Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

(((( बिहारी जी की कृपा ))))
.
बहुत पुरानी घटना नहीं है। मार्च 2020 के लॉकडाउन की बात है।
.
दिल्ली के विवेक विहार में एक छोटा खुशी से भरा परिवार है। इस परिवार के मुखिया है पवन कुमार जी उनके दो बच्चे एक बेटा और एक बेटी।
.
बेटा बारहवीं की पढ़ाई कर रहा है और बेटी इंजीनियर की पढ़ाई वाराणसी उत्तर प्रदेश में कर रही है।
.
पूरा परिवार महीने में एक बार तो बिहारी जी के दर्शन करने जाते ही थे। जीवन बहुत अच्छा चल रहा था पर कोरोना आ गया।
.
वाराणसी में उनकी लड़की आशा एक कमरा किराए पर लेकर रहती थी, पर अब आशा लॉकडाउन के चलते उस कमरे में अकेली पड़ गई थी।
.
इंटरनल एग्जाम चल रहे थे इसलिए वह घर नहीं गई। जब एग्जाम खत्म हुए तो लॉक डाउन लग गया।
.
एक दिन आशा को बुखार आ गया घर वालों को चिंता हो गई कि कहीं कोरोना ना हो पर आशा किसी के संपर्क में तो आई नहीं थी।
.
ऐसी हालत में वह खाना भी नहीं बना सकती थी वह मैगी खाती फिर दवाई लेती यह सुनकर उसकी मम्मी परेशान हो गई। उसकी मम्मी की बिहारी जी के प्रति अटूट श्रद्धा थी, उसकी मम्मी ने मन ही मन बिहारी जी को ओळावना देते हुए बिहारी जी से कहती–देख रहे हो अपनी बेटी की हालत कैसी हो रही है, अब तू ही राखजो उसका ध्यान, ऐसे लाॅकडाउन घर से बहार जाने नही देते। इस समय बिमारी में तो पङौसी व अपने भी नजदीक आने से डरते हैं। अब हम तेरे अलावा किससे आशा रखें।
सच्चे ह्रदय की पुकार व की हुई भक्ति का ऐसा असर की ………..
दूसरे दिन बेटी कमरे में बैठी थी और किसी ने दरवाजा बजाया। दरवाजा खोला तो देखा कि सूट-बूट में एक पुरुष खड़े हैं।
.
उनके साथ एक महिला भी है, आशा ने उनसे पूछा कि आप कौन हैं तो उन्होंने कहा–’हम सोशल वर्कर है लोगो की मदद करते हैं..
.
हमें जानकारी मिली है कि आप यहाँ फंस गए हैं और आप दिल्ली में रहते हैं। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली ही जा रहे हैं अगर आशा चाहे तो वह चल सकती है।’
.
आशा ने घर पर फोन किया पर नम्बर मिला ही नहीं, बहुत प्रयास किया मम्मी के, भाई के, पापा के, सब के नम्बर पर फोन लगाया पर संपर्क नहीं हो पाया।
.
कलयुग में तो किसी पर विश्वास भी नहीं किया जा सकता, आशा बहुत परेशान थी।
.
वह महिला और पुरुष उसे देख रहे थे….. उन्होंने कहा–’बहन चिंता मत करो बिहारी जी के मंदिर में मैं तुम्हारे पिताजी से कई बार मिल चुका हूँ।’
.
आशा ने उनका नाम पूछा तो उन्होंने कहा सब हमें बिहारी बाबू कहते हैं।
.
अब आशा का मन भी गवाही दे रहा था कि वह उन पर विश्वास कर सकती है।
.
उनके साथ जो महिला थी वह इतनी गोरी, सुन्दर और नाजुक थी ऐसा लग रहा था उनको हाथ लगाने से भी मैली हो जायेंगी। उनकी आवाज भी बहुत मीठी थी।
.
आशा ने जरूरत का सामान लिया कमरे में ताला लगाया और उनके साथ चल पड़ी।
.
नीचे उनकी गाड़ी खड़ी थी, आशा गाड़ी में बैठी और वह सब दिल्ली के लिए निकले, गाड़ी में उन्होंने राधा नाम का प्यारा भजन लगा रखा था।
.
गाड़ी में उसे कब नींद लग गई पता ही नहीं चला।
.
उसकी नींद खुली तब वह दिल्ली पहुँच भी गए थे..
.
आशा का घर थोड़ा गली के अन्दर था तो लड़के ने कहा–’बहन आप यही उतर जाइए।’
.
आशा ने उन्हें खूब कहा कि आप मेरे घर चलिए।
.
उन्होंने कहा फिर कभी आएंगे अभी थोड़ा जल्दी में हैं और पिता जी को कहना जल्दी ही मन्दिर में मिलेंगे।
.
आशा अपने घर की तरफ चली तभी उसका फोन बजा.. उसकी मम्मी का फोन था..
.
उसने जैसे ही हेलो बोला उसकी मम्मी बोली, कहाँ थी सुबह से फोन नहीं उठाया। हम सब परेशान हो गए तेरे मकान मालिक को फोन करा तो बोले कमरे पर तो ताला लगा है।’
.
आशा तो मानो अभी भी सदमे में ही है उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
.
उसने अपनी माँ से कहा–माँ! दरवाजा खोलो मैं बाहर ही खड़ी हूँ।’
.
उसकी माँ भागती हुई आई और दरवाजा खुला सब आशा को सामने खड़े देख कर सब हैरान हो गए।
.
मन में सवालों की बौछार आई हुई थी। कैसे आई, किसके साथ आई, लॉकडाउन में तो पुलिस वाले किसी गाड़ी को आने-जाने भी नहीं देते।
.
सुबह तो तुझ से फोन पर बात हुई थी और शाम को तो घर पर भी आ गई।
.
वाराणसी से दिल्ली का रास्ता 13 घंटे का है। इस समय आशा 10:30 बजे घर भी पहुँच गई थी।
.
आशा ने कहा–’पिताजी जिनके साथ में आई हूँ वह आप से मन्दिर में मिलते ही रहते हैं और उन्होंने कहा फिर जल्दी ही मिलेंगे।’
.
बस यह सुनकर उनके पिताजी जोर-जोर से रोने लगे और समझ गए कि बिहारी जी महाराज खुद आए थे उनकी राधा रानी के साथ।
.
आप खुद ही सोचिए कि इतने कम समय में आशा को उन्होंने घर पर पहुँचा दिया उन्हें घर का एड्रेस कैसे पता चला। लॉकडाउन में बॉर्डर कैसे पार कर ली।
.
।।जय जय श्री राधे राधे जी।।
।।जय श्री राधे कृष्णा जी।।
.

 ((((((( जय जय श्री राधे )))))))
Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🌳🦚आज की कहानी🦚🌳

💐💐प्रलोभन-चरित्र-मित्रता का मूल्य💐💐

एक नगर में रहने वाले एक पंडित जी की ख्याति दूर-दूर तक थी। पास ही के गाँव में स्थित मंदिर के पुजारी का आकस्मिक निधन होने की वजह से, उन्हें वहाँ का पुजारी नियुक्त किया गया था। एक बार वे अपने गंतव्य की और जाने के लिए बस में चढ़े, उन्होंने कंडक्टर को किराए के रुपये दिए और सीट पर जाकर बैठ गए। कंडक्टर ने जब किराया काटकर उन्हें रुपये वापस दिए तो पंडित जी ने पाया कि कंडक्टर ने दस रुपये ज्यादा दे दिए हैं। पंडित जी ने सोचा कि थोड़ी देर बाद कंडक्टर को रुपये वापस कर दूंगा। कुछ देर बाद मन में विचार आया कि बेवजह दस रुपये जैसी मामूली रकम को लेकर परेशान हो रहे है।

आखिर ये बस कंपनी वाले भी तो लाखों कमाते हैं, बेहतर है इन रूपयों को भगवान की भेंट समझकर अपने पास ही रख लिया जाए। वह इनका सदुपयोग ही करेंगे। मन में चल रहे विचारों के बीच उनका गंतव्य स्थल आ गया। बस से उतरते ही उनके कदम अचानक ठिठके, उन्होंने जेब मे हाथ डाला और दस का नोट निकाल कर कंडक्टर को देते हुए कहा, भाई तुमने मुझे किराया काटने के बाद भी दस रुपये ज्यादा दे दिए थे। कंडक्टर मुस्कराते हुए बोला, क्या आप ही गाँव के मंदिर के नए पुजारी है?

पंडित जी के हामी भरने पर कंडक्टर बोला, मेरे मन में कई दिनों से आपके प्रवचन सुनने की इच्छा थी, आपको बस में देखा तो ख्याल आया कि चलो देखते है कि मैं अगर ज्यादा पैसे दूँ तो आप क्या करते हो… अब मुझे विश्वास हो गया कि आपके प्रवचन जैसा ही आपका आचरण है। जिससे सभी को सीख लेनी चाहिए: बोलते हुए, कंडक्टर ने गाड़ी आगे बढ़ा दी। पंडितजी बस से उतरकर पसीना-पसीना थे।

उन्होंने हाथ जोड़कर भगवान का आभार व्यक्त किया कि हे प्रभु! आपका लाख-लाख शुक्र है, जो आपने मुझे बचा लिया, मैने तो दस रुपये के लालच में आपकी शिक्षाओं की बोली लगा दी थी। पर आपने सही समय पर मुझे सम्भलने का अवसर दे दिया। कभी कभी हम भी तुच्छ से प्रलोभन में, अपने जीवन भर की चरित्र पूँजी दाँव पर लगा देते हैं..!!

जब कंधार के तत्तकालीन शासक अमीर अली खान पठान को मजबूर हो कर जैसलमेर राज्य में शरण लेनी पड़ी। तब यहां के महारावल लूणकरण थे।वे महारावल जैतसिंह के जेष्ठ पुत्र होने के कारण उनके बाद यहां के शासक बने। वैसे उनकी कंधार के शासक अमीर अली खान पठान से पहले से ही मित्रता थी और विपत्ति के समय मित्र ही के काम आता है ये सोचते हुए उन्होंने सहर्ष अमीर अली खान पठान को जैसलमेर का राजकीय अतिथि स्वीकार कर लिया।

लम्बें समय से दुर्ग में रहते हुए अमीर अली खान पठान को किले की व्यवस्था और गुप्त मार्ग की सारी जानकारी मिल चुकी थी।उस के मन में किले को जीत कर जैसलमेर राज्य पर अधिकार करने का लालच आने लगा और वह षड्यंत्र रचते हुए सही समय की प्रतीक्षा करने लगा। इधर महारावल लूणकरण भाटी अपने मित्र अमीर अली खान पठान पर आंख मूंद कर पूरा विश्वास करते थे। वो स्वप्न में भी ये सोच नहीं सकते थे कि उनका मित्र कभी ऐसा कुछ करेगा।
इधर राजकुमार मालदेव अपने कुछ मित्रों और सामंतों के साथ शिकार पर निकल पड़े। अमीर अली खान पठान बस इस मौके की ताक में ही था। उसने महारावल लूणकरण भाटी को संदेश भिजवाया कि वो आज्ञा दे तो उनकी पर्दानशी बेगमें रानिवास में जाकर उनकी रानियों और राजपरिवार की महिलाओं से मिलना चाहती है। फिर क्या होना था?
वही जिसका अनुमान पूर्व से ही अमीर अली खान पठान को था। महारावल ने सहर्ष बेगमों को रानिवास में जाने की आज्ञा दे दी। इधर बहुत सारी पर्दे वाली पालकी दुर्ग के महल में प्रवेश करने लगी किन्तु अचानक महल के प्रहरियों को पालकियों के अंदर से भारी भरकम आवाजें सुनाई दीं तो उन्हें थोड़ा सा शक हुआ। उन्होंने एक पालकी का पर्दा हटा कर देखा तो वहां बेगमों की जगह दो-तीन सैनिक छिपे हुए थे।

जब अचानक षड्यंत्र का भांडा फूटते ही वही पर आपस में मार-काट शुरू हो गई। दुर्ग में जिसके भी पास जो हथियार था वो लेकर महल की ओर महारावल और उनके परिवार की रक्षा के लिए दौड़ पडा। चारों ओर अफरा -तफरी मच गई किसी को भी अमीर अली खान पठान के इस विश्वासघात की पहले भनक तक नहीं थी। कोलाहल सुनकर दुर्ग के सबसे ऊंचे बुर्ज पर बैठे प्रहरियों ने संकट के ढोल-नगाड़े बजाने शुरू कर दिए जिसकी घुर्राने की आवाज दस-दस कोश तक सुनाई देने लगी।

महारावल ने रानिवास की सब महिलाओं को बुला कर अचानक आए हुए संकट के बारे में बताया। अब अमीर अली खान पठान से आमने-सामने युद्ध करने के सिवाय और कोई उपाय नहीं था। राजकुमार मालदेव और सांमत पता नहीं कब तक लौटेंगे। दुर्ग से बाहर निकलने के सारे मार्ग पहले ही बंद किए जा चुके थे। राजपरिवार की स्त्रियों को अपनी इज्जत बचाने के लिए जौहर के सिवाय कुछ और उपाय नहीं दिखाई दे रहा था। अचानक से किया गया आक्रमण बहुत ही भंयकर था और महल में जौहर के लिए लकड़ियां भी बहुत कम थी। इसलिए सब महिलाओं ने महारावल के सामने अपने अपने सिर आगे कर दियें और सदा सदा के लिए बलिदान हो गई। महारावल केसरिया बाना पहन कर युद्ध करते हुए रणभूमि में बलिदान हो गए ।

महारावल लूणकरण भाटी को अपने परिवार सहित चार भाई, तीन पुत्रों के साथ को कई विश्वास पात्र वीरों को खो कर मित्रता की कीमत चुकानी पड़ी। इधर रण दुंन्दुभियों की आवाज सुनकर राजकुमार मालदेव दुर्ग की तरफ दौड़ पड़े।
वे अपने सामंतों और सैनिकों को लेकर महल के गुप्त द्वार से किले में प्रवेश कर गए और अमीर अली खान पठान पर प्रचंड आक्रमण कर दिया। अमीर अली खान पठान को इस आक्रमण की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। अंत में उसे पकड़ लिया गया और चमड़े के बने कुड़िए में बंद करके दुर्ग के दक्षिणी बुर्ज पर तोप के मुंह पर बांध कर उड़ा दिया गया।

इतिहास की कई सैकड़ों ऐसी घटनाएं है जिससे हम वर्तमान में बहुत कुछ सीख सकते है। आज अफगान संकट को देखते हुए कई लोग ये कह रहे हैं हमें इन्हें यहां शरण देनी चाहिए पर उससे क्या होगा कल ये ही अगर यहां कहते हुए हमें दिखाई दे कि हिन्दुस्तान तुम्हारे बाप का नहीं तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं होना।

💐💐प्रेषक अभिजीत चौधरी💐💐

सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🌳🦚आज की कहानी🦚🌳

💐💐लोकसेवा से प्रसिद्धि💐💐

बहुत पहले संजय नाम का एक नवयुवक था। वह हमेशा साधु-महात्माओं का दर्शन किया करता था। उसके लिए वह मठों में तथा तीर्थों में भ्रमण करता था। एक बार वह किसी योगी के साथ रहा। उसकी सेवा से प्रसन्न होकर योगी ने कहा- ’’हे वत्स! यदि तुम्हारी कोई इच्छा हो तो मैं उसे पूरी कर सकता हूँ।’’ संजय ने हाथ जोङकर कहा, ’’मैं योग का रहस्य जानना चाहता हूँ, इस चमत्कार से ख्याति प्राप्त करना चाहता हूँ।’’

योगी ने उसे योगाभ्यास कराया। उससे संजय ने अपने में विचित्र शक्ति का अनुभव किया। कुछ समय बाद संजय अकेला घूमने निकला। मार्ग में उसने देखा कि कुछ शिकारी लोहे के पिंजरे में सिंह को डाल कर ले जा रहे थे। संजय न अपना योगबल दिखाने के लिए मन्त्रपाठ किया। मन्त्र पढ़ने के साथ ही भयंकर सिंह पिंजरे से निकला। सिंह ने निकल कर शिकारी को मार दिया। अन्य शिकारियों ने पुनःसिंह को पकङ लिया। इस प्रकार उसे देखकर संजय ने हँसते हुए कहा, ’’क्या फिर सिंह को भगा दूँ?’’

शिकारी संजय को जादूगर जान कर मारने दौङा। संजय बेहोश होकर पृथ्वी पर गिर पङा। वह किसी तरह आगे चला। एक पर्वतीय गाँव में, उसने देखा कि लोग पहाङों की अधिकता से खेती करने में असमर्थ हैं। यदि मैं पर्वतों को हटा दूँ तो लोग मेरा सत्कार करेंगे। उसने मन्त्र पाठ किया। धीरे-धीरे पर्वत निकल-निकल कर टूटने आरम्भ हुए। गाँव के घर नष्ट होने लगे। लोग संजय की शरण में गये। संजय पर्वतों को चलाना तो जानता था किन्तु उन्हें रोक नहीं सकता था। इसलिए वह उनका उद्धार न सकता था। लोग संजय को मारने लगे। संजय किसी तरह भाग छूटा और मछुओं के गाँव में पहुँचा जहाँ मछलियों का अभाव था। संजय ने मछुओं को बुलाकर कहा, ’’आज मैं योग का चमत्कार दिखाता हूँ, आप लोग ठहरिये।’’ उसने मन्त्र बल से तालाबों में मछलियाँ भर दीं। मछुओं ने जाल बाँध दिये। घर-घर लोग मछलियाँ पकाने लगे। संजय की महिमाा सर्वत्र फैल गई।

यह एक विचित्र संयोग रहा कि वे मछलियाँ जहरीली थीं। जिन लोगों ने मछलियाँ खाई थीं वे पहले ही मरणासन्न हो गये, कुछ मर गये। बचे हुए लोगों ने लाठियों से संजय को मारना शुरू किया। उनकी चोट से वह पृथ्वी पर गिर पङा। ग्रामीणों ने उसको मरा हुआ मान कर जंगल में गिरा दिया।

आधी रात में जब संजय को होश आया तो वह चिल्लाया। वह स्वयं उठकर नहीं चल सकता। उस जंगल में एक साधु रहता था। जब उसकी चीत्कार सुनी तो साधु ने संजय को उठाया और अपने आश्रम में ले गया। औषधियांे से उसकी पीङा को शान्त किया। प्रातःकाल संजय ने सारी कहानी महात्मा को सुनाई। संजय ने कहा, ’’मैं अलौकिक शक्ति वाला हूँ किन्तु न मेरी प्रतिष्ठा है न मुझे शान्ति है, मैं नहीं जानता कि इसका क्या कारण है?’’

महात्मा ने कहा- ’’हे संजय! इसमें तुम्हारा ही दोष है, तू अपनी शक्ति का सदुपयोग करना नहीं जानता। अहंकार युक्त होकर व्यर्थ ही मिथ्या विज्ञापन और कौतुक प्रदर्शित करते हो। शक्ति का उपयोग तो अहंकार त्याग कर दीनों की सेवा करना है। इसी से यश और सुख प्राप्त होता है। कौतुक तो जादूगर करते हैं।’’ संजय का अज्ञान नष्ट हुआ। महात्मा से लोकशिक्षण की शिक्षा पाकर संजय समाज सेवा में लग गया। उसने अपनी शक्ति का सदुपयोग किया। उसके प्रभाव से कुछ समय बाद उसने संसार में कीर्ति प्राप्त की।

मित्रों” हमें अहंकार को त्याग देना चाहिए तथा परोपकारी कार्य करने चाहिए।

💐💐प्रेषक अभिजीत चौधरी💐💐

सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🌳🦚आज की कहानी🦚🌳

💐💐बहन💐💐

बहन की शादी को 6 साल हो गए हैं।

मैं कभी उसके घर नही गया। होली दीपावली, भइया दूज पर कभी-2 मम्मी पापा जाते हैं।

मेरी बीवी एक दिन मुझे कहने लगी आपकी बहन जब भी आती है उसके बच्चे घर के हाल बिगाड़ कर रख देते हैं।
ख़र्च डबल हो जाता है और तुम्हारी मां हमसे छुप, छुपाकर कभी उसको साबुन की पेटी देती है,कभी कपड़े कभी सर्फ के डब्बे और कभी कभी तो चावल का थैला भर देती है ।
अपनी मां को बोलो ये हमारा घर है कोई ख़ैरात सेंटर नही

मुझे बहुत गुस्सा आया मैं मुश्किल से ख़र्च पूरा कर रहा हूँ और मां सब कुछ बहन को दे देती है। बहन एक दिन घर आई हुई थी,उसके बेटे ने टीवी का रिमोट तोड़ दिया। मैं मां से गुस्से में कह रहा था मां बहन को बोलो कि यहा भैयादूज पर आया करे बस।

और ये जो आप साबुन सर्फ और चावल का थैला भर कर देती हैं ना उसको बन्द करें ।
मां चुप रही लेकिन बहन ने मेरी सारी बातें सुन ली थी, बहन कुछ ना बोली ।
4 बज रहे थे अपने बच्चों को तैयार किया और कहने लगी, भाई मुझे बस स्टॉप तक छोड़ आओ,
मैंने झूठे मुँह कहा, रह लेती कुछ दिन और लेकिन वह मुस्कुराई नही भाई बच्चों की छुट्टियां ख़त्म होने वाली है।

फिर जब हम दोनों भाईयों में ज़मीन का बंटवारा हो रहा था तो मैंने साफ़ इनकार किया,भाई मैं अपनी ज़मीन से बहन को हिस्सा नही दूँगा।

बहन सामने बैठी थी।

वह खामोश थी, कुछ ना बोली मां ने कहा बेटी का भी हक़ होता है लेकिन मैंने गाली दे कर कहा कुछ भी हो जाये मैं बहन को हिस्सा नही दूँगा।

मेरी बीवी भी बहन को बुरा भला कहने लगी। वह बेचारी खामोश रही।

बड़ा भाई अलग हो गया कुछ वक़्त बाद।
मेरे बड़े बेटे को टीबी हो गई,मेरे पास उसके इलाज करवाने के पैसे नहीं थे,मैं बहुत परेशान था, एक लाख रुपया कर्ज भी ले लिया था।

मैं बहुत परेशान था,कमरे में अकेला बैठा अपने हालात पर रो रहा था।

उस वक़्त वही बहन घर आ गई, मैंने गुस्से से बोला अब ये आ गई है मनहूस।

मैंने बीवी को कहा कुछ तैयार करो बहन के लिए ,तो बीवी मेरी पास आ गई ,कोई ज़रूरत नही कुछ भी पकाने की इसके लिए।

फिर एक घण्टे बाद बहन मेरे पास आई ,भाई परेशान हो.?
बहन ने मेरे सर पर हाथ फेरा बड़ी बहन हूँ तुम्हारी।
अब देखो मुझसे भी बड़े लगते हो,फिर मेरे क़रीब हुई अपने पर्स से सोने की कंगन निकाले ,मेरे हाथ में रखे और आहिस्ता से बोली पागल तू ऐसे ही परेशान होता है,

ये कंगन बेचकर अपना कर्जा उतार कर कर बेटे का इलाज करवा।
शक्ल तो देख ज़रा क्या हालत बना रखी तुमने,
मैं खामोश था बहन की तरफ देखे जा रहा था,वह आहिस्ता से बोली किसी को ना बताना कि कंगन के बारे में तुमको मेरी क़सम है।

मेरे माथे को चूमा और एक हज़ार रुपये मुझे दिया ,
जो सौ ,पचास के नोट थे शायद उसकी जमा पूंजी थी मेरी जेब मे डालकर बोली बच्चों को कुछ खाने के लिए ला देना परेशान ना हुआ कर।

जल्दी से अपना हाथ मेरे सर पे रखा,, देख तेरे बाल सफ़ेद हो गए ,वह जल्दी से जाने लगी उसके पैरों की तरफ़ मैं देखा टूटी हुई जूती पहनी थी,पुराना सा दुपट्टा ओढ़ रखी थी जब भी आती थी वही दुपट्टा ओढ़ कर आती।

हम भाई कितने मतलब परस्त होते हैं, बहनों को पल भर में बेगाना कर देते हैं, और बहनें भाईयों का ज़रा सा दुख बर्दाश्त नही कर सकती।

वह हाथ में कंगन पकड़े ज़ोर ,ज़ोर से रो रहा था उसके साथ मेरी आँखें भी नम थी।

अपने घर में #भगवान जाने कितने दुख सह रही होती हैं।
कुछ लम्हा बहनों के पास बैठकर हाल पूछ लिया करें। शायद उनके चेहरे पे कुछ लम्हों के लिए एक सुकून आ जाये।

बहनें मां का रूप होती हैं।

आजकल भाई अपनी बहनों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं ये बताने की जरूरत ही नहीं है और रही बात भाभियों की तो पूछिए ही मत,उनका व्यवहार अपनी नंद के प्रति कितना अच्छा होता है सभी जानते हैं।लगभग 2% से 3% ही कोई ऐसा भाई होंगे जो अपनी बहनों का अच्छे से ख्याल रखते होंगे या भाभियों का व्यवहार ननद के साथ अच्छा होगा।अपनी बहन आए तो कोई बात नहीं और जब पति की बहन आए तो मुसीबत आ जाती हैं।ऐसी सोच है हमारे समाज के अंदर लोगो की।आइए आज से हम सब मिलकर प्रण लें कि हम अपने बहनों का दिल कभी नहीं दुखायेंगे,उन्हें हमेशा घर बुलाएंगे,उनका मान सम्मान करेंगे,कभी कुछ ऐसा नहीं करेंगे जिससे उनके दिल को ठेस पहुंचे।बहन के घर आने से घर में रौनक आ जाती हैं।बहने मां का रूप होती हैं।ये पूज्यनीय हैं।आइए हम सब मिलकर इनका सम्मान करें और अपना सुख दुःख इनके साथ बांटे।

💐💐प्रेषक अभिजीत चौधरी💐💐

सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

2️⃣5️⃣❗0️⃣9️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣1️⃣
ध्यान के पंख

 *✍️  बहुत समय पहले की बात है,एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये,वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे,राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया।*

  *कुछ समय पश्चात राजा ने देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे,और अब पहले से भी शानदार लग रहे हैं,राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे, आदमी से कहा, मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ, तुम इन्हें उड़ने का इशारा करो*

आदमी ने ऐसा ही किया, इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था वहीँ दूसरा, कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ गया जिससे वो उड़ा था ,ये देख राजा को कुछ अजीब लगा, क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा..? राजा ने सवाल किया

सेवक बोला, जी हुजूर, इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है, वो इस डाल को छोड़ता ही नहीं, राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे, और वो दूसरे बाज को भी उसी तरह उड़ता देखना चाहते थे

अगले दिन पूरे राज्य में ऐलान करा दिया गया, कि जो व्यक्ति इस बाज को ऊँचा उड़ाने में कामयाब होगा उसे ढेरों इनाम दिया जाएगा, फिर क्या था

एक से एक विद्वान् आये और बाज को उड़ाने का प्रयास करने लगे, पर हफ़्तों बीत जाने के बाद भी बाज का वही हाल था, वो थोडा सा उड़ता और वापस डाल पर आकर बैठ जाता, फिर एक दिन कुछ अनोखा हुआ,राजा ने देखा कि उसके दोनों बाज आसमान में उड़ रहे हैं, उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ और उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति का पता लगाने को कहा जिसने ये कारनामा कर दिखाया था

वह व्यक्ति एक किसान था, अगले दिन वह दरबार में हाजिर हुआ, उसे इनाम में स्वर्ण मुद्राएं भेंट करने के बाद राजा ने कहा, मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ, बस तुम इतना बताओ कि जो काम बड़े-बड़े विद्वान् नहीं कर पाये वो तुमने कैसे कर दिखाया

मालिक..!

मैं तो एक साधारण सा किसान हूँ

मैं ज्ञान की ज्यादा बातें नहीं जानता मैंने तो बस वो डाल काट दी,जिस पर बैठने का आदि हो चुका था, और जब वो डाल ही नहीं रही तो वो भी अपने साथी के साथ ऊपर उड़ने लगा ।
हम सभी ऊँची उड़ान भरने के लिए ही बने हैं,लेकिन कई बार हम जो कर रहे होते है, उसके इतने आदी हो जाते हैं कि अपनी ऊँची उड़ान भरने की क्षमता को भूल जाते हैं,जनम से हम वासनाओं की डाल पर बैठते आए हैं और अज्ञानवश ये भी हमें ज्ञात नहीं कि जो हम आज कर रहे हैं,वहीं हमने वर्षों से यही किया है,और ये हम भूल ही गए हैं कि हम उड़ान भर सकते हैं,अतृप्त वासनाओं की डाल पर बैठे बैठे हमें विस्मृत हो गया है,कि ध्यानरूपी पंख भी हैं, हमारे पास जिससे हम उड़ान भर सकते हैं, व्यर्थ से सार्थक की… सोचे भर सकते है या नही..?
🙏🙏🏽🙏🏼जय जय श्री राधे🙏🏿🙏🏾🙏🏻

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

2️⃣5️⃣❗0️⃣9️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣1️⃣
ध्यान के पंख

 *✍️  बहुत समय पहले की बात है,एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये,वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे,राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया।*

  *कुछ समय पश्चात राजा ने देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे,और अब पहले से भी शानदार लग रहे हैं,राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे, आदमी से कहा, मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ, तुम इन्हें उड़ने का इशारा करो*

आदमी ने ऐसा ही किया, इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था वहीँ दूसरा, कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ गया जिससे वो उड़ा था ,ये देख राजा को कुछ अजीब लगा, क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा..? राजा ने सवाल किया

सेवक बोला, जी हुजूर, इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है, वो इस डाल को छोड़ता ही नहीं, राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे, और वो दूसरे बाज को भी उसी तरह उड़ता देखना चाहते थे

अगले दिन पूरे राज्य में ऐलान करा दिया गया, कि जो व्यक्ति इस बाज को ऊँचा उड़ाने में कामयाब होगा उसे ढेरों इनाम दिया जाएगा, फिर क्या था

एक से एक विद्वान् आये और बाज को उड़ाने का प्रयास करने लगे, पर हफ़्तों बीत जाने के बाद भी बाज का वही हाल था, वो थोडा सा उड़ता और वापस डाल पर आकर बैठ जाता, फिर एक दिन कुछ अनोखा हुआ,राजा ने देखा कि उसके दोनों बाज आसमान में उड़ रहे हैं, उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ और उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति का पता लगाने को कहा जिसने ये कारनामा कर दिखाया था

वह व्यक्ति एक किसान था, अगले दिन वह दरबार में हाजिर हुआ, उसे इनाम में स्वर्ण मुद्राएं भेंट करने के बाद राजा ने कहा, मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ, बस तुम इतना बताओ कि जो काम बड़े-बड़े विद्वान् नहीं कर पाये वो तुमने कैसे कर दिखाया

मालिक..!

मैं तो एक साधारण सा किसान हूँ

मैं ज्ञान की ज्यादा बातें नहीं जानता मैंने तो बस वो डाल काट दी,जिस पर बैठने का आदि हो चुका था, और जब वो डाल ही नहीं रही तो वो भी अपने साथी के साथ ऊपर उड़ने लगा ।
हम सभी ऊँची उड़ान भरने के लिए ही बने हैं,लेकिन कई बार हम जो कर रहे होते है, उसके इतने आदी हो जाते हैं कि अपनी ऊँची उड़ान भरने की क्षमता को भूल जाते हैं,जनम से हम वासनाओं की डाल पर बैठते आए हैं और अज्ञानवश ये भी हमें ज्ञात नहीं कि जो हम आज कर रहे हैं,वहीं हमने वर्षों से यही किया है,और ये हम भूल ही गए हैं कि हम उड़ान भर सकते हैं,अतृप्त वासनाओं की डाल पर बैठे बैठे हमें विस्मृत हो गया है,कि ध्यानरूपी पंख भी हैं, हमारे पास जिससे हम उड़ान भर सकते हैं, व्यर्थ से सार्थक की… सोचे भर सकते है या नही..?
🙏🙏🏽🙏🏼जय जय श्री राधे🙏🏿🙏🏾🙏🏻

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

जंगल के स्कूल 😗

हुआ यूँ कि जंगल के राजा शेर ने ऐलान कर दिया कि अब आज के बाद कोई अनपढ़ न रहेगा। हर पशु को अपना बच्चा स्कूल भेजना होगा। राजा साहब का स्कूल पढ़ा-लिखाकर सबको Certificate बँटेगा।

सब बच्चे चले स्कूल। हाथी का बच्चा भी आया, शेर का भी, बंदर भी आया और मछली भी, खरगोश भी आया तो कछुआ भी, ऊँट भी और जिराफ भी।

FIRST UNIT TEST/EXAM हुआ तो हाथी का बच्चा फेल।

“किस Subject में फेल हो गया जी?”

“पेड़ पर चढ़ने में फेल हो गया, हाथी का बच्चा।”

“अब का करें?”

“ट्यूशन दिलवाओ, कोचिंग में भेजो।”

अब हाथी की जिन्दगी का एक ही मक़सद था कि हमारे बच्चे को पेड़ पर चढ़ने में Top कराना है।

किसी तरह साल बीता। Final Result आया तो हाथी, ऊँट, जिराफ सब के बच्चे फेल हो गए। बंदर की औलाद first आयी।

Principal ने Stage पर बुलाकर मैडल दिया। बंदर ने उछल-उछल के कलाबाजियाँ दिखाकर गुलाटियाँ मार कर खुशी का इजहार किया।

उधर अपमानित महसूस कर रहे हाथी, ऊँट और जिराफ ने अपने-अपने बच्चे कूट दिये
नालायकों, इतने महँगे स्कूल में पढ़ाते हैं तुमको | ट्यूशन-कोचिंग सब लगवाए हैं। फिर भी आज तक तुम पेड़ पर चढ़ना नहीं सीखे।
सीखो, बंदर के बच्चे से सीखो कुछ, पढ़ाई पर ध्यान दो।

फेल हालांकि मछली भी हुई थी। बेशक़ Swimming में First आयी थी पर बाकी subject में तो फेल ही थी।

मास्टरनी बोली, “आपकी बेटी के साथ attendance की problem है

मछली ने बेटी को आँखें दिखाई!
बेटी ने समझाने की कोशिश की कि, “माँ, मेरा दम घुटता है इस स्कूल में। मुझे साँस ही नहीं आती। मुझे नहीं पढ़ना इस स्कूल में। हमारा स्कूल तो तालाब में होना चाहिये न?”

मां – नहीं, ये राजा का स्कूल है।

तालाब वाले स्कूल में भेजकर मुझे अपनी बेइज्जती नहीं करानी। समाज में कुछ इज्जत Reputation है मेरी। तुमको इसी स्कूल में पढ़ना है। पढ़ाई पर ध्यान दो।

हाथी, ऊँट और जिराफ अपने-अपने बच्चों को पीटते हुए ले जा रहे थे।

रास्ते में बूढ़े बरगद ने पूछा, “क्यों पीट रहे हो, बच्चों को?”

जिराफ बोला, “पेड़ पर चढ़ने में फेल हो गए?”

बूढ़ा बरगद सोचने के बाद पते की बात बोला,

“पर इन्हें पेड़ पर चढ़ाना ही क्यों है ?”
उसने हाथी से कहा,

“अपनी सूंड उठाओ और सबसे ऊँचा फल तोड़ लो। जिराफ तुम अपनी लंबी गर्दन उठाओ और सबसे ऊँचे पत्ते तोड़-तोड़ कर खाओ।”
ऊँट भी गर्दन लंबी करके फल पत्ते खाने लगा।
हाथी के बच्चे को क्यों चढ़ाना चाहते हो पेड़ पर? मछली को तालाब में ही सीखने दो न?

दुर्भाग्य से आज स्कूली शिक्षा का पूरा Curriculum और Syllabus सिर्फ बंदर के बच्चे के लिये ही Designed है। इस स्कूल में 35 बच्चों की क्लास में सिर्फ बंदर ही First आएगा। बाकी सबको फेल होना ही है। हर बच्चे के लिए अलग Syllabus, अलग Subject और अलग स्कूल चाहिये।

हाथी के बच्चे को पेड़ पर चढ़ाकर अपमानित मत करो। जबर्दस्ती उसके ऊपर फेलियर का ठप्पा मत लगाओ। ठीक है, बंदर का उत्साहवर्धन करो पर शेष 34 बच्चों को नालायक, कामचोर, लापरवाह, Duffer, Failure घोषित मत करो।

मछली बेशक़ पेड़ पर न चढ़ पाये पर एक दिन वो पूरा समंदर नाप देगी।

शिक्षा – अपने बच्चों की क्षमताओं व प्रतिभा की कद्र करें चाहे वह पढ़ाई, खेल, नाच, गाने, कला, अभिनय,व्यापार, खेती, बागवानी, मकेनिकल, किसी भी क्षेत्र में हो और उन्हें उसी दिशा में अच्छा करने दें |

जरूरी नहीं कि सभी बच्चे पढ़ने में ही अव्वल हो! बस जरूरत हैं उनमें अच्छे संस्कार व नैतिक मूल्यों की जिससे बच्चे गलत रास्ते नहीं चुने l

सभी अभिभावकों को सादर समर्पित
🙏🙏🙏

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🌳🦚आज की कहानी🦚🌳

💐💐पिता और पुत्र💐💐

एक बहुत ही बड़े उद्योगपति का पुत्र कॉलेज में अंतिम वर्ष की परीक्षा की तैयारी में लगा रहता है,
तो उसके पिता उसकी परीक्षा के विषय में पूछते है तो वो जवाब में कहता है कि हो सकता है कॉलेज में अव्वल आऊँ,
अगर मै अव्वल आया तो मुझे वो महंगी वाली कार ला दोगे जो मुझे बहुत पसन्द है..
तो पिता खुश होकर कहते हैं क्यों नहीं अवश्य ला दूंगा.
ये तो उनके लिए आसान था. उनके पास पैसो की कोई कमी नहीं थी।
जब पुत्र ने सुना तो वो दो गुने उत्साह से पढाई में लग गया। रोज कॉलेज आते जाते वो शो रुम में रखी कार को निहारता और मन ही मन कल्पना करता की वह अपनी मनपसंद कार चला रहा है।
दिन बीतते गए और परीक्षा खत्म हुई। परिणाम आया वो कॉलेज में अव्वल आया उसने कॉलेज से ही पिता को फोन लगाकर बताया की वे उसका इनाम कार तैयार रखे मै घर आ रहा हूं।
घर आते आते वो ख्यालो में गाडी को घर के आँगन में खड़ा देख रहा था। जैसे ही घर पंहुचा उसे वहाँ कोई कार नही दिखी.
वो बुझे मन से पिता के कमरे में दाखिल हुआ.
उसे देखते ही पिता ने गले लगाकर बधाई दी और उसके हाथ में कागज में लिपटी एक वस्तु थमाई और कहा लो यह तुम्हारा गिफ्ट।
पुत्र ने बहुत ही अनमने दिल से गिफ्ट हाथ में लिया और अपने कमरे में चला गया। मन ही मन पिता को कोसते हुए उसने कागज खोल कर देखा उसमे सोने के कवर में रामायण दिखी ये देखकर अपने पिता पर बहुत गुस्सा आया..
लेकिन उसने अपने गुस्से को संयमित कर एक चिठ्ठी अपने पिता के नाम लिखी की पिता जी आपने मेरी कार गिफ्ट न देकर ये रामायण दी शायद इसके पीछे आपका कोई अच्छा राज छिपा होगा.. लेकिन मै यह घर छोड़ कर जा रहा हु और तब तक वापस नही आऊंगा जब तक मै बहुत पैसा ना कमा लू।और चिठ्ठी रामायण के साथ पिता के कमरे में रख कर घर छोड कर चला गया।
समय बीतता गया..
पुत्र होशियार था होन हार था जल्दी ही बहुत धनवान बन गया. शादी की और शान से अपना जीवन जीने लगा कभी कभी उसे अपने पिता की याद आ जाती तो उसकी चाहत पर पिता से गिफ्ट ना पाने की खीज हावी हो जाती, वो सोचता माँ के जाने के बाद मेरे सिवा उनका कौन था इतना पैसा रहने के बाद भी मेरी छोटी सी इच्छा भी पूरी नहीं की.
यह सोचकर वो पिता से मिलने से कतराता था।
एक दिन उसे अपने पिता की बहुत याद आने लगी.
उसने सोचा क्या छोटी सी बात को लेकर अपने पिता से नाराज हुआ अच्छा नहीं हुआ.
ये सोचकर उसने पिता को फोन लगाया बहुत दिनों बाद पिता से बात कर रहा हूँ .
ये सोच धड़कते दिल से रिसीवर थामे खड़ा रहा.
तभी सामने से पिता के नौकर ने फ़ोन उठाया और उसे बताया की मालिक तो दस दिन पहले स्वर्ग सिधार गए और अंत तक तुम्हे याद करते रहे और रोते हुए चल बसे.
जाते जाते कह गए की मेरे बेटे का फोन आया तो उसे कहना की आकर अपना व्यवसाय सम्भाल ले.
तुम्हारा कोई पता नही होनेे से तुम्हे सूचना नहीं दे पाये।
यह जानकर पुत्र को गहरा दुःख हुआ और दुखी मन से अपने पिता के घर रवाना हुआ.
घर पहुच कर पिता के कमरे जाकर उनकी तस्वीर के सामने रोते हुए रुंधे गले से उसने पिता का दिया हुआ गिफ्ट रामायण को उठाकर माथे पर लगाया और उसे खोलकर देखा.
पहले पन्ने पर पिता द्वारा लिखे वाक्य पढ़ा जिसमे लिखा था “मेरे प्यारे पुत्र, तुम दिन दुनी रात चौगुनी तरक्की करो और साथ ही साथ मै तुम्हे कुछ अच्छे संस्कार दे पाऊं.. ये सोचकर ये रामायण दे रहा हूँ “,
पढ़ते वक्त उस रामायण से एक लिफाफा सरक कर नीचे गिरा जिसमे उसी गाड़ी की चाबी और नगद भुगतान वाला बिल रखा हुआ था।
ये देखकर उस पुत्र को बहुत दुख हुआ और धड़ाम से जमींन पर गिर रोने लगा।
हम हमारा मनचाहा उपहार हमारी पैकिंग में ना पाकर उसे अनजाने में खो देते है।
पिता तो ठीक है.
इश्वर भी हमे अपार गिफ्ट देते है, लेकिन हम अज्ञानी हमारे मन पसन्द पैकिंग में ना देखकर, पा कर भी खो देते है।
हमे अपने माता पिता के प्रेम से दिये ऐसेे अन गिनत उपहारों का प्रेम का सम्मान करना चाहिए और उनका धन्यवाद करना चाहिये

💐विशेष सूचना 26 नवम्बर को हो सकता है कहानी नही प्रेषित की जाएगी 1 दिन इंटरनेट सेवा बाधित होने की संभावना है राजस्थान में💐*

💐💐प्रेषक अभिजीत चौधरी💐💐

सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।

🙏🙏🙏🙏🌳🌳🌳🙏🙏🙏🙏🙏

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🌳🌳सम्बन्ध🌳🌳
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
………..
एक पंडित जी थे। पंडित जी ने एक दुकानदार के पास पाँच सौ रुपये रख दिये..उन्होंने सोचा कि जब बच्ची की शादी होगी, तो पैसा ले लेंगे,थोड़े दिनों के बाद ज ब बच्ची सयानी हो गयी,तो पंडित जी उस दुकानदार के पास गये।
दुकानदार ने नकार दिया कि आपने कब हमें पैसा दिया था।उसने पंडित जी से कहा कि क्या हमने कुछ लिखकर दिया है ?पंडित जी इस हरकत से परेशान हो गये और चिन्ता में डूब गये¶
थोड़े दिन के बाद उन्हें याद आया कि क्यों न राजा से इस बारे में शिकायत कर दें !ताकि वे कुछ फैसला कर दें
एवं मेरा पैसा कन्या के विवाह के लिए मिल जाये।वे राजा के पास पहुँचे तथा अपनी फरियाद सुनाई¶
राजा ने कहा..कल हमारी सवारी निकलेगी तुम उस लालाजी की दुकान के पास खड़े रहना¶¶
राजा की सवारी निकली.. सभी लोगों ने फूलमालाएँ पहनायीं,किसी ने आरती उतारी।पंडित जी लालाजी की दुकान के पास खड़े थे¶
राजा ने कहा…गुरुजी आप यहाँ कैसे !आप तो हमारे गुरु हैं ?आइये इस बग्घी में बैठ जाइये,लालाजी यह सब देख रहे थे,उन्होंने आरती उतारी, सवारी आगे बढ़ गयी।थोड़ी दूर चलने के बाद राजा ने पंडित जी को उतार दिया और कहा कि पंडित जी हमने आपका काम कर दिया¶
अब आगे आपका भाग्य¶
उधर लालाजी यह सब देखकर हैरान थे कि पंडित जी की तो राजा से अच्छी साँठ-गाँठ है¶
कहीं वे हमारा कबाड़ा न करा दें !!लालाजी ने अपने मुनीम को पंडित जी को ढूँढ़कर लाने को कहा..पंडित जी एक पेड़ के नीचे बैठकर कुछ विचार कर रहे थे,मुनीम जी आदर के साथ उन्हें अपने साथ ले गये¶
लालाजी ने प्रणाम किया और बोले..पंडित जी हमने काफी श्रम किया तथा पुराने खाते को देखा..तो पाया कि हमारे खाते में आपका पाँच सौ रुपये जमा है¶
पंडित जी दस साल में ब्याज के बारह हजार रुपये हो गये,पंडित जी आपकी बेटी हमारी बेटी है_ अत:1000₹ आप हमारी तरफ से ले जाइये तथा उसे लड़की की शादी में लगा देना¶ इस प्रकार लालाजी ने पंडित जी को तेरह हजार रुपये देकर प्रेम के साथ विदा किया जब मात्र एक राजा के साथ सम्बंध होने भर से विपदा दूर जो जाती है तो_
हम सब भी अगर इस दुनिया के राजा,दीनदयालु भगवान् से अगर अपना सम्बन्ध जोड़ लें तो
हमारी कोई समस्या,कठिनाई या फिर हमारे साथ अन्याय का.. कोई प्रश्न ही नही उत्पन्न हो¶
जब एक राजा से पहचान होने पर बिगड़े काम सुधर सकते हैं तो भगवान से सीधा पहचान है सीधा संबंध है तो निश्चित ही हमारे सारे बिगड़े काम बन जायेंगे¶¶
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕

 *असली संत कौन*?

      *🍁 हरे कृष्ण 🍁*

एक सन्त को एक नाविक रोज इस पार से उस पार ले जाता था, बदले मैं कुछ नहीं लेता था, वैसे भी सन्त के पास पैसा कहां होता था !

नाविक सरल था, पढ़ा लिखा तो नहीं, पर समझ की कमी नहीं थी ! सन्त रास्ते में ज्ञान की बात कहते, कभी भगवान की सर्वव्यापकता बताते , और कभी अर्थ सहित श्रीमदभगवद्गीता के श्लोक सुनाते…

✍️नाविक मछुआरा बड़े ध्यान से सुनता, और बाबा की बात ह्रदय में बैठा लेता !

🕉️एक दिन उस पार उतरने पर सन्त नाविक को कुटिया में ले गये, और बोले, वत्स, मैं पहले व्यापारी था, धन तो कमाया था, पर अपने परिवार को आपदा से नहीं बचा पाया था, अब ये धन मेरे किसी का काम का नहीं, तुम ले लो, तुम्हारा जीवन संवर जायेगा, तेरे परिवार का भी भला हो जाएगा !

✍️नहीं बाबाजी, मैं ये धन नही ले सकता, मुफ्त का धन घर में जाते ही आचरण बिगाड़ देगा , कोई मेहनत नहीं करेगा, आलसी जीवन लोभ लालच ,और पाप बढायेगा ! आप ही ने मुझे ईश्वर के बारे में बताया , मुझे तो आजकल लहरों में भी कई बार वो नजर आया……जब मै उसकी नजर में ही हूँ, तो फिर अविश्वास क्यों करूं, मैं अपना काम करूं, और शेष उसी पर छोड़ दूं !
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺
✍️ प्रसंग तो समाप्त हो गया, पर एक सवाल छोड़ गया, “इन दोनों पात्रों में सन्त कौन था ?

🛕एक वो था, जिसे दुःख आया, गृह त्याग किया , नाम दान लिया, धर्म ग्रंथों का अध्ययन किया, याद किया, और समझाने लायक स्थिति में भी आ गया, फिर भी धन की ममता नहीं छोड़ पाया, सुपात्र की तलाश करता रहा ।

✍️..और दूसरी तरफ वो निर्धन नाविक , सुबह खा लिया, तो शाम का पता नहीं, फिर भी पराये धन के प्रति कोई ललक नहीं !
🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴
🙏संसार में लिप्त रहकर भी निर्लिप्त रहना आ गया, न ही घर बार छोड़ा , न ही नाम दान लिया, पर उस का ईश्वरीय सत्ता में विश्वास जम गया ! श्रीमदभगवद्गीता के श्लोक को ना केवल समझा बल्कि उन्हें व्यवहारिक जीवन में कैसे उतारना है ये सीख गया, और पल भर में धन के मोह को ठुकरा गया!

✍️”वास्तव में वैरागी कौन”….विचार कीजिए !!🙏
🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳🌳
सन्तोष और प्रसन्नता वह औषधि है…जो हर मर्ज को ठीक कर सकती है , सबसे ख़ास बात यह है कि ये मिलती अपने अन्दर ही है !!

” ✍️सदा सुखी कौन है ? जिसको भगवान् की कृपा पर भरोसा है और उनके न्याय पर विश्वास है , उसको संसार की कोई भी स्थिति विचलित नहीं कर सकती “
ठाकुर बांके बिहारी लाल की जय !!