Posted in रामायण - Ramayan

रामायण की कुछ गणितीय चौपाइयों पर प्रश्न

भूप सहस दस एकहि बारा
लगे उठावन टरइ न टारा
का अर्थ क्या है l

पहले तो यह जान लीजिए कि यह केवल अपने धनुष के आकार के कारण धनुष कहा जाता है। उत्तर के पहल मानस में धनुष यज्ञ प्रसंग को ध्यान से पढ़िए और फिर विचार करिए। इस विषय में वाल्मीकि और तुलसीदास एकमत हैं कि यह बहुत भारी था।
वाल्मीकि जी कहते हैं कि इसे यज्ञस्थल पर लाने के लिए बड़ी सी पहिया गाड़ी पर लादकर सौ हट्टे कट्टे आदमियों द्वारा खींचकर लाया गया था। अब यहां देखते हैं कि धनुष तोड़ने की प्रतिज्ञा राजा जनक को क्यों करनी पड़ी? इस विषय में एक कथा है। एक बार सीता जी धनुष को देखने गईं थीं।
वहां उसके आस-पास घास उग आई थी तो सीता जी ने उसे उठाकर अलग रख दिया और उस स्थान की लिपाई करके फिर धनुष को यथावत रख दिया।जनक को पता चला तो आश्चर्य चकित रह गए।उसी दिन उन्हें पता चला कि सीता जी कोई सामान्य लड़की नहीं बल्कि अवतारी कन्या हैं और उन्होंने धनुष यज्ञ का आयोजन कर दिया। अब जान लीजिए कि यह सामान्य धनुष न होकर एक मिसाल लांचिंग पैड था। इसे शिवजी ने तारकासुर के तीनों पुत्रों को मारने के लिए एक विशेष धातु से बनाया था। इसीलिए यह बहुत भारी था। यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अपने समय की सर्वोत्कृष्ट रचना थी।
बनाने का उद्देश्य-
असल में कार्तिकेय जी द्वारा तारकासुर का वध हों जाने के बाद
उसके तीनों पुत्रों तारकाक्ष कमलाक्ष और विद्युन्माली ने अंतरिक्ष के तीन ग्रहों पर कब्जा कर लिया था और वहीं सातों लोकों पर हमला करके लोगों को त्रास देते थे। तपस्या के द्वारा उन्होंने ब्रह्मा जी से अपनी मृत्यु की असंभव शर्त मनवा लिया था ‌। इसके अनुसार उनके ग्रहों को नष्ट करने के लिए एक विलक्षण शस्त्र की जरूरत होती और शतभिषा नक्षत्र जब तीनों ग्रह एक सीध में तो एक ही बाण से उनकी मृत्यु हो। अब इसका भार सदैव की शिवजी ने उठाया और पिनाक धनुष को बनाया। त्रिपुरासुर का विनाश करने के बाद इसकी उपयोगिता नहीं रही और शिवजी ने इसकी सुरक्षा के इसे छड़ें विष्णु परशुराम जी को दे दिया था।अपना कार्य करके समस्त भूमि कश्यप ऋषि को दान देकर जाने लगे तो इसे राजा जनक के यहां रखवा दिया क्योंकि मिथिला राज्य एक तटस्थ राज्य था। अब देखिए कि सीता ने कैसे उठा लिया था। यह गुण (केवल उठाने का) विश्वामित्र ने बताया थ इसके बीच में कल थी जिसे दबाने पर भारहीन हो जाता था।कथा बहुत बड़ी है इसलिए मूल प्रश्न पर आते हैं।असल में यहां दश हजार राजाओं के एक साथ उठाने की बात ही नहीं है। यहां तो गोस्वामी जी यज्ञ में आमंत्रित राजाओं की संख्या बता रहे हैं। इसे ऐसे समझिए
भूप = राजा
सहस= १०००
दश= १०
एकहि=१
बारा= १२
अब छोड़िए
१०००+१०+१+१२= १०२३
अतः चौपाई का अर्थ है कि कुल १०२३
राजा आमंत्रित थे।

शिवानंद मिश्रा

Author:

Buy, sell, exchange books

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s