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असली हीरो ये होते हैं

ये है हॉलीवुड के सुपरस्टार हैं- “कियानू रीव्ज़” जो मेट्रिक्स सीरिज के हीरो है…

जब ये 3 साल के थे तभी उनके सगे बाप ने उन्हें छोड़ दिया।
19 साल तक ये तीन अलग-अलग सौतेले पिता के साथ रहते हुए बड़े हुए।
बचपन में वे डिसलेक्सिया नामक बीमारी पीड़ित थे।
ये हॉकी खिलाड़ी थे मगर एक गंभीर दुर्घटना में चोटिल होने के बाद उनका हॉकी की नेशनल टीम का सपना चकनाचूर हो गया।
उनकी एक ने बेटी जन्म लेते ही मर गई और उनकी पत्नी का कार एक्सीडेंट में निधन हो गया।

उनके बचपन के बेस्ट फ्रेंड रिवर फ़ीनिक्स ड्रग ओवरडोज के कारण नहीं रहे और उनकी सगी बहन को ल्यूकेमिया हो गया।

उनके साथ कोई बॉडीगार्ड नहीं रहता क्योकि वो किसी को परेशान नही करना चाहते उनका कोई लग्जरी घर नहीं।
वे एक साधारण से अपार्टमेंट में रहते हैं और अक्सर न्यूयॉर्क में उन्हें सबवे में यात्रा करते हुए देखा जा सकता है।
जब वह फिल्म लेक हाउस की शूटिंग कर रहे थे तो उन्होंने देखा कि उनका कॉस्टयूम असिस्टेंट किसी को रोते हुए बता रहा था कि अगर उसने पैसे नहीं चुकाए तो उसका घर हाथ से निकल जाएगातो रीव्ज़ ने चुपचाप 20000 डॉलर उसके अकाउंट में ट्रांसफर करा दिए…

1997 में कुछ पत्रकारों ने देखा कि सुबह-सुबह रीव्ज़ लॉस एंजिलस में किसी बेघर इंसान के साथ मॉर्निंग वॉक कर रहे थे, और कई घंटे तक वह उसकी बात सुनते रहे बाद मे पता चला की उस इंसान के बेटे की किडनी फेल हो चुकी थी और रीव्ज़ ने उस आदमी के बेटे को अपनी एक किडनी देने का वादा कर दिया है।

अपने करियर में उन्होंने मेट्रिक्स सीरीज़ से कमाए हुए लगभग 75 मिलियन डॉलर की राशि इन्होंने चैरिटी में दान कर दी है।

दूसरों की सबसे ज़्यादा मदद की चाह रखने वाला ये इंसान, देखने मे नही लगता की ये अंदर से बहुत टूटा और बिखरा हुआ है।

यह व्यक्ति जो सब कुछ खरीद सकता है, सब कुछ अरेंज कर सकता है; लेकिन हर सुबह उठने के बाद ये आदमी घुमने के लिए वो जगह चुनता है जिस जगह को लोग आत्महत्या के लिये चुनते है….ये वैसी जगह पर जाता है!
और वहां रोज कोई ना कोई इसे मिल ही जाता है जो तकलीफ मे है जीवन को नष्ट करना देना चाहते है…!
कियानू रीव्ज़ उनके लिये जी रहा है….!

सैल्यूट है इस महानायक को!!!!

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तुलसीदास जी जब “रामचरितमानस” लिख रहे थे, तो उन्होंने एक चौपाई लिखी:

💝सिय राम मय सब जग जानी,

करहु प्रणाम जोरी जुग पानी ।।💝

अर्थात –

पूरे संसार में श्री राम का निवास है, सबमें भगवान हैं और हमें उनको हाथ जोड़कर प्रणाम कर लेना चाहिए।

चौपाई लिखने के बाद तुलसीदास जी विश्राम करने अपने घर की ओर चल दिए। रास्ते में जाते हुए उन्हें एक लड़का मिला और बोला –

अरे महात्मा जी, इस रास्ते से मत जाइये आगे एक बैल गुस्से में लोगों को मारता हुआ घूम रहा है। और आपने तो लाल वस्त्र भी पहन रखे हैं तो आप इस रास्ते से बिल्कुल मत जाइये।

तुलसीदास जी ने सोचा – ये कल का बालक मुझे चला रहा है। मुझे पता है – सबमें राम का वास है। मैं उस बैल के हाथ जोड़ लूँगा और शान्ति से चला जाऊंगा।

लेकिन तुलसीदास जी जैसे ही आगे बढे तभी बिगड़े बैल ने उन्हें जोरदार टक्कर मारी और वो बुरी तरह गिर पड़े।

अब तुलसीदास जी घर जाने की बजाय सीधे उस जगह पहुंचे जहाँ वो रामचरित मानस लिख रहे थे। और उस चौपाई को फाड़ने लगे, तभी वहां हनुमान जी प्रकट हुए और बोले – श्रीमान ये आप क्या कर रहे हैं?

तुलसीदास जी उस समय बहुत गुस्से में थे, वो बोले – ये चौपाई बिल्कुल गलत है। ऐसा कहते हुए उन्होंने हनुमान जी को सारी बात बताई।

हनुमान जी मुस्कुराकर तुलसीदास जी से बोले – श्रीमान, ये चौपाई तो शत प्रतिशत सही है। आपने उस बैल में तो श्री राम को देखा लेकिन उस बच्चे में राम को नहीं देखा जो आपको बचाने आये थे। भगवान तो बालक के रूप में आपके पास पहले ही आये थे लेकिन आपने देखा ही नहीं।

ऐसा सुनते ही तुलसीदास जी ने हनुमान जी को गले से लगा लिया।

*घर पर रहे शायद यही राम जी की इच्छा हो*

*जो मोदी जी ने कहा वो राम जी ने कहा हो*

💝गंगा बड़ी, न गोदावरी, न तीर्थ बड़े प्रयाग।

सकल तीर्थ का पुण्य वहीं, जहाँ हदय राम का वास।।💝

!!🚩 बोल सियापति रामचन्द्र की जय 🚩!!

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अमेरिका के टेक्सस राज्य के एक शहर में भारतीय मूल के मुहल्ले में एक तमिलियन आदमी ने अपने नौ साल के लड़के की चाकू घोंप हत्या कर दी। पूर्ण रूप से भारतीय लोगों के मुहल्ले में रहने वाला ये शख़्स कदाचित् अपनी नौकरी से निकाला गया बताया जा रहा है। दूसरा एंगल ये है- इन मियाँ बीवी में झगड़ा शुरू हुआ और झगड़े में बाप ने बेटे को मारना शुरू किया।

पत्नी पड़ोसी के घर भागी ताकि पुलिस को बुला सके- लौट कर पाया पति ने घर अंदर से लॉक कर लिया। पुलिस जब दरवाज़ा तोड़ घुसी तो बच्चे का शव लहूलुहान मिला। पत्नी ये देख बेहोश हो गई। पति ख़ुद को चाकू मार रहा था लेकिन ख़त्म नहीं कर पाया ख़ुद को। अभी दोनों पति पत्नी अस्पताल में है ।

पति पर कैपिटल पनिशमेंट का चार्ज है और एक मिलियन डॉलर की बेल। मतलब एक मिलियन डॉलर दे बाहर आ सकता है लेकिन सजा से नहीं बच पाएगा

हीट ऑफ़ the मोमेंट में एकलौता लड़का हाथ से गया- बाप पर केस चलेगा- मोस्ट लाइकली मृत्युदंड। माँ शेष रह जाएगी।पूरा परिवार तबाह!

ऐसा क्या झगड़ा- या ऐसा क्या नौकरी से निकाले जाने का भय जो ये सब कर बैठे।

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लोमड़ी और हाथी:

एक घने जंगल में एक बहुत बड़ा हाथी रहता था। वह स्वभाव से क्रूर और अहंकारी था। वह छोटे पेड़ों और शाखाओं को तोड़ते हुए जंगल में खुलेआम घूमता था। पेड़ों पर रहने वाले वे जानवर इस हाथी से बहुत डरते थे। जब उसने पेड़ों को गिराया और शाखाओं को तोड़ दिया, तो कई घोंसले अंडे और चूजों के साथ जमीन पर गिर गए और नष्ट हो गए। जंगल में उनकी इस हरकत से चौतरफा तबाही मच गई। यहां तक कि बाघ और शेर भी इस बदमाश से खुद को सुरक्षित दूरी पर रखते थे। जंगल में उसके निर्मम मार्च में लोमड़ियों के कई बिल रौंद दिए गए। इससे लोमड़ियों और अन्य जानवरों में समान रूप से असंतोष फैल गया। उनमें से कई हाथी को मारना चाहते थे। लेकिन उनके विशाल आकार के कारण यह कार्य बहुत कठिन था।

“वह बहुत बड़ा है”, लोमड़ियों ने आपस में कहा। “उसे मारना लगभग असंभव है।”

फिर सब लोमड़ियों की सभा बुलाई गई। बैठक में इस असंभव कार्य को करने के लिए एक बहुत ही चालाक लोमड़ी को सौंपा गया था। लोमड़ी ने अपनी योजना को क्रियान्वित करने से पहले कई दिनों तक हाथी के व्यवहार का अध्ययन किया।

एक दिन, लोमड़ी हाथी से मिलने गई और उससे बोली, “महाराज, आपसे बात करना बहुत जरूरी है। यह हमारे लिए जीवन और मृत्यु का मामला है।”

हाथी ने अपने उच्चतम स्वर पर चिंघाड़ते हुए पूछा, “तुम कौन हो और मुझे क्यों देखना चाहते हो?”

“महाराज,” लोमड़ी ने कहा। “मैं पूरे पशु समुदाय का प्रतिनिधि हूं। हम आपको अपना सर्वोच्च प्रमुख – राजा बनाना चाहते हैं। कृपया हमारे प्रस्ताव को स्वीकार करें।”
हाथी ने बड़े गर्व से अपनी सूंड उठाई और विवरण मांगा।

लोमड़ी ने आगे बताया, “मैं तुम्हें अपने साथ ले जाने आई हूं। राज्याभिषेक समारोह जंगल के बीच में होगा, जहां हजारों जानवर पहले से ही इकट्ठा हो चुके हैं और पवित्र मंत्रों का जाप कर रहे हैं।”

यह सुनकर हाथी बहुत खुश हुआ। उसने हमेशा राजा बनने का सपना संजोया था। उसने सोचा कि राज्याभिषेक समारोह उसके लिए गर्व का विषय होगा। वह लोमड़ी के साथ गहरे जंगल में जाने के लिए जल्दी से तैयार हो गया।
“आओ, महामहिम,” लोमड़ी ने कहा। “मेरे पीछे आओ।”

लोमड़ी हाथी को समारोह के किसी काल्पनिक स्थान पर ले गई। रास्ते में उन्हें एक तालाब के किनारे दलदली इलाके से होकर गुजरना पड़ा। हल्के शरीर वाली लोमड़ी ने बिना किसी कठिनाई के छोटे दलदली इलाके को पार कर लिया। हाथी भी उस पर चल पड़ा, लेकिन भारी-भरकम होने के कारण वह दलदल में फंस गया। वह जितना ही दलदल से निकलने की कोशिश करता, उतना ही वह उसमें और गहरे धंसता जाता। वह डर गया और लोमड़ी को पुकारा, “प्यारे दोस्त। कृपया मेरी मदद करो। मैं कीचड़ में डूब रहा हूँ। अब मेरे राज्याभिषेक का क्या होगा। अपने अन्य दोस्तों को भी मेरी मदद करने के लिए बुलाओ।”

“मैं तुम्हें बचाने नहीं जा रहा हूँ”, लोमड़ी ने कहा। “आप इस उपचार के लायक थे। आप जानते हैं, आप अन्य जानवरों के साथ कितने क्रूर रहे हैं। आपने अंडे और चूजों के जीवन की परवाह किए बिना, निर्दयता से पेड़ों की शाखाओं को तोड़ दिया। आप सब कुछ जानते थे, लेकिन उदासीन रहे। आप लोमड़ियों के बिलों को रौंदा। तुमने हमारे भाई-बहनों को अपने भारी पैरों के नीचे कुचलते देखा। तुमने हमें रोते देखा, रहम की भीख माँगते हुए; लेकिन कुछ भी परेशान नहीं किया। और अब तुम अपने जीवन के लिए भीख माँग रहे हो? मुझे आपको यह बताते हुए खेद है कि हालांकि तेरा राज्याभिषेक नहीं हो सका, परन्तु तेरा संस्कार अवश्य होगा।” और लोमड़ी चली गई।

हाथी दलदल से बाहर नहीं आ सका और वहीं मर गया।
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એક ગામમાં એક ગરીબ વ્યક્તિ રહેતો હતો. તેણે ગરીબાઈ થી કંટાળી આત્મહત્યા કરવાનો વિચાર કર્યો.
તેણે વિચાર્યું કે પોતાનાથી પોતાનો જીવ લેતા હિંમત નહીં ચાલે તેથી તેણે જંગલમાં જઈ કોઈ જંગલી પ્રાણીનો શિકાર બનવાનો વિચાર્યું..
તે જંગલમાં ચાલ્યો જતો હતો ત્યાં એક સિંહની બોડ ભાળી ત્યાં જય ઊભો રહ્યો તેણે મનોમન વિચાર્યું કે સિંહ આવશે અને મને મારી નાખશે એટલે મને આત્મહત્યાનું પાપ નહીં લાગે અને આ દોજખ જેવી જિંદગીથી છુટકારો થશે..
પણ સિંહની જે ગુફા હતી તેની ઉપર એક હંસ બેઠો હતો. તેણે સિંહને કહ્યું કે તારા ખોરાક માટે આ જંગલમાં પશુઓની તાણ નથી તો તું આ માણસને શું કામ મારે છો ? તેની પાછળ તેનું ઘર તેનો પરિવાર દુઃખી થશે અને તેનું પાપ તને લાગશે હું તો તને એવું કહું છું કે આ ગરીબ વ્યક્તિને છોડી દે અને તારી પાસે જે સોનું ચાંદી છે તે આ વ્યક્તિને આપ ..તો તેનું નરક જેવું જીવન સ્વર્ગ જેવું બની જાય ..સિંહ તેની વાત માની અને તે વ્યક્તિને બોલાવીને કહ્યું આ સોના ચાંદી અને ઝવેરાત લઈ ઘરે પાછો જા અને તારી દીકરીને ધામધૂમથી પરણાવ .તે વ્યક્તિ તો મનોમન બહુ રાજી થયો. હાશ દીકરી પણ પરણી જશે અને પોતાની ગરીબાઈ પણ જતી રહે છે..
પણ કહેવત સે ને કે લોભને કદી ક્ષોભ ન હોય થોડા દિવસો વયા ગયા ત્યાં વળી પાછા તેના તે દનૈયા આવીને ઊભા રહ્યા વળી પાછું તે વ્યક્તિએ વિચાર્યું કે જંગલનો રાજા સિંહ ઘણો દયાળુ છે તેથી તેની પાસે જવા દે તે મને ખાલી હાથે પાછો નહીં આવવા દે આવું વિચારી તે સિંહની ગુફા સામે ઉભો રહ્યો પણ આ વખતે તે વ્યક્તિની કઠણાઈ કહો કે મોતની તારીખ તે ગુફા ની ઉપર આ વખતે હંસ નહીં પણ કાગડો બેઠો હતો તેણે સિંહને કીધું કે આવા લોકો તો આવ્યા રાખે તમે તેને શિક્ષા નહીં કરો તો કાલ ઊઠીને આખું ગામ આવશે તમે કેટ કેટલાને સોનુ ચાંદી આપતા રહેશો આવા લોકોની દયા ન ખાવાની હોય આવા લોકો તો માર્યે જ ભલા સિંહે સલાંગ લગાવી તે વ્યક્તિને મારી નાખ્યો…

…..વાર્તા વિજય ભાઈ ખટાણાં… બોર્ડ મેમ્બર ગાંધીનગર…

…વાર્તા નો સાર… વ્યક્તિનો સલાહકાર કોણ છે તે મહત્વનું છે. ક્યારેક જાણતા અજાણતા આપણને સલાહલાકાર તરીકે શકુની પણ મળી જતો હોય છે. અને બહુ સારા ભાગ્યો હોય તો કૃષ્ણ પણ સલાહકાર બની જાય ..હા આપણે ધ્યાન રાખવાનું કે આપણે કૃષ્ણની સલાહ લેવી છે કે શકુનીની ? જો શકુની સલાહ લીધી તો જેમ કૌરવોનો નાશ થયો તેમ આપણા ઘર પરિવારનો પણ નાશ થશે.મતલબ બધું વેર વિખેર થય જાય..

…ડાભી જીતુ ચોગઠ…