Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक बार एक संत एक नदी के किनारे के रास्ते से जा रहे थे। तभी अचानक एक जगह उन्होंने देखा कि नदी की सतह से एक कछुआ निकला और पानी के बिलकुल किनारे पर आ गया।

उसी किनारे से एक बड़े ही जहरीले बिच्छु ने नदी के अन्दर छलांग लगाई और कछुए की पीठ पर सवार हो गया। कछुए ने तैरना शुरू कर दिया।

पूरा दृश्य देख वह संत बड़े हैरान हुए।

उन्होंने उस कछुए का पीछा करने की ठान ली। इसलिए उन्होंने नदी में तैर कर उस कछुए का पीछा करना शुरू किया। वह कछुआ नदी के दूसरे किनारे पर जाकर रूक गया और बिच्छू उसकी पीठ से छलांग लगाकर दूसरे किनारे पर चढ़ गया और आगे चलना शरू कर दिया।

संत भी उसके पीछे चलते रहे। आगे जाकर उन्होंने देखा कि जिस तरफ बिच्छू जा रहा था, उसके रास्ते में एक आदमी बड़े ध्यान में आँखे बन्द कर प्रभु की भक्ति में लगा हुआ था।

उस संत ने सोचा कि अगर यह बिच्छू उस आदमी को काटना चाहेगा तो मैं उसके करीब पहुंचने से पहले ही उसे अपनी लाठी से मार डालूंगा।

लेकिन वह चंद कदम आगे बढे ही थे कि उन्होंने देखा दूसरी तरफ से एक काला जहरीला साँप तेजी से उस आदमी को डंसने के लिए आगे बढ़ रहा था। इतने में बिच्छू भी वहां पहुंच गया।

उस बिच्छू ने ठीक उसी हालत में सांप को डंक मार कर उसे बेसुध कर दिया । बिच्छू का जहर सांप के जिस्म में दाखिल हो गया और वह सांप वहीं अचेत हो कर गिर पड़ा था। इसके बाद वह बिच्छू अपने रास्ते पर वापस चला गया।

थोड़ी देर बाद जब वह आदमी भगवान की पूजा से उठा, तब उस संत ने उसे बताया कि प्रभु ने तेरी हिफाजत के लिए कैसे उस कछुए को नदी के किनारे लाया , फिर कैसे उस बिच्छु को कछुए की पीठ पर बैठा कर साँप से तेरी रक्षा के लिए भेजा ।

वह आदमी उस अचेत पड़े सांप को देखकर हैरान रह गया। उसकी आंखों से आंसू निकल आए और वह आँखें बन्द कर भगवान को याद कर उनका शुक्रिया अदा करने लगा ।

संत ने उस आदमी से कहा -बेटा, जब मैं स्वयं जो तुम्हें जानता तक नही,तुम्हारी जान बचाने के लिए लाठी लेकर नदी पार करते हुए यहाँ तक आ सकता हूँ तो फिर तू जिस प्रभु की आराधना में लीन था, वो तुम्हारी हिफाज़त कैसे न करता । प्रभु हमेशा अपनी भक्तों की हिफाज़त करते हैं, ये एक बार फिर सिद्ध हो गया ।

संजीव बल्यं

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