Posted in हिन्दू पतन

अलाउद्दीन अहमद


कर्नाटक के बीदर जिले में 15वीं शताब्दी के एक संत का मकबरा है। अलाउद्दीन अहमद शाह उर्फ बाबा वली का। दक्षिण भारत खासकर पूरे कर्नाटक में उन्हें एक संत के रूप में याद किया जाता है ।

इस मकबरे पर हर साल उर्स लगता है जिसमें मुसलमानों से भी ज्यादा हिन्दू शिरकत करते है । वर्ष भर तो हिन्दू श्रद्धालु इस मकबरे पर आते ही आते हैं लेकिन उर्स के दौरान हिंदुओ के जत्थे के जत्थे उमड़ने लगते हैं ।

हिंदुओ में अलाउद्दीन अहमद शाह उर्फ बाबा वली बहुत पूजनीय हैं। उनकी लोकप्रियता का अन्दाजा इस बात से लगाइए कि उनकी मौत का उर्स इस्लामिक कलेंडर हिजरी सम्वत के आधार पर नहीं बल्कि हिन्दू पञ्चाङ्ग के आधार पर मनाया जाता है । यह हर साल फाल्गुन के महीने में होली वाले दिन (पूर्णिमा) को मनाया जाता है।

वैसे तो इस मकबरे का पूरी तरह से रख-रखाव मुसलमानों द्वारा किया जाता है लेकिन बाबा वली के उर्स की अध्यक्षता कोई मुस्लिम उलेमा या सूफी संत नहीं करता बल्कि शैव लिंगायतों का जंगम (लिंगायत धर्म गुरु) करता है।

हर साल इस उर्स में लाखों हिन्दू आते हैं । पूरी श्रद्धा से अलाउद्दीन अहमद शाह उर्फ बाबा वली के मकबरे पर माथा टेकते हैं और खुलकर सोना-चांदी , रुपया-पैसा दान करते हैं । इनकी महिमा ऐसी है कि लिंगायत श्रद्धालु तो अलाउद्दीन अहमद शाह उर्फ बाबा वली को अपने लिंगायत संत अल्लामा प्रभु का अवतार मानते हैं।

इस उर्स के दौरान जंगम बदन पर इस्लामिक खिलअत (ढीला फारसी चोगा/लबादा) व सर पर कुलाह (फारसी लंबी टोपी) पहनता है और रोज शाही प्रतीकों व गाजे-बाजे के साथ शाही कब्र पर जाता है । वहां शंख बजाता है । हिन्दू परंपराओं के अनुसार फल , फूल , मिठाईयां चढ़ाता और नारियल तोड़ता है । कुल मिलाकर उर्स के दौरान बड़ा सेक्युलरिज्म से भरा माहौल रहता है।

सवाल ये है कि आखिर ये अलाउद्दीन अहमद शाह उर्फ बाबा वली थे कौन ? इन्होंने किया क्या था जिसकी वजह से ये मुसलमानों से भी ज्यादा हिंदुओ में पूजनीय हैं…………?

तो आपकी जानकारी के लिए बता देता हूँ कि अलाउद्दीन अहमद शाह दक्षिण भारत के बहमनी साम्राज्य का सुलतान था । वही बहमनी साम्राज्य जिसकी नींव एक विदेशी तुर्क सैनिक अलाउद्दीन बहमन शाह ने रखी थी।

अलाउद्दीन अहमद शाह बहमनी साम्राज्य का नौवां सुल्तान था । इसने अपने शासन काल में हजारों हिन्दू मंदिरों को तोड़ा था । जब यह किसी हमले में 20 हजार हिंदुओं को कत्ल करवा देता था तब ये अपनी सेना व सिपहसालारों को खास दावत देकर जश्न मनाता था।

इसने हिंदुओ के कत्लेआम के लिए ईराक, खुरासान , ट्रांसजेनिया , तुर्की व अरब से तीरंदाजी में विशेष रूप से प्रशिक्षित दस हजार पेशेवर हत्यारों को भाड़े पर बुलाया था और इन हत्यारों का उसने विजयनगर साम्राज्य के खिलाफ खुलकर इस्तेमाल भी किया।

इसने कर्नाटक के प्रसिद्ध मंदिरों को तोड़ उनकी मूर्तियों के टुकड़े करवाकर सूफी संत गेसू दराज के मकबरे व मस्जिदों की सीढ़ियों में जड़वा दिया था ताकि नमाजी उन मूर्तियों के टुकड़ो पर अपने पांव रखकर सीढियां चढ़ते हुए नमाज पढ़ने आये।

अपने कातिलों से मोहब्बत और अपने आततायियों की शान में सजदा करने का हुनर सिर्फ हिंदुओ को ही आता है।

Ashish Pradhan जी की पोस्ट

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