Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

मकसद


🌸🌸मकसद 🌸🌸

उसने आंखें खोली बहुत मुश्किल हो रही थी। पिछली दो रात पहले ड्रग्स का ओवर डोज लिया था। क्योंकि वह बहुत गमजदा था। डाक्टर की रिपोर्ट में एचआईवी पॉजिटिव लिखा था। ये उन अंधी गलियों से गुजरने का परिणाम था या फिर वो ड्रग्स की सीरिंज जिनका इस्तेमाल उसने बिना सोचे समझे किया था। ऐसा कौन-सा ऐब था जो उसमें नहीं था। मां बाप के प्यार और अपने इकलौते बेटे होने का उसने हमेशा गलत फायदा उठाया था। मां बाप ने बडे़ अरमान से उसे पढ़ने बाहर भेजा था।हर जरूरत पूरी की थी पर उसने गलत संगत में पड़ कर अपने आप को बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया था। मां का फोन आया। मां ने कांपती हुई आवाज में पूछा “श्री”मेरे बच्चे कैसा है तू? बहुत बुरा सपना देखा मैंने आज सुबह। उसके शब्द गले में अटक गए।बड़ी मुश्किल से बोल पाया नहीं मां मैं ठीक हूं।आप और पापा कैसे हो? उसका मन हुआ कि गला फाड़कर रो पड़े।पर अगले पल ही अपने को संभालते हुए बोला। मां आप मेरी इतनी चिंता मत किया करो। आपकी तबियत पहले ही खराब रहती है। मां की आवाज में उसके आंसुओं का अक्श था। हमारे पास तेरे सिवा है ही क्या? अरे तुझे ये ‌बताने को फोन किया आज नवरात्र का सातवां दिन है। आज महाकाली की पूजा होती है।बेटा हम तो रात में हवन करते हैं।तू भी मंदिर में जाकर शीश नवा कर अपनी कामयाबी की प्रार्थना करना। ठीक है मां।उसका मन विचलित हो उठा। वह बेचैन था उठा नहा धोकर कर तैयार हो कर मंदिर चल दिया। आज महाकाली से अपने सारे प्रश्र पूछूंगा कि उन्होंने क्यों किया मेरे साथ ऐसा। महाकाली की मूर्ति के आगे नतमस्तक हो कर रो पड़ा। मां क्यों किया मेरे साथ ऐसा? मेरी मां का क्या ‌होगा? वो दोनों तो मर जाएंगे। जबाब दीजिए मेरे साथ ऐसा क्यों किया? तभी सामने एक प्रकाश प्रज्वलित हो उठा।आज उसके सामने स्वयं महाकाली वो तो पापी है ये कैसे हो सकता है? मां काली का रौद्र रूप देख कर वो सहम गया। मां की गंभीर वाणी वातावरण में गूंज उठी। इसका उत्तर स्वयं से पूछो। क्या ये सब वस्तुएं मैंने तुम्हें दी हैं? मैंने तो तुम्हें खूबसूरत प्रकृति दी थी। मनुष्य का शरीर दिया था। सोचने समझने की शक्ति दी थी। और तुमने क्या किया?सब कुछ खत्म कर दिया। और अब मुझे इसका दोष दे रहे हो। अपने पतन का कारण तुम स्वयं हो। मां काली का अट्टहास वातायन में गूंज उठा। अगले पल उसके चेहरे पर पानी की बूंदें गिरी लोग उसे उठा रहे थे । अरे तुम बेहोश कैसे हो ग‌ए देवी मां के सामने। चलो डाक्टर के पास ले चलें। उसने कहा नहीं मैं ठीक हूं।वह‌ बुदबुदाया होश में तो आज आया हूं। आज सत्य से साक्षात्कार हुआ है।वह उठ खड़ा हुआ यह सोचते हुए जो जीवन शेष‌ है उससे अपने जैसे भटके हुए लोगों को रास्ता दिखाऊंगा अगर किसी एक को भी सही ‌राह दिखा पाया तो शायद जिन्दगी उतनी बे मकसद खत्म न हो जितनी कि आज है। उसकी कम होती सांसों ने उसे जीने का एक “मकसद” दे दिया था।

लेखिका–रचना कंडवाल
सर्वाधिकार सुरक्षित

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