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પ્રેરક પ્રસંગ

તુંબડી – રમણલાલ સોની

કેટલાક ભક્તો તીર્થયાત્રાએ જતા હતા. સંત તુકારામે તેમને કહ્યું, ‘મારાથી તો અવાય એમ નથી. પણ મારી આ તુંબડીને લઈ જાઓ, એને દરેક તીર્થમાં સ્નાન કરાવજો !’ ભક્તો અનેક તીર્થોની યાત્રા કરીને પાછા આવ્યા. તેમણે તુંબડી પાછી આપી કહ્યું : ‘અમે એને એકેએક તીર્થમાં સ્નાન કરાવ્યું છે.’

તુકારામે એ જ તુંબડીનું શાક કરી ભક્તોને પીરસ્યું. તો ભક્તોએ એ થૂંકી નાખ્યું. કહે : ‘આ તો કડવી છે.’
તુકારામે કહ્યું : ‘આટાઅટલા તીર્થમાં સ્થાન કર્યું તોયે એ કેમ કડવી રહી ?’
ભક્તો કહે : ‘એનો સ્વભાવ જ એવો છે. પછી તીર્થ શું કરે ?’

તુકારામે કહ્યું : ‘ખરી વાત, ગમે તેટલી જાત્રા કરીએ, પણ આપણો સ્વભાવ ન બદલીએ તો આપણે પણ આ કડવી તુંબડી જેવા જ છીએ.’

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हाँ भगवान है..

एक मेजर के नेतृत्व में 15 जवानों की एक टुकड़ी हिमालय के अपने रास्ते पर थी
बेतहाशा ठण्ड में मेजर ने सोचा की अगर उन्हें यहाँ एक कप चाय मिल जाती तो आगे बढ़ने की ताकत आ जाती

लेकिन रात का समय था आपस कोई बस्ती भी नहीं थी
लगभग एक घंटे की चढ़ाई के पश्चात् उन्हें एक जर्जर चाय की दुकान दिखाई दी

*लेकिन अफ़सोस उस पर *ताला लगा था*
भूख और थकान की तीव्रता के चलते जवानों के आग्रह पर मेजर साहब दुकान का ताला तुड़वाने को राज़ी हो गया खैर ताला तोडा गया, तो अंदर उन्हें चाय बनाने का सभी सामान मिल गया
जवानों ने चाय बनाई साथ वहां रखे बिस्किट आदि खाकर खुद को राहत दी थकान से उबरने के पश्चात् सभी आगे बढ़ने की तैयारी करने लगे लेकिन मेजर साहब को यूँ चोरो की तरह दुकान का ताला तोड़ने के कारण आत्मग्लानि हो रही थी

उन्होंने अपने पर्स में से एक हज़ार का नोट निकाला और चीनी के डब्बे के नीचे दबाकर रख दिया तथा दुकान का शटर ठीक से बंद करवाकर आगे बढ़ गए

तीन महीने की समाप्ति पर इस टुकड़ी के सभी 15 जवान सकुशल अपने मेजर के नेतृत्व में उसी रास्ते से वापिस आ रहे थे

रास्ते में उसी चाय की दुकान को खुला देखकर वहां विश्राम करने के लिए रुक गए

*उस दुकान का *मालिक एक बूढ़ा चाय वाला था जो एक साथ इतने ग्राहक देखकर खुश हो गया और उनके लिए चाय बनाने लगा*

चाय की चुस्कियों और बिस्कुटों के बीच वो बूढ़े चाय वाले से उसके जीवन के अनुभव पूछने लगे खास्तौर पर
इतने बीहड़ में दूकान चलाने के बारे में
बूढ़ा उन्हें कईं कहानियां सुनाता रहा और साथ ही भगवान का शुक्र अदा करता रहा

*तभी एक जवान बोला ” *बाबा आप भगवान को इतना मानते हो अगर भगवान सच में होता तो फिर उसने तुम्हे इतने बुरे हाल में क्यों रखा हुआ है”*

*बाबा बोला *”नहीं साहब ऐसा नहीं कहते भगवान के बारे में,भगवान् तो है और सच में है …. मैंने देखा है”*

आखरी वाक्य सुनकर सभी जवान कोतुहल से बूढ़े की ओर देखने लगे

बूढ़ा बोला “साहब मै बहुत मुसीबत में था एक दिन मेरे इकलौते बेटे को आतंकवादीयों ने पकड़ लिया उन्होंने उसे बहुत मारा पिटा लेकिन उसके पास कोई जानकारी नहीं थी इसलिए उन्होंने उसे मार पीट कर छोड़ दिया”

“मैं दुकान बंद करके उसे हॉस्पिटल ले गया मै बहुत तंगी में था साहब और आतंकवादियों के डर से किसी ने उधार भी नहीं दिया”

“मेरे पास दवाइयों के पैसे भी नहीं थे और मुझे कोई उम्मीद नज़र नहीं आती थी उस रात साहब मै बहुत रोया और मैंने भगवान से प्रार्थना की और मदद मांगी “और साहब … उस रात भगवान मेरी दुकान में खुद आए”

“मै सुबह अपनी दुकान पर पहुंचा ताला टूटा देखकर मुझे लगा की मेरे पास जो कुछ भी थोड़ा बहुत था वो भी सब लुट गया”

मै दुकान में घुसा तो देखा 1000 रूपए का एक नोट, चीनी के डब्बे के नीचे भगवान ने मेरे लिए रखा हुआ है”

“साहब ….. उस दिन एक हज़ार के नोट की कीमत मेरे लिए क्या थी शायद मै बयान न कर पाऊं … लेकिन भगवान् है साहब … भगवान् तो है”
बूढ़ा फिर अपने आप में बड़बड़ाया

भगवान् के होने का आत्मविश्वास उसकी आँखों में साफ़ चमक रहा था

यह सुनकर वहां सन्नाटा छा गया

*पंद्रह जोड़ी आंखे मेजर की तरफ देख रही थी जिसकी आंख में उन्हें अपने लिए स्पष्ट आदेश था *”चुप रहो “*

मेजर साहब उठे, चाय का बिल अदा किया और बूढ़े चाय वाले को गले लगाते हुए बोले “हाँ बाबा मै जनता हूँ भगवान् है…. और तुम्हारी चाय भी शानदार थी”

और उस दिन उन पंद्रह जोड़ी आँखों ने पहली बार मेजर की आँखों में चमकते पानी के दुर्लभ दृश्य का साक्ष्य किया

और

सच्चाई यही है की भगवान तुम्हे कब किसी का भगवान बनाकर कहीं भेज दे ये खुद तुम भी नहीं जानते………..

कूपवाड़ा सेक्टर में घटित एक जवान द्वारा शेयर की गई सच्ची घटना (जम्मू एवं कश्मीर-भारत) ।
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सौ. सीमा आलोक घाटे🚩

सिमा घाटे

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शीर्षक__
“रेलवे प्लेटफार्म “

बूढ़ी सी जर्जर काया उनकी देह है रोगी जैसी लगभग पैंसठ साल की होगी वह महिला , जिसे रोज ऑफिस से बाहर बैठते देखता रहता । ठीक सामने एक बेंच पर बैठी रहती आते जाते यात्री लोग कुछ पैसे व खाने पीने की चीजें दे जाते। वहीं पर खा लेती और बेंच पर सिकुड़ कर सो जाती।

सर यह औरत चार दिन से यहीं पर बैठी रहती है रात में भी नहीं जाती कहीं? मेरा चपरासी बोल रहा …… जाकर पता करो कौन है कहाँ से आई है या ट्रेन छूट गई या कहीं जाना है पर संयोग से खो गई है यहाँ ?

माताजी आप कहाँ रहती हैं क्या आपकी ट्रेन छूट गई है ,पीयून की बात सुन बुजुर्ग महिला के सपाट चेहरे पर कोई भाव नहीं , चुपचाप ब्रेड खाती रही । पूछता रहा पर कुछ नहीं बोली है पीयून चला आया ना में सर हिलाकर बोला कि लगता है अर्द्धविक्षित है ये।

ठीक है गुप्ता इनका ख्याल रखना और कुछ कपड़े की व्यवस्था कर दो ताकि साफ सुथरी हो जाए व एक रिटायरिंग रूम में रात में सोने का प्रबंध भी।

जब उन पर नजर जाती है ऐसा आभास होता कि यह संभ्रांत परिवार की हैं कुछ न कुछ है जो अनसुलझा है ? हाव भाव से सभ्य शिक्षित दिखती है यह।

रेल अधिकारी होने के कारण मुझसे जो बन पड़ा है उनके हित के लिए करता रहा । धीरे धीरे खुलती जा रहीं हैं ऑफिस में भी आकर बैठती हैं पर खामोश ही रहती हैं।

एक दिन टी वी पर एक प्रशासनिक अधिकारी गुहार लगा रहा है कि मेरी पत्नी वैभवलक्ष्मी गुम हो गई है पता नहीं कहाँ चली गई? चेन्नई से मुंबई जाने के रास्ते में किसी रेलवे स्टेशन में उतर गई है बहुत बीमार है । किसी भी सज्जन को मिले तो कृपया इस पता पर सुचित करें। फोटो देख उछल पड़ा एकदम इनकी ही तस्वीर ऑनस्क्रीन प्रसारित हो रही है ।

ओ माइ गाॅड यह भले घर की हैं। पढ़ी लिखी भी है कभी कभी अंग्रेजी में बुदबुदाती रहती पर सुनाई नहीं दिया मुझे। साऊथ इंडियन हैं इसलिए हिंदी समझ नहीं पाती बिचारी ।

मैम where are you from ? चेन्नई …
.
फिर आप यहाँ कैसे ? (इंग्लिश में) वो शिरडी साईं बाबा के दर्शन को हम पति पत्नी जा रहे थे मुझे ब्लड कैंसर है और पति लाखों लाख पैसे खर्च करते जा रहे मना करती रही नहीं सुने वो ? मेरे ही इलाज में सेविंग का पैसा खत्म हो जाता तो इनके पास और बच्चों के पास कुछ शेष नहीं बचता ? ऐसे भी मरना ही है मुझे कैंसर से , इसलिए नासिक रेलवे स्टेशन रात एक बजे ट्रेन रूकी तो सोए हसबैंड को छोड़ उतर गई। इतना पैसा खर्च हो चुका था कि कर्ज मांगने की नौबत थी?

Ohh ho…..Mam..What does your husband do?
My husband is an administrative officer……. उनकी इतनी अच्छी अंग्रेजी और यहाँ अपने पति को तकलीफ न देने की जिद ने मुझे झकझोर दिया हतप्रभ रह गया ।पीड़िता का सच सुनकर

करुणामयी स्त्री के रूप में ऐसी पत्नी पहली बार देखा मैनें । जिसे अपने पति के भविष्य की फिक्र है और इस अनजान के लिए ईश्वर ने मुझमें उनके प्रति संवेदना भर कर भेजा है ।

हजारों लाखों करोड़ों जनसंख्या के यातायात का विस्तृत साधन रेल है अनगिनत लोगों को आते जाते देखता , कितनों का ट्रेन छूटता , कोई दुर्जन अपनी बूढ़ी माँ को स्टेशन उतार कर नौ दो ग्यारह।

यह अपवादस्वरूप यात्री मिलीं हैं। दो महीने के पश्चात मौत हो गई है रेलवे वेल्फेयर (कल्याण विभाग) से फंड लेकर दाह संस्कार किया गया है । उनको आग देकर पुत्र धर्म का पालन किया मैंने ।

ऑफिस के बाहर वह जगह देखकर बरबस याद आ जाता है ।
काश! उनके पति को बता पाता ? पर उन्होंने हाथ जोड़कर मुझे बांध दिया था अपनी सौगंध से। बेबसी का आलम ही रहा हमारा। भगवान जाने कौन सा नाता था उनसे !

अंजू ओझा, पटना।
मौलिक स्वरचित,
८•७•७१

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🌳🦚आज की कहानी🦚🌳

💐💐#निंदाकाफल💐💐

राजा पृथु एक दिन सुबह सुबह घोड़ों के तबेले में जा पहुंचे। तभी वहां एक साधु भिक्षा मांगने आ पहुंचा। सुबह सुबह साधु को भिक्षा मांगते देख पृथु क्रोध से भर उठे। उन्होंने साधु की निंदा करते हुए बिना विचार किये ही तबेले से घोडे की लीद उठाई और उस के पात्र में डाल दी, साधु भी शांत स्वभाव का था।

साधु भिक्षा ले कर वहाँ से चला गया और वह लीद कुटिया के बाहर एक कोने में डाल दी। कुछ समय उपरान्त राजा पृथु शिकार के लिए जंगल में गए। राजा पृथु ने जब जंगल में देखा कि एक कुटिया के बाहर घोड़े की लीद का बड़ा सा ढेर लगा हुआ है। उन्होंने देखा कि यहाँ तो न कोई तबेला है, और न ही दूर-दूर तक कोई घोड़ेदिखाई दे रहे हैं। वह आश्चर्य चकित हो कुटिया में गए और साधु से बोले…”महाराज! आप हमें एक बात बताइए, यहाँ कोई घोड़ा भी नहीं है, ना ही यहां कोई तबेला है। तो यह इतनी सारी घोड़े की लीद कहां से आई! “साधु ने कहा…
“राजन्! यह लीद मुझे एक राजा ने भिक्षा में दी है, अब समय आने पर यह लीद उसी को खानी पड़ेगी। यह सुन राजा पृथु को पूरी घटना याद आ गई, वह साधु के पैरों में गिर कर क्षमा मांगने लगा। उन्होंने साधु से प्रश्न किया हम ने तो थोड़ी-सी लीद दी थी, पर यह तो बहुत अधिक हो गई है? साधु ने कहा… “हम किसी को जो भी देते है, वह दिन-प्रतिदिन प्रफुल्लित होता जाता है और समय आने पर हमारे पास लौट कर आ जाता है, राजन! यह उसी का परिणाम है।” यह सुन कर पृथु की आँखों में अश्रु भर आये। वह साधु से विनती कर बोला “महाराज! मुझे क्षमा कर दीजिए। आइन्दा मैं ऐसी गलती कभी नहीं करूँगा।” मुझे कृपया कोई ऐसा उपाय बताए जिस से मैं अपने दुष्ट कर्मों का प्रायश्चित कर सकूँ!” राजा की ऐसी दुखमयी हालात देख कर साधु बोला… “राजन्! एक उपाय है, आप को कोई ऐसा कार्य करना है, जो देखने में तो गलत हो पर वास्तव में गलत न हो। जब लोग आप को गलत देखेंगे, तो आप की निंदा करेंगे। जितने ज्यादा लोग आप की निंदा करेंगे, आप का पाप उतना ही हल्का होता जाएगा। आप का अपराध निंदा करने वालों के हिस्से में आ जायेगा। यह सुन राजा पृथु ने महल में आ कर काफी सोच विचार किया और अगले दिन सुबह ही उस ने शराब की बोतल ली और चौराहे पर बैठ गया। सुबह सुबह राजा को इस हाल में देख कर सब लोग आपस में राजा की निंदा करने लगे कि कैसा राजा है, कितना निंदनीय कृत्य कर रहा है। क्या यह शोभनीय है आदि! पर निंदा की परवाह किये बिना राजा पूरे दिन शराबियों की तरह अभिनय करता रहा। इस पूरे कृत्य के पश्चात जब राजा पृथु पुनः साधु के पास पहुंचे तो लीद का ढेर के स्थान पर एक मुट्ठी लीद देख कर आश्चर्य से बोला “महाराज! यह कैसे हुआ? इतना बड़ा ढेर कहाँ गायब हो गया!”
साधू ने कहा “राजन! यह आप की अनुचित निंदा के कारण ही हुआ है। जिन जिन लोगों ने आप की अनुचित निंदा की है, आप का पाप उन सब मे बराबर बराबर बट गया है। गुरु जी कहते हैं, जब हम किसी की बेवजह निंदा करते है। तो हमें उस के पाप का बोझ भी उठाना पड़ता है तथा हमें अपने किये गए, कर्मो का फल तो भुगतना ही पड़ता है। अब चाहे हँस के भुगतें या रो कर, हम जैसा किसी को देंगें, वैसा ही लौट कर उस से वापिस भी आएगा! इस लिये सदेव अच्छे कर्म करें और किसी की निंदा से बचें। साध संगत की सेवा करें, सत्संग सुने और सत्संग में फरमाए गए वचनों को अपने हृदय में बिठाए। किसी की यूं ही निंदा कर के अपने कर्मों को मत बढ़ाइए। दुनिया में जो करता है, उसे उस का फल जरूर मिलता है। इस लिए हम अपने आप को देखे, अपने अंदर झांके ना कि दूसरों की निदा करें, चुगली करें। अगर हम किसी की निंदा चुगली करने से नहीं हटते है, तो हमारे कर्मों का ढेर भी उस लीद के ढेर की तरह बढ़ता जाएगा। इस लिए अच्छे कर्म करें, अच्छे कर्म करना ही जीव का कर्त्तव्य है और इसी से जीवन सफल हो सकता है।

सदैवप्रसन्नरहिये।

जोप्राप्तहै, #पर्याप्त_है।।

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દાદા…દાદા બચાવો..બચાવો કરતા..સોસાયટી ની એક બાળા દાદા ના પગ પકડી નીચે બેસી ગઈ…

દાદા હજુ કાંઈ સમજે.. એ પહેલાં…તો સોસાયટી માં રહેતા અમુક મવાલીઓ..તેના મિત્રો સાથે…આવી..
પહોંચ્યા..

છોકરી થર..થર ધ્રૂજતી.ઉભી થઈ…દાદા ને ભેટી પડી…દાદા એ કીધુ..બેટા. હું..ઉભો છુ.. ત્યાં સુધી..તારો.. વાળ પણ વાંકો કરવાની તાકાત ..કોઈ ની નથી..

લંપટ અને નાલાયક મવાલીઓ..બોલ્યા…અમારી વચ્ચે થી..ખસી જવામા તમારી ભલાઈ છે….

દાદા…ની ઉમ્મર 75 વર્ષ ની હતી પણ..ઘણા વખતે જવાની બતાવવાનો મોકો દાદા ને મળ્યો હોય..તેમ…ત્રાડ નાખી ને બોલ્યા…. આ મારી સોસાયટી ની દીકરી છે…અને તેનો બાપ આ દુનિયા માં નથી..સમજી લે ..તેનો બાપ જ તારી સામે ઊભો છે…..

લંપટ…લોકો આગળ વધ્યા…દાદા..એ બૂમ મારી…
ખબરદાર એક ડગલુ પણ આગળ વધ્યા છો…..

એક લંપટ બોલ્યો… તો શું કરી.લઈશ..

દાદા ની પાછળ ઉભેલી તેના દીકરા ની વહુ બોલી….તારા નસીબ સારા છે….હારામી મારો ધણી અત્યારે ઘરે નથી…
નહીંતર આટલા સવાલ કરતા પહેલા તારી જીભ જ કાપી નાખી હોત….

સાલા ગીધડાઓ..તમે ભૂલથી આજે સિંહ ની ગુફા પાસે આવી ગયા છો.. અત્યાર સુધી તમે ..ગધેડા ના ભુકણ જ સાંભળ્યા છે…આજે સિંહણ ની ગર્જના અને શિકાર પણ જોતા જાવ..કહી..ખુલ્લી તલવાર સાથે દાદા ના દીકરા ની
વહુ દોડી…

દાદા એ દીકરા ની વહુ ને રોકી… તેના હાથ માંથી તલવાર પોતાના હાથ મા લીધી…અને દાદા બોલ્યા…બેટા
સિંહ ઘરડો થયો તો શું થયું..હજુ શિકાર કરતા તો આવડે છે…..તું ફક્ત આ દીકરી ને સંભાળ…

લંપટ લોકો ની ગેગ માંથી એક વ્યક્તિ એ આગળ આવવાનો.પ્રયત્ન કરવા ગયો..અને દાદા…એ જય માઁ ભવાની ..બુમ સાથે ખુલ્લી તલવારે દોડ્યા..

આ દરમ્યાન સોસાયટી ના સભ્યો પણ ભેગા થઈ ગયા હતા. સોસાયટી ના રહીશો ને પણ દાદા નું આ સ્વરૂપ જોઈ… જોર ચઢ્યું….

બે…લંપટ ને દાદા એ તલવાર થી ઢાળી દીધા..બાકી ના બે ને સોસાયટી ના રહીશો એ પુરા કર્યા….

દાદા ઉપર કોર્ટ માં કેસ ચાલ્યો..
જજ સાહેબ બોલ્યા
દાદા તમારે તમારા બચાવ માટે બે શબ્દો બોલવા હોય તો.

દાદા..બોલ્યાં..નામદાર સાહેબ..
બચાવ…કરવો હોત.. તો એ દિવેસ હું …આ સોસાયટી ની દીકરી ને એકલી મૂકી ઘર માં ઘુસી ગયો હોત….
મારે મારા બચાવ મા કાંઈ કહેવું નથી..મેં કરેલ કાર્ય માટે મને અફસોસ કે દુઃખ નથી…મને આનંદ સાથે ગર્વ છે..એક બાપ વગર ની દીકરી ની લાજ મેં બચાવી પુણ્ય નું કામ કરેલ છે….

આખી જીંદગી ઘર માં નતમસ્તક જીવી અપરાધી બનવા કરતા જેલ મા ઉંચા માથા સાથે ફરવાનો હું ગર્વ અનુભવીશ….આમે ય સાહેબ..હવે જીંદગી નો મોહ રહ્યો નહીં..કદાચ મને આપ છોડી મુકશો તો પણ મેં સમાજ માંથી આવા લંપટો ને દૂર કરવા નો નિર્ણય મે લઈ લીધો છે..માટે આપ સાહેબ ..જે સજા ફરમાવશો.. એ મને માન્ય છે…

પણ તમે આવી રીતે કાયદો હાથમાં કેવી રીતે લઈ શકો ?… જજ સાહેબ બોલ્યા..

નામદાર સાહેબ..તમારો કહેવા નો મતલબ..એવો છે..કોઈ ની માઁ બેન ,દીકરી,કે વહુ..ની ઈજ્જત લૂંટાતી હોય..ત્યારે..અમે પોલીસ ની આવવા ની રાહ જોઈયે…?

જો અમે કાયદો હાથ માં ન લઈએ તો એ લંપટ લોકો તેના હાથે અમારી પારેવડી જેવી દીકરીઓ કે બહેનને પીંખી નાખે…સાહેબ.

અમને દુઃખ એ વાત નું છે આવા લંપટ અને હરામી લોકો ને આટલી હિંમત આપનાર કોણ છે ?…

અમને કોઈ શોખ નથી કે કાયદો કાનૂન અમે હાથ મા લઈએ..અમને મજબુર કોણ કરે છે ? તમારી વ્યવસ્થા..જો કાયદો કાયદા નું કામ યોગ્ય રીતે કરતું હોય તો..આ લંપટ લોકો ની હિંમત આટલી વધી કેમ રહી છે ?

રાજકરણ માં ચૂંટણી જીતવા માટે ભલે મવાલી અને લંપટ લોકો ની મદદ લેવાતી હોય. સાહેબ…પણ તેનો મતલબ એવો તો નથી કે આ મવાલી અને લંપટ વ્યક્તિ ના પગ આપણા ઘર ના બારણાં સુધી આવી જાય..

સાહેબ..આવા દરેક આગળ વધતા..પગ ને સમયસર તોડી નાખવાં માં નહીં આવે તો.સમાજે તેના ગંભીર પરિણામો ભોગવવા માટે તૈયાર રહેવું પડશે…

મારે …અહીં ઉભેલ દરેક વ્યક્તિ ને કહેવું છે…તમારી દીકરીઓ ને ચંડીકા નું રૂપ ધારણ કરતા શીખવાડો….કદાચ હું એ વખતે હાજર ન હોત..તો મારા દીકરા ની વહુ પણ આ લંપટો ને એકલા હાથે.. વધેરી નાખત….

કોર્ટ માં ઉભેલા સોસાયટી ના સદસ્યો હાથ જોડી બોલ્યા..સાહેબ પાણી નાક સુધી આવી ગયું છે…દાદા ને જેલ માં નાખો..તો અમે બધા તેની સાથે જેલ માં જવા તૈયાર છીયે…તેમણે ક્રાંતિ નું બીજ વાવ્યું છે..સમાજ કે સોસાયટી ની કોઈ પણ સ્ત્રી ઉપર કોઈ પણ લંપટ વ્યક્તિ નજર બગાડે તો…જવાબ આવો જ મળશે….

જજ સાહેબ…બે મિનિટ મૌન રહ્યા..પછી..કીધુ…
જીંદગી માં પહેલી વખત એવા સંજોગો ઉભા થયા છે..કે હું મારી જાત ને નિર્ણય લેવા માટે અસમર્થ જાહેર કરી રહયો છું…
કારણ કે હું પણ આ યાતના માંથી પસાર થઈ ચૂક્યો છું….

સમાજ માંથી..જનતા ને..કાયદા કાનૂન ઉપર થી વિશ્વાસ ઉઠી જાય તે પહેલાં..આ સામાજિક દુષણ ને કોઈ પણ સંજોગ મા કડક કાયદા થી અટકાવવું જ.પડશે…નહીંતર લોકો નો કાયદા કાનૂન મા થી વિશ્વાસ ઉઠી જશે..
કહી..તેઓ ઉભા થઇ જતા રહ્યા…

મિત્રો…
વર્તમાન સ્થિતિ ને જોતા…ઘરે..ઘરે માઁ જગદંબા નું સ્વરૂપ ઉભુ કરવું જ પડશે તોજ આ આ લંપટો નો નાશ થશે થશે..

વિજય મંજુબેન મુનગરા