Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

Ram Ram ji,#कर्मचक्र

🔶 एक कारोबारी सेठ सुबह सुबह जल्दबाजी में घर से बाहर निकल कर ऑफिस जाने के लिए कार का दरवाजा खोल कर जैसे ही बैठने जाता है, उसका पाँव गाड़ी के नीचे बैठे कुत्ते की पूँछ पर पड़ जाता है। दर्द से बिलबिलाकर अचानक हुए इस वार को घात समझ वह कुत्ता उसे जोर से काट खाता है। गुस्से में आकर सेठ आसपास पड़े 10-12 पत्थर कुत्ते की ओर फेंक मारता है पर भाग्य से एक भी पत्थर उसे नहीं लगता है और वह कुत्ता भाग जाता है।

🔷 सेठजी अपना इलाज करवाकर ऑफिस पहुँचते हैं जहां उन्होंने अपने मातहत मैनेजर्स की बैठक बुलाई होती है। यहाँ अनचाहे ही कुत्ते पर आया उनका सारा गुस्सा उन बिचारे प्रबन्धकों पर उतर जाता है। वे प्रबन्धक भी मीटिंग से बाहर आते ही एक दूसरे पर भड़क जाते हैं – बॉस ने बगैर किसी वाजिब कारण के डांट जो दिया था। अब दिन भर वे लोग ऑफिस में अपने नीचे काम करने वालों पर अपनी खीज निकलते हैं – ऐसे करते करते आखिरकार सभी का गुस्सा अंत में ऑफिस के चपरासी पर निकलता है जो मन ही मन बड़बड़ाते हुए भुनभुनाते हुए घर चला जाता है।

🔶 घंटी की आवाज़ सुन कर उसकी पत्नी दरवाजा खोलती है और हमेशा की तरह पूछती है “आज फिर देर हो गई आने में…. वो लगभग चीखते हुए कहता है “मै क्या ऑफिस कंचे खेलने जाता हूँ? काम करता हूँ, दिमाग मत खराब करो मेरा, पहले से ही पका हुआ हूँ, चलो खाना परोसो” अब गुस्सा होने की बारी पत्नी की थी, रसोई मे काम करते वक़्त बीच बीच में आने पर वह पति का गुस्सा अपने बच्चे पर उतारते हुए उसे जमा के तीन चार थप्पड़ रसीद कर देती है। अब बिचारा बच्चा जाए तो जाये कहाँ, घर का ऐसा बिगड़ा माहौल देख, बिना कारण अपनी माँ की मार खाकर वह रोते रोते बाहर का रुख करता है, एक पत्थर उठाता है और सामने जा रहे कुत्ते को पूरी ताकत से दे मारता है। कुत्ता फिर बिलबिलाता है।

👉 सन्तमत विचार-दोस्तों ये वही सुबह वाला कुत्ता था!! अरे भई उसको उसके काटे के बदले ये पत्थर तो पड़ना ही था केवल समय का फेर था और सेठ जी की जगह इस बच्चे से पड़ना था!! उसका कार्मिक चक्र तो पूरा होना ही था ना!! इसलिए मित्र यदि कोई आपको काट खाये, चोट पहुंचाए और आप उसका कुछ ना कर पाएँ, तो निश्चिंत रहें, उसे चोट तो लग के ही रहेगी, बिलकुल लगेगी, जो आपको चोट पहुंचाएगा, उस का तो चोटिल होना निश्चित ही है, कब होगा किसके हाथों होगा ये केवल ऊपरवाला जानता है पर होगा ज़रूर, अरे भई ये तो सृष्टी का नियम है !!!

🙏 🙏

shubh__kashyaP

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

બીરબલની_ખીચડી (રવીવારની બાલવાર્તા)

એક દિવસે અકબરે સભામાં ઘોષણા કરી કે નગર પાસે જે તળાવ છે જેમાં શિયાળામાં પાણી બરફ બની જાય છે જો કોઈ માણસ રાત ભર તેમાં ઉભો રહી શકે તો હું એમને મનગમતુ ઈનામ આપીશ !

કોઇ પણ માણસ આ શરત પુરી કરવા તૈયાર નહોતુ.

ધીમે ધીમે વાત આખા નગરમા ફેલાઇ.

એક ગરીબ માણસ આ કરવા માટે તૈયાર થઈ ગયો.
તેણે વિચાર્યુ કે આમેય ખાવાના સાંસા પડે છે.
જો શરત જીતીશ તો અઢળક ધન મળશે. અને આ દુ:ખમાથી મુક્તી મળશે.

નક્કી કરેલ સમયે તે માણસને તળાવમા આખી રાત્રી ઉભુ રહેવાનુ હતુ.

અકબરે એક સિપાહીને તે માણસનુ ધ્યાન રાખવા માટે મોકલ્યો.

એ માણસ એ તળાવમાં ગયો અને એણે આશરે 1 કિમી દૂર પ્રગટતા દીવા તરફ મોઢું કરીને ઉભા રહેવાનું સ્વીકાર કર્યું આ વાતની સિપાહીને નવાઈ લાગી.

એ માણસ રાતભર કડકાડતી ઠંડીમાં તળાવમાં ઉભો રહ્યો.

સવારે રાજ્યસભામાં આવીને તેણે જણાવ્યુ કે આપની શરત મે પુરી કરી છે.

ત્યારે અકબરે સિપાહીને પૂછ્યું કે શું આ માણસે સાચે જ રાતભર તળાવમાં સમય પસાર કર્યો છે ?

સિપાહીએ કહ્યું- હાં ! પણ આ માણસ આશરે 1 કિમી દૂર પ્રગટી રહેલા દીવાથી તાપ લઈ રહ્યો હતો.

આ સાંભળીને અકબરને ગુસ્સો આવી ગયો. અને એણે કોઈની વાત ના સાંભળી અને એ યુવાનને જેલમાં બંદ કરી દીધો.
——————————-

સભામાં આ બધું બીરબલ જોઈ રહ્યો હતો. સભા પછી બીરબલે અકબરને આગ્રહ કરીને કીધું કે આજે રાજા તેમના ઘરે ભોજન પર આવે. અકબરે નિમંત્રણ સ્વીકાર કરી લીધો.

અકબર બિરબલનાં ઘરે પહોંચ્યો.
બિરબલે કહ્યુ કે મહારાજ આપ થોડીવાર બગીચામાં આરામ ફરમાવો ભોજન તૈયાર થઇ રહ્યુ છે.

અકબર બગીચામા રાહ જોવા લાગ્યો..
આમ ઘણો સમય પસાર થઇ ગયો. તેને ભૂખ પણ લાગી હતી. પણ ભોજન તૈયાર નહી હતું.

થોડી થોડી વારે સિપાહીને ભોજનની તપાસ કરવા મોકલે ત્યારે બિરબલ સૈનિકને એક જ જવાબ આપી દેતો કે થોડીવાર રાહ જુવો. ભોજન તૈયાર થઇ રહ્યુ છે.

આમ સમય પસાર થતો ગયો. અકબર હવે ભુખ અને ક્રોધથી વ્યાકુળ થઇ ગયો હતો.

ગુસ્સામા પોતે જ બીરબલ પાસે જઇને પૂછયું ભોજન ક્યારે મળશે મને કડકડતી ભુખ લાગી છે ?

બીરબલે કીધું કે મે ત્રણ કલાક પહેલા ખિચડી રાંધવા માટે મૂકી છે પણ શું ખબર , એ શા માટે રંધાતી જ નથી ?

અકબરે કીધું ક્યાં બની રહી છે મને બતાવો.

બીરબલ રાજાને એ સ્થળે લઇ ગયો.

અકબર તો એ દ્રશ્ય જોઇને ક્રોધથી લાલપીળો થઇ ગયો.
નીચે સગડી બળી રહી છે અને દસેક ફુટ ઉપર માટલીમાં ખિચડી રાંધવા મૂકી છે. અમરકથાઓ

આ જોઈ અકબરે ગુસ્સામાં કહ્યું – બીરબલ શું તમે ગાંડા થઈ ગયા છો. આ રીતે તો પાણી પણ ગરમ નહી થશે. તો આ ખિચડી કેવી રીતે રંધાય ?

ત્યારે બીરબલે કીધું કે રંધાશે મહારાજ ચોક્કસ ખીચડી પાકશે.

જો તળાવમાં ઉભેલા માણસને 1 કિમી દૂર પ્રગટતા દીવાથી તાપ મળી શકતો હોય તો ખિચડી થોડીક જ ઉચે છે. તો ચોક્કસ રાંધી શકાય છે.

હવે અકબરને પૂરી વાત સમજાઈ અને એણે તે યુવાનને મુક્ત કરી મનગમતું ઈનામ આપ્યું. આવી હતી બીરબલની પ્રસિદ્ધ ખિચડી .

➡ મિત્રો આ વાર્તા વિડીયો એનિમેશન સ્વરુપે નીચે મુકી છે… આપ ત્યાથી માણી શકો છો. આપના નાના બાળકોને આવી વાર્તાઓ બતાવો. જેમા ગમ્મત સાથે જ્ઞાન મળે.. 👇👇👇👇
https://youtu.be/6JIwpuYR4v0

અમર કથાઓ ગૃપ દ્વારા આ ચેનલ બનાવવામાં આવી છે.
આવા જ સુંદર વિડીયો અને બાળવાર્તાઓ નિયમીત ચેનલમાં મુકવામા આવશે. તો subscribe કરી લેજો.

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

डॉ के0एस0अय्यर एक महान जिद्दी, सनकी और एकांत पसंद वैज्ञानिक थे। उन्होंने नैनो टेक्नालॉजी पर काफी शोध किया था। नैनो का अर्थ है ऐसे पदार्थ, जो अति सूक्ष्म आकार वाले तत्वों (मीटर के अरबवें हिस्से) से बने होते हैं। नैनो टेक्नोलॉजी अणुओं व परमाणुओं की इंजीनियरिंग है, जो भौतिकी, रसायन, बायो इन्फॉर्मेटिक्स व बायो टेक्नोलॉजी जैसे विषयों को आपस में जोड़ती है। इस प्रौद्योगिकी से विनिर्माण, बायो साइंस, मेडिकल साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स व रक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है, क्योंकि इससे किसी वस्तु को एक हजार गुणा तक मजबूत, हल्का और भरोसेमंद बनाया जा सकता है।

सन 1980 में जब अमेरिका जैसे देश में इस टेक्नालॉजी का उदय हुआ था, तभी से डॉ अय्यर इस शोध में जुट गये थे और कहना गलत नहीं होगा, डॉ अय्यर अपने शोध में अमेरिकियों से भी काफी आगे निकल गये थे। पर भारत सरकार की उनके इस शोध में कोई दिलचस्पी नहीं थी। इस बेरुखी से आहत होकर उन्होंने अमेरिका का रुख किया। अमेरिका में उन्हें सारी सुविधाएं दी गयीं और तगड़ी सुरक्षा भी मुहैया कराई गयी। पर जल्दी ही वो अमेरिका की जीवनशैली और रहन सहन से ऊब गये और वापस भारत आ गये। अमेरिका के छोटे प्रवास के दौरान भी वो विश्व मे काफी चर्चित हो चुके थे। इस बार भी भारत सरकार ने न उन्हें कोई महत्वपूर्ण पद दिया और न ही सुरक्षा दी। एक सुबह वो अपने बंगले में मृत पाये गये और उनके शव का पोस्टमार्टम तक नहीं किया गया।

उनकी मृत्यु के बाद उनके कार्य को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया उनकी शिष्या रजनी वेंकटेश ने। रजनी अपने कार्य मे काफी आगे बढ़ चुकी थी। बर्लिन में आयोजित एक सम्मेलन में रजनी ने घोषणा की वो विश्व को जल्द ही नैनो तकनीक युक्त पहली सौगात देंगी। ये रजनी की बहुत बड़ी नादानी साबित हुई। डेनमार्क टूर में वो अपने होटल के कमरे में मृत पायी गयी। और इस तरह नैनो टेक्नालॉजी के जानकार दो महान वैज्ञानिक सरकार की लापरवाही से काल कलवित हुए। डॉ अय्यर को अमेरिका में जबरदस्त सुरक्षा मिली हुई थी पर भारत मे डॉ अय्यर और रजनी को एक डंडा धारी पुलिस तक सुरक्षा के लिए नहीं मिला था। ये कोई पहली घटना नहीं है भारत मे हज़ारों होनहार वैज्ञानिक असामान्य मौत का शिकार हुए हैं पर न तो उनका पोस्टमार्टम हुआ और न ही उनकी असामान्य मौत की गहन जांच हुई।

हमारे देश मे 9वी फेल लालू पुत्रों को और कबाड़ नेताओं को तो जेड प्लस सुरक्षा मिल सकती है पर महान वैज्ञानिकों को नहीं।

Rajesh Kumar Srivastava

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

.. कहानी
लेकिन सच ..और दिलचस्प

एक दिन धोती और शॉल पहने एक सज्जन चेन्नई के समुद्र तट पर बैठकर अपने मन में भगवत गीता का पाठ कर रहे थे।

उसी समय एक लड़का वहाँ आया और उससे कहा: “क्या आप आज भी विज्ञान के इस युग में ऐसी किताब पढ़ते हैं? देखो, इस समय हम चाँद पर पहुँच गए हैं। और क्या आप इस गीता, रामायण में फंस गए हैं।”

सज्जन ने लड़के से पूछा: “गीता के बारे में आप क्या जानते हैं?”

लड़के ने सवाल का जवाब नहीं दिया और उत्साह से कहा: “यह सब पढ़कर क्या होगा। मैं विक्रम साराभाई अनुसंधान संस्थान का छात्र हूं, मैं एक वैज्ञानिक हूं … यह गीता पाठ बेकार है।”

लड़के की बातें सुनकर सज्जन हंस पड़े। तभी दो बड़ी गाड़ियाँ वहाँ आकर रुकीं। एक कार से कुछ ब्लैक कमांडो उतरे और दूसरी कार से एक सिपाही। सिपाही के वेश में उस आदमी ने कार का पिछला दरवाजा खोला, सलामी दी और कार के दरवाजे के पास खड़ा हो गया। वह सज्जन जो गीता का पाठ कर रहे थे, धीमी गति से कार में चढ़कर बैठ गए।

यह सब देख लड़का हैरान रह गया। मैंने सोचा कि आदमी को प्रसिद्ध व्यक्ति होना चाहिए। किसी को न पाकर लड़का दौड़कर उसके पास गया और पूछा, ”सर…सर…आप कौन हैं?”

सज्जन ने बहुत शांत स्वर में कहा: “मैं विक्रम साराभाई हूं।”

ऐसा लग रहा था कि लड़का 440 वोल्ट का झटका खेल रहा था।
क्या आप जानते हैं यह लड़का कौन था?
डॉ अब्दुल कलाम।
उसके बाद डॉ. कलाम ने भागवत गीता का पाठ किया। रामायण, महाभारत और अन्य पुस्तकें पढ़ें। और इस गीता को पढ़ने के परिणामस्वरूप, डॉ कलाम ने जीवन भर मांस नहीं खाने का वादा किया। उन्होंने अपनी आत्मकथा गीता में लिखा है
विज्ञान। गीता, रामायण, महाभारत भारतीयों की अपनी सांस्कृतिक विरासत का एक बड़ा गर्व का विषय है।
(जुटाया हुआ)

मुझे यह पसंद आया, इसलिए आप सभी के साथ साझा करने का विचार किया।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक्बार जरुर पढे….👍👍

चौबे जी का लड़का है अशोक, एमएससी पास।

नौकरी के लिए चौबे जी निश्चिन्त थे, कहीं न कहीं तो जुगाड़ लग ही जायेगी।

ब्याह कर देना चाहिए। मिश्रा जी की लड़की है ममता, वह भी एमए पहले दर्जे में पास है, मिश्रा जी भी उसकी शादी जल्दी कर देना चाहते हैं। सयानों से पोस्ट ग्रेजुएट लड़के का भाव पता किया गया।

पता चला वैसे तो रेट पांच से छः लाख का चल रहा है, पर बेकार बैठे पोस्ट ग्रेजुएटों का रेट तीन से चार लाख का है। सयानों ने सौदा साढ़े तीन में तय करा दिया।

बात तय हुए अभी एक माह भी नही हुआ था, कि पब्लिक सर्विस कमीशन से पत्र आया कि अशोक का डिप्टी कलक्टर के पद पर चयन हो गया है।

चौबे- साले, नीच, कमीने… हरामजादे हैं कमीशन वाले…!

पत्नि- लड़के की इतनी अच्छी नौकरी लगी है नाराज क्यों होते हैं?

चौबे- अरे सरकार निकम्मी है, मैं तो कहता हूँ इस देश में क्रांति होकर रहेगी… यही पत्र कुछ दिन पहले नहीं भेज सकते थे, डिप्टी कलेक्टर का 40-50 लाख यूँ ही मिल जाता।

पत्नि- तुम्हारी भी अक्ल मारी गई थी, मैं न कहती थी महीने भर रुक जाओ, लेकिन तुम न माने… हुल-हुला कर सम्बन्ध तय कर दिया… मैं तो कहती हूँ मिश्रा जी को पत्र लिखिये वो समझदार आदमी हैं।

प्रिय मिश्रा जी,
अत्रं कुशलं तत्रास्तु !
आपको प्रसन्नता होगी कि अशोक का चयन डिप्टी कलेक्टर के लिए हो गया है। विवाह के मंगल अवसर पर यह मंगल हुआ। इसमें आपकी सुयोग्य पुत्री के भाग्य का भी योगदान है।
आप स्वयं समझदार हैं, नीति व मर्यादा जानते हैं। धर्म पर ही यह पृथ्वी टिकी हुई है। मनुष्य का क्या है, जीता मरता रहता है। पैसा हाथ का मैल है, मनुष्य की प्रतिष्ठा बड़ी चीज है। मनुष्य को कर्तव्य निभाना चाहिए, धर्म नहीं छोड़ना चाहिए। और फिर हमें तो कुछ चाहिए नहीं, आप जितना भी देंगे अपनी लड़की को ही देंगे।वर्तमान ओहदे के हिसाब से देख लीजियेगा फिर वरना हमें कोई मैचिंग रिश्ता देखना होगा। मिश्रा परिवार ने पत्र पढ़ा, विचार किया और फिर लिखा-

Friends read once….

प्रिय चौबे जी,
आपका पत्र मिला, मैं स्वयं आपको लिखने वाला था। अशोक की सफलता पर हम सब बेहद खुश हैं। आयुष्मान अब डिप्टी कलेक्टर हो गया हैं। अशोक चरित्रवान, मेहनती और सुयोग्य लड़का है। वह अवश्य तरक्की करेगा।
आपको जानकर प्रसन्नता होगी कि ममता का चयन आईएएस के लिए हो गया है। कलेक्टर बन कर आयुष्मति की यह इच्छा है कि अपने अधीनस्थ कर्मचारी से वह विवाह नहीं करेगी।
मुझे यह सम्बन्ध तोड़कर अपार हर्ष हो रहा है।

“बेटी पढाओ, 🙏🙏

राम चन्द्र आर्य

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

Ram Ram ji,#कर्मचक्र

🔶 एक कारोबारी सेठ सुबह सुबह जल्दबाजी में घर से बाहर निकल कर ऑफिस जाने के लिए कार का दरवाजा खोल कर जैसे ही बैठने जाता है, उसका पाँव गाड़ी के नीचे बैठे कुत्ते की पूँछ पर पड़ जाता है। दर्द से बिलबिलाकर अचानक हुए इस वार को घात समझ वह कुत्ता उसे जोर से काट खाता है। गुस्से में आकर सेठ आसपास पड़े 10-12 पत्थर कुत्ते की ओर फेंक मारता है पर भाग्य से एक भी पत्थर उसे नहीं लगता है और वह कुत्ता भाग जाता है।

🔷 सेठजी अपना इलाज करवाकर ऑफिस पहुँचते हैं जहां उन्होंने अपने मातहत मैनेजर्स की बैठक बुलाई होती है। यहाँ अनचाहे ही कुत्ते पर आया उनका सारा गुस्सा उन बिचारे प्रबन्धकों पर उतर जाता है। वे प्रबन्धक भी मीटिंग से बाहर आते ही एक दूसरे पर भड़क जाते हैं – बॉस ने बगैर किसी वाजिब कारण के डांट जो दिया था। अब दिन भर वे लोग ऑफिस में अपने नीचे काम करने वालों पर अपनी खीज निकलते हैं – ऐसे करते करते आखिरकार सभी का गुस्सा अंत में ऑफिस के चपरासी पर निकलता है जो मन ही मन बड़बड़ाते हुए भुनभुनाते हुए घर चला जाता है।

🔶 घंटी की आवाज़ सुन कर उसकी पत्नी दरवाजा खोलती है और हमेशा की तरह पूछती है “आज फिर देर हो गई आने में…. वो लगभग चीखते हुए कहता है “मै क्या ऑफिस कंचे खेलने जाता हूँ? काम करता हूँ, दिमाग मत खराब करो मेरा, पहले से ही पका हुआ हूँ, चलो खाना परोसो” अब गुस्सा होने की बारी पत्नी की थी, रसोई मे काम करते वक़्त बीच बीच में आने पर वह पति का गुस्सा अपने बच्चे पर उतारते हुए उसे जमा के तीन चार थप्पड़ रसीद कर देती है। अब बिचारा बच्चा जाए तो जाये कहाँ, घर का ऐसा बिगड़ा माहौल देख, बिना कारण अपनी माँ की मार खाकर वह रोते रोते बाहर का रुख करता है, एक पत्थर उठाता है और सामने जा रहे कुत्ते को पूरी ताकत से दे मारता है। कुत्ता फिर बिलबिलाता है।

👉 सन्तमत विचार-दोस्तों ये वही सुबह वाला कुत्ता था!! अरे भई उसको उसके काटे के बदले ये पत्थर तो पड़ना ही था केवल समय का फेर था और सेठ जी की जगह इस बच्चे से पड़ना था!! उसका कार्मिक चक्र तो पूरा होना ही था ना!! इसलिए मित्र यदि कोई आपको काट खाये, चोट पहुंचाए और आप उसका कुछ ना कर पाएँ, तो निश्चिंत रहें, उसे चोट तो लग के ही रहेगी, बिलकुल लगेगी, जो आपको चोट पहुंचाएगा, उस का तो चोटिल होना निश्चित ही है, कब होगा किसके हाथों होगा ये केवल ऊपरवाला जानता है पर होगा ज़रूर, अरे भई ये तो सृष्टी का नियम है !!!

🙏 🙏

गौरव गुप्ता