Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक


आज मेने अपने पिताजी को एक उपहार दिया और उनके पैर छुए …..
पिताजी बोले: पैर छूना तो तेरा नित्यकर्म है पर आज ये उपहार क्यों ?
मैंने बड़े विनम्रतापूर्वक, खुश होकर कहा :- क्योंकि पिताजी आज पितृदिवश है यानी पिताजी का दिन (FATHER’S DAY)

फिर क्या था

पिताजी ने जूता उतारा और बे मौसम वारिश कर दी
दे दना दन……..
कितने जूते मुझमे मारे याद नही
और बोले :- अभी में जिंदा हूँ, और तू मेरा श्राद निकाल रहा है! अरे मूर्ख हमारे यहाँ जिस दिन पिताजी की मृत्यु होती है उसे हर साल पिताजी का दिन कहा जाता है !

जब उनका गुस्सा ठंडा हुआ तब मैंने पूछा कि हुआ क्या ?
मेरे पिताजी बोले :- ये उन लोगो के लिए है जो पूरे बर्ष अपने माता पिता की कोई परवाह नही करते,न उनकी देखभाल करते, वो किस हाल में है ? यह जानने के लिए भी उनके पास समय नही है !
365 दिन में से 1 दिन पिता को और 1 दिन माँ को याद किया और इतिश्री कर ली ! वाकी 363 दिन उनका क्या हाल है ?
इससे कोई मतलब नही ।

हमारे हिंदुस्तान में 365 दिन ही माता पिता के होते है ! हमारी संस्कृति में माँ बाप के आशीर्वाद से ही दिन की शुरुआत होती है !!

और आखिर में बोले :- ये गलत शुरुआत तो तूने शुरू कर दी है इसका परिणाम तेरे बेटा बेटी या उनके बच्चे भोगेंगे । जब माँ बाप को सिर्फ 1 दिन ही याद किया जाएगा और इसे गलत भी नही माना जायेगा ! क्योकि तब तक ये परम्परा या रीति रिवाज का रूप ले चुका होगा !

उनकी ये बात मेरी समझ मे तो आ गयी और आपकी….?

अखिल भंडारी जैन

Author:

Buy, sell, exchange books

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s