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🤣🤣🤣🤣🤣 – ऑफर – 🤣🤣🤣🤣🤣

बहुत सालों बाद, घर पर साले साहब आये थे।

भाई को बेहतर से बेहतर – बेहतरीन से बेहतरीन – लज़ीज़– यादगार पकवान खिलाना था। अतः देवीजी ने यू-ट्यूब से ढूंढ-ढूंढ कर–छांट-छांट कर –पकवानों की एक लिस्ट बनायीं थी और साले साहब के आगमन पर पूरे मनोयोग से बना कर परोसा गया था।

देवीजी ने बेशक मेरे लिये वे खास पकवान न बनाया था पर जब घर में बना हो तो मुझें परोसा न जाये ऐसा हो नहीं सकता था।

साले साहब की मेहरबानी से उन पकवानों की लज़्ज़त हमारे नसीब में भी आयी।

खाते समय मैं सोच रहा था कि काश ! साले साहब यहीं रह जायें।
रोज़ तर माल खाने को मिलेगा।

पर, दुनियां की बेरहम सच्चाई ये है कि जिस तरह घर जमाई की इज़्ज़त दो कौड़ी की होती है वैसे ही बहनोई के घर बसे साले भी दो कौड़ी के ही होते है।

हम उम्र पड़ोसियों के लिये जगत साला और बच्चों के लिये जगत मामा।

खैर मेरे साले को कौन सा घर-साला बनना था। सुबह आया था शाम को चले जाना था।

हम दोनों ने भूख से ज़्यादा–ठूस-ठूस कर उदरस्थ किया था।
नतीजा !
खाया-पीया सब हज़म हो जाये– इस नियत से साले साहब के साथ घर से बाहर निकला कि थोड़ा टहल लिया जाये।

रास्ते में एक बोर्ड लगा था। मिठाईवाला के सौंवी वर्ष गांठ पर विशेष उपहार।

उत्सुकतावश अंदर गया – ऑफर था– मुफ्त में जितना जी चाहे– जो चाहे– मन चाहा खाइये।
शर्त थी ! ये ऑफर सिर्फ एक घँटे तक के लिए था। दूसरा जो खाना था – वहीं खाना था। जूठन छोड़ना दण्डनीय था।
मैं पेसोपेश में पड़ गया।
सामने ट्रे में भिन्न-भिन्न प्रकार की मिठाईयां सजी हुई थी पर पेट में एक रसगुल्ले भर की जगह न थी।

आज पहली बार पत्नी की पाक कला पर क्रोध आया।
इतना टेस्टी क्यों पकाती है कि खुद पर कंट्रोल ही नहीं रहता है।
एक अच्छा भला मुफ्तखोरी का मौका मैंने खो दिया।

              **********************

भारत में इंटरनेट का ये हाल है कि कोई जरूरी सूचना भेजनी हो – मंगवानी हो –या डाउनलोड /अपलोड करनी हो – कुछ रजिस्टर्ड करनी हो तो – चकरी घण्टों तक गोल-गोल घूमती नज़र आयेगी लेकिन – चीज़ गैरज़रूरी हो – घटिया हो – अवांछित हो – लानती हो – तो पलक झपकते ही डाऊनलोड भी हो जायेगा और एक्टिवेट भी हो जायेगा।
क्यों?
क्योंकि , जेबकतरे सदा मुस्तेद रहते है।

ऐसे ही एक दिन – – – –

  • – – -अंजाने में –fb में – खूबसूरत ख़्वातीनो के एक ग्रुप में घुस गया था।

एक से बढ़ कर एक बोल्ड ग्लैमरस तस्वीरें।
तस्वीरों से भी ज़्यादा उत्तेजक तस्वीर वालियो के ऑफर!

एक नाज़नीन का पैगाम पढ़ा।
नेकबख्त ने फरमाया था कि अगर मैं तन्हा हूँ तो मैं उसे हासिल कर सकता हूँ।

दोबारा फिर पत्नी से खफा होने का जी चाहता है।

कंडीशन मिठाईवाला के ऑफर जैसा ही है।

एक घर मे बैठी है।
जबकि दूसरी ओर मुझसे भिन्न-भिन्न नगीनों के विषय में पूछा जा रहा हैं कि मेरी पसन्द कौन है?

हुज़ूर , नयन भोग के अलावा मेरे पास कोई चारा नहीं है।

वहाँ पेट भरा था।

यहाँ घर भरा है।

उस ग्रुप की सभी अप्सराओं से क्षमा याचना सहित।

मैं उस ग्रुप से एग्जिट कर गया – – – –

                                      अरुण कुमार अविनाश
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अपनों का साथ

मेरी पत्नी ने कुछ दिनों पहले घर की छत पर कुछ गमले रखवा दिए और एक छोटा सा गार्डन बना लिया। पिछले दिनों मैं छत पर गया तो ये देख कर हैरान रह गया कि कई गमलों में फूल खिल गए हैं, नींबू के पौधे में दो नींबू भी लटके हुए हैं और दो चार हरी मिर्च भी लटकी हुई नज़र आई।

मैंने देखा कि पिछले हफ्ते उसने बांस का जो पौधा गमले में लगाया था, उस गमले को घसीट कर दूसरे गमले के पास कर रही थी। मैंने कहा तुम इस भारी गमले को क्यों घसीट रही हो ?

पत्नी ने मुझसे कहा कि यहां ये बांस का पौधा सूख रहा है, इसे खिसका कर इस पौधे के पास कर देते हैं। मैं हंस पड़ा और कहा अरे पौधा सूख रहा है तो खाद डालो, पानी डालो।

इसे खिसका कर किसी और पौधे के पास कर देने से क्या होगा ?” पत्नी ने मुस्कुराते हुए कहा ये पौधा यहां अकेला है इसलिए मुर्झा रहा है। इसे इस पौधे के पास कर देंगे तो ये फिर लहलहा उठेगा।

पौधे अकेले में सूख जाते हैं, लेकिन उन्हें अगर किसी और पौधे का साथ मिल जाए तो जी उठते हैं।” यह बहुत अजीब सी बात थी। एक-एक कर कई तस्वीरें आखों के आगे बनती चली गईं।

पिता की मौत के बाद माताजी कैसे एक ही रात में बूढ़ीं, बहुत बूढ़ी हो गई थी। हालांकि पिता जी के जाने के बाद नौ साल बीत गये है, लेकिन सूखते हुए पौधे की तरह। पिता के रहते हुए जिस माताजी को मैंने कभी उदास नहीं देखा था, वो पिता के जाने के बाद खामोश सी हो गईं थीं।

मुझे पत्नी के विश्वास पर पूरा विश्वास हो रहा था। लग रहा था कि सचमुच पौधे अकेले में सूख जाते होंगे। बचपन में मैं एक बार बाज़ार से एक छोटी सी रंगीन मछली खरीद कर लाया था और उसे शीशे के जार में पानी भर कर रख दिया था।
मछली सारा दिन गुमसुम रही। मैंने उसके लिए खाना भी डाला, लेकिन वो चुपचाप इधर-उधर पानी में अनमना सा घूमती रही। सारा खाना जार की तलहटी में जाकर बैठ गया, मछली ने कुछ नहीं खाया। दो दिनों तक वो ऐसे ही रही, और एक सुबह मैंने देखा कि वो पानी की सतह पर उल्टी पड़ी थी।

आज मुझे घर में पाली वो छोटी सी मछली याद आ रही थी। बचपन में किसी ने मुझे ये नहीं बताया था, अगर मालूम होता तो कम से कम दो, तीन या ढ़ेर सारी मछलियां खरीद लाता और मेरी वो प्यारी मछली यूं तन्हा न मर जाती।

बचपन में मेरी माँ से सुना था कि लोग मकान बनवाते थे और रौशनी के लिए कमरे में दीपक रखने के लिए दीवार में इसलिए दो मोखे बनवाते थे क्योंकि माँ का
कहना था कि बेचारा अकेला मोखा गुमसुम और उदास हो जाता है।

मुझे लगता है कि संसार में किसी को अकेलापन पसंद नहीं। आदमी हो या पौधा, हर किसी को किसी न किसी के साथ की ज़रुरत होती है।

अकेलापन संसार में सबसे बड़ी सजा है। गमले के पौधे को तो हाथ से खींच कर एक दूसरे पौधे के पास किया जा सकता है, लेकिन आदमी को करीब लाने के लिए जरुरत होती है रिश्तों को समझने की, सहेजने की और समेटने की।

अगर मन के किसी कोने में आपको लगे कि ज़िंदगी का रस सूख रहा है, जीवन मुरझा रहा है तो उस पर रिश्तों के प्यार का रस डालिए।

खुश रहिए और मुस्कुराइए। कोई यूं ही किसी और की गलती से आपसे दूर हो गया हो तो उसे अपने करीब लाने की कोशिश कीजिए और हो जाइए हरा-भरा।

आँसू राजा राजा

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पापा और बेटे के प्यार का अंतर
यह कहानी पूरी पढिए

पापा पापा मुझे चोट लग गई खून आ रहा है
5 साल के बच्चे के मुँह से सुनना था
कि पापा सब कुछ छोड़ छाड़ कर
गोदी में उठाकर एक किलोमीटर की दूरी पर क्लिनिक तक भाग-भाग कर ही पहुँच गए !

दुकान कैश काउंटर सब नौकर के भरोसे छोड़ आये !

सीधा डाक्टर के केबिन में दाखिल होते हुए
डॉक्टर को बोले, देखिये डॉक्टर साहब
मेरे बेटे को क्या हो गया है ??

डॉक्टर साहब ने देखते हुए कहा, अरे भाई साहब
घबराने की कोई बात नहीं है मामूली चोट है….
ड्रेसिंग कर दी है जल्दी ठीक हो जायेगी !

डॉक्टर साहब कुछ पेन किलर लिख देते तो दर्द कम हो जाता ! अच्छी से अच्छी दवाईया लिख देते ताकि जल्दी ठीक हो जाये घाव जल्दी भर जाये !!

डाक्टर अरे भाई साहब क्यों इतने परेशान हो रहे हो कुछ नहीं हुआ है 3-4 दिन में ठीक हो जायेगा !!

डॉक्टर साहब इसको रात को नींद तो आयेगी ना ?

डॉक्टर अरे हाँ भाई हाँ आप चिंता मत करो !
बच्चे को लेकर लौटे तो नौकर बोला सेठ जी,
आपका ब्रांडेड महंगा शर्ट खराब हो गया,
खून लग गया अब ये दाग नही निकलेंगे !

भाई साहब कोई नहीं ऐसे शर्ट बहुत आएंगे जायेंगे
मेरे बेटे का खून बह गया वो चिंता खाये जा रही है,
कमजोर नहीं हो जाये, तू जा एक काम कर,
थोड़े सूखे मेवे फ्रूट ले आ इसे खिलाना पड़ेगा,
और मैं इसको लेकर चलता हूँ घर पर !!

40 साल बाद

दुकान शोरूम में तब्दील हो गई थी !

भाई साहब का बेटा व्यापार बखूबी संभाल रहा था !
भाई साहब रिटायर्ड हो चुके हैं घर पर ही रहते थे !
तभी घर से बेटे की बीवी का फोन आता है !

बीवी 📞 अजी सुनते हो ?
ये आपके पापा पलंग से गिर गए हैं,
सर पर से काफी खून आ रहा है !!

लड़का 🤔अरे यार ये पापा भी न 🤔
इनको बोला है जमीन पर सो जाया करो
पर मानते हीे नही पलंग पर ही सोते है !
अरे रामू काका जाओ तो घर पर पापा को,
डॉक्टर अंकल के पास ले कर आओ !
मैं आता हूँ सीधा हॉस्पिटल वहीँ पर !!

बूढ़े हो चुके रामू काका धीरे चल कर घर जाते है !
तब तक सेठजी का काफी खून बह चुका था !!

बहु मुँह चढ़ा कर बोली ले जाओ जल्दी,
पूरा महंगा कालीन खराब हो गया है !!

काका जैसे तैसे जल्दी से रिक्शा में
सेठजी को डाल कर क्लीनिक ले गए !

बेटा अब तक नही पंहुचा था
काका ने फोन किया तो बोला अरे यार वो
कार की चाबी नही मिल रही थी अभी मिली है !
थोड़े कस्टमर भी है आप बैठो लेकर मैं आता हूँ !

जो दूरी 40 साल पहले एक बाप ने
बेटे के
सर पर खून देखकर 10 मिनट में बेटे को
गोदी में उठा कर भाग कर तय कर ली थी !

उतनी दूरी बेटा
1 घन्टे में कार से भी तय नही कर पाया था !

डाक्टर ने जैसे ही भाई साहब को देखा,
उनको अंदर ले जाकर इलाज चालू किया !
तब तक बेटा भी पहुँच गया डॉक्टर अंकल बोले,
बेटे खून बहुत बह गया है एडमिट करना पड़ेगा !

बेटा अरे कुछ नही डाक्टर साहब,
आप
ड्रेसिंग कर दो ठीक हो जायेगा 2-4 दिन में !!

डाक्टर अंकल बोले ठीक है, कुछ दवाईया लिख देता हूँ थोड़ी महंगी है, लेकिन आराम जल्दी हो जायेगा !!

लड़का अरे डॉक्टर अंकल चलेगा 4-5 दिन ज्यादा लगेंगे तो अब इतनी महंगी दवाइयो की क्या जरूरत ?

चलो मुझे निकलना पड़ेगा शोरूम पर कोई नहीं है !

ये सुनते ही डॉक्टर अंकल के सब्र का बांध टूट गया !
और 40 साल पहले की घटना उसे पूरी सुना दी !

बेटे की आँखों आंसू बहने लगे,
उसे बहुत ही पश्चाताप हुआ !

तभी बहू का फोन आया,
वो महंगा कालीन खराब हो गया है
क्या करूँ ?

बेटा बोला कालीन ही खराब हुआ है ना !
नया आ जायेगा
तुम पलंग पर नया चद्दर और गद्दा डालो,
मैँ पापा को घर पर ले कर आ रहा हूँ !

भाई साहब की आँखों में आँसू थे !
लेकिन ये ख़ुशी के आँसू थे !!

चोट का दर्द गायब था !
बेटे के अपनेपन ने सब दर्द भुला दिया था !!

बस अब तो मौत भी आ जाये तो
मंजूर है !

दोस्तों ये आज की सच्चाई है
आज हमारे अंदर का इंसान मर चुका है

माँ बाप अकेलेपन का जीवन जी रहे हैं !

और बच्चे कामयाबी और दौलत की चकाचौंध में खो कर सब कुछ भूल चुके हैं !!
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🙏🏻🌹जय श्री जिनेन्द्र 🌹🙏🏻
❤️पवन जैन❤️

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🌳🦚आज की कहानी🦚🌳

💐💐मुसीबत का सामना💐💐

एक गाँव में एक बढ़ई रहता था। वह शरीर और दिमाग से बहुत मजबूत था।

एक दिन उसे पास के गाँव के एक अमीर आदमी ने फर्नीचर बनबाने के लिए अपने घर पर बुलाया।

जब वहाँ का काम खत्म हुआ तो लौटते वक्त शाम हो गई तो उसने काम के मिले पैसों की एक पोटली बगल मे दबा ली और ठंड से बचने के लिए कंबल ओढ़ लिया।

वह चुपचाप सुनसान रास्ते से घर की और रवाना हुआ। कुछ दूर जाने के बाद अचानक उसे एक लुटेरे ने रोक लिया।

डाकू शरीर से तो बढ़ई से कमजोर ही था पर उसकी कमजोरी को उसकी बंदूक ने ढक रखा था।

अब बढ़ई ने उसे सामने देखा तो लुटेरा बोला, ‘जो कुछ भी तुम्हारे पास है सभी मुझे दे दो नहीं तो मैं तुम्हें गोली मार दूँगा।’

यह सुनकर बढ़ई ने पोटली उस लुटेरे को थमा दी और बोला, ‘ ठीक है यह रुपये तुम रख लो मगर मैं घर पहुँच कर अपनी बीवी को क्या कहुंगा। वो तो यही समझेगी कि मैने पैसे जुए में उड़ा दिए होंगे।

तुम एक काम करो, अपने बंदूक की गोली से मेरी टोपी मे एक छेद कर दो ताकि मेरी बीवी को लूट का यकीन हो जाए।’

लुटेरे ने बड़ी शान से बंदूक से गोली चलाकर टोपी में छेद कर दिया। अब लुटेरा जाने लगा तो बढ़ई बोला,

‘एक काम और कर दो, जिससे बीवी को यकीन हो जाए कि लुटेरों के गैंग ने मिलकर मुझे लूटा है । वरना मेरी बीवी मुझे कायर ही समझेगी।

तुम इस कंबल मे भी चार- पाँच छेद कर दो।’ लुटेरे ने खुशी खुशी कंबल में भी कई गोलियाँ चलाकर छेद कर दिए।

इसके बाद बढ़ई ने अपना कोट भी निकाल दिया और बोला, ‘इसमें भी एक दो छेद कर दो ताकि सभी गॉंव वालों को यकीन हो जाए कि मैंने बहुत संघर्ष किया था।’

इस पर लुटेरा बोला, ‘बस कर अब। इस बंदूक में गोलियां भी खत्म हो गई हैं।’

यह सुनते ही बढ़ई आगे बढ़ा और लुटेरे को दबोच लिया और बोला, ‘मैं भी तो यही चाहता था।

तुम्हारी ताकत सिर्फ ये बंदूक थी। अब ये भी खाली है। अब तुम्हारा कोई जोर मुझ पर नहीं चल सकता है।

चुपचाप मेरी पोटली मुझे वापस दे दे वरना …..

यह सुनते ही लुटेरे की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई और उसने तुरंत ही पोटली बढई को वापिस दे दी और अपनी जान बचाकर वहाँ से भागा।

आज बढ़ई की ताकत तब काम आई जब उसने अपनी अक्ल का सही ढंग से इस्तेमाल किया।

इसलिए कहते है कि मुश्किल हालात मे अपनी अक्ल का ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए तभी आप मुसीबतों से आसानी से निकल सकते हैं।

💐💐प्रेषक अभिजीत चौधरी💐💐

सदैव प्रसन्न रहिये!!
जो प्राप्त है-पर्याप्त है!!
🙏🙏🙏🙏🙏🌳🌳🙏🙏🙏🙏