Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

मोहमाया


💐💐मोहमाया💐💐

रधिया खेत से एक पोटली, दोनों हाथों में संभाले… लरजती सी… घर की ओर बढ़ चली। जाने कौन सा खजाना उसे मिल गया था…कि प्रसन्नता के अतिरेक में कभी उसकी आंखें छलक पड़ती,… अंग अंग, बार बारसिहर उठता था। उसने अपनी साड़ी थोड़ी ऊंची कर ली ताकि जल्दबाजी में चलते हुए कहीं पैरों में ना फंसे।

खेत से आधे किलोमीटर दूरी का घर भी उसे दसियों किलोमीटर लंबा लग रहा था। कभी वह मेढ़ पर चढ़ती…. कभी पगडंडी पर उतर जाती…. ऐसा करने से मानो घर जल्दी आ आएगा। बीच-बीच में पोटली में झांक कर भी देख लेती कि सब ठीक से है फिर आंचल में छुपा लेती।

चलते चलते रधियाअपने आप से बतियाती भी जा रही थी…. अम्मा (सास) ना राजी हुई तो????? हुंह….. राजी कैसे न होंगी….. ब्याह के तरह बरस होने को आए… वह जो कहती हैं.. वही तो करती आ रही हूं कभी कुछ मांगा जांचा भी नहीं उनसे…. तो क्या वह मेरी इतनी सी भी बात नहीं मानेगी? आज तो मनई (पति) भी शहर से आ जाएगा रात तक। वह तो खैर हर बात मान लेता है… और मानेगा भी क्यों नहीं आखिर…. उसकी अम्मा का, घर का, खेत खलिहान का, गाय गोरु का ध्यान जो रखती हूं…. तभी तो मन लगाकर सहर की फैक्ट्री में काम कर पाता है जिससे अच्छी पगार मिल जाती है।

ऐसे ही लरजती- बतियाती.. रधिया घर पहुंच गई। भड़ाक से दरवाजा खोला और जोर से आवाज देने लगी, अम्मा….ओ अम्मा…. कहां हो? बड़े से आंगन में अम्मा कहीं ना दिखी। सामने दलान के कोने में…. एक टुकड़ा धूप फैली थी… उसी टुकड़े में बैठी रामलली(सास) चावल साफ कर रही थी।

“अरे, तू तो खेत से मिट्टी लाने गई थी ना… घर लीपने के वास्ते… तो इतनी जल्दी कैसे आ गई”?

रधिया मानो उनकी बात सुन ही नहीं रही थी। पूरे आंगन में… पोटली को झुलाती हुई सी…. चारों तरफ गोल गोल चक्कर काटती हुई… अम्मा अम्मा की ही रट लगाई हुई थी।

“अम्मा आज धनतेरस के दिन लक्ष्मी मिल गई”… वह वैसे ही झूमती हुई बोली।

रामलली चिहुंक पड़ी। उसने हाथ में पकड़ा सूप नीचे रख दिया।

“अरे मिट्टी में दबा हुआ कोई खजाना मिल गया क्या????? ओ नासमझ!!!!! थोड़ा धीरे बोल, नहीं तो रामा, बुधिया सभी आ जाएंगी और खजाने की पोल पूरे गांव में खोल कर रख देंगी… तो सभी बांटने आ जाएंगे”।

“मेरी प्यारी अम्मा…. यह खजाना कोई भी नहीं बांट पावेगा… और देखोगी नहीं क्या”?????

रामलली तो खुद ही लालायित हुई जा रही थी.. उस खजाने को देखने के लिए। रधिया ने उसके पास पहुंच कर आँचल हटाया… और धीरे से पोटली का कपड़ा जरा सा हटाया….. रामलली सन्न खड़ी रह गई…. उसे लगा मानो नीचे से किसी ने जमीन खींच ली।


पोटली में चांद सा चमकता चेहरे और काले काले घुंघराले बालों वाला,मात्र दो दिन का बच्चा… अंगूठा मुंह में डालें ऐसा सुकून की नींद सो रहा था मानो बिल्कुल निश्चिंत हो कि अब वह सुरक्षित है।

“अरे अभागी…. इसे कहां से उठा लायी? किसका है”????

” पता नहीं किसका है अम्मा….कोई अपने माथे का कलंक मेरी आँखों की रोशनी बनाकर छोड़ गया”।

रधिया बताने लगी,” हम तो मिट्टी खोद रहे थे…. तभी बगल वाले दीनू काका के बाग में एक गाड़ी आकर रुकी। उसमें से दो औरतें और एक आदमी उतरे और पेड़ के पास इस पोटली को रखा। उन लोगों ने सर ऊपर उठाकर देखा तो पेड़ के ऊपर दो तीन गिद्ध बैठे हुए थे। गिध्दों को देखकर वह कुछ बतियाते रहे फिर गाड़ी में बैठ कर फुर्र हो गए। हम पहले ध्यान नहीं दिए…. फिर सोचा कि देखें आखिर गाड़ी से आकर यह गिद्धों के लिए कौन सा भोजन रख गए हैं। जाकर देखा अम्मा तो हमारी रूह कांप गई” कहते कहते रधिया का गला रूंध गया।

“अम्मा ऐसी सुकोमल देह को वे गिध्दों के हवाले कर गए… निर्दई.. निर्मम… हत्यारे” और वह सिसक पड़ी।

“यह किसी के पाप की निशानी होगी… तभी छोड़ गए और सोचा होगा कि यह उन गिध्दों का निवाला बन जाएगी। लेकिन रधिया… गिध्दों से तो तू इस को बचा लाई..लेकिन समाज में जो इंसान रूपी गिद्ध फैले हुए हैं।
इसके बड़े होने पर उनसे कैसे बचा पाएगी”?
रामलली के स्वर में चिंता का पुट था।

“अम्मा! शादी के तेरह बरस हुए.मेरी गोद सूनी रही।आज धनतेरस के दिन लक्ष्मी मां ने मेरी गोद भर दी।
इसको मैं खूंटे से बंधी गाय नहीं… जंगल में दहाड़ने वाली शेरनी बनाऊंगी.. शेरनी। फिर कोई गिद्ध इसकी तरफ आंख उठाने की का साहस भी नहीं कर सकेगा”।

“हां रधिया, तू ठीक कहती है। आज तू मां बन गई और मैं दादी” कहती हुई रामलली दरवाजे की तरफ बढ़ी।

रधिया बोली, “अम्मा तुम कहां जा रही हो”???

बुधिया, कमली को बताने कि तू जापे में है.. और अब त्यौहार पर आकर वह सब मेरा हाथ बटाएं.. और खबरदार!! जो अब कुछ दिन तक तू घर से बाहर निकली…. ममता से डांटती हुई रामलली बाहर निकल गई….. सब को


सब को बुलाने….. घर आई लक्ष्मी के दर्शन कराने।

इस बार की दिवाली आखिर उसके सूने घर को रोशन जो कर रही थी-

यदि कहानी पढ़ते समय आपके मन मे””पोटली के खजाने में स्वर्ण,धन,आभूषण इत्यादि होगा”” ऐसा आया था तो आप मोहमाया के जाल में पूर्णता फंसे हुए हैं।

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