Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

इंटरव्यू

चार, पांच कंपनी के अधिकारी बैठकर सेक्रेटरी की पोस्ट के लिए साक्षत्कार ले रहे थे, उम्मीदवार महिलाओ, लड़कियों की लंबी लाइन थी। बड़ी मुश्किलों और इंतेज़ार के बाद सहज की बारी आई। जल्दी से अपनी कलफ लगी सूती साड़ी संभाली, एक बार सिर के बाल सही किये, दो घूंट पानी पीने के बाद हिम्मत कर अपने सर्टिफिकेट सम्हालती हुई, मन के आत्मविश्वास को एक बार सहलाकर भीतर जाने लगी।

कक्षा एक से लेकर स्नातक तक हर क्लास में टॉप करते हुए, उसने अपने पापा के साथ साथ हर बड़े बुजुर्गों से तारीफ ही पायी थी। उसके बाद दिल्ली आकर कई प्रोफेशनल कोर्स भी किया। देखने मे परी तो नही, पर स्मार्ट लगती थी।

अंदर आते ही उससे पूछा गया, “पहले कहीं सर्विस करी है।”
“टीचर की जॉब में थी, छह महीने बुलंदशहर में।”

शर्मा सर ज़ोर से बोले, “नो, आई वांट एक्सपीरियंस ऑफ सेक्रेटरी पोस्ट।”

एक दूसरे साहब ने बोला, “अपने बारे में कुछ परिचय अंग्रेजी में बताइये।”

सहज ने बोला तो पर उंसकी अंग्रेजी की टोन उनको पसंद नही आई, क्योंकि लिख तो लेती थी, अंग्रेजी बोलने की प्रैक्टिस नही थी।

“ओके, मैम, यू कैन गो, वी विल इन्फॉर्म यू, नेक्स्ट प्लीज।”

और आज भी दुखी मन से सहज वहां से निकल पड़ी। सोच में पड़ गयी, हिंदुस्तान को अंग्रेजो से आजादी पचहत्तर वर्ष पहले मिल गई, पर अंग्रेजी से शायद कभी नही मिलेगी। हमेशा से घर मे मम्मी और पापा की हर विषय की बुद्धिमान बेटी आज अंग्रेजी से हार गई।

स्वरचित
भगवती सक्सेना गौड़

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

छूछक
” बहू रानी ! अपनी मम्मी जी को फ़ोन पर बता देना कि हमारे परिवार में पहला बच्चा होने पर सारी ननदों के लिए साड़ी के साथ साथ हीरे की नहीं तो ,सोने की अंगूठी तो अवश्य ही आती हैं वैसे तो तुम्हारे बड़े ताऊजी की बड़ी बहू के घर से तो सबके कंगन आए थे । ” मंझली ताई जी ने कहा ।
अब ननद एक होती तो मम्मी जी से कह भी देती लेकिन ताऊ – चाचा की मिलाकर पाँच ननदें ;
मेरे परिवार में अकेले पापा कमाने वाले , अनेक खर्च —
किसी तरह शादी की , भाई इंजीनियरिंग कर रहा है , मुझे पता होता कि बच्चा होने पर भी मायके वालों को ही नोंचा जाएगा ,तो बच्चा ही ना पैदा करती । ” मैं मन ही मन बिलख पड़ी ।
मैंने अपनी हीरे की अंगूठी सासू माँ को देकर कहा ,” मम्मी जी ! जो गहनें आपके पास हैं मेरे ; सबके बदले में अपने परिवार की लड़की , औरतों के लिए जो आप देना चाहती हो ले आइए पर प्लीज़ मेरे मम्मी- पापा से छूछक के नाम पर गहने माँगने के लिए मत कहना । ”
” खबरदार , बहू रानी जो हमारे प्यार की सौगात , अंगूठी देने की बात कही ,या गहने बेचने की ।
मैं बैठी हूँ ना । तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं । खूब आराम करो । जच्चा-बच्चा हँसते हुए दिखाई देने चाहिए हमें बस ।”
कुआं पूजन के दिन भाई छूछक का सामान लेकर आया । पड़ोसी और रिश्तेदारों से पूरा घर भरा था ।
भाई नवजात शिशु को देखकर निहाल हो रहा था , लेकिन मुझे यहीं चिंता सता रही थी कि अब पूरा खानदान इकट्ठा होगा और यही पूछेगा कि छूछक में क्या आया ?
सासू माँ मुझे स्टोर रूम में ले गई और मुझे पीले रंग की बनारसी साड़ी पहनने के लिए देते हुए कहा , मम्मी जी लेकर आई है खूब खिलेगी तुम पर । यें साड़ियाँ ननदों के लिए है , फिर उन्होंने दिखाने के लिए सामान रखना शुरू किया तो मेरी आँख ही चौंधिया गई , सारे खानदान के कपड़े , चाँदी के बर्तन , खिलौने , सारी ही बेटियों के लिए अंगूठियाँ और मेरे लिए हीरे जड़ित प्यारी सी चैन ।
सासू माँ चहकती हुई सबकों दिखा रही थी ।
उत्सव के बाद मैंने भाई से कहा ,” यह सब कैसे ? ”
” बहन ! मैं तो एक सूटकेस लाया हूँ बस , जो भी सामान है बस उसी में है। वह आंटी जी को दिया है । ना उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या लाया है और ना मैने बताया । ”
तभी सासू माँ ने दुलारते हुए कहा ,” बिटिया ! कुटुंब से लिया है ; तो देना ही पड़ता है । मैंने वह सामान भी इसके बीच में सजा दिया है। उन्होंने बहुत ही बढ़िया दिया है लेकिन यह कुटुंब इतना बड़ा है कि कोई कितना देगा । मैं अपने हिसाब से खरीद लाई हूँ ।
और लाड़ो ! जितना यह मेरा घर, परिवार है , उससे अधिक अब तुम्हारा है ।
तुम्हें जहाँ भी ,जो भी लेना- देना करना हो तो इस मम्मी जी को इशारा भर कर देना ।
तुम्हारे भाई और तुम्हारी बुआ के लड़के के लिए भी गर्म सूट खरीद कर लाई हूँ ।
आखिर लाड़ो !
तुम्हारा सम्मान भी तो हमारा ही सम्मान है ।
और कुछ करना है तो बता दीजिए ।”
” हाँ मम्मी जी ! थोड़ा बदलाव चाहिए , स्वर्ण जड़ित चैन मुन्ने की दादी माँ के गले में अच्छी लगेगी ।
मेरे लिए तो ऐसे खानदान की बहू बनना ही सबसे बड़ी खुशी है । कहते हुए प्यार और ख़ुशी में आँखें छलछला आई । और मम्मी जी ने गले लगा लिया ।
Unknown writer ✍️✍️✍️🙏🙏🙏

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

*एक प्रेरणादायक कहानी…*

एक बार एक पंडित जी ने एक दुकानदार के पास पांच सौ रुपये रख दिए।
उन्होंने सोचा कि जब मेरी बेटी की शादी होगी तो मैं ये पैसा ले लूंगा।
कुछ सालों के बाद जब बेटी सयानी हो गई,
तो पंडित जी उस दुकानदार के पास गए।

लेकिन दुकानदार ने नकार दिया और बोला- आपने कब मुझे पैसा दिया था?
बताइए! क्या मैंने कुछ लिखकर दिया है?

पंडित जी उस दुकानदार की इस हरकत से बहुत ही परेशान हो गए और बड़ी चिंता में डूब गए।
फिर कुछ दिनों के बाद पंडित जी को याद आया,
कि क्यों न राजा से इस बारे में शिकायत कर दूं।
ताकि वे कुछ फैसला कर देंगे और मेरा पैसा मेरी बेटी के विवाह के लिए मिल जाएगा।

फिर पंडित जी राजा के पास पहुंचे और अपनी फरियाद सुनाई।

राजा ने कहा- कल हमारी सवारी निकलेगी और तुम उस दुकानदार की दुकान के पास में ही खड़े रहना।

दूसरे दिन राजा की सवारी निकली।
सभी लोगों ने फूलमालाएं पहनाईं और किसी ने आरती उतारी।

पंडित जी उसी दुकान के पास खड़े थे।
जैसे ही राजा ने पंडित जी को देखा,
तो उसने उन्हें प्रणाम किया और कहा- गुरु जी! आप यहां कैसे?
आप तो हमारे गुरु हैं।
आइए! इस बग्घी में बैठ जाइए।

वो दुकानदार यह सब देख रहा था।
उसने भी आरती उतारी और राजा की सवारी आगे बढ़ गई।

थोड़ी दूर चलने के बाद राजा ने पंडित जी को बग्घी से नीचे उतार दिया और कहा- पंडित जी! हमने आपका काम कर दिया है।
अब आगे आपका भाग्य।

उधर वो दुकानदार यह सब देखकर हैरान था,
कि पंडित जी की तो राजा से बहुत ही अच्छी सांठ-गांठ है।
कहीं वे मेरा कबाड़ा ही न करा दें।
दुकानदार ने तत्काल अपने मुनीम को पंडित जी को ढूंढ़कर लाने को कहा।

पंडित जी एक पेड़ के नीचे बैठकर कुछ विचार-विमर्श कर रहे थे।
मुनीम जी बड़े ही आदर के साथ उन्हें अपने साथ ले आए।

दुकानदार ने आते ही पंडित जी को प्रणाम किया और बोला- पंडित जी! मैंने काफी मेहनत की और पुराने खातों को‌ देखा,
तो पाया कि खाते में आपका पांच सौ रुपया जमा है।
और पिछले दस सालों में ब्याज के बारह हजार रुपए भी हो गए हैं।
पंडित जी! आपकी बेटी भी तो मेरी बेटी जैसी ही है।
अत: एक हजार रुपये आप मेरी तरफ से ले जाइए,
और उसे बेटी की शादी में लगा दीजिए।

इस प्रकार उस दुकानदार ने पंडित जी को तेरह हजार पांच सौ रुपए देकर बड़े ही प्रेम के साथ विदा किया।

—— तात्पर्य ——
जब मात्र एक राजा के साथ सम्बन्ध होने भर से हमारी विपदा दूर जो जाती है,
तो हम अगर हम खुद से (जो कि भगवान का अंश है) और इस दुनिया के राजा यानि कि बाबा भोले से अपना सम्बन्ध जोड़ लें,
तो हमें कोई भी समस्या, कठिनाई या फिर हमारे साथ किसी भी तरह के अन्याय का तो कोई प्रश्न ही नहीं उत्पन्न होगा।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

सोया भाग्य

एक व्यक्ति जीवन से हर प्रकार से निराश था । लोग उसे मनहूस के नाम से बुलाते थे ।

एक ज्ञानी पंडित ने उसे बताया कि तेरा भाग्य फलां पर्वत पर सोया हुआ है , तू उसे जाकर जगा ले तो भाग्य तेरे साथ हो जाएगा । बस ! फिर क्या था वो चल पड़ा अपना सोया भाग्य जगाने ।

रास्ते में जंगल पड़ा तो एक शेर उसे खाने को लपका , वो बोला भाई ! मुझे मत खाओ , मैं अपना सोया भाग्य जगाने जा रहा हूँ ।

शेर ने कहा कि तुम्हारा भाग्य जाग जाये तो मेरी एक समस्या है , उसका समाधान पूछते लाना । मेरी समस्या ये है कि मैं कितना भी खाऊं … मेरा पेट भरता ही नहीं है , हर समय पेट भूख की ज्वाला से जलता रहता है ।

मनहूस ने कहा– ठीक है । आगे जाने पर एक किसान के घर उसने रात बिताई । बातों बातों में पता चलने पर कि वो अपना सोया भाग्य जगाने जा रहा है ,

किसान ने कहा कि मेरा भी एक सवाल है .. अपने भाग्य से पूछकर उसका समाधान लेते आना … मेरे खेत में , मैं कितनी भी मेहनत कर लूँ . पैदावार अच्छी होती ही नहीं । मेरी शादी योग्य एक कन्या है, उसका विवाह इन परिस्थितियों में मैं कैसे कर पाऊंगा ?

मनहूस बोला — ठीक है । और आगे जाने पर वो एक राजा के घर मेहमान बना । रात्री भोज के उपरान्त राजा ने ये जानने पर कि वो अपने भाग्य को जगाने जा रहा है , उससे कहा कि मेरी परेशानी का हल भी अपने भाग्य से पूछते आना । मेरी परेशानी ये है कि कितनी भी समझदारी से राज्य चलाऊं… मेरे राज्य में अराजकता का बोलबाला ही बना रहता है ।

मनहूस ने उससे भी कहा — ठीक है । अब वो पर्वत के पास पहुँच चुका था । वहां पर उसने अपने सोये भाग्य को झिंझोड़ कर जगाया— उठो ! उठो ! मैं तुम्हें जगाने आया हूँ । उसके भाग्य ने एक अंगडाई ली और उसके साथ चल दिया ।

उसका भाग्य बोला — अब मैं तुम्हारे साथ हरदम रहूँगा ।
अब वो मनहूस न रह गया था बल्कि भाग्यशाली व्यक्ति बन गया था और अपने भाग्य की बदौलत वो सारे सवालों के जवाब जानता था ।

वापसी यात्रा में वो उसी राजा का मेहमान बना और राजा की परेशानी का हल बताते हुए वो बोला — चूँकि तुम एक स्त्री हो और पुरुष वेश में रहकर राज – काज संभालती हो , इसीलिए राज्य में अराजकता का बोलबाला है । तुम किसी योग्य पुरुष के साथ विवाह कर लो , दोनों मिलकर राज्य भार संभालो तो तुम्हारे राज्य में शांति स्थापित हो जाएगी ।

रानी बोली — तुम्हीं मुझ से ब्याह कर लो और यहीं रह जाओ । भाग्यशाली बन चुका वो मनहूस इन्कार करते हुए बोला — नहीं नहीं ! मेरा तो भाग्य जाग चुका है । तुम किसी और से विवाह कर लो । तब रानी ने अपने मंत्री से विवाह किया और सुखपूर्वक राज्य चलाने लगी |

कुछ दिन राजकीय मेहमान बनने के बाद उसने वहां से विदा ली ।
चलते चलते वो किसान के घर पहुंचा और उसके सवाल के जवाब में बताया कि तुम्हारे खेत में सात कलश हीरे जवाहरात के गड़े हैं , उस खजाने को निकाल लेने पर तुम्हारी जमीन उपजाऊ हो जाएगी और उस धन से तुम अपनी बेटी का ब्याह भी धूमधाम से कर सकोगे ।

किसान ने अनुग्रहित होते हुए उससे कहा कि मैं तुम्हारा शुक्रगुजार हूँ , तुम ही मेरी बेटी के साथ ब्याह कर लो । पर भाग्यशाली बन चुका वह व्यक्ति बोला कि नहीं !नहीं ! मेरा तो भाग्योदय हो चुका है , तुम कहीं और अपनी सुन्दर कन्या का विवाह करो । किसान ने उचित वर देखकर अपनी कन्या का विवाह किया और सुखपूर्वक रहने लगा ।

कुछ दिन किसान की मेहमान नवाजी भोगने के बाद वो जंगल में पहुंचा और शेर से उसकी समस्या के समाधानस्वरुप कहा कि यदि तुम किसी बड़े मूर्ख को खा लोगे तो तुम्हारी ये क्षुधा शांत हो जाएगी ।
शेर ने उसकी बड़ी आवभगत की और यात्रा का पूरा हाल जाना । सारी बात पता चलने के बाद शेर ने कहा कि भाग्योदय होने के बाद इतने अच्छे और बड़े दो मौके गंवाने वाले ऐ इंसान ! तुझसे बड़ा मूर्ख और कौन होगा ? तुझे खाकर ही मेरी भूख शांत होगी और इस तरह वो इंसान शेर का शिकार बनकर मृत्यु को प्राप्त हुआ ।

👉यदि आपके पास सही मौका परखने का विवेक और अवसर को पकड़ लेने का ज्ञान नहीं है तो भाग्य भी आपके साथ आकर आपका कुछ भला नहीं कर सकता। और मनुष्य तन बारम्बार नहीं मिलता है और यही अवसर है परमात्मा को पाने का..!!

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🙏पालनहार 🙏

✍️एक समय लक्ष्मी जी विष्णु जी को भोजन करा रही थी ,
विष्णु जी ने पहला ग्रास मुंह में लेने से पहले ही हाथ रोक लिया,
और उठ कर चले गए ।
लौट कर आने पर भोजन करते करते लक्ष्मी जी ने उठकर जाने का कारण पूछा तो ,विष्णु जी बोले मेरे चार भक्त भूखे थे।
उन्हें खिला कर आया हूं ।
लक्ष्मी जी ने परीक्षा लेने के लिए दूसरे दिन एक छोटी सी डिबिया में 5 चीटियों को बंद किया
और विष्णु जी को भोजन परोसा प्रभु ने भोजन किया तो लक्ष्मी जी बोली आज आपके 5 भक्त भूखे हैं और आपने भोजन पा लिया प्रभु ने कहा ऐसा हो ही नहीं सकता तो लक्ष्मी जी ने तुरंत डिबिया खोली और अचरज से हक्की बक्की हो गई। क्योंकि हर चींटी के मुंह में चावल के कण थे ।

लक्ष्मी जी ने पूछा बंद डिबिया में चावल कैसे आए, आपने कब डालें तब प्रभु ने सुंदर जवाब दिया देवी आपने चीटियों को डिब्बी में बंद करते समय जब माथा टेका
तभी आप के तिलक से एक चावल का दाना डिब्बी में गिर गया और चीटियों को भोजन मिल गया।
*पालनहार सबका ध्यान रखते हैं आवश्यकता विश्वास की है।*

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

आज की कथा🙏🙏🙏🙏
जय माता की ,🙏🙏🙏🙏🙏
जय बाला जी महाराज

एक मछलीमार कांटा डाले तालाब के किनारे बैठा था। काफी समय बाद भी कोई मछली कांटे में नहीं फँसी, ना ही कोई हलचल हुई तो वह सोचने लगा… कहीं ऐसा तो नहीं कि मैने कांटा गलत जगह डाला है, यहाँ कोई मछली ही न हो !

उसने तालाब में झाँका तो देखा कि उसके कांटे के आसपास तो बहुत-सी मछलियाँ थीं। उसे बहुत आश्चर्य हुआ कि इतनी मछलियाँ होने के बाद भी कोई मछली फँसी क्यों नहीं !

एक राहगीर ने जब यह नजारा देखा तो उससे कहा– “लगता है भैया, यहाँ पर मछली मारने बहुत दिनों बाद आए हो! अब इस तालाब की मछलियाँ कांटे में नहीं फँसती।”

मछलीमार ने हैरत से पूछा– “क्यों, ऐसा क्या है यहाँ ?

राहगीर बोला– “पिछले दिनों तालाब के किनारे एक बहुत बड़े संत ठहरे थे। उन्होने यहाँ मौन की महत्ता पर प्रवचन दिया था। उनकी वाणी में इतना तेज था कि जब वे प्रवचन देते तो सारी मछलियाँ भी बड़े ध्यान से सुनतीं। यह उनके प्रवचनों का ही असर है कि उसके बाद जब भी कोई इन्हें फँसाने के लिए कांटा डालकर बैठता है तो ये मौन धारण कर लेती हैं। जब मछली मुँह खोलेगी ही नहीं तो कांटे में फँसेगी कैसे ? इसलिए बेहतर यहीं होगा कि आप कहीं और जाकर कांटा डालो।”

परमात्मा ने हर इंसान को दो आँख, दो कान, दो नासिका, हर इन्द्रिय दो-2 ही प्रदान किया है। पर जिह्वा एक ही दी.. क्या कारण रहा होगा ?

क्योंकि यह एक ही अनेकों भयंकर परिस्थितियाँ पैदा करने के लिये पर्याप्त है।

संत ने कितनी सही बात कही कि जब मुँह खोलोगे ही नहीं तो फँसोगे कैसे ?

अगर इन्द्रिय पर संयम करना चाहते हैं तो.. इस जिह्वा पर नियंत्रण कर लेवें बाकी सब इन्द्रियां स्वयं नियंत्रित रहेंगी। यह बात हमें भी अपने जीवन में उतार लेनी चाहिए।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

વાળું ટાણું…
————————————
સાંજ ના સાડા- ત્રણ ચાર વાગ્યા પછી મારા ગામની બજાર અને શેરીઓમાં નિરાંત પથરાઈ ગઈ હોય તેવો અહેસાસ થયા વગર ન રહે. સવારે કામધંધે જવા દોટ મુકતુ મારુ ગામ ખરા બપોરે સુનકાર ઓઢીને સુઈ ગયું હોય તેવું લાગે. જુવાનિયા તો દિવસ આખો કામધંધે વળગ્યા હોય. પણ , સાંજના ચાર પછી મોટી ઉંમરના વડીલો ધીમે-ધીમે શેરીઓમાં બહાર આવે. દિવસ આખો ખાલીપો વેઠતો મંદિરનો ઓટલો અને ગામનો ચોક ધીમે-ધીમે જીવંત થાય. સાંજ ઢળે એટલે વગડેથી પશુધન ગામમાં આવે. પેલો ગોવાળીઓ તેને ગામમાં પ્રવેશ કરાવીને પાછો વળી જાય. પરંતુ, દરેક પશુ પોતાની શેરી અને ઘર ઓળખતું હોય તેમ પોતપોતાની શેરીઓ આવે તેમ જાતે વળાંક લઈ લે ! ક્યારેક કોઈ ઘરની ખડકી બંધ હોય અને એ ખડકી બહાર ઉભા રહીને ભેંશ કે ગાય જ્યાં સુધી ખડકી ન ખુલે ત્યાં સુધી ભાંભરડાં નાખે. આ બધું જોઈને ત્યારે સહજ ભાવે આશ્ચર્ય થતું. પશુને પણ લગાવ હોય છે! આખા ગામનું પશુધન ઘેર આવી જાય. પણ, ગોમતીમાં ની ગાય ઘણીવાર ન આવે ત્યારે ગોમતીમાં પોતાની ગાય ને શોધવા નીકળતા. તળાવ અને પાધરની સીમ ગાયને શોધવા ધમરોળતા… તળાવની પાળ ઉપર ઉભા રહી ને એ ગાયનું નામ લઈને જોરથી બૂમ પાડતા. અને અંતે ગાય બાવળમાંથી દોડી આવતા દેખાતી. પૂછડું ઊંચું કરીને એ સાદ સાંભળી ગોમતીમાં તરફ દોડી આવતી અને ગોમતીમાં ને જીભથી ચાટી ને વહાલ કરતી. ગોમતીમાં ય ઠપકાના અંદાજ માં ગાય ને ખરી- ખોટી સંભળાવતા. પણ, ગાય તો ગોમતીમાને વહાલ કરવામાંથી ઉંચી આવે તો ઠપકો સાંભળે ને.. એકાકી વૃદ્ધ ગોમતીમાં માટે એ ગાયનું દૂધ આજીવિકા હતી. સાંજનો સૂરજ ખોડીયારમાની નવેળીની પાછળ આવેલા રણમાં સૂરજ દરરોજ આથમતો. પરંતુ, મારા ગામ પાસે કદાચ ડૂબતા સૂરજની આભાને પામવાની ઝાઝી ફુરસદ નહી હોય. રેવાશંકર ગોર અમારા રામજી મંદિર ના કમાડ ઉઘાડી ને સંધ્યા આરતી ની તૈયારીમાં લાગી જતા. સૂરજ ડૂબે અને સહેજ અજવાળું ઘટતું અને અંધારાની શરૂઆત થતી. ગામની શેરીમાં ચહલ પહલ સહેજ વાર માટે વધી જતી. કોઈ અમુશેઠની કરીયાણાની દુકાને જોઈતું કારવતું લેવા માટે જતા. અગરબત્તી, બાક્સ, મરચા-મસાલા ને પરચુરણ વસ્તુ માટે એ સમયે સહેજવાર માટે તેમની ઘરાકી વધી જતી. અને આરતી ટાણું થઈ જતું અને ગામના ચોકમાં રામજી મંદિરમાં નગારા ઉપર દાંડી અને ઝાલર ઉપર મોગરીના પ્રહાર થી એક અનોખું વાતાવરણ આકાર લેતું. આ બધી રોજિંદી ઘટના હતી. આરતી વેળાએ મંદિરમાં ગણ્યા-ગાંઠ્યા લોકો હોય. પણ, ગામલોકો આરતી પુરી થાય ત્યાં સુધી રાહ જોતા… ને આરતી પુરી થાય એટલે વાળુંટાણું આવી પહોંચતું. ચૂલા ઉપરથી ગરમ રોટલા ઉતરતા અને ખીચડી અને દૂધ કે છાસ નું સહુ વાળું કરતા. વાળુંનો વખત પૂરો થાય એટલે ગૃહિણી શેરીના નાકે ચાટમાં કૂતરા માટે ખાવાનું નાખવા આવતી. આ બધું જ રોજીંદુ અને સહજ હતું. માણસ હોય કે પશુ સહુનું જીવન એકબીજા સાથે ગૂંથાયેલું હતું. અજગર કરે ન ચાકરી પંછી કરે ન કામ દાસ મલું એમ કહે સબકા દાતા રામ….. મંદિરમાંથી સમૂહમાં ચોપાઈ અને દોહરા સંભળાતા. થોડીવાર માટે આરતી પછી ધૂન-કીર્તન પણ થતા. વાળું- પાણી થઈ ગયા પછી સહુ હળવાશ અનુભવતા. શેરીમાં બે ઘડી ગૃહિણીઓ ભેગી થઈને વાતો કરતી. કોઈ મહેમાન પરોના હોય તો એક બીજાને ઘેર થોડીવાર માટે બેસવા લઈ જવામાં આવતા. રાતના સાડા નવ આસપાસનો સમય થતો અને મંદિરની પોઢણ આરતી થતી. મોટાભાગે લોકો પરિશ્રમી હોવાથી સુઈ જતા. કેટલાકને મોડે સુધી જાગવાની ટેવ હોય એ ચોકમાં કે ગામ ભાગોળે મોડે સુધી બેસતા અને અલકમલકની વાતો કરતા. આ મારા ગામની સાંજ હતી. તેમાં ચમત્કૃતિ જેવું કશુંજ ભલે ન હોય. પણ, નિયમિતતા હતી. ક્યારેક કોઈનું સાંજ વેળાએ અવસાન થાય અને તેનો મૃતદેહ ઘરમાં હોય. એ વેળાએ મારુ ગામ વાળું નહોતું કરતું. ભલે રાંધેલું રઝળે. પણ, એ પરિવારના દુઃખમાં જીવ પરોવીને સહભાગી થતા. તેદી પૂજારી પણ રામજી મંદિરની ઝાલર નહોતા રણકાવતા… આખું ગામ એક તાંતણે બંધાયું હોય તેવું પરિવાર હતું. અને આ ગામ પરિવારે એક જણ ગુમાવ્યાનો વસવસો એ રાતના અંધારાને વધારે ઘેરો બનાવતો..

# આલેખન : અંબુ પટેલ
.—————————–
.
અતીતની યાદ……
—————————

Posted in संस्कृत साहित्य

૧ ) બીલી નું ઝાડ મહાદેવ સ્વરૂપ છે ૨) બિલી ની સેવા કરવાથી શ્રી લક્ષ્મી ની પ્રાપ્તિ થાય છે ૩)બિલી નો કાંટો વાગવા થી મુત્યુ ની પીડા હરાય છે ૪)બિલી ની પ્રદક્ષિણા કરવાથી અડસઠ તીર્થોમાં પ્રદક્ષિણા કરવાનું પુણ્ય મળે છે ૫) નાના મોટા જીવ જંતુ જાણે અજાણે મારિયા હોય તો બિલી ની પ્રદક્ષિણા થી જ એ પાપ ધોવાય છે ૬) બિલી ના ઝાડ નીચે શિવપુરાણ વચવાથી અક્ષય પુણ્ય મળે છે ૭)બિલી ના ઝાડ ને પાણી પીવડાવવા થી શિવ જી ના અભિષેક જેટલું જ પુણ્ય મળે છે ૮)બિલી ના ઝાડ નીચે દીવો કરવાથી તત્વજ્ઞાન મળે છે આધ્યાત્મિક તત્વજ્ઞાન , મુડતત્વ ની પાપ્તી થાય છે ૯) આ મુત્યુ લોક માં જેના ઘરે બિલી છે એને જ પવિત્ર માનવામાં આવી યા છે તેના ઘરે અડસઠ તીર્થો
બિરાજમાન છે ૧૦) બિલી ના ઝાડ નીચે પ્રાથીવ શિવલિંગ/માટી નું શિવલિંગ બનવાનો ખુબ મહિમા છે ૧૧)બિલી ના ઝાડ ની નીચે જે ઓમ નમઃ શિવાય મહા મંત્ર ની માળા કરે છે તો જેટલા બિલી ના પાન છે તેટલા પાન મહાદેવ ને ચડાયા હોય એટલું પુણ્ય મળે છે ૧૨)કોઈ પણ માળા ને સિદ્ધ કરવી હોય તો બિલી ના ઝાડ નીચે જાપ કરવો જ જોઈએ શિવાલય માં જાપ થતાં હોય તો પણ ૩ વાર તો બિલી ના ઝાડ નીચે જાપ કરવો જ જોઈએ ૧૩) બિલી નું જંગલ જે લોકો બનાવે છે ભવો ભવ શ્રી લક્ષ્મી ની પ્રાપ્તી થાય છે ૧૪) બિલી ના ઝાડ ને સ્પર્શ કરવા માત્ર થી અઘોર પાપો માંથી મુક્તિ મળે છે ૧૫)બિલી ના ઝાડ ના પાન એ જ તોડી શકે છે જેને વાવિયું છે જેને ઉછેરિયું હોય એને પણ તોડવાનો અધિકાર નથી ( શિવ રહસ્ય) જે વાવે એ જ તોડે ૧૬) જે દિવસે જીવ જંતુ ને મારિયા હોય એ દિવસે બિલી ની ૧૦૮ પ્રદક્ષિણા થી એ પાપ થી મુક્ત થઈ શકાય છે ૧૭) બિલી નું ઝાડ એ મહાદેવ સ્વરૂપ હોવાથી દરશન કરવાથી એ દિવસે ના પાપ ધોવાઇ જાય છે ૧૮) જેને આ ધરતી પર બિલી વાવી યા છે તેમને મહાદેવ ની દુનિયા માં વિશ્વ કલ્યાણ નું કામ કર્યું છે અને વિશ્વ કલ્યાણ એ જ શિવ નો સંકલ્પ છે જે થી એ જીવ ને શિવ પદ ની પ્રાપ્તિ થાય છે ૧૯) બિલી ના ઝાડ નીચે શિવ ભક્ત ને જમાડવા થી દ્રારિદ્ર નો નાશ થાય છે ૨૦) બિલી ના ઝાડ નીચે સૂવાથી કાલ રાત્રિ સુધરે છે ૨૧)બિલી ના ઝાડ નીચે ભોજન કરવાથી કાતો કરાવાથી ૬૮ તીર્થ માં ભોજન કરવાનું પુણ્ય મળે છે ૨૨) જે લોકો જ્યોતિર્લિંગ ની યાત્રા કરવામાં ( વૃદ્ધ લોકો )અસફળ હોય તે જીવ એ બિલી નો આશ્રય લેવો જોઈએ અને જે ઘર ની બિલી ની છાયા નીચે હોય તે ઘર ઘર નથી તીર્થ છે જીવ નું ખાવું પીવું સૂવું (જે ના ઘરે બિલી હોય )બિલી નીચે રાખવા માત્ર થી તીર્થો નું પુણ્ય મળે છે ૨૩) દેવતાઓ પણ બિલી ના ઝાડ ની સ્તુતિ કરે છે ૨૪) બિલી ના ઝાડ ના ક્યારા ને પાણી થી ભરી દેવાથી અને દીવો કરવાથી મહાદેવ મહાદેવ રાજી થાય છે ૨૫)બિલી ના ઝાડ નીચે થી શબ યાત્રા નીકળે તો જીવ મુક્ત થાય છે ૨૬) માત્ર ૧ જ બિલી વાવવાથી ૧ કરોડ શિવ મંદિર નિર્માણ નું પુણ્ય મળે છે ૨૭) શિવમંદિર માં પખાલ થઈ ગઈ હોય તો બિલી ના ઝાડ ને પાણી અર્પણ કરી દેવું જે મહાદેવ ને ચડાયા બરાબર છે ૨૮) બ્રહ્મા વિષ્ણુ મહેશ ત્રિદેવ બિલી માં બિરાજમાન છે ૨૯)બિલી ના વૃક્ષ ને શ્રી વૃક્ષ કેહવાય છે ૩૦) જો (શક્ય હોય તો )જીવન માં ૧ વાર બિલી ના જંગલ માં ઝુપડું બનાઈને( ૩,૫ ,૧૧ રાત્રિ )રેહવું જેથી ભવે ભવઃ ના તમામ અઘોર પાપો માંથી મુક્તિ મળે છે અને શિવ પદ મળે છે (શિવ રહસ્ય )👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻🕉️નમ:શિવાય 🕉️ નમ : શિવાય 🕉️ નમ : શિવાય 🚩🚩🚩🚩🚩🙏🏻દેવો કે દેવ મહાદેવ 🙏🏻🚩🚩🚩🚩🚩

રાજન મત્રોજા

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

गाँव की बेटी
————–
रुचि सामान लेकर स्टेशन से बाहर निकली।उसका गाँव जिसे दस बरस पहले माता -पिता के साथ छोड़ कर गयी थी-कितना बदल गया था ! माता-पिता तो इन दस बरस में कई बार गाँव आये पर वो दस बरस बाद आयी।
शहर में नौकरी जॉइन करने से पहले गाँव में ताऊ जी से मिलने का मन हुआ।
स्टेशन से बाहर निकली तो सामने कई रिक्शा वाले दिखे।एक रिक्शे वाले से बात की और सामान रखकर उसमें बैठ गयी। रिक्शा चल पड़ा।
रुचि महसूस कर रही थी की गाँव बहुत बदल गया है।
रुचि रिक्शा वाले को गौर से देख रही थी।
“ बाबा,आपको पहचानने की कोशिश कर रही हूँ। लगता है कहीं देखा है।”
“बिटिया,तनिक अपनी कुछ पहचान बताओ।हो सकता है हमहुँ कछु याद दिलाय दें l”
“बाबा,वो गाँव के पुराने प्रधान बिसेसर राम जी हैं न।वो मेरे ताऊ जी हैं।”
“अच्छा-अच्छा याद आया तुम रामेश्वर की बिटिया हो, जो बहुत पहले शहर चले गए थे।”
“हाँ बाबा, पर आप ?”
“बिटिया हमहुँ के नाहीं पहचानी का?”
“अरे हम रमननाथ हैं। कितनी छोटी सी थीं तुम!हमरी रधिया के साथ हमरे आँगन में खेला करतीं थीं।”
“ हाँ हाँ याद आया।आप रधिया के पिताजी हो।रधिया कैसी है? और आपका तो बड़ा मकान,खेत था।अब ये रिक्शा ?”
रुचि के स्वर में दुख मिश्रित आश्चर्य था।
“सब भाग्य का फेर है बिटिया।रधिया का ब्याह हुई गया। हमार बिटवा विदेश गया तो कभी पलट कर लौटा नहीं।तुमरी काकी को पाँच बरस पहले भयंकर बीमारी हुई।लम्बा इलाज,खेत सब बिक गए।मकान का एक हिस्सा भी बिक गया।”
रमननाथ ने रिक्शा चलाते हुए आपबीती बयान की, गमछे से भर आयीं आँखों को पोंछा।
“काका बहुत दुख हुआ जानकर।अब काकी कैसी हैं ?”
“ठीक है बिटिया।बीमारी से तो ठीक हो गयी पर बेटे ने अंदर से मार दिया।”
“काका, काकी से मिलने जरूर आउंगी।”
“आना बिटिय।लो बिसेसर जी का मकान भी आ गया।”
रुचि रिक्शा से उतरी।रमननाथ ने सामान उतारने में मदद की।
“लो काका पैसे।”
“क्या बिटिया,शहर जा कर गाँव के रिवाज भूल गयीं का? बहुत कुछ बदल गया है पर गाँव में आज भी बेटियों से पैसे नहीं लेते।”
मुस्कुराते हुए रमननाथ ने रुचि के सिर पर हाथ रख कर कहा।
डॉ संगीता गाँधी.