Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*


*💐💐परमात्मा पर भरोसा💐💐*


एक राजा था उसका एक मंत्री था , जिसका नाम जय सिंह था। वह बहुत बुद्धिमान तथा समझदार था।
एक बार राजा के राज्य पर साथ वाले राज्य ने आक्रमण कर दिया। वह बहुत दुखी हुआ। वह अपनी जान बचाने के लिए गुप्त मार्ग से अपने मंत्री के साथ जंगल में पहुंच गया । उसके मंत्री को चाहे कोई दुख हो या सुख हो वह हमेशा यही कहता कि परमात्मा जो करता है अच्छा ही करता है। परंतु राजा को यह बात अच्छी ना लगती । इसलिए जब भी वह मंत्री के मुख से यह बात सुनता तो जल भुन जाता । अब जब मंत्री और राजा अपनी जान बचाकर जंगल में पहुंचे तो मंत्री मन ही मन परमात्मा को धन्यवाद दे रहा था। उसने राजा से कहा- राजन! घबराने की क्या जरूरत है ,ईश्वर पर भरोसा रखो वह जो भी करता है अच्छा ही करता है ।हमारी पराजय का कोई भेद होगा। जो हमें अभी तक पता नहीं चल रहा है। राजा इस आशापूर्ण उत्तर से जल भुन गया । उसने मंत्री से कहा- तुम्हारा परमात्मा कितना निर्दयी है उसने मेरा राजपाट ताज- तख्त सभी कुछ मुझसे छीन लिया।
बातें करते काफी समय बीत गया। अंधेरा छाने लगा और फिर वर्षा भी होने लगी। मौसम में एकदम ठंड छा गई। उन्हें सर्दी पीड़ा दे रही थी। उन्होंने आग जलाई परंतु बौछार के साथ ही वह भी बुझ गई । तभी राजा फिर भड़क कर मंत्री से कहा- तुम्हारा भगवान कितना निर्दयी है। उसे हम पर जरा भी तरस नहीं आता। इतने में उन्हें घोड़ों के टापू का स्वर सुनाई दिया। सिपाही घोड़ों पर बैठकर उनकी तरफ आ रहे थे। दुश्मनों के सिपाहियों को देखकर राजा का बुरा हाल हो रहा था । लेकिन अंधेरा होने के कारण राजा और मंत्री के घोड़े दिखाई ही नहीं दिए । तभी उनमें से एक ने कहा – जल्दी ढूंढो वह यहीं कहीं छुपे होंगे। दूसरे ने कहा – जल्दी करो कल उन दोनों को फांसी दे दी जाएगी और हमें बहुत सारा इनाम मिलेगा। लेकिन वे सैनिक राजा और मंत्री को ना ढूंढ सके और अपना सा मुंह लेकर वापस चले गए।

इस तरह राजा और मंत्री की जान बच गई। तभी मंत्री ने राजा से कहा महाराज अब तो आपको ईश्वर पर भरोसा हो गया होगा कि परमात्मा जो भी करता है अच्छा ही करता है। यदि भगवान की कृपा से वर्षा न होती तो सिपाही आग की रोशनी में हमें ढूंढ लेते और कल हमें फांसी हो जाती। अब राजा अपने समझदार भक्त मंत्री की बातें सुनकर बहुत प्रभावित हुआ । अब उसे परमात्मा पर विश्वास हो गया उधर उसके राज्य में अचानक प्राकृतिक आपदाएं आई। राजमहल में बैठा दुश्मन राजा महल के मलबे में दबकर ही मर गया। चारों ओर हाहाकार मच गई। उधर मंत्री और राजा दोबारा अपने राज्य में चले गए बिना लड़े भिड़े ही उन्हें राज्य पुनः प्राप्त भी हो गया।



*💐💐प्रेषक अभिजीत चौधरी💐💐*



*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

Posted in काश्मीर - Kashmir, छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

*The Kashmir Files*
विवेक बाबू दिल चीरकर कोई रखता है क्या ? आपने कश्मीर के दर्द को सुना नहीं है बल्कि उसके सीने से दर्द बाहर खींच लिया है। जो पिछले 30 सालों से दफन था ।

कश्मीर की उस काली रात के रहस्य व कश्मीरी पंडितों के दर्द को लेखक-निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने अपने सहयोगी लेखक सौरभ एम पांडे के साथ मिलकर झंकझोर देने वाला और सच को खींचकर बाहर लाने वाली स्क्रिप्ट व स्क्रीन प्ले दिया है । हर फ्रेम चीख रही है। सीधे दिल से कनेक्ट कर रही है।

विवेक की कहानी कृष्णा पंडित को केंद्र में रखकर कश्मीर जाती है और ब्रह्म दत्त, विष्णु राम, डीजीपी हरि नरेन, डॉक्टर, राधिका मेनन आदि महत्वपूर्ण किरदारों को उठाती है। इत्मीनान से पुष्कर पंडित को सुनती है। इतने सालों से दफन तर्क व असल सच को पटक कर रख देती है ।

पुष्कर पंडित की सच्चाई का अंत इतना भयावह है कि कमज़ोर दिल वाले दर्शक आँखें बंद कर लेंगे। देखा न जाएगा।

विवेक ने जनवरी 1990 से अगस्त 2019 तक के सफर को अच्छे से समेटा है। उनकी कहानी वर्तमान और अतीत में कैद कश्मीरी पंडितों के अश्रुओं की ‘डल’ में गोते लगाती निकलती है। विवेक ने कहानी व किरदारों को डायलॉग भी काफ़ी इम्प्रेसिव दिए है। कुछ डायलॉग तो अपने आस-पास सुने होंगे।

वाक़ई डायलॉग दिल से निकले है बल्कि पूरी दास्तां।

*कश्मीर को जन्नत कहते है और वे लोग कश्मीर को जहन्नुम बनाकर जन्नत के लिए जिहाद करते है*

*जो सच को न दिखा सके। उन्हें जर्नलिस्ट नहीं, पोस्टमैन बोला करते है*

*मीडिया आतंकवादियों की रखैल है*

*जब तक सच जूते पहनता है तब तक झूठ दुनिया घूम आता है*

कहानी ऐसे ऐसे सीक्वेंस से सामने आती है। उन्हें देखकर रूह कांप उठती है। पति के खून से सने गेंहू खिलाना हो। इसे देखकर तो बीजीएम भी थम जाता है। उससे भी न देखा गया। एयरफोर्स के अधिकारियों को सरेआम गोली मार देना हो। क्लाइमैक्स ओह्ह….😥

अनुपम खेर ! ब्रिलियंट…. अद्भुत…सॉलिड। इतने वर्षों तक खुद के अंदर से कश्मीरी पंडित को दबाकर रखा था। लेकिन जब पुष्कर पंडित से मिले है न ! सबकुछ सरका दिया है। कुछ न रखा। चेहरे पर जो भाव रहे, बॉडी लेंग्वेज और आंखों के सामने पूरा घटनाक्रम घटते देखते हुए, कुछ न कर पाने की बेबसी…पहली फ्रेम से जुड़ते है। शिव के गेटअप में कमाल…

मिथुन चक्रवर्ती ! ब्रह्म दत्त कश्मीर घाटी में सरकार के मुलाजिम लेकिन लाचार दादा ने रौब दिखलाया है लेकिन दर्दनाक रौब, कुछ न कर पाने का एटीट्यूड…. अपने दोस्त पुष्कर के हालातों को देख जो भाव उठते है। शानदार है।

पुनीत इस्सर ! डीजीपी हरि नरेन से मिले है। ऐसा डीजीपी जो अपने दोस्त को न बचा सका। हालतों को खड़े होकर देखने की तिलमिलाहट गज़ब।

पल्लवी जोशी ! इनकी मुलाकात कॉमरेड राधिका मेनन से हुई है जो जेनएयू में प्रोफेसर है और कश्मीर की आजादी की हिमायती है। जेएनयू में कैसे न्यूट्रल स्टूडेंट्स का ब्रेन वाश किया जाता है और उन्हें भारत के खिलाफ भड़काया जाता है। पल्लवी ने राधिका के साथ मिलकर अच्छे से समझाया है। जो उन लोगों ने इतिहास न पढा है। वो हिस्ट्री है ही नहीं। कश्मीर में सिर्फ़ भटके हुए नौजवान है।

बाक़ी अन्य कलाकारों ने भी अच्छे से किरदारों को पकड़ा है।

सिनेमेटोग्राफी-एडिटिंग- दोनों चुमेश्वरी है। दिल करता है खत्म न हो।

निर्देशन- विवेक….विवेक….आपका अतीत बैक ग्राउंड क्या रहा। कैसा रहा। मुझे कोई फर्क न पड़ता है। इस फाइल्स के लिए ग्रैंड सैल्यूट और स्टैंडिंग ओवेशन….आपकी मेहनत और रिसर्च साफ़ दिखाई दी है। जिन तथ्यों को आपने कुरेदा है न ! इन लोगों की जलनी तय है। साथ ही जेएनयू को अच्छे से दिखलाया है। इनके औद्योगिक क्षेत्रों में बवाल काटेगी। सिर्फ़ ट्रैलर से जलन हुई थी। पूरे कंटेंट का दर्द बर्दास्त न होगा। तभी सब एक सुर में चिल्लाने लगे, प्रोपगैंडा… प्रोपगैंडा…. इस कंटेंट को सिल्वर स्क्रीन पर उतारने के लिए जिगरा चाहिए। जो एक गैर कश्मीरी पंडित में है उसने दिखला दिया। वरना तो सो कोल्ड कश्मीरी पंडित भी कश्मीर जा चुके है और उस दर्द और काली रात को भुलाने की नसीहत दे गए।

सबसे अव्वल आपने जो प्रमोशन डिजाइन किया है। स्मार्ट रणनीति अपनाई है यक़ीन मानिए…. ये कंटेंट कहर काट देगा। इसके रेस्पॉन्स में वर्ड ऑफ माउथ जो है ना ! रिपीट वेल्यू ले चुका है। इसकी गवाही दर्शक दे रहे थे। कि अच्छी फिल्म है दोबारा आएंगे।

सोचकर देखो। केंद्र में गृहमंत्री आंखे बंद करके बैठ गया। राज्य में मुख्यमंत्री चुप रहा। तो ऐसे हालतों में कौन साथ देगा। धर्म बदलो, या भाग जाओ, या फिर मरो। जब सरकारें मौन धारण कर ले। तो इतिहास की क्या मजाल कि वे अपने रहनुमाओं से कलम उठाने को कह दे। इतिहास भी चीखता रहा। कहता रहा। कि कोई तो कुछ लिख दो। इन मासूम कश्मीरी पंडितों की दास्तां। ताकि आने वाली कश्मीरी नस्ले और दुनिया पढ़ सके। कि कैसे इंसानियत शर्मसार हुई थी।

जिन लोगों ने घाटी में कत्लेआम मचाया था। उन्हें पिछली सरकारों ने गले लगाया।

विवेक की जो चिंगारी है ना ! धीरे धीरे बहुत बड़ा धमाका करने जा रही है। वाक़ई ऑस्कर अगर निष्पक्ष है तो इसे अकेडमी हॉल में गूँजने से कोई नहीं रोक सकता है।

हर भारतीय को कश्मीर फाइल्स देखनी/ पढ़नी चाहिए।

*🌹🙏🏻जय जिनेन्द्र🙏🏻🌹*
*🌹पवन जैन🌹*

Posted in हास्यमेव जयते

महान वैज्ञानिक सर आइजैक न्यूटन ने जब अपने आँखों के सामने पेड़ से एक सेव को गिरते देखा तो उन्होंने गुरुत्वाकर्षण के नियम की खोज़ कर डाली…..लेकिन अगर न्यूटन के साथ यही घटना आज के दौर में अपने देश में हुई होती तो हमारे विभिन्न न्यूज़ चैनलों की हैडलाइन संभवतः कुछ इस प्रकार होती…….

…..
आजतक

आज खुलेगा राज अब होगा पर्दाफाश
जानेंगे सेव गिरने का कारण क्या था ख़ास…

….
रिपब्लिक टीवी

क्या न्यूटन के सिर पर मंडरा रहा था काल
या फ़िर सेव गिरने के पीछे पाक की थी कोई चाल…

…..
इंडिया टीवी

एक बार फ़िर पाक हुआ बेनक़ाब
सेव गिराकर बुन रहा है कोई खौफ़नाक ख़्वाब…

…..
एबीपी न्यूज़

कितना बड़ा था सेव , कितना विशाल था पेड़
जानेंगे उस शक़्स से जो वहीं चरा रहा था भेड़…

…..
ज़ी न्यूज़

खौफ़ खाए पाक ने बम के बदले गिराए सेव
हिन्द का सीना हुआ चौड़ा ,जयते सत्यमेव…

……
न्यूज़ 24

चीन की दादागिरी या है ये अमेरिका की मनमानी
जानेंगे न्यूटन के सिर पर सेव गिरने की पूरी कहानी…

……
टीवी 9

आसमान से था वो टपका या फ़िर पेड़ से था गिरा
बताएंगे सेव की पूरी दास्तान, क्या न्यूटन था सिरफिरा…

……
इंडिया न्यूज

आम के पेड़ के नीचे क्यों नहीं सोया न्यूटन
सेव गिरने के बाद कैसे कौतूहल से भरा था उसका मन
कहीं जाइएगा मत छोटे से ब्रेक के बाद जानेंगे टनाटन…

…..
न्यूज़ नेशन

यूं ही गिरा था सेव या पेड़ पर थी कोई आत्मा
स्टूडियो में बैठकर खुलासा करेंगें एक महात्मा…

…..
सहारा समय

क्या था कोई भूत प्रेत डायन चुड़ैल का साया
या सेव ख़ुद ही हताश होकर नीचे चला आया…

……
NDTV

बेबस ग़रीब के सिर पर गिरा सेव आख़िर है किसका ये दोष
फ़िलहाल वो ख़तरे से बाहर लेकिन सरकार के ख़िलाफ़ रोष..

…..
दूरदर्शन

पेड़ के नीचे बैठे एक व्यक्ति के आगे गिरा सेव
ब्रेक के बाद देखेंगे गोबर से खाद बनाने का कलेव…

Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

सम्राट विक्रमदित्य के अरब देशों में किए गए राज के दस्तावेज

टर्की’ देश में एक बहुत पुराना और मशहूर पुस्तकालय है जिसका नाम मकतब-ए-सुल्तानिया है. इस पुस्तकालय के पास पश्चिम एशियाई साहित्य से सम्बंधित सबसे बड़ा पुस्तक संग्रह है. इसी संग्रह में एक किताब संरक्षित रखी गई है.
किताब का नाम है ‘सयर-उल-ओकुल’. इस किताब में इस्लाम के पहले के कवियों और इस्लाम के आने के तुरंत बाद के कवियों का वर्णन किया गया है.

इसीग्रंथ में है ‘सम्राट विक्रमादित्य’ पर आधारित एक कविता.

कविता ‘अरबी’ में है लेकीन उस कविता का हिंदी अनुवाद हम आपके सामने पप्रस्तुत करते हैं.

कविता में मौजूद ये कुछ पंक्तियाँ हैं.
“खुशनसीब हैं वे लोग जो राजा विक्रम के राज में जन्मे,
उदारता और कर्ताव्यप्रायाणता के प्रतीक हैं राजा विक्रमादित्य.
हम, ‘अरबी’ और हमारी ज़मीन अंधकार में फँसी हुई थी लेकिन राजा विक्रम ने हमारी ज़मीन पर अपने दूतों को भेज कर यहाँ फिर से रौशनी का आगमन किया है”.

यह कविता इस बात का सबूत है कि विक्रमादित्य भारत के पहले राजा थे जिन्होंने अरबस्थान में विजय प्राप्त की, राज्य पर और लोगों के दिल पर.

भारत इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज ।
अरब देशों में उज्जयिनी-नरेश शकारि विक्रमादित्य का राज्य था

इस्तांबुल, तुर्की के प्रसिद्ध राजकीय पुस्तकालय ‘मक्तब-ए-सुल्तानिया’ (सम्प्रति मक्तब-ए-ज़म्हूरिया), जो प्राचीन पश्चिम एशियाई-साहित्य के विशाल भण्डार के लिए प्रसिद्ध है, के अरबी विभाग में प्राचीन अरबी-कविताओं का संग्रह ‘शायर-उल्-ओकुल’ हस्तलिखित ग्रन्थ के रूप में सुरक्षित है। इस ग्रन्थ का संकलन एवं संपादन बग़दाद के ख़लीफ़ा हारून-अल्-रशीद के दरबारी एवं सुप्रसिद्ध अरबी-कवि अबू-अमीर अब्दुल अस्मई ने किया था,
उन्हीं में से एक में अरब पर पितृसदृश शासन के लिए उज्जयिनी-नरेश शकारि विक्रमादित्य का यशोगान किया गया है—

इत्रश्शफ़ाई सनतुल बिकरमातुन फ़हलमिन क़रीमुन यर्तफ़ीहा वयोवस्सुरू ।।1।।
बिहिल्लाहायसमीमिन इला मोतक़ब्बेनरन, बिहिल्लाहा यूही क़ैद मिन होवा यफ़ख़रू।।2।।
फज़्ज़ल-आसारि नहनो ओसारिम बेज़ेहलीन, युरीदुन बिआबिन क़ज़नबिनयख़तरू।।3।।
यह सबदुन्या कनातेफ़ नातेफ़ी बिज़ेहलीन, अतदरी बिलला मसीरतुन फ़क़ेफ़ तसबहू।।4।।
क़ऊन्नी एज़ा माज़करलहदा वलहदा, अशमीमान, बुरुक़न क़द् तोलुहो वतस्तरू।।5।।
बिहिल्लाहा यकज़ी बैनना वले कुल्ले अमरेना, फ़हेया ज़ाऊना बिल अमरे बिकरमातुन।।6।।’

अर्थात्, वे लोग धन्य हैं, जो राजा विक्रमादित्य के साम्राज्य में उत्पन्न हुए, जो दानवीर, धर्मात्मा और प्रजावत्सल था ।।1।।

उस समय हमारा देश (अरब) ईश्वर को भूलकर इन्द्रिय-सुख में लिप्त था। छल-कपट को ही हमलोगों ने सबसे बड़ा गुण मान रखा था। हमारे सम्पूर्ण देश पर अज्ञानता ने अन्धकार फैला रखा था।।2।।

जिस प्रकार कोई बकरी का बच्चा किसी भेडि़ए के चंगुल में फँसकर छटपटाता है, छूट नहीं सकता, उसी प्रकार हमारी मूर्ख जाति मूर्खता के पंजे में फँसी हुई थी।।3।।

अज्ञानता के कारण हम संसार के व्यवहार को भूल चुके थे, सारे देश में अमावस्या की रात्रि की तरह अन्धकार फैला हुआ था। परन्तु अब जो ज्ञान का प्रातःकालीन प्रकाश दिखाई देता है, यह कैसे हुआ?।।4।।

यह उसी धर्मात्मा राजा की कृपा है, जिन्होंने हम विदेशियों को भी अपनी कृपा-दृष्टि से वंचित नहीं किया और पवित्र धर्म का सन्देश देकर अपने देश के विद्वानों को भेजा, जो हमारे देश में सूर्य की तरह चमकते थे।।5।।

जिन महापुरुषों की कृपा से हमने भुलाए हुए ईश्वर और उसके पवित्र ज्ञान को समझा और सत्पथगामी हुए; वे महान् विद्वान्, राजा विक्रमादित्य की आज्ञा से हमारे देश में ज्ञान एवं नैतिकता के प्रचार के लिए आए थे।।6।।

कुमार गुंजन अग्रवाल के मूल लेख के अंश

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

सुझाव
~

एक व्यक्ति ने अगरबत्ती की दुकान खोली ! नाना प्रकार की अगरबत्तियां थीं ! उसने दुकान के बाहर एक साइन बोर्ड लगाया – “यहाँ सुगन्धित अगरबत्तियां मिलती हैं ! “

दुकान चल निकली ! एक दिन एक ग्राहक उसके दुकान पर आया और कहा – आपने जो बोर्ड लगा रखा है , उसके एक विरोधाभास है ! भला अगरबत्ती सुगंधित नहीं होंगी तो क्या दुर्गन्धित होंगी ?

उसकी बात को उचित मानते हुए विक्रेता ने बोर्ड से सुगंधित शब्द मिटा दिया ! अब बोर्ड इस प्रकार था – “यहाँ अगरबत्तियां मिलती हैं ! “

इसके कुछ दिनों के पश्चात किसी दूसरे सज्जन ने उससे कहा – आपके बोर्ड पर “यहाँ ” क्यों लिखा है ? दुकान जब यहीं है तब यहाँ लिखना निरर्थक है !
इस बात को भी अंगीकार कर विक्रेता ने बोर्ड पर यहाँ शब्द मिटा दिया ! अब बोर्ड था – अगरबत्तियां मिलती हैं !

पुनः उस व्यक्ति को एक रोचक परामर्श मिला – अगरबत्तियां मिलती हैं का क्या प्रयोजन ? अगरबत्ती लिखना ही पर्याप्त है ! अतः वह बोर्ड केवल एक शब्द के साथ रह गया – “अगरबत्ती “
विडम्बना देखिये ! एक शिक्षक ग्राहक बन कर आये और अपना ज्ञान वमन किया – दुकान जब मात्र अगरबत्तियों की है तो इसका बोर्ड लगाने का क्या लाभ ? लोग तो देखकर ही समझ जायेंगे कि मात्र अगरबत्तियों की दुकान है ! इस प्रकार वह बोर्ड ही वहाँ से हट गया !

कालांतर में दुकान की बिक्री मंद पड़ने लगी और विक्रेता चिंतित रहने लगा ! एक दिन में उसका पुराना मित्र उसके पास आया ! अनेक वर्षों के उपरांत वे मिल रहे थे ! मित्र से इसकी स्थापना उसके चिंता ना छिप सकी और उसने इसका कारण पूछा तो व्यवसाय के गिरावट का पता चला !

मित्र ने सब कुछ ध्यान से देखा और कहा – तुम बिल्कुल ही मूर्ख हो ! इतनी बड़ी दुकान खोल ली और बाहर एक बोर्ड नहीँ लगा सकते थे – यहाँ सुगंधित अगरबत्तियां मिलती हैं !

शिक्षा:-

आपको जीवन में प्रत्येक पग पर सुझाव देने वाले मिलेंगे जो उस विषय के विशेषज्ञ नहीं हैं परंतु लगेगा कि सारा विज्ञान, दर्शनशास्त्र , समाजशास्त्र इत्यादि उनमें अंतर्निहित है ! आप ऐसे व्यक्तियों की सुनेंगे या अनुपालन करेंगे तो आपकी स्थिति भी उस विक्रेता की भाँति हो जायेगी ! आप किसी भी विषय या निराकरण के लिये उससे सम्बन्धित विशेषज्ञों की सुने या अपने अन्तह्चेतन की क्योंकि आपको आपसे अधिक कोई नहीं जानता..!! 🌹🌹🌹

Posted in राजनीति भारत की - Rajniti Bharat ki

30 A


આના પર કોઈ કોમેંટ?

કાયદો 30 A

મોદીજી નેહરુના હિંદુઓ સાથેના વિશ્વાસઘાતને સુધારવાની તૈયારી કરી રહ્યા છે.

શું તમે “કાયદો 30”, “કાયદો 30 A” વિશે સાંભળ્યું છે ????
શું તમે જાણો છો કે “30A” નો અર્થ શું છે?

વધુ જાણવા માટે વિલંબ કરશો નહીં……

30A એ બંધારણમાં સમાવિષ્ટ કાયદો છે*
જ્યારે નહેરુએ આ કાયદાને બંધારણમાં સામેલ કરવાનો પ્રથમ પ્રયાસ કર્યો ત્યારે સરદાર વલ્લભભાઈ પટેલે તેનો ઉગ્ર વિરોધ કર્યો.

સરદાર પટેલે કહ્યું, “આ કાયદો હિન્દુઓ સાથે મોટો વિશ્વાસઘાત છે, તેથી જો આ ગુર્નેય કાયદો બંધારણમાં લાવવામાં આવશે, તો હું કેબિનેટ અને કોંગ્રેસ પાર્ટીમાંથી રાજીનામું આપીશ… પછી હું આ વિશ્વાસઘાત સામે લડીશ. તમામ ભારતીયો સાથે કામ કરો… આગળથી.. “

સરદાર પટેલના નિશ્ચય સમક્ષ નેહરુએ ઘૂંટણિયે પડવું પડ્યું કમનસીબે.. મને ખબર નથી કે કેવી રીતે.. થોડા મહિનામાં સરદાર વલ્લભભાઈ પટેલનું અણધાર્યું અવસાન થયું…

પટેલના મૃત્યુ પછી, નેહરુએ આ કાયદાનો બંધારણમાં સમાવેશ કર્યો.

ચાલો હું તમને 30 A ના લક્ષણો જણાવું.

આ કાયદા હેઠળ – હિંદુઓને હિંદુઓમાં તેમનો “હિંદુ ધર્મ” શીખવવાની મંજૂરી નથી. “કાયદો 30A” તેને પરવાનગી કે સત્તા આપતો નથી…. તો પછી હિંદુઓએ પોતાની ખાનગી કોલેજોમાં હિંદુ ધર્મ ન ભણાવવો જોઈએ… હિંદુ ધર્મ શીખવવા માટે કોલેજો શરૂ કરવી જોઈએ નહીં…. હિંદુ ધર્મ શીખવવા માટે હિંદુ શાળાઓ શરૂ કરવી જોઈએ નહીં. અધિનિયમ 30A હેઠળ સરકારી શાળાઓ કે કોલેજોમાં હિંદુ ધર્મના શિક્ષણની પરવાનગી નથી….

પરંતુ.. વિચિત્ર વાત એ છે કે આની સાથે (30A સાથે) એક બીજો કાયદો છે જે નેહરુએ તેમના બંધારણમાં ઘડ્યો હતો – “અધિનિયમ 30”. આ “કાયદો 30” અનુસાર મુસ્લિમો તેમના ધાર્મિક શિક્ષણ માટે ઇસ્લામિક ધાર્મિક શાળાઓ શરૂ કરી શકે છે અને શરૂ કરી શકે છે….. મુસ્લિમો તેમનો ધર્મ શીખવી શકે છે…. કાયદો 30 મુસ્લિમોને તેમની પોતાની ‘મદ્રેસા’ શરૂ કરવાની સંપૂર્ણ સત્તા અને પરવાનગી આપે છે. ….અને બંધારણની કલમ 30 ખ્રિસ્તીઓને તેમની પોતાની ધાર્મિક શાળાઓ અને કોલેજો સ્થાપવા અને મુક્તપણે તેમના ધર્મનું શિક્ષણ અને પ્રચાર કરવાની સંપૂર્ણ સત્તા અને પરવાનગી આપે છે…!!

આનું બીજું કાનૂની પાસું એ છે કે હિંદુ મંદિરોના તમામ પૈસા અને સંપત્તિ સરકારની ઇચ્છા પર છોડી શકાય છે…. હિંદુ મંદિરોમાં હિંદુ ભક્તો દ્વારા કરવામાં આવતા તમામ નાણાં અને અન્ય દાન રાજ્યની તિજોરીમાં લઈ શકાય છે. …. …

તે જ સમયે મુસ્લિમ અને ખ્રિસ્તી મસ્જિદોમાંથી દાન અને દાન સંપૂર્ણપણે ખ્રિસ્તી-મુસ્લિમ સમુદાયને આપી શકાય છે…. આ રીતે આ “લો 30” ની વિશેષતાઓ છે..*તેથી "કાયદો 30A" અને "કાયદો 30" એ સ્પષ્ટ ભેદભાવ અને હિંદુઓ સાથેનો સ્પષ્ટ વિશ્વાસઘાત છે.*

દરેક વ્યક્તિએ આ સારી રીતે જાણવું અને સમજવું જોઈએ…

અન્યની જાગૃતિ આપણે દરેક સનાતન ધર્મના રક્ષક બનીશું.. વાંચો, જાણો અને ફેલાવો

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

પાસવર્ડે જીવન બદલી નાખ્યું..

એક સરસ મજાની સવારે ઓફિસ પહોંચી મેં મારું કોમ્પ્યુટર ઓન કર્યું ત્યાં જ સામે મેસેજ આવ્યો “તમારો પાસવર્ડ એક્સપાયર થઈ ચૂક્યો છે.” ઓફિસમાં સુરક્ષા પોલીસીને ધ્યાનમાં લઈ અમારે દર મહિને પોતપોતાના કોમ્પ્યુટર નો પાસવર્ડ ચેન્જ કરવો પડે છે. મારા થોડા જ સમય પહેલા થયેલા છૂટાછેડા ને લીધે હું ઘણો વ્યથિત હતો. તેણે – મારી પત્નીએ મારી સાથે જે કર્યું એ તે કઈ રીતે કરી જ શકે એવા વિચારો મને સતત સતાવતા હતા.

પાસવર્ડ બદલતી વખતે મારા બોસે મને એ અંગે આપેલી ટીપ મને યાદ આવી. તેમણે કહેલું,”હું એવો પાસવર્ડ રાખીશ જે મારું જીવન બદલી નાખે.” મારી વર્તમાન મન:સ્થિતી એવી હતી કે હું કોઇ પણ એક કામ પુરું કરવા તેના પર ધ્યાન કેન્દ્રીત કરી શકતો નહોતો. આ પાસવર્ડ વાળી બીનાએ મને વિચાર કરવા પ્રેર્યો કે મારે મારા છૂટાછેડાની ઘટનાને મારા પર હાવી થવા દેવી જોઇએ નહિ અને મારે પરિસ્થિતી બદલવા થોડા મજબૂત મનોબળ સાથે ચોક્કસ કંઈક કરવું જોઇએ.

મેં મારો પાસવર્ડ રાખ્યો ‘Forgive@her’. હવે દિવસમાં ઘણી વાર જ્યારે મારું કોમ્પ્યુટર લોક થઈ જાય ત્યારે તે અનલોક કરવા મારે મારો આ નવો પાસવર્ડ ટાઈપ કરવો પડતો. રોજ જમ્યા પછી કામ પર પાછો ફરું, બ્રેક બાદ કોમ્પ્યુટર પર કામ ફરી શરૂ કરું ત્યારે મારી પત્નીને હું માફ કરતો. આ એક સરળ પગલાએ મારો ભૂતપૂર્વ પત્ની તરફ જોવાનો દ્રષ્ટીકોણ બદલી નાખ્યો. ક્ષમાભર્યા એ નાનકડા પાસવર્ડ સંદેશાએ મને જે બીનાઓ બની હતી તેનો સ્વીકાર કરતા શિખવ્યું અને મને હતાશાની એ ઉંડી ખીણમાંથી બહાર કાઢ્યો જેમાં હું સરકી ગયો હતો. એ પછીના મહિને જ્યારે પાસવર્ડ બદલવાનો વારો આવ્યો ત્યાં સુધી હું હળવોફૂલ થઈ ગયો હતો, મુક્ત થઈ ગયો હતો.

એ પછીના મહિના માટેનો મારો નવો પાસવર્ડ હતો ‘Quit@smoking4ever’ આ વખતે મને ધૂમ્રપાન છોડી દેવાના લક્ષ્યને સિદ્ધ કરવાની પ્રેરણા મળી અને હું એ બદીમાંથી મારી જાતને મુક્ત કરી શક્યો.

એક મહિના પછી મારો પાસવર્ડ હતો ‘Save4trip@europe’ અને ત્રણ મહિનામાં હું યુરોપની મુલાકાતે જઈ આવ્યો.

આ નાનકડા રીમાઈન્ડર્સે મને મોટા મોટા લક્ષ્યાંકો હાંસલ કરવામાટે સતત પ્રેર્યો, ઉત્સાહીત કર્યો અને એમાં સફળતા અપાવી.

કેટલીક વાર તમારા ધ્યેયો સિદ્ધ કરવાનું કામ અઘરું બની જતું હોય છે પણ આ રીતે તેમને સતત યાદ રાખતા રહેવાથી અસરકારક પરીણામ મળે છે.

હવે પછીનો મારો પાસવર્ડ છે ‘Lifeis#beautiful’ … અને મને વિશ્વાસ છે મારું જીવન ટૂંક સમયમાં બદલાઈ જવાનું છે…

રીડર્સ ડાઇજેસ્ટમાં છપાયેલ આ એક સત્ય ઘટના છે..
Copy પેસ્ટ

રાહુલ પરમાર

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

એક સરસ પ્રેરણાદાયક વાર્તા !!

એક વાર એક ગામમાં અમુક પર્યટકો ફરવા ગયા હતાં. એ ગામમાં માછીમારોની વસ્તી હતી. એકવારે એક પર્યટકે અને એક માછીમાર વચ્ચે અમુક ચર્ચા થઈ જે નીચે પ્રમાણે હતી…

પર્યટક – “તમે દિવસમાં કેટલી માછલી પકડો છો અને કેટલાં સમયમાં?”

માછીમાર – “હું ત્રણ-ચાર કલાકના ગાળામાં જેટલી માછલી પકડાય એટલી માછલી પકડું છુ”….

પર્યટક – “બસ ત્રણ-ચાર કલાક! તો તમે ઘર કેવી રીતે ચલાવો છો અને બાકીના સમયમાં તમે શું કરો?”

માછીમાર – “મારું ઘર આટલામાં બરાબર રીતે ચાલે છે અને બાકીના સમયમાં અમે થોડો આરામ કરીયે, અમારા બાળકો સાથે રમીયે, થોડો સમય અમે અમારી પત્નિ સાથે ગાળીયે અને સાંજે બધાં મિત્રો સાથે મળી નવા ગીત ગાઈયે અને ગીતાર વગાડીયે અને જિંદગીનો આનંદ લુટીયે”.

પર્યટક – “જો હું એમ.બી.એ. ભણેલો છું અને શહેરમાં મારી પાસે મારો બંગલો છે, ગાડી છે અને તમામ સુખ હાજર છે, જો તું પણ આવી રીતે સમય બગાડે એના કરતાં તું વધારે સમય માછલી પકડ અને તેને વેચીને વધારે પૈસા કમાવવાનું ચાલુ કર”.

માછીમાર – “વધારે પૈસા કમાઈ ને હું શું કરું?”.

પર્યટક – “વધારે પૈસા કમાઈને તું બીજી બોટ ખરીદી કર એટલે તું હજું વધારે માછલી પકડી શકીશ અને હજું વધારે પૈસા કમાઈ શકીશ”.

માછીમાર – “પણ હું એટલાં બધાં પૈસા કમાઈને શું કરું?”

પર્યટક – “અરે તું વધારે પૈસા કમાઈ ને તું બે ની ત્રણ અને ત્રણની ચાર બોટ અને એમ કરતાં કરતાં તારી પાસે એટલાં બધાં પૈસા થઈ જશે કે તું આ નાના ગામડાંની બહાર નીકળી મોટા શહેરમાં રહેવા આવી શકીશ અને તારી પારે ગાડી-બંગલા બધુ થઈ જશે અને પછી તું તારા પરિવાર સાથે આનંદની જિંદગી વિતાવી શકીશ”.

માછીમાર – “આ બધું કરવા માટે મને કેટલો સમય લાગશે?”.

પર્યટક – “અંદાજે ૨૦ થી ૨૫ વરસ”.

માછીમાર – “સાહેબ, મારા પરિવાર સાથે અત્યારના જ આનંદની જિંદગી વિતાવી રહ્યો છું તો શા માટે હું મારા ૨૦ થી ૨૫ વરસ બરબાદ કરું?”
આ સાંભળી પર્યટક વિચારતો રહી ગયો અને તેની પાસે આને માટે કોઈ જવાબ નહતો.

બોધ – તમે કયાં છો તે પહેલાં જુઓ કદાચ તમારી મંજીલ તમારી સાથેજ હોય અને તમે તેને બીજે શોધવામાં પડયાં હોઈ શકો

👏👏👏

રાહુલ પરમાર

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

पुणे में एक व्यस्त पुल है जिसे म्हात्रे ब्रिज कहा जाता है।
हर दिन, हजारों लोग इसे पार करते हैं, लेकिन कम ही लोग जानते हैं या परवाह करते हैं कि पुल का नाम एक गुमनाम भारतीय नायक, श्री रवींद्र हरेश्वर म्हात्रे के नाम पर रखा गया है।
उन्हें 48 साल की उम्र में कश्मीरी आतंकवादियों ने बेरहमी से मार डाला था, जब वह बर्मिंघम ब्रिटेन में भारतीय दूतावास में एक राजनयिक के रूप में कार्यरत थे।

जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के आतंकवादी मकबूल भट की रिहाई के लिए बातचीत करने के प्रयास में रवींद्र म्हात्रे का अपहरण कर लिया गया और उनकी हत्या कर दी गई।
जी हां वही मकबूल भट, जिनके नाम पर जेएनयू में अलगाववादी नारे लगे।

म्हात्रे का अपहरण उस समय किया गया था जब वह अपनी बेटी के लिए जन्मदिन का केक लेने के बाद एक बेकरी की दुकान से बाहर निकल रहा था।
म्हात्रे की बेटी केवल 14 वर्ष की थी जब वह उसके जीवन से हमेशा के लिए गायब हो गया।
उसके पिता का शव तीन दिन बाद बर्मिंघम की एक सड़क पर मिला था।

तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने आतंकवादियों से बातचीत करने से इनकार कर दिया और मकबूल भट को म्हात्रे का शव मिलने के कुछ दिनों बाद फांसी पर लटका दिया गया।
उसके कुछ महीने बाद, श्रीमती। गांधी ने मुंबई में म्हात्रे के वृद्ध माता-पिता से मुलाकात की और कथित तौर पर उनसे कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर, वह उनके बेटे को उनसे दूर ले जाने के लिए दोषी थीं, लेकिन उनके हाथ बंधे हुए थे।

एक भावनात्मक कहानी में, म्हात्रे की बेटी बताती है कि कैसे उसके पिता की हत्या ने उसका जीवन हमेशा के लिए बदल दिया।

कश्मीरी आतंकवादी मकबुल भट को नहीं भूले हैं, लेकिन हम भारतीय रविंद्र म्हात्रे को भूल गए हैं।

साझा किया ताकि हम उसे फिर से याद करें …

रोहित विजय मायादेव द्वारा लिखित

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

सुंदर भाव कथा
मदद

रात दस बजे लगभग अचानक मुझे एलर्जी हो गई।घर पर दवाई नहीं, न ही इस समय मेरे अलावा घर में कोई और। श्रीमती जी बच्चों के पास गोवा और हम रह गए अकेले। ड्राईवर भी अपने घर जा चुका था बाहर हल्की बारिश की बूंदे सावन महीने के कारण बरस रही थी। दवा की दुकान ज्यादा दूर नहीं थी पैदल भी जा सकता था लेकिन बारिश की वज़ह से मैंने रिक्शा लेना उचित समझा। *बगल में राम मन्दिर बन रहा था*।

एक रिक्शा वाला भगवान की प्रार्थना कर रहा था। मैंने उससे पूछा चलोगे, तो उसने सहमति में सर हिलाया और बैठ गए हम रिक्शा में! रिक्शा वाला काफी़ बीमार लग रहा था और उसकी आँखों में आँसू भी थे। मैंने पूछा,"क्या हुआ भैया! रो क्यूँ रहे हो और तुम्हारी तबियत भी ठीक नहीं लग रही।" उसने बताया:-

बारिश की वजह से तीन दिन से सवारी नहीं मिली और वह भूखा है बदन दर्द भी कर रहा है,अभी भगवान से प्रार्थना कर रहा था क़ि आज मुझे भोजन दे दो, मेरे रिक्शे के लिए सवारी भेज दो
मैं बिना कुछ बोले रिक्शा रुकवाकर दवा की दुकान पर चला गया।
वहां खड़े खड़े सोच रहा था…….
“कहीं भगवान ने तो मुझे इसकी मदद के लिए नहीं भेजा।

क्योंकि यदि यही एलर्जी आधे घण्टे पहले उठती तो मैं ड्राइवर से दवा मंगाता,रात को बाहर निकलने की मुझे कोई ज़रूरत भी नहीं थी,और पानी न बरसता तो रिक्शे में भी न बैठता।”
मन ही मन भगवांन को याद किया और पूछ ही लिया भगवान से,!
मुझे बताइये क्या आपने रिक्शे वाले की मदद के लिए भेजा है?”
मन में जवाब मिला… “हाँ”…। मैंने भगवान को धन्यवाद् दिया,अपनी दवाई के साथ रिक्शेवाले के लिए भी दवा ली। *बगल के रेस्तरां से छोले भटूरे पैक करवाए और रिक्शे पर आकर बैठ गया।* *जिस मन्दिर के पास से रिक्शा लिया था वहीँ पहुंचने पर मैंने रिक्शा रोकने को कहा।*

उसके हाथ में रिक्शे के 30 रुपये दिए,
गर्म छोले भटूरे का पैकेट और दवा देकर बोला:-

“खाना खा कर यह दवा खा लेना, एक एक गोली ये दोनों अभीऔर एक एक कल सुबह नाश्ते के बाद,उसके बाद मुझे आकर फिर दिखा जाना। रोते हुए रिक्शेवाला बोला:-

“मैंने तो भगवान से दो रोटी मांगी थी मग़र भगवान ने तो मुझे छोले भटूरे दे दिए।कई महीनों से इसे खाने की इच्छा थी। आज भगवान ने मेरी प्रार्थना सुन ली।
और
जो मन्दिर के पास उसका बन्दा रहता था उसको मेरी मदद के लिए भेज दिया।” कई बातें वह बोलता रहा और मैं स्तब्ध हो सुनता रहा। घर आकर सोचा क़ि उस रेस्तरां में बहुत सारी चीज़े थीं, मैं कुछ और भी ले सकता था,

समोसा या खाने की थाली ..
पर मैंने छोले भटूरे ही क्यों लिए?
क्या सच् में भगवान ने मुझे रात को अपने भक्त की मदद के लिए ही भेजा था..? *हम जब किसी की मदद करने सही वक्त पर पहुँचते हैं तो इसका मतलब उस व्यक्ति की प्रार्थना भगवान ने सुन ली,*

और
हमें अपना प्रतिनिधि बना, देवदूत बना उसकी मदद के लिए भेज दिया।
*इसलिए कहते हैं , अचानक आए परोपकार, दान और मदद के मौके को ना गवाएं ….क्या पता…. ईश्वर ने आपको मौका दिया है उनके प्रतिनिधि के रूप में….

।।जय जय श्री राम।।