Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

इतिहास पुरुष महाबाहुबली #महाराजा_छत्रसाल

औरंगज़ेब का परचम जब भारतवर्ष में फहरा रहा था उस समय दक्खन से #छत्रपतिमहाराजशिवाजी ने और बुंदेलखंड की वीर प्रसूता भूमि से महाराज छत्रसाल ने ऐसा भीषण सिंहनाद किया कि दिल्ली के तख़्त की चूलें हिल गयीं। इनकी महा सिंह गर्जना से अपने को आलमगीर कहने वाले बादशाह औरंगज़ेब का हृदय भय से बेचैन हो गया।

औरंगज़ेब ने तमाम यत्न किए किंतु इन सिंहपुरूषों के शौर्य के आगे उसकी एक ना चली, और अंततः हारकर उसे इनकी स्वाधीनता को स्वीकारने पर विवश होना पड़ा।

मात्र पाँच घुड़सवारों की सेना से अपने राज का आरम्भ करने वाले महाबाहुबली महाराज छत्रसाल साहब ने औरंगज़ेब के देखते ही देखते उसकी नाक के नीचे मध्यभारत में एक विशाल वैभवशाली साम्राज्य गढ़ दिया जिसकी सीमा के बारे में कहा जाता है-

“भैंस बंधी है ओरछा, पड़ा होशंगाबाद।
लगवैया हैं सागरे और चपिया रेवा पार॥’

अर्थात ओरछा से लेकर होशंगाबाद तक और सागर से लेकर नर्मदा की शिवभूमि तक महाराज साहब के शौर्य की विजय पताका लहराने लगी।
और उन्होंने स्वतंत्र बुंदेलखंड राज्य की नींव रख दी।

महाराज छत्रसाल के ४४ वर्ष के राजकाल में उन्होंने बावन युद्ध लड़े और सभी में उन्होंने विजय श्री हासिल की वे अपराजेय थे और जीवन के अंत तक अपराजेय ही रहे।

ऐसे दैदीप्यमान वीरशिरोमणि के जीवन कृतित्व के लिए कौन होगा जो भाव से भरा ना हो ? एक अभिनेता के रूप में मैं सदैव चाहता था की इन युगपुरुष के ऊपर कोई सिरीज़ बननी चाहिए। कहा जाता है कि जब आप शिद्दत से किसी बात की कामना करते हैं तो परमात्मा उसे पूर्ण करते हैं।

एक दिन अचानक श्री अनादि चतुर्वेदी और सुश्री रेचल मेरे पास आए और मुझे #छत्रसाल की स्क्रिप्ट सुना दी और कहा की हम चाहते हैं आप इस #वेबसिरीज़ को #सूत्रधार के रूप में प्रस्तुत करें व साथ ही इस कहानी में आप #औरंगज़ेब के पेंचिदा किरदार को भी अंजाम दें।
मेरे लिए यह प्रस्ताव अपने स्वप्न के साकार होने जैसा था।

मैं हृदय से आभारी हूँ श्री #अनादिचतुर्वेदी और सुश्री #रेचल का.. आपने और आपके प्रोडक्शन हाउस #रेजोनेंसडिजिटल की टीम ने इस विषय की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कहानी, संवाद, चरित्र चित्रण, सेट, कॉस्टूम, लोकेशंज़, छायांकन, संगीत पर बहुत बारीक और गुणवत्ता पूर्ण कार्य किया है।
आप लोग एक रचनाधर्मी के रूप में जितने सिद्ध हैं, एक व्यक्ति के रूप में भी उतने ही शुद्ध भी हैं। मेरी इच्छा है कि आपके साथ बना मेरा ये रचनात्मक रिश्ता सदैव चलता रहे।

आप सभी मित्रों शुभचिंतकों प्रशंसकों से #औरंगज़ेब का फ़र्स्ट लुक शेयर करते हुए अभिभूत हूँ।
आशा है आपका स्नेह, शुभकामनाएँ और आशीर्वाद मुझे सदैव मिलता रहेगा। आप सभी के मंगल की कामना के साथ सादर प्रणाम~#आशुतोष_राणा

“छत्ता तोरे राज में धक-धक धरती होय।
जित जित घोड़ा मुख करे उत-उत फत्ते होय॥”

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