Posted in हिन्दू पतन

कन्याकुमारी से अफगानिस्तान तक सम्राट अशोक के शासन काल की लगभग 180 शिला लेख उपलब्ध है। इन सब में एक भी शिलालेख ऐसी नही है,जिसमें यह लिखा हो कि सम्राट अशोक बौद्ध थे।

हर शिलालेख में यह लिखा है कि मैं क्षत्रिय हूँ। उनकी जीवन के अंतिम चार वर्ष की 12 शिलालेख भी मिलती है लेकिन उन शिलालेखों में भी ऐसा कोई जिक्र नही है कि वे बौद्ध थे,हर शिलालेख पर उनके क्षत्रिय होने का उल्लेख मिलता है।

बौद्ध धर्म में शामिल होने के लिए जो धार्मिक क्रिया कर्म किये जाते है। सम्राट अशोक के विषय में ऐसी कोई जानकारी नही मिलती है। उन्हे हिंदू धर्म से बौद्ध धर्म में दिक्षित करने वाले किसी भी व्यक्ति की कोई जानकारी नही मिलती है,ना ऐसा कोई इतिहास ही मिलता है।

ठोस रुप से कभी,कही ऐसा कोई साक्ष्य या सबूत नही मिलता है कि सम्राट अशोक ने हिंदू धर्म का त्याग कर बौद्ध धर्म अपनाया था। तो क्या हमे अब तक गलत इतिहास पढाया जा रहा है। क्या हिदु धर्म को कमजोर करने की बामपंथी इतिहासकारों की कोई सोची समझी चाल है ?

😊जय हिंद 🇮🇳

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