछ घंटो में पत्ते सुख जायेगे बबूल के इन सूखे पत्तो को काम में ले पान वाली सुपारी बढिया ले इसका पावडर बना ले कबाली हरड को भी जौ कुट कर ले और इन सभी चीजो को यानि बबूल , सुपारी , काबली हरड का छिलका (बड़ी हरड) सभी को 25-25 ग्राम की अनुपात में ले कुल योग 75 ग्राम और 500 मिली पानी में उबाले पानी जब 125 मिली बचे तब उतर कर ठंडा होने दे और छान कर पी ले ये दवा एक दिन छोड़ कर दुसरे दिन पीनी है अर्थात मान लीजिये आज आप ने दवा ली तो कल नहीं लेनी है और इस काढ़े में 2 चमच खांड या मिश्री मिला ले (10 ग्राम) और ये निहार मुह सुबह –सुबह पी ले और 2 घंटे तक कुछ भी खाना नहीं है दवा के प्रभाव से शरीर शुद्धि हो और उलटी या दस्त आने लगे परन्तु दवा बन्द नहीं करे 14 दीन में सिर्फ 7 दिन लेनी है और फीर दवा बन्द कर दे कुछ महीने में घिरे –घिरे त्वचा काली होने लगेगी हकीम साहब का दावा है की ये साल भर में सिर्फ एक बार ही लेने से रोग निर्मूल (ख़त्म) हो जाता है अगर कुछ रह जाये तो दुसरे साल ये प्रयोग एक बार और कर ले नहीं तो दुबारा इसकी जरूरत नहीं पडती।

पूरक उपचार

एक निम्बू, एक अनार और एक सेब  तीनो का अलग – अलग ताजा रस निकालने के बाद अच्छी तरह परस्पर मिलाकर रोजाना सुबह शाम या दिन में किसी भी समय एक बार नियम पूर्वक ले। यह फलो का ताजा रस कम से कम दवा सेवन के प्रयोग आगे 2-3 महीने तक जारी रख सके तो अधिक लाभदायक रहेगा।

औषधियों की प्रयोग विधि :

  1.  दवा के सेवन काल के 14 दिनों में मक्खन घी दूध अधिक लेना हितकर है क्योकि दवा खुश्क है।
  2. चौदह दिन दवा लेने के बाद कोई बिशेस परहेज पालन की जरुरत नहीं है श्वेत कुष्ठ के दुसरे इलाजो में कठीन परहेज पालन होती है परन्तु इस ईलाज में नातो सफेद चीजो का परहेज है और ना खटाई आदि का फीर भी आप मछली मांस अंडा नशीले पदार्थ शराब तम्बाकू आदि और अधिक मिर्च मसले तेल खटाई आदि का परहेज पालन कर सके तो अच्छा रहेगा।
  3. दवा सेवन के 14 दिनों में कभी –कभी उलटी या दस्त आदि हो सकता है इससे घबराना नहीं चाहिए बल्कि उसे शारीरिक शुध्धी के द्वारा आरोग्य प्राप्त होनेका संकेत समझना चाहिए।
  4. रोग दूर होने के संकेत हकीम साहब के अनुसार दवा के सेवन के लगभग 3 महीने बाद सफेद दागो के बीच तील की तरह काले भूरे या गुलाबी धब्धे ( तील की तरह धब्बे ) के रूप में चमड़ी में रंग परिवर्तन दिखाई देगा और साल भर में धीरे –धीरे सफेद दाग या निसान नष्ट हो कर त्वचा पहले जयसी अपने स्वभाविक रंग में आ जाएगी फीर भी यदि कुछ कसर रह जाये तो एक साल बीत जाने के बाद दवा की सात खुराके इसी तरह दुबारा ले सकते है।
  5. दिवान हकीम साहब का दावा है की उतर्युक्त ईलाज से उनके 146 श्वेत कुष्ठ के रोगियों में से 142 रोगी पूर्णत : ठीक अथवा लाभान्वित हुये है कुछ सम्पूर्ण शरीर में सफेद रोगी भी ठीक हुये है निर्लोभी परोपकारी दीवान हकीम परमानन्द जी की अनुमति से बिस्तार से यह अनमोल योग मानव सेवा भावना के साथ जनजन तक पहुचा रहा हु इस आशा और उदात भावना के साथ की पाठक निश्वार्थ भावना से तथा बिना किसी लोभ के जनजन तक जरुर पहुचाये।
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बंदर कभी बीमार नहीं होता – विट्ठलव्यास

 

बंदर कभी बीमार नहीं होता
#विट्ठलव्यास
किसी भी चिडिया को डायबिटीस
नही होता है ।
किसी भी बंदर को हार्ट अटैक
नहीं आता ।

कोई भी जानवर ना तो आयोडीन
नमक खाता है और ना ब्रश करता
है फिर भी किसी को थायराइड
नहीं होता और ना दांत खराब
नहीं होता है ।

बंदर मनुष्य के सबसे नजदीक है, शरीर संरचना में बस बंदर और
आप में यही फर्क है की बंदर के
पूँछ है आपके नहीं है बाकी सब
कुछ समान है।

तो फिर बंदर को कभी भी हार्ट
अटैक, डायबिटीस,high BP,
क्यों नहीं होता है?

एक पुरानी कहावत है बंदर कभी बीमार नहीं होता और यदि वीमार होगा तो जिंदा नहीं बचेगा मर
जाएगा ?

क्यों बंदर बीमार क्यों नहीं होता?

राजीव भाई बताते हैं कि एक बहुत बडे,प्रोफेसर है,मेडिकल कॉलेज में काम करते है ।

उन्होंने एक बडा गहरा रिसर्च
किया कि बंदर को बीमार बनाओ !

तो उन्होने तरह – तरह के virus
और वैक्टीरिया बंदर के शरीर मे डालना शुरू किया, कभी इंजेक्शन
के माध्यम से कभी किसी और माध्यम से ।
वो कहते है,मैं 15 साल असफल
रहा,लेकिन बंदर को कुछ नहीं
हुआ ।

*राजीव भाई ने प्रोफेसर से कहा
कि आप यह कैसे कह सकते है
कि बंदर को कुछ नहीं हो सकता ?

तब उन्हांने एक दिन यह रहस्य की बात बताई वो आपको भी बता देता
हूँ कि बंदर का जो RH factor दुनिया है वह दुनियाँ में सबसे
आदर्श है ।

कोई डॉक्टर जब आपका RH factor नापता है ना !

तो वो बंदर के ही RH Factor
से तुलना करता है,वह डॉक्टर
आपको बताता नहीं यह अलग
बात है*।

उसका कारण यह है कि,उसे कोई बीमारी आ ही नहीं सकती ।

उसके ब्लड में कभी कॉलेस्टेरॉल
नहीं बढता,कभी ट्रायग्लेसाईड नहीं बढती,ना ही उसे कभी डायबिटीज होती है ।

शुगर को कितनी भी बाहर से उसके शरीर में इंट्रोडयूस करो,वो टिकती
नहीं ।

तो वह *प्रोफेसर साहब कहते है कि, यार यह यही चक्कर है कि बंदर सवेरे सवेरे ही भरपेट खाता है ।

जो आदमी नहीं खा पाता है,इसीलिए उसको सारी विमारियां होती है ।

सूर्य निकलते ही सारी चिड़िया,
सारे जानवर खाना खाते हैं ।

*जबसे मनुष्य इस ब्रेकफास्ट,
लंच,डिनर के चक्कर में फंसा
तबसे मनुष्य ज्यादा बीमार रहने
लगा है ।

*तो वह प्रोफेसर रवींद्रनाथ शानवाग
ने अपने कुछ मरींजों से कहा की देखो भैया,सुबह सुबह भरपेट खाओ ।

उनके कई मरीज है तो उन्होंने सबको बताया कि सुबह – सुबह भरपेट भोजन करो ।

उनके मरीज बताते है की,जबसे उन्हांने सुबह भरपेट खाना शुरू
किया तबसे उन्हें डायबिटीज
यानि शुगर कम हो गयी,किसी
का कॉलेस्टेरॉल कम हो गया,
किसी के घटनों का दर्द कम
हो गया,किसी का कमर का
दर्द कम हो गया गैस बनाना
बंद हो गई,पेट मे जलन होना,
बंद हो गयी नींद अच्छी आने लगी ….. वगैरह ..वगैरह ।

और यह बात बागभट्ट जी 3500
साल पहले कहते हैं कि सुबह का किया हुआ भोजन सबसे अच्छा है ।

माने जो भी स्वाद आपको पसंद लगता है वो सुबह ही खाईए*।

*तो सुबह के खाने का समय तय करिये ।

तो समय मैने आपका बता दिया
कि सूरज निकलने से ढाई घंटे
तक यानि 9.30 बजे तक,
ज्यादा से ज्यादा 10 बजे तक
आपका भरपेट भोजन हो जाना चाहिए ।

और ये भोजन तभी होगा जब आप नाश्ता बंद करेंगे ।

यह नास्ता का प्रचलन हिंदुस्थानी नहीं है,ये अंग्रेजो की देन है,और रात्रि का भोजन सूर्य अस्त होने से पहले आधा पेट कर लें ।

तभी बीमारियों से बचोगे ।

सुबह सूर्य निकलने से ढाई घंटे तक हमारी जठराग्नि बहुत तीव्र होती है ।

हमारी जठराग्नि का संबंध सूर्य से है, हमारी जठराग्नि सबसे अधिक तीव्र स्नान के बाद होता है ।

स्नान के बाद पित्त बढ़ता है इसलिए सुबह स्नान करके भोजन कर लें ।

तथा एक भोजन से दूसरे भोजन
के बीच ४ से ८ घंटे का अंतराल
रखें बीच में कुछ ना खाएं ।

और दिन डूबने के बाद बिल्कुल
ना खायें।