Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

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 *असली संत कौन*?

      *🍁 हरे कृष्ण 🍁*

एक सन्त को एक नाविक रोज इस पार से उस पार ले जाता था, बदले मैं कुछ नहीं लेता था, वैसे भी सन्त के पास पैसा कहां होता था !

नाविक सरल था, पढ़ा लिखा तो नहीं, पर समझ की कमी नहीं थी ! सन्त रास्ते में ज्ञान की बात कहते, कभी भगवान की सर्वव्यापकता बताते , और कभी अर्थ सहित श्रीमदभगवद्गीता के श्लोक सुनाते…

✍️नाविक मछुआरा बड़े ध्यान से सुनता, और बाबा की बात ह्रदय में बैठा लेता !

🕉️एक दिन उस पार उतरने पर सन्त नाविक को कुटिया में ले गये, और बोले, वत्स, मैं पहले व्यापारी था, धन तो कमाया था, पर अपने परिवार को आपदा से नहीं बचा पाया था, अब ये धन मेरे किसी का काम का नहीं, तुम ले लो, तुम्हारा जीवन संवर जायेगा, तेरे परिवार का भी भला हो जाएगा !

✍️नहीं बाबाजी, मैं ये धन नही ले सकता, मुफ्त का धन घर में जाते ही आचरण बिगाड़ देगा , कोई मेहनत नहीं करेगा, आलसी जीवन लोभ लालच ,और पाप बढायेगा ! आप ही ने मुझे ईश्वर के बारे में बताया , मुझे तो आजकल लहरों में भी कई बार वो नजर आया……जब मै उसकी नजर में ही हूँ, तो फिर अविश्वास क्यों करूं, मैं अपना काम करूं, और शेष उसी पर छोड़ दूं !
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✍️ प्रसंग तो समाप्त हो गया, पर एक सवाल छोड़ गया, “इन दोनों पात्रों में सन्त कौन था ?

🛕एक वो था, जिसे दुःख आया, गृह त्याग किया , नाम दान लिया, धर्म ग्रंथों का अध्ययन किया, याद किया, और समझाने लायक स्थिति में भी आ गया, फिर भी धन की ममता नहीं छोड़ पाया, सुपात्र की तलाश करता रहा ।

✍️..और दूसरी तरफ वो निर्धन नाविक , सुबह खा लिया, तो शाम का पता नहीं, फिर भी पराये धन के प्रति कोई ललक नहीं !
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🙏संसार में लिप्त रहकर भी निर्लिप्त रहना आ गया, न ही घर बार छोड़ा , न ही नाम दान लिया, पर उस का ईश्वरीय सत्ता में विश्वास जम गया ! श्रीमदभगवद्गीता के श्लोक को ना केवल समझा बल्कि उन्हें व्यवहारिक जीवन में कैसे उतारना है ये सीख गया, और पल भर में धन के मोह को ठुकरा गया!

✍️”वास्तव में वैरागी कौन”….विचार कीजिए !!🙏
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सन्तोष और प्रसन्नता वह औषधि है…जो हर मर्ज को ठीक कर सकती है , सबसे ख़ास बात यह है कि ये मिलती अपने अन्दर ही है !!

” ✍️सदा सुखी कौन है ? जिसको भगवान् की कृपा पर भरोसा है और उनके न्याय पर विश्वास है , उसको संसार की कोई भी स्थिति विचलित नहीं कर सकती “
ठाकुर बांके बिहारी लाल की जय !!

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