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॥ સર્વજન સુખાય સર્વજન હિતાય ચ ॥

વર્ષાની વિદાય અને શરદનુ આગમન એટલે ભાદરવો.

દિવસે ધોમ ધખે અને મોડી રાત્રે આછુ ઓઢીને સુવુ પડે એવો ઠાર પડે. આયુર્વેદાચાર્યો કહી ગયા છે કે વર્ષામા પિત્તનો સંગ્રહ થાય અને શરદમા તે પિત્ત પ્રકોપે.
આ પ્રકોપવુ એટલે તાવ.

ભાદરવાના તાપ અને તાવથી બચવા ત્રણ-ચાર ઘરગથ્થુ પ્રયોગો (સ્વાનુભુત છે.)

૧) ભાદરવાના ત્રીસે દિવસ રોજ રાત્રે જમ્યા પછી સુદર્શન/મહાસુદર્શન ઘનવટી – ૨-૩ ટીક્ડી ચાવીને પાણી સાથે (ત્રણ કલાકથી વહેલી નહી, પછી જ).

૨) જો ભાવે તો ભાદરવાના ત્રીસે દિવસ દુધ-ચોખા-સાકરની ખીર અથવા દુધ-પૌવા ખાવુ. ગળ્યુ દુધ એ વકરેલા પિત્તનુ જાની દુશ્મન છે.

આ હેતુથી જ શ્રાદ્ધપક્ષમાં ખીર બનાવવાનુ આયોજન થયુ હતુ.

૩) જેની છાલ પર કથ્થાઇ/કાળા ડાઘ હોય એવા પાકલ કેળાને છુંદીને એમા સાકર ઉમેરી બપોરે જમવા સાથે ખાવા. જો ઇચ્છા હોય તો ઘી પણ ઉમેરવુ. પણ કેળા સાથે ઘી પાચનમા ભારે થાય. એટલે જો ઘી ઉમેરો, તો પછી બે-ત્રણ એલચી વાટીને ઉમેરી દેવી. પાચન સહેલુ થાશે. એવુ કોઇક જ હોય જેને સાકર-કેળા-ઘીનુ મિશ્રણ રોટલી સાથે ન ફાવે.

(જો ખીર અને કેળા – બન્નેનો પ્રયોગ કરવો હોય તો કેળા બપોરે અને ખીર સાંજે એમ ગોઠવવુ).

૪) ભુલેચુકે ખાટી છાશ ન જ પીવી. ખુબ વલોવેલી, સાવ મોળી છાશ લેવી હોય તો ક્યારેક લેવાય.

૫) ઠંડા પહોરે (વહેલી સવારે કે સાંજે) પરસેવો વળે એટલુ ચાલવુ. (ઠંડી અને ચાંદની રાતમાં રાસગરબા ના આયોજન પાછળનુ રહસ્ય આ જ હતુ – પરસેવો પડે)

આચાર્યોએ શરદને રોગોની માતા કહી છે – रोगाणाम् शारदी माता. એને ‘યમની દાઢ’ પણ કહી. આપણામા એક આશિર્વાદ પ્રચલીત હતો – शतम् जीव शरदः એટલે કે આવી સો શરદ સુખરુપ જીવી જાઓ એવી શુભેચ્છા આપવામા આવતી.
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जुकाम के अनुभूत उपचार प्रयोग


कारण-
असंयमित खानपान , चाय, नमकीन , तेल युक्त पदार्थों का अति सेवन, फ्रिज की चीजें, कोल्ड्रिंग , आइसक्रीम का अति सेवन इसके अतिरिक्त ऋतु परिवर्तन ठंड लगना, पानी में भीग जाना , ठंडे पानी का अति सेवन तथा सर्दियों में बिना कान मुंह सर ढके के हवा में घूमने से भी सर्दी जुकाम की तकलीफ हो जाती है-
लक्षण-
सर्दी जुकाम होते ही कब्ज रहने लगता है जिससे भूख कम लगती है सिर दर्द, बदन दर्द , शरीर में ज्वर, आंख से पानी गिरता है , गले में खराश व छाले आते हैं, मुंह का स्वाद बिगड़ जाता है , थूक निगलने में व भोजन निगलने में कठिनाई होती है, गले में दर्द होता है तथा कभी-कभी नाक से पानी आना या नाक बंद हो जाना जैसी समस्या होती है  आवाज बैठ जाना, बार-बार खांसी चलना, छाती में दर्द होना, पीठ में दर्द होना तथा कमजोरी लगना यह लक्षण सर्दी खासी पुरानी होने पर पाए जाते हैं-
सर्दी जुकाम नजले के लिए घरेलू नुस्खे-
1- शहद और अदरक का रस  एक एक चम्मच मिलाकर सुबह-शाम पीने से जुकाम ठीक हो जाता है-
2- नागर वेल के 2-4 कोरे पत्ते चबा लेने से सर्दी जुकाम में आराम मिलता है –
3- अजवाइन को पीसकर उसमें प्याज का रस मिलाकर छाती पर मलने से जुकाम में बदन दर्द में व हल्के बुखार में आराम मिलता है  इससे शरीर में स्फूर्ति आती है जुकाम कम होता है-
4- सोंठ के चूर्ण में गुड और थोड़ा सा घी डालकर 30-40 ग्राम के लड्डू बनाएं  यह लड्डू सुबह-शाम खाने से जुकाम दूर हो जाता है –
5- कुछ लोगों को हमेशा जुकाम रहता है ऐसे व्यक्तियों ने तुलसी का रस लहसुन का रस काली मिर्च मिलाकर सुबह-शाम लेने से जुकाम से पूर्ण रुप से छुटकारा मिल जाता है –
6- कुनकुने पानी में एप्सम साल्ट  मिलाकर उसमें पैर रखने से जुकाम व बदन दर्द में आराम मिलता है-
7- गुड़ की डली के बीच जरा सी पीसी हुई हींग और दो काली मिर्च कूटकर डालकर गोली बनाए  इस गोली का सुबह शाम सेवन करने से जुकाम में आराम होता है-
8- पांच बरगद के कोमल पत्ते तथा सात तुलसी के पत्तों को उबालकर चाय बना ले इसमें आधा चम्मच मिश्री मिला लें इस चाय को दिन में दो बार पीने से नजला, जुखाम, तथा कफ संबंधित समस्याए दूर होती है –
9- सोंठ काली मिर्च और अजवाइन का चूर्ण खांसी अरुचि दूर करता है  इसके सेवन से पाच्नाग्नि प्रदीप्त होती है यह चूर्ण 1 ग्राम शहद के साथ कुकुर खांसी में भी लाभदायक है-
10- सुदर्शन चूर्ण को गर्म पानी के साथ दिन में दो बार लेने से  नजला जुखाम बदन दर्द तथा ज्वर में भी लाभ होता है –
11- नीलगिरी का तेल छाती पीठ व कनपटी पर मलने से तथा सूंधने से जुकाम ठीक होता है  बंद नाक खुलती है छाती का भारीपन कम होता है-
12- रात्रि को सोने से पहले दोनों नासा छिद्रों में गाय के घी की कुछ बूंदे नस्य रुप से डालने से सर दर्द, माइग्रेन, साइनस तथा सर्दी दूर होती है -सरसों के तेल को कान में तथा नाक में डालने से सर्दी जुकाम नजला में राहत मिलती है –
13- खट्टे दही में गुड़ मिलाकर और उसमें काली मिर्च का चूर्ण डालकर सेवन करने से नया पुराना सब प्रकार का जुकाम नजला दूर होता है –
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दोस्तो बारिश के इस मौसम सर्दी, और खाँसी से सभी परेशान रहते है खासकर बच्चे।
इसलिये मै आपको गुड़ अदरक का हलवा बता रही हूँ।जिसके उपयोग से आप सबको आराम मिलेगा।
इसे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को दिया जा सकता है।

आप नींबू के आकार का अदरक ले छील कर किसे अब इससे दोगुना गुड़ ले उसे भी किसे।5काली मिर्च कूट ले।

अब एक तड़का पैन या जो आपको उचित लगे वो बर्तन लकर गर्म करे।इसमे आधा चम्मच घी डाले और पिघलते ही अदरक डाल दे।अदरक को सिर्फ पानी सुखाने तक भूने गैस बंद करे अब इसमे एक चुटकी हल्दी, एक चुटकी नमक,काली मिर्च, और गुड़ डाले अच्छे से मिलाये।गैस चालू कर एकदम धीमी आंच पर गुड़ पिघलने तक रखे।

अब इसे हल्का गुनगुना ही खाये।

रात मे सोने से पहले ले।आप दिन मे भी खा सकते है।
खाने के बाद आधा से एक घंटे पानी ना पीये।

बडे़ एक चम्मच और बच्चों को आधा चम्मच दे।

संजय गुप्ता

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》क्या आप जानते हैं भोजन में क्यों डाले जाते हैं मसाले!

●भारत एक मात्र ऐसा देश है जहाँ तरह तरह के मसाले मिलते हैं, जो भोजन में प्रयोग किये जाते है.

भोजन में मसाले का प्रयोग ज्यादातर लोग भोजन का स्वाद बढाने के लिए करते हैं, लेकिन इन मसालों में भोजन का स्वाद बढाने के अलावा और भी कई प्राकृतिक गुण छुपे हुए हैं, जो भोजन पाचन में मदद तो करते ही है साथ ही हमारे स्वास्थ्य और सेहत को भी सही रखते हैं

भारतीय भोजन, पकवान और खाने की चीजे ज्यादातर मसालेदार और चटपटी होती है, क्योंकि भारतियों को तीखा, मीठा, खट्टा, चटपटा और मसालेदार खाने ज्यादा पसंद आते हैं.

लेकिन खाने में मसाले का उपयोग सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ने के लिए ही नहीं बल्कि और कई कारणों से किया जाता है.

तो आइये जानते हैं किस मसाले में क्या गुण पाया जाता है

1) हल्दी

ज्यादातर लोगों को लगता है कि भोजन में हल्दी का उपयोग सिर्फ रंग देने के लिए किया जाता है लेकिन ऐसा नहीं है. प्राचीन समय से भारतीय पूर्वजों को हल्दी के गुणों का ज्ञान था. हल्दी के अंदर करक्यूमिन नामक प्राकृतिक तत्व पाया जाता है, जो एक एंटीऑक्सिडेंट की तरह काम करता है, जिससे शरीर के अंदर कई बिमारी और जहरीले पदार्थो को बाहर करके शरीर को स्वास्थ्य बनाए रखता है. हल्दी में एंटी-कार्सिनोजेन और एंटी बैक्टीरियल के गुणों पाए जाते हैं

हल्दी में मौजूद औषधिक गुण सब्जी के विषैलता को ख़त्म करने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने का गुण भी होता है. इसलिए हर सब्जी में हल्दी का प्रयोग किया जाता है.

2) नमक

नमक का उपयोग भोजन में स्वाद लाने के लिए ही नहीं किया जाता बल्कि शरीर में आयोडीन की मात्रा को पूरा करने के लिए किया जाता है. प्रचीन समय में खड़ा नमक मिलता था, जिसमे आयोडीन की प्रचुर मात्रा होती थी. नमक का स्वाद बहुत ज्यादा कहर होने से उसको सीधे खा पाना मुश्किल था. इसलिए सब्जी और खाने की चीजों में डालकर नमक का उपयोग किया जाने लगा.

3) लाल मिर्च

लाल मिर्च में एंटीऑक्सिडेंट, रक्तचाप नियन्त्र और संचरण क्षमता, जिससे कोलेस्ट्रॉल रोकने व बचाव में मदद मिलती है.इसके साथ शरीर की कैलोरी जलाने में सहायक होती है. इसलिए लाल मिर्ची का प्रयोग भोजन में करते हैं क्योकि खाली मिर्ची खाना संभव नहीं.

4) हिंग

हिंग एक तरह का पत्थर होता है, जिसमे भोजन को पचाने और पेट साफ़ करने की प्राकृतिक क्षमता होती है. हिंग का उपयोग हर भोजन में नहीं किया जाता क्योकि हिंग एक उतेजक और तीव्र गुणों वाला तत्व है. हिंग का अधिकतर प्रयोग जल्दी न पचने वाले पदार्थों में या पेट को ख़राब करने से रोकने के लिए किया जाता है.

5) जीरा

इसमें लोह तत्व उपस्थित रहता है. इसके साथ जीरा शरीर की इम्यून सिस्टम को सही रखने में मदद करता है. साथ ही खाने का स्वाद बढाता है.

6) सरसों

भोजन में तेल की कमी को पूरा करता है और भोजन के पाचन में मदद करता है. इसलिए सरसों का उपयोग मसाले के रूप में किया जाता है.

7) अदरक

अदरक शरीर में रक्त को तरल और पतला बनाने के साथ रक्त के संचरण को भी सही बनाए रखता है. इसके अलावा कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रखता है. साथ ही अदरक शरीर को गर्म करने में मदद करता है. इसलिए खाने में अदरक का प्रयोग मसाले की भांति करते है.

8) धनिया पत्ती

धनिया की पत्तियों में विटामिन ए, बी- 16, सी, के, कैल्शियम, पोटेशिय, मैगनीज, आयरन और फोलेट्स होता है. साथ ही फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स गुण भी होता है, जो शरीर के लिए फायदेमंद होता है. धनिया भी तीव्र गंध वाली पत्तियों के कारण सीधे नहीं खाये जाते, इसलिए खानों में मसाले की भांति इसका प्रयोग किया जाता है.

9) लहसुन

लहसुन से शरीर के बैक्टीरिया ख़त्म होते है. लहसुन झनझनाहट और हाइपरटेंशन दूर रखता है, रक्त संचार तीव्र होता है, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करता है, और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है. लहसुन में इतने सारे औषधिक गुणों होने के कारण उसका प्रयोग मसाले की भांति किया जाता है

10) इलायची

इलायची में विटामिन सी, आयरन, तांबा और रबोफ्लेविन पाया जाता है. इसमें पाचन की तीव्र क्षमता होती है. इलायची में प्राकृतिक एंटीओक्सिडेंट पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है और तंत्रिकाओं को शांत रखने में मदद करता है. सांस से होने वाली बदबू की समस्या को खत्म करता है और पाचन की क्रिया को सही करता है.

हर सब्जी में हर मसाले का उपयोग नहीं होता. सब्जी की प्रकृति, गुणवत्ता और विषाक्त के अनुसार मासालों का चुनाव किया जाता है और भोजन में मिलाया जाता है.

सही मसालों का सही उपयोग सेहत के लिए फायदेमंद होता है. मसाले से स्वास्थ संबंधित समस्याएं ख़त्म होती हैं.

तुलसी, कच्चा लहसुन और अदरक को चबाने से दांतों के एनेमल को हानि होती है. इसलिए इन सब का काढ़ा पीना फायदेमंद रहता है.

बाजार में मिलने वाले मासलों के पाउडर मिलावटी होते है, इसलिए उनसे फायदे कम और नुक्सान ज्यादा होते है.

इसलिए खड़े मसाले का प्रयोग कर सकते हैं या घर में मिक्सी में पीस कर उपयोग में लाना फायदेमंद होगा.

संजय गुप्ता

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❄पूरी तरह से गंजे हो चुके व्यक्ति के भी जड़ो से नए बाल फूटने लगते है इस पत्ते से❄

आजकल अधिकतर युवा बाल सफ़ेद होने व असमय गिरने की समस्या से परेशान हैं। इस समस्या के कारण बहुत से युवा समय से पहले ही ज्यादा उम्र के दिखने लगते हैं। किसी व्यक्ति के बालों का समय से पहले झड़ जाने का रोग गंजापन कहलाता है। बहुत से लोगों में गंजेपन का रोग अनुवांशिक कारणों से भी होता है जैसे किसी व्यक्ति के पुराने पूर्वजों के समय से ही गंजेपन का रोग होता है। यह रोग साबुन से सिर को धोने से, एक-दूसरे का कंघा इस्तेमाल करने से या गलत शैंपू को सिर में लगाने से हो जाता है।आज हम आपके लिए लाये हैं एक ऐसा प्रयोग जिससे आपकी बालो की सभी समस्याओं से उभर पाएंगे वो भी बड़ी आसानी से।

🌻आवश्यक सामग्री :
चुकन्दर के पत्ते : 50 ग्राम

नारियल का तेल : 10 दिन तक नीले कांच की बोतल में सूरज की धूप में रखे।

🌻चमत्कारी चिकित्सा :
चुकन्दर के पत्ते का रस सिर में मालिश करने से गंजेपन का रोग मिट जाता है और सिर में नये बाल आना शुरू हो जाते हैं। बंद जड़ो से नए बाल निकलने लगते है।

गंजेपन के रोग में सूर्य किरण और रंग चिकित्सा के माध्यम से तैयार सूर्य चार्ज नारियल का नीला तेल दिन में 2 बार सिर पर अच्छी तरह से लगाने से लाभ होता है। इसके साथ ही नीले सैलोफिन कागज से 5-10 मिनट सूर्य की रोशनी देने से गंजापन दूर होकर सिर में नए बाल पैदा हो जाते हैं।

🌻किन बातो का रखना है ख्याल :

चुकन्दर के बीजों का अधिक मात्रा में सेवन आमाशय के लिए हानिकारक होता है। चुकन्दर का रस उपयोग करते समय ध्यान रखे कि यह आंखों में ना जाये क्योंकि ये हानिकारक हो सकता है।

🌻बालों की सभी समस्याओं के लिए 12 कारगर घरेलु उपाय :

1:-प्याज का पेस्ट : कुछ दिनों तक, नहाने से 1/2 घंटा पहले रोजाना सिर में प्याज का पेस्ट लगाएं। इससे सफेद बाल ( Safed baal ) काले और लम्बे होने लगेंगे।

2:-कच्चे पपीता का पेस्ट : सप्ताह में कम से कम 3 दिन दस मिनट का कच्चे पपीता का पेस्ट सिर में लगाएं। इससे बाल नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ भी नहीं होगी और सफेद बाल ( Safed baal ) काले भी होने लगेंगे ।

3:-भृंगराज और अश्वगंधा और नारियल तेल : भृंगराज और अश्वगंधा की जड़ें बालों के लिए वरदान मानी जाती हैं। इनका पेस्ट नारियल के तेल के साथ बालों की जड़ों में लगाएं और 1 घंटे बाद गुनगुने पानी से अच्छीं तरह से बाल धो लें। इससे भी बाल काले होते है।

4:-निम्बू और आंवला : निम्बू के रस में आंवला पाउडर मिलाकर उसे सिर पर लगाने से भी सफेद बाल काले हो जाते हैं।

5:-गाय का शुद्ध देसी घी : प्रतिदिन गाय का शुद्ध देसी घी से सिर की मालिश करके भी सफेद बालों को काला किया जा सकता है ।

6:-अदरक और शहद : अदरक को कद्दूकस कर शहद के रस में मिला लें। इसे बालों पर कम से कम सप्ताह में दो बार नियमित रूप से लगाएं। बालों का सफेद होना कम हो जाएगा।

7:-दही और टमाटर – नींबू रस और नीलगिरी : दही के साथ टमाटर को पीस लें। उसमें थोड़ा-सा नींबू रस और नीलगिरी का तेल मिलाएं। इससे सिर की मालिश सप्ताह में दो बार करें। बाल लंबी उम्र तक काले और घने बने रहेंगे।

8:-नारियल तेल या जैतून के तेल : 1/2 कप नारियल तेल या जैतून के तेल को हल्का गर्म करें। इसमें 4 ग्राम कर्पूर मिला कर इस तेल से मालिश करें। इसकी मालिश सप्ताह में एक बार जरूर करनी चाहिए। कुछ ही समय में रूसी खत्म हो जाएगी, बाल भी काले और लम्बे रहेंगे।

9:-आंवले के पाउडर में नींबू का रस : आंवले के पाउडर में नींबू का रस मिलाकर उसे नियमित रूप से लगाएं । शैंपू के बाद आंवला पाउडर पानी में घोलकर लगाने से भी बालों लम्बे तो होंगे साथ में इनकी कंडीशनिंग भी होती है, और बाल भी काले होते है । आंवला किसी ना किसी रुप मे सेवन भी अवश्य करते रहे ।

10:-तिल का तेल : जाड़े अर्थात ठंड में तिल अधिक से अधिक खाएं। तिल का तेल भी बालों को काला करने में मदद करता है।

11:-काली मिर्च, दही और नींबू रस : आधा कप दही में चुटकी भर काली मिर्च और चम्मच भर नींबू रस मिलाकर बालों में लगाए। 15 मिनट बाद बाल धो लें। बाल सफेद से फिर से काले होने लगेंगे।

12:–कारगर चमत्कारी पेस्ट : एक कटोरी मेहंदी पाउडर लें, इसमें दो बड़े चम्मच चाय का पानी, दो चम्मच आंवला पावडर, एक चम्मच नीबू का रस, दो चम्मच दही, शिकाकाई व रीठा पावडर, एक अंडा (अगर आप लेना चाहे तो ), आधा चम्मच नारियल तेल व थोड़ा-सा कत्था। यह सब चीजें लोहे की कड़ाही में डालकर पेस्ट बनाकर रात को भिगो दें। इसे सुबह बालों में लगाए।फिर दो घंटे बाद धो लें। इससे बाल बिना किसी नुकसान के काले और लम्बे हों जाएँगे। ऐसा माह में कम से कम एक बार अवश्य ही करें।

संजय गुप्ता

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आयुर्वेद एक प्राचीन चिकित्सा है
जिससे कई बीमारी ठीक की जा सकती हैं। ये चिकित्सा पूरी तरह से प्राकृतिक होती है और इसे घर पर आसानी से आजमाया जा सकता है।
आयुर्वेदिक उपचार की जो सबसे अच्छी बात है वह यह कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता और ज्यादातर समय यह अपना जादुई असर दिखा जाती है।
आम तौर पर, जब आप आयुर्वेदिक उपचार ले रहे होते हैं, तब आपको एक स्पेश डाइट पर रखा जाता है। साथ ही तीन मौलिक पदार्थ जैसे वात, पित्त और कफ को संतुलन में रखता है।
दवाइयों के साथ साथ अगर ये तीनों चीजे़ शरीर के भीतर संतुलित रहें तो आप जल्द ही ठीक हो सकते हैं। आयुर्वेद का उपचार मधुमेह, गठिया, अस्थमा, एसिडिटी और अन्य बीमारियों को ठीक करने के लिये किया जाता है।
अगर आपके शरीर पर मोटापे का प्रकोप है तो वो भी ठीक हो सकता है। तो दोस्तों, अब से बाजारू दवाइयों का सेवन कम कर दें और आयुर्वेदिक उपचार शुरु कर दीजिये।
इससे शरीर पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पडे़गा। यह बड़ी बड़ी बीमारियों को तो ठीक करता ही है साथ में बाल झड़ने, मुंहासे और बैक पेन जैसी आम बीमारियों को भी ठीक कर देता है।
आइये जानते हैं आयुर्वेदिक उपचार
जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही कारगर हैं।
एक्ने और पिंपल की समस्या के लिये 2-3 लहसुन की कलियों को पीसकर मुहांसों पर लगाइये। अगर स्किन संवेदनशील है तो उसमें थोड़ी सी दही मिला कर लगाएं। इसके अलावा धनिया की पत्तियों का पेस्ट बना कर उसमें चुटकी भर हल्दी मिलाकर लगा सकते हैं।
बालों को बढाने के लिये नारियल तेल, भृंगराज तेल और रोजमेरी तेल को हेयर मसाज के लिये प्रयोग बहुत लाभकारी है। एलोवेरा जूस, गाजर और पालक को भी आयुर्वेद मे उपयोगी माना गया है।
मधुमेह को भगाने के लिये अगर रोजाना करेले के रस के साथ आंवले का रस मिला कर पिया जाए तो मधुमेह में राहत मिलेगी। आप एक गिलास पानी में 10 तुलसी पत्ती, 10 नीम और 10 बेलपत्र डाल कर सुबह पी सकते हैं, परंतु खाली पेट।
गरम पानी में नींबू और एक चम्मच शहद डाल कर रोजाना पीने और नहाने के बाद तथा सोने से पहले सरसों के तेल से शरीर की मालिश करने से आप मोटापे से मुक्ति पा सकते हैं।
गठिया दर्द दूर करने के लिये एक कप सरसों के तेल में 10 ग्राम कपूर मिला कर तब तक गरम करें जब तक कि कपूर पिघल न जाए। प्रभावित जगह पर इस तेल से मालिश करें। आप चाहें तो छिले हुए आलू की स्लाइस काट कर ठंडे पानी में रातभर के लिये भिगो दें और सुबह इसे पी लें।
एसिडिटी होने पर दो इलायची को पीस कर 250 ग्राम पानी में मिलाकर उबालें। इसे छाने और पी लें। आप खाना खाने के बाद पुदीने की पत्ती या फिर लौंग चबा सकते हैं। इसके अलावा ठंडा दूध पीने से भी एसिडिटी की समस्या सही हो जाती है।
सर्दी-जुकाम मे एक गिलास गरम दूध में एक चम्मच हल्दी , काली मिर्च पाउडर दिन में दो बार पीजिये। इसके साथ ही आप एक चम्मच सौंफ को कूटकर एक छोटी सी पोटली में डाल सूंघते रहिये। इससे आपकी सर्दी जल्दी ही गायब हो जाएगी।
अस्थमा में लहसुन के रस को 15 बूंद पानी के साथ पीजिये। या फिर प्याज के रस में एक चम्मच शहद और काली मिर्च पीस कर मिला कर पीने से रोग दूर होगा।
दमकता चेहरा पाने के लिये यदि त्वचा की कोई भी परेशानी है तो आप एक समान मात्रा हल्दी, आमला और नीम की मिला लें और उसे एक चम्मच पानी के साथ दिन में दो बार लें। इससे खून साफ होगा और फिर आपको चमकदार त्वचा पाने में आसानी होगी।
कब्ज भगाने के लिये हर दिन दो सेब खाइये। चाकू की जगह पर दांतों का इस्तमाल करें। इसके अलावा रात को सोने से पहले एक गिलास पानी में शहद मिला कर पीजिये। इससे आपकी कब्ज की बीमारी दूर हो जाएगी।
मोतिया बिन्द के लिए सफ़ेद प्याज का रस एक तोला, असली शहद एक तोला, भीमसेनी कपूर तीन माशे, इन सबको खूब मिलाकर आँखों मे लगाने से मोतिया का असर नहीं होता।
कान दर्द प्याज गर्म राख में भुनकर (अन्यथा कैसे भी) उसका पानी निचोड़कर कान में डाले। दर्द में तुरंत आराम होगा।
भूख नही लगने पर आधा माशा फ़ूला हुआ सुहागा एक कप गुनगुने पानी में दो तीन बार लेने से भूख खुल जाती है।

संजय गुप्ता

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बरगद (वट) वृक्ष सैकडों रोगों की अचूक दवा भी है।
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बरगद का पेड़- हिंदू संस्कृति में वट वृक्ष यानी बरगद का पेड़ बहुत महत्त्व रखता है। इस पेड़ को त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु, महेश का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों में वटवृक्ष के बारे में विस्तार से बताया गया है। वट वृक्ष मोक्षप्रद है और इसे जीवन और मृत्यु का प्रतीक माना जाता है। जो व्यक्ति दो वटवृक्षों का विधिवत रोपण करता है वह मृत्यु के बाद शिवलोक को प्राप्त होता है। इस पेड़ को कभी नहीं काटना चाहिए। मान्यता है कि निःसंतान दंपति बरगद के पेड़ की पूजा करें तो उन्हें संतान प्राप्ति हो सकती है।

आग से जल जाना – दही के साथ बड़ को पीसकर बने लेप को जले हुए अंग पर लगाने से जलन दूर होती है। जले हुए स्थान पर बरगद की कोपल या कोमल पत्तों को गाय के दही में पीसकर लगाने से जलन कम हो जाती है।

बालों के रोग – बरगद के पत्तों की 20 ग्राम राख को 100 मिलीलीटर अलसी के तेल में मिलाकर मालिश करते रहने से सिर के बाल उग आते हैं। बरगद के साफ कोमल पत्तों के रस में, बराबर मात्रा में सरसों के तेल को मिलाकर आग पर पकाकर गर्म कर लें, इस तेल को बालों में लगाने से बालों के सभी रोग दूर हो जाते हैं।

25-25 ग्राम बरगद की जड़ और जटामांसी का चूर्ण, 400 मिलीलीटर तिल का तेल तथा 2 लीटर गिलोय का रस को एकसाथ मिलाकर धूप में रख दें, इसमें से पानी सूख जाने पर तेल को छान लें। इस तेल की मालिश से गंजापन दूर होकर बाल आ जाते हैं और बाल झड़ना बंद हो जाते हैं।

बरगद की जटा और काले तिल को बराबर मात्रा में लेकर खूब बारीक पीसकर सिर पर लगायें। इसके आधा घंटे बाद कंघी से बालों को साफ कर ऊपर से भांगरा और नारियल की गिरी दोनों को पीसकर लगाते रहने से बाल कुछ दिन में ही घने और लंबे हो जाते हैं।

नाक से खून बहना – 3 ग्राम बरगद की जटा के बारीक पाउडर को दूध की लस्सी के साथ पिलाने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है। नाक में बरगद के दूध की 2 बूंदें डालने से नकसीर (नाक से खून बहना) ठीक हो जाती है।

नींद का अधिक आना – बरगद के कड़े हरे शुष्क पत्तों के 10 ग्राम दरदरे चूर्ण को 1 लीटर पानी में पकायें, चौथाई बच जाने पर इसमें 1 ग्राम नमक मिलाकर सुबह-शाम पीने से हर समय आलस्य और नींद का आना कम हो जाता है।

जुकाम – बरगद के लाल रंग के कोमल पत्तों को छाया में सुखाकर पीसकर रख लें। फिर आधा किलो पानी में इस पाउडर को 1 या आधा चम्मच डालकर पकायें, पकने के बाद थोड़ा सा बचने पर इसमें 3 चम्मच शक्कर मिलाकर सुबह-शाम चाय की तरह पीने से जुकाम और नजला आदि रोग दूर होते हैं और सिर की कमजोरी ठीक हो जाती है।

हृदय रोग – 10 ग्राम बरगद के कोमल हरे रंग के पत्तों को 150 मिलीलीटर पानी में खूब पीसकर छानकर उसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर सुबह-शाम 15 दिन तक सेवन करने से दिल की घड़कन सामान्य हो जाती है। बरगद के दूध की 4-5 बूंदे बताशे में डालकर लगभग 40 दिन तक सेवन करने से दिल के रोग में लाभ मिलता है।

पैरों की बिवाई – बिवाई की फटी हुई दरारों पर बरगद का दूध भरकर मालिश करते रहने से कुछ ही दिनों में वह ठीक हो जाती है।

कमर दर्द – कमर दर्द में बरगद़ के दूध की मालिश दिन में 3 बार कुछ दिन करने से कमर दर्द में आराम आता है। बरगद का दूध अलसी के तेल में मिलाकर मालिश करने से कमर दर्द से छुटकरा मिलता है।

शक्तिवर्द्धक – बरगद के पेड़ के फल को सुखाकर बारीक पाउडर लेकर मिश्री के बारीक पाउडर मिला लें। रोजाना सुबह इस पाउडर को 6 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ सेवन से वीर्य का पतलापन, शीघ्रपतन आदि रोग दूर होते हैं।

शीघ्रपतन – सूर्योदय से पहले बरगद़ के पत्ते तोड़कर टपकने वाले दूध को एक बताशे में 3-4 बूंद टपकाकर खा लें। एक बार में ऐसा प्रयोग 2-3 बताशे खाकर पूरा करें। हर हफ्ते 2-2 बूंद की मात्रा बढ़ाते हुए 5-6 हफ्ते तक यह प्रयोग जारी रखें। इसके नियमित सेवन से शीघ्रपतन, वीर्य का पतलापन, स्वप्नदोष, प्रमेह, खूनी बवासीर, रक्त प्रदर आदि रोग ठीक हो जाते हैं और यह प्रयोग बलवीर्य वृद्धि के लिए भी बहुत लाभकारी है।

यौनशक्ति बढ़ाने हेतु – बरगद के पके फल को छाया में सुखाकर पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को बराबर मात्रा की मिश्री के साथ मिलाकर पीस लें। इसे एक चम्मच की मात्रा में सुबह खाली पेट और सोने से पहले एक कप दूध से नियमित रूप से सेवन करते रहने से कुछ हफ्तों में यौन शक्ति में बहुत लाभ मिलता है।

नपुंसकता – बताशे में बरगद के दूध की 5-10 बूंदे डालकर रोजाना सुबह-शाम खाने से नपुंसकता दूर होती है। 3-3 ग्राम बरगद के पेड़ की कोंपले (मुलायम पत्तियां) और गूलर के पेड़ की छाल और 6 ग्राम मिश्री को पीसकर लुगदी सी बना लें फिर इसे तीन बार मुंह में रखकर चबा लें और ऊपर से 250 ग्राम दूध पी लें। 40 दिन तक खाने से वीर्य बढ़ता है और संभोग से खत्म हुई शक्ति लौट आती है।

प्रमेह – बरगद के दूध की पहले दिन 1 बूंद 1 बतासे डालकर खायें, दूसरे दिन 2 बतासों पर 2 बूंदे, तीसरे दिन 3 बतासों पर 3 बूंद ऐसे 21 दिनों तक बढ़ाते हुए घटाना शुरू करें। इससे प्रमेह और स्वप्न दोष दूर होकर वीर्य बढ़ने लगता है।

वीर्य रोग में – बरगद के फल छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें। गाय के दूध के साथ यह 1 चम्मच चूर्ण खाने से वीर्य गाढ़ा व बलवान बनता है।

25 ग्राम बरगद की कोपलें (मुलायम पत्तियां) लेकर 250 मिलीलीटर पानी में पकायें। जब एक चौथाई पानी बचे तो इसे छानकर आधा किलो दूध में डालकर पकायें। इसमें 6 ग्राम ईसबगोल की भूसी और 6 ग्राम चीनी मिलाकर सिर्फ 7 दिन तक पीने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है। बरगद के दूध की 5-7 बूंदे बताशे में भरकर खाने से वीर्य के शुक्राणु बढ़ते है।

उपदंश (सिफलिस) – बरगद की जटा के साथ अर्जुन की छाल, हरड़, लोध्र व हल्दी को समान मात्रा में लेकर पानी में पीसकर लेप लगाने से उपदंश के घाव भर जाते हैं। बरगद का दूध उपदंश के फोड़े पर लगा देने से वह बैठ जाती है। बड़ के पत्तों की भस्म (राख) को पान में डालकर खाने से उपदंश रोग में लाभ होता है।

पेशाब की जलन – बरगद के पत्तों से बना काढ़ा 50 मिलीलीटर की मात्रा में 2-3 बार सेवन करने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है। यह काढ़ा सिर के भारीपन, नजला, जुकाम आदि में भी फायदा करता है।

स्तनों का ढीलापन – बरगद की जटाओं के बारीक रेशों को पीसकर बने लेप को रोजाना सोते समय स्तनों पर मालिश करके लगाते रहने से कुछ हफ्तों में स्तनों का ढीलापन दूर हो जाता है। बरगद की जटा के बारीक अग्रभाग के पीले व लाल तन्तुओं को पीसकर लेप करने से स्तनों के ढीलेपन में फायदा होता है।

गर्भपात होने पर – 4 ग्राम बरगद की छाया में सुखाई हुई छाल के चूर्ण को दूध की लस्सी के साथ खाने से गर्भपात नहीं होता है। बरगद की छाल के काढ़े में 3 से 5 ग्राम लोध्र की लुगदी और थोड़ा सा शहद मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करने से गर्भपात में जल्द ही लाभ होता है। योनि से रक्त का स्राव यदि अधिक हो तो बरगद की छाल के काढ़ा में छोटे कपड़े को भिगोकर योनि में रखें। इन दोनों प्रयोग से श्वेत प्रदर में भी फायदा होता है।

योनि का ढीलापन – बरगद की कोपलों के रस में फोया भिगोकर योनि में रोज 1 से 15 दिन तक रखने से योनि का ढीलापन दूर होकर योनि टाईट हो जाती है।

गर्भधारण करने हेतु – पुष्य नक्षत्र और शुक्ल पक्ष में लाये हुए बरगद की कोपलों का चूर्ण 6 ग्राम की मात्रा में मासिक-स्राव काल में प्रात: पानी के साथ 4-6 दिन खाने से स्त्री अवश्य गर्भधारण करती है, या बरगद की कोंपलों को पीसकर बेर के जितनी 21 गोलियां बनाकर 3 गोली रोज घी के साथ खाने से भी गर्भधारण करने में आसानी होती है।

गर्भकाल की उल्टी – बड़ की जटा के अंकुर को घोटकर गर्भवती स्त्री को पिलाने से सभी प्रकार की उल्टी बंद हो जाती है।

रक्तप्रदर – 20 ग्राम बरगद के कोमल पत्तों को 100 से 200 मिलीलीटर पानी में घोटकर रक्तप्रदर वाली स्त्री को सुबह-शाम पिलाने से लाभ होता है। स्त्री या पुरुष के पेशाब में खून आता हो तो वह भी बंद हो जाता है।

भगन्दर – बरगद के पत्ते, सौंठ, पुरानी ईंट के पाउडर, गिलोय तथा पुनर्नवा की जड़ का चूर्ण समान मात्रा में लेकर पानी के साथ पीसकर लेप करने से भगन्दर के रोग में फायदा होता है।

बादी बवासीर – 20 ग्राम बरगद की छाल को 400 मिलीलीटर पानी में पकायें, पकने पर आधा पानी रहने पर छानकर उसमें 10-10 ग्राम गाय का घी और चीनी मिलाकर गर्म ही खाने से कुछ ही दिनों में बादी बवासीर में लाभ होता है।

खूनी बवासीर – बरगद के 25 ग्राम कोमल पत्तों को 200 मिलीलीटर पानी में घोटकर खूनी बवासीर के रोगी को पिलाने से 2-3 दिन में ही खून का बहना बंद होता है। बवासीर के मस्सों पर बरगद के पीले पत्तों की राख को बराबर मात्रा में सरसों के तेल में मिलाकर लेप करते रहने से कुछ ही समय में बवासीर ठीक हो जाती है।

बरगद की सूखी लकड़ी को जलाकर इसके कोयलों को बारीक पीसकर सुबह-शाम 3 ग्राम की मात्रा में ताजे पानी के साथ रोगी को देते रहने से खूनी बवासीर में फायदा होता है। कोयलों के पाउडर को 21 बार धोये हुए मक्खन में मिलाकर मरहम बनाकर बवासीर के मस्सों पर लगाने से मस्से बिना किसी दर्द के दूर हो जाते हैं।

खूनी दस्त – दस्त के साथ या पहले खून निकलता है। उसे खूनी दस्त कहते हैं। इसे रोकने के लिए 20 ग्राम बरगद की कोपलें लेकर पीस लें और रात को पानी में भिगोंकर सुबह छान लें फिर इसमें 100 ग्राम घी मिलाकर पकायें, पकने पर घी बचने पर 20-25 ग्राम तक घी में शहद व शक्कर मिलाकर खाने से खूनी दस्त में लाभ होता है।

दस्त – बरगद के दूध को नाभि के छेद में भरने और उसके आसपास लगाने से अतिसार (दस्त) में लाभ होता है। 6 ग्राम बरगद की कोंपलों को 100 मिलीलीटर पानी में घोटकर और छानकर उसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर रोगी को पिलाने से और ऊपर से मट्ठा पिलाने से दस्त बंद हो जाते हैं।

बरगद की छाया मे सुखाई गई 3 ग्राम छाल को लेकर पाउड़र बना लें और दिन मे 3 बार चावलों के पानी के साथ या ताजे पानी के साथ लेने से दस्तों में फायदा मिलता है। बरगद की 8-10 कोंपलों को दही के साथ खाने से दस्त बंद हो जाते हैं।

आंव – लगभग 5 ग्राम की मात्रा में बड़ के दूध को सुबह-सुबह पीने से आंव का दस्त समाप्त हो जाता है।

मधुमेह – 20 ग्राम बरगद की छाल और इसकी जटा को बारीक पीसकर बनाये गये चूर्ण को आधा किलो पानी में पकायें, पकने पर अष्टमांश से भी कम बचे रहने पर इसे उतारकर ठंडा होने पर छानकर खाने से मधुमेह के रोग में लाभ होता है। लगभग 24 ग्राम बरगद के पेड़ की छाल लेकर जौकूट करें और उसे आधा लीटर पानी के साथ काढ़ा बना लें। जब चौथाई पानी शेष रह जाए तब उसे आग से उतारकर छाने और ठंडा होने पर पीयें। रोजाना 4-5 दिन तक सेवन से मधुमेह रोग कम हो जाता है। इसका प्रयोग सुबह-शाम करें।

उल्टी – लगभग 3 ग्राम से 6 ग्राम बरगद की जटा का सेवन करने से उल्टी आने का रोग दूर हो जाता है।

मुंह के छाले – 30 ग्राम वट की छाल को 1 लीटर पानी में उबालकर गरारे करने से मुंह के छाले खत्म हो जाते हैं।

घाव – घाव में कीड़े हो गये हो, बदबू आती हो तो बरगद की छाल के काढ़े से घाव को रोज धोने से इसके दूध की कुछ बूंदे दिन में 3-4 बार डालने से कीड़े खत्म होकर घाव भर जाते हैं। साधारण घाव पर बरगद के दूध को लगाने से घाव जल्दी अच्छे हो जाते हैं। अगर घाव ऐसा हो जिसमें कि टांके लगाने की जरूरत पड़ जाती है। तो ऐसे में घाव के मुंह को पिचकाकर बरगद के पत्ते गर्म करके घाव पर रखकर ऊपर से कसकर पट्टी बांधे, इससे 3 दिन में घाव भर जायेगा, ध्यान रहे इस पट्टी को 3 दिन तक न खोलें। फोड़े-फुन्सियों पर इसके पत्तों को गर्मकर बांधने से वे शीघ्र ही पककर फूट जाते हैं।।

 

Dev Sharma