Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

😝😜😛😂😂😂😂
એક ગુજરાતીને *અમેરિકામાં*
*સુપરમોલ* માં નોકરી મળી.

પહેલા દિવસના અંતે માલિકે પુછ્યુ કે
*કેટલા ઘરાકને માલ વેચ્યો?*
ગુજરાતી :
*એક*

*માલિક* :
લોકો 15-20 ગ્રાહકને માલ વેચે છે.
તારું પર્ફોર્મન્સ તો બહુ નબળું છે.
સારું ચાલ એ કહે,
માલ કેટલો વેચ્યો તેને?

*ગુજરાતી* :
દોઢ લાખનો

માલિક બેભાન થતા થતા બચ્યો.
પછી માંડ માંડ કંટ્રોલ કરીને બોલ્યો:
એવું શું વેચ્યું તે?

*ગુજરાતી* :
એ માણસને માછલી
પકડવાની ગલ આપી.
ગલ માટે એક મજબુત
સળીયો આપ્યો,
માછલા આકર્ષવા ખોરાકના
મોંઘા પેકેટ આપ્યા.
વધારે માછલાં પકડવા જગ્યા
બતાવી અને ત્યાં પાણી ખુબ
ઊંડું અને જોખમી હોવાથી
2 એન્જિનવાળી સ્પીડ બોટ આપી,
ત્યાં વધુ રોકાણ માટે મોંઘો ટેન્ટ આપ્યો.
સાથે સાથે ફુડ પેકેટ્સનાં
15-20 પાર્સલ અને
બિયરની 10 બોટલ આપી.
બસ આમ કુલ દોઢ લાખનો માલ વેચ્યો.

માલિકની આંખમાં ઝળઝળીયાં
આવી ગયાં અને કહ્યું:
કમાલ છે દોસ્ત,
માંછલીનાં ગલ લેવા આવનારને
તે આટલું બધું પકડાવી દીધું?

ગુજરાતી:
ના ના એ તો
*માથાના દુખાવાની ગોળી*
લેવા આવ્યો હતો,
મેં એના મગજમાં ઠસાવી દીધું કે
માથાના દુખાવાના કાયમી ઉપાય
માટે માછલી પકડવાનો શોખ રાખો.
પછી તેને આ બધી વસ્તુઓ વેચી છે.

*માલિક* :
હવે કાલથી મારી જગ્યાએ
તું જ બેસજે દોસ્ત,
પણ મને કહે,
*તું ભારતમાં શું વેચતો હતો* ?

ગુજરાતી:
બસ, ગામ ના ભાભલાવ સાથે ફરતો હતો…!*

😁 😁 😁 ☝️😀 😀 😁

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐छुपी हुई शक्तियां💐💐*


एक बार देवताओं में चर्चा हो रहो थी, चर्चा का विषय था मनुष्य की हर मनोकामनाओं को पूरा करने वाली गुप्त चमत्कारी शक्तियों को कहाँ छुपाया जाये। सभी देवताओं में इस पर बहुत वाद- विवाद हुआ। एक देवता ने अपना मत रखा और कहा कि इसे हम एक जंगल की गुफा में रख देते हैं। दूसरे देवता ने उसे टोकते हुए कहा नहीं- नहीं हम इसे पर्वत की चोटी पर छिपा देंगे। उस देवता की बात ठीक पूरी भी नहीं हुई थी कि कोई कहने लगा , “न तो हम इसे कहीं गुफा में छिपाएंगे और न ही इसे पर्वत की चोटी पर हम इसे समुद्र की गहराइयों में छिपा देते हैं यही स्थान इसके लिए सबसे उपयुक्त रहेगा।


सबकी राय खत्म हो जाने के बाद एक अन्य देवता ने कहा क्यों न हम मानव की चमत्कारिक शक्तियों को मानव -मन की गहराइयों में छिपा दें। चूँकि बचपन से ही उसका मन इधर -उधर दौड़ता रहता है, मनुष्य कभी कल्पना भी नहीं कर सकेगा कि ऐसी अदभुत और विलक्षण शक्तियां उसके भीतर छिपी हो सकती हैं । और वह इन्हें बाह्य जगत में खोजता रहेगा अतः इन बहुमूल्य शक्तियों को हम उसके मन की निचली तह में छिपा देंगे। बाकी सभी देवता भी इस प्रस्ताव पर सहमत हो गए। और ऐसा ही किया गया , मनुष्य के भीतर ही चमत्कारी शक्तियों का भण्डार छुपा दिया गया, इसलिए कहा जाता है मानव मवन में अद्भुत शक्तियां निहित हैं।

*💐💐शिक्षा💐💐*

दोस्तों इस कहानी का सार यह है कि मानव मन असीम ऊर्जा का कोष है। इंसान जो भी चाहे वो हासिल कर सकता है। मनुष्य के लिए कुछ भी असाध्य नहीं है। लेकिन बड़े दुःख की बात है उसे स्वयं ही विश्वास नहीं होता कि उसके भीतर इतनी शक्तियां विद्यमान हैं। अपने अंदर की शक्तियों को पहचानिये, उन्हें पर्वत, गुफा या समुद्र में मत ढूंढिए बल्कि अपने अंदर खोजिए और अपनी शक्तियों को निखारिए। हथेलियों से अपनी आँखों को ढंककर अंधकार होने का शिकायत मत कीजिये। आँखें खोलिए , अपने भीतर झांकिए और अपनी अपार शक्तियों का प्रयोग कर अपना हर एक सपना पूरा कर डालिये।




*💐💐 प्रेषक अभिषेक चौधरी 💐💐*



*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️


*👉 विद्या का घमंड* 🏵️
🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅
आज गंगा पार होने के लिए कई लोग एक नौकामें बैठे, धीरे-धीरे नौका सवारियों के साथ सामने वाले किनारे की ओर बढ़ रही थी,मनमोहन भी उसमें सवार थे। मनमोहन जी ने नाविक से पूछा “क्या तुमने भूगोल पढ़ी है ?”

भोला- भाला नाविक बोला “भूगोल क्या है इसका मुझे कुछ पता नहीं।”

मनमोहनजी ने शिक्षा का प्रदर्शन करते कहा, “तुम्हारी पाव भर जिंदगी पानी में गई।”

फिर मनमोहन जी ने दूसरा प्रश्न किया, “क्या इतिहास जानते हो? महारानी लक्ष्मीबाई कब और कहाँ हुई तथा उन्होंने कैसे लडाई की ?”

नाविक ने अपनी अनभिज्ञता जाहिर की तो मनमोहन जी ने विजयीमुद्रा में कहा “ ये भी नहीं जानते तुम्हारी तो आधी जिंदगी पानी में गई।”

फिर विद्या के मद में मनमोहन जी ने तीसरा प्रश्न पूछा “महाभारत का भीष्म-नाविक संवाद या रामायण का केवट और भगवान श्रीराम का संवाद जानते हो ?”

अनपढ़ नाविक क्या कहे, उसने इशारे में ना कहा, तब मनमोहन जी मुस्कुराते हुए बोले “तुम्हारी तो पौनी जिंदगी पानी में गई।”

तभी अचानक गंगा में प्रवाह तीव्र होने लगा। नाविक ने सभी को तूफान की चेतावनी दी, और मनमोहनजी से पूछा “नौका तो तूफान में डूब सकती है, क्या आपको तैरना आता है?”

मनमोहन जी गभराहट में बोले “मुझे तो तैरना-वैरना नहीं आता है ?”

*नाविक ने स्थिति भांपते हुए कहा ,“तब तो समझो आपकी पूरी जिंदगी पानी में गयी। ”*

कुछ ही देर में नौका पलट गई। और मनमोहन जी बह गए।

*💐💐शिक्षा💐💐*

मित्रों ,विद्या वाद-विवाद के लिए नहीं है और ना ही दूसरों को नीचा दिखाने के लिए है। लेकिन कभी-कभी ज्ञान के अभिमान में कुछ लोग इस बात को भूल जाते हैं और दूसरों का अपमान कर बैठते हैं। याद रखिये शाश्त्रों का ज्ञान समस्याओं के समाधान में प्रयोग होना चाहिए शश्त्र बना कर हिंसा करने के लिए नहीं।

*कहा भी गया है, जो पेड़ फलों से लदा होता है उसकी डालियाँ झुक जाती हैं। धन प्राप्ति होने पर सज्जनों में शालीनता आ जाती है। इसी तरह , विद्या जब विनयी के पास आती है तो वह शोभित हो जाती है। इसीलिए संस्कृत में कहा गया है , ‘विद्या विनयेन शोभते।*


✴️✴️✴️✴️✴️

*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।। ओम शांति*

🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

श्रावणी_अमावस्या_की_व्रत_कथा
🌹🙏🌹 हर_हर_महादेव 🌹🙏🌹
एक समय की बात है, एक राजा महल में अपने परिवार के साथ सुखपूर्वक निवास किया करता था। उसका एक पुत्र था, जिसकी शादी हो चुकी थी। राजा की पुत्रवधू ने एक दिन रसोई में मिठाई रखी हुई देखी तो वह सारी मिठाई खा गई। जब उससे पूछा गया कि सारी मिठाई कहां गई तो उसने कहा, सारी मिठाई तो चूहे खा गए।

यह बात चूहों ने सुन ली और वे इस गलत आरोप को सुनकर अत्यंत क्रोधित हुए। इसके बाद उन्होंने राजा की बहू को सबक सिखाने का निश्चय कर लिया। कुछ दिनों के पश्चात् महल में कुछ मेहमान आए, चूहों ने सोचा कि यह अच्छा मौका है, रानी को सबक सिखाने का।

बदला लेने के लिए, चूहों ने रानी की साड़ी चुराई और उसे जाकर अतिथि के कमरे में रख दी। जब सुबह सेवकों और अन्य लोगों ने उस साड़ी को वहां पर देखा, तो लोग रानी के बारे में बात करने लगे। यह बात जंगल में आग की तरह पूरे गाँव में फैल गई। जब यह बात राजा के कानों तक पहुंची तो उसने अपनी पुत्रवधू को महल से निकाल दिया।

रानी महल से निकल एक झोपड़ी में रहने लगी और नियमित रूप से पीपल के एक वृक्ष के नीचे दीपक जलाने लगी। इसके साथ ही वह पूजा करके, गुड़धानी को भोग लगाकर, लोगों में प्रसाद वितरित करने लगी।

इस प्रकार कुछ दिन बीत जाने के बाद, एक दिन राजा उस पीपल के पेड़ के पास से गुज़रे,जहां रानी हमेशा दीपक जलाया करती थी। इस दौरान उनका ध्यान उस पेड़ के आस-पास जगमगाती रोशनी पर गया। राजा इसे देखकर चकित रह गए। महल में वापस आने के बाद उन्होंने अपने सैनिकों से उस रोशनी के रहस्य का पता लगाने के लिए कहा।

सैनिक राजा की बात मानकर उस पेड़ के पास चले गए, वहां पर उन्होंने देखा कि दीपक आपस में बात कर रहे थे। सभी दीपक अपनी-अपनी कहानी बता रहे थे, तभी एक दीपक बोला, मैं राजा के महल से हूँ। महल से निकाले जाने के बाद, राजा की पुत्रवधू रोज़ मेरी पूजा करती है और मुझे प्रज्वलित करती है।

सभी अन्य दीपकों ने उससे पूछा कि रानी को महल से क्यों निकाला गया, तो उसने बताया कि, एक दिन रानी ने मिठाई खाकर चूहों का झूठा का नाम लगा दिया। इस पर चूहे नाराज़ हो गए और रानी से बदला लेने के लिए उसकी साड़ी अतिथि के कमरे में रख आए। यह सब देखकर राजा ने उन्हें महल से निकाल दिया।यह सब सुनकर सैनिक भी हैरान रह गए और महल वापिस आकर उन्होंने राजा को पूरी कहानी सुनाई।

यह सुनकर राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने अपनी पुत्रवधू को महल में वापस बुला लिया। इस प्रकार पीपल के पेड़ की नियमित पूजा करने का फल रानी को मिला और वह अपना जीवन आराम से व्यतीत करने लगी।