Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

2️⃣5️⃣❗0️⃣9️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣1️⃣
ध्यान के पंख

 *✍️  बहुत समय पहले की बात है,एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये,वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे,राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया।*

  *कुछ समय पश्चात राजा ने देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे,और अब पहले से भी शानदार लग रहे हैं,राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे, आदमी से कहा, मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ, तुम इन्हें उड़ने का इशारा करो*

आदमी ने ऐसा ही किया, इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था वहीँ दूसरा, कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ गया जिससे वो उड़ा था ,ये देख राजा को कुछ अजीब लगा, क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा..? राजा ने सवाल किया

सेवक बोला, जी हुजूर, इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है, वो इस डाल को छोड़ता ही नहीं, राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे, और वो दूसरे बाज को भी उसी तरह उड़ता देखना चाहते थे

अगले दिन पूरे राज्य में ऐलान करा दिया गया, कि जो व्यक्ति इस बाज को ऊँचा उड़ाने में कामयाब होगा उसे ढेरों इनाम दिया जाएगा, फिर क्या था

एक से एक विद्वान् आये और बाज को उड़ाने का प्रयास करने लगे, पर हफ़्तों बीत जाने के बाद भी बाज का वही हाल था, वो थोडा सा उड़ता और वापस डाल पर आकर बैठ जाता, फिर एक दिन कुछ अनोखा हुआ,राजा ने देखा कि उसके दोनों बाज आसमान में उड़ रहे हैं, उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ और उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति का पता लगाने को कहा जिसने ये कारनामा कर दिखाया था

वह व्यक्ति एक किसान था, अगले दिन वह दरबार में हाजिर हुआ, उसे इनाम में स्वर्ण मुद्राएं भेंट करने के बाद राजा ने कहा, मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ, बस तुम इतना बताओ कि जो काम बड़े-बड़े विद्वान् नहीं कर पाये वो तुमने कैसे कर दिखाया

मालिक..!

मैं तो एक साधारण सा किसान हूँ

मैं ज्ञान की ज्यादा बातें नहीं जानता मैंने तो बस वो डाल काट दी,जिस पर बैठने का आदि हो चुका था, और जब वो डाल ही नहीं रही तो वो भी अपने साथी के साथ ऊपर उड़ने लगा ।
हम सभी ऊँची उड़ान भरने के लिए ही बने हैं,लेकिन कई बार हम जो कर रहे होते है, उसके इतने आदी हो जाते हैं कि अपनी ऊँची उड़ान भरने की क्षमता को भूल जाते हैं,जनम से हम वासनाओं की डाल पर बैठते आए हैं और अज्ञानवश ये भी हमें ज्ञात नहीं कि जो हम आज कर रहे हैं,वहीं हमने वर्षों से यही किया है,और ये हम भूल ही गए हैं कि हम उड़ान भर सकते हैं,अतृप्त वासनाओं की डाल पर बैठे बैठे हमें विस्मृत हो गया है,कि ध्यानरूपी पंख भी हैं, हमारे पास जिससे हम उड़ान भर सकते हैं, व्यर्थ से सार्थक की… सोचे भर सकते है या नही..?
🙏🙏🏽🙏🏼जय जय श्री राधे🙏🏿🙏🏾🙏🏻

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2️⃣5️⃣❗0️⃣9️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣1️⃣
ध्यान के पंख

 *✍️  बहुत समय पहले की बात है,एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये,वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे,राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया।*

  *कुछ समय पश्चात राजा ने देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे,और अब पहले से भी शानदार लग रहे हैं,राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे, आदमी से कहा, मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ, तुम इन्हें उड़ने का इशारा करो*

आदमी ने ऐसा ही किया, इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था वहीँ दूसरा, कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ गया जिससे वो उड़ा था ,ये देख राजा को कुछ अजीब लगा, क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा..? राजा ने सवाल किया

सेवक बोला, जी हुजूर, इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है, वो इस डाल को छोड़ता ही नहीं, राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे, और वो दूसरे बाज को भी उसी तरह उड़ता देखना चाहते थे

अगले दिन पूरे राज्य में ऐलान करा दिया गया, कि जो व्यक्ति इस बाज को ऊँचा उड़ाने में कामयाब होगा उसे ढेरों इनाम दिया जाएगा, फिर क्या था

एक से एक विद्वान् आये और बाज को उड़ाने का प्रयास करने लगे, पर हफ़्तों बीत जाने के बाद भी बाज का वही हाल था, वो थोडा सा उड़ता और वापस डाल पर आकर बैठ जाता, फिर एक दिन कुछ अनोखा हुआ,राजा ने देखा कि उसके दोनों बाज आसमान में उड़ रहे हैं, उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ और उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति का पता लगाने को कहा जिसने ये कारनामा कर दिखाया था

वह व्यक्ति एक किसान था, अगले दिन वह दरबार में हाजिर हुआ, उसे इनाम में स्वर्ण मुद्राएं भेंट करने के बाद राजा ने कहा, मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ, बस तुम इतना बताओ कि जो काम बड़े-बड़े विद्वान् नहीं कर पाये वो तुमने कैसे कर दिखाया

मालिक..!

मैं तो एक साधारण सा किसान हूँ

मैं ज्ञान की ज्यादा बातें नहीं जानता मैंने तो बस वो डाल काट दी,जिस पर बैठने का आदि हो चुका था, और जब वो डाल ही नहीं रही तो वो भी अपने साथी के साथ ऊपर उड़ने लगा ।
हम सभी ऊँची उड़ान भरने के लिए ही बने हैं,लेकिन कई बार हम जो कर रहे होते है, उसके इतने आदी हो जाते हैं कि अपनी ऊँची उड़ान भरने की क्षमता को भूल जाते हैं,जनम से हम वासनाओं की डाल पर बैठते आए हैं और अज्ञानवश ये भी हमें ज्ञात नहीं कि जो हम आज कर रहे हैं,वहीं हमने वर्षों से यही किया है,और ये हम भूल ही गए हैं कि हम उड़ान भर सकते हैं,अतृप्त वासनाओं की डाल पर बैठे बैठे हमें विस्मृत हो गया है,कि ध्यानरूपी पंख भी हैं, हमारे पास जिससे हम उड़ान भर सकते हैं, व्यर्थ से सार्थक की… सोचे भर सकते है या नही..?
🙏🙏🏽🙏🏼जय जय श्री राधे🙏🏿🙏🏾🙏🏻

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जंगल के स्कूल 😗

हुआ यूँ कि जंगल के राजा शेर ने ऐलान कर दिया कि अब आज के बाद कोई अनपढ़ न रहेगा। हर पशु को अपना बच्चा स्कूल भेजना होगा। राजा साहब का स्कूल पढ़ा-लिखाकर सबको Certificate बँटेगा।

सब बच्चे चले स्कूल। हाथी का बच्चा भी आया, शेर का भी, बंदर भी आया और मछली भी, खरगोश भी आया तो कछुआ भी, ऊँट भी और जिराफ भी।

FIRST UNIT TEST/EXAM हुआ तो हाथी का बच्चा फेल।

“किस Subject में फेल हो गया जी?”

“पेड़ पर चढ़ने में फेल हो गया, हाथी का बच्चा।”

“अब का करें?”

“ट्यूशन दिलवाओ, कोचिंग में भेजो।”

अब हाथी की जिन्दगी का एक ही मक़सद था कि हमारे बच्चे को पेड़ पर चढ़ने में Top कराना है।

किसी तरह साल बीता। Final Result आया तो हाथी, ऊँट, जिराफ सब के बच्चे फेल हो गए। बंदर की औलाद first आयी।

Principal ने Stage पर बुलाकर मैडल दिया। बंदर ने उछल-उछल के कलाबाजियाँ दिखाकर गुलाटियाँ मार कर खुशी का इजहार किया।

उधर अपमानित महसूस कर रहे हाथी, ऊँट और जिराफ ने अपने-अपने बच्चे कूट दिये
नालायकों, इतने महँगे स्कूल में पढ़ाते हैं तुमको | ट्यूशन-कोचिंग सब लगवाए हैं। फिर भी आज तक तुम पेड़ पर चढ़ना नहीं सीखे।
सीखो, बंदर के बच्चे से सीखो कुछ, पढ़ाई पर ध्यान दो।

फेल हालांकि मछली भी हुई थी। बेशक़ Swimming में First आयी थी पर बाकी subject में तो फेल ही थी।

मास्टरनी बोली, “आपकी बेटी के साथ attendance की problem है

मछली ने बेटी को आँखें दिखाई!
बेटी ने समझाने की कोशिश की कि, “माँ, मेरा दम घुटता है इस स्कूल में। मुझे साँस ही नहीं आती। मुझे नहीं पढ़ना इस स्कूल में। हमारा स्कूल तो तालाब में होना चाहिये न?”

मां – नहीं, ये राजा का स्कूल है।

तालाब वाले स्कूल में भेजकर मुझे अपनी बेइज्जती नहीं करानी। समाज में कुछ इज्जत Reputation है मेरी। तुमको इसी स्कूल में पढ़ना है। पढ़ाई पर ध्यान दो।

हाथी, ऊँट और जिराफ अपने-अपने बच्चों को पीटते हुए ले जा रहे थे।

रास्ते में बूढ़े बरगद ने पूछा, “क्यों पीट रहे हो, बच्चों को?”

जिराफ बोला, “पेड़ पर चढ़ने में फेल हो गए?”

बूढ़ा बरगद सोचने के बाद पते की बात बोला,

“पर इन्हें पेड़ पर चढ़ाना ही क्यों है ?”
उसने हाथी से कहा,

“अपनी सूंड उठाओ और सबसे ऊँचा फल तोड़ लो। जिराफ तुम अपनी लंबी गर्दन उठाओ और सबसे ऊँचे पत्ते तोड़-तोड़ कर खाओ।”
ऊँट भी गर्दन लंबी करके फल पत्ते खाने लगा।
हाथी के बच्चे को क्यों चढ़ाना चाहते हो पेड़ पर? मछली को तालाब में ही सीखने दो न?

दुर्भाग्य से आज स्कूली शिक्षा का पूरा Curriculum और Syllabus सिर्फ बंदर के बच्चे के लिये ही Designed है। इस स्कूल में 35 बच्चों की क्लास में सिर्फ बंदर ही First आएगा। बाकी सबको फेल होना ही है। हर बच्चे के लिए अलग Syllabus, अलग Subject और अलग स्कूल चाहिये।

हाथी के बच्चे को पेड़ पर चढ़ाकर अपमानित मत करो। जबर्दस्ती उसके ऊपर फेलियर का ठप्पा मत लगाओ। ठीक है, बंदर का उत्साहवर्धन करो पर शेष 34 बच्चों को नालायक, कामचोर, लापरवाह, Duffer, Failure घोषित मत करो।

मछली बेशक़ पेड़ पर न चढ़ पाये पर एक दिन वो पूरा समंदर नाप देगी।

शिक्षा – अपने बच्चों की क्षमताओं व प्रतिभा की कद्र करें चाहे वह पढ़ाई, खेल, नाच, गाने, कला, अभिनय,व्यापार, खेती, बागवानी, मकेनिकल, किसी भी क्षेत्र में हो और उन्हें उसी दिशा में अच्छा करने दें |

जरूरी नहीं कि सभी बच्चे पढ़ने में ही अव्वल हो! बस जरूरत हैं उनमें अच्छे संस्कार व नैतिक मूल्यों की जिससे बच्चे गलत रास्ते नहीं चुने l

सभी अभिभावकों को सादर समर्पित
🙏🙏🙏