Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🙏प्रसाद🙏

अनभिज्ञता में हम कहीं दरिद्रता तो नहीं लेकर जा रहे ??

सभी की आँखें खोलने के लिए ये संदेश है… जो मंदिर/ गुरुद्वारा से लंगर- भंडारा को अपने घर बांध बांध कर ले जाते हैं..!!

एक बार गुरु देव जी एक नगर को गए। वहाँ सारे नगर वासी इकठे हो गए।

वहाँ एक महिला भक्त श्री गुरु देव जी से कहने लगी- महाराज! मैंने तो सुना है, आप सभी के दुःख दूर करते हो। मेरे भी दुःख दूर करो, मैं बहुत दुखी हूँ। मैं तो आप के मंदिर में रोज 50 रोटी अपने घर से बना कर बाँटती हूँ, फिर भी दुखी हूँ।

ऐसा क्यों ? गुरु देव जी ने कहा- कि तू दुसरों का दुःख अपने घर लाती हो, इस लिए दुखी हो। वो कहने लगी – महाराज! मुझे कुछ समझ नहीं आया, मुझ अज्ञानी को ज्ञान दो। गुरु देव जी कहने लगे- तू 50 रोटी मंदिर द्वार में बांटती तो हो… पर बदले में क्या ले जाती हो ? वो कहने लगी- सिर्फ आप के भंडारे में बंट रही प्रसाद के सिवा और कुछ भी नहीं।

गुरु देव जी कहने लगे- लंगर या भंडारा का मतलब है एक रोटी खाना और अपने गुरु या भगवान का कृतज्ञता मानना। पर तू तो रोज बड़ी- बड़ी थैलियों में दाल मखनी , मटर पनीर, रायता, खीर और 15- 20 रोटी भर- भर के ले जाती हो। तीन दिन वो लंगर अर्थात प्रसाद तेरे घर में रहता है।

तू अपने घर में सभी परिवार को वो खिलाती हो। तू नहीं जानती कि भगवान और गुरु के घर की रोटी के एक टुकड़े में भी भगवान जी की वो ही कृपा रहती है, जितना भगवान जी के भंडारे में होती है।

तू कहती है मेरे बच्चे घर पर हैं उनके लिए, मेरे पोतों के लिए, मेरी बहू के लिए, मेरे बेटे के लिए इन सब के लिए भरपूर भंडारा, लंगर ले जाना है। सब को ये कहकर तू भर – भर कर लंगर/ प्रसाद अपने घर ले जाती है। पर तू ये नहीं जानती कि मंदिर में इस लंगर को चखने से कितनों के दुःख दूर होने थे।

पर तूने अपने सुख के लिए दुसरों के दुख दूर नहीं होने दिए। इसी लिए तू उनके सारे दुख अपने घर ले जाती हो और दुखी रहती हो। तेरे दुख तो दिन दुगने रात चौगुने बढ़ रहे हैं। उसमें हम क्या करें बता ? उसकी आँखों से अंधकार हट गया।

वो जोर से रोने लगी और बोली- महाराज मैं अंधकार में डूबी थी। मुझे क्षमा करो, अपने चरणों से लगाओ। अब से मैं एक ही चम्मच का लंगर करूंगी। गुरु देव जी ने समझाया कि इंसान अपने दुःख खुद खरीदता है, पर उसे कभी पता नहीं चलता।

इसलिए लंगर में अपनी भूख जितना ही खाना चाहिए और लंगर प्रसाद को भर भर कर घर कभी नहीं लाना चाहिए। प्रसाद का एक कण भी कृपा से भरपूर होता है। इसलिए ध्यान अवश्य रखें।। भंडारे का प्रसाद घर लाना दरिद्रता को लाना होता है।।
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!!जय श्री कृष्णा राधे राधे!!

हरीश शर्मा

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