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♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️

👉 धन नही चैन चाहिये 🏵️
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एक गरीब आदमी था।
वो हर रोज नजदीक के मंदिर में जाकर वहां साफ-सफाई करता और फिर अपने काम पर चला जाता था। अक्सर वो अपने प्रभू से कहता कि मुझे आशीर्वाद दीजिए तो मेरे पास ढेर सारा धन-दौलत आ जाए।

एक दिन ठाकुर जी ने बाल रूप में प्रगट हो उस आदमी से पूछ ही लिया कि क्या तुम मन्दिर में केवल इसीलिए, काम करने आते हो।

उस आदमी ने पूरी ईमानदारी से कहा कि हां, मेरा उद्देश्य तो यही है कि मेरे पास ढेर सारा धन आ जाए, इसीलिए तो आपके दर्शन करने आता हूं। पटरी पर सामान लगाकर बेचता हूं। पता नहीं, मेरे सुख के दिन कब आएंगे।

बाल रूप ठाकुर जी ने कहा कि — तुम चिंता मत करो। जब तुम्हारे सामने अवसर आएगा तब ऊपर वाला तुम्हें आवाज थोड़ी लगाएगा। बस, चुपचाप तुम्हारे सामने अवसर खोलता जाएगा।
युवक चला गया।

समय ने पलटा खाया, वो अधिक धन कमाने लगा। इतना व्यस्त हो गया कि मन्दिर में जाना ही छूट गया।
कई वर्षों बाद वह एक दिन सुबह ही मन्दिर पहुंचा और साफ-सफाई करने लगा।

ठाकुर जी फिर प्रगट हुए और उस व्यक्ति से बड़े ही आश्चर्य से पूछा–क्या बात है, इतने बरसों बाद आए हो, सुना है बहुत बड़े सेठ बन गए हो। वो व्यक्ति बोला–बहुत धन कमाया।

अच्छे घरों में बच्चों की शादियां की, पैसे की कोई कमी नहीं है पर दिल में चैन नहीं है। ऐसा लगता था रोज सेवा करने आता रहूं पर आ ना सका।
व्यक्ति बोला,हे प्रभू, आपने मुझे सब कुछ दिया पर जिंदगी का चैन नहीं दिया ?

प्रभू जी ने कहा कि तुमने वह मांगा ही कब था?
जो तुमने मांगा वो तो तुम्हें मिल गया ना।
फिर आज यहां क्या करने आए हो?
उसकी आंखों में आंसू भर आए, ठाकुर जी के चरणों में गिर पड़ा और बोला –अब कुछ मांगने के लिए सेवा नहीं करूंगा। बस दिल को शान्ति मिल जाए। ठाकुर जी ने कहा–पहले तय कर लो कि अब कुछ मागने के लिए मन्दिर की सेवा नहीं करोगे, बस मन की शांति के लिए ही आओगे।

ठाकुर जी ने समझाया कि चाहे मांगने से कुछ भी मिल जाए पर दिल का चैन कभी नहीं मिलता इसलिए सेवा के बदले कुछ मांगना नहीं है। वो व्यक्ति बड़ा ही उदास होकर ठाकुर जी को देखता रहा और बोला–मुझे कुछ नहीं चाहिए।

आप बस, मुझे सेवा करने दीजिए। सच में, मन की शांति सबसे अनमोल है ।

*जब भी मैं बुरे हालातों से घबराता हूँ..!*
*तब मेरे प्रभु जी कि आवाज़ आती है “, बच्चे ,चिंता मत करो , मैं तुम्हारे साथ हूं !*

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*नित याद करो मन से शिव परमात्मा को*☝🏻
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♦️♦️♦️रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


👉 *!! समय का सदुपयोग !!* 🏵️
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किसी गांव में एक व्यक्ति रहता था। वह बहुत ही भला था लेकिन उसमें एक दुर्गुण था वह हर काम को टाला करता था। वह मानता था कि जो कुछ होता है भाग्य से होता है।

एक दिन एक साधु उसके पास आया। उस व्यक्ति ने साधु की बहुत सेवा की। उसकी सेवा से खुश होकर साधु ने पारस पत्थर देते हुए कहा- मैं तुम्हारी सेवा से बहुत प्रसन्न हूं। इसलिय मैं तुम्हे यह पारस पत्थर दे रहा हूं। सात दिन बाद मै इसे तुम्हारे पास से ले जाऊंगा। इस बीच तुम जितना चाहो, उतना सोना बना लेना।

उस व्यक्ति को लोहा नही मिल रहा था। अपने घर में लोहा तलाश किया। थोड़ा सा लोहा मिला तो उसने उसी का सोना बनाकर बाजार में बेच दिया और कुछ सामान ले आया।

अगले दिन वह लोहा खरीदने के लिए बाजार गया, तो उस समय मंहगा मिल रहा था यह देख कर वह व्यक्ति घर लौट आया।

तीन दिन बाद वह फिर बाजार गया तो उसे पता चला कि इस बार और भी महंगा हो गया है। इसलिए वह लोहा बिना खरीदे ही वापस लौट गया।

उसने सोचा-एक दिन तो जरुर लोहा सस्ता होगा। जब सस्ता हो जाएगा तभी खरीदेंगे। यह सोचकर उसने लोहा खरीदा ही नहीं।

आठवें दिन साधु पारस लेने के लिए उसके पास आ गए। व्यक्ति ने कहा- मेरा तो सारा समय ऐसे ही निकल गया। अभी तो मैं कुछ भी सोना नहीं बना पाया। आप कृपया इस पत्थर को कुछ दिन और मेरे पास रहने दीजिए। लेकिन साधु राजी नहीं हुए।

साधु ने कहा-तुम्हारे जैसा आदमी जीवन में कुछ नहीं कर सकता। तुम्हारी जगह कोई और होता तो अब तक पता नहीं क्या-क्या कर चुका होता। जो आदमी समय का उपयोग करना नहीं जानता, वह हमेशा दु:खी रहता है। इतना कहते हुए साधु महाराज पत्थर लेकर चले गए।

*शिक्षा:-*
जो व्यक्ति काम को टालता रहता है, समय का सदुपयोग नहीं करता और केवल भाग्य भरोसे रहता है वह हमेशा दुःखी रहता है।

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
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♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


👉 *🍚चावल का दाना* 🏵️
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एक भिखारी एक दिन सुबह अपने घर के बाहर निकला। त्यौहार का दिन है। आज गाँव में बहुत भिक्षा मिलने की संभावना है। वो अपनी झोली में थोड़े से चावल दाने डाल कर, बाहर आया। चावल के दाने उसने डाल लिये हैं अपनी झोली में, क्योंकि झोली अगर भरी दिखाई पड़े तो देने वाले को आसानी होती है, उसे लगता है कि किसी और ने भी दिया है। सूरज निकलने के क़रीब है। रास्ता सोया है। अभी लोग जाग ही रहे हैं।

मार्ग पर आते ही सामने से राजा का रथ आता हुआ नजर आता है। सोचता है आज राजा से अच्छी भीख मिल जायेगी, राजा का रथ उसके पास आकर रूक जाता है। उसने सोचा, “धन्य हैं मेरा भाग्य ! आज तक कभी राजा से भिक्षा नहीं माँग पाया, क्योंकि द्वारपाल बाहर से ही लौटा देते हैं। आज राजा स्वयं ही मेरे सामने आकर रूक गया है।

भिखारी ये सोच ही रहा होता है अचानक राजा उसके सामने एक याचक की भाँति खड़ा होकर उससे भिक्षा देने की मांग करने लगता है। राजा कहता है कि आज देश पर बहुत बड़ा संकट आया हुआ है, ज्योतिषियों ने कहा है इस संकट से उबरने के लिए यदि मैं अपना सब कुछ त्याग कर एक याचक की भाँति भिक्षा ग्रहण करके लाऊँगा तभी इसका उपाय संभव है। तुम आज मुझे पहले आदमी मिले हो इसलिए मैं तुमसे भिक्षा मांग रहा हूँ। यदि तुमने मना कर दिया तो देश का संकट टल नहीं पायेगा इसलिए तुम मुझे भिक्षा में कुछ भी दे दो।

भिखारी तो सारा जीवन माँगता ही आया था कभी देने के लिए उसका हाथ उठा ही नहीं था। सोच में पड़ गया की ये आज कैसा समय आ गया है, एक भिखारी से भिक्षा माँगी जा रही है, और मना भी नहीं कर सकता। बड़ी मुशकिल से एक चावल का दाना निकाल कर उसने राजा को दिया। राजा वही एक चावल का दाना ले खुश होकर आगे भिक्षा लेने चला गया। सबने उस राजा को बढ़-बढ़कर भिक्षा दी। परन्तु भिखारी को चावल के दाने के जाने का भी गम सताने लगा।

जैसे-तैसे शाम को वह घर आया। भिखारी की पत्नी ने भिखारी की झोली पलटी तो उसमें उसे भीख के अन्दर एक सोने का चावल का दाना भी नजर आया। भिखारी की पत्नी ने उसे जब उस सोने के दाने के बारे में बताया तो वो भिखारी छाती पीटके रोने लगा। जब उसकी पत्नी ने रोने का कारण पूछा तो उसने सारी बात उसे बताई। उसकी पत्नी ने कहा, “तुम्हें पता नहीं, कि जो दान हम देते हैं, वही हमारे लिए स्वर्ण है। जो हम इकट्ठा कर लेते हैं, वो सदा के लिए मिट्टी का हो जाता है।”

उस दिन से उस भिखारी ने भिक्षा माँगनी छोड़ दी, और मेहनत करके अपना तथा परिवार का भरण-पोषण करने लगा। जिसने सदा दुसरों के आगे हाथ फैलाकर भीख माँगी थी अब खुले हाथ से दान-पुण्य करने लगा। धीरे-धीरे उसके दिन भी बदलने लगे। जो लोग सदा उससे दूरी बनाया करते थे अब उसके समीप आने लगे। वो एक भिखारी की जगह दानी के नाम से जाना जाने लगा।

*👉🏼शिक्षा:-*
जिस इंसान की प्रवृति देने की होती है उसे कभी किसी चीज की कमी नहीं होती और जो हमेशा लेने की नियत रखता है उसका कभी पूरा नहीं पड़ता..!!


*नित याद करो मन से शिव परमात्मा को* ☝🏻

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*

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સ્માઇલ એક કથા


સ્માઇલ એક કથા 😊😊
એક હોટલ ના વેઈટર સવારના પહોરમાં સ્માઇલ સાથે ચાનો કપ ધયૌ……પણ વેઈટર ના સ્માઈલે કમાલ કરી પેલા ગાહકનુ જીવન સાવ સુનુ સુનું હતુ.જાણે એમાં નવપલ્લવ ફુટયા…. એણે ખુશ થઈ 5 ડોલર ટીપ મુકી દીધા….
વેઈટરને સ્માઇલનું બદલામા આવી બક્ષિસની કલ્પના પણ હતી નહીં, એણે પણ ખુશ થઈ 2 ડોલર ભિખારીના હાથમાં મૂકી દીધાં સવાર-સવારમાં 2 ડોલર મળશે એવી કલ્પના પણ એ ભિખારીએ નહોતી કરી..એ ખુશ-ખુશાલ થઈ ગઈ કાલની ભૂખીને ભૂખી સુઈ ગયેલી પોતાની માં ને મળવા દોડયો. રસ્તામાં ભરપૂર અવર જવર વાળા રોડપર નાનકડા ગલુડિયાને પરવા કયૉ વિના દોડીનેએ ગલુડિયાને ઉપાડી લીધું અને પ્રેમથી માથે હાથ ફેરવ્યો…
આ દ્રશ્ય મોંધીદાટ કારમાં બેઠેલા શ્રીમંતે જોયું અને થયું જેની સાથે કોઈ સંબંધ નથી એવા ગલુડિયાને પણ પ્રેમ કરનાર આ ભિખારી કયાં?? અને મારી પાછળ દોડધામ કરનારા મારી કંપનીના મજુરો-ગાડીનો ડ્રાયવર, મારો પરિવાર……… એ બધાની ઉપેક્ષા કરનારો હું શ્રીમંત કયાં??. એ શ્રીમંતે ખુશ થઇ ને ગાડીના ડ્રાયવરને અને કંપનીના બધા માણસોને 10-10 ડોલર આપી દીધા… શેઠના ખુશ- ખુશાલ સ્નેહભીના ચહેરે મળેલા 10 ડોલર લઈ ડ્રાઈવર પોતાના પરિવારને લઇ BEACH પર ફરવા ગયો આજે આ ડ્રાઈવર ધણો ખુશ હતો જેવો એ ગાડીમાંથી ઉતયૉ ત્યા એક યુવાન ઊભો હતો બન્નેની આંખો એક ક્ષણ માટે મળી અને પેલો યુવાન ચાલવા લાગ્યો ડ્રાઈવરે પુછયું……
‘કોણ છો તમે ? અચાનક પાછા કેમ વળ્યા?’
જુઓ ભાઈ હું જીંદગીથી હતાશ થયેલો વ્યકતી છું આપધાત કરવા આવેલો પણ….પણુ શું? મે એક સંકલ્પ કરેલો કે મને કોઈ માણસના મુખ પર સ્માઇલ દેખાય તો આપધાત ન કરવો તમારી ખુશીએ મારી જીંદગી બચાવી છે. THANKS YOU……..
તમારા ચહેરા પરનું એક સ્માઇલ અનેકના જીવનમાં એક ખુશી સજીઁ શકે છે કે જેની તમે કલ્પના પણ નહિ કરી શકો.. કયાં છીએ આપણે? જે આપણા હાથમાં જ નથી એવા ભવિષ્યની ખોટી કલ્પનાઓ કરી જીવન માંથી ખુશીને ખોઈ બેઠા છીએ દરેક ક્ષણ ખુશ રહેતાં શીખી જોઓ…..જીવન નંદનવન થઈ જશે…..

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शेरा नाम का शेर जंगल के सबसे कुशल और क्रूर शिकारियों में गिना जाता था . अपने दल के साथ उसने न जाने कितने भैंसों , हिरणो और अन्य जानवरों का शिकार किया था .
धीरे -धीरे उसे अपनी काबिलियत का घमंड होने लगा . एक दिन उसने अपने साथियों से कहा …” आज से जो भी शिकार होगा , उसे सबसे पहले मैं खाऊंगा …उसके बाद ही तुममे से कोई उसे हाथ लगाएगा .”
शेरा के मुंह से ऐसी बातें सुन सभी अचंभित थे … तभी एक बुजुर्ग शेर ने पुछा ,“ अरे …तुम्हें आज अचानक क्या हो गया … तुम ऐसी बात क्यों कर रहे हो ..?”,
शेरा बोला ,” मैं ऐसी -वैसी कोई बात नहीं कर रहा … जितने भी शिकार होते हैं उसमे मेरा सबसे बड़ा योगदान होता है … मेरी ताकत के दम पर ही हम इतने शिकार कर पाते हैं ; इसलिए शिकार पर सबसे पहला हक़ मेरा ही है …’
अगले दिन , एक सभा बुलाई गयी .
अनुभवी शेरों ने शेरा को समझाया , “ देखो शेरा , हम मानते हैं कि तुम एक कुशल शिकारी हो , पर ये भी सच है कि बाकी लोग भी अपनी क्षमतानुसार शिकार में पूरा योगदान देते हैं इसलिए हम इस बात के लिए राजी नहीं हो सकते कि शिकार पर पहला हक़ तुम्हारा हो …हम सब मिलकर शिकार करते हैं और हमें मिलकर ही उसे खाना होगा …”
शेरा को ये बात पसंद नहीं आई , अपने ही घमंड में चूर वह बोला , “ कोई बात नहीं , आज से मैं अकेले ही शिकार करूँगा … और तुम सब मिलकर अपना शिकार करना ..”
और ऐसा कहते हुए शेरा सभा से उठ कर चला गया।
कुछ समय बाद जब शेरा को भूख लगी तो उसने शिकार करने का सोचा , वह भैंसों के एक झुण्ड की तरफ दहाड़ते हुए बढ़ा , पर ये क्या जो भैंसे उसे देखकर काँप उठते थे आज उसके आने पर जरा भी नहीं घबराये , उलटे एक -जुट हो कर उसे दूर खदेड़ दिया .
शेरा ने सोचा चलो कोई बात नहीं मैं हिरणो का शिकार कर लेता हूँ , और वह हिरणो की तरफ बढ़ा , पर अकेले वो कहाँ तक इन फुर्तीले हिरणो को घेर पाता , हिरन भी उसके हाथ नहीं आये .
अब शेरा को एहसास हुआ कि इतनी ताकत होते हुए भी बिना दल का सहयोग पाये वो एक भी शिकार नहीं कर सकता . उसे पछतावा होने लगा , अब वह संगठन शक्ति को समझ चुका था।उसने अनुभव किया कि कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो पर संगठन शक्ति के आगे कमजोर ही रहता है। वह निराश बाकी शेरों के पास पहुंचा और अपने इस व्यवहार के लिए क्षमा मांग ली और एक बार फिर जंगल उसकी दहाड़ से कांपने लगा .
तात्पर्य व्यक्ति कभी संगठन से बड़ा नही होता।संगठन में ही शक्ति है। संगठन ही श्रेष्ठ है। तभी तो कहा गया है “संघे शक्ति कलौयुगे”

रामचंद्र आर्य