Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

“#ग़जबकारिश्ता”
मैं बिस्तर पर से उठा, अचानक छाती में दर्द होने लगा। मुझे हार्ट की तकलीफ तो नहीं है? ऐसे विचारों के साथ मैं आगे वाली बैठक के कमरे में गया। मैंने देखा कि मेरा पूरा परिवार मोबाइल में व्यस्त था।
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मैंने पत्नी को देखकर कहा- “मेरी छाती में आज रोज से कुछ ज़्यादा दर्द हो रहा है, डाॅक्टर को दिखा कर आता हूँ।”
“हाँ मगर सँभलकर जाना, काम हो तो फोन करना” मोबाइल में देखते-देखते ही पत्नी बोलीं।
मैं एक्टिवा की चाबी लेकर पार्किंग में पहुँचा, पसीना मुझे बहुत आ रहा था, ऐक्टिवा स्टार्ट नहीं हो रही थी।
ऐसे वक्त्त हमारे घर का काम करने वाला ध्रुव साईकिल लेकर आया, साईकिल को ताला लगाते ही, उसने मुझे सामने खड़ा देखा।
“क्यों सा’ब ऐक्टिवा चालू नहीं हो रही है?
मैंने कहा- “नहीं..!!”
आपकी तबीयत ठीक नहीं लगती सा’ब,
इतना पसीना क्यों आ रहा है?
सा’ब इस हालत में स्कूटी को किक नहीं मारते, मैं किक मार कर चालू कर देता हूँ। ध्रुव ने एक ही किक मारकर ऐक्टिवा चालू कर दिया, साथ ही पूछा-
“साब अकेले जा रहे हो?”
मैंने कहा- “हाँ”
उसने कहा- ऐसी हालत में अकेले नहीं जाते,
चलिए मेरे पीछे बैठ जाइये।
मैंने कहा- तुम्हें एक्टिवा चलानी आती है?
“सा’ब गाड़ी का भी लाइसेंस है, चिंता छोड़कर बैठ जाओ”
पास ही एक अस्पताल में हम पहुँचे। ध्रुव दौड़कर अंदर गया और व्हील चेयर लेकर बाहर आया।
“सा’ब अब चलना नहीं, इस कुर्सी पर बैठ जाओ”।
ध्रुव के मोबाइल पर लगातार घंटियां बजती रहीं, मैं समझ गया था। फ्लैट में से सबके फोन आते होंगे कि अब तक क्यों नहीं आया? ध्रुव ने आखिर थक कर किसी को कह दिया कि #आजनहींसकता। ध्रुव डाॅक्टर के जैसे ही व्यवहार कर रहा था, उसे बगैर बताये ही मालूम हो गया था कि सा’ब को हार्ट की तकलीफ है। लिफ्ट में से व्हील चेयर ICU की तरफ लेकर गया। डाॅक्टरों की टीम तो तैयार ही थी, मेरी तकलीफ सुनकर। सब टेस्ट शीघ्र ही किये। डाॅक्टर ने कहा- “आप समय पर पहुँच गये हो, इसमें भी आपने व्हील चेयर का उपयोग किया, वह आपके लिए बहुत फायदेमन्द रहा।” अब किसी की राह देखना आपके लिए बहुत ही हानिकारक है। इसलिए बिना देर किए हमें हार्ट का ऑपरेशन करके आपके ब्लोकेज जल्द ही दूर करने होंगे। इस फार्म पर आप के स्वजन के हस्ताक्षर की ज़रूरत है। डाॅक्टर ने ध्रुव की ओर देखा। मैंने कहा- “बेटे, दस्तखत करने आते हैं?” उसने कहा- “सा’ब इतनी बड़ी जिम्मेदारी मुझ पर न डालो।” “बेटे तुम्हारी कोई जिम्मेदारी नहीं है। तुम्हारे साथ भले ही लहू का सम्बन्ध नहीं है, फिर भी बगैर कहे तुमने अपनी जिम्मेदारी पूरी की। वह जिम्मेदारी हकीकत में मेरे परिवार की थी। एक और जिम्मेदारी पूरी कर दो बेटा। मैं नीचे सही करके लिख दूँगा कि मुझे कुछ भी होगा तो जिम्मेदारी मेरी है। ध्रुव ने सिर्फ मेरे कहने पर ही हस्ताक्षर किये हैं”, बस अब… .. “#औरहाँघरफोनलगाकरखबरकर_दो”।
बस, उसी समय मेरे सामने मेरी पत्नी का फोन ध्रुव के मोबाइल पर आया। वह शांति से फोन सुनने लगा।
थोड़ी देर के बाद ध्रुव बोला- “मैडम, आपको पगार काटने का हो तो काटना, निकालने का हो तो निकाल देना मगर अभी अस्पताल में ऑपरेशन शुरु होने के पहले पहुँच जाओ। हाँ मैडम, मैं सा’ब को अस्पताल लेकर आया हूँ, डाक्टर ने ऑपरेशन की तैयारी कर ली है और राह देखने की कोई जरूरत नहीं है”।
मैंने कहा- “बेटा घर से फोन था?”
“हाँ सा’ब।”
मैंने मन में पत्नी के बारे में सोचा, तुम किसकी पगार काटने की बात कर रही हो और किसको निकालने की बात कर रही हो? आँखों में आँसू के साथ ध्रुव के कन्धे पर हाथ रखकर मैं बोला- “बेटा चिंता नहीं करते।”
“मैं एक संस्था में सेवायें देता हूँ, वे बुज़ुर्ग लोगों को सहारा देते हैं, वहां तुम जैसे ही व्यक्तियों की ज़रूरत है।”
“तुम्हारा काम बरतन कपड़े धोने का नहीं है, तुम्हारा काम तो समाज सेवा का है, बेटा पगार मिलेगा।

इसलिएचिंताबिल्कुलभीमत_करना।”

ऑपरेशन के बाद मैं होश में आया, मेरे सामने मेरा पूरा परिवार नतमस्तक खड़ा था। मैं आँखों में आँसू लिये बोला- “ध्रुव कहाँ है?”
पत्नी बोली- “वो अभी ही छुट्टी लेकर गाँव चला गया। कह रहा था कि उसके पिताजी हार्ट अटैक से गुज़र गये है,
15 दिन के बाद फिर आयेगा।”
अब मुझे समझ में आया कि उसको मेरे अन्दर उसका बाप दिख रहा होगा।
हे प्रभु, मुझे बचाकर आपने उसके बाप को उठा लिया?
पूरा परिवार हाथ जोड़कर, मूक, नतमस्तक माफी माँग रहा था।
एक मोबाइल की लत (व्यसन) एक व्यक्ति को अपने दिल से कितना दूर लेकर जाती है, वह परिवार देख रहा था। यही नहीं मोबाइल आज घर-घर कलह का कारण भी बन गया है। बहू छोटी-छोटी बातें तत्काल अपने माँ-बाप को बताती है और माँ की सलाह पर ससुराल पक्ष के लोगों से व्यवहार करती है, जिसके परिणाम स्वरूप वह बीस-बीस साल में भी ससुराल पक्ष के लोगों से अपनत्व नहीं जोड़ पाती।
डाॅक्टर ने आकर कहा- “सबसे पहले यह बताइये ध्रुव भाई आप के क्या लगते हैं?”
मैंने कहा- “डाॅक्टर साहब, कुछ सम्बन्धों के नाम या गहराई तक न जायें तो ही बेहतर होगा, उससे सम्बन्ध की गरिमा बनी रहेगी, बस मैं इतना ही कहूँगा कि वो आपात स्थिति में मेरे लिए फरिश्ता बन कर आया था।”
पिन्टू बोला- “हमको माफ़ कर दो पापा, जो फर्ज़ हमारा था, वह ध्रुव ने पूरा किया, यह हमारे लिए शर्मनाक है। अब से ऐसी भूल भविष्य में कभी भी नहीं होगी पापा।”
“बेटा, #जवाबदारीऔरनसीहत (सलाह) लोगों को देने के लिये ही होती है।
जब लेने की घड़ी आये, तब लोग बग़लें झाँकते हैं या ऊपर नीचे हो जाते हैं।
अब रही मोबाइल की बात…
बेटे, एक निर्जीव खिलौने ने जीवित खिलौने को गुलाम बनाकर रख दिया है। अब समय आ गया है कि उसका मर्यादित उपयोग करना है।
नहीं तो….

परिवारसमाजऔर_राष्ट्र को उसके गम्भीर परिणाम भुगतने पडेंगे और उसकी कीमत चुकाने के लिये तैयार रहना पड़ेगा।”

अतः बेटे और बेटियों को बड़ा #अधिकारी या #व्यापारी बनाने की जगह एक #अच्छा_इन्सान बनायें।
🙏🙏🙏🙏
पता नहीं, किन महानुभाव ने लिखी है, लेकिन मेरे दिल को इतना छू गयी कि शेयर करने से मैं अपने आप को रोक नहीं पाया।🙏
🙏🙏🙏

Posted in रामायण - Ramayan

हनुमान की गति


हनुमान जी किस गति से उड़ते थे!
बचपन में हनुमान जी ने छलांग लगाई और सूर्य को निगलने पहुँच गए। जटायु के भाई सम्पाती द्वारा सिंधु पार लंकापुरी में सीताजी को रखने की सूचना के बाद जामवन्तजी के प्रोत्साहन पर सागर को उड़कर पार करना, लक्ष्मण जी को शक्तिबाण लगा तो हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने गए और संजीवनी को न पहचान पाने पर पूरा पर्वत उठाकर लाए। ये सब प्रसंग बताते हैं कि हनुमानजी सम्भवतः अपने काल के सबसे बड़े अकाशमार्गी थे। उनके उड़ने की गति क्या होगी? उपरोक्त प्रसंगों से तो यही संकेत मिलते हैं कि उनकी गति आज के युग के सबसे तेज उड़ने वाले जेट से बहुत अधिक रही होगी। परन्तु कितनी अधिक? इसका सही सही थाह तो नहीं लगाया जा सकता लेकिन ग्रन्थों में आये कुछ तथ्यों के सहारे उनकी उड़ने की गति का अनुमान लगाने का प्रयत्न किया जा सकता है।

जब लक्ष्मण और मेघनाथ का युद्ध होने वाला था उससे पहले मेघनाथ ने अपनी कुलदेवी की तपस्या शुरू की थी। मेघनाथ ने पूरे दिन साधना की थी। विभीषण ने बताया कि अगर मेघनाथ की साधना पूर्ण हो गई तो फिर तीनों लोकों में मेघनाथ को कोई नहीं मार सकेगा। इसीलिए मेघनाथ की साधना भंग करके उसे अभी युद्ध के लिए ललकारना होगा। इसके बाद हनुमान जी सहित कई वानर मेघनाथ की तपस्या भंग करने गए। उन्होंने अपनी गदा के प्रहार से मेघनाथ की तपस्या भंग करने में सफलता प्राप्त की लेकिन तब तक रात हो चुकी थी।

लक्ष्मण जी ने रात को ही मेघनाथ को युद्ध के लिए ललकारा, रामायण के अनुसार उस समय रात्रि का दूसरा पहर शुरु हो चुका था। रात्रि का चार प्रहर होते हैं। प्रत्येक पहर 3 घंटे का। अब अगर आधुनिक काल की घड़ी के हिसाब से देखें तो लक्ष्मण और मेघनाथ का युद्ध रात के करीब 9:00 बजे शुरू हुआ होगा। यह भी कहा जाता है कि लक्ष्मण जी और मेघनाथ के बीच बेहद घनघोर युद्ध हुआ था जो लगभग 1 पहर यानी 3 घंटे तक चला था उसके बाद मेघनाथ ने अपने शक्तिशाली अस्त्र का प्रयोग किया जिससे लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए। लक्ष्मण जी के मूर्छित होने का समय लगभग 12:00 बजे के आसपास का रहा होगा।

लक्ष्मण जी के मूर्छित होने से समस्त वानर सेना में हड़कंप मच गया और मेघनाथ ने मूर्छित लक्ष्मण को उठाकर ले जाने की जी तोड़ कोशिश की पर सफल न पाने पर मेघनाथ वापस चला गया। श्री राम अपने प्राणप्रिय भाई को मूर्छित देखकर शोक में डूब गए, उसके बाद विभीषण के कहने पर हनुमान जी लंका से सुषेण वैद्य को उठा लाए। लक्ष्मण जी अगर 12:00 बजे मूर्छित हुए तो जाहिर है उसके बाद श्री राम के शोक और विभीषण द्वारा सुषेण वैद्य लाने के लिया कहना और हनुमान जी द्वारा सुषेण वैद्य को उठा लाना इन सब में कम से कम 1 घंटा तो लग ही गया होगा। यानी रात्रि के करीब 1:00 बज चुके होंगे | इसके बाद वैद्य द्वारा लक्ष्मण की जांच करने और उनके प्राण बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाने की सलाह देने और हनुमान जी को संजीवनी बूटी लाने के लिए प्रस्थान करने में भी कम से कम आधा घंटा जरूर लगा होगा।

तो हम ये मान सकते हैं कि बजरंगबली आज के समय के अनुसार करीब रात्रि में 1:30 पर संजीवनी बूटी लाने के लिए रावण की नगरी से उड़े होंगे। जहां तक सवाल उनके वापस आने का है तो निश्चित ही वह सूर्य उदय होने से पहले वापस आ गए होंगे। यानि बजरंगबली की वापसी का समय लगभग 5:00 बजे का रहा होगा। 1:30 बजे लक्ष्मण जी की जान बचाने के लिए हनुमान जी उड़े और 5:00 बजे तक वापस आ गये इसका मतलब हनुमान जी 3:30 घंटे में द्रोणागिरी पर्वत उठाकर वापस आ गए। लेकिन मित्रों इन 3:30 घंटों में से भी हमें कुछ समय कम करना होगा क्योंकि लंका से द्रोणागिरी के मार्ग में कालनेमि से भी भेंट हुई। फिर सरोवर में एक मगरमच्छ को उन्होंने मारा जो कि शापित देवपुरुष था और फिर उससे उन्हें कालनेमि के कपटमुनि होने की बात पता चली औए उन्होंने उसका वध भी किया।

इन सब में भी हनुमान जी का कम से कम आधा घंटा जरूर खराब हुआ होगा। उसके बाद बजरंगबली ने उड़ान भरी होगी और द्रोणागिरी पर्वत जा पहुंचे लेकिन हनुमान जी कोई वैद्य तो नहीं थे इसीलिए संजीवनी बूटी को पहचान नहीं सके और संजीवनी को खोजने के लिए वह काफी देर तक भटकते रहे होंगे। इसमें भी उनका कम से कम आधा घंटा जरूर खराब हुआ होगा। बूटी को ना पहचान पाने की वजह से हनुमान जी ने पूरा पर्वत ही उठा लिया और वापस लंका की ओर जाने लगे। लेकिन हनुमान जी के लिए एक और मुसीबत आ गई।

हुआ यह की जब पवन पुत्र पर्वत लिए अयोध्या के ऊपर से उड़ रहे थे तो श्री राम के भाई भरत ने सोचा कि यह कोई राक्षस अयोध्या के ऊपर से जा रहा है और उन्होंने बिना सोचे समझे महावीर बजरंगबली पर बाण चला दिया। बाण लगते ही वीर हनुमान श्री राम का नाम लेते हुए नीचे आ गिरे। हनुमान जी के मुंह से श्री राम का नाम सुनते ही भरत दंग रह गए और उन्होंने हनुमानजी से उनका परिचय पूछा तो उन्होंने (हनुमान जी) ने उन्हें राम रावण युद्ध के बारे में बताया। लक्ष्मण के मूर्छित होने का पूरा किस्सा सुनाया तब सुनकर वह भी रोने लग गए और उनसे क्षमा मांगी। हनुमानजी का उपचार किया गया और हनुमान जी वापस लंका की ओर चले। लेकिन इन सभी घटनाओं में भी बजरंगबली के कीमती समय का आधा घंटा फिर से खराब हो गया। अब हनुमान जी के सिर्फ उड़ने के समय की बात करें तो सिर्फ दो घंटे थे और इन्हीं दो घंटों में वह लंका से द्रोणागिरी पर्वत आए और वापस गए।

अब अगर हम उनके द्वारा तय की गई दूरी को देखें तो श्रीलंका और द्रोणागिरी पर्वत तक की दूरी लगभग “2500 किलोमीटर” है यानी कि यह दूरी आने जाने दोनों तरफ की मिलाकर 5000 किलोमीटर बैठती है और बजरंगबली ने यही 5000 किलोमीटर की दूरी 2 घंटे में तय की। इस हिसाब से हनुमान जी के उड़ने की रफ्तार लगभग 2500 किलोमीटर प्रति घंटा की दर से निकलती है। तो इसकी तुलना अगर ध्वनि की गति से करें तो हनुमानजी की गति ध्वनि से लगभग 2गुनी बैठती है।

भारत फ्रांस से जो राफेल विमान खरीद रहा है उसकी गति 1115 किमी प्रतिघंटा और रूस से मिले सुखोई की 2100 km प्रतिघंटा, मिग 29 की रफ्तार 2400 किलोमीटर प्रति घंटा है. इस प्रकार कहा जा सकता है हनुमान जी आधुनिक भारत को प्राप्त किसी भी लड़ाकू विमान से अधिक थी मौजूद सबसे तेज लड़ाकू विमान से भी तेज उड़ते थे।
यह एक अनुमानमात्र है, हनुमानजी की गति इससे कहीं अधिक भी हो सकती है क्योंकि सूर्य तक पहुँचने और वहां इंद्र के प्रहार से मूर्छित होकर गिरने को आधार बनाकर गणना की जाय तो परिणाम कुछ और होंगे पर सूर्य को लीलने की कोशिश के प्रसंग में बहुत से छोटे-छोटे सहायक प्रसंग है और गणना जटिल हो सकती है।

!!जय-जय सियाराम!!

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“#ग़जबकारिश्ता”
मैं बिस्तर पर से उठा, अचानक छाती में दर्द होने लगा। मुझे हार्ट की तकलीफ तो नहीं है? ऐसे विचारों के साथ मैं आगे वाली बैठक के कमरे में गया। मैंने देखा कि मेरा पूरा परिवार मोबाइल में व्यस्त था।
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””’
मैंने पत्नी को देखकर कहा- “मेरी छाती में आज रोज से कुछ ज़्यादा दर्द हो रहा है, डाॅक्टर को दिखा कर आता हूँ।”
“हाँ मगर सँभलकर जाना, काम हो तो फोन करना” मोबाइल में देखते-देखते ही पत्नी बोलीं।
मैं एक्टिवा की चाबी लेकर पार्किंग में पहुँचा, पसीना मुझे बहुत आ रहा था, ऐक्टिवा स्टार्ट नहीं हो रही थी।
ऐसे वक्त्त हमारे घर का काम करने वाला ध्रुव साईकिल लेकर आया, साईकिल को ताला लगाते ही, उसने मुझे सामने खड़ा देखा।
“क्यों सा’ब ऐक्टिवा चालू नहीं हो रही है?
मैंने कहा- “नहीं..!!”
आपकी तबीयत ठीक नहीं लगती सा’ब,
इतना पसीना क्यों आ रहा है?
सा’ब इस हालत में स्कूटी को किक नहीं मारते, मैं किक मार कर चालू कर देता हूँ। ध्रुव ने एक ही किक मारकर ऐक्टिवा चालू कर दिया, साथ ही पूछा-
“साब अकेले जा रहे हो?”
मैंने कहा- “हाँ”
उसने कहा- ऐसी हालत में अकेले नहीं जाते,
चलिए मेरे पीछे बैठ जाइये।
मैंने कहा- तुम्हें एक्टिवा चलानी आती है?
“सा’ब गाड़ी का भी लाइसेंस है, चिंता छोड़कर बैठ जाओ”
पास ही एक अस्पताल में हम पहुँचे। ध्रुव दौड़कर अंदर गया और व्हील चेयर लेकर बाहर आया।
“सा’ब अब चलना नहीं, इस कुर्सी पर बैठ जाओ”।
ध्रुव के मोबाइल पर लगातार घंटियां बजती रहीं, मैं समझ गया था। फ्लैट में से सबके फोन आते होंगे कि अब तक क्यों नहीं आया? ध्रुव ने आखिर थक कर किसी को कह दिया कि #आजनहींसकता। ध्रुव डाॅक्टर के जैसे ही व्यवहार कर रहा था, उसे बगैर बताये ही मालूम हो गया था कि सा’ब को हार्ट की तकलीफ है। लिफ्ट में से व्हील चेयर ICU की तरफ लेकर गया। डाॅक्टरों की टीम तो तैयार ही थी, मेरी तकलीफ सुनकर। सब टेस्ट शीघ्र ही किये। डाॅक्टर ने कहा- “आप समय पर पहुँच गये हो, इसमें भी आपने व्हील चेयर का उपयोग किया, वह आपके लिए बहुत फायदेमन्द रहा।” अब किसी की राह देखना आपके लिए बहुत ही हानिकारक है। इसलिए बिना देर किए हमें हार्ट का ऑपरेशन करके आपके ब्लोकेज जल्द ही दूर करने होंगे। इस फार्म पर आप के स्वजन के हस्ताक्षर की ज़रूरत है। डाॅक्टर ने ध्रुव की ओर देखा। मैंने कहा- “बेटे, दस्तखत करने आते हैं?” उसने कहा- “सा’ब इतनी बड़ी जिम्मेदारी मुझ पर न डालो।” “बेटे तुम्हारी कोई जिम्मेदारी नहीं है। तुम्हारे साथ भले ही लहू का सम्बन्ध नहीं है, फिर भी बगैर कहे तुमने अपनी जिम्मेदारी पूरी की। वह जिम्मेदारी हकीकत में मेरे परिवार की थी। एक और जिम्मेदारी पूरी कर दो बेटा। मैं नीचे सही करके लिख दूँगा कि मुझे कुछ भी होगा तो जिम्मेदारी मेरी है। ध्रुव ने सिर्फ मेरे कहने पर ही हस्ताक्षर किये हैं”, बस अब… .. “#औरहाँघरफोनलगाकरखबरकर_दो”।
बस, उसी समय मेरे सामने मेरी पत्नी का फोन ध्रुव के मोबाइल पर आया। वह शांति से फोन सुनने लगा।
थोड़ी देर के बाद ध्रुव बोला- “मैडम, आपको पगार काटने का हो तो काटना, निकालने का हो तो निकाल देना मगर अभी अस्पताल में ऑपरेशन शुरु होने के पहले पहुँच जाओ। हाँ मैडम, मैं सा’ब को अस्पताल लेकर आया हूँ, डाक्टर ने ऑपरेशन की तैयारी कर ली है और राह देखने की कोई जरूरत नहीं है”।
मैंने कहा- “बेटा घर से फोन था?”
“हाँ सा’ब।”
मैंने मन में पत्नी के बारे में सोचा, तुम किसकी पगार काटने की बात कर रही हो और किसको निकालने की बात कर रही हो? आँखों में आँसू के साथ ध्रुव के कन्धे पर हाथ रखकर मैं बोला- “बेटा चिंता नहीं करते।”
“मैं एक संस्था में सेवायें देता हूँ, वे बुज़ुर्ग लोगों को सहारा देते हैं, वहां तुम जैसे ही व्यक्तियों की ज़रूरत है।”
“तुम्हारा काम बरतन कपड़े धोने का नहीं है, तुम्हारा काम तो समाज सेवा का है, बेटा पगार मिलेगा।

इसलिएचिंताबिल्कुलभीमत_करना।”

ऑपरेशन के बाद मैं होश में आया, मेरे सामने मेरा पूरा परिवार नतमस्तक खड़ा था। मैं आँखों में आँसू लिये बोला- “ध्रुव कहाँ है?”
पत्नी बोली- “वो अभी ही छुट्टी लेकर गाँव चला गया। कह रहा था कि उसके पिताजी हार्ट अटैक से गुज़र गये है,
15 दिन के बाद फिर आयेगा।”
अब मुझे समझ में आया कि उसको मेरे अन्दर उसका बाप दिख रहा होगा।
हे प्रभु, मुझे बचाकर आपने उसके बाप को उठा लिया?
पूरा परिवार हाथ जोड़कर, मूक, नतमस्तक माफी माँग रहा था।
एक मोबाइल की लत (व्यसन) एक व्यक्ति को अपने दिल से कितना दूर लेकर जाती है, वह परिवार देख रहा था। यही नहीं मोबाइल आज घर-घर कलह का कारण भी बन गया है। बहू छोटी-छोटी बातें तत्काल अपने माँ-बाप को बताती है और माँ की सलाह पर ससुराल पक्ष के लोगों से व्यवहार करती है, जिसके परिणाम स्वरूप वह बीस-बीस साल में भी ससुराल पक्ष के लोगों से अपनत्व नहीं जोड़ पाती।
डाॅक्टर ने आकर कहा- “सबसे पहले यह बताइये ध्रुव भाई आप के क्या लगते हैं?”
मैंने कहा- “डाॅक्टर साहब, कुछ सम्बन्धों के नाम या गहराई तक न जायें तो ही बेहतर होगा, उससे सम्बन्ध की गरिमा बनी रहेगी, बस मैं इतना ही कहूँगा कि वो आपात स्थिति में मेरे लिए फरिश्ता बन कर आया था।”
पिन्टू बोला- “हमको माफ़ कर दो पापा, जो फर्ज़ हमारा था, वह ध्रुव ने पूरा किया, यह हमारे लिए शर्मनाक है। अब से ऐसी भूल भविष्य में कभी भी नहीं होगी पापा।”
“बेटा, #जवाबदारीऔरनसीहत (सलाह) लोगों को देने के लिये ही होती है।
जब लेने की घड़ी आये, तब लोग बग़लें झाँकते हैं या ऊपर नीचे हो जाते हैं।
अब रही मोबाइल की बात…
बेटे, एक निर्जीव खिलौने ने जीवित खिलौने को गुलाम बनाकर रख दिया है। अब समय आ गया है कि उसका मर्यादित उपयोग करना है।
नहीं तो….

परिवारसमाजऔर_राष्ट्र को उसके गम्भीर परिणाम भुगतने पडेंगे और उसकी कीमत चुकाने के लिये तैयार रहना पड़ेगा।”

अतः बेटे और बेटियों को बड़ा #अधिकारी या #व्यापारी बनाने की जगह एक #अच्छा_इन्सान बनायें।
🙏🙏🙏🙏
पता नहीं, किन महानुभाव ने लिखी है, लेकिन मेरे दिल को इतना छू गयी कि शेयर करने से मैं अपने आप को रोक नहीं पाया।🙏
🙏🙏🙏

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ઇમરજન્સી


આજે તારીખ 25 જૂન – ઇમર્જન્સીને આજે 46 વર્ષ થયા.. ભારતની લોકશાહી ઉપર કટોકટી લાદી દેનાર કોંગ્રેસના કોફીનને વર્તમાન સમયમાં એક બાદ એક ખીલા ઠોકાઈ રહ્યા છે. ત્યારે 46 વર્ષ પેહલા શું બન્યું હતું તે નવી પેઢીએ જાણવું એટલું જ જરૂરી છે. બન્યું હતું એવું કે માર્ચ 1971ની સામાન્ય ચૂંટણીમાં ‘ગરીબી હટાઓ’ના નારા સાથે કોંગ્રેસે 518માંથી 352 બેઠક મેળવી પ્રચંડ બહુમતી હાંસલ કરી. ડિસેમ્બર 1971માં ભારતે પાકિસ્તાનને યુદ્ધમાં કારમી હાર આપી હતી અને દુનિયાના નકશામાં બાંગ્લાદેશ અસ્તિત્વમાં આવ્યું. ઇદિંરા ગાંધી 1971 ની લોકસભાની ચૂંટણી રાયબરેલી બેઠક ઉપર 71,499 વિરુદ્ધ 1,83,309 મતે વિજેતા જાહેર કરાયા ત્યારે પરાજિત ઉમેદવાર સંયુક્ત સમાજવાદી પક્ષના ‘લોકબંધુ’ તરીકે ઓળખાતા ભૂતપૂર્વ સવાતંત્ર સેનાની હતા રાજ નારાયણે ઇંદિરા ગાંધી ઉપર આચારસંહિતા બાબતે અલાહાબાદ હાઇકોર્ટેમાં કેસ કયૉ હતો જે ચાલી રહ્યો હતો. જેમાં ઇંદિરા ગાંધી સામે અદાલતમાં બે આરોપ મુકાયા હતાં. એક કે નવી દિલ્હી ખાતે વડાપ્રધાન સચિવાલયમાં ફરજ બજાવતા યશપાલ કપૂર પાસે ચુંટણી પ્રચારનું કામ કરાવવું. કેમકે કાયદા મુજબ સરકારી અધિકારીને અંગત કામે લગાડી શકાય નહીં. બીજું કે રાય બરેલીમાં ચૂંટણી સભાઓ માટે જે મંચ તૈયાર થયાં હતાં એમાં ઉત્તરપ્રદેશના સરકારી કર્મચારીઓ પાસે કામ લેવામાં આવ્યું હતું. રાજ નારાયણનો કેસ એડવોકેટ શાંતિ ભૂષણ (પ્રશાંત ભૂષણના પિતા) લડી રહ્યા હતા. ઇંદિરા ગાંધીએ વી.એ.ખેર ને કેસ સોંપ્યો. આ કેસ જસ્ટિસ જગમોહનલાલ સિંહા સામે ચાલી રહ્યો હતો. જેઓ ઇમાનદાર માણસ હતા.જસ્ટિસ સિંહાએ માચૅ 1975 દરમ્યાન વડાપ્રધાનને અદાલતમાં હાજર થવા સમન્સ પાઠવ્યું. 18 માચૅ 1975ના રોજ ઇંદિરા ગાંધી અદાલતમાં હાજર થઇને જવાબ આપવા કઠેડામાં 5 કલાક ઉભા રહ્યા. ઇંદિરા ગાંધી માટે આ કેસ જીતવો પ્રતિષ્ઠાનો પ્રશ્ર બની ગયો. તેમણે જસ્ટિસ સિંહાને ઉત્તરપ્રદેશના કોગ્રેસી સાંસદ સભ્ય દ્રારા રુપિયા 5,00,000 માં ખરીદવાની કોશિશ કરી જે નિષ્ફળ ગઈ. બીજી કોશિશમાં તેમણે અલ્હાબાદ હાઇકોર્ટેના ચીફ જસ્ટિસ ડી.એસ.માથુર દ્વારા ઓફર મોકલી સુપ્રીમ કોર્ટેમાં જસ્ટિસ પદ આપવાની વાત કરી. પણ બંને વાત જનતા વચ્ચે પહોંચી ગઈ. કોઈ કીમિયો કામ ન લાગતા આખરે જસ્ટિસ સિંહા બંગલા પર આઈબીની વૉચ ગોઠવી દેવાઈ અને જસ્ટિસ સિંહાના સ્ટેનોગ્રાફર નેગી રામ નિગમને એરેસ્ટ કરીને ટોર્ચર કરવામાં આવ્યા. હેતુ હતો ચુકાદો શું આવવાનો છે તે અગાઉથી સ્ટેનોગ્રાફર પાસથી જાણી લેવાનો. જો કે તે બાદ પણ સફળતા ના મળી. 12, જૂન 1975ને દિવસે જસ્ટિસ સિંહાએ ઇંદિરા ગાંધી વિરુધ્ધ ચુકાદો આપ્યો. જેમાં ઇંદિરા ગાંધીની જીતને રદ કરી સાથે પ્રતિબંધ ફરમાવ્યો કે આગામી છ વષૅ સુધી તેઓ કોઈ પણ પ્રકારની ચૂંટણી લડી શકે નહીં. ઇન્દિરા ગાંધીના વકીલે ચુકાદાના વિરુધ્ધ માં સ્ટે માગ્યો જેમાં ચુકાદા સામે 20 દિવસ માટે સ્ટે મળ્યો. ચુકાદો આવ્યો તે સાથે જુન 23ના રોજ વિરોધપક્ષોએ જયપ્રકાશ નારાયણના નેતૃત્વમાં રેલી કાઢી જેનું નામ હતું “અહંકાર રેલી”. જેમાં જયપ્રકાશે પોલીસ તથા સૈન્યને કહ્યું કે તેમણે સરકારના ‘ગેરકાયદે’ હુકમો માનવા નહીં. આ નિવેદનનો લાભ લેવા સંજય ગાંધીનું કુટિલ દિમાગ કામ કરી ગયું અને તેમના મતે સંવિધાનની કલમ 352 મુજબ ઇમર્જન્સી લગાવવાનું આ સારું બહાનું હતું. દરમ્યાન હાઇકોર્ટના ચુકાદા સામે ઇન્દિરા ગાંધી સુપ્રીમ કોર્ટ ગયા હતા જ્યાં જસ્ટિસ વી.કે. કૃષ્ણા ઐયરે 24 જૂન, 1975ના દિવસે હાઇકોર્ટના નિર્ણયને યોગ્ય ગણાવીને સાંસદ તરીકે ઇન્દિરા ગાંધીને મળતી તમામ સુવિધાઓ પર પ્રતિબંધ મૂકી દીધો જે પછી ઇંદિરાગાંધી ચારે બાજુથી ચુકાદાનો અમલ કરવાની જવાબદારીમાં ધેરાયેલા હતા. જે બાદ સફદરજંગ રોડ ઉપર આવેલા વડાપ્રધાનના સત્તાવાર નિવાસસ્થાને મિટિંગોનો દોર ચાલુ થયો. કોંગ્રેસ પ્રમુખ દેવકાંત બરુઆ, સિધ્ધાર્થ શંકર રાય, બાબુ જગજીવનરામ, યશવંત ચવાણ, ડૉ. કીરણસિંહ, સંજય ગાંધી અને રાજીવ ગાંધી સાથે જેમને કારણે ઇન્દિરા મુશ્કેલીમાં મુકાયા હતા તે યશપાલ કપૂર. સંજય ગાંધીના મતે રાજીનામુ આપવાને સ્થાને કલમ 352 મુજબ કટોકટી લાદવા નિર્ણય લેવાનો હતો. તે સમેયે કોંગ્રેસ ઉપર સંજય ગાંધીનો ભારે પ્રભાવ હતો તેથી તેમની વાતને કોઈ નકારી શક્યું નહીં. સરકાર સમક્ષ સિદ્ધાર્થ શંકર રાયે ઇમર્જન્સીનો પ્રસ્તાવ મુક્યો. જેને ઇંદિરા ગાંધીએ ટેકો જાહેર કર્યો પછી જરૂર હતી માત્ર રાષ્ટ્રપતિની સહીની ઔપચારિકતાની. ઇંદિરા ગાંધીના અહેસાન તળે દબાયેલા રાષ્ટપતિ ફકરુદીન્ અલી એહમદે જૂન 25, 1975ના રોજ ઇમર્જન્સીના ઘોષણાપત્ર પર સહી કરી દીધી. ઇમર્જન્સીની પૂર્વ તૈયારીઓ સંજય ગાંધી અને તેમનું જૂથ RAWના ગુપ્તચરો સાથે મળીને કયારના કરી ચૂક્યા હતા. દેશની નિર્દોષ પ્રજા ઉપર ઇમર્જન્સી ઠોકી બેસાડ્યાના પ્રથમ 72 કલાકમાં હજારો નિર્દોષ માણસોને જેલમાં ધકેલી દેવામાં આવ્યા. એક સપ્તાહમાં જ આવા કેદીઓની સંખ્યા 1,10,000 થઇ ગઈ. ન્યાયપાલિકાની સત્તા ખતમ કરી દેવામાં આવી. પોલીસ કે સરકારી અધિકારીના જનતા સામેના કોઈ પણ વર્તન બાબતે કોર્ટમાં ન જઈ શકાય. કોઈ પણ કારણ વગર કોઈને પણ ગમે તે રીતે પકડીને પોલીસ જેલમાં નાખી દે. પરિવારને કે લગતા વળગતાને જાણ સુદ્ધાં કરી ન શકાય. પ્રેસની સ્વતંત્રતા સંપૂર્ણપણે છીનવી લેવામાં આવી. સરકારના બાતમીદાર ચારેબાજુ ફરતા રહેતા. લગભગ તમામ લોકપ્રિય વ્યક્તિઓના ફોન ટેપ કરવામાં આવતા. દેશની સુપ્રીમ કોર્ટે નિવેદન આપ્યું કે ભારતમાં હવે right to life પણ નથી રહ્યો. નાગરિકને વાંક ગુના વગર પણ હકૂમત ગમે ત્યારે શૂટ કરાવી કે ફાંસી એ લટકાવી શકે છે. આ બધું ભારતમાં બન્યુ અને એકવીસ મહિના સુધી આ ચાલતું રહ્યું. આજે 46 વર્ષ થયા અત્યારની પેઢીને ત્યારના ઘટનાક્રમ અંગે ઝાઝો અણસાર નહીં હોય. ત્યારની પેઢીએ ભોગવેલી યાતનાઓ અને તકલીફો વિષે જાણીશું તો આપણે આજની પેઢી લોકશાહીની કિંમત સમજીશું. – કેયુર જાની

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हनुमान चालीसा


क्या आप #हनुमानचालीसा पढ़ते हैं? यदि हाँ, तो यह जान लीजिए कि आप देशी भाषा में वेद पढ़ते हैं। तुलसी ने हनुमान चालीसा में #ऋग्वेद के #मरुद्सूक्त के सार वचनों के नगीने जड़ दिए हैं।

अधिक लिखना संभव नहीं है, कुछ संकेत करता हूँ कि कैसे तुलसी ने हनुमान चालीसा के माध्यम से लोक कण्ठ में वेद रख दिया।

लिखना इसलिए पड़ रहा है कि हमारी आस्था का प्रमाण वेद है और वेद वाणी ब्रह्माण्ड की शक्तियों का गायन करती है।

निजी शक्ति से अभिव्यक्त वेद वाणी स्वत: प्रमाण है- निजशक्त्यभिव्यक्ते: स्वत: प्रामाण्यम् । #सांख्य, ५.५
तद्वचनादाम्नायस्य प्रामाण्यम्- #वैशेषिक १.१.३

वेद वाणी का संवाहक होने के कारण तुलसी कृत हनुमान चालीसा भी प्रामाणिक है।

लंक दहन के लिए मुझे हनुमान जी की कृपा चाहिए, इसलिए मैं मरुद् सूक्तों पर केन्द्रित हूँ।

आजकल देश में हनुमानजी पर भी सवाल उठाने वाले खर- दूषण उत्पन्न हो गये हैं।

हमारी आस्था को कठघरे में खड़ा करनेवाले खल ही तो बाध्य करते हैं कि हम बोलें, बताएँ और दुष्टों को, शत्रुओं को ललकारें, पछड़े।

यही सब महावीरी काम है, यह काम मुझे अच्छा लगता है- लंका दहन आदि।

वेद में ३३ मरुद सूक्त हैं। मैं इतना नहीं पढ़ सकता। कुछ उदाहरण देता हूँ-

वृष्ट्वी शं योराप उस्रि भैषजम् । (ऋ. ५.५३.१४)
नासे रोग हरे सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमतबीरा।

युवानो रुद्रा अजरा: (ऋ. १.६४.३) –
चोरों जुग प्रताप तुम्हारा।

प्रपेयन्ति पर्वतानृयद् यामं वायुभि: (ऋ. ५.५७.४)
पवनवेग से उड़ते हैं तो पर्वत काँप उठते हैं।

ऋक्वन्-
तुम्हरो भजन राम को भावे।

मरुतो रश्मय:
कनकभूधराकार शरीरा।

लेखक प्रमोद दुबे #NCERT में कार्यरत हैं