Posted in भारतीय उत्सव - Bhartiya Utsav

गंगा दशहरा


गंगा
विष्णुपदा, देवनदी, ध्रुवनन्दा, सुरसरिता, अमर तरंगिरीणी, त्रिपथगा, भागीरथी, जाह्नवी, इत्यादि नामों से जानी जानेवाली भारत की भाग्यरेखा गंगा का स्वर्गलोक से पृथ्वीलोक पर अवतरण आज याने ज्येष्ठ शुक्ला दशमी के दिन हुआ था।

सागरपुत्र भागीरथ के भागीरथी प्रयासों से जिस दिन गंगा मैया का धरती पर अवतरण हुआ उस दिन का दिव्ययोग इस प्रकार था : ज्येष्ठ-माह, शुक्ल-पक्ष, दशमी-तिथि, बुद्धवार, हस्त-नक्षत्र, व्यतिपात-योग, गर-करण, आनन्दयोग, कन्या राशि का चन्द्रमा एवं वृषभ राशि का सूर्य था।

गंगा दशमी या गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान या गंगाजल मिश्रित जल के स्नान का बहुत महत्व है। 10डुबकी, 10मंत्र, 10फूल,10फल, 10दीपक, 10तरह की पूजा सामग्री, 10तरह की दान सामग्री, 10 पण्डितों को दान , 10गरीबों को भोजन व 10संकल्प याने सबकुछ दस का महत्व है।

पितर-तारण, पाप-मुक्ति, संतान-सुख, संताप-समाप्ती व समृद्धि-संवर्धन के लिये लाखों लोग आज गंगा स्नान करना चाहते हैं। मत्स्य, गरूङ व पद्म पुराण के अनुसार आज हरिद्वार, प्रयाग व सागर-संगम स्नान सर्वश्रेष्ठ स्नान माना गया है।

पाप मुक्ति मिले या नहीं, यह पापियों की समस्या है परन्तु यह सौ प्रतिशत सत्य है कि गंगा संस्कृति का पालना, विकास-धारा व करोङों जीवों का जीवन प्राण है। गंगा संस्कृति संरक्षक व समृद्धि संवर्धक है। गंगा सच्चे अर्थों में हर भारतीय की माँ है।
जय श्रीकृष्ण जय सीयाराम।

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