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मां का त्याग


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एक गरीब परिवार में एक सुंदर सी बेटी ने जन्म लिया… बाप दुखी हो गया बेटा पैदा होता तो कम से कम काम में तो हाथ बटाता ।
उसने बेटी को पाला जरूर,
मगर दिल से नहीं…..
वह पढ़ने जाती थी तो नाही, स्कूल की फीस टाइम से जमा करता और ना ही कॉपी किताबों पर ध्यान देता था…
अक्सर दारू पीकर घर में कोहराम मचाता था।

उस लड़की की मां बहुत अच्छी व बहुत भोली भाली थी वह अपने बेटी को बड़े लाड प्यार से रखती थी।
वह पति से छुपा छुपा कर बेटी की फीस जमा करती और काफी किताबों का खर्चा देती थी …।

अपना पेट काटकर फटे पुराने कपड़े पहनकर गुजारा कर लेती थी, मगर बेटी का पूरा ख्याल रखती थी।
पति अक्सर घर से कई दिनों के लिए गायब हो जाता था, जितना कमाता था दारू में फूंक देता था…
वक्त का पहिया घूमता गया.




बेटी धीरे-धीरे समझदार हो गई।
दसवीं क्लास में उसका एडमिशन होना था, मां के पास इतने पैसे ना थे जो बेटी का स्कूल में दाखिला करा पाती।
बेटी डरते – डरते हुए पापा से बोली :
पापा में पढ़ना चाहती हूं मेरा हाई स्कूल में एडमिशन करा दीजिए मम्मी के पास पैसे नहीं है…
बेटी की बात सुनते ही बाप आग बबूला हो गया और चिल्लाने लगा, तू कितनी भी पढ़ लिख जाएं तुझे तो चौका चूल्हा ही संभालना हे क्या करेगी तू ज्यादा पढ़ लिख कर…
उस दिन उसने घर में आतंक मचाया व सबको मारा पीटा…

बाप का व्यवहार देखकर बेटी ने मन ही मन में सोच लिया कि अब वह आगे की पढ़ाई नहीं करेगी…
2 दिन बाद उसकी मां बाजार गई,
बेटी ने पूछा: मां कहां गई थी?
मां ने उसकी बात को अनसुना करते हुए कहां: बेटी कल मैं तेरा स्कूल में दाखिला करवाऊंगी।
बेटी ने कहा: नहीं मां अब नहीं पड़ूंगी मेरी वजह से तुम्हें कितनी परेशानी उठानी पड़ती है, पापा भी तुम को मारते पीटते हैं और वह कहते कहते रोने लगी….
मां ने उसे सीने से लगाते हुए कहां: बेटी में बाजार से कुछ रुपए लाई हूं ,मैं कराऊंगी तेरा दाखिला…
बेटी ने मां की ओर देखते हुए पूछा: मां इतने पैसे तुम कहां से लाई हो?
मां ने उसकी बात को फिर अनसुना कर दिया…
वक्त बीतता गया….



मां ने जी तोड़ मेहनत करके बेटी को पढ़ाया लिखाया
बेटी ने भी मां की मेहनत को देखते हुए मन लगाकर दिन-रात पढ़ाई की और आगे बढ़ती चली गई…..
…….
………
…………..
इधर बाप दारू पी पी कर बीमार पड़ गया,
डॉक्टर के पास ले गए,
डॉक्टर ने कहा इनको टी बी है ।
…..
…….
एक दिन बाप की तबीयत ज्यादा खराब होने पर बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया..
बहुत दिन बाद जब उसे होश आया तो डॉक्टरनी का चेहरा देखकर उसके होश उड़ गए…
वो डॉक्टरनी कोई और नहीं बल्कि उसकी अपनी बेटी थी…
शर्म से पानी पानी बाप कपड़े से अपना चेहरा छुपाने लगा।
और रोने लगा हाथ जोड़कर बोला: बेटी मुझे माफ करना मैं तुझे समझ ना सका…
दोस्तों बेटी आखिर बेटी होती है
बाप को रोते देख कर बेटी ने बाप को गले लगा लिया…
एक दिन बेटी मां से बोली: मां तुमने मुझे आज तक नहीं बताया कि मेरे हाई स्कूल के एडमिशन के लिए पैसे कहां से लाई थी?
बेटी के बार-बार पूछने पर
मां ने बात बताई
उसे सुनकर बेटी की रूह कांप गई…
मां ने अपने शरीर का खून बेचकर बेटी का एडमिशन कराया था..
दोस्तों तभी तो मां को भगवान का दर्जा दिया गया है, मां जितना औलाद के लिए त्याग कर सकती है, उतना दुनिया में कोई और नहीं कर सकता।

🚩🚩जय श्री राम🚩🚩



💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी 💐💐

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परोपकारी सन्त के विचार


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भारत संतों का देश है। यहाँ एक से बढ़कर एक संत हुए हैं। एक ऐसे ही संत हुए जो बड़े ही सदाचारी और लोकसेवी थे। उनके जीवन का मुख्य लक्ष्य परोपकार था। एक बार उनके आश्रम के निकट से देवताओं की टोली जा रही थी।

संत आसन जमाये साधना में लीन थे। आखें खोली तो देखा सामने देवता गण खड़े हैं। संत ने उनका अभिवादन कर उन सबको आसन दिया। उनकी खूब सेवा की।

देवता गण उनके इस व्यवहार और उनके परोपकार के कार्य से प्रसन्न होकर उनसे वरदान मांगने को कहा। संत ने आदरपूर्वक कहा – “हे देवगण! मेरी कोई इच्छा नहीं है। आपलोगों की दया से मेरे पास सब कुछ है।”



देवता गण बोले – “आपको वरदान तो माँगना ही पड़ेगा क्योंकि हमारे वचन किसी भी तरह से खाली नहीं जा सकते।”

संत बोले – “हे देवगण! आप तो सब कुछ जानते हैं। आप जो वरदान देंगें वह मुझे सहर्ष स्वीकार होगा।”

देवगण बोले – “जाओ! तुम दूसरों की और भलाई करों। तुम्हारे हाथों दूसरों का सदा कल्याण हो।”


संत ने कहा – “महाराज! यह तो बहुत कठिन कार्य है?”

देवगण बोले – “कठिन! इसमें क्या कठिन है?”

संत ने कहा – “मैंने आजतक किसी को भी दूसरा समझा ही नहीं है फिर मैं दूसरों का कल्याण कैसे कर सकूँगा?”

सभी देवतागण संत की यह बात सुन एक दूसरे का मुंह देखने लगे। उन्हें अब ज्ञात हो गया कि ये एक सच्चा संत हैं। देवों ने अपने वरदान को दोहराते हुए पुनः कहा – “हे संत! अब आपकी छाया जिस पर भी पड़ेगी उसका कल्याण भी होगा।”

संत ने आदर के साथ कहा – “हे देव! हम पर एक और कृपा करें। मेरी वजह से किस-किस की भलाई हो रही है इसका पता मुझे न चले, नहीं तो इससे उत्पन्न अहंकार मुझे पतन के मार्ग पर ले जायेगा।”

देवगण संत के इस वचन को सुन अभिभूत हो गए. परोपकार करनेवाले संत के ऐसे ही विचार होते है।

यदि परोपकार का यह विचार लोगों में आ जाए तो पूरे संसार में कहीं दुःख नहीं होगा, कहीं कोई गरीब नहीं होगा, कही अभाव और अशिक्षा नहीं होगी।
किसी ने कहा था कि-
“मांगो उसी से, जो दे दे खुशी से, जो दे दे खुशी से और कहे न किसी से”

🚩🚩जय श्री राम🚩🚩


💐💐संकलनकर्ता-गुरु लाइब्रेरी 💐💐

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ગુરુ-શિષ્ય*

એક જિજ્ઞાશું એક મહાત્મા ખરાબાની જમીન નદી કાંઠે ઝુંપડી બાંધી રહેતા પોતાને શિષ્ય બનાવવા યાચના કરતા મહાત્મા નો એકજ જવાબ “હજુ તને વાર છે”

એક દિવસ જીદ કરી બાપુ આજેતો ઉપદેશ આપો જ

મહાત્મા કહે ” લે આ નાનકડી ડબ્બી સામે કિનારે જઇ પાછી લાવ ખોલવી નહિ જેવી લઈ જા તેવી પરત લાવ મારે તને ઉપદેશ આપવો “

જિજ્ઞાશું ગયો નદી સૂકો પટ ડબ્બી મા કટ કટ અવાજ આવે આદેશ હતો ખોલવી નહિ પણ મન ગયું અહીં કયા મહાત્મા જોવા આવવાના છે ખોલી

અંદર ઉંદરડી નું નાનું બચ્ચું હતું ઠેકી ઝાડીમાં પટ મા જતું રહ્યું હાથ આવે ?

મહાત્મા પાસે આવ્યો

હવે મહાત્માનો જવાબ

*એક નાનકડી ડબ્બી મા એક નાનકડો જીવ તને નાના સમય માટે હાચવવા આપ્યો તે તું ન સાચવી શક્યો આટલી મોટી કાયા મા મારો ઉપદેશ તારાથી કેમ સાચવશે ? હજુ તને વાર છે*

રમેશ સોલંકી

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एक पति ने अपने गुस्सैल पत्नी से तंग आकर उसे कीलों से भरा एक थैला देते हुए कहा ,”तुम्हें जितनी बार क्रोध आए तुम थैले से एक कील निकाल कर बाड़े में ठोंक देना !”

पत्नी को अगले दिन जैसे ही क्रोध आया उसने एक कील बाड़े की दीवार पर ठोंक दी। यह प्रक्रिया वह लगातार करती रही।

धीरे धीरे उसकी समझ में आने लगा कि कील ठोंकने की व्यर्थ मेहनत करने से अच्छा तो अपने क्रोध पर नियंत्रण करना है और क्रमशः कील ठोंकने की उसकी संख्या कम होती गई।

एक दिन ऐसा भी आया कि पत्नी ने दिन में एक भी कील नहीं ठोंकी।

उसने खुशी खुशी यह बात अपने पति को बताई। वे बहुत प्रसन्न हुए और कहा, “जिस दिन तुम्हें लगे कि तुम एक बार भी क्रोधित नहीं हुई, ठोंकी हुई कीलों में से एक कील निकाल लेना।”

पत्नी ऐसा ही करने लगी। एक दिन ऐसा भी आया कि बाड़े में एक भी कील नहीं बची। उसने खुशी खुशी यह बात अपने पति को बताई। पति उस पत्नी को बाड़े* *में लेकर गए और कीलों के छेद* *दिखाते हुए पूछा, “क्या तुम ये छेद भर सकती हो?”*

पत्नी ने कहा,”नहीं जी”

पति ने उसके कन्धे पर हाथ रखते हुए कहा,”अब समझी, क्रोध में तुम्हारे द्वारा कहे गए कठोर शब्द, दूसरे के दिल में ऐसे छेद कर देते हैं, जिनकी भरपाई भविष्य में तुम कभी नहीं कर सकते !”

सन्देश : जब भी आपको क्रोध आये तो सोचिएगा कि कहीं आप भी किसी के दिल में कील ठोंकने तो नहीं जा रहे ?🙏

कशी गुप्ता

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गोपाष्टमी कथा


गोपाष्टमी कथा*

भगवान् ने जब छठे वर्ष की आयु में प्रवेश किया तब एक दिन भगवान् माता यशोदा से बोले – “मैय्या अब हम बड़े हो गए हैं”
मैय्या यशोदा बोली – “अच्छा लल्ला अब तुम बड़े हो गए हो तो बताओ अब क्या करें”
भगवान् ने कहा – “अब हम बछड़े चराने नहीं जाएंगे, अब हम गाय चराएंगे”
मैय्या ने कहा – “ठीक है बाबा से पूंछ लेना”मैय्या के इतना कहते ही झट से भगवान् नन्द बाबा से पूंछने पहुंच गए।

बाबा ने कहा– “लाला अभी तुम बहुत छोटे हो अभी तुम बछड़े ही चाराओं”
भगवान् ने कहा– “बाबा अब में बछड़े नहीं जाएंगे, गाय ही चराऊँगा “
जब भगवान नहीं मने तब बाबा बोले- “ठीक है लाल तुम पंडत जी को बुला लाओ- वह गौ चारण का महुर्त देख कर बता देंगे”

बाबा की बात सुनकर भगवान् झट से पंडित जी के पास पहुंचे और बोले– “पंडित जी ! आपको बाबा ने बुलाया है, गौ चारण का महुर्त देखना है, आप आज ही का महुर्त बता देना में आपको बहुत सारा माखन दूंगा” पंडित जी नन्द बाबा के पास पहुंचे और बार-बार पंचांग देख कर गड़ना करने लगे तब नन्द बाबा ने पूंछा “पंडित जी के बात है ? आप बार-बार के गिन रहे हैं ?

पंडित जी बोले “क्या बताएं नन्दबाबा जी केवल आज का ही मुहुर्त निकल रहा है, इसके बाद तो एक वर्ष तक कोई मुहुर्त नहीं है” पंडित जी की बात सुन कर नंदबाबा ने भगवान् को गौ चारण की स्वीकृति दे दी। भगवान जी समय कोई कार्य करें वही शुभ-मुहुर्त बन जाता है।

उसी दिन भगवान ने गौ चारण आरम्भ किया और वह शुभ तिथि थी- “कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष अष्टमी” भगवान के गौ-चारण आरम्भ करने के कारण यह तिथि गोपाष्टमी कहलाई।

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आत्मसुधार


आत्मसुधार*

एक बार एक व्यक्ति दुर्गम पहाड़ पर चढ़ा, वहाँ पर उसे एक महिला दिखीं, वह व्यक्ति बहुत अचंभित हुआ, उसने जिज्ञासा व्यक्त की कि वे इस निर्जन स्थान पर क्या कर रही हैं।
उन महिला का उत्तर था मुझे अत्यधिक काम हैं!
इस पर वह व्यक्ति बोला आपको किस प्रकार का काम है, क्योंकि मुझे तो यहाँ आपके आस-पास कोई दिखाई नहीं दे रहा।

महिला का उत्तर था मुझे दो बाज़ों को और दो चीलों को प्रशिक्षण देना है, दो खरगोशों को आश्वासन देना है, एक गधे को आलस्य-प्रमाद से बाहर निकालना है, एक सर्प को अनुशासित करना है और एक सिंह को वश में करना है।
व्यक्ति बोला पर वे सब हैं कहाँ, मुझे तो इनमें से कोई नहीं दिख रहा!
महिला ने कहा ये सब मेरे ही भीतर हैं।
दो बाज़ जो हर उस चीज पर गौर करते हैं, जो भी मुझे मिलीं अच्छी या बुरी। मुझे उन पर काम करना होगा, ताकि वे सिर्फ अच्छा ही देखें, ये हैं मेरी आँखें।
दो चील जो अपने पंजों से सिर्फ चोट और क्षति पहुंचाते हैं, उन्हें प्रशिक्षित करना होगा, चोट न पहुंचाने के लिए, वे हैं मेरे हाँथ।
खरगोश यहाँ वहाँ भटकते फिरते हैं, पर कठिन परिस्थितियों का सामना नहीं करना चाहते। मुझे उनको सिखाना होगा पीड़ा सहने पर या ठोकर खाने पर भी शान्त रहना,वे हैं मेरे पैर।
गधा हमेशा थका रहता है, यह जिद्दी है। मै जब भी चलती हूँ, यह बोझ उठाना नहीं चाहता, इसे आलस्य प्रमाद से बाहर निकालना है, यह है मेरा शरीर।
सबसे कठिन है साँप को अनुशासित करना। जबकि यह 32 सलाखों वाले एक पिंजरे में बन्द है, फिर भी यह निकट आने वालों को हमेशा डसने, काटने, और उनपर अपना ज़हर उडेलने को आतुर रहता है, मुझे इसे भी अनुशासित करना है – यह है मेरी जीभ!
मेरा पास एक शेर भी है, आह! यह तो निरर्थक ही घमंड करता है। वह सोचता है कि वह तो एक राजा है। मुझे उसको वश में करना है, यह है मेरा मैं।
तो देखा आपने मुझे कितना अधिक काम है!

सोंचिये और विचरिये हम सब में काफी समानता है! अपने उपर बहुत कार्य करना है, तो छोडिए दूसरों को परखना, निंदा करना, टीका टिप्पणी करना और उस पर आधारित नकारत्मक धारणायें बनाना। चलें पहले अपने उपर काम करें।

GYLT- प्रेरक कहानियां

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વોટ્સએપ પોષ્ટ પરથી

એક વારતા…

“`હોંગકોંગની એક બેન્કમાં લૂંટ દરમિયાન, બેંક લૂંટારાએ બેંકમાં જઈને જોરથી બૂમ પાડી :

“હલનચલન કરશો નહીં. પૈસા સરકારના છે, તમારું જીવન તમારું પોતાનું છે, એ તમારા માટે બહુ કિંમતી છે.”

બેંકમાં બધા શાંતિથી જમીન સરસા થઈ ગયા.

(આને “માનસિકતા પરિવર્તનનો સિદ્ધાંત – માઇન્ડ ચેન્જિંગ કન્સેપ્ટ” કહેવામાં આવે છે જે પરંપરાગત વિચારસરણીની રીત બદલી રહ્યો છે).

જ્યારે કોઈ મહિલાએ ઉશ્કેરાટ દર્શાવતી ટેબલ પર સૂતી હતી, ત્યારે લૂંટારાએ તેના પર બૂમ પાડી : કૃપા કરીને સભ્યતા જાળવો ! આ લૂંટ છે!

(આને “ધંધાદારી અભિગમ – બીઇંગ પ્રોફેશનલ” કહેવામાં આવે છે. તમે જે કામગીરી કરવા માટેની તાલીમ પામ્યા છો તેના પર જ ધ્યાન કેન્દ્રિત કરો).

જ્યારે બેંક લૂંટારાઓ ઘરે પરત ફર્યા ત્યારે નાના યુવા લૂંટારુ (એમબીએ થયેલા) એ વૃદ્ધ લૂંટારા (જેણે પ્રાથમિક શાળામાં માત્ર છ ધોરણનું શિક્ષણ લીધું છે) ને કહ્યું : મોટા ભાઈ, ચાલો ગણતરી કરીએ કે આપણને કેટલું ધન મળ્યું.

વૃદ્ધ લૂંટારાએ એ વાતનો વિરોધ કરતાં કહ્યું : તમે ખૂબ જ મૂર્ખ છો. ઘણાં બધા પૈસા છે અને તે ગણવામાં આપણો ખૂબ સમય બરબાદ થશે, આજે રાત્રે, ટીવી સમાચારમાં આપણને જાણવા મળશે કે આપણે બેંકમાંથી કેટલું ધન લૂંટ્યું છે!

(આને “અનુભવ” કહેવામાં આવે છે. આજકાલ, અનુભવ કાગળ ઉપરની લાયકાત કરતાં વધુ મહત્વની છે).

લૂંટારુઓ નાસી ગયા પછી, બેંક મેનેજરે બેંક સુપરવાઇઝરને કહ્યું કે પોલીસને ઝડપથી બોલાવો. પરંતુ સુપરવાઇઝરે તેને કહ્યું : રાહ જુઓ! ચાલો આપણે બેન્કમાંથી ૧૦ મિલિયન ડોલર આપણા માટે બહાર કાઢી લઈએ અને તેને ૭૦ મિલિયન ડોલરમાં ઉમેરીએ જે આપણે અગાઉ બેંકમાંથી ગપચાવ્યા હતા.

(તેને “પવન પ્રમાણે પીઠ” કહેવામાં આવે છે. પ્રતિકૂળ પરિસ્થિતિને તમારા ફાયદામાં ફેરવી દો).

સુપરવાઇઝર કહે છે : દર મહિને આવી લૂંટ થાય તો કેવું સારું.

(તેને “બદલતો અગ્રતા ક્રમ” કહેવામાં આવે છે. તમારી નોકરી કરતાં વ્યક્તિગત સુખ વધુ મહત્વનું છે).

બીજા દિવસે ટીવી ન્યૂઝે અહેવાલ આપ્યો કે બેંકમાંથી ૧૦૦ મિલિયન ડોલર લૂંટી લેવામાં આવ્યા હતા. લૂંટારાઓ લૂંટના ડોલર ગણ્યા અને ફરીથી ગણ્યા અને ફરીથી ગણ્યા, પરંતુ તે માત્ર ૨૦ મિલિયન ડોલર જ હતા!

લૂંટારાઓ ખૂબ જ ગુસ્સે થયા અને ફરિયાદ કરતા હતા : અમે અમારા જીવને જોખમમાં મૂક્યો અને માત્ર ૨૦ મિલિયન ડોલર લીધા. બેન્ક મેનેજરે તેમની આંગળીઓના ટેરવે ૮૦ મિલિયન ડોલર મારી લીધા, એવું લાગે છે કે ચોર બનવા કરતાં શિક્ષિત થવું વધુ સારું છે!

(આને કહેવાય છે : જ્ઞાન સોના જેટલું મૂલ્યવાન છે).

બોધ : આ અદ્ભુત કથા કોર્પોરેટ મેનેજમેન્ટ અંગેનો મસ્ત બોધપાઠ છે.“`

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મોરબી હોનારત



મોરબીની આજની હોનારત ટી.વી. ઉપર જોઈને મને યાદ આવ્યું… પેલું લોકગીત ” મને જાવાદો મોરબીના રાજા…નથી કરવા મૂલ …તારી મોરબી થાશે ડૂલ…” મારા પૂજ્ય પિતાશ્રી ઇતિહાસના સંશોધક હતા. તેઓ કહેતા કે …. લોકગીતમાં વર્ણન છે તે મુજબ સોનીની દીકરી ને મચ્છુનું પાણી ભરતા મોરબીના રાજાએ નહોતી અટકાવી પરંતુ તેમના અણસમજુ કુંવારા કુંવરે માત્ર ઘોડો આડો ઉભોરાખીને મોરબીના સોનીની એ 16 વર્ષની દીકરીને પોતાની સાથે વિવાહ કરવા માટે માત્ર આગ્રહપૂર્વક દબાણ જ કર્યું હતું બસ. તેના પાલવને તે કુંવર અડકયો સુધો નહોતો. છતાં આવા ઓચિંતા માનસિક દબાણથી તે દીકરી ડઘાઈ ગઈહતી. તેને મનમાં થયું કે ” ચોક્કસ હવે મોરબીના રાજા મારું અપહરણ કરાવી લઈને મને તેમના કુંવર સાથે બળજબરીથી પણાવ્યા વગર છોડશે નહિં…અને જો પરજ્ઞાતિમાં મારા આવ લગ્ન થશેતો અમારા મહાજન સમાજના પંચ વચ્ચે મારા બાપને ઈજ્જતના માર્યા ઝેર ઘોળવું પડશે.!!!..માવતરની ઈજ્જતબચાવવામાટે અને આવી શકવર્તી શક્યતાનો ભય લાગવાથી આ સગીર દિકરીયે હાલ જયાં ત્રણદારવાજા પાસે ગ્રીન ચોક છે ત્યાં આવીને જાહેરમા ઝેર ખાઈને સતી થઈ હતી. અને ડૂલ ( ડૂબવાથી મોત ) નો શાપ આ જગાએ થીજ આપ્યો હતો. હકીકત મા મોરબીના રાજવી ખુબજ ધાર્મિક હતા… વ્યભિચારી કે પાપી નહોતા. તેમણે તો ઉલટાના આ નાલેશિ ભરી વાત જાણીને પોતાના કુંવરને આકરી સજા ફટકારી હતી. અને આ કુંવારીસતી ની યાદમાં ત્યાં નાની દેરી બનાવી હતી ( જે હાલમા હયાત નથી ).કહેછે કે ઇ.સ. 1856 ની આસ પાસ આ ગોઝારો બનાવ બન્યો હતો. પણ માવતરની ઈજ્જત માટે સતી થનાર આ કુંવાસી ના સત ની તાકાત તો જુઓ !!!??? ઇ.સ. 1857 ની 30 મી ઓક્ટોબરના આજ દિવસે મોરબીના પ્રજાજનો છીછરા પાણીમાં થઈ ને સામે કાંઠે આવેલા રાજમહેલમાં રાજાને નવાવર્ષના વધામણા આપવા જઈ રહયા હતા ત્યારે બરાબર તેજ સમયે મચ્છુના ઉપરવાસમાં આભફાડ વરસાદ વરસ્યો હતો. અને છીછરા પાણીમાં થઈને રાજા પાસે જઈ રહેલા સેંકડો નગરજનો ઉપર ઘોડાપુરનું પાણી ફરી વળ્યું હતું અને તમામના મોત થયાં હતાં. તા.11/ 8 /79 મચ્છુ ડેમ તૂટ્યો તે વખતે મારા ગામના ફૂડપરકેટો લઈ ને રાહતકામમાં હું મોરબી ગયો હતો તે વખતે ત્યાંના એક વયોવૃદ્ધ માજી એ મને ભીંની આંખે કહ્યું હતું કે ——” બેટા , આજ કાલ માવતરની ઈજ્જતને ડૂબાડીને આંતરજ્ઞાતિય લગ્નો કરી લેતી આઝાદ દિકરીયો ને અમારી આ કુંવારી સતી યુગો યુગો પર્યન્ત શિખામણ આપતી અમર રહેશે.”
વોટ્સ એપ ના સૌજન્ય થી. લે.અજ્ઞાત.🙏🏻

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हमारे बगल के गाँव में रहने वाले एक शर्मा जी है जिन्होंने अपने एकलौते लड़के को खूब पढ़ाया लिखा कर इंजीनियर बनाया, बेटा अमेरिका में सेटल हो गया। वहीं पर जयपुर की रहने वाली एक अप्रवासी महिला डॉक्टर से लव मैरिज कर अमेरिकन नागरिकता भी हासिल कर लिया।

इधर बूढ़े शर्मा जी अपनी पत्नी के साथ बनारस के सारनाथ में फ्लैट लेकर, बेटे बहू की याद में जैसे तैसे अपना जीवन गुजर बसर कर रहे है।

सात साल बाद अपने NRI बेटे बहू के आने सूचना पाकर, बड़े हर्ष के साथ शर्मा जी ने खूब सारी तैयारियां की। लेकिन यह क्या, बेटा भारत आकर भी मां बाप के सभी अरमानों पर पानी फेरते हुए, मां बाप से मिलने की जगह दीपावली इंजॉय करने अपनी पत्नी के मायके जयपुर चला गया।

और वहाँ से लौट कर मां बाप के मकान में न रहकर होटल ताज गैंगेज में रुक गया, और शाम को सिर्फ आधे घंटे के लिए कल मां बाप से मिलने जा पहुँचा। मां के हाथ की बनी कोई भी मिठाई व्यंजन खाने से इनकार कर दिया। उसे डर है कि बाहर का कोई भी चीज खाने से उसे संक्रमण हो जाएगा। उसने मां के हाथ का चाय पीने से भी सीधे-सीधे इंकार कर दिया।

अब उस वर्णशंकर मंद बुद्धि नकली अमेरिकन को कौन समझाये, कि संक्रमण मां के हाथ के बने पकवानों में नही उसके दो कौड़ी के दिमाग में है।

जिस मां बाप ने जन्म दिया उनके साथ रहने खाने पीने से उसे संक्रमण हो जाएगा। बेटा दो दिनों बाद वापस जाने की तैयारी कर रहा है, उसका यहाँ दम घुट रहा है ।

शर्मा जी ने बेटे को पढ़ा लिखाकर योग्य और सफल तो बना दिया, किंतु भारतीय संस्कार देना भूल गये।

इसलिए अपने बच्चों को शिक्षा के साथ साथ संस्कार भी देना बहुत जरूरी है, वरना अगले शर्मा जी आप भी हो सकते है।

– साभार

राहूलकुमार

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👍👌 એક મજાનો પ્રસંગ

➖રાત્રીના બે વાગ્યા હતા..એક શ્રીમંત માણસને નીંદર નહોતી આવતી.. પડખા ફરી.. ફરીને થાક્યો.. ચા પીધી સીગારેટ પીધી.. અગાશીમા ચક્કર મારી.. પણ ક્યાંય ચેન ન પડે…

👍આખરે થાકીને એ માણસ નીચે આવ્યો, પાર્કીંગમાંથી 🚗 કાર બહાર કાઢી અને શહેરની સડકો પર ફરવા નીકળી ગયો..

🛕ફરતા ફરતા એને એક મંદિર દેખાયું મનમા થયું, ચાલ થોડીવાર આ મંદિર મા જાવ..ભગવાન પાસે બેસું.. પ્રાર્થના કરુ.. મને થોડી શાંતિ મળે.. એ માણસ મંદિરમાં ગયો..

➖જોયું તો ત્યાં એક બીજો માણસ પણ ત્યાં સામે બેઠો હતો, ઊદાસ ચહેરો.. આંખો મા કરુણતા.. એને જોઈ ને આ માણસ ને દયા આવી.. પૂછ્યું “કેમ ભાઈ આટલી મોડી રાત્રે..?”

➖પેલા એ વાત કરી.. “મારી પત્ની હોસ્પિટલમાં છે. સવારે જો ઑપરેશન નહીં થાય તો એ મરી જશે.. અને મારી પાસે ઓપરેશન ના પૈસા નથી”

➖આ શ્રીમંત માણસે ખીસ્સામાથી રુપીયા કાઢયા એ ગરીબ માણસને આપ્યા.. અને પેલાના ચહેરા પર ચમક આવી..

➖પછી આ શ્રીમંત માણસે એને પોતાનું કાર્ડ આપ્યું અને કહ્યું… “હજું પણ ગમે ત્યારે જરૂર હોય તો આમા મારો નંબર છે, મને ફોન કરજો.. એડ્રેસ પણ છે.. રુબરુ આવી ને મળજો.. સંકોચ ન રાખશો.”

➖👍 પેલા ગરીબ માણસે કાર્ડ પાછુ આપ્યું.. અને કહ્યું “મારી પાસે એડ્રેસ છે.. આ એડ્રેસની જરૂર નથી ભાઈ”

➖અચંબો પામીને શ્રીમંત માણસે કહ્યું.. “કોનું એડ્રેસ છે..?”

👍પેલો ગરીબ માણસ મરક મરક હસતા બોલ્યો…
“જેણે રાતના સાડાત્રણે તમને અહીં મોકલ્યા એમનું”..
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સાહેબ,, આને કહેવાય વિશ્વાસ , આને કહેવાય આસ્થા..
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ભાસ્કર