Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🔆💥 🌳सुप्रभात🌳 🔆💥 *💐एहसास*💐

एक बार मेरे शहर फरीदाबाद में एक प्रसिद्ध बनारसी विद्वान् “ज्योतिषी” का आगमन हुआ.

माना जाता है कि उनकी वाणी में सरस्वती विराजमान है। वे जो भी बताते है वह शत प्रतिशत सच होता है।

ज्योतिषी जी से मिलने को शर्मा जी बहुत व्याकुल थे।

501/- रुपये देते हुए “शर्मा जी” ने अपना दाहिना हाथ आगे बढ़ाते हुए ज्योतिषी को कहा: “महाराज, मेरी मृत्यु कब, कहॉ और किन परिस्थितियों में होगी ?”

ज्योतिषी ने शर्मा जी की हस्त रेखाऐं देखीं, चेहरे और माथे को अपलक निहारते रहे। स्लेट पर कुछ अंक लिख कर जोड़ते–घटाते रहे। बहुत देर बाद वे गंभीर स्वर में बोले:

“शर्मा जी, आपकी भाग्य रेखाएँ कहती है कि जितनी आयु आपके पिता को प्राप्त होगी उतनी ही आयु आप भी पाएँगे। जिन परिस्थितियों में और जहाँ आपके पिता की मृत्यु होगी, उसी स्थान पर ओर उसी तरह, आपकी भी मृत्यु होगी।”

यह सुन कर “शर्मा जी” भयभीत हो उठे और तुरन्त चल पडे.

एक घण्टे बाद- “शर्मा जी” वृद्धाश्रम से अपने वृद्ध पिता को अपने साथ लेकर घर लौट रहे थे…..

जब माता-पिता वृद्ध होते हैं तब संतान का दायित्व होता है कि उनकी इच्छाओं को पूर्ण करें। उनकी सेवा करे और उन्हें किसी प्रकार का कष्ट न पहुंचाए। जो खुद कष्ट सह कर संतान को सुख देते हैं वे माता-पिता वंदनीय है

आज वृद्धाश्रमों की बढ़ती हुई संख्या और तीर्थस्थानों में उम्रदराज भिखारियों को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वृद्ध माता-पिता की दशा कितनी दयनीय हो गई है।

युवा यह नहीं जानते कि एक दिन वे भी असहाय वृद्ध होंगे तब वे भी क्या अपनी संतान से इसी व्यवहार की चाह रखेंगे जैसा कि आज वे स्वयं अपने माता-पिता के साथ कर रहे हैं? यह उपेक्षापूर्ण व निष्ठुर व्यवहार सर्वथा अनुचित है।

सदैव प्रसन्न रहिये🌳🌳
जो प्राप्त है-पर्याप्त है🌳🌳

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🌺⭐🌺⭐🌺⭐🌺

किसको धोखा दे रहे हो? ||

मुल्ला नसरुद्दीन एक स्कूल में शिक्षक था। और जैसा कि स्कूल में शिक्षकों की आदत होती है, वह अखबार लेकर आंख बंद करके विश्राम करता था। लड़के उसे कई दफे सोया हुआ पकड़ लेते थे। आखिर लड़कों ने एक दफे कहा कि आप हमें तो सोने नहीं देते और आप खुद घुर्राटे लेते हैं! उसने कहा, मैं घुर्राटे नहीं लेता। तुम सब काम में लगे हो, उस बीच मैं स्वर्ग की यात्रा पर जाता हूं; वहां देवी-देवताओं से मिलता हूं, भगवान के दर्शन करता हूं; वहीं से तो ज्ञान लाता हूं तुम्हारे लिए रोज-रोज।
एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन बीच में जग गया; एक मक्खी उसके ऊपर भिनभिना रही थी। तो उसने देखा, एक सामने ही बैठा लड़का घुर्राटे ले रहा है। तो उसने जगाया। अब लड़के भी कुशल हो गए थे। लोग सीख लेते हैं, आखिर गुरु जब इतना ज्ञानी तो लड़के भी ज्ञानी हो गए। उस लड़के ने कहा, आप यह मत समझना कि मैं कोई सो रहा था; मैं स्वर्ग गया था। नसरुद्दीन थोड़ा चिंतित हुआ। उसने कहा कि वहां क्या देखा? उसने कहा, क्या देखा? मैंने सब देवी-देवताओं से पूछा कि मुल्ला नसरुद्दीन इधर आते हैं? उन्होंने कहा, हमने तो कभी नाम ही नहीं सुना।
न गुरु जानते हैं, न मां-बाप को कुछ पता है। कोई भी उस स्वर्ग में गए नहीं, कोई उस मोक्ष को जाना नहीं, और वे तुम्हें सिखा रहे हैं। हर बच्चे को वे सिखा रहे हैं। मैं छोटा था तो मुझे ले जाया जाता था मंदिर, कि झुको! मैं पूछता कि अगर आपको पता हो पक्का तो मैं झुकने को राजी हूं, मुझे आप पर भरोसा है। लेकिन मुझे शक है कि आपको पता नहीं है। मुझे लगता है कि आपके मां-बाप ने आपको झुकाया, आप मुझे झुका रहे हैं। अगर आपको पक्का पता हो तो मैं भरोसे में झुकने को राजी हूं। मेरे पिता ईमानदार आदमी हैं। उन्होंने मुझे कहा, तो फिर हम ही झुकते हैं, तुम मत झुको। क्योंकि हमारी तो आदत हो गई, और न झुकने से बड़ी अड़चन होगी। अब तुम अपना सम्हालो। मगर इस तरह के कठिन सवाल मत उठाओ।
मां – बाप से सीख लिया है; स्कूल में सीख लिया है; किताबों में लिखा है। सब तरफ प्रचार हो रहा है, उससे सीख लिया है। उसको तुम ज्ञान समझ रहे हो! किसको धोखा दे रहे हो? खुद ही धोखा खा रहे हो।…..osho

🌺⭐🌺⭐🌺⭐🌺

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

♦️♦️♦️ रात्रि कहांनी ♦️♦️♦️

एक गरीब एक दिन एक सिक्ख के पास अपनी जमीन बेचने गया बोला सरदारजी मेरी 2 एकड़ जमीन आप रख लो ,🏵️ 🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅🔅
सिक्ख बोला ,क्या कीमत है ,
गरीब बोला, –50 हजार रुपये ,
सिक्ख थोड़ी देर सोच के ,वो ही खेत जिसमे ट्यूबल लगा है
गरीब ,— जी आप मुझे 50, से कम भी दे दे
सिक्ख ने आंखे बंद की 5 मिनिट सोच के
नही मैं , उसकी कीमत 2 लाख रुपये दूँगा ,
गरीब पर मैं 50 हजार ले रहा हूँ आप 2 लाख क्यो?????
सिक्ख बोला तुम जमीन क्यो बेच रहे हो ,
गरीब बोला ,बेटी की शादी करना है बच्चो की पढ़ाई की फीस जमा करना है बहुत कर्ज है मजबूरी है इसीलिए मजबूरी में बेचना है पर आप 2 लाख क्यो दे रहे
सिक्ख बोला , मुझे जमीन खरीदना है ,,किसी की मजबूरी नही खरीदना ,अगर आप की जमीन की कीमत मुझे मालूम है तो मुझे आपके कर्ज आपकीं जवाबदेही और मजबूरी का फायदा नही उठाना मेरा वाहेगुरू कभी खुश नही होगा ऐसी जमीन या कोई भी साधन जो किसी की मज़बूरिओ को देख के खरीदे हो वो घर और जिंदगी में सुख नही देते आने वाली पीढ़ी मिट जाती है ,
है मेरे मित्र तुम खुशी खुशी अपनी बेटी की तैयारी करो 50 हजार की हम पूरा गांव व्यवस्था कर लेगा तेरी जमीन भी तेरी रहेगी
मेरे गुरु नानक देव साहिब ने भी अपनी बानी में येही हुक्म दिया है , गरीब हाथ जोड़ कर आखों में नीर भरी खुशी खुशी दुआय देता चला गया
क्या ऐसा जीवन हम किसी का बना सकते है
बस किसी की मजबूरी न खरीदे
किसी के दर्द मजबूरी को समझ कर सहयोग करना ही सच्चा तीर्थ है एक यज्ञ है सच्चा कर्म और बन्दगी है हम सबके संत भी येही कहते है
वाहेगुरू जी 🙏

🌹☘🌹☘🌹☘🌹

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🌻🌸🌻🌸🌻🌸🌻

👉🏿%/अज्ञानता सबसे बड़ी बीमारी है।/%
बहुत सुन्दर कहानी,जरूर पढ़िए..

एक जौहरी के निधन के बाद उसका परिवार संकट में पड़ गया।
खाने के भी लाले पड़ गए।
एक दिन उसकी पत्नी ने अपने बेटे को नीलम का एक हार देकर कहा- बेटा, इसे अपने चाचा की दुकान पर ले जाओ।

कहना इसे बेचकर कुछ रुपये दे दें।बेटा वह हार लेकर चाचा जी के पास गया।

👳चाचा ने हार को अच्छी तरह से देख परखकर कहा- बेटा, मां से कहना कि अभी बाजार बहुत मंदा है।थोड़ा रुककर बेचना, अच्छे दाम मिलेंगे।

उसे थोड़े से रुपये देकर कहा कि तुम कल से दुकान पर आकर बैठना।

अगले दिन से वह लड़का रोज दुकान पर जाने लगा और वहां हीरों, रत्नों की परख का काम सीखने लगा।

एक दिन वह बड़ा पारखी बन गया। लोग दूर-दूर से अपने हीरे की परख कराने आने लगे।

एक दिन उसके चाचा ने कहा, बेटा अपनी मां से वह हार लेकर आना और कहना कि अब बाजार बहुत तेज है ,उसके अच्छे दाम मिल जाएंगे।

मां से हार लेकर उसने परखा तो पाया कि वह तो नकली है।
वह उसे घर पर ही छोड़ कर दुकान लौट आया।
👳चाचा ने पूछा, हार नहीं लाए?
उसने कहा, वह तो नकली था।
तब 👳चाचा ने कहा- जब तुम पहली बार हार लेकर आये थे, तब मैं उसे नकली बता देता तो तुम सोचते कि आज हम पर बुरा वक्त आया तो चाचाजी हमारी चीज़​ को भी नकली बताने लगे।

आज जब तुम्हें खुद ज्ञान हो गया तो पता चल गया कि हार सचमुच नकली है।

सच यह है कि ज्ञान के बिना इस संसार में हम जो भी सोचते, देखते और जानते हैं, सब गलत होता है।
और ऐसे ही गलतफहमी का शिकार होकर रिश्ते बिगड़ते है।

ज़रा सी रंजिश पर, ना छोड़ो किसी अपने का दामन..
ज़िंदगी बीत जाती है अपनो को अपना बनाने में..

आज इसी अज्ञानता के कारण हम भगवान् को भूल चुके हैं, भगवान् से अपने सम्बन्ध को भूल चुके हैं।
भगवान् श्री कृष्ण भगवद गीता में केहते हैं, कि में ही सभी यज्ञों भोक्ता हू, सारे लोको का सरी सृष्टि का में ही ईश्वर में हू। में सारे जीवो का हितैषी शुभचिंतक हू,
जो इस बात को समझ गया या जान गया तो वह व्यक्ति शांति ,सुख, सफलता को प्राप्त करता है और अन्य लोगो का हितैषी बन सकता है।

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🔆💥🌳 सुप्रभात 🌳🔆💥

💐अनुकरणीय शिक्षण का संदेश💐

एक बार एक व्यक्ति की उसके बचपन के टीचर से मुलाकात होती है । वह उनके चरण स्पर्श कर अपना परिचय देता है।

वे बड़े प्यार से पुछती है, ‘अरे वाह, आप मेरे विद्यार्थी रहे है, अभी क्या करते हो, क्या बन गए हो ?’

‘ मैं भी एक टीचर बन गया हूं ‘ वह व्यक्ति बोला,’ और इसकी प्रेरणा मुझे आपसे ही मिली थी जब में 7 वर्ष का था।’

उस टीचर को बड़ा आश्चर्य हुआ, और वे बोली कि,’ मुझे तो आपकी शक्ल भी याद नही आ रही है, उस उम्र में मुझसे कैसी प्रेरणा मिली थी ??’

वो व्यक्ति कहने लगा कि ….

‘यदि आपको याद हो, जब में चौथी क्लास में पढ़ता था, तब एक दिन सुबह सुबह मेरे सहपाठी ने उस दिन उसकी महंगी घड़ी चोरी होने की आपसे शिकायत की थी।
आपने क्लास का दरवाज़ा बन्द करवाया और सभी बच्चो को क्लास में पीछे एक साथ लाइन में खड़ा होने को कहा था। फिर आपने सभी बच्चों की जेबें टटोली थी। मेरे जेब से आपको घड़ी मिल गई थी जो मैंने चुराई थी। पर चूंकि आपने सभी बच्चों को अपनी आंखें बंद रखने को कहा था तो किसी को पता नहीं चला कि घड़ी मैंने चुराई थी।
टीचर उस दिन आपने मुझे लज्जा व शर्म से बचा लिया था। और इस घटना के बाद कभी भी आपने अपने व्यवहार से मुझे यह नही लगने दिया कि मैंने एक गलत कार्य किया था।
आपने बगैर कुछ कहे मुझे क्षमा भी कर दिया और दूसरे बच्चे मुझे चोर कहते इससे भी बचा लिया था।’

ये सुनकर टीचर बोली, ‘ मुझे भी नही पता था बेटा कि वो घड़ी किसने चुराई थी।’

वो व्यक्ति बोला,’नहीं टीचर, ये कैसे संभव है ? आपने स्वयं अपने हाथों से चोरी की गई घड़ी मेरे जेब से निकाली थी।’

टीचर बोली…..
‘बेटा मैं जब सबके पॉकेट चेक कर रही थी, उस समय मैने कहा था कि सब अपनी आंखे बंद रखेंगे , और वही मैंने भी किया, मैंने स्वयं भी अपनी आंखें बंद रखी थी।’

अनुकरणीय आदर्श शिक्षक की प्रेरणादायक सोच । किसी को उसकी ऐसी शर्मनाक परिस्थिति से बचाने का इससे अच्छा उदाहरण और क्या हो सकता है ? अध्यापक की इस प्रेरणा से पढ़कर अध्यापक बना वह बच्चा आधा संस्कार लेकर यदि जीवन मे इतना बदलाव कर सकता है तो विचार कीजिये कि अनुकरणीय संदेश (( आप स्वयं भी अपनी आंख बंद कर ले जिससे तुलनात्मक/आलोचनात्मक सोच आपमें भी न आये )) का अनुकरण कर के जीवन मे कितना सृजनात्मक बदलाव किया जा सकता था

आइये प्रण करें की यदि हमें किसी की कमजोरी मालूम भी पड़ जाए तो उसका दोहन करना तो दूर, उस व्यक्ति को ये आभास भी ना होने देना चाहिये कि आपको इसकीं जानकारी भी है।

सदैव प्रसन्न रहिये🌳🌳
जो प्राप्त है-पर्याप्त है🌳🌳

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🌻🌺🌻🌺🌻🌺🌻

👉🏿जीवन का मूल्य

एक राजा का जन्म दिन था । सुबह जब वह घूमने निकला तो उसने तय किया कि वह रास्ते में मिलने वाले सबसे पहले व्यक्ति को आज पूरी तरह से खुश व सन्तुष्ट करेगा ।

उसे एक भिखारी मिला । भिखारी ने राजा सें भीख मांगी तो राजा ने भिखारी की तरफ एक तांबे का सिक्का उछाल दिया । सिक्का भिखारी के हाथ सें छूट कर नाली में जा गिरा । भिखारी नाली में हाथ डालकर तांबे का सिक्का ढूंढने लगा ।
राजा ने उसे बुलाकर दूसरा तांबे का सिक्का दे दिया । भिखारी ने खुश होकर वह सिक्का अपनी जेब में रख लिया और वापिस जाकर नाली में गिरा सिक्का ढूंढने लगा ।

राजा को लगा कि भिखारी बहुत गरीब है । उसने भिखारी को फिर बुलाया और चांदी का एक सिक्का दिया ।

भिखारी ने राजा की जय-जयकार करते हुये चांदी का सिक्का रख लिया और फिर नाली में तांबे वाला सिक्का ढूंढने लगा ।
राजा ने उसे फिर बुलाया और अब भिखारी को एक सोने का सिक्का दिया ।
भिखारी खुशी से झूम उठा और वापिस भागकर अपना हाथ नाली की तरफ बढाने लगा ।

राजा को बहुत बुरा लगा । उसे खुद से तय की गयी बात याद आ गयी कि “पहले मिलने वाले व्यक्ति को आज खुश एवं सन्तुष्ट करना है ।”

उसने भिखारी को फिर से बुलाया और कहा कि मैं तुम्हें 1000 अशर्फियाॅ देता हूँ । अब तो खुश व सन्तुष्ट हो जाओ ।
भिखारी बोला – “सरकार ! मैं तो खुश और संतुष्ट तभी हो सकूँगा, जब नाली में गिरा हुआ तांबे का सिक्का भी मुझे मिल जायेगा ।”

हमारा हाल भी उस भिखारी जैसा ही है । हमें परमात्मा ने मानव रुपी अनमोल खजाना दिया है और हम उसे भूलकर संसार रुपी नाली में तांबे के सिक्के निकालने के लिए जीवन गंवाते जा रहे हैं । “इस अनमोल मानव जीवन का हम सही इस्तेमाल करें, हमारा जीवन धन्य हो जायेगा

🌻🌺🌻🌺🌻🌺🌻

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

💥🌳सुप्रभात🌳💥

💐खुद को बदल दो समाज खुदबखुद बदल जायेगा💐

एक सन्यासी ने देखा एक छोटा बच्चा घुटने टेक कर चलता था, धूप निकली थी, बच्चे की छाया आगे पड़ रही थी, बच्चा छाया में अपने सिर को पकड़ने के लिए हाथ ले जाता लेकिन जब हाथ पहुँचता तो छाया आगे बढ़ जाती।

बच्चा रोने लगा, माँ उसे समझाने लगी पर बच्चे कब समझ सकते हैं।

सन्यासी ने कहा, बेटे रो मत, छाया पकड़नी है?

सन्यासी ने बच्चे का हाथ पकड़ा और उसके सिर पर रख दिया, हाथ सिर पर गया, उधर छाया के ऊपर भी सिर पर हाथ गया।

सन्यासी ने कहा, देख, पकड़ ली तूने छाया। छाया कोई सीधा पकड़ेगा तो नहीं पकड़ सकेगा लेकिन अपने को पकड़ लेगा तो छाया पकड़ में आ जाती है।

ऐसे ही जो काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार को पकड़ने को लिए दौड़ता है वह इनको कभी नहीं पकड़ पाता, यह मात्र छाया हैं लेकिन जो आत्मा को पकड़ लेता है, विकार उसकी पकड़ में आ जाते हैं।

खुद को बदल दो समाज खुदबखुद बदल जायेगा

सदैव प्रसन्न रहिये🌳🌳
जो प्राप्त है-पर्याप्त है🌳🌳

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

सरस्वती के भाई…
.
अयोध्या के बहुत निकट ही पौराणिक नदी कुटिला है – जिसे आज टेढ़ी कहते हैं, उसके तट के निकट ही एक भक्त परिवार रहता था।
.
उनके घर एक सरस्वती नाम की बालिका थी। वे लोग नित्य श्री कनक बिहारिणी बिहारी जी का दर्शन करने अयोध्या आते थे।
.
सरस्वती जी का कोई सगा भाई नही था, केवल एक मौसेरा भाई ही था। वह जब भी श्री रधुनाथ जी का दर्शन करने आती, उसमे मन मे यही भाव आता की सरकार मेरे अपने भाई ही है।
.
उसकी आयु उस समय मात्र दो वर्ष की थी। रक्षाबंधन से कुछ समय पूर्व उसने सरकार से कहा की मै आपको राखी बांधने आऊंगी।
.
उसने सुंदर राखी बनाई और रक्षाबंधन पूर्णिमा पर मंदिर लेकर गयी। पुजारी जी से कहा कि हमने भैया के लिए राखी लायी है।
.
पुजारी जी ने छोटी सी सरस्वती को गोद मे उठा लिया और उससे कहा कि मै तुम्हे राखी सहित सरकार को स्पर्श कर देता हूं और राखी मै बांध दूंगा।
.
पुजारी जी ने राखी बांध दी और उसको प्रसाद दिया। अब हर वर्ष राखी बांधने का उसका नियम बन गया।
.
समय के साथ वह बड़ी हो गयी और उसका विवाह निश्चित हो गया। वह पत्रिका लेकर मंदिर में आयी और कहा की मेरा विवाह निश्चित हो गया है, मै आपको न्योता देने आई हूं। चारो भाइयो को विवाह में आना ही है।
.
पुजारी जी को पत्रिका देकर कहा कि मैंने चारो भाइयों से कह दिया है, आप पत्रिका सरकार के पास रख दो और आप भी कह दो की चारो भाइयों को विवाह में आना ही है। ऐसा कहकर वह अपने घर चली गयी।
.
विवाह का दिन आया। अवध में एक रस्म होती है कि विवाह के बाद भाई आकर उसको चादर ओढ़ाता है और कुछ भेट वस्तुएं देता है।
.
उसकी मौसी ने अपने लड़के को कुछ सामान और ११ रुपये दिए और मंडप में पहुंचने को कहकर वह चली गयी।
.
उसका मौसेरा भाई उपहार, वस्त्र और ११ रुपये लेकर रिक्शा पर बांध कर विवाह मंडप की ओर निकल पड़ा।
.
रास्ते मे ही रिक्शा उलट गया और वह गिर गया। थोड़ी सी चोट आयी और लोगो ने उसको दवाखाने ले जाकर मलम पट्टी कराई।
.
यहां सरस्वती जी घूंघट से बार बार मंडप के दरवाजे पर देख रही है और सोच रही है कि सरकार अभी तक क्यो नही आये।
.
उसको पूरा विश्वास है कि चारो भाई आएंगे। माँ से भी कह दिया कि ध्यान रखना अयोध्या जी से मेरे भाई आएंगे – माँ ने उसको भोला समझकर हंस दिया।
.
जब बहुत देर हो गयी तब व्याकुल होकर वह दरवाजे पर जाकर रोने लगी। दूर दूर के रिश्तेदार आ गए पर मेरे अपने भाई क्यो नही आये ? क्या मैं उनकी बहन नही हूं ?
.
उसी समय ४ बड़ी मोटर गाड़िया और एक बड़ा ट्रक आते हुए उसने देखा। पहली गाड़ी से उसकी मौसी का लड़का और उसकी पत्नी उतरे। बाकी गाड़ीयों से और ३ जोड़िया उतरी।
.
मौसी के लड़के के रूप में सरकार ही आये है। रत्न जटित पगड़ियां, वस्त्र, हीरो के हार पहन रखे है।
.
श्री हनुमान जी पीछे ट्रक में समान भरकर लाये है, हनुमान जी पहलवान के रूप में आये थे।
.
उन्होंने ट्रक से सारा सामान उतारना शुरू किया – स्वर्ण, चांदी, पीतल, तांबे के बहुत से बर्तन। बिस्तर, सोफे, ओढ़ने बिछाने के वस्त्र, साड़ियां, अल्मारियाँ, कान, नाक, गले, कमर, हाथ, पैर के आभूषण।
.
मौसी देखकर आश्चर्य में पड़ गयी कि इतना कीमती सामान मेरा लड़का कहां से लेकर आया ?
.
चारो का तेज और सुंदरता देखकर सरस्वती समझ गयी कि यह मेरे चारो भाई है।
.
सरस्वती जी के आनंद का ठिकाना न रहा, उसका रोना बंद हो गया। सरकार ने इशारे से कहा कि किसीको अभी भेद बताना नही, गुप्त ही रखना।
.
इनका रूप इतना मनोहर था कि सब उन्हें देखते ही राह गए, कोई पूछ न पाया कि यह गाड़ियां कैसे आयी, ये अन्य ३ लोग कौन है ?
.
लोग हैरान हो कर देख रहे थे कि अभी तक रो रही थी, और अभी इतना हँस रही है और आनंद में नाच रही है। किसी को कुछ समझ नही आ रहा था।
.
जब तक उसकी विदाई नही हुई तब तक चारो भाई उसके साथ ही रहे। सभी गले मिले और आशीर्वाद दिया।
.
सरस्वती ने कहा – जैसे आज शादी में सब संभाल लिया वैसे जीवन भर मुझे संभालना।
.
जब वह गाड़ी में बैठकर पति के साथ जाने लगी तब चारों भाई अन्तर्धान हो गए।
.
उसी समय असली मौसेरा भाई किसी तरह लंगड़ाते हुए पट्टी लगाए हुए वहां आया। उसने वस्त्र ओढाया उपहार और ११ रुपये दिया।
.
मौसी ने पूछा कि अभी अभी तो तू बड़े कीमती वस्त्र पहने गाड़ी और ट्रक लेकर आया था ? ये पट्टी कैसे बंध गयी और कपड़े कैसे फट गए ? उसको तो कुछ समझ ही नही आ रहा था।
.
अंत मे सरस्वती से उसकी माता ने एकांत मे पूछा की बेटी सच सच बता की क्या बात है ? ये चारों कौन थे ?
.
तब उसने कहा की माँ ! मैने आपसे कहा था कि ध्यान रखना, मेरे भाई अयोध्या से आएंगे।
.
माँ समझ गयी की इसके तो ४ ही भाई है और वो श्रीरघुनाथ जी और अन्य तीन भैया ही है।
.
माँ जान गई कि श्री अयोध्या नाथ सरकार ही अपनी बहन के प्रेम में बंध कर आये थे और अपनी बहन को इतने उपहार, आभूषण और वस्तुएं दे गए कि नगर के बड़े बड़े सेठ, नवाबो के पास भी नही थे। 🙏🙏 (जय श्री राम)🙏🙏

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

Om Bhaskaraye namah Ji
Om suryaye namah ji

दो छोटे लड़के घर से कुछ दूर खेल रहे थे।
खेलने में वे इतने मस्त थे कि उन्हें पता ही नहीं चला कि वे भागते-भागते कब एक सुनसान जगह पहुँच गए। उस जगह एक पुराना कुंवा था , और उनमे से एक लड़का गलती से उस कुवें में जा गिरा।

“बचाओ-बचाओ”,
वो चीखने लगा।

दूसरा लड़का एकदम से डर गया और मदद के लिए चिल्लाने लगा , पर उस सुनसान जगह कहाँ कोई मदद को आने वाला था। फिर लड़के ने देखा कि कुंएं के करीब ही एक पुरानी बाल्टी और रस्सी पड़ी हुई है ,
उसने तेजी दिखाते हुए तुरंत रस्सी का एक सिरा वहां गड़े एक पत्थर से बाँधा और दूसरा सिरा नीचे कुएं में फेंक दिया। कुएं में गिरे लड़के ने रस्सी पकड़ ली, अब वह अपनी पूरी ताकत से उसे बाहर खींचे लगा,
अथक प्रयास के बाद वे उसे ऊपर तक खींच लाया और उसकी जान बचा ली।

जब गांव में जाकर उन्होने यह बात बताई तो किसी ने भी उन पर यकीन नही किया।
एक आदमी बोला-तुम एक बाल्टी पानी तो निकाल नही सकते, इस बच्चे को कैैसे बाहर खींच सकते हो; तुम झूठ बोल रहे हो।
तभी एक बुजुर्ग बोला-यह सही कह रहा हैं क्योंकि वहां पर इसके पास कोई दूसरा रास्ता नही था ,
और वहां इसे कोई यह कहने वाला नही था कि ‘तुम ऐसा नही कर सकते हो’।

मित्रों , जीवन में अगर सफलता चाहते हो तो उन लोगो की बात मानना छोड दो जो यह कहते हैं कि तुम इसे नही कर सकते।
संसार में अधिकतर लोग इसलिए सफल नही हो पाते क्योंकि वे ऐसे लोगो की बातों में आ जाते हैं जो ना तो खुद सफल होते हैं और ना इस बात में विश्वास करते हैं कि दूसरे सफल हो सकते हैं । इसलिए अपने दिल की सुनें ,आप सब कुछ कर सकते हैं जो आप करना चाहते हैं, आपको भगवान ने विशिष्ट शक्तियों के साथ पैदा किया हैं, अतः स्वयं पर संशय करना छोड़ें और सफलता की और बढ़ चलें
Om Bhaskaraye namah Ji

माधव गोयल

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

💟अद्भुत संदेश है इस कहानी में💟
एक बार एक व्यक्ति की उसके बचपन के टीचर से मुलाकात होती है । वह उनके चरण स्पर्श कर अपना परिचय देता है।
वे बड़े प्यार से पुछती है, ‘अरे वाह, आप मेरे विद्यार्थी रहे है, अभी क्या करते हो, क्या बन गए हो ?’

‘ मैं भी एक टीचर बन गया हूं ‘ वह व्यक्ति बोला,’ और इसकी प्रेरणा मुझे आपसे ही मिली थी जब में 7 वर्ष का था।’

उस टीचर को बड़ा आश्चर्य हुआ, और वे बोली कि,’ मुझे तो आपकी शक्ल भी याद नही आ रही है, उस उम्र में मुझसे कैसी प्रेरणा मिली थी ??’

वो व्यक्ति कहने लगा कि ….

‘यदि आपको याद हो, जब में चौथी क्लास में पढ़ता था, तब एक दिन सुबह सुबह मेरे सहपाठी ने उस दिन उसकी महंगी घड़ी चोरी होने की आपसे शिकायत की थी।
आपने क्लास का दरवाज़ा बन्द करवाया और सभी बच्चो को क्लास में पीछे एक साथ लाइन में खड़ा होने को कहा था। फिर आपने सभी बच्चों की जेबें टटोली थी। मेरे जेब से आपको घड़ी मिल गई थी जो मैंने चुराई थी। पर चूंकि आपने सभी बच्चों को अपनी आंखें बंद रखने को कहा था तो किसी को पता नहीं चला कि घड़ी मैंने चुराई थी।
टीचर उस दिन आपने मुझे लज्जा व शर्म से बचा लिया था। और इस घटना के बाद कभी भी आपने अपने व्यवहार से मुझे यह नही लगने दिया कि मैंने एक गलत कार्य किया था।
आपने बगैर कुछ कहे मुझे क्षमा भी कर दिया और दूसरे बच्चे मुझे चोर कहते इससे भी बचा लिया था।’

ये सुनकर टीचर बोली, ‘ मुझे भी नही पता था बेटा कि वो घड़ी किसने चुराई थी।’

वो व्यक्ति बोला,’नहीं टीचर, ये कैसे संभव है ? आपने स्वयं अपने हाथों से चोरी की गई घड़ी मेरे जेब से निकाली थी।’

टीचर बोली…..
‘बेटा मैं जब सबके पॉकेट चेक कर रही थी, उस समय मैने कहा था कि सब अपनी आंखे बंद रखेंगे , और वही मैंने भी किया, मैंने स्वयं भी अपनी आंखें बंद रखी थी।’

मित्रो।।

किसी को उसकी ऐसी शर्मनाक परिस्थिति से बचाने का इससे अच्छा उदाहरण और क्या हो सकता है?

आइये प्रण करें की यदि हमें किसी की कमजोरी मालूम भी पड़ जाए तो उसका दोहन करना तो दूर, उस व्यक्ति को ये आभास भी ना होने देना चाहिये कि आपको इसकीं जानकारी भी है!