Posted in मोदी केयर - Modi Care - મોદી કેર

मोदी केयर


*MODICARE *
कोई भी कंपनी का चुनाव करते समय उसके *5-P* का अभ्यास करना बेहद जरुरी होता है।
*🔸P – Promoters*
*🔸P – Profile*
*🔸P – Products*
*🔸P – Plan*
*🔸P – Payout*

दोस्तों, आज तक हम किसी एक *P* को लेकर काम करते आएं है। आज पहली बार ऐसी कोई कंपनी मिली है जिसके ये पांचो *P* अपने आप में 💯% है। सबसे अच्छी बात तो ये है कि, Goverment की *MLM GUIDE LINE* के तहत काम करने वाली *No1* चॉइस सिर्फ और सिर्फ *MODICARE * ही है।

🔘अगर कोई मुझसे पूछता है कि *MODICARE * क्या है?
मैं बड़े गर्व से कहता हूँ / बताता हूँ कि *MODICARE *भारत देश की पहली कंपनी है, जिसमे *without investment*
( बिना रूपया लगाये ) कराये आप लाखों रुपये कमा सकते हैं,

*सुबह सुबह अपने आप से कुछ सवाल कीजिये और सोचिये कि* क्या आप यह सब करते हैं कि नहीं ???

*👉🏻क्या आप टूथ पेस्ट करते हैं?*

*👉🏽क्या आप टूथ ब्रश काम लेते हैं?*

*👉🏽क्या आप साबुन से नहाते हैं?*

*👉🏻क्या आपके घर में hair oil लगता है?*

*👉🏽क्या आप घर मे food supplements यूज करते हो?*

*👉🏻क्या आप के घर में WOMEN & MEN care products use होते हैं?*

*👉🏽क्या आप कभी बालो में शैम्पू लगाते है?*

*👉🏽क्या आप स्वस्थ रहने के लिए कुछ सप्लीमेंट्स लेते हैं?*

*👉🏻क्या आप अपनी त्वचा का ख्याल रखते हैं?*

*👉🏽क्या आप सुन्दर दिखने के लिए फेशियल कराते है या करते है?*

*👉🏻 क्या आपके घर में कोई भी खेती करते है क्या ?*

और बहुत कुछ आपकी सुबह से शाम तक महीने की शुरुआत से अंत तक कितने ही प्रॉडक्टस आप काम लेते हैं ….
क्या आपने कभी यह सारे प्रोडक्ट्स *MODICARE * से लिए? अगर हाँ तो बहुत अच्छा 👍🏻👉🏻💐

लेकिन अगर न हो तो जल्द ही लीजिये क्योंकि आज तक जहां से आप यह सब चीज़े खरीद रहे हैं या खरीद रहे थे,

*क्या वहां से कुछ मनी बैंक में आया?*
*कुछ एक्स्ट्रा पैसा केवल इन प्रोडक्ट्स को लेने से कमाया?*

*अगर नही…..*

तो क्यों नहीं सोचते कि सारे प्रोडक्ट्स *बेहतरीन क्वालिटी* एवम् मनी बेक गारंटी के साथ, आपको अगर यूज़ करने से घर में धीमे धीमे एक बहुत बड़ी आय का स्रोत बन जाए तो कैसा रहेगा?

सोचिये ….. आप एक बहुत अच्छा काम करने जा रहे हैं आप बहुत सारे परिवार की जिंदगी बदलने जा रहे हैं केवल घर में काम आने वाले प्रोडक्ट्स को काम लेने से ….

तो आइये आज से ही कसम खाये कि *आप बहुत सारे परिवारो की जिंदगी में बदलाव लाएंगे…*
केवल एक छोटी शुरुआत आप सबकी जिंदगी बदल सकती है । सबसे पहले शुरुआत आप सब कम से कम अपने घर में हर महीने 1000/- से 2000/- का प्रोडक्ट्स काम लेने का वादा करे।

*Zero investment* में इतनी बड़ी *opportunity* भारत में पहली बार,

zero investment कैसे हुआ, ये ध्यान से पढ़िए और समझिय क्योंकि हम जिन लोगों को products देते हैं, उन्होंने वो FMCG products वैसे भी किसी न किसी shop से लेने ही होते हैं, हमने तो सिर्फ उनकी shop बदली है,

*पहले वो लोग without Gurantee Products लेते थे, जिन Products की Quality पर Question Mark था, अब हम उन लोगों को 100 % Satisfaction Gurantee वाले products उसी Discount price पर दे रहे,*

सिर्फ अपनी Shop को बदलकर कोई व्यक्ति अच्छी क्वालिटी के Products*modicare *से लेता है तो वो investment कैसे हो सकता है?
तो दोस्तों हुआ न Zero Investment पर अपने ओर अपने लोगों के सपने पूरे करना,
आप अपने लोगों को कह सकते हैं कि

*INDIA 🇮🇳की पहली MLM Company जिसमे Zero Investment में आप अपने सारे सपने पूरे सकते हैं।आपके और आपके मिलने वालो का अच्छा भविष्य बनाने के लिए तत्पर है।*

*”शुरुआत करने के लिए महान होने की ज़रूरत नहीं हैं,*
*पर महान बनने के लिए शुरुआत करनी पड़ती है”*

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अल्पेश गज्जर सर


*🎊💥अल्पेश सर की सूरत मीटिंग से कुछ स्वर्णिम बिंदु-*
◆पैसे बचा बचाकर कोई अमीर नही बनता, पैसे कमाकर अमीर बना जाता है।
◆ये बिजनेस प्लांनिंग और स्ट्रेटीजीति से नही चलता, आपके माइंडसेट से चलता है। कुछ चीजें चेंज करना जरूरी है।
◆आप बीज कहीं लगाएंगे और फल कहीं और से मिलने लगते है। मेरे अधिकतर हाईएस्ट अर्नर लीडर मैने नही जोड़े। उनको वे छोड़ गए, जिनको मैने जोड़ा था। काम करते रहिए। सब हो जाएगा।
◆बिजनेस कम तक नही होता जब टीम नीचे जाती है। तब कम होता है, जब आपकी सोच नीचे जाती है।
◆कोरोना के बाद सबसे बड़ा नुकसान हुआ कि लोग आलसी हो गए। लोगों की काम करने की आदत नही रही। हम लोगों का तो कुछ नही कर सकते पर खुद की जिंदगी के लिए अपने आप को तो ईमानदारी से फील्ड में धक्का मार सकते है न।
◆बड़े लिडर्स की जिम्मेदारी है कि टीम में जाए और ट्रेनिंग्स, मीटिंग्स, सेमीनार ले लेलेकर टीम को सपोर्ट करें। बिजनेस अपने आप ऊपर आने लग जाएगा।

*_धन्यवाद आदरणीय अल्पेश सर….. हम भाग्यशाली नही सौभाग्यशाली है कि हमें आप मेंटर के रूप में मिले है🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻😊😊_*

Posted in संस्कृत साहित्य

बच्चों के नाम गलत न रखें।

हिन्दूओं के एक बहुत बड़े वर्ग को न जाने हो क्या गया है?
उत्तर भारतीय हिन्दू समाज पथभ्रष्ट एवं दिग्भ्रमित हो गया है.
एक सज्जन ने अपने बच्चों से परिचय कराया, बताया पोती का नाम अवीरा है, बड़ा ही यूनिक नाम रखा है। पूछने पर कि इसका अर्थ क्या है, बोले कि बहादुर, ब्रेव कॉन्फिडेंशियल। सुनते ही दिमाग चकरा गया। फिर बोले कृपा करके बताएं आपको कैसा लगा? मैंने कहा बन्धु अवीरा तो बहुत हीअशोभनीय नाम है। नहीं रखना चाहिए. उनको बताया कि
1. जिस स्त्री के पुत्र और पति न हों. पुत्र और पतिरहित (स्त्री)
2. स्वतंत्र (स्त्री) उसका नाम होता है अवीरा.
नास्ति वीरः पुत्त्रादिर्यस्याः सा अवीरा

उन्होंने बच्ची के नाम का अर्थ सुना तो बेचारे मायूस हो गए, बोले महाराज क्या करें अब तो स्कूल में भी यही नाम हैं बर्थ सर्टिफिकेट में भी यही नाम है। क्या करें?

आजकल लोग नया करने की ट्रेंड में कुछ भी अनर्गल करने लग गए हैं जैसे कि लड़की हो तो मियारा, शियारा, कियारा, नयारा, मायरा तो अल्मायरा … लड़का हो तो वियान, कियान, गियान, केयांश …और तो और इन शब्दों के अर्थ पूछो तो दे गूगल … दे याहू … और उत्तर आएगा “इट मीन्स रे ऑफ लाइट” “इट मीन्स गॉड्स फेवरेट” “इट मीन्स ब्ला ब्ला”

नाम को यूनीक रखने के फैशन के दौर में एक सज्जन ने अपनी गुड़िया का नाम रखा “श्लेष्मा”. स्वभाविक था कि नाम सुनकर मैं सदमें जैसी अवस्था में था. सदमे से बाहर आने के लिए मन में विचार किया कि हो सकता है इन्होंने कुछ और बोला हो या इनको इस शब्द का अर्थ पता नहीं होगा तो मैं पूछ बैठा “अच्छा? श्लेष्मा! इसका अर्थ क्या होता है? तो महानुभाव नें बड़े ही कॉन्फिडेंस के साथ उत्तर दिया “श्लेष्मा” का अर्थ होता है “जिस पर मां की कृपा हो” मैं सर पकड़ कर 10 मिनट मौन बैठा रहा ! मेरे भाव देख कर उनको यह लग चुका था कि कुछ तो गड़बड़ कह दिया है तो पूछ बैठे. क्या हुआ have I said anything weird? मैंने कहा बन्धु तुंरत प्रभाव से बच्ची का नाम बदलो क्योंकि श्लेष्मा का अर्थ होता है “नाक का mucus” उसके बाद जो होना था सो हुआ.

यही हालात है उत्तर भारतीय हिन्दूओं के एक बहुत बड़े वर्ग का। न जाने हो क्या गया है उत्तर भारतीय हिन्दू समाज को ? फैशन के दौर में फैंसी कपड़े पहनते पहनते अर्थहीन, अनर्थकारी, बेढंगे शब्द समुच्चयों का प्रयोग हिन्दू समाज अपने कुलदीपकों के नामकरण हेतु करने लगा है

अशास्त्रीय नाम न केवल सुनने में विचित्र लगता है, बालकों के व्यक्तित्व पर भी अपना विचित्र प्रभाव डालकर व्यक्तित्व को लुंज पुंज करता है – जो इसके तात्कालिक कुप्रभाव हैं.

भाषा की संकरता इसका दूरस्थ कुप्रभाव है.

नाम रखने का अधिकार दादा-दादी, भुआ, तथा गुरुओं का होता है. यह कर्म उनके लिए ही छोड़ देना हितकर है.
आप जब दादा दादी बनेंगे तब यह कर्तव्य ठीक प्रकार से निभा पाएँ उसके लिए आप अपनी मातृभाषा पर कितनी पकड़ रखते हैं अथवा उसपर पकड़ बनाने के लिए क्या कर रहे हैं, विचार करें. अन्यथा आने वाली पीढ़ियों में आपके परिवार में भी कोई “श्लेष्मा” हो सकती है,कोई भी अवीरा हो सकती है।

शास्त्रों में लिखा है व्यक्ति का जैसा नाम है समाज में उसी प्रकार उसका सम्मान और उसका यश कीर्ति बढ़ती है.
नामाखिलस्य व्यवहारहेतु: शुभावहं कर्मसु भाग्यहेतु:।
नाम्नैव कीर्तिं लभते मनुष्य-स्तत: प्रशस्तं खलु नामकर्म।
{वीरमित्रोदय-संस्कार प्रकाश}

स्मृति संग्रह में बताया गया है कि व्यवहार की सिद्धि आयु एवं ओज की वृद्धि के लिए श्रेष्ठ नाम होना चाहिए.
आयुर्वर्चो sभिवृद्धिश्च सिद्धिर्व्यवहृतेस्तथा ।
नामकर्मफलं त्वेतत् समुद्दिष्टं मनीषिभि:।।

नाम कैसा हो–
नाम की संरचना कैसी हो इस विषय में ग्रह्यसूत्रों एवं स्मृतियों में विस्तार से प्रकाश डाला गया है पारस्करगृह्यसूत्र 1/7/23 में बताया गया है-
द्व्यक्षरं चतुरक्षरं वा घोषवदाद्यंतरस्थं।
दीर्घाभिनिष्ठानं कृतं कुर्यान्न तद्धितम्।।
अयुजाक्षरमाकारान्तम् स्त्रियै तद्धितम् ।।
इसका तात्पर्य यह है कि बालक का नाम दो या चारअक्षरयुक्त, पहला अक्षर घोष वर्ण युक्त, वर्ग का तीसरा चौथा पांचवा वर्ण, मध्य में अंतस्थ वर्ण, य र ल व आदिऔर नाम का अंतिम वर्ण दीर्घ एवं कृदन्त हो तद्धितान्त न हो।
जैसे देव शर्मा ,सूरज वर्मा ,कन्या का नाम विषमवर्णी तीन या पांच अक्षर युक्त, दीर्घ आकारांत एवं तद्धितान्त होना चाहिए यथा श्रीदेवी आदि।

नोट — शास्त्रों में तीन प्रकार के नाम रखने को कहा गया है, एक नक्षत्र आधारित, दूसरा, प्रसिद्ध नाम (जो पब्लिक हो), तीसरा गुप्त नाम, जो केवल खास लोगों को पता हो । देवी अथवा नदी के नाम पर बालिका का नाम नहीं रखना चाहिए, ऐसा शास्त्रों का कथन है क्योंकि ये मां समान हैं और कोई भी मनुष्य, विवाह के बाद, इनका नाम भी लेता है और रमण भी करता है, ऐसा करने से ऐसी स्त्रियों के वैवाहिक जीवन कष्टमय होते हैं ।

हमारे शास्त्रों में वर्ण अनुसार नाम की व्यवस्था की गई है ब्राह्मण का नाम मंगल सूचक, आनंद सूचक, तथा शर्मा युक्त होना चाहिए. क्षत्रिय का नाम बल रक्षा और शासन क्षमता का सूचक, तथा वर्मा युक्त होना चाहिए, वैश्य का नाम धन ऐश्वर्य सूचक, पुष्टि युक्त तथा गुप्त युक्त होना चाहिए, अन्य का नाम सेवा आदि गुणों से युक्त, एवं दासान्त होना चाहिए।

पारस्कर गृहसूत्र में लिखा है –
शर्म ब्राह्मणस्य वर्म क्षत्रियस्य गुप्तेति वैश्यस्य

शास्त्रीय नाम की हमारे सनातन धर्म में बहुत उपयोगिता है मनुष्य का जैसा नाम होता है वैसे ही गुण उसमें विद्यमान होते हैं. बालकों का नाम लेकर पुकारने से उनके मन पर उस नाम का बहुत असर पड़ता है और प्रायः उसी के अनुरूप चलने का प्रयास भी होने लगता है इसीलिए नाम में यदि उदात्त भावना होती है तो बालकों में यश एवं भाग्य का अवश्य ही उदय संभव है।

हमारे सनातन धर्म में अधिकांश लोग अपने पुत्र पुत्रियों का नाम भगवान के नाम पर रखना शुभ समझते हैं ताकि इसी बहाने प्रभु नाम का उच्चारण भगवान के नाम का उच्चारण हो जाए।
भायं कुभायं अनख आलसहूं।
नाम जपत मंगल दिसि दसहूं॥

विडंबना यह है की आज पाश्चात्य सभ्यता के अंधानुकरण में नाम रखने का संस्कार मूल रूप से प्रायः समाप्त होता जा रहा है. इससे बचें शास्त्रोक्त नाम रखें इसी में भलाई है, इसी में कल्याण है।

अशोकभाई हिंडौचा