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आज का प्रेरक प्रसङ्ग

   !! माँ की Value (कीमत) !!

स्वामी विवेकानंद एक बार किसी काम से अमेरिका गये हुए थे, और वहां उनके पास एक अंग्रेज़ आया और उसने स्वामी जी से एक सवाल पूछा कि स्वामी जी आपके हिंदुस्तान में “माँ” को सबसे ऊँचा दर्जा क्यों दिया जाता है, क्यों लोग पहले माँ को पूजते और बाद में भगवान को। स्वामी विवेकानंद उसकी तरफ मुस्कुराते हुए देखे और उस अंग्रेज से कहा कि वहां पास में एक पत्थर पड़ा हुआ है उसे उठा लाओ। अंग्रेज़ पत्थर लेकर आ गया, अब स्वामी जी ने उससे कहा कि इस पत्थर को एक कपड़े में लपेटकर अपने कमर से बाँध लो।

कमर से पत्थर बाँधने के बाद स्वामी जी ने उस अंग्रेज़ से कहा कि अब तुम जाओ और 2 घंटे बाद आना फिर में तुम्हारे सवालों के जवाब दूंगा लेकिन एक बात का ध्यान रहे कि तुम अपनी कमर से इस कपड़े को खोलना नहीं। अंग्रेज़ वहां से चला गया, पत्थर के वजन के कारण उसे चलने फिरने में बहुत तकलीफ हो रही थी और 1 घंटे पहले ही स्वामी जी के पास पहुँच गया और उनसे कहने लगा कि रहने दीजिये मुझे आपसे कोई सवाल नहीं पूछनी, में अब ये पत्थर हटा रहा हूँ अपनी कमर से।

स्वामी जी ने उस अंग्रेज़ की तरफ मुस्कुराते हुए देखकर बोले – “इसीलिये हमारे हिंदुस्तान में माँ को भगवान से भी ऊँचा दर्जा दिया जाता है, तुम इस पत्थर को अपने कमर से एक घंटे भी बाँध कर नहीं रख सके और माँ हमें पूरे 9 महीने अपने पेट में रखती है।“ बड़ी से बड़ी आंधी-तूफान क्यों न आ जाये फिर भी हमें वो किसी तरह का नुकसान नहीं पहुँचने देती है।

सीख:-

जिंदगी में बड़ी से बड़ी मुश्किल की घड़ी क्यों न आ जाये लेकिन कभी भी अपने मम्मी-पापा का साथ मत छोड़ना क्योँकि जब आप छोटे थे तब उन्होंने एक पल के लिये भी आपका हाथ नहीं छोड़ा था।

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3 सितम्बर 1857 का ही दिन था जब…बिठूर में एक पेड़ से बंधी 13 वर्ष की लड़की को, ब्रिटिश सेना ने जिंदा ही आग के हवाले किया, धूँ धूँ कर जलती वो लड़की, उफ़ तक न बोली और जिंदा लाश की तरह जलती हुई, राख में तब्दील हो गई।

ये लड़की थी नाना साहब पेशवा की दत्तक पुत्री मैना कुमारी जिसे 160 वर्ष पूर्व, आज ही के दिन, आउटरम नामक ब्रिटिश अधिकारी ने जिंदा जला दिया था।

जिसने 1857 क्रांति के दौरान, अपने पिता के साथ जाने से इसलिए मना कर दिया, की कही उसकी सुरक्षा के चलते, उसके पिता को देश सेवा में कोई समस्या न आये।और बिठूर के महल में रहना उचित समझा।

नाना साहब पर ब्रिटिश सरकार इनाम घोषित कर चुकी थी और जैसे ही उन्हें पता चला नाना साहब महल से बाहर है, ब्रिटिश सरकार ने महल घेर लिया, जहाँ उन्हें कुछ सैनिको के साथ बस मैना कुमारी ही मिली।

मैना कुमारी, ब्रटिश सैनिको को देख कर महल के गुप्त स्थानों में जा छुपी, ये देख ब्रिटिश अफसर आउटरम ने महल को तोप से उड़ने का आदेश दिया।। और ऐसा कर वो वहां से चला गया पर अपने कुछ सिपाहियों को वही छोड़ गया।‌रात को मैना को जब लगा की सब लोग जा चुके है, और वो बहार निकली तो 2 सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया और फिर आउटरम के सामने पेश किया।

आउटरम ने पहले मैना को एक पेड़ से बंधा, फिर मैना से नाना साहब के बारे में और क्रांति की गुप्त जानकारी जाननी चाही पर उसने मुंह नही खोला।

यहाँ तक की आउटरम ने मैना कुमारी को जिंदा जलने की धमकी भी दी, पर उसने कहा की वो एक क्रांतिकारी की बेटी है, मृत्यु से नही डरती। ये देख आउटरम तिलमिला गया और उसने मैना कुमारी को जिंदा जलने का आदेश दे दिया। इस पर भी मैना कुमारी, बिना प्रतिरोध के आग में जल गई, ताकि क्रांति की मशाल कभी न बुझे।

बिना खड्ग बिना ढाल वाली गैंग या धूर्त वामपंथी लेखक चाहे जो लिखे पर हमारी स्वतंत्रता इन जैसे असँख्य क्रांतिवीर और वीरांगनाओं के बलिदानों का ही प्रतिफल है और इनकी गाथाएँ आगे की पीढ़ी तक पहुँचनी चाहिए, इन्हें हर कृतज्ञ भारतीय का नमन पहुँचना चाहिये !

शत शत नमन है इस महान बाल वीरांगना को !