Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक सूफी फकीर को हमेशा कि आदत थी की अकेला भोजन नहीं करता था , हर किसी को निमंत्रण दे देता था, या बुला लाता था.

मगर एक दिन ऐसा हुआ बहुत खोजा लेकिन कोई मिला ही नहीं या तों लोग भोजन कर चुके थे या फिर भोजन करने जा रहे थे या कुछ कहीं निमंत्रित थे.

कोई राजी ही नहीं हुआ आने को और अकेले वह भोजन नहीं करता, किसी के साथ में भोजन करता बांट कर हि भोजन करता. unconditional love of god,

उसने सोचा आज भुखा ही रहना पड़ेगा तभी द्वार पर एक बूढे आदमी ने दस्तक दी और उसने कहा –मैं बहुत भुखा हूं ….!
क्या कुछ खाने को मिल सकता है. ..?

उसने कहा — मेरे धन्य भाग्य…!
आओं मैं प्रतिक्षा ही कर रहा था, जरुर तुम्हैं परमात्मा ने ही भेजा होगा उसकी करुणा अपरंपार है उसने मेहमान को बिठाया और थाली लगाई भोजन परोसा और मेहमान भोजन शुरु करने ही जा रहे थे कि उसने देखा कि इसने तो अल्लाह का नाम ही नहीं लिया .

भोजन के पहले अल्लाह का नाम तो लेना चाहिए प्रार्थना तो करनी चाहिये.
उसने उसका हाथ पकड़ लिया इससे पहले की कौर मूहँ में जाये उसने कहा- रुको,
आल्लाह का नाम नहीं लिया,

उस आदमी ने कहा –मैं अल्लाह आदि में भरोसा नहीं करता, कोई ईश्वर नहीं है तो मैं क्यों नाम लूं.

सुफी फकीर ने कहा –फिर भोजन न कर सकोगे और तभी अचानक अल्लाह की आवाज सुनाई पडी ‘ अरे पागल मैं इस आदमी को सत्त्तर साल से भोजन दे रहा हूं और इसने एक भी बार मेरा नाम नहीं लिया और तुने इसका बढ़ा हुआ हाथ पकड लिया
ये भुखा बूढा भोजन, और भोजन में भी शर्त बंदी. भोजन में भी तुने शर्त लगा दी
प्रेम में कोई शर्त नहीं होती है. तुझे अनुग्रहीत होना चाहिए कि इसने तेरा निमंत्रण स्वीकार किया अनुग्रह तो दूर रहा तु तो इस पर शर्त थोपने लगा तुझसे तो यह बुढ़ा बेहतर है ये भुखा रहने को राजी है लेकिन अपने उसूल के खिलाफ जाने को राजी नहीं है और जिसको मैं सत्त्तर साल से भोजन करा रहा हूं तु उसे एक दिन भोजन नहीं करा सका.

फकीर उस बुढ़े के चरणों मे गिर पडा — कहा आप भोजन करें मुझसे भुल हुई थी
धर्म के नाम पर शर्त नहीं लगाई जा सकती
परमात्मा बेशर्त हैं . उसकी कृपा और करुणा तुम्हारी किसी योग्यता के कारण नहीं होती उसकी करुणा उसका स्वभाव है तुम्हारा सवाल नहीं है.

गुलाब का फूल गुलाब की खूशबू देगा
जूही का फूल जूही की खूशबू देगा वह यह फिकर नहीं करता की पास से जो निकल रहा है वो इसके पात्र है या नहीं,
सुरज निकलेगा तो रोशनी होगी आस्तिक के लिए भी और नास्तिक के लिए भी, साधु के लिए भी असाधु के लिए भी, यह सुरज का लक्षण है
वो कुछ शर्त नहीं करता की नास्तिक के लिए अंधेरा रहेगा और आस्तिक के लिए दिन हो जाएगा.
परमात्मा का प्रेम बेशर्त होता है💕

गिरधारी अग्रवाल

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