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》क्या आप जानते हैं भोजन में क्यों डाले जाते हैं मसाले!

●भारत एक मात्र ऐसा देश है जहाँ तरह तरह के मसाले मिलते हैं, जो भोजन में प्रयोग किये जाते है.

भोजन में मसाले का प्रयोग ज्यादातर लोग भोजन का स्वाद बढाने के लिए करते हैं, लेकिन इन मसालों में भोजन का स्वाद बढाने के अलावा और भी कई प्राकृतिक गुण छुपे हुए हैं, जो भोजन पाचन में मदद तो करते ही है साथ ही हमारे स्वास्थ्य और सेहत को भी सही रखते हैं

भारतीय भोजन, पकवान और खाने की चीजे ज्यादातर मसालेदार और चटपटी होती है, क्योंकि भारतियों को तीखा, मीठा, खट्टा, चटपटा और मसालेदार खाने ज्यादा पसंद आते हैं.

लेकिन खाने में मसाले का उपयोग सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ने के लिए ही नहीं बल्कि और कई कारणों से किया जाता है.

तो आइये जानते हैं किस मसाले में क्या गुण पाया जाता है

1) हल्दी

ज्यादातर लोगों को लगता है कि भोजन में हल्दी का उपयोग सिर्फ रंग देने के लिए किया जाता है लेकिन ऐसा नहीं है. प्राचीन समय से भारतीय पूर्वजों को हल्दी के गुणों का ज्ञान था. हल्दी के अंदर करक्यूमिन नामक प्राकृतिक तत्व पाया जाता है, जो एक एंटीऑक्सिडेंट की तरह काम करता है, जिससे शरीर के अंदर कई बिमारी और जहरीले पदार्थो को बाहर करके शरीर को स्वास्थ्य बनाए रखता है. हल्दी में एंटी-कार्सिनोजेन और एंटी बैक्टीरियल के गुणों पाए जाते हैं

हल्दी में मौजूद औषधिक गुण सब्जी के विषैलता को ख़त्म करने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने का गुण भी होता है. इसलिए हर सब्जी में हल्दी का प्रयोग किया जाता है.

2) नमक

नमक का उपयोग भोजन में स्वाद लाने के लिए ही नहीं किया जाता बल्कि शरीर में आयोडीन की मात्रा को पूरा करने के लिए किया जाता है. प्रचीन समय में खड़ा नमक मिलता था, जिसमे आयोडीन की प्रचुर मात्रा होती थी. नमक का स्वाद बहुत ज्यादा कहर होने से उसको सीधे खा पाना मुश्किल था. इसलिए सब्जी और खाने की चीजों में डालकर नमक का उपयोग किया जाने लगा.

3) लाल मिर्च

लाल मिर्च में एंटीऑक्सिडेंट, रक्तचाप नियन्त्र और संचरण क्षमता, जिससे कोलेस्ट्रॉल रोकने व बचाव में मदद मिलती है.इसके साथ शरीर की कैलोरी जलाने में सहायक होती है. इसलिए लाल मिर्ची का प्रयोग भोजन में करते हैं क्योकि खाली मिर्ची खाना संभव नहीं.

4) हिंग

हिंग एक तरह का पत्थर होता है, जिसमे भोजन को पचाने और पेट साफ़ करने की प्राकृतिक क्षमता होती है. हिंग का उपयोग हर भोजन में नहीं किया जाता क्योकि हिंग एक उतेजक और तीव्र गुणों वाला तत्व है. हिंग का अधिकतर प्रयोग जल्दी न पचने वाले पदार्थों में या पेट को ख़राब करने से रोकने के लिए किया जाता है.

5) जीरा

इसमें लोह तत्व उपस्थित रहता है. इसके साथ जीरा शरीर की इम्यून सिस्टम को सही रखने में मदद करता है. साथ ही खाने का स्वाद बढाता है.

6) सरसों

भोजन में तेल की कमी को पूरा करता है और भोजन के पाचन में मदद करता है. इसलिए सरसों का उपयोग मसाले के रूप में किया जाता है.

7) अदरक

अदरक शरीर में रक्त को तरल और पतला बनाने के साथ रक्त के संचरण को भी सही बनाए रखता है. इसके अलावा कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर भी नियंत्रित रखता है. साथ ही अदरक शरीर को गर्म करने में मदद करता है. इसलिए खाने में अदरक का प्रयोग मसाले की भांति करते है.

8) धनिया पत्ती

धनिया की पत्तियों में विटामिन ए, बी- 16, सी, के, कैल्शियम, पोटेशिय, मैगनीज, आयरन और फोलेट्स होता है. साथ ही फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स गुण भी होता है, जो शरीर के लिए फायदेमंद होता है. धनिया भी तीव्र गंध वाली पत्तियों के कारण सीधे नहीं खाये जाते, इसलिए खानों में मसाले की भांति इसका प्रयोग किया जाता है.

9) लहसुन

लहसुन से शरीर के बैक्टीरिया ख़त्म होते है. लहसुन झनझनाहट और हाइपरटेंशन दूर रखता है, रक्त संचार तीव्र होता है, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करता है, और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है. लहसुन में इतने सारे औषधिक गुणों होने के कारण उसका प्रयोग मसाले की भांति किया जाता है

10) इलायची

इलायची में विटामिन सी, आयरन, तांबा और रबोफ्लेविन पाया जाता है. इसमें पाचन की तीव्र क्षमता होती है. इलायची में प्राकृतिक एंटीओक्सिडेंट पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है और तंत्रिकाओं को शांत रखने में मदद करता है. सांस से होने वाली बदबू की समस्या को खत्म करता है और पाचन की क्रिया को सही करता है.

हर सब्जी में हर मसाले का उपयोग नहीं होता. सब्जी की प्रकृति, गुणवत्ता और विषाक्त के अनुसार मासालों का चुनाव किया जाता है और भोजन में मिलाया जाता है.

सही मसालों का सही उपयोग सेहत के लिए फायदेमंद होता है. मसाले से स्वास्थ संबंधित समस्याएं ख़त्म होती हैं.

तुलसी, कच्चा लहसुन और अदरक को चबाने से दांतों के एनेमल को हानि होती है. इसलिए इन सब का काढ़ा पीना फायदेमंद रहता है.

बाजार में मिलने वाले मासलों के पाउडर मिलावटी होते है, इसलिए उनसे फायदे कम और नुक्सान ज्यादा होते है.

इसलिए खड़े मसाले का प्रयोग कर सकते हैं या घर में मिक्सी में पीस कर उपयोग में लाना फायदेमंद होगा.

संजय गुप्ता

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❄पूरी तरह से गंजे हो चुके व्यक्ति के भी जड़ो से नए बाल फूटने लगते है इस पत्ते से❄

आजकल अधिकतर युवा बाल सफ़ेद होने व असमय गिरने की समस्या से परेशान हैं। इस समस्या के कारण बहुत से युवा समय से पहले ही ज्यादा उम्र के दिखने लगते हैं। किसी व्यक्ति के बालों का समय से पहले झड़ जाने का रोग गंजापन कहलाता है। बहुत से लोगों में गंजेपन का रोग अनुवांशिक कारणों से भी होता है जैसे किसी व्यक्ति के पुराने पूर्वजों के समय से ही गंजेपन का रोग होता है। यह रोग साबुन से सिर को धोने से, एक-दूसरे का कंघा इस्तेमाल करने से या गलत शैंपू को सिर में लगाने से हो जाता है।आज हम आपके लिए लाये हैं एक ऐसा प्रयोग जिससे आपकी बालो की सभी समस्याओं से उभर पाएंगे वो भी बड़ी आसानी से।

🌻आवश्यक सामग्री :
चुकन्दर के पत्ते : 50 ग्राम

नारियल का तेल : 10 दिन तक नीले कांच की बोतल में सूरज की धूप में रखे।

🌻चमत्कारी चिकित्सा :
चुकन्दर के पत्ते का रस सिर में मालिश करने से गंजेपन का रोग मिट जाता है और सिर में नये बाल आना शुरू हो जाते हैं। बंद जड़ो से नए बाल निकलने लगते है।

गंजेपन के रोग में सूर्य किरण और रंग चिकित्सा के माध्यम से तैयार सूर्य चार्ज नारियल का नीला तेल दिन में 2 बार सिर पर अच्छी तरह से लगाने से लाभ होता है। इसके साथ ही नीले सैलोफिन कागज से 5-10 मिनट सूर्य की रोशनी देने से गंजापन दूर होकर सिर में नए बाल पैदा हो जाते हैं।

🌻किन बातो का रखना है ख्याल :

चुकन्दर के बीजों का अधिक मात्रा में सेवन आमाशय के लिए हानिकारक होता है। चुकन्दर का रस उपयोग करते समय ध्यान रखे कि यह आंखों में ना जाये क्योंकि ये हानिकारक हो सकता है।

🌻बालों की सभी समस्याओं के लिए 12 कारगर घरेलु उपाय :

1:-प्याज का पेस्ट : कुछ दिनों तक, नहाने से 1/2 घंटा पहले रोजाना सिर में प्याज का पेस्ट लगाएं। इससे सफेद बाल ( Safed baal ) काले और लम्बे होने लगेंगे।

2:-कच्चे पपीता का पेस्ट : सप्ताह में कम से कम 3 दिन दस मिनट का कच्चे पपीता का पेस्ट सिर में लगाएं। इससे बाल नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ भी नहीं होगी और सफेद बाल ( Safed baal ) काले भी होने लगेंगे ।

3:-भृंगराज और अश्वगंधा और नारियल तेल : भृंगराज और अश्वगंधा की जड़ें बालों के लिए वरदान मानी जाती हैं। इनका पेस्ट नारियल के तेल के साथ बालों की जड़ों में लगाएं और 1 घंटे बाद गुनगुने पानी से अच्छीं तरह से बाल धो लें। इससे भी बाल काले होते है।

4:-निम्बू और आंवला : निम्बू के रस में आंवला पाउडर मिलाकर उसे सिर पर लगाने से भी सफेद बाल काले हो जाते हैं।

5:-गाय का शुद्ध देसी घी : प्रतिदिन गाय का शुद्ध देसी घी से सिर की मालिश करके भी सफेद बालों को काला किया जा सकता है ।

6:-अदरक और शहद : अदरक को कद्दूकस कर शहद के रस में मिला लें। इसे बालों पर कम से कम सप्ताह में दो बार नियमित रूप से लगाएं। बालों का सफेद होना कम हो जाएगा।

7:-दही और टमाटर – नींबू रस और नीलगिरी : दही के साथ टमाटर को पीस लें। उसमें थोड़ा-सा नींबू रस और नीलगिरी का तेल मिलाएं। इससे सिर की मालिश सप्ताह में दो बार करें। बाल लंबी उम्र तक काले और घने बने रहेंगे।

8:-नारियल तेल या जैतून के तेल : 1/2 कप नारियल तेल या जैतून के तेल को हल्का गर्म करें। इसमें 4 ग्राम कर्पूर मिला कर इस तेल से मालिश करें। इसकी मालिश सप्ताह में एक बार जरूर करनी चाहिए। कुछ ही समय में रूसी खत्म हो जाएगी, बाल भी काले और लम्बे रहेंगे।

9:-आंवले के पाउडर में नींबू का रस : आंवले के पाउडर में नींबू का रस मिलाकर उसे नियमित रूप से लगाएं । शैंपू के बाद आंवला पाउडर पानी में घोलकर लगाने से भी बालों लम्बे तो होंगे साथ में इनकी कंडीशनिंग भी होती है, और बाल भी काले होते है । आंवला किसी ना किसी रुप मे सेवन भी अवश्य करते रहे ।

10:-तिल का तेल : जाड़े अर्थात ठंड में तिल अधिक से अधिक खाएं। तिल का तेल भी बालों को काला करने में मदद करता है।

11:-काली मिर्च, दही और नींबू रस : आधा कप दही में चुटकी भर काली मिर्च और चम्मच भर नींबू रस मिलाकर बालों में लगाए। 15 मिनट बाद बाल धो लें। बाल सफेद से फिर से काले होने लगेंगे।

12:–कारगर चमत्कारी पेस्ट : एक कटोरी मेहंदी पाउडर लें, इसमें दो बड़े चम्मच चाय का पानी, दो चम्मच आंवला पावडर, एक चम्मच नीबू का रस, दो चम्मच दही, शिकाकाई व रीठा पावडर, एक अंडा (अगर आप लेना चाहे तो ), आधा चम्मच नारियल तेल व थोड़ा-सा कत्था। यह सब चीजें लोहे की कड़ाही में डालकर पेस्ट बनाकर रात को भिगो दें। इसे सुबह बालों में लगाए।फिर दो घंटे बाद धो लें। इससे बाल बिना किसी नुकसान के काले और लम्बे हों जाएँगे। ऐसा माह में कम से कम एक बार अवश्य ही करें।

संजय गुप्ता

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आयुर्वेद एक प्राचीन चिकित्सा है
जिससे कई बीमारी ठीक की जा सकती हैं। ये चिकित्सा पूरी तरह से प्राकृतिक होती है और इसे घर पर आसानी से आजमाया जा सकता है।
आयुर्वेदिक उपचार की जो सबसे अच्छी बात है वह यह कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता और ज्यादातर समय यह अपना जादुई असर दिखा जाती है।
आम तौर पर, जब आप आयुर्वेदिक उपचार ले रहे होते हैं, तब आपको एक स्पेश डाइट पर रखा जाता है। साथ ही तीन मौलिक पदार्थ जैसे वात, पित्त और कफ को संतुलन में रखता है।
दवाइयों के साथ साथ अगर ये तीनों चीजे़ शरीर के भीतर संतुलित रहें तो आप जल्द ही ठीक हो सकते हैं। आयुर्वेद का उपचार मधुमेह, गठिया, अस्थमा, एसिडिटी और अन्य बीमारियों को ठीक करने के लिये किया जाता है।
अगर आपके शरीर पर मोटापे का प्रकोप है तो वो भी ठीक हो सकता है। तो दोस्तों, अब से बाजारू दवाइयों का सेवन कम कर दें और आयुर्वेदिक उपचार शुरु कर दीजिये।
इससे शरीर पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पडे़गा। यह बड़ी बड़ी बीमारियों को तो ठीक करता ही है साथ में बाल झड़ने, मुंहासे और बैक पेन जैसी आम बीमारियों को भी ठीक कर देता है।
आइये जानते हैं आयुर्वेदिक उपचार
जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही कारगर हैं।
एक्ने और पिंपल की समस्या के लिये 2-3 लहसुन की कलियों को पीसकर मुहांसों पर लगाइये। अगर स्किन संवेदनशील है तो उसमें थोड़ी सी दही मिला कर लगाएं। इसके अलावा धनिया की पत्तियों का पेस्ट बना कर उसमें चुटकी भर हल्दी मिलाकर लगा सकते हैं।
बालों को बढाने के लिये नारियल तेल, भृंगराज तेल और रोजमेरी तेल को हेयर मसाज के लिये प्रयोग बहुत लाभकारी है। एलोवेरा जूस, गाजर और पालक को भी आयुर्वेद मे उपयोगी माना गया है।
मधुमेह को भगाने के लिये अगर रोजाना करेले के रस के साथ आंवले का रस मिला कर पिया जाए तो मधुमेह में राहत मिलेगी। आप एक गिलास पानी में 10 तुलसी पत्ती, 10 नीम और 10 बेलपत्र डाल कर सुबह पी सकते हैं, परंतु खाली पेट।
गरम पानी में नींबू और एक चम्मच शहद डाल कर रोजाना पीने और नहाने के बाद तथा सोने से पहले सरसों के तेल से शरीर की मालिश करने से आप मोटापे से मुक्ति पा सकते हैं।
गठिया दर्द दूर करने के लिये एक कप सरसों के तेल में 10 ग्राम कपूर मिला कर तब तक गरम करें जब तक कि कपूर पिघल न जाए। प्रभावित जगह पर इस तेल से मालिश करें। आप चाहें तो छिले हुए आलू की स्लाइस काट कर ठंडे पानी में रातभर के लिये भिगो दें और सुबह इसे पी लें।
एसिडिटी होने पर दो इलायची को पीस कर 250 ग्राम पानी में मिलाकर उबालें। इसे छाने और पी लें। आप खाना खाने के बाद पुदीने की पत्ती या फिर लौंग चबा सकते हैं। इसके अलावा ठंडा दूध पीने से भी एसिडिटी की समस्या सही हो जाती है।
सर्दी-जुकाम मे एक गिलास गरम दूध में एक चम्मच हल्दी , काली मिर्च पाउडर दिन में दो बार पीजिये। इसके साथ ही आप एक चम्मच सौंफ को कूटकर एक छोटी सी पोटली में डाल सूंघते रहिये। इससे आपकी सर्दी जल्दी ही गायब हो जाएगी।
अस्थमा में लहसुन के रस को 15 बूंद पानी के साथ पीजिये। या फिर प्याज के रस में एक चम्मच शहद और काली मिर्च पीस कर मिला कर पीने से रोग दूर होगा।
दमकता चेहरा पाने के लिये यदि त्वचा की कोई भी परेशानी है तो आप एक समान मात्रा हल्दी, आमला और नीम की मिला लें और उसे एक चम्मच पानी के साथ दिन में दो बार लें। इससे खून साफ होगा और फिर आपको चमकदार त्वचा पाने में आसानी होगी।
कब्ज भगाने के लिये हर दिन दो सेब खाइये। चाकू की जगह पर दांतों का इस्तमाल करें। इसके अलावा रात को सोने से पहले एक गिलास पानी में शहद मिला कर पीजिये। इससे आपकी कब्ज की बीमारी दूर हो जाएगी।
मोतिया बिन्द के लिए सफ़ेद प्याज का रस एक तोला, असली शहद एक तोला, भीमसेनी कपूर तीन माशे, इन सबको खूब मिलाकर आँखों मे लगाने से मोतिया का असर नहीं होता।
कान दर्द प्याज गर्म राख में भुनकर (अन्यथा कैसे भी) उसका पानी निचोड़कर कान में डाले। दर्द में तुरंत आराम होगा।
भूख नही लगने पर आधा माशा फ़ूला हुआ सुहागा एक कप गुनगुने पानी में दो तीन बार लेने से भूख खुल जाती है।

संजय गुप्ता

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बरगद (वट) वृक्ष सैकडों रोगों की अचूक दवा भी है।
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बरगद का पेड़- हिंदू संस्कृति में वट वृक्ष यानी बरगद का पेड़ बहुत महत्त्व रखता है। इस पेड़ को त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु, महेश का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों में वटवृक्ष के बारे में विस्तार से बताया गया है। वट वृक्ष मोक्षप्रद है और इसे जीवन और मृत्यु का प्रतीक माना जाता है। जो व्यक्ति दो वटवृक्षों का विधिवत रोपण करता है वह मृत्यु के बाद शिवलोक को प्राप्त होता है। इस पेड़ को कभी नहीं काटना चाहिए। मान्यता है कि निःसंतान दंपति बरगद के पेड़ की पूजा करें तो उन्हें संतान प्राप्ति हो सकती है।

आग से जल जाना – दही के साथ बड़ को पीसकर बने लेप को जले हुए अंग पर लगाने से जलन दूर होती है। जले हुए स्थान पर बरगद की कोपल या कोमल पत्तों को गाय के दही में पीसकर लगाने से जलन कम हो जाती है।

बालों के रोग – बरगद के पत्तों की 20 ग्राम राख को 100 मिलीलीटर अलसी के तेल में मिलाकर मालिश करते रहने से सिर के बाल उग आते हैं। बरगद के साफ कोमल पत्तों के रस में, बराबर मात्रा में सरसों के तेल को मिलाकर आग पर पकाकर गर्म कर लें, इस तेल को बालों में लगाने से बालों के सभी रोग दूर हो जाते हैं।

25-25 ग्राम बरगद की जड़ और जटामांसी का चूर्ण, 400 मिलीलीटर तिल का तेल तथा 2 लीटर गिलोय का रस को एकसाथ मिलाकर धूप में रख दें, इसमें से पानी सूख जाने पर तेल को छान लें। इस तेल की मालिश से गंजापन दूर होकर बाल आ जाते हैं और बाल झड़ना बंद हो जाते हैं।

बरगद की जटा और काले तिल को बराबर मात्रा में लेकर खूब बारीक पीसकर सिर पर लगायें। इसके आधा घंटे बाद कंघी से बालों को साफ कर ऊपर से भांगरा और नारियल की गिरी दोनों को पीसकर लगाते रहने से बाल कुछ दिन में ही घने और लंबे हो जाते हैं।

नाक से खून बहना – 3 ग्राम बरगद की जटा के बारीक पाउडर को दूध की लस्सी के साथ पिलाने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है। नाक में बरगद के दूध की 2 बूंदें डालने से नकसीर (नाक से खून बहना) ठीक हो जाती है।

नींद का अधिक आना – बरगद के कड़े हरे शुष्क पत्तों के 10 ग्राम दरदरे चूर्ण को 1 लीटर पानी में पकायें, चौथाई बच जाने पर इसमें 1 ग्राम नमक मिलाकर सुबह-शाम पीने से हर समय आलस्य और नींद का आना कम हो जाता है।

जुकाम – बरगद के लाल रंग के कोमल पत्तों को छाया में सुखाकर पीसकर रख लें। फिर आधा किलो पानी में इस पाउडर को 1 या आधा चम्मच डालकर पकायें, पकने के बाद थोड़ा सा बचने पर इसमें 3 चम्मच शक्कर मिलाकर सुबह-शाम चाय की तरह पीने से जुकाम और नजला आदि रोग दूर होते हैं और सिर की कमजोरी ठीक हो जाती है।

हृदय रोग – 10 ग्राम बरगद के कोमल हरे रंग के पत्तों को 150 मिलीलीटर पानी में खूब पीसकर छानकर उसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर सुबह-शाम 15 दिन तक सेवन करने से दिल की घड़कन सामान्य हो जाती है। बरगद के दूध की 4-5 बूंदे बताशे में डालकर लगभग 40 दिन तक सेवन करने से दिल के रोग में लाभ मिलता है।

पैरों की बिवाई – बिवाई की फटी हुई दरारों पर बरगद का दूध भरकर मालिश करते रहने से कुछ ही दिनों में वह ठीक हो जाती है।

कमर दर्द – कमर दर्द में बरगद़ के दूध की मालिश दिन में 3 बार कुछ दिन करने से कमर दर्द में आराम आता है। बरगद का दूध अलसी के तेल में मिलाकर मालिश करने से कमर दर्द से छुटकरा मिलता है।

शक्तिवर्द्धक – बरगद के पेड़ के फल को सुखाकर बारीक पाउडर लेकर मिश्री के बारीक पाउडर मिला लें। रोजाना सुबह इस पाउडर को 6 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ सेवन से वीर्य का पतलापन, शीघ्रपतन आदि रोग दूर होते हैं।

शीघ्रपतन – सूर्योदय से पहले बरगद़ के पत्ते तोड़कर टपकने वाले दूध को एक बताशे में 3-4 बूंद टपकाकर खा लें। एक बार में ऐसा प्रयोग 2-3 बताशे खाकर पूरा करें। हर हफ्ते 2-2 बूंद की मात्रा बढ़ाते हुए 5-6 हफ्ते तक यह प्रयोग जारी रखें। इसके नियमित सेवन से शीघ्रपतन, वीर्य का पतलापन, स्वप्नदोष, प्रमेह, खूनी बवासीर, रक्त प्रदर आदि रोग ठीक हो जाते हैं और यह प्रयोग बलवीर्य वृद्धि के लिए भी बहुत लाभकारी है।

यौनशक्ति बढ़ाने हेतु – बरगद के पके फल को छाया में सुखाकर पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को बराबर मात्रा की मिश्री के साथ मिलाकर पीस लें। इसे एक चम्मच की मात्रा में सुबह खाली पेट और सोने से पहले एक कप दूध से नियमित रूप से सेवन करते रहने से कुछ हफ्तों में यौन शक्ति में बहुत लाभ मिलता है।

नपुंसकता – बताशे में बरगद के दूध की 5-10 बूंदे डालकर रोजाना सुबह-शाम खाने से नपुंसकता दूर होती है। 3-3 ग्राम बरगद के पेड़ की कोंपले (मुलायम पत्तियां) और गूलर के पेड़ की छाल और 6 ग्राम मिश्री को पीसकर लुगदी सी बना लें फिर इसे तीन बार मुंह में रखकर चबा लें और ऊपर से 250 ग्राम दूध पी लें। 40 दिन तक खाने से वीर्य बढ़ता है और संभोग से खत्म हुई शक्ति लौट आती है।

प्रमेह – बरगद के दूध की पहले दिन 1 बूंद 1 बतासे डालकर खायें, दूसरे दिन 2 बतासों पर 2 बूंदे, तीसरे दिन 3 बतासों पर 3 बूंद ऐसे 21 दिनों तक बढ़ाते हुए घटाना शुरू करें। इससे प्रमेह और स्वप्न दोष दूर होकर वीर्य बढ़ने लगता है।

वीर्य रोग में – बरगद के फल छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें। गाय के दूध के साथ यह 1 चम्मच चूर्ण खाने से वीर्य गाढ़ा व बलवान बनता है।

25 ग्राम बरगद की कोपलें (मुलायम पत्तियां) लेकर 250 मिलीलीटर पानी में पकायें। जब एक चौथाई पानी बचे तो इसे छानकर आधा किलो दूध में डालकर पकायें। इसमें 6 ग्राम ईसबगोल की भूसी और 6 ग्राम चीनी मिलाकर सिर्फ 7 दिन तक पीने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है। बरगद के दूध की 5-7 बूंदे बताशे में भरकर खाने से वीर्य के शुक्राणु बढ़ते है।

उपदंश (सिफलिस) – बरगद की जटा के साथ अर्जुन की छाल, हरड़, लोध्र व हल्दी को समान मात्रा में लेकर पानी में पीसकर लेप लगाने से उपदंश के घाव भर जाते हैं। बरगद का दूध उपदंश के फोड़े पर लगा देने से वह बैठ जाती है। बड़ के पत्तों की भस्म (राख) को पान में डालकर खाने से उपदंश रोग में लाभ होता है।

पेशाब की जलन – बरगद के पत्तों से बना काढ़ा 50 मिलीलीटर की मात्रा में 2-3 बार सेवन करने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है। यह काढ़ा सिर के भारीपन, नजला, जुकाम आदि में भी फायदा करता है।

स्तनों का ढीलापन – बरगद की जटाओं के बारीक रेशों को पीसकर बने लेप को रोजाना सोते समय स्तनों पर मालिश करके लगाते रहने से कुछ हफ्तों में स्तनों का ढीलापन दूर हो जाता है। बरगद की जटा के बारीक अग्रभाग के पीले व लाल तन्तुओं को पीसकर लेप करने से स्तनों के ढीलेपन में फायदा होता है।

गर्भपात होने पर – 4 ग्राम बरगद की छाया में सुखाई हुई छाल के चूर्ण को दूध की लस्सी के साथ खाने से गर्भपात नहीं होता है। बरगद की छाल के काढ़े में 3 से 5 ग्राम लोध्र की लुगदी और थोड़ा सा शहद मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करने से गर्भपात में जल्द ही लाभ होता है। योनि से रक्त का स्राव यदि अधिक हो तो बरगद की छाल के काढ़ा में छोटे कपड़े को भिगोकर योनि में रखें। इन दोनों प्रयोग से श्वेत प्रदर में भी फायदा होता है।

योनि का ढीलापन – बरगद की कोपलों के रस में फोया भिगोकर योनि में रोज 1 से 15 दिन तक रखने से योनि का ढीलापन दूर होकर योनि टाईट हो जाती है।

गर्भधारण करने हेतु – पुष्य नक्षत्र और शुक्ल पक्ष में लाये हुए बरगद की कोपलों का चूर्ण 6 ग्राम की मात्रा में मासिक-स्राव काल में प्रात: पानी के साथ 4-6 दिन खाने से स्त्री अवश्य गर्भधारण करती है, या बरगद की कोंपलों को पीसकर बेर के जितनी 21 गोलियां बनाकर 3 गोली रोज घी के साथ खाने से भी गर्भधारण करने में आसानी होती है।

गर्भकाल की उल्टी – बड़ की जटा के अंकुर को घोटकर गर्भवती स्त्री को पिलाने से सभी प्रकार की उल्टी बंद हो जाती है।

रक्तप्रदर – 20 ग्राम बरगद के कोमल पत्तों को 100 से 200 मिलीलीटर पानी में घोटकर रक्तप्रदर वाली स्त्री को सुबह-शाम पिलाने से लाभ होता है। स्त्री या पुरुष के पेशाब में खून आता हो तो वह भी बंद हो जाता है।

भगन्दर – बरगद के पत्ते, सौंठ, पुरानी ईंट के पाउडर, गिलोय तथा पुनर्नवा की जड़ का चूर्ण समान मात्रा में लेकर पानी के साथ पीसकर लेप करने से भगन्दर के रोग में फायदा होता है।

बादी बवासीर – 20 ग्राम बरगद की छाल को 400 मिलीलीटर पानी में पकायें, पकने पर आधा पानी रहने पर छानकर उसमें 10-10 ग्राम गाय का घी और चीनी मिलाकर गर्म ही खाने से कुछ ही दिनों में बादी बवासीर में लाभ होता है।

खूनी बवासीर – बरगद के 25 ग्राम कोमल पत्तों को 200 मिलीलीटर पानी में घोटकर खूनी बवासीर के रोगी को पिलाने से 2-3 दिन में ही खून का बहना बंद होता है। बवासीर के मस्सों पर बरगद के पीले पत्तों की राख को बराबर मात्रा में सरसों के तेल में मिलाकर लेप करते रहने से कुछ ही समय में बवासीर ठीक हो जाती है।

बरगद की सूखी लकड़ी को जलाकर इसके कोयलों को बारीक पीसकर सुबह-शाम 3 ग्राम की मात्रा में ताजे पानी के साथ रोगी को देते रहने से खूनी बवासीर में फायदा होता है। कोयलों के पाउडर को 21 बार धोये हुए मक्खन में मिलाकर मरहम बनाकर बवासीर के मस्सों पर लगाने से मस्से बिना किसी दर्द के दूर हो जाते हैं।

खूनी दस्त – दस्त के साथ या पहले खून निकलता है। उसे खूनी दस्त कहते हैं। इसे रोकने के लिए 20 ग्राम बरगद की कोपलें लेकर पीस लें और रात को पानी में भिगोंकर सुबह छान लें फिर इसमें 100 ग्राम घी मिलाकर पकायें, पकने पर घी बचने पर 20-25 ग्राम तक घी में शहद व शक्कर मिलाकर खाने से खूनी दस्त में लाभ होता है।

दस्त – बरगद के दूध को नाभि के छेद में भरने और उसके आसपास लगाने से अतिसार (दस्त) में लाभ होता है। 6 ग्राम बरगद की कोंपलों को 100 मिलीलीटर पानी में घोटकर और छानकर उसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर रोगी को पिलाने से और ऊपर से मट्ठा पिलाने से दस्त बंद हो जाते हैं।

बरगद की छाया मे सुखाई गई 3 ग्राम छाल को लेकर पाउड़र बना लें और दिन मे 3 बार चावलों के पानी के साथ या ताजे पानी के साथ लेने से दस्तों में फायदा मिलता है। बरगद की 8-10 कोंपलों को दही के साथ खाने से दस्त बंद हो जाते हैं।

आंव – लगभग 5 ग्राम की मात्रा में बड़ के दूध को सुबह-सुबह पीने से आंव का दस्त समाप्त हो जाता है।

मधुमेह – 20 ग्राम बरगद की छाल और इसकी जटा को बारीक पीसकर बनाये गये चूर्ण को आधा किलो पानी में पकायें, पकने पर अष्टमांश से भी कम बचे रहने पर इसे उतारकर ठंडा होने पर छानकर खाने से मधुमेह के रोग में लाभ होता है। लगभग 24 ग्राम बरगद के पेड़ की छाल लेकर जौकूट करें और उसे आधा लीटर पानी के साथ काढ़ा बना लें। जब चौथाई पानी शेष रह जाए तब उसे आग से उतारकर छाने और ठंडा होने पर पीयें। रोजाना 4-5 दिन तक सेवन से मधुमेह रोग कम हो जाता है। इसका प्रयोग सुबह-शाम करें।

उल्टी – लगभग 3 ग्राम से 6 ग्राम बरगद की जटा का सेवन करने से उल्टी आने का रोग दूर हो जाता है।

मुंह के छाले – 30 ग्राम वट की छाल को 1 लीटर पानी में उबालकर गरारे करने से मुंह के छाले खत्म हो जाते हैं।

घाव – घाव में कीड़े हो गये हो, बदबू आती हो तो बरगद की छाल के काढ़े से घाव को रोज धोने से इसके दूध की कुछ बूंदे दिन में 3-4 बार डालने से कीड़े खत्म होकर घाव भर जाते हैं। साधारण घाव पर बरगद के दूध को लगाने से घाव जल्दी अच्छे हो जाते हैं। अगर घाव ऐसा हो जिसमें कि टांके लगाने की जरूरत पड़ जाती है। तो ऐसे में घाव के मुंह को पिचकाकर बरगद के पत्ते गर्म करके घाव पर रखकर ऊपर से कसकर पट्टी बांधे, इससे 3 दिन में घाव भर जायेगा, ध्यान रहे इस पट्टी को 3 दिन तक न खोलें। फोड़े-फुन्सियों पर इसके पत्तों को गर्मकर बांधने से वे शीघ्र ही पककर फूट जाते हैं।।

 

Dev Sharma

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मधुमेह ( शुगर ) की आयुर्वेदिक चिकित्सा
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मधुमेह दमन चूर्ण 100 ग्राम
नाग भस्म 10 ग्राम
शिलाजीत 10 ग्राम
उपरोक्त में शिलाजीत को पहले खरल में अच्छी तरह पीस लें फिर सभी ओषधियों को आपस मे भलीभांति मिलाकर 3 ग्राम सुबह 3 ग्राम शाम को ले ।बसन्तकुसुमाकर रस एक गोली सुबह एक गोली शाम को लेनी चाहिए ।
चन्द्र प्रभा वटी 2 गोली सुबह 2 गोली शाम को लें गाय के दूध के साथ ।
नॉट – ध्यान रहे मधुमेह , नाग भस्म , ओर शिलाजीत से शुगर लेवल से कम भी आ सकती है ।
लेवल ज्यादा बढ़ हुआ नही हो तो बसन्त कुसुमाकर रस ओर चन्द्र प्रभा वटी ही पर्याप्त है

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🕉परमार्थ योग🧘‍♀ की तरफ से कुछ जानकारी
जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए :-

  1. रोगी के रोग की चिकित्सा करने वाले निकृष्ट , रोग के कारणों की चिकित्सा करने वाले औसत और रोग-मुक्त रखने वाले श्रेष्ठ चिकित्सक होते हैं ।
  2. लकवा – सोडियम की कमी के कारण होता है ।

  3. हाई वी पी में – स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे ।

  4. लो बी पी – सेंधा नमक डालकर पानी पीयें ।

  5. कूबड़ निकलना– फास्फोरस की कमी ।
  6. कफ – फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं ।
  7. दमा, अस्थमा – सल्फर की कमी ।
  8. सिजेरियन आपरेशन – आयरन , कैल्शियम की कमी ।
  9. सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें
  10. अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें
  11. जम्भाई– शरीर में आक्सीजन की कमी ।
  12. जुकाम – जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें ।
  13. ताम्बे का पानी – प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें ।
  14. किडनी – भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये ।
  15. गिलास एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो ( पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है अतः लोटे का पानी पियें, लोटे का कम सर्फेसटेन्स होता है ।

  16. अस्थमा , मधुमेह , कैसर से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं ।

  17. वास्तु के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा ।

  18. परम्परायें वहीँ विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं ।
  19. पथरी – अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर है ।
  20. RO का पानी कभी ना पियें यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता । कुएँ का पानी पियें । बारिस का पानी सबसे अच्छा , पानी की सफाई के लिए सहिजन की फली सबसे बेहतर है ।
  21. सोकर उठते समय हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का स्वर चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें ।
  22. पेट के बल सोने से हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है ।
  23. भोजन के लिए पूर्व दिशा , पढाई के लिए उत्तर दिशा बेहतर है ।
  24. HDL बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा ।
  25. गैस की समस्या होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें ।
  26. चीनी के अन्दर सल्फर होता जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से पित्त बढ़ता है ।
  27. शुक्रोज हजम नहीं होता है फ्रेक्टोज हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है ।
  28. वात के असर में नींद कम आती है ।
  29. कफ के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है ।
  30. कफ के असर में पढाई कम होती है ।
  31. पित्त के असर में पढाई अधिक होती है ।

  32. आँखों के रोग – कैट्रेक्टस, मोतियाविन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है ।

  33. शाम को वात-नाशक चीजें खानी चाहिए ।
  34. प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए
  35. सोते समय रक्त दवाव सामान्य या सामान्य से कम होता है ।
  36. व्यायामवात रोगियों के लिए मालिश के बाद व्यायाम , पित्त वालों को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । कफ के लोगों को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए ।
  37. भारत की जलवायु वात प्रकृति की है , दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए ।
  38. जो माताएं घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं ।
  39. निद्रा से पित्त शांत होता है , मालिश से वायु शांति होती है , उल्टी से कफ शांत होता है तथा उपवास ( लंघन ) से बुखार शांत होता है ।
  40. भारी वस्तुयें शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है ।
  41. दुनियां के महान वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों ,
  42. माँस खाने वालों के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं ।
  43. तेल हमेशा गाढ़ा खाना चाहिएं सिर्फ लकडी वाली घाणी का , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए ।
  44. छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है ।
  45. कोलेस्ट्रोल की बढ़ी हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है ।
  46. मिर्गी दौरे में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए ।
  47. सिरदर्द में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें ।
  48. भोजन के पहले मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है ।
  49. भोजन के आधे घंटे पहले सलाद खाएं उसके बाद भोजन करें ।
  50. अवसाद में आयरन , कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है ।
  51. पीले केले में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है ।
  52. छोटे केले में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है ।
  53. रसौली की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं ।
  54. हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है ।
  55. एंटी टिटनेस के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे ।
  56. ऐसी चोट जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें ।
  57. मोटे लोगों में कैल्शियम की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट ( सोंठ+कालीमिर्च+ मघा पीपली ) भी दे सकते हैं ।
  58. अस्थमा में नारियल दें । नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी + गुड + नारियल दें ।
  59. चूना बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है ।
  60. दूध का सर्फेसटेंसेज कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है ।
  61. गाय की घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है ।
  62. जिस भोजन में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए ।
  63. गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें ।
  64. गाय के दूध में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है ।
  65. मासिक के दौरान वायु बढ़ जाता है , 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें ।

  66. रात में आलू खाने से वजन बढ़ता है ।

  67. भोजन के बाद बज्रासन में बैठने से वात नियंत्रित होता है ।

  68. भोजन के बाद कंघी करें कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगा ।
  69. अजवाईन अपान वायु को बढ़ा देता है जिससे पेट की समस्यायें कम होती है ।
  70. अगर पेट में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें ।

  71. कब्ज होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए ।

  72. रास्ता चलने, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए ।

  73. जो दिन मे दायीं करवट लेता है तथा रात्रि में बायीं करवट लेता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है ।

  74. बिना कैल्शियम की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है ।

  75. स्वस्थ्य व्यक्ति सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है ।

  76. भोजन करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है ।
  77. सुबह के नाश्ते में फल , दोपहर को दहीरात्रि को दूध का सेवन करना चाहिए ।
  78. रात्रि को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे – दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि ।

  79. शौच और भोजन के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें ।

  80. मासिक चक्र के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान , व आग से दूर रहना चाहिए ।
  81. जो बीमारी जितनी देर से आती है , वह उतनी देर से जाती भी है ।
  82. जो बीमारी अंदर से आती है , उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए ।
  83. एलोपैथी ने एक ही चीज दी है , दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी , लीवर , आतें , हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है ।
  84. खाने की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए , ब्लड-प्रेशर बढ़ता है ।
    86 . रंगों द्वारा चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ….. अंत में लाल रंग ।
    87 . छोटे बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृति होती है , स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए ।
  85. जो सूर्य निकलने के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है ।
  86. बिना शरीर की गंदगी निकाले स्वास्थ्य शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने लगभग 70 % शरीर से विजातीय तत्व निकलते हैं ।
  87. चिंता , क्रोध , ईष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बबासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उतपन्न होती है ।
  88. गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें ।

  89. प्रसव के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती है ।

  90. रात को सोते समय सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें त्वचा में निखार आएगा ।

  91. दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए
  92. जो अपने दुखों को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है ।
  93. सोने से आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है , लकवा , हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है ।
  94. स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है
    98 . तेज धूप में चलने के बाद , शारीरिक श्रम करने के बाद , शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है ।
  95. त्रिफला अमृत है जिससे वात, पित्त , कफ तीनो शांत होते हैं । इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना । देशी गाय का घी , गौ-मूत्र भी त्रिदोष नाशक है ।
  96. इस विश्व की सबसे मँहगी दवा लार है , जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है , इसे ना थूके ।
    जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है , इसे ना थूकें ।

🕉परमार्थ योग🧘‍♀

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🔷 उच्च रक्तचाप (High BP)

जिन मरीजों को रोज BP की दवा खानी पड़ती है उनके लिए एक अचूक हथियार है।

200 ग्राम बड़ी इलायची ले कर तवे पर भूने, इतना भूनना है कि इलायची जल कर राख हो जाये, इस राख को पीस कर किसी डिब्बी में भर लें, सुबह खाली पेट और शाम को भोजन से 1 घंटा पहले 5 ग्राम राख को 2 चम्मच शहद में मिला कर खा लें

नियमित 15-20 दिन इस उपचार को करने के बाद आपको BP की किसी दवा को खाने की ज़रूरत नही पड़ेगी।