Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

कैंची_BeautyOfLife

सुरभि की शादी में उसकी माँ की एक सहेली भी बहुत दूर से आईं थीं और उनके घर में ही रुकी थीं। जाने क्यों सुरभि को नीना आंटी बहुत अपनी सी लग रही थीं, जबकि वह पहली बार उनसे मिल रही थी।
मेंहदी की रस्म के बाद सभी औरतें बैठी हंसी मजाक कर रहीं थीं।
“मैं चाहती हूँ, आप सभी सुरभि को आशीर्वाद के तौर पर एक-एक सीख दें, जो इसके वैवाहिक जीवन में काम आएं,” सुरभि की माँ ने कहा।
सुरभि की दादी बोलीं, “खाना ध्यान से बनाया करना, स्वादिष्ट खाना सबके मुँह बंद रखता है”।
“सही कहा सासु माँ आपने, तभी आपका मुँह बंद रहता है, हम सब बहनें स्वादिष्ट खाना जो बनाती हैं, क्यों दी?” सुरभि की चाची ने कहा तो सबको हँसी आ गई। दादी ने प्यार से एक धप्प लगाया उसे।
“बड़ों के आगे जुबान नहीं चलाना, चाहे कुछ भी कहें,” सुरभि की मौसी ने कहा तो सुरभि को जैसे कुछ बुरा लगा हो, उसने अपना मुँह घुमा लिया। आज ही एक ड्रैस को लेकर उसकी मौसी से बहस हुई थी। नीना आंटी ने उसकी यह नाराज़गी खास तौर पर नोटिस की।
सब फिर से हँसने लगे क्योंकि सुरभि बहुत समझदार होने के बाद भी सबसे बड़ी उलझती थी। अपने पापा, चाचा, मामा, मौसा सभी से बहस करती थी, यहाँ तक कि अनजान लोगों से भी।
“सुई और कैंची तो तुमने खूब चलाई है। गुण बस सुई के ही अपनाना, कैंची के नहीं। सबको सिलना, काटना नहीं, तभी खुश रहोगी,” सुरभि की मामी ने कहा।
“वाह वाह, क्या बात कही,” सुरभि की मामी की गूढ़ सीख की तारीफ़ एक स्वर में हुई।
नीना आंटी ने यह सब देखा तो बोलीं—
“एैसा नहीं है, कैंची का अपना महत्व है, बस उसका सही इस्तेमाल आना चाहिए। कपड़े को उपयोगी बनाने के लिए काटना भी तो जरूरी होता है न, सुई तभी तो परिधान सिलेगी जब कैंची सही आकार में कपड़ा काटेगी”।
सबके चेहरे पर आश्चर्य के भाव उभरे। नीना आंटी कह तो सही रहीं थीं, लेकिन इस संदर्भ में उनकी बात किसी के पल्ले न पड़ी। सभी ने सुई वाली कहावत ही सुन रखी थी।
“तो कैंची से सीख क्या बनी फिर?” सुरभि की दादी ने पूछा।
“सुरभि बेटा, अपने व्यवहार को सुई बनाना, जिससे सभी को खुद से जोड़ सको। धैर्य और समझदारी को कैंची बना कर गलत बातों को समझदारी से काटना और अपने व्यवहार की सुई से उसे सिलना। लड़कियों को हमेशा चुप रहना सिखाना भी गलत है, गलत बात का विरोध करना तो सभी को आना चाहिए, लेकिन वह संयम, सावधानी और समझदारी से होना चाहिए, तैश में या गुस्से में आ कर नहीं”।
नीना आंटी की बात से कैंची की नई मिसाल कायम हो गई।
—Dr💦Ashokalra
Meerut

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