Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

मास्साब का स्कूटर
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माथुर साहब पेशे से अध्यापक थे। कस्बे से विद्यालय की दूरी 7 किलोमीटर थी। एकदम वीराने में था उनका विद्यालय। कस्बे से वहाँ तक पहुंचने का साधन यदा कदा ही मिलता था तो अक्सर लिफ्ट मांगके ही काम चलाना पड़ता था और न मिले तो प्रभु के दिये दो पैर, भला किस दिन काम आएंगे।

“कैसे उजड्ड वीराने में विद्यालय खोल धरा है सरकार ने, इससे भला तो चुंगी पर परचून की दुकान खोल लो।”
लिफ्ट मांगते, साधन तलाशते माथुर साहब रोज यही सोचा करते। 😪

धीरे धीरे कुछ जमापूंजी इकठ्ठा कर, उन्होंने एक स्कूटर ले लिया। बजाज का नया चमचमाता स्कूटर।

स्कूटर लेने के साथ ही उन्होंने एक प्रण लिया कि वो कभी किसी को लिफ्ट को मना न करेंगें।। आखिर वो भी जानते थे जब कोई लिफ्ट को मना करे तो कितनी शर्मिंदगी महसूस होती है। 🛵😇

अब माथुर साहब रोज अपने चमचमाते स्कूटर से विद्यालय जाते, और रोज कोई न कोई उनके साथ जाता। लौटते में भी कोई न कोई मिल ही जाता।🛵👬☀️🛵👬🏾☀️🛵👫☀️🛵👬🏻☀️

एक रोज लौटते वक्त एक व्यक्ति परेशान सा लिफ्ट के लिये हाथ फैलाये था, अपनी आदत अनुसार माथुर साहब ने स्कूटर रोक दिया। वह व्यक्ति पीछे बैठ गया। 🛵👬

थोड़ा आगे चलते ही उस व्यक्ति ने छुरा निकाल माथुर साहब की पीठ पर लगा दिया। 🕵🏽‍♂️🔪

“जितना रुपया है वो, और ये स्कूटर मेरे हवाले करो।” व्यक्ति बोला। 🕵🏽‍♂️🔪💵🛵

माथुर साहब की सिट्टी पिट्टी गुम, डर के मारे स्कूटर रोक दिया। पैसे तो पास में ज्यादा थे नहीं, पर प्राणों से प्यारा, पाई पाई जोड़ कर खरीदा स्कूटर तो था। 😪😓

“एक निवेदन है,” स्कूटर की चाभी देते हुए माथुर साहब बोले । 😇

“क्या?” वह व्यक्ति बोला। 🧐

“यह कि तुम कभी किसी को ये मत बताना कि ये स्कूटर तुमने कहाँ से और कैसे चोरी किया, विश्वास मानो मैं भी रपट नहीं लिखाउँगा।” माथुर साहब बोले। 😇

“क्यों?” व्यक्ति हैरानी से बोला। 🧐

“यह रास्ता बहुत उजड्ड है, निरा वीरान | सवारी मिलती नहीं, उस पर ऐसे हादसे सुन आदमी लिफ्ट देना भी छोड़ देगा।” माथुर साहब बोले।😪

व्यक्ति का दिल पसीजा, उसे माथुर साहब भले मानुष प्रतीत हुए, पर पेट तो पेट होता है। ‘ठीक है कहकर’ वह व्यक्ति स्कूटर ले उड़ा। 🛵💨

☀️

अगले दिन माथुर साहब सुबह सुबह अखबार उठाने दरवाजे पर आए, दरबाजा खोला तो स्कूटर सामने खड़ा था। माथुर साहब की खुशी का ठिकाना न रहा, दौड़ कर गए और अपने स्कूटर को बच्चे जैसा खिलाने लगे, देखा तो उसमें एक कागज भी लगा था।🛵📝

“मास्साब, यह मत समझना कि तुम्हारी बातें सुन मेरा हृदय पिघल गया। 😏

कल मैं तुमसे स्कूटर लूट उसे कस्बे ले गया, सोचा भंगार वाले के पास बेच दूँ।
“अरे ये तो मास्टर साहेब का स्कूटर है। 🤨” इससे पहले मैं कुछ कहता भंगार वाला बोला।

“अरे, उन्होंने ही ने मुझे बाजार कुछ काम से भेजा है।” कहकर मैं बाल बाल बचा। परन्तु शायद उस व्यक्ति को मुझ पर शक सा हो गया था। 🛵👀🏃‍♂️

फिर मैं एक हलवाई की दुकान गया, जोरदार भूख लगी थी तो कुछ सामान ले लिया। “अरे ये तो मास्साब का स्कूटर है।🤨” वो हलवाई भी बोल पड़ा। “हाँ, उन्हीं के लिये तो ये सामान ले रहा हूँ, घर में कुछ मेहमान आये हुए हैं।” कहकर मैं जैसे तैसे वहां से भी बचा। 🛵👀🏃‍♂️

फिर मैंने सोचा कस्बे से बाहर जाकर कहीं इसे बेचता हूँ। शहर के नाके पर एक पुलिस वाले ने मुझे पकड़ लिया।👮🏽‍♂️

“कहाँ, जा रहे हो और ये मास्साब का स्कूटर तुम्हारे पास कैसे।🤨” वह मुझ पर गुर्राया। किसी तरह उससे भी बहाना बनाया। 🛵👀🏃‍♂️💨

हे, मास्साब तुम्हारा यह स्कूटर है या आमिताभ बच्चन। सब इसे पहचानते हैं। 😪 आपकी अमानत मैं आपके हवाले कर रहा हूँ, इसे बेचने की न मुझमें शक्ति बची है न हौसला। आपको जो तकलीफ हुई उस एवज में स्कूटर का टैंक फुल करा दिया है।🙁”

पत्र पढ़ माथुर साहब मुस्कुरा दिए, और बोले। “कर भला तो हो भला।”
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🌳🦚आज की कहानी🦚🌳

💐💐इनाम💐💐

सात वर्षीय बेटी दूसरी कक्षा में प्रवेश पा गयी…..
क्लास में हमेशा से अव्वल आती रही है पिछले दिनों तनख्वाह मिली तो मैं उसे नयी स्कूल ड्रेस और जूते दिलवाने के लिए बाज़ार ले गया….

बेटी ने जूते लेने से ये कह कर मना कर दिया की पुराने जूतों को बस थोड़ी-सी मरम्मत की जरुरत है वो अभी इस साल काम दे सकते हैं…..
अपने जूतों की बजाए उसने मुझे अपने दादा की कमजोर हो चुकी नज़र के लिए नया चश्मा बनवाने को कहा…
मैंने सोचा बेटी अपने दादा से शायद बहुत प्यार करती है इसलिए अपने जूतों की बजाय उनके चश्मे को ज्यादा जरूरी समझ रही है….

खैर मैंने कुछ कहना जरुरी नहीं समझा और उसे लेकर ड्रेस की दुकान पर पहुंचा…..
दुकानदार ने बेटी के साइज़ की सफ़ेद शर्ट निकाली… डाल कर देखने पर शर्ट एक दम फिट थी फिर भी बेटी ने थोड़ी लम्बी शर्ट दिखाने को कहा….

मैंने बेटी से कहा….आराध्या बेटा…. ये शर्ट तुम्हें बिल्कुल सही है तो फिर और लम्बी क्यों ….
बेटी ने कहा …. पापा जी मुझे शर्ट स्कर्ट के अंदर ही डालनी होती है इसलिए थोड़ी लम्बी भी होगी तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा…..
लेकिन यही शर्ट मुझे अगली क्लास में भी काम आ जाएगी….पिछली वाली शर्ट भी अभी नयी जैसी ही पड़ी है लेकिन छोटी होने की वजह से मैं उसे पहन नहीं पा रही

मैं खामोश रहा….

घर आते वक़्त मैंने बेटी से पूछा…. तुम्हे ये सब बातें कौन सिखाता है आराध्या….

आराध्या बोली….पापा जी मैं अक्सर देखती हूँ कि कभी माँ अपनी साडी छोड़कर तो कभी आप अपने जूतों को छोडकर हमेशा मेरी किताबों और कपड़ो पर पैसे खर्च कर दिया करते है

गली- मोहल्ले में सब लोग कहते हैं के आप बहुत ईमानदार आदमी हैं और हमारे साथ वाले दीपक के पापा को सब लोग चोर, कुत्ता, बे-ईमान, रिश्वतखोर और जाने क्या क्या कहते है जबकि आप दोनों एक ही ऑफिस में काम करते हैं……
जब सब लोग आपकी तारीफ़ करते हैं तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है …, मम्मी और दादा जी भी आपकी तारीफ करते है

पापा जी मैं चाहती हूँ कि मुझे कभी जीवन में नए कपडे, नए जूते मिले या ना मिले….. लेकिन कोई आपको चोर, बे-ईमान, रिश्वतखोर या कुत्ता न कहे…..
मैं आपकी ताक़त बनना चाहती हूँ पापा जी…आपकी कमजोरी नहीं

बेटी की बात सुनकर मैं निरुतर था

आज मुझे पहली बार मुझे मेरी ईमानदारी का इनाम मिला था….
आज बहुत दिनों बाद आँखों में ख़ुशी, गर्व और सम्मान के आंसू थे….
दोस्तो …..दुनिया में सबसे बडा खूबसूरत इनाम अपने परिवारों अपने बच्चों की आँखों में स्वयं को एक हीरो की तरह देखना ….आपके बच्चे आपको अपना आदर्श मानते है आपको प्यार और सम्मान देते है मेरी नजर में इससे बडा इनाम आपकी मेहनत लग्न का नहीं हो सकता ……अपने अपनो के लिए आदर्श बनिए ताकि वह भी गर्वित होकर कहे ….ये है मेरे मम्मी पापा…
“दोस्तो #मान और #सम्मान पैसो से नही #संस्कारो से मिलता है..”

💐💐प्रेषक अभिजीत चौधरी💐💐

सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।

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