Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

फकीर की विनम्रता से सुधरा युवक
एक पहुंचे हुए फकीर थे। सादगी और विनम्रता के धनी इस
फकीर के जीवन का उद्देश्य था लोगों का भला करना। एक बार राह से
गुजरते वक्त उन्होंने एक युवक को तम्बूरा बजा-बजाकर भद्दे गीत गाते
| देखा । लोग उसके भद्दे गीत सुनकर नाराज हो रहे थे। फकीर को लगा
कि यदि युवक कुछ देर और इसी प्रकार गाता रहा तो लोग उसे मारेंगे।
फकीर ने युवक की रक्षा के लिए जोर-जोर से यह गाना शुरू कर दिया,
‘अल्लाह ! तू महान है। बिना तेरी कृपा के कोई कुछ नहीं कर सकता।
परवरदिगार ! मुझ पर सदा दया-दृष्टि रखना।’ फकीर के ऊंचे स्वर में
गाने से क्रोधित होकर युवक बोला, ‘चुप हो जा फकीर! यह क्या
बकवास लगा रखी है ?’ फकीर ने उसकी बात अनसुनी करते हुए गाना
जारी रखा, ‘हे खुदा! बेअक्लों को अक्ल दे, भटको को सही राह
दिखा।’ गुस्से में आकर युवक ने तम्बूरा फकीर के सिर पर दे मारा।
तम्बूरा टूट गया और फकीर के सिर से खून बहने लगा। यह देख युवक
वहां से भाग गया। फकीर अपनी कुटिया में पहुंचे तो शागिर्दो ने उनकी
मरहम पट्टी की। फिर फकीर ने एक शागिर्द से कहा, ‘तू उस युवक के
पास जाकर तम्बूरे की कीमत दे और साथ में मिठाई भी ले जाना। क्रोध
बहुत बुरी वृत्ति है और मुझे अफसोस है कि मेरे कारण उसे इतना क्रोध
आया।’ शागिर्द जब ये चीजें लेकर युवक के पास पहुंचा तो उसे बहुत
हैरानी हुई। उसने स्वयं के खराब आचरण पर शर्मिंदगी महसूस की।
वह उसी वक्त फकीर के पास पहुंचा और माफी मांगी। इसके बाद
युवक फकीर का शागिर्द बन गया। अनेक अवसरों पर विनम्रता व
सहनशीलता सुधार का मार्ग बन जाते हैं। इसलिए इन्हें अपनी स्वाभाविक
वृत्ति बनाकर उचित अवसर पर उपयोग करना चाहिए।

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