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💐 शयन विधान💐

सूर्यास्त के एक प्रहर (लगभग 3 घंटे) के बाद ही शयन करना।

🌻सोने की मुद्रा: 
           उल्टा सोये भोगी,
           सीधा सोये योगी,
           डाबा सोये निरोगी,
           जीमना सोये रोगी।

🌻शास्त्रीय विधान भी है।
आयुर्वेद में ‘वामकुक्षि’ की     बात आती हैं,  
बायीं करवट सोना स्वास्थ्य के लिये हितकर हैं।

शरीर विज्ञान के अनुसार चित सोने से रीढ़ की हड्डी को नुकसान और औधा या ऊल्टा सोने से आँखे बिगडती है।

सोते समय कितने गायत्री मंन्त्र /नवकार मंन्त्र गिने जाए :-
“सूतां सात, उठता आठ”सोते वक्त सात भय को दूर करने के लिए सात मंन्त्र गिनें और उठते वक्त आठ कर्मो को दूर करने के लिए आठ मंन्त्र गिनें।

“सात भय:-“
इहलोक,परलोक,आदान,
अकस्मात ,वेदना,मरण ,
अश्लोक (भय)

🌻दिशा घ्यान:-
दक्षिणदिशा (South) में पाँव रखकर कभी सोना नहीं । यम और दुष्टदेवों का निवास है ।कान में हवा भरती है । मस्तिष्क  में रक्त का संचार कम को जाता है स्मृति- भ्रंश,मौत व असंख्य बीमारियाँ होती है।

✌यह बात वैज्ञानिकों ने एवं वास्तुविदों ने भी जाहिर की है।

1:- पूर्व ( E ) दिशा में मस्तक रखकर सोने से विद्या की प्राप्ति होती है।

2:-दक्षिण ( S ) में मस्तक रखकर सोने से धनलाभ व आरोग्य लाभ होता है ।

3:-पश्चिम( W ) में मस्तक रखकर सोने से प्रबल चिंता होती है ।

4:-उत्तर ( N ) में मस्तक रखकर  सोने से मृत्यु और हानि होती है ।

अन्य धर्गग्रंथों में शयनविधि में और भी बातें सावधानी के तौर पर बताई गई है ।

विशेष शयन की सावधानियाँ:-

1:-मस्तक और पाँव की तरफ दीपक रखना नहीं। दीपक बायीं या दायीं और कम से कम 5 हाथ दूर होना चाहिये।
2:-सोते समय मस्तक दिवार से कम से कम 3 हाथ दूर होना चाहिये।
3:-संध्याकाल में निद्रा नहीं लेनी।
4:-शय्या पर बैठे-बैठे निद्रा नहीं लेनी।
5:-द्वार के उंबरे/ देहरी/थलेटी/चौकट पर मस्तक रखकर नींद न लें।
6:-ह्रदय पर हाथ रखकर,छत के पाट या बीम के नीचें और पाँव पर पाँव चढ़ाकर निद्रा न लें।
7:-सूर्यास्त के पहले सोना नहीं।
7:-पाँव की और शय्या ऊँची हो  तो  अशुभ  है।  केवल चिकित्स  उपचार हेतु छूट हैं ।
8:- शय्या पर बैठकर खाना-पीना अशुभ है। (बेड टी पीने वाले सावधान)
9:- सोते सोते पढना नहीं।
10:-सोते-सोते तंम्बाकू चबाना नहीं। (मुंह में गुटखा रखकर सोने वाले चेत जाएँ )
11:-ललाट पर तिलक रखकर सोना अशुभ है (इसलिये सोते वक्त तिलक मिटाने का कहा जाता है। )
12:-शय्या पर बैठकर सरोता से सुपारी के टुकड़े करना अशुभ हैं।
🙏🏼 प्रत्येक व्यक्ति यह ज्ञान को प्राप्त कर सके इसलिए शेयर अवश्य करे | 👏🏼👏🏼💐
          जय श्री राधे कृष्ण जी
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एक साथ नहीं खानी चाहिए


*कुछ सूत्र जो याद रखे…..!*

*एक साथ नहीं खानी चाहिए:*

-चाय के साथ कोई भी नमकीन चीज नहीं खानी चाहिए।दूध और नमक का संयोग सफ़ेद दाग या किसी भी स्किन डीजीज को जन्म दे सकता है, बाल असमय सफ़ेद होना या बाल झड़ना भी स्किन डीजीज ही है।

-सर्व प्रथम यह जान लीजिये कि कोई भी आयुर्वेदिक दवा खाली पेट खाई जाती है और दवा खाने से आधे घंटे के अंदर कुछ खाना अति आवश्यक होता है, नहीं तो दवा की गरमी आपको बेचैन कर देगी।

-दूध या दूध की बनी किसी भी चीज के साथ दही ,नमक, इमली, खरबूजा,बेल, नारियल, मूली, तोरई,तिल ,तेल, कुल्थी, सत्तू, खटाई, नहीं खानी चाहिए।

-दही के साथ खरबूजा, पनीर, दूध और खीर नहीं खानी चाहिए।

-गर्म जल के साथ शहद कभी नही लेना चाहिए।

-ठंडे जल के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, ककड़ी, खीरा, जामुन ,मूंगफली कभी नहीं।

-शहद के साथ मूली , अंगूर, गरम खाद्य या गर्म जल कभी नहीं।

-खीर के साथ सत्तू, शराब, खटाई, खिचड़ी , कटहल कभी नहीं।

-घी के साथ बराबर मात्र1 में शहद भूल कर भी नहीं खाना चाहिए ये तुरंत जहर का काम करेगा।

-तरबूज के साथ पुदीना या ठंडा पानी कभी नहीं।

-चावल के साथ सिरका कभी नहीं।

-चाय के साथ ककड़ी खीरा भी कभी मत खाएं।

-खरबूज के साथ दूध, दही, लहसून और मूली कभी नहीं।

*कुछ चीजों को एक साथ खाना अमृत का काम करता है जैसे:*

-खरबूजे के साथ चीनी

-इमली के साथ गुड

-गाजर और मेथी का साग

-बथुआ और दही का रायता

-मकई के साथ मट्ठा

-अमरुद के साथ सौंफ

-तरबूज के साथ गुड

-मूली और मूली के पत्ते

-अनाज या दाल के साथ दूध या दही

-आम के साथ गाय का दूध

-चावल के साथ दही

-खजूर के साथ दूध

-चावल के साथ नारियल की गिरी

-केले के साथ इलायची

*कभी कभी कुछ चीजें बहुत पसंद होने के कारण हम ज्यादा बहुत ज्यादा खा लेते हैं। ऎसी चीजो के बारे में बताते हैं जो अगर आपने ज्यादा खा ली हैं तो कैसे पचाई जाएँ —-*

-केले की अधिकता में दो छोटी इलायची

-आम पचाने के लिए आधा चम्म्च सोंठ का चूर्ण और गुड

-जामुन ज्यादा खा लिया तो ३-४ चुटकी नमक

-सेब ज्यादा हो जाए तो दालचीनी का चूर्ण एक ग्राम

-खरबूज के लिए आधा कप चीनी का शरबत

-तरबूज के लिए सिर्फ एक लौंग

-अमरूद के लिए सौंफ

-नींबू के लिए नमक

-बेर के लिए सिरका

-गन्ना ज्यादा चूस लिया हो तो ३-४ बेर खा लीजिये

-चावल ज्यादा खा लिया है तो आधा चम्म्च अजवाइन पानी से निगल लीजिये

-बैगन के लिए सरसो का तेल एक चम्म्च

-मूली ज्यादा खा ली हो तो एक चम्म्च काला तिल चबा लीजिये

-बेसन ज्यादा खाया हो तो मूली के पत्ते चबाएं

-खाना ज्यादा खा लिया है तो थोड़ी दही खाइये

-मटर ज्यादा खाई हो तो अदरक चबाएं

-इमली या उड़द की दाल या मूंगफली या शकरकंद या जिमीकंद ज्यादा खा लीजिये तो फिर गुड खाइये

-मुंग या चने की दाल ज्यादा खाये हों तो एक चम्म्च सिरका पी लीजिये

-मकई ज्यादा खा गये हो तो मट्ठा पीजिये

-घी या खीर ज्यादा खा गये हों तो काली मिर्च चबाएं

-खुरमानी ज्यादा हो जाए तो ठंडा पानी पीयें

-पूरी कचौड़ी ज्यादा हो जाए तो गर्म पानी पीजिये

*अगर सम्भव हो तो भोजन के साथ दो नींबू का रस आपको जरूर ले लेना चाहिए या पानी में मिला कर पीजिये या भोजन में निचोड़ लीजिये ,८०% बीमारियों से बचे रहेंगे।*
😊🙏🏻*
Jai Siya Ram 🙏🏼💐

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सुखी रहने के नुस्खे-


सुखी रहने के नुस्खे———– पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात! सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात!! धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार! दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार!! ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर! कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर!! प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप! बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप!! ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार! करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाढार!! भोजन करें धरती पर, अल्थी पल्थी मार! चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार!! प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस! सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश!! प्रातः- दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार! तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार!! भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार! डाक्टर, ओझा, वैद्य का , लुट जाए व्यापार !! घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर! एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर!! अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास! पानी पीजै बैठकर, कभी न आवें पास!! रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय! सौगंध राम की खाइ के, तुरत छोड दो चाय!! सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश! भोजन लीजै रात में, जैसे रंक सुरेश!! देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल! अपच,आंख के रोग सँग, तन भी रहे निढाल^^ दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ! बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ!! सत्तर रोगों कोे करे, चूना हमसे दूर! दूर करे ये बाझपन, सुस्ती अपच हुजूर!! भोजन करके जोहिए, केवल घंटा डेढ! पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड!! अलसी, तिल, नारियल, घी सरसों का तेल! यही खाइए नहीं तो, हार्ट समझिए फेल! पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सु जान! श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान!! अल्यूमिन के पात्र का, करता है जो उपयोग! आमंत्रित करता सदा, वह अडतालीस रोग!! फल या मीठा खाइके, तुरत न पीजै नीर! ये सब छोटी आंत में, बनते विषधर तीर!! चोकर खाने से सदा, बढती तन की शक्ति! गेहूँ मोटा पीसिए, दिल में बढे विरक्ति!! रोज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय! बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय!! भोजन करके खाइए, सौंफ, गुड, अजवान! पत्थर भी पच जायगा, जानै सकल जहान!! लौकी का रस पीजिए, चोकर युक्त पिसान! तुलसी, गुड, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान! चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खावे ! ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगावे !! सौ वर्षों तक वह जिए, लेते नाक से सांस! अल्पकाल जीवें, करें, मुंह से श्वासोच्छ्वास!! सितम, गर्म जल से कभी, करिये मत स्नान! घट जाता है आत्मबल, नैनन को नुकसान!! हृदय रोग से आपको, बचना है श्रीमान! सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान!! अगर नहावें गरम जल, तन-मन हो कमजोर! नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुंओर!! तुलसी का पत्ता करें, यदि हरदम उपयोग! मिट जाते हर उम्र में,तन में सारे रोग। कृपया इस जानकारी को जरूर आगे बढ़ाएं

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सफेद दाग (श्वेत कुष्ठ) होने के कारण और लक्षण, सफ़ेद दाग का आयुर्वेदिक अचूक और रामबाण इलाज, 7 दिन में होगा पुराने से पुराने सफ़ेद दाग का भी सफाया, जरूर आजमाएं


सफेद दाग (श्वेत कुष्ठ) होने के कारण और लक्षण, सफ़ेद दाग का आयुर्वेदिक अचूक और रामबाण इलाज, 7 दिन में होगा पुराने से पुराने सफ़ेद दाग का भी सफाया, जरूर आजमाए
ल्युकोडर्मा चमडी का भयावह रोग है,जो रोगी की शक्ल सूरत प्रभावित कर शारीरिक के बजाय मानसिक कष्ट ज्यादा देता है। इसे ही श्वेत कुष्ठ कहते हैं। इस रोग में चमडे में रंजक पदार्थ जिसे पिग्मेन्ट मेलानिन कहते हैं,की कमी हो जाती है। चमडी को प्राकृतिक रंग प्रदान करने वाले इस पिग्मेन्ट की कमी से सफ़ेद दाग पैदा होता है। यह चर्म विकृति पुरुषों की बजाय स्त्रियों में ज्यादा देखने में आती है। ल्युकोडर्मा के दाग हाथ, गर्दन, पीठ और कलाई पर विशेष तौर पर पाये जाते हैं। अभी तक इस रोग की मुख्य वजह का पता नहीं चल पाया है। लेकिन चिकित्सा के विद्वानों ने इस रोग के कारणों का अनुमान लगाया है। पेट के रोग, लिवर का ठीक से काम नहीं करना, दिमागी चिंता , छोटी और बडी आंत  में कीडे होना, टायफ़ाईड बुखार, शरीर में पसीना होने के सिस्टम में खराबी होने आदि कारणों से यह रोग पैदा हो सकता है। शरीर का कोई भाग जल जाने और आनुवांशिक करणों से यह रोग पीढी दर पीढी चलता रहता है। इस रोग को नियंत्रित करने और चमडी के स्वाभाविक रंग को पुन: लौटाने हेतु कुछ घरेलू नुस्खे बेहद कारगर साबित हुए हैं। आइये जानते हैं-
सिर्फ 7 दिन में सफ़ेद दाग (श्वेत कुष्ठ) खत्म होगी : दिवान हकीम परमानन्द जी के द्वारा अनभूत प्रयोग

आवश्यक सामग्री

25 ग्राम देशी कीकर (बबूल) के सूखे पते
25 ग्राम पान की सुपारी (बड़े आकार की)
25 ग्राम काबली हरड का छिलका

बनाने की विधि

उपरोक्त तीन वस्तुएँ लेकर दवा बनाये। कही से देशी कीकर (काटे वाला पेड़ जिसमे पीले फुल लगते है ) के ताजे पत्ते (डंठल रहित ) लाकर छाया में सुखाले कुछ घंटो में पत्ते सूख जायेगे बबूल के इन सूखे पत्तो को काम में ले पान वाली सुपारी बढिया ले इसका पाउडर  बना ले कबाली हरड को भी जौ कुट कर ले और इन सभी चीजो को यानि बबूल , सुपारी , काबली हरड का छिलका (बड़ी हरड) सभी को 25-25 ग्राम की अनुपात में ले कुल योग 75 ग्राम और 500 मिली पानी में उबाले पानी जब 125 मिली बचे तब उतर कर ठंडा होने दे और छान कर पी ले ये दवा एक दिन छोड़ कर दूसरे दिन पीनी है अर्थात मान लीजिये आज आप ने दवा ली तो कल नहीं लेनी है और इस काढ़े में 2 चम्मच खांड या मिश्री मिला ले (10 ग्राम) और ये निहार मुह सुबह –सुबह पी ले और 2 घंटे तक कुछ भी खाना नहीं है दवा के प्रभाव से शरीर शुद्धि हो और उलटी या दस्त आने लगे परन्तु दवा बन्द नहीं करे 14 दीन में सिर्फ 7 दिन लेनी है और फिर  दवा बन्द कर दे कुछ महीने में धीरे धीरे त्वचा काली होने लगेगी हकीम साहब का दावा है की ये साल भर में सिर्फ एक बार ही लेने से रोग निर्मूल (ख़त्म) हो जाता है अगर कुछ रह जाये तो दूसरे साल ये प्रयोग एक बार और कर ले नहीं तो दुबारा इसकी जरूरत नहीं पडती।

पूरक उपचार

एक निम्बू, एक अनार और एक सेब तीनो का अलग – अलग ताजा रस निकालने के बाद अच्छी तरह परस्पर मिलाकर रोजाना सुबह शाम या दिन में किसी भी समय एक बार नियम पूर्वक ले। यह फलो का ताजा रस कम से कम दवा सेवन के प्रयोग आगे 2-3 महीने तक जारी रख सके तो अधिक लाभदायक रहेगा।

औषधियों की प्रयोग विधि :

दवा के सेवन काल के 14 दिनों में मक्खन घी दूध अधिक लेना हितकर है क्योकि दवा खुश्क है।
चौदह दिन दवा लेने के बाद कोई विशेष परहेज पालन की जरुरत नहीं है श्वेत कुष्ठ के दूसरे इलाजो में कठिन परहेज पालन होती है परन्तु इस इलाज में नातो सफेद चीजो का परहेज है और ना खटाई आदि का फिर भी आप मछली मांस अंडा नशीले पदार्थ शराब तम्बाकू आदि और अधिक मिर्च मसाले तेल खटाई आदि का परहेज पालन कर सके तो अच्छा रहेगा।
दवा सेवन के 14 दिनों में कभी –कभी उलटी या दस्त आदि हो सकता है इससे घबराना नहीं चाहिए बल्कि उसे शारीरिक शुध्धी के द्वारा आरोग्य प्राप्त होनेका संकेत समझना चाहिए।
रोग दूर होने के संकेत हकीम साहब के अनुसार दवा के सेवन के लगभग 3 महीने बाद सफेद दागो के बीच तिल की तरह काले भूरे या गुलाबी धब्धे ( तील की तरह धब्बे ) के रूप में चमड़ी में रंग परिवर्तन दिखाई देगा और साल भर में धीरे –धीरे सफेद दाग या निशान नष्ट हो कर त्वचा पहले जैसी अपने स्वभाविक रंग में आ जाएगी फिर भी यदि कुछ कसर रह जाये तो एक साल बीत जाने के बाद दवा की सात खुराके इसी तरह दुबारा ले सकते है।
दिवान हकीम साहब का दावा है की उपर्युक्त इलाज से उनके 146 श्वेत कुष्ठ के रोगियों में से 142 रोगी पूर्णत : ठीक अथवा लाभान्वित हुये है कुछ सम्पूर्ण शरीर में सफेद दाग के रोगी भी ठीक हुये है निर्लोभी परोपकारी दीवान हकीम परमानन्द जी की अनुमति से बिस्तार से यह अनमोल योग मानव सेवा भावना के साथ जनजन तक पहुचा रहा हूँ इस आशा और उदात भावना के साथ की पाठक निश्वार्थ भावना से तथा बिना किसी लोभ के जनजन तक जरुर पहुचाये।

स्रोत :  “स्वदेशी चिकित्सा के चमत्कार लेख दीवान हकीम परमानन्द नई दिल्ली द्वारा अनभूत प्रयोग। अपने नजदीकी कुशल वैद्य या चिकित्सक की सलाह अवश्य ले तथा उनकी देख रेख में कोई कदम उठाएं।”

इस वेबसाइट में जो भी जानकारिया दी जा रही हैं, वो हमारे घरों में सदियों से अपनाये जाने वाले घरेलू नुस्खे हैं जो हमारी दादी नानी या बड़े बुज़ुर्ग अक्सर ही इस्तेमाल किया करते थे, आज कल हम भाग दौड़ भरी ज़िंदगी में इन सब को भूल गए हैं और छोटी मोटी बीमारी के लिए बिना डॉक्टर की सलाह से तुरंत गोली खा कर अपने शरीर को खराब कर देते हैं। तो ये वेबसाइट बस उसी भूले बिसरे ज्ञान को आगे बढ़ाने के लक्षय से बनाई गयी है। आप कोई भी उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से या वैद से परामर्श ज़रूर कर ले। यहाँ पर हम दवाएं नहीं बता रहे, हम सिर्फ घरेलु नुस्खे बता रहे हैं। कई बार एक ही घरेलु नुस्खा दो व्यक्तियों के लिए अलग अलग परिणाम देता हैं। इसलिए अपनी प्रकृति को जानते हुए उसके बाद ही कोई प्रयोग करे। इसके लिए आप अपने वैद से या डॉक्टर से संपर्क ज़रूर करे।
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चाहे 90% हार्ट ब्लॉकेज या लकवा ही क्यों ना हो,


चाहे 90% हार्ट ब्लॉकेज या लकवा ही क्यों ना हो, शरीर के सभी ब्लॉकेज बाहर निकाल फेंकेगा उपाय  दोस्तों आज इस लेख में हम आपको बेहद ही असरदार नुस्खा बता रहे है|इसको अपनाकर आप किसी भी प्रकार के ब्लोकेज को सही कर सकते है |चाहे फिर ब्लोकेज शरीर के किसी भी भाग में क्यों ना हो यह नुस्खा सभी प्रकार के ब्लोकेज को खोल सकता है |इसे आपनाकर ऐडी से चोटी तक शरीर की ब्लाक नसों को खोलें |इसके लीए जरुरी सामान आपको सहज ही मिल जायेगा,तो अब देर किस बात कि आइये जानते इस नुस्खे को ज़रूरी सामग्री :- 1 ग्रांम दाल चीनी। 10 ग्रांम काली मिर्च साबुत। 10 ग्रांम तेज पत्ता। 10 ग्रांम मगज। 10 ग्रांम मिश्री डला (साबुत)। 10 ग्रांम अखरोट गिरी। 10 ग्रांम अलसी। टोटल 61 ग्रांम। (सारा सामान करियाना या राशन की दुकान से मिल जाएगा) बनाने की विधि:- सभी को मिक्सी में पीस के बिलकुल पाउडर बना लें और 6 ग्रांम की 10 पुड़िया बन जाएंगी। सेवन की विधि:- एक पुड़िया हर रोज सुबह खाली पेट पानी से लेनी है और एक घंटे तक कुछ भी नहीं खाना है। चाय पी सकते हो। रोग निवारण ऐड़ी से लेकर चोटी तक की कोई भी नस बन्द हो तो खुल जाएगी। हार्ट पेशेंट भी ध्यान दें ये खुराक लेते रहो, गारंटीड पूरी जिंदगी हार्ट अटैक या लकवा नहीं आएगा। (चाहे 90% हार्ट ब्लॉकेज {Heart Blockage} ही क्यों ना हो, ये अद्भुत उपाय पुरे शरीर के सभी ब्लॉकेज को बाहर निकाल फेंकेगा) यह जानकारी अगर आपको अच्छी लगी हो तो कृपया गरीबो तक जरुर पहुचाये ,इसके लिए आप चाहे तो facebook या अन्य सोशियल माध्यम से भी शेयर कर सकते है | 

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हृदय की बीमारी


हृदय की बीमारी*

 

आयुर्वेदिक इलाज !!

 

 

हमारे देश भारत मे 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे

 

उनका नाम था महाऋषि वागवट जी !!

 

उन्होने एक पुस्तक लिखी थी

 

जिसका नाम है अष्टांग हृदयम!!

 

(Astang  hrudayam)

 

और इस पुस्तक मे उन्होने ने

बीमारियो को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखे थे !

 

यह उनमे से ही एक सूत्र है !!

 

वागवट जी लिखते है कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है !

 

मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है !

 

तो इसका मतलब है कि रकत (blood) मे acidity(अम्लता ) बढ़ी हुई है !

 

अम्लता आप समझते है !

 

जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity !!

 

अम्लता दो तरह की होती है !

 

एक होती है पेट कि अम्लता !

 

और एक होती है रक्त (blood) की अम्लता !!

 

आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है !

 

तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है !!

 

खट्टी खट्टी डकार आ रही है !

 

मुंह से पानी निकाल रहा है !

 

और अगर ये अम्लता (acidity)और बढ़ जाये !

 

तो hyperacidity होगी !

 

और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अम्लता  (blood acidity) होती !!

 

और जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त  (blood) दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता !

 

और नलिया मे blockage कर देता है !

 

तभी heart attack होता है !! इसके बिना heart attack नहीं होता !!

 

और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं !

 

क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है !!

 

इलाज क्या है ??

 

वागबट जी लिखते है कि जब रक्त (blood) मे अम्लता (acidity) बढ़ गई है !

 

तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय है !

 

आप जानते है दो तरह की चीजे होती है !

 

अम्लीय और क्षारीय !!

 

acidic and alkaline

 

अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है ! ?????

 

acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है )?????

 

neutral

 

होता है सब जानते है !!

 

तो वागबट जी लिखते है !

 

कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय(alkaline) चीजे खाओ !

 

तो रक्त की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी !!!

 

और रक्त मे अम्लता neutral हो गई !

 

तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !!

 

ये है सारी कहानी !!

 

अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो क्षारीय है और हम खाये ?????

 

आपके रसोई घर मे ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय है !

 

जिनहे आप खाये तो कभी heart attack न आए !

 

और अगर आ गया है !

 

तो दुबारा न आए !!

 

सबसे ज्यादा आपके घर मे क्षारीय चीज है वह है लौकी !!

 

जिसे दुधी भी कहते है !!

 

English मे इसे कहते है bottle gourd !!!

 

जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है !

 

इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है !

 

तो आप रोज लौकी का रस निकाल-निकाल कर पियो !!

 

या कच्ची लौकी खायो !!

 

रामदेव को आपने कई बार कहते सुना होगा लौकी का जूस पीयो, लौकी का जूस पीयों !

 

3 लाख से ज्यादा लोगो को उन्होने ठीक कर दिया लौकी का जूस पिला पिला कर !!

 

और उसमे हजारो डाक्टर है !

 

जिनको खुद heart attack होने वाला था !!

 

वो वहाँ जाते है लौकी का रस पी पी कर आते है !!

 

3 महीने 4 महीने लौकी का रस पीकर वापिस आते है आकर फिर clinic पर बैठ जाते है !

 

वो बताते नहीं हम कहाँ गए थे !

 

वो कहते है हम न्युयार्क गए थे

 

हम जर्मनी गए थे आपरेशन करवाने !

 

वो राम देव के यहाँ गए थे !

 

और 3 महीने लौकी का रस पीकर आए है !

 

आकर फिर clinic मे आपरेशन करने लग गए है !

 

और वो आपको नहीं बताते कि आप भी लौकी का रस पियो !!

 

तो मित्रो जो ये रामदेव बताते है वे भी वागवट जी के आधार पर ही बताते है !!

 

वागवतट जी कहते है रक्त  की अम्लता कम करने की सबसे  ज्यादा ताकत लौकी मे ही है !

 

तो आप लौकी के रस का सेवन करे !!

 

कितना सेवन करे ?????????

 

रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो !!

 

कब पिये ??

 

सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते है !!

 

या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है !!

 

इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते है !

 

इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो

 

तुलसी बहुत क्षारीय है !!

 

इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है !

 

पुदीना बहुत क्षारीय है !

 

इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले !

 

ये भी बहुत क्षारीय है !!

 

लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले !

 

वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले !!

 

ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है !!!!

 

तो मित्रों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करे !!

 

2 से 3 महीने आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा !!

 

21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा !!!

 

कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी !!

 

घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा !!

 

और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे !!

 

और पैसे बच जाये ! तो किसी गौशाला मे दान कर दे !

 

डाक्टर को देने से अच्छा है !किसी गौशाला दान दे !!

 

हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा !!

 

आपने पूरी पोस्ट पढ़ी आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!

 

  • यदि आपको लगता है कि मेने ठीक कहा है तो आप ये जानकारी सभी तक पहुचाए

 

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

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निम्बू के फायदेे


*😌निम्बू के फायदेे*😌 😋😋😋😋😋😋😋😋😋 🍋 *नींबू* 🍋 *नींबू का रस आपको ताज़गी का एहसास तो दिलाता ही है,साथ ही कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से मुक्ति भी दिलाने का काम करता है।* 1-शुद्ध शहद में नींबू की शिकंजी पीने से मोटापा दूर होता है। *2-नींबू के सेवन से सूखा रोग दूर होता है।* 3-नींबू का रस एवं शहद एक-एक तोला लेने से दमा में आराम मिलता है। *4-नींबू का छिलका पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक होता है।* 5- नींबू में पिसी काली मिर्च छिड़क कर जरा सा गर्म करके चूसने से मलेरिया ज्वर में आराम मिलता है। *6-नींबू के रस में नमक मिलाकर नहाने से त्वचा का रंग निखरता है और सौंदर्य बढ़ता है।* 7- नौसादर को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद ठीक होता है। *8- नींबू के बीज को पीसकर लगाने से गंजापन दूर होता है।* 9-बहरापन हो तो नींबू के रस में दालचीनी का तेल मिलाकर डालें। *10-आधा कप गाजर के रस में नींबू निचोड़कर पिएं, रक्त की कमी दूर होगी।* 11- दो चम्मच बादाम के तेल में नींबू की दो बूंद मिलाएं और रूई की सहायता से दिन में कई बार घाव पर लगाएं, घाव बहुत जल्द ठीक हो जाएगा। *12- प्रतिदिन नाश्ते से पहले एक चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच ज़ैतून का तेल पीने से पत्थरी से छुटकारा मिलता है।* 13- किसी जानवर के काटे या डसे हुए भाग पर रूई से नींबू का रस लगांए, लाभ होगा। *14- एक गिलास गर्म पानी में नींबू डाल कर पीने से पांचन क्रिया ठीक रहती है।* 15- चक्तचाप, खांसी, क़ब्ज़ और पीड़ा में भी नींबू चमत्कारिक प्रभाव दिखाता है। *16- विशेषज्ञों का कहना है कि नींबू का रस विटामिन सी ,विटामिन , बी, कैल्शियम, फ़ास्फ़ोरस, मैग्नीशियम, प्रोटीन और कार्बोहाईड्रेट से समृद्ध होता है।* 17- विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मसूढ़ों से ख़ून रिसता हो तो प्रभावित जगह पर नींबू का रस लगाने से मसूढ़े स्वस्थ हो जाते हैं। *18- नींबू का रस पानी में मिलाकर ग़रारा करने से गला खुल जाता है।* 19- नींबू के रस को पानी में मिलाकर पीने से त्वचा रोगों से भी बचाव होता है अतः त्वचा चमकती रहती है, कील मुंहासे भी इससे दूर होते हैं और झुर्रियों की भी रोकथाम करता है। *20- नींबू का रस रक्तचाप को संतुलित रखता है।* 21-अगर बॉडी में विटामिन सी की मात्रा कम हो जाए, तो एनिमिया, जोड़ों का दर्द, दांतों की बीमारी, पायरिया, खांसी और दमा जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। नीबू में विटामिन सी की क्वॉन्टिटी बहुत ज्यादा होती है। इसलिए इन बीमारियों से दूरी बनाने में यह आपकी मदद करता है। *22- पेट खराब, पेट फूलना, कब्ज, दस्त होने पर नीबू के रस में थोड़ी सी अजवायन, जीरा, हींग, काली मिर्च और नमक मिलाकर पीने से आपको काफी राहत मिलेगी।* 23- गर्मी में बुखार होने पर अगर थकान महसूस हो रही हो या पीठ और बांहों में दर्द हो, तो भी आपके पास नींबू का उपाय है। आप एक चम्मच नींबू के रस में दस बूंद तुलसी की पत्तियों का रस, चार काली मिर्च और दो पीपली का चूर्ण मिलाकर लें। इसे दो खुराक के तौर सुबह-शाम लें। *24-चेहरे पर मुंहासे होना एक आम समस्या है। इसे दूर करने के लिए नींबू रस में चंदन घिसकर लेप लगाएं। अगर दाद हो गया है, तो इसी लेप में सुहागा घिसकर लगाएं, आपको आराम मिलेगा।* 25- कई बार लंबी दूरी की यात्रा करने पर शरीर में बहुत थकान महसूस होती है। ऐसे में एक गिलास पानी में दो नींबू निचोड़कर उसमें 50 ग्राम किशमिश भिगो दें। रातभर भीगने के बाद सुबह किशमिश पानी में मथ लें। यह पानी दिनभर में चार बार पिएं। इससे एनर्जी मिलेगी और बॉडी की फिटनेस भी बनी रहेगी। *26-अधिक थकान और अशांति के कारण कई बार नींद नहीं आती। अगर आप भी इस प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं, तो लेमन रेमेडी अपनाएं। रात को सोने से पहले हाथ-पांव, माथे, कनपटी व कान के पीछे सरसों के तेल की मालिश करें। इसके बाद थोड़े से नीबू के रस में लौंग घिसकर चाट लें। ऐसा करने से आपको नींद बहुत जल्दी आएगी।* 27-मोटापे से आजकल हर दूसरा शख्स परेशान होता है। इससे छुटकारा पाने के लिए आप मूली के रस में नीबू का रस व थोड़ा नमक मिलाकर नियमित रूप से लें। मोटापा दूर होगा। *28- अगर याददाश्त कमजोर हो गई है, तो गिरी, सोंठ का चूर्ण और मिश्री को पीसकर नींबू के रस में मिलाएं। फिर इसे धीरे-धीरे उंगली से चाटें।* 29-सुंदर दिखना तो सभी चाहते हैं। अगर आपकी भी यही चाहत है, तो एक चम्मच बेसन, आधा चम्मच गेहूं का आटा,आधा चम्मच गुलाब जल और आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर लोशन तैयार करें। इसे धीरे-धीरे चेहरे पर मलें। कुछ ही दिनों में आपका चेहरा निखर जाएगा। *30- जहां तक हो सके, कागजी पीले रंग के नीबू का यूज करें। इसमें दो चुटकी सेंधा नमक या काला नमक मिला सकते हैं। यह टिप्स हमारी रीडर मीनू मोहले ने भेजे हैं।* 🙇🏽🙇🏽🙇🏽🙇🏽🙇🏽🙇🏽🙇🏽🙇🏽🙇🏽