Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक सूफी फकीर रोज अपनी प्रार्थना में परमात्मा को धन्यवाद देता था : कि अहा, तू भी खूब है! मुझ नाकुछ को इतना देता है कि मैं कैसे तेरा धन्यवाद करूं? किस जबां से तेरा धन्यवाद करूं?

नंगा फकीर! उसके पास कुछ था भी नहीं। और रोज धन्यवाद दे। उसके शिष्य भी थक गए थे उसकी बातें सुन—सुनकर। फिर एक दिन तो ऐसा हुआ कि तीन दिन तक खाना न मिला। यात्रा पर निकले थे, तीर्थयात्रा पर। न खाना मिला तीन दिन तक, न किसी गांव में ठहरने की जगह मिली।

लोग उस फकीर के खिलाफ थे, जैसे लोग फकीरों के खिलाफ सदा से रहे हैं। लोग कहते थे, वह फकीर कुछ उपद्रव की बातें कर रहा है, बगावती है। उसकी बातें कुरान से मेल नहीं खातीं। उसकी बातें मुहम्मद के विपरीत पड़ती हैं। वह फकीर अपने शिष्यों के बीच कहता है बैठकर : “अनलहक’——कि मैं परमात्मा हूं। यह बात ठीक नहीं है। यह कुफ्र है।

उसको तीन गांवों में तीन दिन तक ठहरने नहीं दिया गया। भोजन भी नहीं मिला। रेगिस्तान में थके—मांदे तीसरे दिन जब वे सांझ को रुके एक वृक्ष के नीचे, वह फकीर फिर अपने मुसल्ले को बिछाकर बैठ गया। फिर उसने हाथ जोड़े। शिष्य बैठे देख रहे थे, देखें आज क्या यह कहता है! भूखा तीन दिन का, थका—मांदा, धूलि—धूसरित! स्नान भी नहीं कर पाए, कहीं ठहर भी नहीं सके। मगर उसने फिर वही कहा कि हे प्रभु! उसकी आंखें चमक रही हैं आनंद से। उसके चेहरे पर फिर वही आनंद का भाव, फिर वही प्रार्थना : “हे प्रभु! तेरा बड़ा धन्यवाद है। तू सदा मुझे जिस चीज की जरूरत होती है, पहुंचा देता है।’

एक शिष्य ने कहा कि अब बस, ठहरो! अब हद हो गई। जिस चीज की जरूरत होती है, पहुंचा देता है। और तीन दिन से हम भी तुम्हारे साथ हैं, जिस चीज की जरूरत है, वही नहीं मिली है। रोटी नहीं मिली, पानी नहीं मिला, आवास नहीं मिला। अब और क्या है? मिला क्या है तीन दिन में?

उस फकीर ने कहा, तुम बीच में मत बोलो। तीन दिन तक मुझे इसी बात की जरूरत थी। वह मेरी जरूरत का खयाल रखता है। तीन दिन तक भूखे रखना, तीन दिन तक भूखे रहना मेरे लिए लाभ का हुआ है। तीन दिन तक भूख और अपमान खाने के बाद भी मैं प्रार्थना कर सकूं, यही मेरी जरूरत थी। उसने अवसर दिया। सुख मिले तब धन्यवाद देना तो बहुत आसान है पागलो! जब दुःख मिले तब धन्यवाद देने की क्षमता प्रार्थना की ही छाती में होती है।

उसने मुझे एक मौका दिया। उसने मुझे एक अवसर दिया। मगर मैं भी समझ गया कि अवसर क्यों दे रहा है। वह इसलिए दे रहा है कि अब देखूं। एक दिन उसने कुछ भी न दिया, भूखा रखा, फिर भी मैंने प्रार्थना की। दूसरे दिन भी उसने कहा, अच्छा ठीक है, एक दिन तूने कर ली, दूसरे दिन? दूसरा दिन भी बीत गया, अब यह तीसरा दिन भी आ गया। उसने फिर एक मौका दिया कि आज तीसरा दिन फिर आ गया। अब तू बिल्कुल भूखा है, जीर्ण—जर्जर है, गिरा पड़ता है, अब तू धन्यवाद देगा कि नहीं देगा? अब तो रुकेगा न? अब तो बंद कर देगा प्रार्थना। मगर मैंने कहा कि तू मुझे हरा न सकेगा। मैं धन्यवाद देता ही जाऊंगा। अंतिम घड़ी तक धन्यवाद देता चला जाऊंगा। जब तक श्वास है, धन्यवाद उठेगा। श्वास ही न रहे तो फिर बात और। मरते क्षण तक ओंठ पर धन्यवाद होगा। तू अगर मौत भी देगा तो वह मेरी जरूरत है तो ही देगा; नहीं तो क्यों देगा?

इसका नाम श्रद्धा है। इसका नाम प्रार्थना है। प्रार्थना की नहीं जाती। प्रार्थना बड़े गहरे अनुभव से प्रकट होती है।

ओशो
संकलन-रामजी 🙏🌹🌹

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. 🌹संस्कारो पर नाज🌹

बेटा अब खुद कमाने वाला हो गया था …इसलिए बात-बात पर अपनी माँ से झगड़ पड़ता था ये वही माँ थी जो बेटे के लिए पति से भी लड़ जाती थी। मगर अब फाइनेसिअली इंडिपेंडेंट बेटा पिता के कई बार समझाने पर भी इग्नोर कर देता और कहता, “यही तो उम्र है शौक की,खाने पहनने की, जब आपकी तरह मुँह में दाँत और पेट में आंत ही नहीं रहेगी तो क्या करूँगा।”

बहू खुशबू भी भरे पूरे परिवार से आई थी, इसलिए बेटे की गृहस्थी की खुशबू में रम गई थी। बेटे की नौकरी अच्छी थी तो फ्रेंड सर्किल उसी हिसाब से मॉडर्न थी। बहू को अक्सर वह पुराने स्टाइल के कपड़े छोड़ कर मॉडर्न बनने को कहता, मगर बहू मना कर देती …..

वो कहता “कमाल करती हो तुम, आजकल सारा ज़माना ऐसा करता है,मैं क्या कुछ नया कर रहा हूँ। तुम्हारे सुख के लिए सब कर रहा हूँ और तुम हो कि उन्हीं पुराने विचारों में अटकी हो। क्वालिटी लाइफ क्या होती है तुम्हें मालूम ही नहीं।”

और बहू कहती “क्वालिटी लाइफ क्या होती है, ये मुझे जानना भी नहीं है, क्योकि लाइफ की क्वालिटी क्या हो, मैं इस बात में विश्वास रखती हूँ।”

आज अचानक पापा आई. सी. यू. में एडमिट हुए थे। हार्ट अटेक आया था। डॉक्टर ने पर्चा पकड़ाया, तीन लाख और जमा करने थे। डेढ़ लाख का बिल तो पहले ही भर दिया था मगर अब ये तीन लाख भारी लग रहे थे। वह बाहर बैठा हुआ सोच रहा था कि अब क्या करे।

उसने कई दोस्तों को फ़ोन लगाया कि उसे मदद की जरुरत है, मगर किसी ने कुछ तो किसी ने कुछ बहाना कर दिया। आँखों में आँसू थे और वह उदास था तभी खुशबू खाने का टिफिन लेकर आई और बोली,”अपना ख्याल रखना भी जरुरी है। ऐसे उदास होने से क्या होगा? हिम्मत से काम लो, बाबू जी को कुछ नहीं होगा आप चिन्ता मत करो। कुछ खा लो फिर पैसों का इंतजाम भी तो करना है आपको मैं यहाँ बाबूजी के पास रूकती हूँ आप खाना खाकर पैसों का इंतजाम कीजिये। “पति की आँखों से टप-टप आँसू झरने लगे।

“कहा न आप चिन्ता मत कीजिये। जिन दोस्तों के साथ आप मॉडर्न पार्टियां करते हैं आप उनको फ़ोन कीजिये, देखिए तो सही, कौन कौन मदद को आता हैं। “पति खामोश और सूनी निगाहों से जमीन की तरफ़ देख रहा था। कि खुशबू का हाथ उसकी पीठ पर आ गया। और वह पीठ को सहलाने लगी।

“सबने मना कर दिया। सबने कोई न कोई बहाना बना दिया खुशबू।आज पता चला कि ऐसी दोस्ती तब तक की है जब तक जेब में पैसा है। किसी ने भी हाँ नहीं कहा जबकि उनकी पार्टियों पर मैंने लाखों उड़ा दिये।”

“इसी दिन के लिए बचाने को तो माँ-बाबा कहते थे। खैर, कोई बात नहीं, आप चिंता न करो, हो जाएगा सब ठीक। कितना जमा कराना है?”

“अभी तो तनख्वाह मिलने में भी समय है, आखिर चिन्ता कैसे न करूँ खुशबू ?”

“तुम्हारी ख्वाहिशों को मैंने सम्हाल रखा है।”

“क्या मतलब….?”

“तुम जो नई नई तरह के कपड़ो और दूसरी चीजों के लिए मुझे पैसे देते थे वो सब मैंने सम्हाल रखे हैं। माँ जी ने फ़ोन पर बताया था, तीन लाख जमा करने हैं। मेरे पास दो लाख थे। बाकी मैंने अपने भैया से मंगवा लिए हैं। टिफिन में सिर्फ़ एक ही डिब्बे में खाना है बाकी में पैसे हैं।” खुशबू ने थैला टिफिन सहित उसके हाथों में थमा दिया।

“खुशबू ! तुम सचमुच अर्धांगिनी हो, मैं तुम्हें मॉडर्न बनाना चाहता था, हवा में उड़ रहा था। मगर तुमने अपने संस्कार नहीं छोड़े. आज वही काम आए हैं। “

सामने बैठी माँ के आँखो में आंसू थे उसे आज खुद के नहीं बल्कि पराई माँ के संस्कारो पर नाज था और वो बहु के सर पर हाथ फेरती हुई ऊपरवाले का शुक्रिया अदा कर रही थी।

🌹🙏🏻जय श्री जिनेन्द्र🙏🏻🌹
🌹पवन जैन🌹
❤️प्रणाम❤️

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1695 में एक अजीब बुखार से मरने के बाद, आयरिश महिला मार्गरी मैकॉल को जल्दी से दफन कर दिया गया ताकि उसके शरीर से महामारी के प्रसार को रोका जा सके।

उसके पति ने एक कीमती अंगूठी मार्गरी को दी थी, जिसे उसका पति पत्नी मार्गरी की मौत के बाद उसके शरीर पर सूजन के कारण निकालने में असफल रहा। कीमती अंगूठी से मार्गरी की कब्र चोरों के लिए एक सबसे अच्छा निशाना बन गयी, जिससे वो लाश और अंगूठी दोनों से पैसा बना सकते थे, चोर मार्गरी को दफनाने के बाद उसी शाम मिट्टी सूखने से पहले कब्र पर पहुंच गए और खुदाई शुरू कर दी। काफी प्रयास के बावजूद चोर उसकी उंगली से अंगूठी नहीं निकाल पाये। इसलिए उन्होंने उंगली काटने का फैसला किया। जैसे ही उंगली कटी, खून की फुहारे बाहर आ गई और मार्गरी सीधे बैठ कर चीख़ने चिल्लाने लगी।

क़ब्र लूटने वालों का अंजाम तो पता नहीं चला। लेकिन एक कहानी के अनुसार इन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य का दावा है कि उसने भागकर चोरी के पेशे से तौबा कर ली। क़ब्र से निकलकर मार्गरी अपने घर वापस आ गई। उसने दरवाज़े पर दस्तक दी, उसका पति, एक डॉक्टर, बच्चों के साथ घर में था। मार्गोरी के पति ने बच्चों से कहा, अगर तुम्हारी माँ आज भी जिंदा होती तो वो ऐसे ही दस्तक देती।

जब उसने दरवाज़ा खोला तो उसने अपनी पत्नी को वहां खड़ा पाया, वह कफन में खडी थी। उसकी उंगली से खून बह रहा था, लेकिन वह जिंदा थी, उसके पति ने देखा और फर्श पर गिर गया और दिल का दौरा पड़ने पर मौके पर ही मर गया जिसे मार्गरी की ख़ाली क़ब्र में दफनाया गया। मार्गरी का पुनर्विवाह हुआ और कई बच्चे पैदा हुवे। जब वह अंत में मर गई, तो उसे शेंकल कब्रिस्तान, आयरलैंड में दफनाया गया जहां उसकी क़ब्र अभी भी मौजूद है, जिस पर लिखा है:

Lived Once, Buried Twice

Ilyas Makhdoom

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शंख


🌪🌪घर मे शंख हो तो ध्यान रखें इन ८ बातोंका 🐋🐋 हिंदू धर्म में शंख को घर में रखना बहुत शुभ माना गया है। इससे सुख-समृद्धि बढ़ती byहै। घर में रखे शंख के विषय में ये 8 बातें ध्यान रखने पर उससे प्राप्त होने वाली शुभता में वृद्धि होती है। जानते हैं शंख के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें-
1- शंख को पानी में नहीं रखना चाहिए।

2- शंख को धरती पर भी नहीं रखना चाहिए। शंख हमेशा एक साफ कपड़ा बिछाकर रखना चाहिए।

3- शंख के अंदर जल भरकर नहीं रखना चाहिए। पूजन के समय शंख में जल भरकर रखा जा सकता है। आरती के बाद इस जल का छिड़काव करने से शारीरिक व मानसिक विकारों से मुक्ति मिलता है। साथ ही, जीवन में सौभाग्य का उदय होने लगता है।

4- शंख को पूजा के स्थान पर रखते समय खुला हुआ भाग ऊपर की ओर होना चाहिए।
5- शंख को भगवान विष्णु, लक्ष्मी या बालगोपाल की मूर्ति के दाहिनी ओर रखा जाना चाहिए।

6- शंख को माता लक्ष्मी का रूप माना गया है। इसलिए शंख को पूूजन स्थान में उसी आदर के साथ पूजा जाना चाहिए। जिस आदर के साथ भगवान का पूजन किया जाता है।

7- आसानी से धन की प्राप्ति के लिए शंख को 108 चावल के दानों के साथ लाल कपड़े में लपेटकर तिजोरी में स्थापित करें।

8- घर में शंख ध्वनि का गुंजन सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने वाला माना गया है। पूजन के समय रोजाना घर में शंख बजाना चाहिए।

  1. शंख-अति चमत्कारिक?

शास्त्रों में इसे अति चमत्कारिक बताया गया है। इन तीन प्रकार के शंखों के अलावा और भी अनेक प्रकार के शंख पाए जाते हैं जैसे लक्ष्मी शंख, गरुड़ शंख, मणिपुष्पक शंख, गोमुखी शंख, देव शंख, राक्षस शंख, विष्णु शंख, चक्र शंख, पौंड्र शंख, सुघोष शंख, शनि शंख, राहु एवं केतु शंख।

  1. शंख से वास्तु दोष मुक्ति का तरीका

शंख किसी भी दिन घर में लाकर पूजा स्थल में रखा जा सकता है। लेकिन शुभ मुहूर्त विशेष तौर पर होली, रामनवमी, जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा, दीपावली के दिन अथवा रवि पुष्य योग या गुरू पुष्य योग में इसे पूजा स्थल में रखकर इसकी धूप-दीप से पूजा की जाए घर में वास्तु दोष का प्रभाव कम होता है। शंख में गाय का दूध रखकर इसका छिड़काव घर में किया जाए तो इससे भी सकारात्मक उर्जा का संचार होता है।

  1. क्या रहस्य है शंख बजाने का?

मंदिर में आरती के समय शंख बजते सभी ने सुना होगा परंतु शंख क्यों बजाते हैं? इसके पीछे क्या कारण है यह बहुत कम ही लोग जानते हैं। शंख बजाने के पीछे धार्मिक कारण तो है साथ ही इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है और शंख बजाने वाले व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है।शंख की उत्पत्ति कैसे हुई?

  1. धर्म ग्रंथ और शंख?

इस संबंध में हमारे धर्म ग्रंथ कहते हैं सृष्टी आत्मा से, आत्मा आकाश से, आकाश वायु से, वायु अग्रि से, आग जल से और जल पृथ्वी से उत्पन्न हुआ है और इन सभी तत्व से मिलकर शंख की उत्पत्ति मानी जाती है। शंख की पवित्रता और महत्व को देखते हुए हमारे यहां सुबह और शाम शंख बजाने की प्रथा शुरू की गई है।

  1. शंख बजाने का स्वास्थ्य लाभ?

शंख बजाने का स्वास्थ्य लाभ यह है कि यदि कोई बोलने में असमर्थ है या उसे हकलेपन का दोष है तो शंख बजाने से ये दोष दूर होते हैं। शंख बजाने से कई तरह के फेफड़ों के रोग दूर होते हैं जैसे दमा, कास प्लीहा यकृत और इन्फ्लून्जा आदि रोगों में शंख ध्वनि फायदा पहुंचाती है।

शंख बजाइये और रोगों से छुटकारा पाइये, जानिये कैसे…

  1. समुद्र मंथन और शंख?

समुद्र मंथन से प्राप्त चौदह रत्नों में एक रत्न शंख है। माता लक्ष्मी के समान शंख भी सागर से उत्पन्न हुआ है इसलिए इसे माता लक्ष्मी का भाई भी कहा जाता है।

  1. हिन्दू धर्म और शंख?

हिन्दू धर्म में शंख को बहुत ही शुभ माना गया है, इसका कारण यह है कि माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु दोनों ही अपने हाथों में शंख धारण करते हैं। जन सामान्य में ऐसी धारणा है कि, जिस घर में शंख होता है उस घर में सुख-समृद्धि आती है।

  1. वास्तु विज्ञान और शंख?

वास्तु विज्ञान भी इस तथ्य को मानता है कि शंख में ऐसी खूबियां है जो वास्तु संबंधी कई समस्याओं को दूर करके घर में सकारात्मक उर्जा को आकर्षित करता है जिससे घर में खुशहाली आती है।

  1. शंख की ध्वनि?

शंख की ध्वनि जहां तक पहुंचती हैं वहां तक की वायु शुद्ध और उर्जावान हो जाती है। वास्तु विज्ञान के अनुसार सोयी हुई भूमि भी नियमित शंखनाद से जग जाती है।

  1. रोग-कष्ट और शंख?

भूमि के जागृत होने से रोग और कष्ट में कमी आती है तथा घर में रहने वाले लोग उन्नति की ओर बढते रहते हैं। भगवान की पूजा में शंख बजाने के पीछे भी यह उद्देश्य होता है कि आस-पास का वातावरण शुद्ध पवित्र रहे।

  1. शंख के प्रकार?

शंख मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं -दक्षिणावर्ती, मध्यावर्ती और वामावर्ती। इनमें दक्षिणावर्ती शंख दाईं तरफ से खुलता है, मध्यावर्ती बीच से और वामावर्ती बाईं तरफ से खुलता है। मध्यावर्ती शंख बहुत ही कम मिलते हैं।

  1. शंख के जल से शालीग्राम?

शंख के जल से शालीग्राम को स्नान कराएं और फिर उस जल को यदि गर्भवती स्त्री को पिलाया जाए तो पैदा होने वाला शिशु पूरी तरह स्वस्थ होता है। साथ ही बच्चा कभी मूक या हकला नहीं होता।यदि शंखों में भी विशेष शंख जिसे दक्षिणावर्ती शंख कहते हैं इस शंख में दूध भरकर शालीग्राम का अभिषेक करें। फिर इस दूध को नि:संतान महिला को पिलाएं। इससे उसे शीघ्र ही संतान का सुख मिलता है।

  1. शंख और लाभ?

लाभ अनेक रोज सुबह दक्षिणावर्ती शंख में थोड़ा सा गंगा-जल डालकर सारे घर में छिड़कें भूत-प्रेत व दुरात्माओं से मुक्ति मिलती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती हैं। एक कांच के कटोरे में लघु मोती शंख रखकर उसे अपने बिस्तर के नजदीक रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होकर प्रगाढ़ दाम्पत्य-सुख की अनुभूति होगी। पति-पत्नी इससे जल आचमन करके अपने माथे पर अभिषेक करे तो परस्पर वैमनस्य दूर होता है।

  1. घर में दक्षिणावर्ती शंख?

घर में दक्षिणावर्ती शंख का वास होने से लक्ष्मी का स्थायी वास होता है। दक्षिणावर्ती शंख का विधिपूर्वक पूजन करें तथा अपने व्यवसाय-स्थल पर रखें तो आप सदैव ऋण मुक्त रहेंगे। आप अपनी माता से चावल से भरा एक मोती शंख प्राप्त करें तथा उसे विदेश यात्रा संबंधी कागजात के स्थान पर रखे तो आपके समस्त विघ्न दूर हो जायेंगे। व्यापार स्थान में भगवान विष्णु की मूर्ति के नीचे एक दक्षिणावर्ती शंख रख कर इससे रोज पूजन करके गंगा जल अपने कार्यालय में छिड़कें तो समस्त बाधाएं समाप्त होकर व्यापार में उन्नति होने लगेगी। रात भर शंख में रखे जल का रोज सेवन करने से रोगों से स्वतः मुक्ति मिल जाती है। वह इस बात पर निर्भर है कि शंख कितनी शुद्धता व गुणवत्ता का है।

  1. दिक्कते और शंख?

शंख घिस कर नेत्र में लगाने से आंख की सूजन दूर होती है। शंख भस्म उचित अनुपात में सेवन करने से गुल्म शूल, पित्त, कफ, रूधिर प्लीहा आदि विकार नष्ट हो जाते हैं। फसलों को पानी देते समय किसी शुभ मुहूर्त में 108 शंखोदक भी मिला लें, फसल बढ़ेगी, अनाज बढ़ेगा। अनाज भंडार में कीड़ें-मकोड़ों से बचाने के लिए मंगलवार को शंखनाद करना चाहिए। त्वचा रोगों में शंख की भस्म को नारियल तेल में मिलाकर आक्रांत जगह पर नित्य लगा दें। स्नान करने के पश्चात थोड़ा पानी वहीं लगाकर पोछ दें।

  1. दिन, रात और शंख?

रात को शंख भस्म लगायें और सुबह स्नान के पश्चात् शंखोदक से साफ करें। शुद्ध शिलाजीत को गर्म दूध में अच्छी तरह मिलाकर इस मिश्रण को रोज रात को सोने के पूर्व शंख के जरिये पीने से स्मरण शक्ति व शारीरिक क्षमता में वृद्धि होगी। यदि शंख-भस्म के साथ करेले के रस में गाय का दूध सुबह सेवन किया जाए तो मधुमेह का रोग ठीक होता है। एक शंख में पानी भरकर रखें। रात्रि को भोजनोपरांत आधे घंटे बाद उस पानी को ग्रहण कर लें। 3 दिन ऐसा करने से पुराने कब्ज से भी मुक्ति प्राप्त होती है।

  1. शंख के फायदे?

यदि विष्णु शंख में गंगा जल भरकर रोहिणी, चित्रा व स्वाती नक्षत्रों में गर्भवती को पान करायें तो प्रसव में कोई कष्ट नहीं होगा। संतान भी स्वस्थ व पुष्ट होगी। अन्नपूर्णा शंख में गंगा जल भरकर सुबह-सबेरे पीने से स्वास्थ्य के विकार दूर होते हैं। वास्तव में शंख एक बहुत गुणी यंत्र है, उसे सदा घर में रखें। यदि शंख की पूजा नित्य तुलसी से ही करें तो घर में क्लेश, दुख-दारिद्रय तथा रोगों का प्रवेश नहीं होता। शंख का पानी यदि थोड़ा-थोड़ा पिया जाये तो हकलाना दूर होता है।

ओली अमित

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक तांत्रिक ने एक बार एक भूत पकड़ लिया और उसे बेचने शहर गया _संयोगवश उसकी मुलाकात एक सेठ से हुई,_ _सेठ ने उससे पूछा - भाई यह क्या है, उसने जवाब दिया कि यह एक भूत है। इसमें अपार बल है, कितना भी कठिन कार्य क्यों न हो यह एक पल में निपटा देता है। यह कई वर्षों का काम मिनटों में कर सकता है ,_ _सेठ भूत की प्रशंसा सुन कर ललचा गया और उसकी कीमत पूछी......., उस आदमी ने कहा कीमत बस पाँच सौ रुपए है ,_ _कीमत सुन कर सेठ ने हैरानी से पूछा- बस पाँच सौ रुपए.............!!!!_ _उस आदमी ने कहा - सेठ जी जहाँ इसके असंख्य गुण हैं वहाँ एक दोष भी है। अगर इसे काम न मिले तो मालिक को खाने दौड़ता है।_ _सेठ ने विचार किया कि मेरे तो सैकड़ों व्यवसाय हैं, विलायत तक कारोबार है, यह भूत मर जायेगा पर काम खत्म न होगा ,_ _यह सोच कर उसने भूत खरीद लिया, मगर भूत तो भूत ही था , उसने अपना मुंह फैलाया और बोला - *काम काम काम काम.......!!*_ _सेठ भी तैयार ही था, उसने बहुत को तुरन्त दस काम बता दिये , पर भूत उसकी सोच से कहीं अधिक तेज था इधर मुँह से काम निकलता उधर पूरा होता , अब सेठ घबरा गया ._ _संयोग से एक सन्त वहाँ आये. सेठ ने विनयपूर्वक उन्हें भूत की पूरी कहानी बतायी। सन्त ने हँस कर कहा अब जरा भी चिन्ता मत करो . एक काम करो , उस भूत से कहो कि एक लम्बा बाँस ला कर आपके आँगन में गाड़ दे._ बस जब काम हो तो काम करवा लो और कोई काम न हो तो उसे कहें कि वह बाँस पर चढ़ा और उतरा करे. तब आपके काम भी हो जायेंगे और आपको कोई परेशानी भी न रहेगी _सेठ ने ऐसा ही किया और सुख से रहने लगा....._ यह मन ही वह भूत है। यह सदा कुछ न कुछ करता रहता है एक पल भी खाली बिठाना चाहो तो खाने को दौड़ता है। श्वास ही बाँस है। श्वास पर परमात्मा का सिमरन का अभ्यास ही बाँस पर चढ़ना उतरना है। आप भी ऐसा ही करें। जब आवश्यकता हो मन से काम ले लें , जब काम न रहे तो हर श्वास में परमात्मा को याद करने लगो, फिर आप भी सर्व प्रकार के सुख और शांति के झूले में झूलने लगेंगे । *!! जय माता दी !!* *!! जय मातारानी की !!* *!! जय माँ भवानी !!*