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हनुमान चालीसा


गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा के लाभ ?????

हनुमानजी सर्वशक्तिमान और एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनका नाम जपने से ही संकट, शरीर और मन से दूर हटने शुरू हो जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि एक हनुमान जी इस युग के जीवित देवता हैं और सभी बाधाओं को हरने वाले हैं। जो इनका नित ध्यान करता है वह हर तरह के संकट से मुक्त हो जाता है। आज हम यहाँ उन्हीं चमत्कारी लाभों के बारे में बात करने जा रहे हैं जो हनुमान चालीसा के पाठ से हमें प्राप्त होते हैं।

क्यों करते हैं हम हनुमान चालीसा का पाठ?:-
शास्त्रों अनुसार कलयुग में हनुमानजी की भक्ति को सबसे जरूरी, प्रथम और उत्तम बताया गया है। मंदिर, दरगाह, बाबा, गुरु, देवी-देवता आदि सभी जगहों पर भटकने के बाद भी कोई शांति और सुख नहीं मिलता और संकटों का जरा भी समाधान नहीं होता है। साथ ही मृत्युतुल्य कष्ट हो रहा हो तो सिर्फ हनुमान जी की भक्ति ही बचा सकती है।

हनुमानजी की भक्ति सबसे सरल और जल्द ही फल प्रदान करने वाली मानी गई है। यह भक्ति जहां हमें भूत-प्रेत जैसी न दिखने वाली आपदाओं से बचाती है, वहीं यह ग्रह-नक्षत्रों के बुरे प्रभाव से भी बचाती है। जो व्यक्ति‍ प्रतिदिन हनुमान चालीसा पाठ करता है उसके साथ कभी भी घटना-दुर्घटना नहीं होती।

श्रीराम के अनन्य भक्त श्रीहनुमान अपने भक्तों और धर्म के मार्ग पर चलने वाले लोगों की हर कदम पर मदद करते हैं, इसीलिए हनुमान चालीसा पाठ में कहा है कि “और देवता चित्त न धरहीं”( किसी अन्य देवता की आवश्यकता नहीं)।

हनुमानजी को मनाने के लिए सबसे सरल उपाय है हनुमान चालीसा का नित्य पाठ। हनुमानजी की यह स्तुति सबसे सरल और सुरीली है। तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा बहुत प्रभावकारी है। इसकी सभी चौपाइयां मंत्र ही हैं। जिनके निरंतर जप से ये सिद्ध हो जाती हैं और पवनपुत्र हनुमानजी की कृपा प्राप्त हो जाती है। यही सब कारण हैं जिनकी वजह से हमें हनुमान चालीसा का पाठ नित्य ही करना चाहिए।

क्या है हनुमान चालीसा के पाठ का रहस्य? क्यों हमें इस पाठ से चमत्कारी लाभ प्राप्त होते हैं? आइए चर्चा करते हैं।

धार्मिक उपदेशों, ग्रंथों में वह ताकत है जो हमारे दुःखों का निवारण करती है। जब भी हम परेशान होते हैं तो अपनी समस्या का हल पाने के लिए शास्त्रीय उपायों का इस्तेमाल जरूर करते हैं। इसे आप चमत्कार ही कह लीजिए, लेकिन शास्त्रों में हमारी हर समस्या का समाधान है।

यदि हम निर्देशों के अनुसार उपाय करते चले जाएं, तो सफल जरूर होते हैं। इसलिए आज हम आपको हनुमान चालीसा के माध्यम से कुछ ऐसे उपाय बताएंगे जो आपके जीवन को सुखी बना देने में सक्षम सिद्ध होंगे।

भगवान हनुमान को समर्पित हनुमान चालीसा के बारे में कौन नहीं जानता, गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रची गई हनुमान चालीसा में वह चमत्कारी शक्ति है जो हमारे दुखों को हर लेती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस चमत्कार का रहस्य क्या है?

इसका जवाब हम आपको एक पौराणिक कथा के द्वारा देते हैं।

बचपन में जब हनुमानजी को काफी भूख लगी थी तो उन्होंने आसमान में चमकते हुए सूरज को एक फल समझ लिया था।उनके पास तब ऐसी शक्तियां थीं जिसके द्वारा वे उड़कर सूरज को निगलने के लिए आगे बढ़े, लेकिन तभी देवराज इन्द्र ने हनुमानजी पर शस्त्र से प्रहार कर दिया जिसके कारण वे मूर्छित हो गए।

हनुमानजी के मूर्छित होने की बात जब वायु देव को पता चली तो वे काफी नाराज हुए। लेकिन जब सभी देवताओं को पता चला कि हनुमानजी भगवान शिव के रुद्र अवतार हैं, तब सभी देवताओं ने हनुमानजी को कई शक्तियां दीं।

कहते हैं कि सभी देवतागण ने जिन मंत्रों और हनुमानजी की विशेषताओं को बताते हुए उन्हें शक्ति प्रदान की थी, उन्हीं मंत्रों के सार को गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान चालीसा में वर्णित किया है। इसलिए हनुमान चालीसा पाठ को चमत्कारी माना गया है।

हनुमान चालीसा में मंत्र ना होकर हनुमानजी की पराक्रम की विशेषताएं बताई गईं हैं। कहते हैं इन्हीं का जाप करने से व्यक्ति सुख प्राप्त करता है।

इन 5 चौपाइयों को यदि नियमित सच्चे मन से वाचन किया जाए तो यह परम फलदायी सिद्ध होती हैं।

हनुमान चालीसा का वाचन मंगलवार या शनिवार को करना परम शुभ होता है। ध्यान रखें हनुमान चालीसा की इन चौपाइयों को पढ़ते समय उच्चारण में कोई गलती ना हो।

  1. भूत-पिशाच निकट नहीं आवे। महावीर जब नाम सुनावे।।

इस चौपाइ का निरंतर जाप उस व्यक्ति को करना चाहिए जिसे किसी का भय सताता हो। इस चौपाइ का नित्य रोज प्रातः और सायंकाल में 108 बार जाप किया जाए तो सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है।

  1. नासै रोग हरै सब पीरा।
    जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

यदि कोई व्यक्ति बीमारियों से घिरा रहता है, अनेक इलाज कराने के बाद भी वह सुख नही पा रहा, तो उसे इस चौपाइ का जाप करना चाहिए। इस चौपाइ का जाप निरंतर सुबह-शाम 108 बार करना चाहिए। इसके अलावा मंगलवार को हनुमान जी की मूर्ति के सामने बैठकर पूरी हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए, इससे जल्द ही व्यक्ति रोगमुक्त हो जाता है।

  1. अष्ट-सिद्धि नवनिधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।

यह चौपाइ व्यक्ति को समस्याओं से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है। यदि किसी को भी जीवन में शक्तियों की प्राप्ति करनी हो, ताकि वह कठिन समय में खुद को कमजोर ना पाए तो नित्य रोज, ब्रह्म मुहूर्त में आधा घंटा इन पंक्तियों का जप करे, लाभ प्राप्त हो जाएगा।

  1. विद्यावान गुनी अति चातुर। रामकाज करिबे को आतुर।।

यदि किसी व्यक्ति को विद्या और धन चाहिए तो इन पंक्तियों के जप से हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है। प्रतिदिन 108 बार ध्यानपूर्वक जप करने से व्यक्ति के धन सम्बंधित दुःख दूर हो जाते हैं।

  1. भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्रजी के काज संवारे।।

जीवन में ऐसा कई बार होता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद कार्य में विघ्न प्रकट होते हैं। यदि आपके साथ भी कुछ ऐसा हो रहा है तो इस चौपाइ का कम से कम 108 बार जप करने से लाभ होगा।

किंतु हनुमान चालीसा का महत्त्व केवल इन पांच चौपाइयों तक सीमित नहीं है। पूर्ण हनुमान चालीसा का भी अपना एक महत्त्व एवं इस पाठ को पढ़ने का लाभ है।

बहुत कम लोग जानते हैं कि हिन्दू धर्म में हनुमान जी की आराधना हेतु ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ सर्वमान्य साधन है। इसका पाठ सनातन जगत में जितना प्रचलित है, उतना किसी और वंदना या पूजन आदि में नहीं दिखाई देता।

तो इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए हम जानते हैं कि सम्पूर्ण हनुमान चालीसा किस तरह से लाभप्रद है, क्या क्या है जो हम हनुमान चालीसा का पाठ करके प्राप्त कर सकते हैं?

हनुमान चालीसा के लाभ :-

  1. हनुमान चालीसा को डर, भय, संकट या विपत्ति आने पर पढ़ने से सारे कष्‍ट दूर हो जाते हैं।
  2. अगर किसी व्‍यक्ति पर शनि का संकट छाया है तो उस व्‍यक्ति का हनुमान चालीसा पढ़ना चाहिए। इसस उसके जीवन में शांति आती है
  3. अगर किसी व्‍यक्ति को बुरी शक्तियां परेशान करती हैं तो उसे चालीसा पढ़ने से मुक्ति मिल जाती है।
  4. कोई भी अपराध करने पर अगर आप ग्‍लानि महसूस करते हैं और क्षमा मांगना चाहते है तो हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  5. भगवान गणेश की तरह हनुमान जी भी कष्‍ट हरते हैं। ऐसे में हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी लाभ मिलता है।
  6. हनुमान चालीसा पढ़ने से मन शांत होता है तनाव मुक्‍त हो जाता है।
  7. सुरक्षित यात्रा के लिए हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ें। इससे लाभ मिलता है और भय नहीं लगता है।
  8. किसी भी प्रकार की इच्‍छा होने पर भगवन हनुमान के चालीसा का पाठ पढ़ने से लाभ मिलता है।
  9. हनुमान चालीसा के पाठ से दैवीय शक्ति मिलती है। इससे सुकुन मिलता है।
  10. हनुमान जी बुद्धि और बल के ईश्‍वर हैं। उनका पाठ करने से यह दोनों ही मिलते हैं।
  11. हनुमान चालीसा का पाठ करने से कुटिल से कुटिल व्‍यक्ति का मन भी अच्‍छा हो जाता है।
  12. हनुमान चालीसा का पाठ करने से एकता की भावना में विकास होता है।
  13. हनुमान चालीसा का पाठ करने से नकरात्‍मक भावनाएं दूर हो जाती है और मन में सकारात्‍मकता आती है।

हनुमान चालीसा का पाठ मंगलवार या शनिवार के दिन किया जा सकता है। इसके अलावा आप किसी भी शुभ मुहूर्त में तथा विपत्ति के समय में हनुमान जी की साधना कर सकते हैं। या हर रोज भी आप हनुमान चालीसा पाठ कर सकते हैं। लेकिन मंगलवार और शनिवार और उसमें भी मंगलवार विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण होता है इसलिए जो साधक हर रोज हनुमान चालीसा नहीं पढ़ पाते या जपते वो मंगलवार को अवश्य ही हनुमान चालीसा का पाठ करें।

भक्तों का अनुभव है कि हनुमान चालीसा पढ़ने से परेशानियों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है।यदि आप भी दिल से, पवनपुत्र हनुमान जी की भावपूर्ण वंदना करते हैं, तो आपको ना केवल बजरंग बलि का अपितु साथ ही श्रीराम का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा।–

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देवरानी-जेठानी

“अरे सुनीता! पहले मीनू को दे गरम परांठा… देर हो रही है इसे… मेरा क्या है, बाद में भी ले लूंगी..” सासु मां बड़े लाड़ से बोलीं ।

सुनीता ने चुपचाप परांठा मीनू की प्लेट में रख दिया और वापस रसोई में चली गई। मीनू पढ़ाई का कीड़ा थी। पढ़ते-पढ़ते बैंक में बड़ी ऑफिसर बन गई थी, लेकिन फिर भी पढ़ने का जुनून खत्म नहीं हुआ था। कलेक्टर बनने का सपना देख रही थी…

मां-बाप कब तक रुकते। समझा-बुझाकर

शादी कर दी, इस शर्त पर, कि ससुराल

वाले आगे पढ़ने से नहीं रोकेंगे।

ससुराल वालों को भला क्या आपत्ति होती.. कमाऊ, होनहार बहू.. बेटा एम एन सी में अच्छे पद पर था, लेकिन फिर भी सरकारी नौकरी तो सरकारी होती है।

ससुराल पहुंच कर मीनू ने देखा कि जेठानी सुनीता की कदर एक नौकरानी से ज्यादा नहीं है। बातों-बातों में मीनू ने महसूस किया कि सुनीता भी कम प्रतिभाशाली छात्रा नही रही थी.. लेकिन पिता की

असामयिक मृत्यु और फिर ज

विवाह ने उसे इस स्थिति में डाल दिया

था।

अब तक तो ससुराल में अपनी स्थिति से शायद संतुष्ट थी, लेकिन अब मीनू का घर में रुआब देखकर वह निराशा के गर्त में जा रही थी!! शुरुआत मे मीनू ने अपनी सामान्य ज्ञान की पुस्तक उसके हाथ में पकड़ाकर प्रश्न पूछने के लिए कहा और महसूस किया कि वो सब कुछ बहुत जल्दी याद कर लेती है.. बस फिर क्या था.. मीनू ने सुनीता को लगातार प्रोत्साहित किया और अंततः वो पढ़ने के लिए राजी हो गई। घर वालों को आभास भी नहीं हुआ और मीनू ने सुनीता की तैयारी करवा के कितने ही प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरवा दिए।

आज रिजल्ट निकला था… सुनीता अधिकारी वर्ग में चयनित हो गई थी… और मीनू बन गई थी… कलेक्टर ! “सचमुच बहनें सदा माँ के पेट से ही जन्म नहीं लेती..!” सुनीता ने आंसू छुपाने के लिए मीनू की ओर अपनी पीठ कर ली । दोस्तों, घड़ी की सुईयो की तरह जीवन में अपने रिश्तों को बनाए रखें… कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई तेज है और कोई धीमा, मायने रखता है जुड़े रहना..