Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🍁सास बहू संबंध🍁
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पुत्रवधू का व्यवहार ऐसी हो कि सास ससुर गर्व करें!!

मैं पुनि पुत्रवधू प्रिय पाई।
रूप राशि गुन शील सुहाई।।

अपने प्राणपति श्रीराम जी के वनवास सुनकर सीता जी अपनी सासु माँ के शरण लेती हैं और सिर झुका कर नेत्रों से जलधार बहा रही हैं। उनकी व्याकुलता कौशल्या जी से सहन नहीं होता अतः वे पुत्र श्रीराम जी से विनती करती हैं कि- हे राम सुनो! मेरी प्यारी पुत्रवधू सीता बहुत सुकोमल है। इनका स्वभाव ऐसी है कि ये सास ससुर के साथ साथ परिवार के सभी सदस्यों को प्रिय हैं।

तात सुनहु सिय अति सुकुमारी। सास ससुर परिजनहि पिआरी।।

ये मेरी प्यारी पुत्रवधू अपने स्वभाव से परिजनों पर अमिट छाप छोड़ दी है।
हे राम! मैं सीता को पुत्रवधू के रूप में पाकर परम धन्य हो गई हूँ।
क्या विशेषता है जो सीता जी सभी को प्रिय हैं….
पुत्रवधू चयन करने वालों को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए…

१. रूप राशि- जब श्रीराम जी जनकपुर के पुष्प वाटिका में सखी संग सीता जी को देखे…
प्रभु जब जात जानकी जानी। सुख सनेह शोभा गुन खानी।।
१.सुख- प्रसन्नचित्त रहने वाली बहु हो , न तो आजकल बात बात पर मुँह लटकाने वाली बहुओं की भरमार है।

२. सनेह- पति, सास, ससुर, परिजन सभी से स्नेह रखने वाली बहु हो। जो जिस सम्मान के योग्य हैं उसे सम्मान दे।

३. शोभा- केवल बाह्य सुंदरता ही शोभा नहीं है और न तो आजकल की सभी नहीं परंतु बहुतेरे बहुएँ देखने में सुंदर किन्तु शील में कैसी हैं यह सर्व विदित है।

४.गुन खानी- सीता हरण समय भी श्रीराम जी को सीता जी के गुण याद आते हैं…हा गुन खानी जानकी सीता।
हमेशा शीतल स्वभाव रखने वाली बहु रहना चाहिए।
सीता जी वनवास में भी कौशल्या जी को छोड़िए कैकेई को भी अपने सेवा से अपने अधीन कर लीं…सीय सासु प्रति बेष बनाई। सादर करइ सरिस सेवकाई।।
सरिस- माता कौशल्या जी हों या वनवास देने वाली कैकेई सभी से सम भाव
सियँ सासु सेवा बस किन्हीं। तिन्ह लहि सुख सिख आसिष दीन्हीं।।
सेवा के फलस्वरूप आशीर्वाद मिला, शिक्षा मिली।
और कैकेई आत्मग्लानी में डूब गई…

लखि सिय सहित सरल दोउ भाई। “कुटिल रानी ” पछितानि अघाई।।
(काश! दहेज लोभी इन सभी पर ध्यान देते!!!!)

सास पुत्रवधू के स्नेह रूपी रस्सी से बँध गई हैं अतः उन्हें पुत्रवधू में सद्गुण क्यों न दिखाई देंगे।
जय रामजी की!!

सिताला दुबे

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