Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक दिन सुबह सुबह दरवाजे की घंटी बजी । दरवाजा खोला तो देखा एक आकर्षक कद- काठी का व्यक्ति चेहरे पे प्यारी सी मुस्कान लिए खड़ा है ।

मैंने कहा, “जी कहिए..”

तो उसने कहा,

अच्छा जी, आप तो रोज़ हमारी ही गुहार लगाते थे,

मैंने कहा

“माफ कीजिये, भाई साहब ! मैंने पहचाना नहीं, आपको…”

तो वह कहने लगे,

“भाई साहब, मैं वह हूँ, जिसने तुम्हें साहेब बनाया है… अरे ईश्वर हूँ.., ईश्वर.. तुम हमेशा कहते थे न कि नज़र मे बसे हो पर नज़र नही आते.. लो आ गया..! अब आज पूरे दिन तुम्हारे साथ ही रहूँगा।”

मैंने चिढ़ते हुए कहा,

“ये क्या मज़ाक है?”

“अरे मज़ाक नहीं है, सच है। सिर्फ़ तुम्हे ही नज़र आऊंगा। तुम्हारे सिवा कोई देख- सुन नही पायेगा, मुझे।”

कुछ कहता इसके पहले पीछे से माँ आ गयी.. “अकेला ख़ड़ा- खड़ा क्या कर रहा है यहाँ, चाय तैयार है , चल आजा अंदर..”

अब उनकी बातों पे थोड़ा बहुत यकीन होने लगा था, और मन में थोड़ा सा डर भी था.. मैं जाकर सोफे पर बैठा ही था, तो बगल में वह आकर बैठ गए। चाय आते ही जैसे ही पहला घूँट पिया मैं गुस्से से चिल्लाया,

“अरे मां..ये हर रोज इतनी चीनी ?”

इतना कहते ही ध्यान आया कि अगर ये सचमुच में ईश्वर है तो इन्हें कतई पसंद नही आयेगा कि कोई अपनी माँ पर गुस्सा करे। अपने मन को शांत किया और समझा भी दिया कि ‘भई, तुम नज़र में हो आज… ज़रा ध्यान से।’

बस फिर मैं जहाँ- जहाँ… वह मेरे पीछे- पीछे पूरे घर में… थोड़ी देर बाद नहाने के लिये जैसे ही मैं बाथरूम की तरफ चला, तो उन्होंने भी कदम बढ़ा दिए..

मैंने कहा,

“प्रभु, यहाँ तो बख्श दो…”

खैर, नहा कर, तैयार होकर मैं पूजा घर में गया, यकीनन पहली बार तन्मयता से प्रभु वंदन किया, क्योंकि आज अपनी ईमानदारी जो साबित करनी थी.. फिर आफिस के लिए निकला, अपनी कार में बैठा, तो देखा बगल में वह पहले से ही बैठे हुए हैं।
सफ़र शुरू हुआ तभी एक फ़ोन आया, और फ़ोन उठाने ही वाला था कि ध्यान आया, ‘तुम नज़र मे हो।’

कार को साइड मे रोका, फ़ोन पर बात की और बात करते- करते कहने ही वाला था कि ‘इस काम के ऊपर के पैसे लगेंगे’ …पर ये तो गलत था, : पाप था तो प्रभु के सामने कैसे कहता तो एकाएक ही मुँह से निकल गया,”आप आ जाइये । आपका काम हो जाएगा, आज।”

फिर उस दिन आफिस मे ना स्टाफ पर गुस्सा किया, ना किसी कर्मचारी से बहस की 25 – 50 गालियाँ तो रोज़ अनावश्यक निकल ही जाती थी मुँह से, पर उस दिन सारी गालियाँ, ‘कोई बात नही, इट्स ओके…’ में तब्दील हो गयीं।

वह पहला दिन था जब क्रोध, घमंड, किसी की बुराई, लालच, अपशब्द , बेईमानी, झूठ ये सब मेरी दिनचर्या का हिस्सा नही बनें।

शाम को आफिस से निकला, कार में बैठा, तो बगल में बैठे ईश्वर को बोल ही दिया…

“प्रभु सीट बेल्ट लगा लें, कुछ नियम तो आप भी निभायें… उनके चेहरे पर संतोष भरी मुस्कान थी…”

घर पर रात्रि भोजन जब परोसा गया तब शायद पहली बार मेरे मुख से निकला,

“प्रभु, पहले आप लीजिये ।”

और उन्होंने भी मुस्कुराते हुए निवाला मुँह मे रखा। भोजन के बाद माँ बोली,

“पहली बार खाने में कोई कमी नही निकाली आज तूने। क्या बात है ? सूरज पश्चिम से निकला है क्या, आज?”

मैंने कहाँ,

“माँ आज सूर्योदय मन में हुआ है… रोज़ मैं महज खाना खाता था, आज प्रसाद ग्रहण किया है माँ, और प्रसाद मे कोई कमी नही होती।”

थोड़ी देर टहलने के बाद अपने कमरे मे गया, शांत मन और शांत दिमाग के साथ तकिये पर अपना सिर रखा तो ईश्वर ने प्यार से सिर पर हाथ फिराया और कहा,

“आज तुम्हे नींद के लिए किसी संगीत, किसी दवा और किसी किताब के सहारे की ज़रुरत नहीं है।”

गहरी नींद गालों पे थपकी से उठी…

“कब तक सोयेगा .., जाग जा अब।”

माँ की आवाज़ थी… सपना था शायद… हाँ, सपना ही था पर नीँद से जगा गया… अब समझ में आ गया उसका इशारा…

“तुम नज़र में हो…।”

जिस दिन ये समझ गए कि “वो” देख रहा है, सब कुछ ठीक हो जाएगा. सपने में आया एक विचार भी आंखे खोल सकता है।

बस हमेशा याद रखो कि…..

हम सांसारिक कैमरे की नहीं बल्कि प्रभु के कैमरे की नजर में हर समय हैं।।

आप कैमरे के नजर से बच सकते हो मगर अपने कर्म के फल से नही बच सकते।।

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🙏🌹 *सेवा का फल* 🌹🙏

*अपनी 8 वर्षीय पुत्री को स्कूल से घर वापस लाने के लिए मैं स्कूल के गेट पर पहुंच गया था , जूनियर के.जी.के छात्र 10 मिनट बाद बाहर आना शुरू करते हैं , जबकि सीनियर छात्र 10 मिनट पहले .*

*गेट पर अभिभावकों की भीड़ लगी थी . एकाएक तेज़ बारिश शुरु हो गई ! “सभी ने अपनी अपनी छतरी तान ली .*

*मेरे बगल में एक सज्जन बिना छतरी के खड़े थे , मैंने शिष्टाचारवश उन्हें अपनी छतरी में ले लिया . गाड़ी से जल्दी जल्दी में आ गया छतरी नहीं ला सका ,, उन्होंने कहा . कोई बात नहीं ऐसा अकसर हो जाता है , मैंने कहा .*

*जब उनका बेटा रेन कोट पहने निकला तो मैंने उन्हें छतरी से गाड़ी तक पहुंचा दिया . उन्होंने मुझे गौर से देखा और धन्यवाद कह कर चले गये .*

*कल रात में नौ बजे पाटिल साहब का बेटा आया और बोला… अंकल बेबी (उसकी छ:माह की बेटी ) की तबीयत बहुत ख़राब है , उसे डाक्टर के पास ले चलना है . अंधेरी बरसाती रात में जब डाक्टर के यहां हम लोग पहुंचे तो दरबान गेट बंद कर रहा था .*

*कम्पाऊंडर ने बताया कि डॉ. साहब लास्ट पेशेंट देख रहे हैं और अब उठने ही वाले हैं . अब सोमवार को ही अगला नम्बर लग पायेगा .*

*मैं कम्पाऊंडर से आज ही दिखाने का आग्रह कर ही रहा था कि डाक्टर साहब चेम्बर से घर जाने के लिए बाहर आये . मुझे देखा तो ठिठक गये और फिर बोले – अरे ! आप आये हैं ? बोलिये भाई साहब – क्या बात है ?*

*कहना नहीं होगा कि डाक्टर साहब वही सज्जन थे जिन्हें स्कूल में मैंने सिर्फ़ छतरी से गाड़ी तक पहुंचाया था . डाक्टर साहब ने बच्ची से मेरा रिश्ता पूछा . मेरे मित्र पाटिल साहब की बेटी है , हम लोग एक ही सोसायटी में रहते हैं , मैंने बताया .*

*उन्होंने बच्ची को देखा . कागज़ पर दवा लिखी और कम्पाऊंडर को हिदायत दी – यह इंजेक्शन बच्ची को तुरंत लगा दो और दो तीन दिन की दवा अपने पास से दे दो , मैंने एतराज़ किया तो बोले -अब कहां इस बरसाती रात में आप दवा खोजते फिरेंगे सर ? कुछ तो अपना रंग मुझ पर भी चढ़ने दीजिये ! !!*

*बहुत कहने पर भी डॉ. साहब ने ना फीस ली, ना दवा का दाम और अपने कम्पाउंडर से बोले -ये हमारे मित्र हैं, ये जब भी आयें तो इन्हें आने देना और वे हमें गाड़ी तक पहुंचाने आये .*

*निःस्वार्थ सेवा करते रहिये , शायद आपका रंग औरों पर भी चढ़ जाये ! निःस्वार्थ और निष्काम भाव से की गई छोटी सी सेवा भी कभी व्यर्थ नहीं जाती।
🙏🙏🙏🙏🙏

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कल मुझ से एक युवक प्रश्न कर रहा था… उसने सहज भाव से पूछा…

शर्मा जी… क्या सच में संसार के स्वामी चार महीने के लिए सो गये…

मैंने कहा… क्यों ? कोई शक…
युवक ने कहा-नहीं.. लेकिन यह भगवान विष्णु जगत के रचयिता हैं… और सोगये…. और वह भी चार महीने के लिए…. ब्रह्मांड के मामले कैसे चलेंगे…
मैने कहा-आपके
देश का प्रधानमंत्री एक हफ्ते के लिए विदेश चला जाता है…तो देश का कारोबार ठप हो जाता है?….अगर किसी एक कंपनी का अध्यक्ष एक महीने के लिए चला जाए तो क्या कंपनी नहीं चलती?

युवक ने कहा कि वो तो किसी को सत्ता सौंपके जाते है….

मैंने कहा कि इस दुनिया के मालिक भी सत्ता सौंप के जाते हैं…..

जगत के नाथ के सोते ही गुरु शक्ति जाग्रत हो जाती है….गुरु पूर्णिमा उत्सव आपको विश्वास दिलाता है कि… आपका ध्यान रखने के लिए गुरू परम्परा बैठी है …..जाग्रत है…

और फिर श्रावण मास में भगवान महादेव आपका ध्यान रखने को तैयार हैं….

श्रावण समाप्त होते ही विघ्नहर्ता गणेश की सवारी आ जाती है…. गणेशजी जब कैलाश जाते हैं तो आपके पितरों का उत्सव चालु होता है….तुम्हारे पिता तुम्हारा ध्यान रखते हैं….

पितृ उत्सव पूरा होते ही …. आद्य शक्ति माँ जगदम्बा शेर पर सवार होकर आती हैं…

और दिवाली पर… सरस्वती… लक्ष्मी…. और महाकाली तुम्हारा ख्याल रखती हैं….

और तुम तैयार हो जाते हो… देव- दिवाली का उत्सव धूमधाम से मनाने के लिए… क्योंकि जग का नाथ जाग गया है….

इस चातुर्मास में गुरु परंपरा आपको लगातार जाग्रत रखती है।

आप जाग्रत रहना… भगवान आपकी देखभाल करने के लिए आपके हृदय-कमल में ही बैठे हैं….!

हर हर महादेव🚩
सुप्रभात🙏🙏🙏

हरीश शर्मा